Hindi Sex Stories By raj sharma
02-26-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
हिंदी सेक्सी कहानियाँ

चिराग

मिसेज़. शाँतिलाल को जब मैने देखा तो देखता ही रह गया. 35 साल की मिसेज़ शाँतिलाल कहीं से भी 25 से ज़्यादा की नहीं लग रही थी. गुलाबी रंगत लिए सफेद रंग, लंबा क़द बड़ी बड़ी आँखें. तराशे हुए होन्ट जैसे अभी उन मे से रस टपक पड़ेंगा.

सुरहिदार गर्दन के नीचे उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ कसी हुई ब्लाउस से साफ झलक रही थीं. पतली कमर और फिर पीछे काफ़ी उभार लिए नितंब.

"उहह...हुउऊउ..." जब मिसेज़. शाँतिलाल को लगा कि मैं जल्दी होश मे नहीं आने वाला तो उस ने अपने गला को साफ करते हुवे मेरा ध्यान भंग किया, तब मैं ह्ड्बाडा कर इधर उधर देखने लगा.

"म...म...मैं हरीश हूँ, आपकी फॅक्टरी का नया मुलाज़िम हूँ, मुझे सेठ जी ने आपके पास भेजा है."

" मैं तो प्रिया हूँ. ग्लॅड टू सी यू." उस ने अपना खूबसूरत हाथ आगे बढ़ाया और मुझे कुच्छ हरकत करता नही पाकर खुद मेरा हाथ खींच कर पकड़ लिया."ओके....पर क्या हम गेट पर ही बातें करें या अंदर चलें..." वह हँसी और मैं उसकी हँसी मे खो चुका था.

"बेटा हारीश आज तेरी खैर नहीं, तू सही सलामत निकल ले." यह सब
सोचते हुए मैं प्रिया के पिछे चल पड़ा. चलते हुए उसके नितंबों की थिरकन देख कर मेरा तो बुरा हाल था.

मेरा जूनियर मेरे अंडरवेर के अंदर उच्छल-कूद कर रहा था. उसे देख कर तो मुर्दों के भी खड़ा हो जाते, मैं तो एक तंदुरुस्त और हंडसॉम नौजवान था.

सेठ शाँतिलाल के ऑफीस मे आस आन अकाउंट क्लर्क मैं ने हफ्ते भर पहले जाय्न किया था. मेरे काम से सेठ काफ़ी खुश था. आज मैं जैसे ही ऑफीस पहुँचा सेठ जी ने अपने चेंबर मे बुला लिया. "हरीश, तुझे बुरा ना लगे तो क्या तुम मेरा एक घरेलू काम कर सकते हो."

सेठ जी की इंसानियत के तो मैं ने काफ़ी चर्चे सुने थे और आज सेठ की बात सुन कर मुझे यकीन हो गया.

"आप हुक्म कीजिए सर, मैं ज़रूर करूँगा."

"तुम कोठी चले जाओ. तुम्हारी मालकिन यानी मिसेज़ शाँतिलाल को कुच्छ शॉपिंग करनी है. शाम को वहीं से अपने घर चले जाना.

मैं सेठ शाँतिलाल के बेडरूम मे बैठा सॉफ्ट-ड्रिंक पीते हुए कमरे का जायेज़ा ले रहा था. सेठ जी की वाइफ प्रिया मुझे यहीं सोफे पर बिठा कर बाथरूम मे घुस चुकी थी.

"हारिस...थोड़ा टवल दे देना...सामने रखा है.''

मैं टवल लेकर बाथरूम के दरवाज़े पर पहुँचा. गेट पर हल्का हाथ रखा ही था कि वह खुल गया. गाते खुलने से मैं लड़खराया और बॅलेन्स बनाने के लिए एक कदम बाथरूम के भीतर रखा.

मगर मेरा पैर वहाँ रखे सोप पर पड़ा और मैं फिसलता हुआ सीधा बाथरूम मे घुस गया, जहाँ प्रिया मात्र एक छ्होटी सी पॅंटी मे खड़ी थी. मैं उस से टकराया और उसे लेते हुए बाथरूम की फर्श पर गिरा.

मुझे तो कोई खास चोट नहीं आई पर प्रिया को शायद काफ़ी चोटें आई थी. वो लगातार कराहे जा रही थी. उसका नंगा बदन और उसे दर्द से कराहता देख कर समझ मे नहीं आ रहा था की क्या करूँ.

"प्लीज़....मुझे उठाओ"मुझे कुच्छ करता ना देख वो कराहती हुई बोली. मैं झट से उसे उठा लिया. आ मैं उस चिकने और रेशम जैसे नर्म बदन को अपनी गोद मे उठाए हुआ था.

उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ मेरे सीने से चिपकी हुई थीं. उसका भीगा हुआ चेहरा मेरे चेहरे से आधे इंच दूर था. उसकी साँसें मेरे नथुनो से टकरा रही थीं.

मुझे ना जाने क्या हुआ कि अपने होन्ट उसके गुलाबी होंटो पर रख दिए. मैं उसकी आँखों मे देख रहा था. उसकी आँखों मे मुझे हैरत भरी खुशी दिखाई पड़ी, जबकि चंद सेकेंड पहले उसकी आँखों मे केवल तकलीफ़ दिखाई दे रही थी.

"जब काफ़ी देर बाद मैं ने अपने होन्ट अलग किए तो वह हाँफ रही थी. उसके चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कुराहट थी. मैं तो अपने होश खो ही चुका था मगर उसकी नशीली मुस्कुराहट ने मुझे हौसला दिया.

मैं भूल गया था कि वह तकलीफ़ मे है. मेरे गुस्ताख
लब जैसे ही दुबारा आगे बढ़े अचानक उसने अपना हाथ आगे लाकर मुझे रोक दिया.

"बड़े जोशीले नौजवान हो तुम....लेकिन मैं तकलीफ़ मे हूँ.''उसी जानलेवा मुस्कुराहट के बीच वह बोली. मैं खुद को बुरा भला कहने लगा. उसे बेड पर ला कर धीरे से लिटा दिया.

वह अपने कूल्हे को पकड़ कर कराह रही थी.

"प्रिया जी मैं डॉक्टर को खबर करूँ?" उसके गोल गोल ठोस उभारो से बमुश्किल नज़रें हटाकर मैने पुछा.

"ओह्ह्ह.... नहीं...हारिस...तुम थोड़ी मालिश कर सकते हो?" मैं झट से तैयार हो गया. बेड के ड्रॉयर से मूव निकाल कर मैं मालिश करने पहुँच गया.

"मेरी पॅंटी गीली है....इसे प्लीज़ निकाल दो और पहले वह चादर मुझ पर डाल दो. ओह्ह्ह.."

मैने सामने हॅंगर पर रखा बारीक सा चादर उस पर डाल दिया, तब मुझे पता चला कि उसका हाहकारी जिस्म इस नाज़ुक सी चादर मे नहीं छुप सकता.

अब मुझे उस अप्सरा की पतली कमर के नीचे विशाल चूतदों से उसकी पॅंटी खिचना. मेरे होन्ट सुख रहे थे. चादर के भीतर उस का एक एक अंग पूरी आबो ताब के साथ चमक रहा था.

मैं ने धीरे से उसकी जाँघो के पास चादर मे अपने दोनों हाथ घुसाए. वो शांत पीठ के बल लेटी मेरे एक एक हरकत को देख रही थी. उसके चेहरे पर मंद मुस्कुराहट खेल रही थी. जब मेरी नज़र उसके मुस्कुराते लबों पर पड़ी तो मैं और भी नर्वस हो गया.

मेरी हाथों की लरज़िश साफ देखी जा सकती थी. आख़िर मेरी उंगली उसकी जाँघ च्छू गयी. क्या कहूँ उस रेशमी अहसास का. मेरी पूरी हथेली और उंगलियाँ उसकी जांघों से सॅट कर बहुत ही धीरे धीरे उपर की तरफ बढ़ रहे थे.

"उफफफफ्फ़....ओह्ह्ह" उसकी आवाज़ मे तकलीफ़ कम और मस्ती ज़्यादा थी. हथेलियों का सफ़र जारी था. इसी बीच मेरे दोनो अंगूठे जांघों की जोड़ पर रुक गये. जब मेरा उधर ध्यान गया तो मैं पसीने पसीने हो गया. गीली पॅंटी उसकी योनि से चिपक गयी यही. मेरे अंगूठे उसके
उभरी हुई योनि को ढके हुए थे. प्रिया की साँसें अचानक तेज़ चलने लगी थीं.

मैं अपने हाथो को और उपर सरकाते हुए पॅंटी की एलास्टिक तक पहुँच ही गया. "हारीश...जल्दी करो ना.." अपनी उठती गिरती साँसों के बीच कराहती आवाज़ मे बोली. मैं ने दोनो तरफ से एलएस्टिक मे उंगलियाँ डाल कर पॅंटी को नीचे खिचना शुरू किया.

"पता नहीं इतनी छ्होटी पॅंटी कैसे पहनती है." बड़ी मुश्किल से मैं उसे नीचे खींच रहा था. उसने अपनी चूतड़ उठा कर पॅंटी निकालने मे मेरी मदद की.

पारदर्शी चादर से उसके शरीर का एक एक कटाव सॉफ झलक रहा था. आज मैं ज़िंदगी मे पहली बार किसी जवान औरत को सर से पैर तक नंगा देख रहा था.

मेरे लिंग का तनाव बाहर से सॉफ पता चल रहा था जिसे च्छुपाने का कोई उपाए नहीं था.

मूव हाथ मे लेकर मैं बेड पर बैठ गया. टाइट जींस के कारण मुझे बैठने मे परेशानी को देख कर उसने मुझे पॅंट उतार कर बैठने को कहा. शरमाते, झिझकते मैं अपना पॅंट उतार कर बैठ गया. तभी वह पलट कर पेट के बल हो गयी साथ साथ
चादर सिमट कर एक साइड हो गयी और पीछे से उसका पूरा शरीर खुल गया.

उस ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने नितंब पर रखा और मालिश करने को कहा. काँपते हाथों से उसके पहाड़ से उभरे, चिकने और गोरे चूतदों पर मूव की मालिश करने लगा.

मेरा 8'' का लिंग अंडरवेर से बाहर निकलने को बेताब था. एक बार जब मेरी नज़र उस के चेहरे की तरफ गयी ती उसे मेरे लिंग के उभार की तरफ देखता पाकर शर्मा गया लेकिन कोई चारा नहीं था.

तभी उसी हालत मे लेटे लेटे एक हाथ मेरे लिंग के उभार पर रख दिया. मैं तो एकदम थर्रा गया.

"क्यों तकलीफ़ दे रहे हो ऐसे, बाहर निकाल दो." वह धीरे से वहाँ हाथ फेरते हुए बोली.

मुझे तो लग रहा था कि अब च्छुटा तब च्छुटा. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाता हुआ
बोला

"ये...ये आप क्या कर रही हैं?"
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अचानक वह उठी और मुझे धक्का दे कर बेड पर गिरा दी. मेरे बॉक्सर को तेज़ी के साथ निकल दी. मैं कुच्छ सोचता उस से पहले मेरा एरेक्ट लिंग अपने हाथों मे ले चुकी थी. मैं कुच्छ रेज़िस्ट करने की हालत मे नहीं था.

अचानक अपना सर झुका कर मेरे लिंग के छेद से निकल रहे प्रेकुं की बूँद को ज़ुबान से चाट लिया. उसी हालत मे अपनी ज़बान को लिंग की लंबाई मे उपर से नीचे की ओर ले गयी, फिर नीचे से उपर की ओर आई.

मेरे शरीर का सारा खून जैसे सिमट कर मेरे लिंग तक आ चुका था. मेरे लाख कोशिश के बाद भी मैं नहीं रुक सका और मेरे लिंग से वीर्य की तेज़ धार छूट पड़ी.

एक दो तीन....पता नहीं कितनी पिचकारियाँ निकली और उस का पूरा चेहरा मेरे वीर्य से भर गया.

उसके चेहरे पर खुशी भरी मुस्कान थी.

मैं काफ़ी शर्मिंदा था. जल्दी छूट जाने के कारण भी और अपने वीर्य से उसका चेहरा भर देने के कारण भी. मगर मैं करता भी क्या. मैं मजबूर था.

मेरी सोच को उसने पढ़ लिया और बोली.."यार...कितने दिन का जमा कर रखा था. इतनी जल्दी छूट पड़े. लगता है तुम ने कभी चुदाई नहीं की है. चलो आज मैं तुम्हें सब सिखा दूँगी." और वह खिलखिला कर हंस पड़ी.

उसने मेरी शर्ट और बनियान उतार दी. अब हम दोनो एक दूसरे के सामने पूरी तरह नंगे थे.

झरने के बाद मेरा जोश कुच्छ कम हो गया था और फिर से मैं झिझक रहा था. यह देख वो बोली "क्यों मुझे गोद मे उठा कर तो खूब किस करना चाह रहे थे अब क्या हुआ."

"प्रिया जी यह सब ठीक है क्या?"

"ठीक है या नहीं, मैं नहीं जानती...पर क्या मैं और मेरा यह गुलाबी रेशमी बदन तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या?" कहते हुए वो एक मस्त अंगड़ाई ली. उसकी चुचियों का उभार और बढ़ गया था. निपल्स और भी खड़े हो गये थे. अब चाहे जो हो मैं दिल की बात पर चलने को तैयार था.

"आप...आप की यह मस्त अंगड़ाई तो साधुओं की तपस्या भंग करने वाली है." और मैं ने उसे अपनी बाहों मे कस लिया. मेरे होन्ट उसके रसभरे होन्ट से जुड़ गये.

वो भी किस मे पूरा पूरा मज़ा ले रही थी. दोनों की ज़बाने एक दूसरे से उलझ रही थीं. अब मैं उसके गालों को चूमता हुआ दाएँ कान की लॉ तक गया. वह मस्ती मे मोन कर रही थी. फिर उसी तरह किस करता हुआ बाएँ कान की लॉ तक गया.

मेरा एक हाथ उसकी मस्त नितंबों को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी चुचियों से खेल रहा था. अयाया....क्या अहसास था.

मैं उसके गले पर अपने होतों का निशान छ्चोड़ता हुवा उन उन्नत पहाड़ियों तक पहुँचा. दोनो स्तनों के बीच की घाटी मे अपना मुँह डाल कर रगड़ने लगा.

मेरा लंड फिर से अपनी पूरी लंबाई को पा कर अकड़ रहा था और उसकी नाभि के आसपास धक्के मार रहा था. इन सब से वह इतना बेचैन हो गयी कि अपनी एक चूंची को पकड़ कर मेरे मुँह मे डाल दी. मैं बारी बारी से काफ़ी देर तक दोनों चुचियों को चूस चूस कर मज़े ले रहा था.

उसके मुँह से भी उफ़फ्फ़....आअहह....यअहह....चूऊवसो..और चूसो...जैसे शब्द निकल रहे थे. अब मैं चुचियों को छ्चोड़ कर नीचे बढ़ा. उस की नाभि बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. अपनी ज़ुबान उसमे डाल कर मैं उसे चूसने लगा. वह तो एक्सिटमेंट से तड़प
रही थी. जल्द ही मैं और नीचे बढ़ा.मेरे दोनों हाथ उसके चूतदों पर कस गये.

मेरे सामने उसका सबसे कीमती अंग क्लीन शेव्ड योनि थी. उसकी चूत तो किसी कुँवारी लड़की जैसी थी. अपनी दो उंगलियों की मदद से मैने उसके लिप्स खोले और अपना मुँह लगा दिया.

वहाँ तो पहले से ही नदियों जैसी धारा बह रही थी. उन्हें चूस कर साफ करता मैं अपनी ज़बान उसमे डाल दिया.

उसकी सिसकियाँ तेज़ से तेज़ होती जा रही थी. तभी उसने मेरे सर को ज़ोर से अपनी चूत पर दबा दिया और एक बार फिर झाड़ गयी.

"हारीश डार्लिंग अब आ जाओ, डाल दो अपना मूसल मारी चूत मे, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा....उफफफ्फ़."

मैं भी अब ज़्यादा देर नही करने की पोज़िशन मे था. उसे पीठ के बल लिटा कर उसके पैरों के बीच आ गया. उसने खुद अपनी दोनों जांघें फैला ली.

मैं अपने लंड के सुपादे को उसकी लव होल पर रखा ओर ज़ोर का धक्का मारा. लगभग 2'' लंड अंदर गया और साथ साथ वो ज़ोर से चीख पड़ी..."ओववव....माआंन्न.....मर गयी....ऊओह"

मुझे बड़ा ताज्जुब हुया कि वह वर्जिन लड़की की तरह कर रही थी. इसे मैं उसका नाटक समझ कर एक के बाद एक कई ज़ोरदार झटके लगा दिए. मेरे लंड मे काफ़ी जलन होने लगी थी.

उसकी चूत तो सचमुच किसी कुँवारी की तरह कसी हुई थी. वह दर्द से छॅट्पाटा रही थी और तेज़ तेज़ चीख रही थी. मैने उसकी चीखों को रोकने की कोशिश भी नहीं किया.

उसका अपना घर था.अपनी मर्ज़ी से छुड़वा. रही थी.

मैं अपना पूरा लंड अंदर डाल कर थोड़ी देर रुक गया और उसकी चुचियों और होन्ट को चूसने लगा. कुच्छ ही पलों मे वह रेलेक्स लगने लगी और अपनी गांद उठा कर हल्का झटका
दिया.

मैं समझ गया कि अब उसकी तकलीफ़ ख़त्म हो चुकी है. फिर तो मैं जो स्पीड पकड़ा कि उसकी तो नानी याद आ गयी. कितने तरह की आवाज़ें उसके मूह से निकल रही थी. कई बार वह झाड़ चुकी थी.

आख़िरकार मेरा भी वक़्त क़रीब आ गया. मैने अपने झटकों की रफ़्तार और तेज़ कर दी. दो चार मिनट के बाद मैं उसकी चूत मे झाड़ गया.

हम दोनो पसीने से तर हो चुके थे और हमारी साँसें तेज़ तेज़ चल रही थीं. दोनों अगल बगल लेट कर अपनी साँसें दुरुस्त करने लगे.

दस मिनट बाद वह उठी और ज़ोर से मुझसे लिपट गयी. मेरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी.

"हारीश...मेरी जान... आज तुमने मुझे वो खुशी दी है जिस से मैं आज तक अंजान थी.''

"मगर तुम तो शादी शुदा हो...फिर..?" और मुझे उसका चीखना चिल्लाना याद आ गया.
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02-26-2019, 09:31 PM,
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"मैं आज तक कुँवारी थी....और तुम...एक वर्जिन लड़के ने आज मेरा कुँवारापन ख़त्म किया है." और उस ने मेरे लंड की ओर इशारा किया.

मैने अपने लंड को देखा तो दंग रह गया. वह खून से सना हुवा था. उसकी चूत के आस पास भी खून था.

"तो..मतलब सेठ जी..."
"हां वो नमार्द है"

हम दोनों ने बाथरूम जाकर एक दूसरे की सफाई की. बाथरूम मे भी फर्श पर उसकी जम कर चुदाई की. वह एकदम मस्त हो गयी. फिर मैं कपड़े पहन कर चला गया.

यह सिलसिला कई माह तक चला. सेठ जी मुझे अपनी कोठी भेज दिया करते थे, जहाँ मैं तरह तरह से उनकी वाइफ प्रिया की चुदाई करता.

मेरी तरक्की भी हो चुकी थी और मैं अपने ऑफीस की ही एक सुंदर सी लड़की से शादी कर चुका था.

मेरी जाय्निंग के 9 महीना बाद मैं अपनी वाइफ के साथ उनकी कोठी मे एक फंक्षन मे शामिल था. सेठ जी के अंधेरे घर मे उनका चिराग आ चुका था. प्रिया ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया था. ना जाने क्यों मैने अपनी वाइफ को उस बच्चे के पास नहीं जाने दिया.


समाप्त
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शर्त

अलार्म की आवाज़ लगातार तेज़ होती जा रही थी ………श्वेता ने आँखे खोली और फिर इधर-उधर देखा ….साइड टेबल पर रखी अलार्म घड़ी बज रही थी …उसने हाथ बढ़कर अलार्म ऑफ किया और फिर से तकिये में मूह छिपा लिया ….5 मिनिट बाद वो उठी और आँखे मालती हुई बाथरूम में घुस गयी …….

श्वेता , उमर 26 साल , लंबा कद , प्रोफेशनल मॉडेल्स जैसा जिस्म….एक एमएनसी में जॉब करती थी , उसके पेरेंट्स गाँव में ही थे और वो यहाँ , शहर में , इस फ्लॅट में अकेली रहती थी ….

1 घंटे बाद वो बाथरूम से बाहर आई और किचन में घुस गयी ….उसने एक कप चाय बनाई और फिर चेर पर बैठ कर चाय पीने लगी … उसने सामने एक न्यूज़ पेपर खोला हुआ था और बड़े इतमीनान से उसे पढ़ रही थी ……फिर अचानक उसे कुच्छ याद आया ….वो उठी और एक साइड में रखे हुए फोन को उठा कर अपने पास ले आई …….उसके फोन में वाय्स मेसेज रेकॉर्डिंग सिस्टम था……उसने रेकॉर्डर को ऑन किया और चाय पीते पीते कल के मेसेजस को सुन-ने लगी …….

कुच्छ मेसेजस उसके फ्रेंड्स के थे …..कुच्छ अड्वर्टाइज़िंग कंपनीज़ के थे , जो स्कीम्स ऑफर कर रहे थे ……और फिर एक मेसेज शुरू हुआ , जिसने उसको चाय की चुस्किया छ्चोड़ने पर मजबूर कर दिया ………

यह उसके बाय्फ्रेंड राहुल का मेसेज था ……

" हाई श्वेता …कैसी हो …मुझे मालूम है कि तुम सुबह सुबह सारे मेसेजस सुनती हो , और ना चाहते हुए भी मुझे तुम्हारा मूड ऑफ करना पड़ रहा है ….पर क्या करूँ जान , बात ही कुच्छ ऐसी है … ……..एक बात है जो मैं तुम से बहुत दिनो से कहना चाह रहा था….मैं डिसाइड नही कर पा रहा था कि तुमको बताऊं या नही …..फिर मैने आज पूरी हिम्मत कर के तुमको सब कुच्छ बताने का डिसिशन लिया है….श्वेता , मैने तुम्हारे साथ पूरी तरह से ईमानदार नही हूँ .."

सुनते ही उसके हाथ काँपने लगे , उसने फोन को हाथों में उठा लिया और उसको घूर्ने लगी , जैसे उसको विश्वास ही ना हो रहा हो कि जो वो सुन रही है, वो सही है या ग़लत .....राहुल की आवाज़ अभी भी आ रही थी

" पिच्छले हफ्ते मैं ऑफीस टूर पर पुणे गया था , वहाँ मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई थी …सोनाली नाम है उसका और हमारी पुणे ब्रांच में जॉब करती है … वहाँ ऑफीस की एक पार्टी थी , जिसमें मैं और वो दोनो साथ साथ ही रहे , फिर उसने ही मुझे मेरे होटेल ड्रॉप किया …….मुझे नही मालूम कि मुझे क्या हुआ था….पर …पर…रात में …हम दोनो एक साथ ...…यू कॅन अंडरस्टॅंड वॉट आइ मीन …उस रात मैं बहक गया श्वेता और फिर सुबह मुझे एहसास हुआ कि मैने क्या ग़लती कर दी ……………….मेरे अंदर हिम्मत नही है कि मैं अब कभी तुम्हारा सामना कर पाऊँ …. इसलिए मैं तुम्हारी ज़िंदगी से दूर जा रहा हूँ …..हमेशा के लिए ……मैं तुमसे माफी माँगना चाहता हूँ और कोशिश करना अगर तुम मुझे भुला सको .."

राहुल की आवाज़ आनी अब बंद हो चुकी थी पर श्वेता की आँखों से आँसू बहने लगे थे ……....वो समझ नही पा रही थी कि क्या करे …..राहुल और वो , पिच्छले 2 साल से एक दूसरे के साथ थे …..उसने तय कर लिया था कि वो राहुल को ही अपना जीवन साथी बनाएगी………..और जल्द ही अपने पेरेंट्स से मिलवाने का भी उसका इरादा था……..पर अभी जो कुच्छ उसने सुना ,उसके बाद मानो उसके सारे सपने बिखर से गये थे ……..

अगले 2 घंटे तक वो सिर्फ़ 2 काम करती रही ……..बार बार राहुल का मोबाइल नंबर ट्राइ करती , जो लगातार स्विच्ड ऑफ आ रहा था……फिर आँसू बहाने बैठ जाती ….और फिर राहुल का नंबर ट्राइ करने लगती ………..

और आख़िर में उसने एक बार तय किया कि वो राहुल के फ्लॅट पर जाकर उस से मिलेगी , फिर अचानक उसका स्वाभिमान जाग उठा …..उसके अंदर से आवाज़ आई ... उससे भला क्यों जाना चाहिए ?…क्या सिर्फ़ वही राहुल से प्यार करती थी ?…..ग़लती राहुल ने की है ….वो उसकी ग़लती को माफ़ कर सकती है , पर अगर वो खुद उसके पास माफी माँगने आएगा ……

फिर वो तय्यार हुई और ऑफीस के लिए चल दी …….. थोड़ी देर बाद ही वो अपने ऑफीस में पहुच चुकी थी …..वो एक इन्षुरेन्स कंपनी में काम करती थी …ऐज ए मार्केटिंग मॅनेजर……. ऑफीस पहुँच कर वो अपने काम में लग गयी ……पर थोड़ी थोड़ी देर बाद ही उसको राहुल की बात याद आ जाती थी , और फिर उसका दिल भारी होने लगता था ……..

किसी तरह दो-पहर तक का टाइम उसने काटा …….बीच बीच में वो राहुल का नंबर भी ट्राइ करती रही , पर हर बार मोबाइल स्विच्ड ऑफ ही मिला ……….

लंच के बाद उसने वापस घर जाने का फ़ैसला किया …..अभी वो सीट से उठने की तय्यारी ही कर रही थी कि उसके कॅबिन का दरवाज़ा खुला और संजय अंदर आता दिखाई दिया ……संजय , उसका कोलीग था…….जाने कितनी ही बार संजय उस से फ्लर्ट करने की कोशिश कर चुक्का था , पर हर बार बेचारे को मायूसी ही हाथ लगी थी …….वो एक शानदार पर्सनॅलिटी का मालिक था …पर दो बातें थी जो श्वेता को उसके पास जाने से रोकती थी ……एक तो उसका राहुल के लिए कमिटमेंट , और दूसरी संजय की प्लेबाय इमेज ………..

" हाई श्वेता ……..क्या हुआ यार , आज बहुत जल्दी जा रही हो … "

" हां …कुच्छ तबीयत सही नही लग रही है "

" हे …वॉट हॅपन्स ? एवेरी थिंग ईज़ ऑलराइट ना ? "

" इट्स ओके संजय ……बस ऐसे ही , सर में हल्का सा दर्द है …"

" पर तुम शायद भूल गयी ……आज ऑफीस की हाफ यियर्ली सेल्स मीटिंग है "

" ओह्ह्ह ….हां यार , मैं तो सच में भूल गयी थी …..क्या मेरा जाना ज़रूरी है ? "

"ऑफ कोर्स यार .तुम्हारे बगैर मीटिंग कैसे हो सकती है …."

श्वेता कुच्छ देर सोचती रही ..फिर बोली " ठीक है …मैं टाइम पर पहुँच जाऊंगी "

फिर वो ऑफीस से बाहर निकली और घर की तरफ चल दी ……उनके ऑफीस की हाफ यियर्ली मीटिंग किसी बड़े होटेल में होती थी ……पहले मीटिंग , उसके बाद डिन्नर ,और लास्ट में पार्टी …..

घर पहुँच कर उसने थोड़ी देर आराम किया और फिर तय्यार होने लगी ……..शाम को 6.30 बजे अपने घर से निकली और 7.15 बजे होटेल रीजेन्सी पहुँच गयी ……

मीटिंग पूरे 2 घंटे चली ……हमेशा की तरफ श्वेता और उसकी टीम को एक अवॉर्ड भी मिला ….बेस्ट पर्फॉर्मेन्स के लिए ……..फिर उसके बाद डिन्नर ……
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02-26-2019, 09:31 PM,
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डिन्नर का अरेंज्मेंट होटेल के क्लब एरिया में किया गया था…….हॉल में हल्की हल्की लाइट्स थी ….बीच में डॅन्स फ्लोर और चारो तरफ टेबल्स पर डिन्नर का अरेंज्मेंट …..

जैसे जैसे रात गहराती जा रही थी ……माहौल रोमानी होता जा रहा था…कंपनी के सीनियर ऑफिसर्स जा चुके थे , और कुच्छ यंग एंप्लायीस ही वहाँ रह गये थे …..डॅन्स के साथ साथ अब शराब का दौर भी शुरू हो चुक्का था …..श्वेता भी कभी कभी ड्रिंक कर लेती थी , पर लिमिट में ……

संजय उसके पास आया और उसको डॅन्स करने के लिए ऑफर किया …….उसने सोचा और फिर अपना हाथ बढ़ा दिया ………अगले ही पल वो दोनो डॅन्स फ्लोर पर एक साथ नाच रहे थे ……..क्लब के माहौल में अब गर्मी आती जा रही थी ……अधिकतर लोगो ने अब कॉर्नर्स तलाश करने शुरू कर दिए थे …….सभी लोग अब जोड़ो की शकल में दिखाई पड़ रहे थे ………हाथ में हाथ , और कुछ के होंठो मिले हुए होंठ ……..

श्वेता ने भी धीरे धीरे 4 पेग लगा लिए थे …..उसके कदम अब लड़खड़ा रहे थे …..संजय भी इस बात को समझ रहा था ….और उसको सहारा देने के बहाने , उसके शरीर पर अपने हाथो को दौड़ा रहा था ….

कुच्छ शराब का सरूर, कुच्छ माहौल का असर और कुच्छ राहुल की बेवफ़ाई का दर्द ….श्वेता आज कुच्छ देर के लिए अपने आप को भुला देना चाहती थी …..रात के 11 बज चुके थे …….धीरे धीरे हॉल खाली होने लगा था ….और फिर संजय ने भी उसको ऑफर दिया , घर तक ड्रॉप करने का ……..उसने तुरंत हां कर दी …….

हॉल से बाहर निकलते समय संजय ने एक हाथ से उसको कमर से थामा हुआ था ….और दूसरा हाथ उसकी बेसुधि का फ़ायडा उठा रहा था……..

संजय ने उसको सहारा देकर गाड़ी में बैठाया……फिर कुच्छ देर बाद दोनो श्वेता के घर पहुँच गये …….फिर संजय ने ही उसको गाड़ी से नीचे उतारा ……और उसके फ्लॅट तक लेकर आया …….वो अब तक अपने होश खोने लगी थी ….उसने फ्लॅट में आकर संजय को गुड नाइट किया और अपने रूम में आ गयी …..पर संजय को शायद पता था कि उसको ऐसा मौका फिर से नही मिलने वाला …..वो फ्लॅट से बाहर नही गया और उसके पीछे पीछे ही अंदर आ गया ……

श्वेता अपने बेडरूम में आई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गयी ……..उसको मिरर में दिखाई पड़ रहा था कि संजय उसके पीछे आकर खड़ा हो गया है …….संजय ने धीरे से उसकी कमर में हाथ डाल दिया और उसके कंधे को चूमना शुरू कर दिया……उसका एक हाथ उसके पेट पर , उकी शर्ट और स्कर्ट के बीच में खाली जगह पर घूमने लगा ……श्वेता चाह रही थी वो अपना हाथ रोक ले , पर जाने क्ये बात थी जो उसके दिल की बात ज़ुबान पर नही आ पा रही थी ….

संजय का एक हाथ अब उसकी शर्ट के बटन्स खोलने लगा ……श्वेता के मूह से धीमी आवाज़ में बस इतना ही निकल पाया " प्लीज़ संजय ……..ऐसा मत करो "


नशे का असर था जो उसकी आवाज़ को और ज़्यादा मादक बना रहा था….और संजय पर इसके उल्टा असर हुआ…….उसने जल्दी से शर्ट के सारे बटन्स खोल डाले और उसको श्वेता के शरीर से अलग कर दिया …….एक हाथ को वो नीचे ले गया और उसकी स्कर्ट में डाल दिया ………फिर दूसरे हाथ को उसने श्वेता की ब्रा अलग करने पर लगा दिया …….2 मिनिट से भी कम समय में श्वेता बिल्कुल नंगी शीशे के सामने खड़ी थी ……..संजय का एक हाथ उसकी चूचियों को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी जांघों में घुसा हुआ कमाल दिखा रहा था

संजय उसको उठा कर बेड पर ले आया…….श्वेता को धुँधला सा दिखाई पड़ रहा था की संजय बेड के सामने खड़ा अपने कपड़े निकाल रहा था ……..उसने अपनी आँखें फिर से बंद कर ली

फिर उसको महसूस हुआ कि संजय ने उसके दोनो पैरो को अलग अलग कर दिया और उके बीच में आकर लेट गया ……फिर उसने उसके गालो और होंठो पर चुंबनो की झड़ी सी लगा दी …

श्वेता को महसूस हो रहा था की जो भी कुच्छ हो रहा है , वो ग़लत है …..उसका दिमाग़ उसके साथ था , पर उसका जिस्म उसका साथ नही दे रहा था…….संजय के चुंबनो के साथ वो पिघलती जा रही थी …..संजय के होंठ अब उसके निपल्स को चूस रहे थे ……और फिर उसके पेट से होते हुए उसके सबसे नाज़ुक अंग तक पहुँच गये ……संजय ने उसके पैरो को मोड कर , थोडा सा और फैला दिया ….और फिर उसकी जांघों के बीच अपना मूह घुसा दिया…….उसकी जीभ अब , श्वेता की चूत पर घूमने लगी और फिर उसकी दोनो पंखुड़ियों को फैला कर अंदर घुस गयी …….

श्वेता के शरीर ने के झटका खाया और फिर उसने अपने अंदर कुच्छ पिघलता हुआ सा महसूस किया .………संजय की जीभ अभी भी अपना कमाल दिखा रही थी और श्वेता के हाथ नीचे जाकर संजय के बालो में घूमने लगे थे ……..

2 मिनिट बाद ही संजय अपनी जगह से उठा और फिर उसकी जांघों के बीचे में आकर घुटनो के बल बैठ गया ……उसको एक सख़्त सी चीज़ , अपने सबसे कोमल अंग पर चुभती हुई महस्सूस हुई ……उसने एक बार अपनी जांघों को आपस में मिलाने की कोशिश की … राहुल के अलावा पहली बार वो किसी आदमी के सामने इस तरह नंगी हुई थी ……..फिर उसको राहुल की बात याद आ गयी ……..उसने मन ही मन राहुल को एक बार ज़ोर दार गाली दी …और फिर अपने शरीर को ढीला छ्चोड़ दिया ……….

संजय ने इशारा पाते ही अपने आप को आगे बढ़ा दिया ……. वैसे भी वो पहले से ही गीली हो चुकी थी , इसलिए उसको कोई परेशानी नही हुई ……..3-4 धक्को में ही वो उसके अंदर पूरा समा चुक्का था …………अपनी गर्दन नीचे को झुका कर उसने श्वेता की चूचियों को मूह में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया………….श्वेता के हाथ भी उसकी पीठ पर घूम रहे थे , और अपने पैरो को वो उसकी कमर पर लपेटने की कोशिश कर रही थी …………..उसकी कमर ऊपर को उचकने लगी …..हर धक्के पर उसके मूह से सिसकारी फुट रही थी ….. और फिर दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये , और शरीर पूरा ज़ोर लगाने लगे , एक दूसरे में समा जाने के लिए

पूरी रात उस कमरे में यह खेल चलता रहा…..जब तक श्वेता को होश रहा, उसने संजय का पूरा साथ दिया …और फिर उसके होश खोते चले गये ,पर संजय पूरी रात , अलग अलग तरीक़ो से …..उसके जिस्म को मसलता रहा……..

सुबह उसकी आँख देर से खुली ……उसका सर दर्द से फटा जा रहा था…….थोड़ी देर तो उसको अपनी हालत समझने में ही लग गयी ….संजय वहाँ नही था , वो अब जा चुक्का था …..पर उसके अपने शरीर और बिस्तर की हालत बता रही थी की संजय ने रात उसकी हालत का पूरा फ़ायडा उठाया है ….

वो बिस्तर से उठी और बाथरूम में घुस गयी ………15 मिनिट बाद वो बाहर निकली , अपने लिए एक कप चाय बनाई …और रोज़ की तरफ चाय पीते हुए , न्यूज़ पेपर लेकर पढ़ने बैठ गयी ….

फिर थोड़ी देर बाद वो अपना फोन भी वहीं उठा कर ले आई …..उसने फोन का रेकॉर्डर ऑन किया और कल के सारे मेसेज सुन-ने लगी …

फिर से कुच्छ फ्रेंड्स के मेसेज ……एक मेसेज उसके पापा का भी था …..फिर अचानक उसको राहुल की आवाज़ सुनाई दी …..

" गुड मॉर्निंग जान ….मुझे मालूम है कि कल मेरा मेसेज सुन-ने के बाद तुम बहुत गुस्सा हुई होंगी …..मुझे गालियाँ भी दी होंगी …शायद थोड़ा सा रोई भी होंगी …..पर मैं क्या करता , मुझे तुमसे शर्त जो जीतनी थी …."

चाय पीते पीते श्वेता का हाथ रुक गया …राहुल आगे बोल रहा था


" तुम्हे याद हैं ना , पिच्छले महीने हमने शर्त लगाई थी …कि कौन पहले दूसरे को एप्रिल फूल बनाएगा … मैने तभी तय कर लिया था कि चाहे जो जाए , इस बार शर्त मैं ही जीतूँगा ……….मुझे पता है कि तुम्हे कल की तारीख याद नही होगी ……..देख लो , कल 1स्ट्रीट एप्रिल थी ………तुम एप्रिल फूल बन चुकी हो श्वेता …….और मैं शर्त जीत चुक्का हूँ ………हा हा हा हा "

श्वेता लगातार फोन को घूर रही थी ..वो समझ नही पा रही थी कि कैसे रिक्ट करे ……उसने कलंदर देखा…यह सही था कि वो शर्त हार चुकी थी ……पर यह भी सही था कि राहुल सिर्फ़ शर्त ही जीता था ………बाकी जो वो हारा था, उसको शायद एहसास भी नही था ……….

दा एंड
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02-26-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
चचेरी और फुफेरी बहन की सील--1

मेरा नाम राज है, मैं दिल्ली में रहता हूँ, मेरी आयु 35 वर्ष है, मैं सेहत में ठीक हूँ और स्मार्ट भी हूँ ! मैं आप सभी को अपने चाचा की लड़की की चुदाई और सील तोड़ने की एकदम सही अनुभव बता रहा हूँ।

मेरे एक चाचा मेरे साथ ही रहते हैं, उनकी एक लड़की है, उसका नाम ललिता है, मेरी चाची की मृत्यु हो चुकी है। मेरी बहन 18 वर्ष की है परन्तु उसका बदन काफी भरा हुआ है और वह जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है, हालांकि मेरी शादी हो गई है, पर उसको देख कर दिल में कुछ होने लगता था, जब मैं उसको खेलते हुए देखता, खेलने के दौरान उसके उभरते हुए दूध देखता तो मेरे दिल में सनसनी फ़ैल जाती थी, दौड़ने के दौरान जब गोल गोल चुनमूनियाँड़ ऊपर-नीचे होते तो मेरा लण्ड पैंट के अन्दर मचल उठता था और उसके साथ खेलने (सेक्स का खेल) के लिए परेशान करने लगता था।

क्या कमसिन खिलती हुई जवानी है इसकी ! मुझे अपनी पाँच वर्ष पुरानी बीवी तो बूढ़ी लगने लगती थी।

मैं तो जब भी अपनी बीवी को चोदता तो मुझे अपनी बहन का ही चेहरा नजर आने लगता था। हालांकि मेरी बहन मुझसे करीब सतरह वर्ष छोटी है, परन्तु मैं अपनी सेक्स भावनाओं पर काबू पाने में असमर्थ था।

चूंकि हम लोगों का सम्मिलित परिवार है इसलिए सब एक दूसरे के यहाँ आते जाते थे और एक ही घर में रहने के कारण कभी कभार कुछ ऐसा दिख जाता था कि…

एक दिन मुझे अपनी बहन को नहाते हुए देखने का मौका मिल गया।

हुआ यूँ कि मैं किसी काम से अपने चाचा के घर में गया, मैंने चाचा को आवाज़ दी पर कोई उत्तर न मिलने के कारण मैं अन्दर चलता चला गया, मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। तभी मुझे स्नानघर से पानी गिरने की आवाज़ आई।

मैंने फिर से चाचा को आवाज़ दी तो स्नानघर से ललिता की आवाज़ आई- भैया, पापा तो ऑफिस चले गए हैं।

मैंने कहा- अच्छा !

और वापस आने के लिए मुड़ गया किन्तु तभी मेरे मन में बसी वासना ने जोर मारा, मैंने सोचा कि ललिता कैसे नहा रही है, आज देख सकता हूँ क्योंकि चाचा के यहाँ कोई नहीं था और मौका भी अच्छा है।

मैंने स्नानघर की तरफ रुख किया और कोई सुराख ढूढने की कोशिश करने लगा, जल्दी ही मुझे सफलता मिल गई, मुझे दरवाजे में एक छेद नजर आ गया मैंने अपनी आँख वहाँ जमा दी।

अन्दर का नजारा देख कर मेरा रोम रोम खड़ा हो गया, अन्दर ललिता पूरी नंगी होकर फव्वारे का आनंद ले रही थी।

हे भगवान ! क्या फिगर है इसका ! बिल्कुल मखमली बदन, काले तथा लम्बे बाल, उभरती हुई चूचियाँ, बड़ी बड़ी आँखें, बिल्कुल गुलाबी होंठ और उसकी चुनमूनियाँ तो उफ़…. उभरी हुए फांकें और उसके आसपास हल्के हलके रोयें ! उसकी गाण्ड एकदम गोल और सुडौल ! भरी हुई जांघें !

इतना दखने के बाद मेरा तो बुरा हाल हो गया था, जब फव्वारे से उसके शरीर पर पानी गिर रहा था तो मोतियों की बूंदें ऐसे लग रही थी, मेरा तो हाल बुरा हो गया, मैंने बहुत कुंवारी लड़कियों को चोदा था पर इतनी मस्त लौंडिया मैंने कभी नहीं देखी थी।

तभी मैंने देखा कि ललिता अपनी चुनमूनियाँ और चूचियों में साबुन लगा रही है, इस दौरान वो अपनी चुनमूनियाँ में अपनी ऊँगली डालने की कोशिश कर रही थी।

मेरा लण्ड तो कठोर होकर पैंट के अन्दर छटपटा रहा था, मन में भी यही आ रहा था कि कैसे भी हो ललिता को अभी जाकर चोद दूँ।

क्योंकि आज के पहले जब मैं उसको कपड़ो में देख कर चोदने के सपने देखता था और आज नंगी देखने के बाद तो काबू कर पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था।

तभी मेरा मोबाइल बज गया, यह तो अच्छा हुआ कि मोबाइल वाईब्रेशन मोड में था और घंटी नहीं बजी।

खैर मोबाइल की वजह से मैं धरती पर वापस आ गया और चूंकि यह फ़ोन चाचा का ही था तो मुझे वहाँ से हटना पड़ा।

बाहर आकर मैंने फ़ोन उठाया, तो उधर से चाचा ने पूछा- तुम कहाँ हो?

मैंने कहा- अपने कमरे में हूँ।

तो बोले- राज, एक काम है।

मैंने कहा- बताइये !

तो वे बोले- आज मुझे ऑफिस से आने में देर हो जायेगी और ललिता को आज मैंने वादा किया था कि कुछ कपड़े दिलाने बाज़ार ले जाऊँगा, क्या तुम मेरा यह काम कर सकते हो?

मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने तुरंत कहा- चाचा जी आप परेशान न हों, मैं प्रिय को कपड़े दिला दूँगा।

और उधर से उन्होंने थैंक्स कह कर फ़ोन काट दिया।

इतने में मुझे बाथरूम का दरवाजा खुलने का अहसास हुआ, मैं तुरंत वहां से हट कर अपने कमरे में आ गया। मेरे दिमाग में योजना बननी शुरू हो गई कि कैसे मौके का फायदा उठाया जाए।

फिर मैं थोड़ी देर बाद ललिता के कमरे में गया, वो अपने बाल सुखा रही थी पंखे के सामने बैठ कर।

मुझे देखते ही तुरंत खड़ी हो गई।

मैंने कहा- ललिता कैसी हो?

वो बोली- ठीक हूँ भैया।

मैंने कहा- अभी चाचा जी का फ़ोन आया था, कर रहे थे कि आज तुमको शॉपिंग ले जाना था परन्तु आफिस में काम ज्यादा है, उन्हें देर हो जायेगी और तुमको शापिंग मैं करवा लाऊँ। उसने कहा- ठीक है भैया, कितने बजे चलेंगे?

मैंने कहा- तुम तैयार हो जाओ, हम लोग अभी निकलेंगे और दोपहर का खाना भी बाहर खायेंगे क्योंकि मेरी मम्मी बुआ के घर गई हैं और तुम्हारी भाभी (मेरी पत्नी चूंकि टीचर है) तो शाम तक आएँगी, आज मैं शॉपिंग के साथ तुमको पार्टी भी दूँगा।

उसके चेहरे पर चमक आ गई।

खैर मैंने 11 बजे के करीब उसको अपने स्कूटर पर बैठाया और निकल पड़ा बाजार जाने को !

मैंने स्कूटर एक बड़े मॉल में जाकर रोका, तो ललिता चौंक कर बोली- भैया, यहाँ तो बड़े महंगे कपडे मिलेंगे?

मैंने उससे कहा- तो क्या हुआ, महँगे कपड़े अच्छे भी तो होते हैं ! और फिर तुम इतनी सुन्दर हो, अच्छे कपड़ों में और ज्यादा सुन्दर लगोगी।

तो उसका चेहरा लाल हो गया।

मॉल के अन्दर जाकर कपड़े पसन्द करते समय वो मुझसे बार-बार पूछती रही- भैया, यह कैसा लग रहा है? वो कैसा है?

खैर चार जोड़ी कपड़े चुन करके वो ट्राई रूम में गई। ट्राई रूम थोड़ा किनारे बना था और उस समय माल में ज्यादा लोग थे भी नहीं, मैं ट्राईरूम के बाहर ही खड़ा हो गया।

वो पहन कर आती और मुझसे पूछती- यह कैसा लग रहा है? ठीक है या नहीं?

उसने वो चारों जोड़ी कपड़े पसन्द कर लिए।

उसके बाद मैंने पूछा- ललिता, और कुछ लेना है?

तो वो बोली- हाँ, मगर वो मैं अकेले ही ले लूंगी।मैंने सोचा ऐसा क्या है, खैर मैंने देखा कि वो महिला सेक्शन में जा रही थी।

उसने कुछ अंडर गारमेंट लिए और जल्दी से पैक करा लिए जब वो लौट कर मेरे पास आई तो मैंने कहा- मैंने तो देख लिया है।

तो वो शर्मा गई।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- तुम इनका ट्रायल नहीं दिखाओगी क्या?

तो वो और शरमा गई।

मैंने माहौल को सामान्य करते हुए कहा- मैं तो इसलिए कहा रहा था कि तुम्हारी भाभी को तो यह सब मैं ही ला कर देता हूँ, अगर तुम इसके लिए भी मुझसे कहती तो मैं तुमको अच्छी चीज दिला देता।

बात उसकी समझ में आ गई, वो बोली- भैया गलती हो गई।

मैंने कहा- चलो अभी चलते हैं।

मैं उसको महिला विभाग में ले गया और सेल्स गर्ल से विदेशी अंतर्वस्त्र दिखाने को कहा।

चूंकि ललिता थोड़ी देर पहले ही उससे कुछ अंतर्वस्त्र लाई थी, अतः उसने उसी नाप के अंतर्वस्त्र दिखाने लगी।

उन अंतर्वस्त्रों को देख कर ललिता के अन्दर की ख़ुशी मैंने उसके चेहरे से पढ़ ली, मैंने कहा- चलो जाओ और ट्राई करलो !

तो वो चेहरा घुमा कर हंसने लगी।

उसके बाद मैंने उसको मुख-शृंगार का सामान भी दिलवाया अपनी पसंद से !

हालांकि वो मना कर रही थी पर मैंने कहा- यह मेरी तरफ से है।

यह सब खरीदने के बाद हम लोग वहीं एक रेस्तरां में गए। मुझे पता था कि इस समय रेस्तरां में ज्यादातर प्रेमी प्रेमिका ही आकर बैठते थे।

मैंने एक किनारे की सीट चुनी और हम दोनों उसी पर जाकर बैठ गए।

मैंने उससे पूछा- तुम क्या खाओगी?

तो वो बोली- जो आप मंगा लेंगें वही मैं भी खा लूंगी।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- अंतर्वस्त्र लेते समय तो यह ख्याल नहीं किया? और फिर मेरे कहने पर ट्राई भी नहीं किया?

तो वो शरमा गई और बोली- क्या भाभी आपकी पसंद से लेती हैं? और वो यहाँ पर ट्राई करके दिखाती हैं?

तो मैंने कहा- हाँ ! पसंद तो मेरी ही होती है पर ट्राई करके वो घर पर दिखाती है। क्या तुम मुझे घर पर दिखाओगी?

उसको कोई जवाब नहीं सूझा तो वो मेरा चेहरा देखते हुए बोली- हाँ दिखा दूँगी।

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। तभी वेटर आ गया और खाने का आर्डर ले गया।

खाना ख़त्म कर हम लोग करीब दो बजे घर आ गए, ललिता बहुत खुश लग रही थी क्योंकि उसको मेरे साथ शॉपिंग में कुछ ज्यादा ही अच्छा लगा।

शाम को उसने अपनी शॉपिंग का सामान मेरी माँ और बीवी को भी दिखाया पर अंतर्वस्त्र और शृंगार का सामान नहीं दिखाया।

क्रमशः..................
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02-26-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
चचेरी और फुफेरी बहन की सील--2

गतान्क से आगे..............

दूसरे दिन सुबह मेरी माता जी को कुछ काम से बाजार जाना था, मेरी बीवी स्कूल चली गई थी, मैं कल वाले समय पर ही चाचा जी के कमरे की तरफ चला गया और मैंने आज पहले ही निश्चय कर लिया था कि आज अपनी प्यारी सेक्सी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ की सील तोड़नी हैं।

इसलिए मैं केवल एक तौलिया बांधे था, मेरा अनुमान सही था, चाचा जी ऑफिस जा चुके थे और ललिता बाथरूम में नहा रही थी।

मैंने फिर से कल वाली पोजिशन ले ली, मैंने देखा कि आज ललिता की चुनमूनियाँ बिल्कुल चिकनी है, शायद उसने अपनी झांटें साफ़ की हैं नहाने से पहले। आज वो अपनी चुनमूनियाँ पर हाथ ज्यादा चला रही थी, उसकी चूचियाँ कड़ी कड़ी लग रहीं थी और आँखें बंद थी।

मेरा लण्ड ललिता की चुनमूनियाँ में घुसने के लिए मचला जा रहा था।

कुछ सोच कर मैं वहाँ से हट कर ललिता के कमरे में चला गया और ऐसी जगह बैठ गया कि वो मुझे कमरे में घुसते ही न देख पाए।

ललिता थोड़ी देर बाद कमरे में आई, वो अपने बदन को केवल एक तौलिये से ढके थी, कमरे में आते ही वो अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ गई और तौलिया हटा दिया।

उफ़ क्या मस्त लग रही थी मेरी बहना ! उसके शरीर पर यहाँ वहाँ पानी की बूंदें मोती की तरह लग रही थी, चुनमूनियाँ एकदम गुलाबी, चूचियाँ बिल्कुल कड़ी, उन्नत गाण्ड देख कर मेरी तो हालत ख़राब हो गई।

उसने कल वाले अंतर्वस्त्र उठा लिए, उनमे से एक को चुना और पैंटी को पहले पहनने लगी।

किन्तु उसको शायद वो कुछ तंग लगी, फिर उसने दूसरी पैंटी ट्राई किया मगर वही रिजल्ट रहा, अब उसने पैंटी छोड़ कर ब्रा उठाई लेकिन ब्रा में भी वही हुआ, उसकी चूचियाँ कुछ बड़ी लग रही थी, ब्रा भी फिट नहीं थी।

अब मुझसे बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था, मैंने अपनी जगह से खड़ा हो गया।

मुझे देख कर उसकी आँखें फट गई, वो इतना घबरा गई कि अपनी चुनमूनियाँ या अपनी चूची छिपाने का भी ख्याल नहीं आ पाया उसको !

बस फटी हुई आँखें और मुँह खुला रहा गया।

मैं धीरे से चल कर उसके पास गया और कहा- कल अगर मेरी बात मान लेती और ट्राई कर लेती तो तुमको आज यह परेशानी नहीं होती।

अब उसको कुछ समझ आया तो जल्दी से तौलिया उठाया और लपेटने के बाद मेरी तरफ पीठ करके पूछा- भैया, आप कब आये?

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा- मेरी सेक्सी बहना ! मैं तो तब से यहाँ हूँ जब तुम चाचा जी के रेजर से अपनी झांटें साफ़ कर रही थी।

मैंने ऐसे ही तुक्का मारा।

अब तो तौलिया उसके हाथ से छूटते बचा।

वो मेरी तरफ बड़े विस्मय से देखने लगी और मेरे चहरे पर मुस्कराहट थी क्योंकि मेरा तीर निशाने पर लग गया था।

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तुमने कुछ गलत थोड़े ही किया है जो डर रही हो? इतनी सुन्दर चीजों की साफ़ सफाई तो बहुत जरूरी होती है। अब तुम्हीं बताओ कि ताजमहल के आसपास अगर झाड़-झंखार होगा तो उसकी शान कम हो जायेगी न मेरी प्यारी बहना?

अब पहली बार वो मुस्कुराई और अपनी चुनमूनियाँ की तारीफ सुन कर उसके गाल लाल हो गए।

अगले पल ही वो बोली- खैर अब आपने ट्रायल तो देख ही लिया, अब आप बाहर जाइए तो मैं कपड़े तो पहन लूँ !

मैंने कहा- प्यारी बहना, अब तो मैंने सब कुछ देख ही लिया है, अब मुझे बाहर क्यूँ भेज रही हो?

वो बोली- भैया, आप भी बहुत शैतान हैं, कृपया आप बाहर जाइए, मुझे बहुत शरम आ रही है।

अचानक मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर डाले और हल्का सा झटका दिया तो वो संभल नहीं पाई और उसकी चूचियाँ मेरे नंगे सीने से आकर टकराईं क्योंकि मैंने भी केवल तौलिया ही पहना हुआ था।

मैंने अपने हाथों के घेरे को और कस दिया ताकि वो पीछे न हट सके और तुरंत ही अपने होंठों को उसके गुलाबी गुलाबी होंठों पर रख दिया।

मेरे इस अप्रत्याशित हमले से उसको सँभालने का मौका ही नहीं मिला और मैंने उसको गुलाबी होंठों का रस पीना शुरू कर दिया।

वो मेरी पकड़ से छुटने के लिए छटपटाने लगी मगर मुँह बंद होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी।

थोड़ी देर उसके कुवांरे होंठों को चूसते हुए मेरे हाथ भी हरकत में आ गए, मैंने अपना एक हाथ तौलिये के नीचे से उसकी सुडौल गाण्ड पर फेरना शुरू किया और फेरते फेरते तौलिये को खीँच कर अलग कर दिया।

अब एक 18 वर्ष की मस्त और बहुत ही खूबसूरत लौंडिया बिल्कुल नंगी मेरी दोनों बाँहों के घेरे में थी और मैं उसके कुँवारे होंठों को बुरी तरह से चूस रहा था, अब मेरा हाथ उसके गाण्ड के उभार से नीचे की तरफ खिसकने लगा, उसकी छटपटाहट और बढ़ रही थी, मेरा हाथ अब उसकी गाण्ड के छेद पर था, उंगली से मैंने उसकी मस्त गाण्ड के फूल को सहलाया, तो वो एकदम चिहुंक गई।

फिर मेरी उंगलियाँ गाण्ड के छेद से फिसलती हुई उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ तक पहुँच गई। मैं उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ के ऊपर अपनी पूरी हथेली से सहलाने लगा, मेरा तना हुआ सात इंच का लण्ड तौलिये के अन्दर से उसके नाभि में चुभ रहा था क्योंकि उसकी लम्बाई में मुझसे थोड़ी कम थी। उसकी आँखों से गंगा-जमुना की धार निकल पड़ी क्योंकि उसको शायद मेरे इरादे समझ आ गए थे और वो यह भी समझ गई थी कि अब पकड़ से छूटना आसान नहीं, शोर भी नहीं मचा सकती थी क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठो में अभी तक कैद थे।

इधर मेरी उंगलियाँ अब उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग अलग करने लगीं थी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चुनमूनियाँ के अंदर घुमा कर जायजा लेना चाहा पर उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मेरी उंगली उसके अन्दर जा ही नहीं सकी।

खैर मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना चालू रखा, जल्दी ही मुझे लगा कि मेरी उंगली में कुछ गीला और चिपचिपा सा लगा और मेरी प्यारी बहना का शरीर कुछ अकड़ने लगा, मैं समझ गया कि इसकी चुनमूनियाँ को पहली बार किसी मर्द की उंगलियों ने छुआ है जिसे यह बर्दाश्त नहीं कर सकी और इसका योनि-रस निकल आया है

मैं तुरंत अपनी उँगलियों को अपने मुँह के पास ले गया, क्या खुशबू थी उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की !

मेरा लण्ड अब बहुत जोर से उछल रहा था तौलिये के अन्दर से, मैंने अपने हाथ से अपने तौलिए को अपने शरीर से अलग कर दिया, जैसे ही तौलिया हटा, ललिता को मेरे लण्ड की गर्मी अपने पेट पर महसूस हुई। शायद उसको कुछ समझ नहीं आया कि यह कौन सी चीज है जो बहुत गर्म है।

खैर अब मेरे और मेरी प्यारी और सेक्सी बहना के बदन के बीच से पर्दा हट चुका था, अब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे का अहसास कर रहे थे। ललिता की साँसें बहुत तेज चल रही थी।
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02-26-2019, 09:32 PM,
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने ललिता के होंठों को आज़ाद कर दिया, किन्तु उसके कुछ बोलने के पहले ही अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया और कहा- देखो ललिता, आज कुछ मत कहो, मैं बहुत दिन से तुम्हारी जवानी कर रस चूसने को बेताब हूँ। और आज मैं तुमको ऐसे नहीं छोडूंगा, शोर मचाने से कोई फायदा हैं नहीं, घर में हमारे सिवा कोई नहीं है, तो बेहतर होगा कि तुम भी सहयोग करो और मजा लूटो।

वो प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखती रही, मुँह तो बंद हो था कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी।

अब मैंने उसके मुँह से हाथ हटा दिया और तुरंत ही उसको गोद में उठा लिया और ले जाकर सीधे बिस्तर पर लिटा दिया।

अगले ही पल फिर से उसके होंठ का रस पान शुरू कर दिया और हाथ उसकी चूचियों को धीरे धीरे मसलने लगे। हम दोनों की साँसें बहुत गर्म और तेज तेज चल रहीं थी, मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था।

पहली बार उसके हाथों ने हरकत की और मेरे लण्ड की अपने हाथ से महसूस करने की कोशिश की, शायद वो जानना चाह रही थी कि यह लोहे जैसा गर्म-गर्म क्या उसकी चुनमूनियाँ से रगड़ रहा था। उसने अपनी उंगलियों से पूरा जायजा लिए मेरे लण्ड का !

मैंने कहा- मेरी जान, मुझे बहुत अच्छा लगा जो तुमने मेरा लण्ड अपने हाथों से छुआ !

लण्ड का नाम सुनते ही उसने अपने हाथों को तुरंत वापस खींच लिया।

मैंने अब अपने होंठ उसकी चूची के ऊपर रख दिए, पहली बार उसके मुँह से सिसकारी निकली जो मुझे बहुत ही अच्छी लगी। खैर मैंने उसकी चूची को पीना शुरू कर दिया, चूसते चूसते दाँत भी लगा देता था। उसके बाद दूसरी चूची में होंठ लगा दिए, अब उसकी साँसें और तेज हो गईं थीं।

मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड जो उसकी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था, उसमें कुछ चिपचिपा सा गीलापन लग गया है। मैं समझ गया कि अब मेरी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है।

मैंने अपने एक हाथ से अपने लण्ड को ललिता की चुनमूनियाँ पर ठीक से टिकाया और उसको चुनमूनियाँ के अन्दर डालने की कोशिश की पर लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिसल गया। मैंने फिर कोशिश की पर फिर मेरा लण्ड फिसल गया।

अब मैंने इधर उधर देखा तो मुझे उसके कल ख़रीदे गई श्रृंगार का सामान दिख गया, उसमें एक वैसलीन की एक शीशी थी, मैं उसके ऊपर से हटा और वैसलीन की शीशी उठा कर तुरंत फ़िर से अपनी उसी अवस्था में आ गया।

मैंने लेटे लेटे ही वैसलीन की शीशी खोली और उसकी उसकी चुनमूनियाँ के उपर खूब सारी वैसलीन लगा दी, फिर मैंने अपने लण्ड के सुपारे को खोला और उसमें भी वैसलीन लगाई।

इस सबको मेरी ललिता रानी बड़े गौर से देख रही थी, शायद उसको कुछ समझ में आ रहा था या फिर उसको अन्दर से कुछ मजा तो जरूर मिल रहा होगा क्योंकि अब उसने किसी तरह का विरोध या भागने की कोशिश नहीं की थी।

अब मैंने अपने लण्ड को फिर से उसकी चुनमूनियाँ के फांकों के बीच में रखा और अन्दर धकेलने की कोशिश की किन्तु इस बार शायद चिकनाई ज्यादा होने के कारण लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिर फिसल गया। 

ललिता ने तो अपने होंठ कस कर भींच लिए थे क्योंकि उसको लगा कि अब तो भैया का मोटा और लम्बा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ में घुस ही जाएगा।

दोस्तो, तीन प्रयास हो चुके थे, मेरा लण्ड ऐंठन के मारे दर्द होने लगा था, अबकी मैंने अपने लण्ड को फिर से रखा और अपने दोनों हाथों को ललिता की जांघों के नीचे से निकाल कर उसके कन्धों को पकड़ लिया, इस तरह पकड़ने के कारण अब वो बिल्कुल पैर भी नहीं बंद सकती थी और हिल भी नहीं सकती थी।

अब मैंने एक जोर से धक्का मारा, ललिता के हलक से बड़ी तेज चीख निकल पड़ी, मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ अन्दर घुस गया था।

वो चिल्लाने लगी- हाय, मैं मर गई !

और आँखों से गंगा-जमुना बहने लगी। वो बड़ी तेजी से अपना सर हिला रही थी, अब मैंने अपने होंठ फिर से उसके होंठों पर कस कर चिपका दिए और एक जोर का धक्का फिर मारा, अबकी मेरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ को और फाड़ता हुआ करीब दो इंच घुस गया, उसकी चुनमूनियाँ एकदम गरम भट्टी बनी हुई थी, मैं अपने लण्ड के द्वारा उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की गर्मी महसूस कर रहा था।

2-3 सेकेण्ड के बाद फिर से एक धक्का मारा तो अबकी आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में घुस गया। अब मैं उसी अवस्था में रुक गया और उसके होंठों को कस कर चूसने लगा। उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मुझे लगा कि मैं आसानी से अपने लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर नहीं कर पाऊँगा और उत्तेजना के कारण जल्दी ही झड़ जाऊँगा, इसलिए मैंने जोर से एक धक्का और मारा, अबकी मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में समां गया, मैंने अपनी जांघ पर कुछ गीला गीला महसूस किया, मुझे समझ आ गया कि इसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई है और खून निकल रहा है।

दोस्तों मेरा ख्वाब था कि मैं किसी की सील तोडूं !

पर मुझे अपनी बीवी के साथ भी यह मौका नहीं मिला था, हालांकि मेरी बीवी ने तब मुझे यही बताया था साईकिल चलाते वक्त उसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई थी, तो आज जब मुझे अपनी बहन ललिता की सील टूटने का अनुभव मिला तो मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और इसी उत्तेजना में मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा गर्म-गर्म वीर्य मेरी बहन ललिता की चुनमूनियाँ के अन्दर निकल रहा था, वो भी मेरे लण्ड से निकलने वाले गर्म वीर्य को महसूस कर रही थी अपनी दोनों आँखों को बंद करके !

ललिता की चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि वीर्य निकलने के दौरान लण्ड अपने आप झटके मरने लगता है, पर मेरे लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के अन्दर झटके मारने की जगह भी नहीं मिल रही थी।

खैर मेरा लण्ड वीर्य निकलने के बाद कुछ ढीला हुआ, मैं धीरे से उठा, देखा तो ललिता की चुनमूनियाँ से खून का ज्वालामुखी फट गया था, उसकी जांघ, मेरी जांघ और चादर खून से सनी हुई थी, उसकी चुनमूनियाँ से अब गाढ़ा खून (मेरे वीर्य की वजह से) निकल रहा था।

मैंने देखा ललिता बेहोश सी लग रही थी, मैं जल्दी से रसोई में गया और पानी की बोतल लाकर उसके चेहरे पर पानी के छीटें मारे, उसने धीरे से आँखें खोली, मुझे उसकी करराहट साफ़ सुनाई दे रही थी, आँखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे थे।

मैं वहीं पास में ही बैठ गया और उसके बालों को सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद वो कुछ सामान्य हुई, तो मैंने उसे कहा- जान, चलो मैं तुम्हारी चुनमूनियाँ को साफ़ कर दूँ, आज मैंने तुम्हारी चुनमूनियाँ का उद्घाटन कर दिया है।

उसने थोड़ा उचक कर अपनी चुनमूनियाँ को देखा और बोली- भैया यह क्या कर दिया आपने?

मैंने कहा- बेटा परेशान मत हो, पहली बार तो यह होता ही है और अच्छा हुआ कि मैंने कर दिया, अगर कहीं बाहर करवाती तो पता नहीं कितना दर्द होता ! चलो अब उठो भी !

क्रमशः..................
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02-26-2019, 09:32 PM,
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
चचेरी और फुफेरी बहन की सील--3

गतान्क से आगे..............

मैंने उसको सहारा देकर उठाया और बाथरूम ले गया। वहाँ पर मैंने उसको शावर के नीचे खड़ा कर दिया और फिर उसकी सफाई में जुट गया। इस दौरान मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। चूँकि हम दोनों ही निर्वस्त्र थे तो वो मेरे लण्ड को घूर रही थी।

मैंने उसकी चुनमूनियाँ को तो साफ़ कर दिया, अब खून निकलना भी बंद हो गया था, अब मैंने उसको अच्छे से नहलाना चालू कर दिया। मैं उसकी चूचियों को रगड़ रहा था, अचानक मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और उसकी चुनमूनियाँ में अपना मुँह लगा दिया।

वो हिल कर रह गई।

मैंने कहा- ललिता रानी, मुझे यह करने दो, इससे तुम्हारी चुनमूनियाँ का दर्द जल्दी ठीक हो जाएगा।

और मैंने उसे चुनमूनियाँड़ों से पकड़ कर अपने मुँह को फिर से उसकी चुनमूनियाँ में लगा दिया। मेरी गर्म जीभ ने अपना कमाल दिखाना आरम्भ कर दिया था। उसको जरूर मजा आ रहा था क्योंकि अब उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी।

मेरे हाथ उसकी गाण्ड को सहलाते जा रहे थे, मैंने अपनी जीभ और अन्दर घुसेड़ दी, मेरे लण्ड ने कुछ जगह तो बना ही दी थी उसकी चुनमूनियाँ में, अचानक उसका बदन अकड़ने लगा और फिर मुझे अपनी जीभ में कुछ नमकीन सा स्वाद मिला, उसकी चुनमूनियाँ की खुशबू और इस स्वाद ने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया कि मैं उसके रज की एक एक बूँद चाट गया।

अब उसने मेरा मुँह हटाने की कोशिश की और बोली- भैया, मुझे पेशाब आ रही है।

मैंने कहा- तू कर ! मैं तो आज तेरी पेशाब भी पियूँगा !

चूंकि उसकी चुनमूनियाँ घायल थी तो वो चाहकर भी पेशाब को रोक नहीं पाई और मेरा मुँह उसके पेशाब से भरने लगा।

मैंने उसके पेशाब की एक एक बूँद पी डाली।

वो मुझसे बोली- भैया, आप बहुत गंदे हैं, एक तो मेरी यह हालत कर दी और मेरा पेशाब भी पी लिया।

मैंने कहा- ललिता, मेरी जान ! तुमको अभी नहीं पता है कि तुमने मेरा कितना बड़ा ख्वाब पूरा किया है, जो चीज मुझे अपनी बीवी से हासिल नहीं हो पाई, वो तुमने मुझे दी है, तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

अब मैं खड़ा हो गया था, मेरा लण्ड अभी भी तना हुआ था, मैंने उसका हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया, उसने लण्ड को पकड़ लिया, और उसके बाद जो हुआ, मैं भी उस समय हिल गया था, ललिता अचानक अपने घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।

मुझे तो मानो स्वर्ग की प्राप्ति हो गई !

तब तक तो मैं यही समझ रहा था कि मैंने आज इसकी इच्छा के बिना इसकी सील तोड़ी है, पर अब उसके गुलाबी होंठ मेरे सुपारे को सहला रहे थे।

मैंने भी उसके सर को पीछे से पकड़ कर अपना लण्ड उसके मुँह में और घुसेड़ दिया और उसका सर बाल पकड़ कर आगे पीछे करने लगा। दोस्तो, मैं 2-3 मिनट से ज्यादा नहीं कर पाया और एक लम्बा धक्का देते हुए वीर्य की पिचकारी उसके मुँह के अन्दर मार दी। वो मेरा सारा वीर्य गटक गई, अब वो खड़ी होकर मेरे सीने से चिपक गई और मेरे कान में बोली- भैया, आपने भी तो मेरा ख्वाब पूरा किया है !

और एक गहरी मुस्कुराहट उसके चेहरे पर फैल गई।

मैं उसकी बात से इतना खुश हो गया कि मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। अब उसने भी मेरा साथ देना चालू कर दिया, मैंने उसको वहीं बाथरूम में लिटा दिया और उसके माथे, आँखों, नाक को चूमते हुए मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में घुसेड़ दी। वो मेरी जीभ को चूसने लगी, मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे, अब बर्दाश्त करना मुश्किल था, मैंने एक हाथ से लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के ऊपर सेट किया और उत्तेजना में जोर से धक्का मार दिया, मेरा आधा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ घुस गया, वो इस बार भी चीख पड़ी और बोली- क्या आज भर में ही मार दोगे मुझे?

मैंने कहा- नहीं मेरी जान, तुमको तो बहुत सम्भाल कर रखूंगा !

फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे धीरे डालना शुरू किया, उसको लण्ड के चुनमूनियाँ में जाने का अहसास हो रहा था। जब मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में चला गया, तो मैंने उसकी चूचियों को पीना शुरू कर दिया। 2-3 मिनट बाद मैंने उसकी चुनमूनियाँ को चोदना शुरू कर दिया। अब उसको भी उत्तेजना हो रही थी क्योंकि उसने अपने हाथों का घेरा मेरी पीठ पर कस कर बाँध दिया था और बीच बीच में उपने चुनमूनियाँड़ भी उठा देती थी।

करीब 7-8 मिनट के बाद उसने अपने हाथों के घेरे को बहुत ज्यादा कस दिया और अपने पैरों को मेरी गाण्ड के ऊपर कस दिया। मैं समझ गया कि इसकी चुनमूनियाँ का पानी निकलने वाला है, मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी।

अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रहीं थी, अचानक उसका पूरा बदन ऐंठने लगा और उसने मुझे कस कर भींच लिया। इसी बीच मेरे लण्ड से भी गर्म वीर्य का लावा निकल कर उसकी चुनमूनियाँ में भरने लगा, हम दोनों एक साथ झड़ गए, थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे, ऊपर शावर का पानी गिर रहा था। थोड़ी देर बाद हम दोनों एक साथ ही नंगे बदन ही कमरे में आ गए।

मैंने तौलिया उठाया और लपेट लिया। वो अपने कपड़े तलाशने लगी।

हम दोनों बिल्कुल खामोश थे शायद कुछ आत्मग्लानि की वजह से !

मैं वहाँ से जाने को हुआ तो ललिता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी आखों में देख कर बोली- यह सब आज के लिए ही था या फिर?

मैंने उसकी आँखों में देखा, मुझे वहाँ प्यार दिखाई दिया, मैंने उसको कस कर चिपटा लिया और बोला- मेरी जान, मैं हमेशा के लिए तुम्हारा गुलाम हो गया हूँ।

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया, अपने कपड़े पहने।

तभी मैंने देखा कि ललिता एक थाली में मेरे लिए खाना लेकर आई, मैंने देखा कि उसने पिछले दिन खरीदी हुई ड्रेस पहनी हुई थी जो मैंने पसंद की थी और परफ़्यूम लगाया हुआ था। एक बार फिर मैंने उसे गले लगा लिया और चुम्बनों की बारिश कर दी।

उसके बाद तो मेरा सिलसिला चल निकला, अब मैं और ललिता सबके सामने तो भाई बहन की तरह रहते किन्तु अकेले में हम पति पत्नी की तरह रहते हैं और मजे कर रहे हैं।
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02-26-2019, 09:32 PM, (This post was last modified: 07-17-2020, 08:54 PM by desiaks.)
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मैं और मेरी चचेरी प्यारी बहन ललिता मेरी बीवी जो स्कूल-टीचर है, वो सुबह 6 बजे घर से निकल जाती है क्योंकि उसको कन्नौज जाने वाली ट्रेन पकड़नी होती है और शाम को आते-आते भी करीब यही समय हो जाता है।

चाचा जी ऑफिस चले जाते हैं, घर में सिर्फ मैं और ललिता ही रह जाते थे। हम दोनों ने पिछले दो महीने में जितनी भी तरह से हो सकता था, हर आसन और हर जगह पर सेक्स का मज़ा लिया, सिर्फ एक को छोड़ कर और वो था गाण्ड मारना।

मैंने बहुत कोशिश की ललिता की कुंवारी गाण्ड मारने की, लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुई।

एक दिन मैं और ललिता चुदाई करने के बाद कमरे में नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे, मैं उसकी उसकी चूचियों को पी रहा था, अचानक मैंने उससे पूछा- ललिता, क्या डॉली का कोई बॉय-फ्रेंड है?

मैं पहले आपको बता दूँ कि डॉली मेरी सगी बुआ की लड़की है जो ललिता के बराबर उम्र की ही है और उसी के स्कूल में साथ में पढ़ती है।

डॉली ललिता से भी अधिक खूबसूरत है, रंग एकदम गोरा और उसके चेहरे को देख कर आपको दिव्या भारती की याद आ जाएगी, बाकी फिगर जैसा कि उस उम्र की लड़कियों के जैसा ही है। उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी नहीं हैं, कूल्हे भी सामान्य ही हैं।

जैसा कि मैंने बताया, खूबसूरती में वो ललिता से आगे है।

ललिता अपनी आँखें बंद करके अपनी चूचियों की मालिश करवा रही थी, अचानक मेरी आँखों में देखने लगी, थोड़ी देर देखने के बाद बोली- जान (वो अकेले में मुझे इसी नाम से बुलाती है) क्या तुम डॉली की सील तोड़ना चाहते हो?

मुझे कुछ जवाब नहीं सूझा, पर मैंने पता नहीं क्यों उसके होंठों को चूमते हुए कहा- हाँ.. ललिता, मैं डॉली को चोदना चाहता हूँ, क्या उसकी सील अभी नहीं टूटी? क्या उसने अभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया?

तो प्रिय मुस्कराते हुए बोली- नहीं !

मेरी धड़कन बढ़ी हुई थीं, अन्दर डर यह भी था कि कहीं ललिता बुरा न मान जाए, इसलिए मैंने बात टालने के उद्देश्य से ललिता की चूचियों को पीना शुरू किया और अपनी ऊँगली उसकी चुनमूनियाँ में घुमाने लगा।

ललिता शायद एक और चुदाई के लिए तैयार ही थी, वो उछल कर मेरे ऊपर आ गई, उसने अपने हाथ से मेरे तने हुए लण्ड को अपनी चुनमूनियाँ के मुँह में रखा और एक जोरदार धक्के से पूरा लण्ड अपनी चुनमूनियाँ में लील लिया, उसने आँखें बंद करके अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू किया।

दोस्तों मैंने नोट किया कि आज ललिता कुछ ज्यादा ही जोश में आकर मेरी चुदाई कर रही थी, मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था।

करीब 5 मिनट तक मेरे लण्ड को अपनी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर करने के बाद ललिता का बदन एक दम ऐंठने लगा, मैं समझ गया कि यह स्खलित होने वाली है।

मैंने भी नीचे से अपनी गाण्ड को और ऊपर उठा लिया जिससे मेरा लण्ड बिल्कुल उसकी चुनमूनियाँ समा गया, तभी ललिता मेरे सीने पर गिर कर हाँफने लगी और हम दोनों एक साथ ही स्खलित हो गए थे।

थोड़ी देर शांत रहने के बाद ललिता ने मेरी ओर देखते हुए पूछा- मजा आया जान?

मैंने उसको चूमते हुए कहा- हाँ.. बहुत !

तो वो अचानक बोली- तुमको ऐसी क्या कमी लगी मुझमें, जो तुम डॉली से पूरी करनी चाहते हो?

तब मुझे उसकी जोश भरी चुदाई का मतलब समझ में आ गया।

मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा- नहीं तुममें कोई कमी नहीं है, मैं तो बस ऐसे ही… पर अगर तुमको अच्छा नहीं लगा, तो कोई बात नहीं !

तभी मुझे बाहर कुछ आहट लगी, मैं समझ गया कि मेरी माता जी मंदिर सी आ गई हैं। हम दोनों तुरंत अलग हुए और अपने-अपने कपड़े पहन कर सामान्य हो गए।

दूसरे दिन मैं अपनी बालकनी में अपनी ललिता रानी के इंतजार में टहल रहा था क्योंकि टीवी देखते-देखते बोर हो गया था।

ललिता अपने स्कूल गई थी और अभी करीब सुबह के 10 बजे थे, घर में मेरे अलावा और कोई नहीं था, मेरी नजर घर की तरफ आती हुई ललिता पर पड़ी, उसके साथ अन्जलि भी थी।

मैंने देखा की ललिता मुझे बहुत ध्यान से देख रही थी।

मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि यह ललिता के स्कूल से आने का समय नहीं था, लेकिन मुझे कल की बात याद आ गई और मुझे लगा कहीं ललिता नाराज न हो जाए सो मैंने उनके सामने से हटना ही उचित समझा।

किन्तु मैं जैसे ही मुड़ा, मुझे लगा कि डॉली कुछ लंगड़ा कर चल रही है। उसके चेहरा भी कुछ उदास लग रहा था, मैंने सोचा पता नहीं क्या बात है? तो मैं जीने से उतर कर सीधे गेट पर ही पहुँच गया।

मुझे देख कर ललिता ने हल्की सी मुस्कान दी और डॉली ने कहा- नमस्ते भैया !

मैंने भी उसको मुस्करा कर जवाब दिया, फिर पूछा- क्या हुआ? तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो?

तो ललिता बोली- इसके पैर में चोट लग गई है स्कूल में, खून निकल आया था, तो मैंने ही इससे कहा कि घर चलो, दवा लगा देंगे.. थोड़ा आराम कर लेना और फूफा जी को भी फ़ोन कर देंगे, तो शाम को ऑफिस से लौटते समय तुम उनके साथ चली जाना।

ललिता के स्कूल से हमारा घर पास है और बुआ का थोड़ा दूर है।

मैंने डॉली की ओर देखते हुए कहा- हाँ.. यह अच्छा किया, कहाँ चोट लगी है देखूं !

डॉली ने कुछ असहज भाव से ललिता की ओर देखा, तभी मेरी नजर डॉली की स्कर्ट में लगे खून की तरफ चली गई।

मैंने कहा- अरे खून तो अभी भी निकल रहा है, चलो जल्दी अन्दर… मैं फर्स्ट एड बॉक्स लाता हूँ !

मैं तुरन्त अपने कमरे में गया और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर ललिता के कमरे में पहुँच गया। तब तक वह दोनों सोफे में बैठ गई थीं।

मैंने ललिता से कहा- जाओ पानी की बोतल ले आओ.. पहले डॉली को पानी पिलाओ।

मैंने कूलर ऑन कर दिया, पानी पीने के बाद मैंने डॉली से कहा- लाओ चोट दिखाओ.. मैं दवा लगा देता हूँ ! देखूं.. कहाँ चोट लगी है?

डॉली अपनी स्कर्ट को अपनी दोनों टांगों से दबाते हुए बोली- नहीं भैया, सब ठीक हो जाएगा, आप परेशान मत होईये !

मैंने कहा- अरे इसमें परेशान होने वाली क्या बात है, तुम मुझे चोट तो दिखाओ !

मेरे कई बार कहने के बाद भी उसने चोट नहीं दिखाई, तब मैं घूम कर ललिता जो कि शायद अपने कपड़े बदल कर अन्दर कमरे से आ रही थी, की ओर देखा तो उसके चेहरे पर हल्की से शरारती मुस्कान देखी।

क्रमशः..................
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