vasna kahani बेनाम सी जिंदगी
11-01-2018, 12:25 PM,
#64
RE: vasna kahani बेनाम सी जिंदगी
लड़कियो के रूम मे हमेशा एक कंफर्ट होता हैं. सॉफ्ट सॉफ्ट चीज़े, धीमी सी एक खुश्बू. अब आकांक्षा कल से घर मे नही थी. मगर फिर भी स्मेल अब भी थी जैसे उसकी. लंड सेमी हार्ड तो था ही. आज कल बैठने का नाम ही नही ले रहा लंड. थोड़ा थोड़ा खड़ा होता ही हैं हर टाइम. मैने फिर से डाइयरी पढ़ना स्टार्ट कर दिया. अगेन कुछ दिनो तक कुछ इंट्रेस्टिंग नही दिखा. यूषुयल बाते, स्कूल, पढ़ाई, राजीव के बारे मे, कहीं लिखा था कि वो डॉक्टर बनना चाहती हैं.. मैं फटाफट सब पढ़ते गया जब तक एक दिन;
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आज मैं बोहोत ही एंबरएस्स हो गयी हूँ. मेरी लाइफ का सबसे बुरा दिन था आज. पता नही कैसे अपना मूह दिखा पाउन्गी अब मैं सबके सामने. आज थर्स्डे था तो स्कूल मे आज सिविल ड्रेस पहनने की पर्मिशन रहती हैं. मैं आज लास्ट वीक खरीदा हुआ टॉप पहन कर गयी थी. वाइट कलर का टॉप और ब्लू कलर की जीन्स. मुझे बोहोत पसन्द हैं वो टॉप. मैं चाहती थी कि राजीव मुझे देखे इस आउटफिट मे इसलिए मैं आज पहली बार थोड़ा सा मेक अप भी करके गयी थी. मैं स्कूल पहुँच और क्लास मे एंटर होते ही राजीव की नज़र मुझ पर पड़ी. मैं देख कर ही समझ गयी कि वो मुझे देख रहा हैं और फिर उसने मुझे स्माइल भी दी. मैं बोहोत खुश हुई और निशा के पास चली गयी. 

निशा: ओये होये! आज तो मार ही डालेगी तू.

आकांक्षा: चुप कर! गेस व्हाट? उसने मुझे आते ही देखा और स्माइल भी दी.

निशा: तो? कौनसी बड़ी बात हैं? आज तो तुझे कोई भी लड़का देखेगा तो स्माइल तो क्या पप्पी भी दे देगा!
निशा ने मुझे छेड़ते हुए कहा. मैं शरमा गयी. क्या सच मे इतनी सुंदर दिख रही थी मैं आज? मुझे नही पता. निशा तो ऐसे ही कहती रहती हैं हमेशा. पागल हैं वो! क्लास शुरू हो गयी. रिसेस मे हम ने लंच कर लिया और मैं वॉशरूम की ओर चली गयी. टाय्लेट की और जब हाथ धोने गयी तो मैने मिरर मे अपने आप को देखा. और भी गर्ल्स थी टाय्लेट मे. मैं उनसे अपने आप को कंपेर करने लगी. कोई मोटी, कोई काली, कोई भद्धि, कोई एक दम दुबली... और मैने अपने आपको देखा. निशा सच ही कहती हैं शायद. मैं एक दम गोरी हूँ, गोल चेहरा हैं मेरा. काले रेशम जैसे बाल और बड़ी बड़ी आखे. बाकी गर्ल्स से तो मैं बोहोत सुंदर दिख रही थी. मुझे थोड़ा सा घमंड सा फील हुआ. मैं अपने आप पे ही मुस्कुराने लगी और हाथ धोकर बाहर निकल आई. गर्ल्स टाय्लेट के जस्ट ऑपोसिट साइड ही बाय्स टाय्लेट हैं. मैं जैसे ही बाहर निकली उसी वक़्त सामने देखती हूँ तो राजीव भी बाहर आ रहा था टाय्लेट से. पता नही क्यू मगर उसको देख कर मेरी साँसे अपने आप तेज़ हो जाती हैं. उसके बाल, उसकी चाल... हआयाई! सब कुछ एक दम स्पेशल हैं. स्टाइलिश! मैं वही खड़ी होकर उसकी ओर घूर्ने लगी. पहले तो राजीव का ख़याल नही गया मगर जब उसने मुझे देखा तो वो भी रुक गया और स्माइल करने लगा.


हम दोनो पागल जैसे एक दूसरे की ओर स्माइल कर रहे थे. मुझे अंदर से गुदगुदी होने लगी, दिल जैसे ज़ॉरज़ोर से धड़क रहा था और मेरी चेस्ट पर दस्तक दे रहा था. आखे थोड़ी घूमने लगी और मैं समझ गयी कि कुछ दिन पहले जैसा एहसास हुआ था आज भी कुछ ऐसा ही होने वाला हैं. राजीव अब भी मुझे देख रहा था. वो थोड़ा आगे आया और बोला;
राजीव: नाइस ड्रेस!

बॅस! इतना ही कहा और मेरा तो मूह जैसे बंद हो गया, दिमाग़ भी! मैं पागलो जैसी स्माइल करने लगी और तभी मैने देखा कि राजीव की नज़र अब मेरे चेहरे पर नही थी . वो नीचे देख रहा था बड़े ध्यान से कुछ. मैने उसकी नज़र का पीछा किया और मैं समझ गयी कि वो मेरी चेस्ट की ओर देख रहा हैं. मैने भी नीचे देखी चेस्ट की ओर... और... पता नही कैसे मेरे निपल्स एक दम हार्ड हो गये थे और वाइट टॉप मे से सॉफ दिख रहे थे. मैं शरम से पानी पानी हो रही थी.. मुझे तो जैसे रोना आने वाला था. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था. राजीव क्या सोचेगा मेरे बारे मे. मैं वहाँ से जल्दी से 'थॅंक यू' कहके निकल गयी.

राजीव वही खड़ा था. किसी तरह मैं स्कूल मे बैठी और जैसे ही घर आई मुझे रोना आ गया. ऐसा क्यू हुआ?! मेरी किस्मत ही खराब हैं. मुझे बोहोत रोना आ रहा था. कुछ समझ नही आ रहा कि अब मैं कैसे अपना मूह दिखाउन्गा स्कूल मे. मैने वो टॉप निकाल कर ज़मीन पर फेक दी और वैसे ही बेड पर लेट गयी. कुछ वक़्त बाद मुझे कुछ एहसास हुआ और मैं मिरर के सामने चली गयी. अपने आपको देखने लगी. ऑफ वाइट कलर की मॅक्सी मेरे बॉडी पे सूट कर रही थी. मैने धीरे धीरे मॅक्सी उपर करते हुए निकाल दी. आज पहली बार मैं अपने आप को मिरर मे देखी. टॉपलेस! अजीब सा उभार आने लगा हैं मेरी चेस्ट मे. जो अभी कुछ महीनो पहले छोटे छोटे पायंट्स थे अब वो बड़े होने लगे हैं. लाइट पिंक कलर के मेरे निपल्स अब बड़े होने लगे हैं. और उसके आस पास का सर्कल भी अब फैल रहा हैं. मैं और करीब चली गयी मिरर के और अपने आप को देखने लगी.


कुछ ही देर मे मुझे थोड़ा खीचव सा महसूस होने लगा और पेट मे एक गुद्गुलि सी होने लगी. नोट एग्ज़ॅक्ट्ली पेट बट थोड़ा नीचे. मेरी टाँगो के बीच मे. मेरे निपल्स धीमे धीमे हार्ड होने लगे. पहले भी थे मगर अब मैं महसूस कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे कि एक मीठी चुभन हो छाती मे मेरे. दिल ज़ोर ज़ोर से धंडकने लगा. मैं ड्रेसर की सीट पर बैठ गयी. मैं नही जानती कि क्या हो रहा था मगर जो भी हो रहा था अच्छा लग रहा था. जब कहीं खुजली होती हैं तब टच करने की जो फीलिंग आती हैं दिल मे वैसी फीलिंग्स मुझे आने लगी, मेरा दिल अब इतनी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था कि मैं महसूस कर पा रही थी अपनी धड़कनो को. मेरी आखे मेरे कड़े निपल्स पर टिकी थी, पैर एक दूसरे पर घीसने लगे धीरे से और आख़िर कार मैने हार मान ही ली और....और छू लिया अपने निपल्स को. आआअहह...सी अपने आप निकल गयी मेरे होंठो से और दांतो के बीचे मेरे होंठ दब गये. अजीब सा नशा आ रहा था मुझे जैसे ही मैं अपने निपल्स को छू रही थी. सारी ज़िंदगी वो वही थे जहाँ आज हैं मगर आज कुछ अजीब फील हो रहा था, कुछ अच्छा. मैने दोनो हाथ को अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच मे अपने दोनो निपल्स को मसलना शुरू कर दिया. ऐसा लग रहा था कि जैसे की कोई मेरे दिमाग़ मे कह रहा हो यह सब करने के लिए. मेरी मांदिया अब एक दूसरे को कस्स्स्के मसल रही थी. टाँगो के बीच अब मुझे फिर से वोही फीलिंग आने लगी थी जो उस दिन आ रही थी. एक हल्का सा गीलापन मुझे महसूस हुआ तो मैं डर गयी और रोकना चाहती थी, मगर मेरे हाथ ना रुक रहे थे और मेरे निपल्स भीक माँग रहे थे मेरे हाथो के सामने अपने आप को मसलवाने के लिए. एलेक्ट्रिक शॉक मुझे कभी लगा नही मगर वैसी ही फीलिंग मुझे अपने जिस्म मे आने लगी.. मेरी कमर पीछे की ओर और मेरी चेस्ट अब आगे की ओर निकल गयी. आखे अपने आप बंद हो गयी, होंठ सूखने लगे और मेरी जीभ उनकी प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करने लगी.
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