Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
08-23-2019, 01:16 PM,
#31
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
रजनी ने अपने कमरे को अन्दर से बंद किया और अपने कपड़े निकालने लगी।
‘दीदी शाम को अच्छे से कर दूँगी.. अभी मेरे तबियत ठीक नहीं है।’
बेला ने मुँह बनाते हुए कहा।
‘क्यों क्या हुआ तेरे को? चल इधर आ तेरी तबियत आज मैं हरी कर देती हूँ।’
यह कह कर रजनी ने बेला को धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और उसके लहँगे को एक झटके में उसकी कमर तक चढ़ा दिया।
‘हाय दीदी.. क्या कर रही हैं आप?’ बेला ने खीजते हुए रजनी से पूछा, पर रजनी ने बिना कुछ बोले.. अपनी ऊँगली को बेला की चूत में पेल दिया।
रजनी की ऊँगली बेला की गीली चूत में फिसलती हुई अन्दर चली गई।
‘आह दीदी ये ईए.. ओह…’
रजनी ने दो-चार बार अपनी ऊँगली बेला की चूत के अन्दर-बाहर की और फिर अपनी ऊँगली निकाल कर देखने लगी।
उसकी ऊँगली बेला की चूत और सोनू के कामरस से भीगी हुई थी, रजनी का शक और बढ़ गया।
रजनी- ये क्या है.. रांड.. बोल क्या किया तूने उस छोरे के साथ? उसका लण्ड अपनी चूत में लेकर अब तेरा भोसड़ा ठंड हो गया हो गया ना?
बेला- ये.. ये.. क्या कह रही हैं दीदी आप.. वो तो मेरे बेटे की उम्र का है।
रजनी- हाँ जानती हूँ मैं तुझे साली.. ज़रूर बेटा.. बेटा.. कह कर उसके लण्ड पर उछल रही होगी.. बोल.. नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
बेला- दीदी वो वो..
इससे पहले कि बेला कुछ बोलती, रजनी अपनी दो उँगलियों को बेला की चूत में पेल कर अपने अंगूठे से उसकी चूत के दाने को ज़ोर से मसल दिया। बेला एकदम से सिसया उठी और अपनी कमर को उछालने लगी।
रजनी- देख साली कैसे अपनी गाण्ड उछाल रही है। ऐसे ही अपने गाण्ड उछाल-उछाल कर चुदवाई होगी ना तुम उस लौंडे से?
बेला- दीदी ग़लती हो गई.. माफ़ कर दो, उसने मुझे संभलने का मौका ही नहीं दिया।
रजनी- क्या उसने.. या तूने उसे मौका नहीं दिया.. जा री.. तेरी फुद्दी उसके लण्ड को देख कर लार टपकाने लगी होगी.. बोल साली.. मज़ा लेकर आई है ना.. जवान लण्ड का?
बेला- अब बस भी करो दीदी.. कहा ना ग़लती हो गई.. आइन्दा ऐसा नहीं होगा।
रजनी- चल साली जा अब.. आगे से उस छोरे से दूर रहना.. समझी।
बेला बिस्तर से खड़ी हुई और कमरे का दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई।
बेला तो चली गई, पर रजनी की चूत में बेला की चुदाई की बात सुन कर आग लग चुकी थी।
बेला के जाने के बाद रजनी ने अपने कमरे का दरवाजा बंद किया और अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत को मसलने लगी।रजनी ने अपने कमरे को अन्दर से बंद किया और अपने कपड़े निकालने लगी।
‘दीदी शाम को अच्छे से कर दूँगी.. अभी मेरे तबियत ठीक नहीं है।’
बेला ने मुँह बनाते हुए कहा।
‘क्यों क्या हुआ तेरे को? चल इधर आ तेरी तबियत आज मैं हरी कर देती हूँ।’
यह कह कर रजनी ने बेला को धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और उसके लहँगे को एक झटके में उसकी कमर तक चढ़ा दिया।
‘हाय दीदी.. क्या कर रही हैं आप?’ बेला ने खीजते हुए रजनी से पूछा, पर रजनी ने बिना कुछ बोले.. अपनी ऊँगली को बेला की चूत में पेल दिया।
रजनी की ऊँगली बेला की गीली चूत में फिसलती हुई अन्दर चली गई।
‘आह दीदी ये ईए.. ओह…’
रजनी ने दो-चार बार अपनी ऊँगली बेला की चूत के अन्दर-बाहर की और फिर अपनी ऊँगली निकाल कर देखने लगी।
उसकी ऊँगली बेला की चूत और सोनू के कामरस से भीगी हुई थी, रजनी का शक और बढ़ गया।
रजनी- ये क्या है.. रांड.. बोल क्या किया तूने उस छोरे के साथ? उसका लण्ड अपनी चूत में लेकर अब तेरा भोसड़ा ठंड हो गया हो गया ना?
बेला- ये.. ये.. क्या कह रही हैं दीदी आप.. वो तो मेरे बेटे की उम्र का है।
रजनी- हाँ जानती हूँ मैं तुझे साली.. ज़रूर बेटा.. बेटा.. कह कर उसके लण्ड पर उछल रही होगी.. बोल.. नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
बेला- दीदी वो वो..
इससे पहले कि बेला कुछ बोलती, रजनी अपनी दो उँगलियों को बेला की चूत में पेल कर अपने अंगूठे से उसकी चूत के दाने को ज़ोर से मसल दिया। बेला एकदम से सिसया उठी और अपनी कमर को उछालने लगी।
रजनी- देख साली कैसे अपनी गाण्ड उछाल रही है। ऐसे ही अपने गाण्ड उछाल-उछाल कर चुदवाई होगी ना तुम उस लौंडे से?
बेला- दीदी ग़लती हो गई.. माफ़ कर दो, उसने मुझे संभलने का मौका ही नहीं दिया।
रजनी- क्या उसने.. या तूने उसे मौका नहीं दिया.. जा री.. तेरी फुद्दी उसके लण्ड को देख कर लार टपकाने लगी होगी.. बोल साली.. मज़ा लेकर आई है ना.. जवान लण्ड का?
बेला- अब बस भी करो दीदी.. कहा ना ग़लती हो गई.. आइन्दा ऐसा नहीं होगा।
रजनी- चल साली जा अब.. आगे से उस छोरे से दूर रहना.. समझी।
बेला बिस्तर से खड़ी हुई और कमरे का दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई।
बेला तो चली गई, पर रजनी की चूत में बेला की चुदाई की बात सुन कर आग लग चुकी थी।
बेला के जाने के बाद रजनी ने अपने कमरे का दरवाजा बंद किया और अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत को मसलने लगी।
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08-23-2019, 01:16 PM,
#32
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
रजनी अपनी चूत को मसलते हुए अपनी चूत की आग को ठंडा करने के कोशिश कर रही थी, पर रजनी जैसे गरम औरत को भला उसकी पतली सी ऊँगलियाँ कैसे ठंडा कर सकती थीं।
फिर अचानक से रजनी के दिमाग़ में कुछ आया और वो उठ कर बैठ गई।
‘अगर वो साली छिनाल उस जवान लौंडे का लण्ड अपनी बुर में ले सकती है तो मैं क्यों अपनी उँगलियों से अपनी चूत की आग बुझाने की कोशिश करूँ… चाहे कुछ भी हो जाए..आज उसे नए लौंडे का लण्ड अपनी चूत में पिलवा कर ही रहूँगी।’
यह सोचते ही बेला के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई और वो उठ कर अपनी साड़ी पहनने लगी।
साड़ी पहनने के बाद वो अपने कमरे से बाहर आकर घर के पीछे की ओर चली गई।
सोनू बाहर ही चारपाई पर लेटा हुआ था और सुनहरी धूप का आनन्द ले रहा था।
रजनी के कदमों की आवाज़ सुन कर वो उठ कर खड़ा हो गया और रजनी की तरफ देखने लगा।
‘आराम कर रहे हो… लगता है आज बहुत थक गए हो तुम?’
रजनी ने मुस्कुराते हुए सोनू से कहा।
‘जी नहीं.. वो कुछ काम नहीं था, इसलिए लेट गया।’
रजनी- अच्छी बात है, आज तुम आराम कर लो अभी.. क्योंकि रात को तुझे मेरी मालिश करनी है… समझे… थोड़ा वक्त लगेगा आज…
सोनू सर झुकाए हुए- जी।
रजनी पलट कर जाने लगी, वो अपनी गाण्ड आज कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी, जैसे वो घर के आगे की तरफ पहुँची, तो मुख्य दरवाजा पर किसी के आने के दस्तक हुई।
रजनी ने जाकर दरवाजा खोला, तो रजनी के चेहरे का रंग उड़ गया। सामने चन्डीमल की चाची खड़ी थीं, जो उसी गाँव में रहती थीं- और सुना बहू कैसी हो?
चन्डीमल के चाची ने अन्दर आते हुए रजनी से पूछा।
चन्डीमल की चाची का नाम कान्ति देवी था।
कान्ति देवी शुरू से ही गरम मिजाज़ की औरत थी। भले ही अपनी जवानी में उसने बहुत गुल खिलाए थे, पर अब 65 साल की हो चुकी कान्ति देवी अपनी बहुओं पर कड़ी नज़र रखती थी।
आप कह सकते हैं कि उसे डर था कि जवानी में जो गुल उसने खिलाए थे, वो उसकी बहुएँ ना कर सकें।
कान्ति देवी को देख रजनी का मुँह थोड़ा सा लटक गया, पर फिर भी होंठों पर बनावटी मुस्कान लाकर कान्ति देवी के पैरों को हाथ लगाते हुए बोली- मैं ठीक हूँ चाची जी.. आप सुनाइए आप कैसी हैं?
कान्ति अन्दर के ओर बढ़ते हुए- ठीक हूँ बहू.. अब तो जितने दिन निकल जाएँ… वही जिंदगी, बाकी कल का क्या भरोसा। कल इस बुढ़िया की आँख खुले या ना खुले।
रजनी- क्या चाची.. अभी आपकी उम्र ही क्या है.. अभी तो आप अच्छे-भले चल-फिर रही हो।
रजनी चाची को अपने कमरे में ले गई, कान्ति रजनी के बिस्तर पर पालती मार कर बैठ गई- वो गेन्दा कह गया था मुझसे कि आज रात तुम अकेली होगी.. इसलिए मैं तुम्हारे पास सो जाऊँ, इसलिए चली आई।
रजनी भले ही अपने मन ही मन बुढ़िया को कोस रही थी, पर वो उसके सामने कुछ बोल भी तो नहीं सकती थी।
‘यह तो आपने बहुत अच्छा किया चाची… और वैसे भी आप हमें कब सेवा करने का मौका देती हो.. अच्छा किया जो आप यहाँ आ गईं।’
कान्ति- अब क्या बताऊँ बहू.. मुझे तो मेरी बहुएँ कहीं जाने ही नहीं देती, बस आज निकल कर आ गई।
रजनी- अच्छा किया चाची जी आपने।
शाम ढल चुकी थी और रजनी का मन बेचैन हो रहा था। वो जान चुकी थी कि आज फिर उसकी चूत को तरसना पड़ेगा।
बेला सेठ के घर से आ चुकी थी और खाना बनाने में लगी हुई थी और सोनू भी घर के छोटे-मोटे कामों में लगा हुआ था।
सोनू अपना काम निपटा कर पीछे अपने कमरे में चला गया।
बेला की बेटी बिंदया भी आ गई, बेला ने रजनी और कान्ति को खाना दिया।
रजनी और कान्ति देवी बाहर आँगन में बैठ कर खाना खा रही थीं।
बेला ने उन दोनों को खाना देने के बाद सोनू के लिए खाना परोसा और पीछे की तरफ जाने लगी।
रजनी बेला को पीछे के तरफ जाता देख कर- अए, कहाँ जा रही है?
बेला रजनी की कड़क आवाज़ सुन कर घबराते हुए- जी वो सोनू को खाना देने जा रही थी।
रजनी- तुम रुको.. ये थाली बिंदया को दे.. वो खाना दे आती है, तू जाकर ये पानी गरम कर ला… इतना ठंडा पानी दिया है.. क्या हमारा गला खराब करेगी।
रजनी की बात सुन कर बेला का मुँह लटक गया, उसने बिंदया को खाना दिया और सोनू को देकर आने के लिए बोला और खुद मुँह में बड़बड़ाती हुई रसोई में चली गई।
बिंदया बहुत ही चंचल स्वभाव की थी, वो सोनू को घर के पीछे बने उसके कमरे में खाना देने के लिए गई और अपने चंचल स्वभाव के चलते वो सीधा बिना किसी चेतावनी के अन्दर जा घुसी।
अन्दर का नज़ारा देख कर जैसे बिंदया को सांप सूंघ गया हो, अन्दर सोनू पलंग पर लेटा हुआ था।
उसका पजामा, उसके पैरों में अटका हुआ था और वो अपने लण्ड को हाथ में लिए हुए तेज़ी से मुठ्ठ मार रहा था, उसके दिमाग़ में सुबह की चुदाई के सीन घूम रहे थे।
बिंदया की तो जैसे आवाज़ ही गुम हो गई हो।
सोनू बिस्तर पर लेटा हुआ अपने 8 इंच लंबे और 3 इंच मोटे लण्ड को तेज़ी से हिला रहा था और बिंदया सोनू के मूसल लण्ड को आँखें फाड़े हुए देखे जा रही थी।
सोनू इससे बेख़बर था कि उसके कमरे में कोई है।
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08-23-2019, 01:16 PM,
#33
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
बिंदया आज अपनी जिंदगी में दूसरी बार किसी लड़के का लण्ड देख रही थी।
पहली बार उसने लण्ड तब देखा था, जब उसका बाप उसकी माँ की चुदाई कर रहा था और बेला अपनी गाण्ड को उछाल-उछाल कर अपने पति का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी।
बस फर्क इतना था कि उसके बाप का लण्ड सोनू के लण्ड से आधा भी नहीं था।
अपनी माँ की कामुक सिसकारियाँ सुन कर उससे उसी दिन पता चल गया था कि जब औरत की चुदाई होती है, तो औरत को कितना मजा आता है, बाकी रही-सही कसर उसकी सहेलियों ने पूरी कर दी थी।
जिसमें से कुछ उससे दो-तीन साल बड़ी थीं और उनकी शादी हो चुकी थी।
बिंदया अक्सर उनकी चुदाई के किस्से सुन चुकी थी, पर आज सोनू के विशाल लण्ड को देख कर उसकी चूत में एक बार फिर सरसराहट होने लगी।
बिंदया अक्सर अपनी सहेलयों से यह भी सुन चुकी थी कि लण्ड जितना बड़ा हो, उतना ही मज़ा आता है।
उसकी सहेलियाँ अकसर अपने पति के लण्ड के बारे में बात करती रहती थीं, जो अक्सर उसकी चूत में भी आग लगाए रखती थी।
यहाँ तो सोनू का विशाल लण्ड उसकी आँखों के ठीक सामने था.. उसके हाथ-पैर अंजान सी खुमारी के कारण काँपने लगे।
जिसके चलते उसके हाथ में पकड़ी हुई थाली में हलचल हुई और सोनू की आँखें खुल गईं।
सोनू हड़बड़ा कर खड़ा हो गया, उसने देखा सामने बिंदया हाथ में खाने की थाली लिए खड़ी उसके लण्ड की तरफ आँखें फाड़े देख रही है।
जैसे ही दोनों के नज़रें मिलीं, बिंदया ने नज़रें झुका लीं और थाली को नीचे रख कर तेज़ी से कमरे से बाहर निकल गई।
सोनू को समझ में ही नहीं आया कि आख़िर ये सब कैसे हो गया, पर अब वो कर भी क्या सकता था, उसने अपने पजामे को ऊपर करके बांधा और बाहर जाकर हाथ धोने के बाद आकर खाना खाने लगा।
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08-23-2019, 01:17 PM,
#34
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
खाना खाने के बाद सोनू अपने झूटे बर्तन लेकर घर के आगे आ गया।
कान्ति खाना खाने के बाद रजनी के कमरे में चली गई थी.. पर रजनी अभी भी आँगन में लगे बड़े से पलंग पर बैठी हुई थी।
बेला और बिंदया नीचे चटाई पर बैठे खाना खा रहे थे।
सोनू ने अपने झूठे बर्तन रसोई में रख दिए और वापिस घर के पिछवाड़े की तरफ जाने लगा, पर रजनी ने उसे रास्ते में ही आवाज़ दे कर रोक दिया और अपने पास बुला लिया।
रजनी- सोनू सुन ज़रा मेरे पैर तो दबा दे, बहुत दर्द हो रहे हैं।
यह कह कर रजनी उठ कर एक कुर्सी पर बैठ गई और अपनी साड़ी को घुटनों से ऊपर करके, एक टाँग उठा कर सामने पलंग पर रख दी, ताकि उसकी चूत सोनू को दिखाई दे सके।
बेला ये सब सामने बैठी देख रही थी।
‘साली छिनाल अब अपना भोसड़ा खोल कर बैठ गई है.. छोरे के सामने..’ बेला ने मन ही मन रजनी को कोसा, इसके अलावा और वो कर भी क्या सकती थी।
सोनू नीचे बैठ कर उसका एक पैर दबाने लगा।
उसका ध्यान भी रजनी के पेटीकोट के अन्दर ही था।
बेला अपने मन में सोनू को भी गाली देती है- यह भी उसी की चूत देख रहा है.. साले मादरचोद इन सब मर्दों की एक ही जात होती है.. कुत्ते जहाँ चूत देखी, वहीं चाटना शुरू कर देते हैं।
खैर.. बेला अब रजनी के सामने तो कुछ बोल नहीं सकती थी, इसलिए वो खाना खाकर अपनी बेटी बिंदया के साथ चली गई और सोनू भी अपने कमरे में जा कर सो गया।
आज रात फिर रजनी की चूत को लण्ड के लिए और तड़पना था।
अगली सुबह जब नाश्ते के बाद जब बेला अपने घर जा चुकी थी तो सोनू को रजनी ने बाजार से कुछ सामान लाने के लिए कहा।
जब वो सामान लाने के लिए घर से निकला, तो उसे बेला नदी की तरफ जाते हुए नज़र आई।
दोनों ने एक-दूसरे के तरफ देखा, पर बेला ने नखरा करते हुए अपना मुँह दूसरी तरफ मोड़ लिया।
जिस पर सोनू को थोड़ी हैरानी तो ज़रूर हुई, पर वो बिना कुछ बोले बेला के पीछे चल पड़ा।
वो बेला से कुछ फासला बना कर चल रहा था।
बेला जानती थी कि सोनू उसके पीछे आ रहा है, पर उसने जानबूझ कर उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया।
कुछ ही देर में बेला नदी के घाट पर पहुँच गई, यहाँ पर वो नहाती थी..
पर आज बेला वहाँ नहीं रुकी और नदी के साथ आगे बढ़ने लगी।
सोनू को कुछ समझ में नहीं आया, वो भाग कर बेला के पास गया- काकी ओ काकी.. सुनो तो.. कहाँ जा रही हो?
बेला ने सोनू की तरफ देखते हुए कहा- क्यों तुम्हें क्या.. कहीं भी जाऊँ?
बेला फिर से आगे चल पढ़ी और सोनू भी बेला के पीछे चल पड़ा।
जैसे-जैसे दोनों आगे बढ़ रहे थे, रास्ता और सुनसान होता जा रहा था।
चारों तरफ ऊँची-ऊँची झाड़ियाँ बढ़ने लगीं, गाँव बहुत पीछे रह गया था।
आगे जंगल शुरू हो गया था।
काफ़ी दूर चलने के बाद बेला एक घाट पर रुकी और अपने साथ लाए हुए कपड़े की गठरी को नीचे रख कर अपनी चोली खोलने लगी।
सोनू यह सब पीछे खड़ा देख रहा था।
‘क्यों रे क्या देख रहा है, मेरे पीछे क्यों आ गया.. जा तेरी मालकिन तुझे ढूँढती होंगी।’
सोनू- वो उन्होंने सामान लाने के लिए भेजा था।
बेला- तो जा फिर.. सामान खरीद, यहाँ कौन सी दुकान खुली है।
सोनू- आप नाराज़ हो मुझसे?
बेला- मैं भला कौन होती हूँ तुमसे नाराज़ होने वाली।
सोनू- तो फिर काकी आप ऐसे क्यों बात कर रही हो?
बेला- अच्छा जा.. अब अपना काम कर, मुझे परेशान मत कर।
सोनू का चेहरा बेला के बात सुन कर उतर गया और वहीं घास पर नीचे बैठ गया।
बेला ने अपनी चोली उतार कर अपने लहँगे को अपनी चूचियों पर बाँध लिया और नदी में उतर गई।
वो कनखियों से सोनू की तरफ देख कर मन ही मन मुस्करा रही थी।
सोनू नदी के किनारे बैठा बेला को देख रहा था, बेला का लहंगा गीला होकर बेला के बदन से चिपक गया था।
सोनू का लण्ड अकड़ने लगा, पर आज लगता है कि सोनू को भी चूत के लिए तरसना पड़ सकता है।
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08-23-2019, 01:17 PM,
#35
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
नहाने के बाद बेला नदी से बाहर निकली और सोनू के पीछे जाकर अपने साथ लाया हुआ दूसरे लहँगे को उठा कर गीले लहँगे को उतार दिया।
सोनू ने पीछे की तरफ नहीं देखा, वो तो बस मुँह लटकाए बैठा हुआ था।
उसके बाद उसने दूसरे लहँगे को भी ऊपर करके अपनी चूचियों पर बाँध लिया और फिर गीले लहँगे को लेकर नदी के सीढ़ियों पर बैठ कर अपने उतारे हुए कपड़े धोने लगी।
सुनहरी धूप चारों तरफ फैली हुई थी, सोनू पीछे बैठा बेला को देख रहा था।
जब बेला कपड़ों को रगड़ने के लिए आगे की ओर झुकती, तो बेला का लहंगा जो कि उसकी चूचियों पर बँधा हुआ था, उसके चूतड़ों से ऊपर उठ जाता और बेला के भारी चूतड़ों का दीदार सोनू को हो जाता।
बेचारे को क्या पता था कि वो दो चूत की आग के बीच में झुलस रहा है, जो कल से एक-दूसरे के हर पैंतरे को नाकामयाब करने के कोशिश कर रही थी।
अब सोनू के बर्दाश्त से बाहर हो जा रहा था, बेला जानबूझ कर अपने पैरों के बल बैठी हुई, बार-बार अपनी गाण्ड को ऊपर उठा लेती और पीछे बैठे सोनू को बेला के गाण्ड और झाँटों से भरी चूत की झलक पागल कर देती।
सोनू का लण्ड अब उसके पजामे में पूरी तरह तना हुआ था।
बेला ने अपने कपड़े धोए और उठ कर अपने कपड़े उठाने के लिए झुकी- आह्ह.. क्या क्या कर रहा है छोरे, यहाँ कोई देख लेगा.. हट जा अपनी मालकिन के पाँव दबा..
बेला ने सोनू को दूर धकेल दिया और अपने कपड़ों को घास पर डाल कर झाड़ियों के अन्दर जाने लगी।
यह देख सोनू भी उसके पीछे चला गया।
‘क्या है.. अब आराम से मूतने भी नहीं देगा क्या.. पीछे क्यों आ रहा है?’
बेला ने जानबूझ कर गुस्सा दिखाते हुए कहा।
सोनू- पर काकी हुआ क्या है, मुझसे कोई ग़लती हो गई क्या?
बेला ने सोनू की बात का कोई जवाब नहीं दिया और थोड़ा आगे जाकर अपने लहँगे को अपनी कमर तक उठा कर पेशाब करने के लिए बैठ गई।
बेला सोनू से कुछ दूरी पर बैठी मूत रही थी और अब सोनू के लिए रुक पाना नामुमकिन था, वो आगे बढ़ा और बेला के पास जाकर नीचे बैठ गया।
बेला के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई- देखा, कैसे कुत्ते की तरह चूत को सूँघता हुआ पीछे बैठ गया है..
बेला ने अपने मन में सोचा, उसके होंठों पर लंबी मुस्कान फैली हुई थी जैसे उसने कोई जंग जीत ली हो।
तभी अचानक सोनू ने बेला के चूतड़ों के नीचे से ले जाकर बेला की चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर ज़ोर से मसल दिया।
बेला एकदम से सिसक उठी।
पेशाब तो वो कर चुकी थी, बस अपनी गाण्ड और चूत दिखा कर सोनू को तड़फा रही थी.
‘उफफ्फ़ हट हरामीई ओह.. सोनू बेटा.. ये जगह ठीक नहीं है ओह सोनू..’
इससे पहले कि बेला कुछ और बोल पाती, सोनू ने अपनी दो उँगलियों को एक साथ बेला की चूत में पेल दिया।
बेला बुरी तरह छटपटाते हुए खड़ी हो गई, पर सोनू अपनी उँगलियों को तेज़ी से बेला की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
सोनू भी खड़ा हो गया और एक हाथ से बेला के गदराए हुए पेट को पकड़ कर दूसरे हाथ को पीछे से उसकी चूत में डाल कर उँगलियों को अन्दर-बाहर कर रहा था।
बेला सोनू छूटने की कोशिश कर रही थी, जिससे वो आगे की ओर झुकने लगी और उसकी गाण्ड पीछे से और बाहर को आ गई।
बेला- ओह्ह.. रुक जा रे छोरे.. क्या कर रहा हाईईईई ओह माआआ रुक आह्ह.. आह्ह… सुन नाअ.. चल घर चलते हैं.. यहाँ कोई देख लेगा बेटा।
सोनू बेला की बात सुन कर खुश हो गया और उसने बेला की चूत में से अपनी ऊँगलियाँ निकाल लीं।
जैसे ही बेला सोनू के गिरफ़्त से बाहर हुई, वो हँसती हुई आगे भाग गई।
‘तू अब जा अपनी मालकिन के पैर दबा..’ बेला ने हँसते हुए कहा और आगे बढ़ने लगी।
सोनू का पारा सातवें आसमान पर जा पहुँचा.. और तेज़ी से भाग कर बेला को पीछे से पकड़ लिया।
सोनू- ओह्ह.. तो अच्छा ये बात है, तुम्हें मालकिन से जलन हो रही है ना।
बेला- जले मेरे जूती.. तू जा यहाँ से..
सोनू ने बेला को पीछे से बाँहों में भर लिया और उसके पेट को सहलाते हुए उसके पीठ पर अपने होंठों को रगड़ने लगा, बेला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई, पर फिर भी अपने पर काबू करते हुए बोली- नहीं.. यहाँ नहीं.. तू जा अभी.. मुझे घर जाने दे, मुझे अभी बहुत काम हैं..
सोनू- अब गुस्सा छोड़ो भी काकी.. मैं भी तो तुम्हारी तरह नौकर हूँ और उनकी बात ना आप टाल सकती हैं और ना ही मैं… इसमें मेरी क्या ग़लती है?
यह कहते हुए सोनू के हाथ बेला की चूचियों पर पहुँच चुके थे और उसने धीरे-धीरे बेला की चूचियों को दबाना चालू कर दिया।
बेला की आँखें मस्ती में धीरे-धीरे बंद होने लगीं।
सोनू ने बेला को अपनी तरफ घुमाया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला- अब और मत तड़पाओ काकी.. यह देखो मेरे लण्ड कैसे तेरी फुद्दी में जाने के लिए तरस रहा है..
यह कह कर सोनू ने बेला का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया और फिर सोनू ने अपना हाथ बेला के जाँघों के बीच घुसा दिया।
बेला अपनी अधखुली मस्ती से भरी आँखों से सोनू की तरफ देखते हुए बोली- अगर कोई आ गया तो?
सोनू ने बेला की चूत की फांकों में अपनी उँगलियों को फिराया और फिर बेला की चूत के दाने को अपनी उँगलियों के नीचे दबा कर मसलना चालू कर दिया।
‘कोई नहीं आएगा काकी..’
बेला छटपटाते हुए सोनू से लिपट गई और सोनू के लण्ड को पजामे के ऊपर से तेज़ी से हिलाने लगी।
सोनू ने बेला के होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसना चालू कर दिया और बेला ने सोनू के पजामे का नाड़ा खोल दिया।
सोनू का पजामा उसकी जाँघों में आकर अटक गया।
बेला ने अपनी कामुक नज़रों से एक बार सोनू के तने हुए 8 इंच लंबे लण्ड की ओर देखा और बोली- तेरा ये मूसल सा लौड़ा मेरे दिमाग़ पर ऐसा छाया हुआ है कि मैं तो इससे चाह कर भी भूल नहीं सकती।
सोनू ने बेला के आँखों में देखा और फिर से उसके होंठों पर होंठों को रख दिया।
बेला ने अपनी आँखें बंद कर लीं..दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे।
सोनू ने अपनी जीभ बेला के होंठों में पेल दी और बेला उसकी जीभ ऐसे चाटने लगी, जैसे कोई कुल्फी हो।
फिर अचानक बेला ने अपने होंठों को सोनू के होंठों से अलग किया और अपने लहँगे का नाड़ा खोल दिया, जो कि उसकी चूचियों पर बँधा हुआ था।
नाड़ा खुलते ही बेला के पैरों मैं आ गिरा, बेला ने उस लहँगे को उठाया और एक बड़े से पेड़ की तरफ बढ़ी और फिर उसने लहँगे को पेड़ के नीचे रख दिया और सोनू को उसके ऊपर बैठने को कहा।
सोनू भी अपना पज़ामा संभालते हुए उस पेड़ के नीचे आकर लहँगे के ऊपर बैठ गया।
उसने अपनी पीठ को पेड़ के तने से टिका लिया, उसने अपने पैरों को लंबा करके पहला रखा था।
बेला उसके पैरों के दोनों तरफ टाँगें करके खड़ी हो गई और फिर नीचे बैठते हुए सोनू के लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा कर धीरे-धीरे अपनी चूत को सोनू के लण्ड के सुपारे के ऊपर दबाने लगी।
सोनू के लण्ड का मोटा सुपारा बेला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर जाने लगा।
बेला अपनी चूत के छेद पर सोनू के लण्ड के गरम सुपारे का अहसास पाते ही सिसयाने लगी- ओह सीईईईई.. सोनू तू मुझे पागल बना कर छोड़ेगा ओह.. कितना मोटा है.. रे.. तेराअ…
जैसे ही सुपारा बेला की चूत में घुसा.. सोनू ने बेला की कमर को दोनों तरफ से पकड़ कर नीचे की तरफ दबा दिया।
बेला की गीली हो चुकी चूत में सोनू का लण्ड फिसजया हुआ अन्दर जा घुसा।
‘ओह्ह छोरे.. क्या कर रहा है, ज़रा भी सबर नहीं है.. ओह मार दियाआ रेए… ओह रुक जा ओह आह्ह.. ओह!’
सोनू नीचे से लगातार अपनी कमर को हिलाते हुए बेला की चूत में अपना लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा।
उसके लण्ड ने बेला की चूत के छेद को बुरी तरह फैलाया हुआ था।
बेला की आँखें मस्ती में बंद हो गई, सोनू ने उसके ऊपर-नीचे हो रही चूचियों में से एक को मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।
बेला- ओह सोनू.. धीरे-धीरे अई बेटा.. ओह हाँ.. चूस ले.. बेटा मेरी चूची.. ओह सोनू हाँ.. ऐसे मसल…ऊऊओ मेरी गाण्ड कूऊऊ सलिएईई सब के नज़रें इसी पर रहती हैं.. ओह.. बेटा चोद अपनी काकी को.. चोद डाल बेटा.. अपनी काकी की फुद्दीई ओह..
बेला अपने पैरों के बल बैठ गई और सोनू के कंधों को पकड़ कर पागलों की तरह अपनी गाण्ड को ऊपर-नीचे उछालने लगी, लण्ड तेज़ी से बेला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था।
बेला की चूत से निकल रहे कामरस से सोनू का लण्ड पूरी तरह भीग गया था, जिससे उसका लण्ड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ अन्दर-बाहर हो रहा था।
सोनू ने अब अपनी कमर हिलाना बंद कर दिया था और दोनों हाथों से बेला के चूतड़ों को मसलते हुए, उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूस रहा था।
खुले आसमान के नीचे चुदाई का जबरदस्त दौर चल रहा था।
बेला- ओह्ह.. बेटा ले.. मजा आ रहा है नाआअ.. अपनी काकी की फुद्दी मार कर्ररर.. ओह बेटा ले चूस्स्स लेए जीईए भरररर तुन्न्न् मुझसे नाराज़ तो नहीं हाईईईईई ओह…
सोनू- नहीं काकी मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ।
बेला ने सोनू को ज़ोर से अपने बदन से चिपका लिया और सोनू ने भी बेला के चूतड़ों को फैला कर अपनी एक ऊँगली उसके गाण्ड के छेद में घुसा दी।
बेला एकदम तड़फ उठी और होंठों पर कामुक मुस्कान लाकर बोली- क्या इरादा है.. तेरा..आँ.. मेरी गाण्ड में ऊँगली कर रहा है।
सोनू इस पर कुछ नहीं बोला और धीरे-धीरे अपनी ऊँगली से उसकी गाण्ड के छेद को कुरदने लगा।
बेला अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी और पूरी रफ़्तार से अपनी गाण्ड उछाल-उछाल कर सोनू का लण्ड अपनी फुद्दी में ले रही थी।
अब उसकी चूत में सरसराहट और बढ़ गई थी।
उसका पूरा बदन काँपने लगा और फिर बेला का बदन एकदम से अकड़ गया और वो सोनू के ऊपर पसर होकर लुड़क गई।
सोनू के लण्ड ने भी लावा छोड़ दिया।
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08-23-2019, 01:17 PM,
#36
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
बेला को चोदने के बाद सोनू सामान लाने के शहर चला गया और बेला अपने घर चली गई।
दूसरी तरफ रजनी अपने कमरे में कान्ति देवी के साथ बैठी बातें कर रही थी।
ऊपर से तो भले ही वो कान्ति देवी के साथ हंस-हंस कर बातें कर रही थी, पर मन ही मन वो उससे गालियाँ दे रही थी।
‘और सुना बहू, नई दुल्हन लाने के बाद बेटा चन्डीमल तेरी तरफ ध्यान देता है कि नहीं?’ कान्ति देवी ने बातों-बातों में रजनी से पूछा। रजनी बेचारा सा मुँह लेकर बैठ गई।
‘ये सारे मर्द ना.. एक ही जात के होते हैं.. पर तू फिकर ना कर, भगवान के घर देर है.. अंधेर नहीं..’
रजनी ने उदास होते हुए कहा- पर मुझे तो लगता है भगवान ने मेरे लिए अंधेरा ही रखा है, अब तो वो मुझसे सीधे मुँह बात भी नहीं करते।
कान्ति- बोला ना.. सब मर्दों की एक ही जात होती है.. अपने अनुभव से बोल रही हूँ। कुछ दिन उसको नई चूत का चाव रहेगा, देखना बाद मैं सब ठीक हो जाएगा.. अच्छा चल मैं एक बार घर भी हो आती हूँ.. वहाँ की खबर भी ले लूँ।
उधर सोनू बाज़ार से सामान खरीद कर वापिस गाँव आ चुका था।
अब दोपहर के 12 बज चुके थे।
जैसे ही सोनू घर में दाखिल हुआ, वो सीधा रजनी के कमरे में चला गया।
बेला भी आ चुकी थी और खाना बना रही थी।
सोनू ने रजनी के कमरे में जाकर कहा- मालिकन सामान ले आया हूँ।
रजनी- इतनी देर कहाँ लगा दी।
सोनू- वो मालकिन ये जगह मेरे लिए नई है ना…इसलिए देर हो गई।
रजनी- अच्छा ठीक है, जा रसोई में सामान रख दे और कुछ देर आराम कर ले।
सोनू जैसे ही रसोई में जाने लगा।
रजनी भी उसके साथ रसोई में आ गई।
वो किसी भी कीमत पर सोनू और बेला को एक पल के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी।
सोनू सामान रख कर पीछे अपने कमरे में चला गया।
बेला खाना बना कर अपना और अपनी बेटी का खाना साथ लेकर अपने घर वापिस चली गई।
अब रजनी घर पर अकेली थी और सोनू पीछे अपने कमरे में था।
भले ही रजनी के पास ज्यादा समय नहीं था, पर रजनी ये वक्त भी बर्बाद नहीं करना चाहती थी।
वो जानती थी कि चाची कान्ति किसी भी वक्त टपक सकती है।
रजनी ने सबसे पहले मैं दरवाजा बंद किया और फिर घर के पीछे चली गई।
सोनू के कमरे में पहुँच कर उसने देखा कि सोनू अन्दर पलंग पर लेटा हुआ सो रहा था।
रजनी ने एक बार उसे अपनी हसरत भरी आँखों से ऊपर से नीचे तक देखा, फिर उसके पास जाकर उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसे आवाज़ दी।
सोनू ने अपनी आँखें खोलीं, तो रजनी को अपने ऊपर झुका हुआ पाकर वो एकदम से हड़बड़ा गया और उठ कर बैठ गया।
सोनू- क्या हुआ मालकिन आप आप यहाँ?
रजनी- उठो.. खाना तैयार है, आकर खाना खा ले।
रजनी ने एक बार फिर से सोनू के बालों में प्यार से हाथ फेरा और पलट कर बाहर चली गई।
सोनू को ये सब कुछ अजीब सा लगा, पर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और उठ कर घर के आगे की तरफ आ गया।
पूरे घर मैं सन्नाटा छाया हुआ था, बस रसोई से बर्तन की आवाज़ आ रही थी।
सोनू रसोई में गया, यहाँ पर रजनी एक प्लेट मैं खाना डाल रही थी- आ गया तू.. चल बाहर जाकर बैठ.. मैं खाना लेकर आती हूँ।
सोनू- रहने दीजिए ना मालकिन.. मैं खुद ले लेता हूँ।
रजनी- हाँ मैं जानती हूँ, तू बड़ा होशियार है.. सब खुद ले लेता है।
सोनू रजनी के दोअर्थी बात सुन कर थोड़ा सा झेंप गया।
उसे भी शक हो गया कि हो ना हो रजनी को उसके और बेला के रंगरेलियों के खबर लग चुकी है।
वो चुपचाप बाहर आकर बैठ गया, थोड़ी देर बाद रजनी रसोई से बाहर आई।
उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कमर पर लपेट रखा था और उसकी 38 साइज़ की चूचियां उसके ब्लाउज में ऐसे तनी हुई थीं, जैसे हिमालय की चोटियाँ हों।
इस हालत में सोनू के सामने आने मैं रजनी को ज़रा भी झिझक महसूस नहीं हो रही थी।
रजनी- अरे नीचे क्यों बैठ गया तू.. उठ ऊपर उस कुर्सी पर बैठ जा.. नीचे फर्श बहुत ठंडा है, सर्दी लग जाएगी।
सोनू- नहीं मालकिन.. मैं यहीं ठीक हूँ।
रजनी- अरे घबरा मत.. ऊपर बैठ जा.. घर पर कोई नहीं है।
सोनू बिना कुछ बोले कुर्सी पर बैठ गया, रजनी ने उससे खाना दिया और खुद सामने पलंग पर जाकर बैठ गई।
सोनू सर झुकाए हुए खाना खाने लगा, रजनी उसकी तरफ देख कर ऐसे मुस्करा रही थी..जैसे शेरनी अपने शिकार होने वाले बकरे को देख कर खुश होती है।
सोनू तो ऐसे सर झुकाए बैठा था, जैसे वहाँ और कोई हो ही ना।
रजनी जानती थी कि इस उम्र के लड़कों को कैसे लाइन पर लिया जाता है।
वो पलंग पर लेट गई, उसने अपनी टाँगों को घुटनों से मोड़ कर पलंग के किनारे पर रख दिया और अपनी साड़ी और पेटीकोट को अपने घुटनों तक चढ़ा लिया, ताकि सोनू उसकी चिकनी चूत का दीदार कर सके।
टाँगों के फैले होने के कारण साड़ी में इतनी खुली जगह बन गई थी कि सामने बैठे सोनू को रजनी की चूत साफ़ दिखाई दे सके, पर सोनू को तो जैसे साँप सूँघ गया था, वो सर झुकाए हुए खाना खा रहा था।
‘अबे गांडू.. मादरचोद.. थाली में तेरी माँ चूत खोल कर बैठी है.. जो तेरी नज़रें वहाँ से हट नहीं रही हैं.. यहाँ मैं अपनी चूत खोल कर बैठी हूँ।’
रजनी ने मन ही मन सोनू को कोसा, पर सोनू तक रजनी के मन की बात नहीं पहुँची।
उसने खाना खत्म किया और उठ कर अपनी प्लेट रखने के लिए रसोई में चला गया।
जब सोनू रसोई में प्लेट रखने के लिए जा रहा था, तब रजनी को सोनू के जेब में से कुछ खनकने की आवाज़ सुनाई दी।
जिससे रजनी थोड़ी चौंक गई।
सोनू जब प्लेट रख कर वापिस आया तो रजनी ने उससे अपने पास बुला लिया।
रजनी पलंग पर बैठते हुए- अरे सोनू इधर आ.. क्या है तेरी जेब में?
रजनी की बात सुन कर सोनू का रंग उड़ गया।
जब वो शहर गया था.. तो वहाँ से वो बेला के लिए पायल खरीद कर लाया था, पर बेला को देने का मौका नहीं मिला था।
अब वो बेचारा क्या कहता कि जो पैसे रजनी ने उस रात सोनू को दिए थे, उसमें से वो बेला के लिए पायल ले आया है।
सोनू को यूँ चुप खड़ा देख कर रजनी ने फिर से सोनू से पूछा, पर अब सोनू कर भी क्या सकता था, चारों तरफ से फँस चुका था।
‘वो मालकिन.. वो पायल है..’
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08-23-2019, 01:17 PM,
#37
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
रजनी थोड़ा परेशान होते हुए- पायल कहाँ से लाया तू.. दिखा निकाल कर..
सोनू ने पायल निकाल कर रजनी की तरफ बढ़ा दी।
‘क्यों रे, कहाँ से लाया और क्या करेगा इसका?’
सोनू- वो मालकिन जब मैं शहर गया था ना.. तब खरीदी थी।
सोनू के हाथ-पैर डर के मारे काँप रहे थे।
रजनी गुस्से से सोनू की ओर देखते हुए- सच-सच बोल.. किसने कहा था.. पायल लाने के लिए?
रजनी की कड़क आवाज़ सुन कर सोनू की तो मानो जैसे गाण्ड फट गई हो।
उसका चेहरा ऐसे लटक गया जैसे अभी रो पड़ेगा।
‘किसी ने नहीं कहा मालकिन..’
रजनी- तो फिर किसके लिए लाया था और बोल तुम्हारे पास पैसे कहाँ से आए?
सोनू- वो.. वो.. मालकिन..!
यह कहते-कहते सोनू एकदम चुप हो गया और सर झुका कर रजनी के सामने खड़ा हो गया, जैसे उसने बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो।
रजनी- देख.. मैं कहती हूँ, अगर तू अपनी भलाई चाहता है, तो सब सच-सच मुझे बता दे.. वरना अगर सेठ जी को मैंने बता दिया तो तेरी खैर नहीं.. बोजया क्यूँ नहीं.. बोल?
सोनू- वो मालकिन आपने उस रात को मुझे रुपये दिए थे ना..
रजनी को याद आया कि रात को उसने सोनू को रुपए दिए थे।
‘हाँ तो.. तू उससे जाकर ये पायल ले आया.. चल ठीक है.. अब ये भी बता किसके लिए लाया था?’
सोनू- वो.. वो.. मालकिन…
रजनी- अब ये ‘वो.. वो..’ बंद कर.. सच-सच बता दे मुझे?
सोनू- आपके लिए मालकिन।
गाण्ड फ़टती देख कर सोनू ने अपना पासा पलट दिया।
सोनू की बात सुन कर रजनी के चेहरे पर हैरानी और खुशी के भाव उमड़ पड़े।
उसके होंठों पर लंबी मुस्कान फ़ैल गई।
‘तू सच बोल रहा है ना?’ रजनी ने आँखें टेढ़ी करते हुए पूछा।
सोनू ने बस ‘हाँ’ में सर हिला दिया।
रजनी- मेरे लिए लाया था ये पायल?
सोनू- हाँ मालकिन।
यूँ तो रजनी को गहनों की कमी नहीं थी। वो हर समय सोने के जेवरों से लदी रहती थी, पर आज चाँदी की ये पायल जो सोनू लाया था, उसे पाकर आज उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
‘पर मेरे लिए क्यों खरीदा? वो पैसे तो मैंने तुम्हें खुश होकर दिए थे।’
सोनू- वो मालकिन.. आप मेरा कितना ख्याल रखती हैं.. मुझे कभी महसूस नहीं होने देती कि मैं एक नौकर हूँ.. इसलिए आपके लिए लाया था।
रजनी- झूठ.. तुम झूठ बोल रहे हो.. मैं नहीं मानती।
रजनी ने जानबूझ कर सोनू को ऐसा कहा।
सोनू- नहीं मालकिन.. कसम से आपके लिए ही लाया था।
रजनी- अच्छा तो फिर जेब में लेकर क्यों घूम रहा था.. मुझे दी क्यों नहीं?
सोनू- वो मालकिन वो वो.. मैं मुझे शरम आ रही थी।
रजनी- ना.. मैं तो तभी मानूँगी, जब तू ये पायल मुझे खुद पहनाएगा.. कि तू मेरे लिए ही ये लाया था।
यह कह कर रजनी ने अपनी साड़ी को घुटनों तक ऊपर कर लिया।
अब सोनू के पास और कोई चारा नहीं था, वो नीचे पैरों के बल बैठ गया, रजनी ने बड़ी ही अदा के साथ अपना एक पैर सोनू की जांघ के ऊपर रख दिया।
सोनू उस पैर में पायल पहनाने लगा।
सोनू की नजरें बार-बार रजनी की मांसल और चिकनी टाँगों की तरफ जा रही थीं।
यह सब देख कर रजनी के होंठों पर मुस्कान बढ़ती जा रही थी।
जैसे ही रजनी के एक पैर में पायल पड़ी, रजनी ने वो पैर सरका कर दूसरा पैर भी उसकी जांघ पर रख दिया।
‘ले अब इसमें भी पहना दे..’
पहले वाले पैर की ऊँगलियाँ सीधा सोनू के लण्ड से जा टकराईं। अब तक बेजान पड़े.. सोनू के लण्ड को जैसे करेंट लगा हो और उसमें जैसे जान आ गई हो, उसका लण्ड पजामे में फूलने लगा। जिसे रजनी महसूस कर सकती थी..
उसके लण्ड से उठ रही गर्मी को अपने पाँव के तलवों में महसूस करते ही.. उसकी चूत में सरसराहट होने लगी।
‘अरे रुक क्यों गया.. ‘डाल’ ना..’
रजनी ने बड़ी सी अदा से मुस्कुराते हुए कहा।
जैसे कह रही हो..अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दे, बेचारा सोनू दूसरे पाँव में पायल डालने लगा।
जो तोहफा वो बेला के लिए लाया था.. वो रजनी की हवस का शिकार होकर उसके पाँव में आ चुका था।
तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।
रजनी बुदबुदाते हुए- आ गई बुढ़िया कवाब में हड्डी बनने…
सोनू- क्या मालकिन?
रजनी- कुछ नहीं.. अब तू जाकर आराम कर.. शहर से आकर थक गया होगा।
सोनू उठ कर पीछे चला गया और रजनी खिसयाते हुए बाहर आकर दरवाजा खोला.. बाहर कान्ति देवी खड़ी थी। रजनी को उस पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था, पर वो उसके समय कर भी क्या सकती थी।
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08-23-2019, 01:17 PM,
#38
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
कान्ति देवी अन्दर आते हुए- बाहर बहुत ठंड है ना..?
रजनी झूठी मुस्कान अपने होंठों पर लाते हुए- जी चाची जी।
कान्ति- दरअसल मैं तुम्हें ये बताने आई थी कि मैं आज सुषमा के घर जा रही हूँ, उसके पोते की शादी है ना कल.. तो मैं आज रात नहीं रुक पाऊँगी.. ठीक है.. अब मैं चलती हूँ।
रजनी- जी चाची जी.. आप मेरी फिकर ना करें।
जैसे ही कान्ति के जाने के बाद रजनी ने दरवाजा बंद किया, रजनी ख़ुशी से उछल पड़ी, जैसे उसे मुँह-माँगी मुराद मिल गई हो।
अभी शाम के 4 बज चुके थे.. अब रजनी अपने और सोनू के बीच किसी को नहीं आने देना चाहती थी।
बेला के आने का वक्त भी हो रहा था।
बेला और रजनी दोनों एक-दूसरे को खूब अच्छी तरह से जानती थी। इसलिए रजनी के मन में ये शंका थी कि बेला हो ना हो बीच में अपनी टाँग जरूर अड़ाएगी।
तभी रजनी कुछ ऐसा सूझा, जिससे उसके होंठों की मुस्कान और बढ़ गई।
वो घर के पीछे बने सोनू के कमरे की तरफ गई और बाहर से ही सोनू को आवाज़ दी। रजनी की आवाज़ सुन कर सोनू बाहर आया।
सोनू- जी मालकिन।
रजनी- सुन.. तू ऐसा कर आज शहर चला जा दुकान पर.. तुम्हें तो पता है कि सेठ जी नहीं है, आज वहाँ जाकर थोड़ा काम देख ले कि वहाँ के लोग ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं.. दुकान बंद होते ही घर आ जाना और हाँ.. वहाँ शहर में ही कुछ खा लेना, लौटने में तुम्हें देर हो जाएगी।
सोनू- जी मालकिन.. मैं अभी चला जाता हूँ।
सोनू घर से निकल कर शहर की तरफ चल दिया।
शहर गाँव से कोई 3-4 किलोमीटर दूर था, पैदल चल कर भी वहाँ 20-25 मिनट में पहुँचा जा सकता था।
उधर सोनू के जाने के बाद बेला घर पर आ गई और घर के छोटे-मोटे काम करने लगी।
रजनी- बेला सुन।
बेला- जी दीदी।
रजनी- बेला.. वो आज सोनू का खाना मत बनाना, वो शहर गया है.. आज रात वो दुकान पर ही रुकेगा.. खाना भी वहीं खा लेगा।
बेला रजनी की बात सुन बेला उदास हो गई- जी दीदी।
आज बेला का मन भी काम में नहीं लग रहा था।
उसे रह-रह कर सोनू की याद आ रही थी।
उसने बेमन से खाना तैयार किया और अपनी बेटी और अपना खाना लेकर घर वापिस चली गई।
रात के 8 बजे सोनू दुकान बंद होने के बाद सोनू घर वापिस आने के लिए शहर से गाँव की ओर चला..
चारों तरफ घना कोहरा छाया हुआ था।
रात के अंधेरे और सन्नाटे की सरसराहट से उसकी गाण्ड फट रही थी। सुनसान रास्ते पर चलते हुए.. मानो उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो।
वो बार-बार पीछे मुड़ कर देखता.. पर पीछे कोई नहीं होता।
सोनू की हालत खराब होती जा रही थी। सड़क के दोनों तरफ खेत थे.. गन्ने की फसल में हवा चलने से अजीब से सरसराहट हो रही थी। ऐसा लगता मानो अभी खेतों में से कोई निकल कर उसे धर दबोचेगा..
पर यह सिर्फ़ सोनू का वहम था।
डर के मारे उसके हाथ-पैर थरथर काँप रहे थे।
फिर अचानक से खेतों में से एक नेवला बड़ी तेज़ी से सड़क पार करके दूसरे तरफ के खेतों में गया।
सोनू तो डर के मारे चीख पड़ा, पर इतने सुनसान रास्ते पर उसकी चीख सुनने वाला भी नहीं था।
उसे ऐसा लग रहा था कि उसके दिल के धड़कनें रुक जाएंगी।
जैसे-तैसे सोनू किसी तरह गाँव पहुँचा और चैन की साँस ली। उसने सोच लिया था कि वो रजनी को बोल देगा कि वो आगे से रात को शहर अकेला नहीं जाएगा, वो बुरी तरह से डरा हुआ था।
उसने दरवाजे पर दस्तक दी।
रजनी तो जैसे उसके ही इंतजार में बैठी थी।
रजनी- कौन है बाहर?
सोनू- जी.. मैं हूँ सोनू।
सोनू की आवाज़ सुनते ही, रजनी के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई।
उसने जल्दी से दरवाजा खोला।
जैसे दरवाजा खुला सोनू ऐसे अन्दर आया..जैसे उसकी मौत उसके पीछे लगी हो, उसका डरा हुआ चेहरा देख रजनी भी घबरा गई।
सोनू सीधा अन्दर चला गया.. रजनी ने दरवाजा बंद किया और सोनू के पीछे आँगन में आ गई।
‘क्या हुआ रे इतना घबराया हुआ क्यों है?’
सोनू नीचे चटाई पर बैठ गया, वो सच में बहुत डरा हुआ था। भूत देखा तो नहीं पर उसने भूतों के बारे में सुना ज़रूर था।
‘वो.. वो.. मैं मुझे रास्ते में डर लग रहा था।’ सोनू ने घबराहट में हड़बड़ाते हुए कहा।
रजनी- डर लग रहा था.. किससे?
सोनू- वो रास्ते में बहुत अंधेरा था, मैं आगे से रात को नहीं जाऊँगा।
रजनी को सोनू के भोलेपन पर हँसी आ गई।
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08-23-2019, 01:17 PM,
#39
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
‘मैं आज यहीं सो जाऊँ मालकिन.. मुझे आज बहुत डर लग रहा है?’ सोनू ने रजनी की तरफ देखते हुए कहा।
सोनू की बात सुन कर रजनी को ऐसा लगा.. मानो आज उसकी मन की मुराद पूरी होने को कोई नहीं रोक सकता।
रजनी खुश होते हुए- हाँ.. हाँ.. क्यों नहीं.. यहाँ क्यों तू मेरे कमरे में सो जाना। इसमें डरने की क्या बात है.. खाना तो खाया ना तूने?
सोनू- हाँ मालकिन.. खाना खा लिया था।
रजनी- तू चल मेरे कमरे में.. मैं अभी आती हूँ।
यह कह कर रजनी रसोई में आ गई।
सोनू को अब भी ऐसा लग रहा था, जैसे उसके पीछे कोई हो।
वो डरता हुआ रजनी के कमरे में आ गया, वो सहमा हुए खड़ा था।
थोड़ी देर बाद अचानक रजनी के अन्दर आने की आहट सुन कर सोनू बुरी तरह हिल गया, पर जब रजनी को उसने देखा.. तो उसकी साँस में साँस आई।
रजनी हाथ में गिलास लिए खड़ी थी।
उसने गिलास को मेज पर रखा और मुड़ कर दरवाजा बंद कर दिया।
दरवाजा बंद करने के बाद उसने ओढ़ी हुई शाल को उतार कर टाँग दिया।
सोनू की हालत का अंदाज़ा रजनी को हो चुका था, अब वो इस मौके को जाया नहीं होने देना चाहती थी।
वो गिलास को मेज पर से उठाते हुए बोली- तू अभी तक खड़ा है, चल बैठ जा पलंग पर.. और ये ले पी ले।
रजनी ने हाथ में पकड़ा हुआ गिलास सोनू की तरफ बढ़ा दिया।
सोनू- यह क्या है मालकिन?
रजनी- दूध है.. गरम है.. पी ले.. ठंड कम हो जाएगी।
सोनू- इसकी क्या जरूरत थी… मालकिन?
रजनी- ले पकड़ और पी जा..अब ज्यादा बातें ना बना।
सोनू ने रजनी के हाथ से गिलास ले लिया और खड़े-खड़े पीने लगा।
रजनी बिस्तर के सामने खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उतारने लगी.. सोनू दूध का घूँट भरते हुए उसके गदराए बदन को देख रहा था, कमरे में लालटेन की रोशनी चारों तरफ फैली हुई थी।
रजनी ने होंठों पर कामुक मुस्कान लिए हुए अपने मम्मे उठाते हुए सोनू से कहा- आराम से बैठ कर ठीक से ‘दूध’ पी, ऐसे कब तक खड़ा रहेगा।
जो रजनी बोलने वाली थी, सोनू को कुछ-कुछ समझ में आ गया था, पर सोनू ने उस तरफ़ ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
रजनी ने अपनी साड़ी उतार कर रख दी।
अब उसके बदन पर महरून रंग का ब्लाउज और पेटीकोट ही शेष था।
रजनी उसमें में बला की खूबसूरत लग रही थी।
सोनू अपनी नज़रें रजनी पर से हटा नहीं पा रहा था।
रजनी बिस्तर पर आकर बैठ गई और सोनू के सर को सहलाते हुए बोली- अरे अंधेरे से क्या डरना.. तू रोज रात पीछे अकेला ही सोता है ना.. फिर आज कैसे डर गया तू?
सोनू- वो मालकिन मैं लालटेन जला कर सोता हूँ।
रजनी- अच्छा ठीक है, आगे से कभी तुझे रात को नहीं भेजूँगी.. चल अब आराम से ‘दूध’ पी ले।
सोनू- मालकिन वो मुझसे पिया नहीं जा रहा है।
रजनी- क्यों क्या हुआ?
सोनू- आपने इसमें घी क्यों डाल दिया? मुझे दूध मैं घी पसंद नहीं है।
रजनी- तेरे लिए अच्छा है घी.. पी जा मुझे पता है.. आज कल तू बहुत ‘मेहनत’ करता है।
रजनी की बात सुन कर सोनू एकदम से झेंप गया।
सोनू ने दूध खत्म किया और गिलास को मेज पर रख दिया।
जैसे ही सोनू ने गिलास को मेज पर रख कर मुड़ा तो उसने देखा कि रजनी रज़ाई के अन्दर घुसी हुई उसकी तरफ खा जाने वाली नज़रों से देख रही है।
‘अब वहाँ खड़ा क्या है… सोना नहीं है क्या?’
रजनी ने सोनू से कहा..
पर सोनू को समझ में नहीं आ रहा था कि वो सोएगा कहाँ? क्योंकि वो रजनी के साथ बिस्तर पर तो सोने के बारे में सोच भी नहीं सकता था।
सोनू- पर मालकिन मैं कहाँ लेटूँगा?
रजनी- अरे इतना बड़ा पलंग है.. यहीं सोएगा और कहाँ?
सोनू- आपके साथ मालकिन.. पर..!
रजनी- चल कुछ नहीं होता.. आ जा।
यह कह कर रजनी ने एक तरफ से रज़ाई को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया, सोनू काँपते हुए कदमों के साथ बिस्तर पर चढ़ गया और रजनी के साथ रज़ाई में घुस गया।
जैसे ही वो रजनी के पास लेटा… रजनी के बदन से उठ रही मंत्रमुग्ध कर देने वाली खुश्बू ने उससे पागल बना दिया। रजनी उसके बेहद करीब लेटी हुई थी।
दोनों एक-दूसरे के जिस्म से उठ रही गरमी को साफ़ महसूस कर पा रहे थे।
रजनी- सोनू बेटा.. मेरी जाँघों में बहुत दर्द हो रहा है, थोड़ी देर दबा देगा?
सोनू- जी मालकिन.. अभी दबा देता हूँ।
रजनी (पेट के बल उल्टा लेटते हुए)- सच सोनू तू कितना अच्छा है.. मेरा हर दिया हुआ काम कर देता है… चल ये रज़ाई हटा दे और मेरी जाँघों की अच्छे से मालिश कर दे।
जैसे ही रजनी ने सोनू को मालिश की बात बोली, उससे उस रात की घटना याद आ गई, जब रजनी ने अपनी जाँघों की मालिश करवाते हुए अपनी चूत का दीदार सोनू को करवाया था।
‘मालकिन.. तेल से मालिश करूँ?’ सोनू ने उत्सुक होते हुए पूछा।
रजनी- हाँ.. तेल ले आ और अच्छे से मालिश कर दे।
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08-23-2019, 01:18 PM,
#40
RE: Porn Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
सोनू बिस्तर से उतर कर सामने रखी तेल की बोतल उठा कर जैसे ही पलटा तो उसका कलेजा हलक में आ गया।
सामने रजनी उल्टी लेटी हुई थी.. पीछे से उसके भारी चूतड़ महरून रंग के पेटीकोट में पहाड़ की तरह उभरे हुए थे, जिसे देख कर सोनू का लण्ड फड़फड़ाने लगा और वहीं उसके पैर जम गए।
रजनी- वहाँ क्यों रुक गया.. चल आजा, बहुत सर्दी है।
सोनू- वो मालकिन मुझे बहुत तेज पेशाब आ रहा है।
रजनी- तो जाकर कर आ.. मैंने कहाँ रोक रखा है तुझे?
सोनू- पर वो मालकिन पीछे अंधेरा होगा।
रजनी (अपने सर को झटके हुए)- चल मैं तेरे साथ चलती हूँ।
जब दोनों कमरे से निकल कर घर के पीछे की तरफ आए तो उन्होंने देखा.. बाहर जोरों से बारिश हो रही है।
‘जा तू मूत के आ.. मैं यहीं खड़ी हुई हूँ.. नहीं तो मैं भी भीग जाऊँगी।’
सोनू ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और गुसलखाने की तरफ भागते हुए गया.. पर बारिश से बच ना पाया, उसके कपड़े एकदम गीले हो गए।
जब सोनू वापस आया तो रजनी ने देखा वो पूरी तरह से भीगा हुआ है।
रजनी- तू यहीं रुक.. मैं तेरे लिए कुछ लाती हूँ.. अगर गीले कपड़े अन्दर लेकर गया तो सारा घर गीला कर देगा।
यह कह कर रजनी अन्दर चली गई।
बारिश के कारण सर्दी और बढ़ गई थी। थोड़ी देर बाद जब रजनी वापिस आई.. तो उसके हाथ में एक लुँगी थी।
‘और तो कुछ मिला नहीं.. अब यही पहन ले..’ रजनी ने उसकी तरफ वो लुँगी बढ़ा दी और पलट कर कमरे के तरफ जाने लगी।
‘सारे कपड़े निकाल दे और इसे पहन कर अन्दर आ जा… बाहर बहुत सर्दी है।’
रजनी के जाने के बाद सोनू ने अपने गीले कपड़े उतारे और वो लुँगी पहन कर कपड़ों को वहीं टाँग दिया और कमरे के तरफ चल पड़ा।
जब सोनू रजनी के कमरे में पहुँचा तो रजनी बिस्तर पर लेटी हुई थी।
‘दरवाजा बंद कर दे।’ रजनी ने सोनू के बदन को घूरते हुए कहा।
उसकी नज़र सोनू के मांसल और चिकने बदन पर से हट नहीं रही थी, सोनू ने दरवाजा बंद किया और तेल की बोतल उठा कर रजनी के बिस्तर की तरफ बढ़ा।
रजनी ने देखा सोनू बुरी तरह से काँप रहा है, उसे सोनू पर तरस आ गया।
रजनी- अरे तू तो बहुत काँप रहा है.. चल छोड़ ये मालिश-वालिश आज.. लेट जा।
यह कह कर रजनी ने रज़ाई को एक तरफ से उठा कर अन्दर आने के लिए इशारा किया।
सोनू को यकीन नहीं हो रहा था कि वो पेटीकोट और ब्लाउज में लेटी हुई हुस्न की देवी रजनी के बेहद करीब सोने वाला है।
यह देखते और सोचते ही सोनू के बेजान लण्ड में जान पड़ने लगी और खड़ा होकर उसकी पहनी हुई लुँगी को आगे से उठाने लगा, जिस पर रजनी की नज़र पड़ते ही, रजनी के होंठों पर कामुक मुस्कान फ़ैल गई।
सोनू घबराते हुए रजनी के पास जाकर रज़ाई में घुस गया।
दोनों करवट के बल लेते हुए एक-दूसरे के बेहद नज़दीक लेटे हुए थे।
रजनी की गरम साँसें सोनू अपने चेहरे पर महसूस करके मदहोश हुआ जा रहा था, सर्दी और उत्तेजना के कारण उसका पूरा बदन थर-थर काँप रहा था, सोनू की हालत देख कर रजनी भी थोड़ा परेशान हो गई।
जो रजनी कुछ देर पहले वासना की आग में जल रही थी, सोनू की हालत देख कर उसकी वासना जैसे हवा हो गई।
अब तो उसे सच में सोनू की चिंता होने लगी थी.. उसने सोनू के दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर रगड़ना शुरू कर दिया।
रजनी ने सोनू के पास सरकते हुए कहा- तुम्हारे हाथ तो बरफ जैसे ठंडे पड़ गए हैं।
अब दोनों के बदन एक-दूसरे को छू रहे थे, रजनी के बदन की गरमी महसूस करते ही सोनू के बदन में जैसे आग लग गई हो.. उसके बदन से उठ रही मादक खुशबू से सोनू बेताब होता जा रहा था।
उसने अपने चेहरे को ब्लाउज से बाहर झाँक रही रजनी की चूचियों के पास ले गया।
रजनी जो आँखें बंद किए हुए सोनू के हाथों की हथेलियों को रगड़ कर गरम करने के कोशिश कर रही थी.. सोनू की गरम साँसों को अपनी चूचियों पर महसूस करते ही सिहर उठी।
रजनी ने अपनी आँखें खोल कर सोनू की तरफ देखा, सोनू अपनी अधखुली आँखों से रजनी की गुंदाज चूचियों की तरफ देख रहा था और उसके नकुओं से गरम हवा निकल कर उसकी चूचियों से टकरा रही थी, जिससे एक बार फिर वासना अपना असर रजनी के दिमाग़ पर दिखाने लगी।
वो एकटक सोनू के भोले-भाले चेहरे की तरफ देख रही थी।
उसके मासूम चेहरे को देख कर रजनी के दिल के अन्दर जो प्यार उमड़ रहा था, उसको बयान करना तो सिर्फ़ रजनी के बस की ही बात है।
रजनी ने सोनू के हाथों को छोड़ कर अपनी एक बाजू को उसकी कमर में डालते हुए सोनू को अपनी तरफ खींचा, जिससे सोनू जो कि अपनी अधखुली आँखों से रजनी की चूचियों को देख रहा था… वो होश में आया और अपनी आँखों को ऊपर करके रजनी की तरफ देखने लगा।
बदले में रजनी ने एक प्यार भरी मुस्कान के साथ उसके सर पर हाथ ले जाकर उसके बालों को सहलाते हुए उसके चेहरे को अपनी चूचियों से सटा लिया.. सोनू के लिए ये सीधा-सीधा संकेत था।
सोनू के दहकते हुए होंठ रजनी के फड़फ़ड़ाती हुई चूचियों के ऊपर वाले हिस्से पर जा लगे और अपनी चूचियों पर सोनू के होंठों को पा कर रजनी के बदन में करेंट सा दौड़ गया।
‘आह सोनू…’ कहते हुए उसने सोनू को और अपने से सटा लिया।
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