Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
08-16-2019, 12:06 PM,
#1
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घर के रसीले आम मेरे नाम

दोस्तो सबसे पहले आप सब को नये साल की शुभकामनाएँ . दोस्तो मैने सोचा है कि साल के पहले दिन की शुरुआत क्यों ना एक ऐसी रसीली कहानी से की जाए जिसे पढ़ कर आप को मज़ा आ जाय 
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08-16-2019, 12:07 PM,
#2
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
ए + ब का व्होल स्क़ायर = ए स्क़ायर + ब स्क़ायर फिर, लो मैं तो फिर भूल गई, फिर से ट्राइ करती हूँ, ए + बी का व्होल स्क़ायर = ए स्क़ायर, फिर क्या था, फिर उसके बाद, याद आ जा याद आ जा, क्या था, क्या था? ओफ्फ हो क्या यार यह मेद्स तो एक दिन मेरी जान लेकर छोड़ेगा. पता नही किस गधे ने यह मेद्स बना दिया रट्टा मारो तो याद नही होता है और समझो तो समझ नही आता है, क्या करूँ? क्या करूँ? एक बार फिर ट्राइ करती हूँ, ए + बी का व्होल स्क़ायर.

रश्मि, ओ रश्मि यह क्या रट्टा लगा रखा है? अपने मन में नही पढ़ सकती क्या? पूरा घर सर पर उठा रखा है.

रश्मि- मम्मी क्या करूँ? कल मैथ का पेपर है और मुझसे यह सब समीकरण याद ही नही होते हैं, मेरी तो जान निकली जा रही है पता नही कहीं फैल हो गई तो…

रजनी- अब समझ मे आ रहा है, जब में कहती थी कि जा अपने भैया से थोड़ा पढ़ ले तब तो तुझे समझ नही आया अब चली है मैथ का रट्टा मरने, अरे पगली कभी मैथ भी रट कर याद होती है क्या?

रश्मि (अपना मूह बना कर)- मुझे नही पढ़ना भैया से, भैया इतने बोर है कि जब मुझे पढ़ाते है तो मुझे नींद आने लगती है, उनसे पढ़ने से अच्छा है में मैथ मे सप्लाइ से ही पास हो जाउ, या फिर कोई भला टीचर मेरी कॉपी चेक करेगा तो शायद ग्रेस्स से ही पास कर दे. क्यो मम्मी किस्मत भी कोई चीज़ है, हो सकता है पास वाला स्टूडेंट मुझे अपनी पूरी कॉपी नकल करने को दे दे, फिर तो में पास भी हो सकती हूँ ना.

रजनी- बस बिना मतलब की बाते ही सोचती रहती है, पढ़ाई मे तो तेरा ध्यान ही नही लगता, पता नही तेरा क्या होगा, फैल हुई तो समझ लेना तेरा भाई तेरी जम कर खबर लेगा.

रश्मि (अपने मन मे बड़ी आई मुझे भैया का डर दिखाने वाली, भैया से डरे मेरी जूती, और वैसे भी पास भी हो गई तो कौन सा तीर मार दूँगी, यहाँ कौन सा राज सिहासन मिल जाएगा, इतने सालो से धक्के खा कर पास होती आई हूँ तो इस साल भी कहीं ना कहीं से तीर मे तुक्का लग ही जाएगा.)- मम्मी मुझे तो नींद आ रही है में तो अब नही पढ़ सकती, सुबह के पेपर का सुबह देखा जाएगा.

रजनी- अच्छा चल सो जा तुझे समझाना मेरे बस की बात नही है, अब जब राज आएगा तो वो ही तुझसे बात करेगा.

रश्मि (अपनी आँखे अपनी मम्मी को दिखाती हुई)- मम्मी अगर भैया से कुछ कहा तो समझ लेना, में भी कभी ना कभी तुमसे बदला ले लूँगी.

रजनी (उसको देख कर गुस्साते हुए) छीनाल रांड़ अपनी मम्मी को धमकी देती है, तू रुक में अभी तेरी टाँगे तोड़ देती हूँ. (और रश्मि की ओर जाती है और रश्मि अपनी मम्मी को देख कर मुस्कुराते हुए अपने रूम से भाग कर राज के रूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है.)

रजनी (उसके पीछे जाकर राज के रूम को बाहर से बंद करते हुए)- दुष्ट कही की अब अंदर ही सडती रह जब तेरा भाई आएगा तो वह ही तेरी खबर लेगा.

रश्मि- हाँ-हाँ कर दो दरवाजा बंद मुझे क्या, में तो आराम से भैया के बेड पर अपनी टाँगे फैला कर सो जाती हूँ, (और अंदर से चिल्ला कर) गुड नाइट मम्मी!

रजनी (पलट कर वापस जाते हुवे बड़बड़ाती हुई) गुड नाइट की बच्ची, यह लड़की जैसे-जैसे बड़ी होती जा रही है इसका बच्पना और भी बढ़ता जा रहा है, पता नही इसका गुज़ारा कैसे होगा, किसी दिन मेरी नाक ज़रूर कटवाएगी.

(लगभग एक घंटे बाद कोई बाहर से दरवाजा खटखटाता है और जब रजनी जाकर दरवाजा खोलती है तो सामने राज को देख कर मुस्कुराते हुए)- आ गया बेटा!

राज- हाँ मम्मी आज तो बहुत थक गया हूँ, बड़ा काम था ऑफीस मे.

रजनी (दरवाजा लगाते हुए)- चल तू जल्दी से हाथ मूह धो ले में तेरे लिए खाना लगा देती हूँ.

राज- ठीक है मम्मी! (और राज अपने रूम की तरफ जाकर जैसे ही दरवाजा खोल कर अंदर की ओर पुश करता है.)

रजनी- अरे बेटा रश्मि ने अंदर से बंद कर के लगता है सो गई है, रश्मि, ओ रश्मि, लगता है सो गई है.

राज- चलो सोने दो मम्मी उसको में यही चेंज कर लेता हूँ आप ज़रा मुझे टॉवेल दे दो.

(रजनी उसे टॉवेल ला कर देती है और राज वही अपनी पेंट उतार कर टॉवेल लगा कर बाथरूम में घुस जाता है और रजनी उसके लिए खाना गरम करने लगती है. खाना खाने के बाद राज वही हॉल में बैठ कर टीवी ऑन कर लेता है और टीवी देखने लगता है.)

रजनी- बेटे में सोने जा रही हूँ, तुझे जब सोना हो तो मेरे ही बेड पर आकर सो जाना, रश्मि तो अब उठने वाली नही है घोड़े बेच कर जो सोती है.

राज- कोई बात नही है मम्मी, में आपके साथ ही सो जाउन्गा. (रजनी राज की बात सुन कर मुस्कुराती हुई अपने रूम में चली जाती है. राज टीवी पर न्यूज़ लगा कर देखने लगता है और दूसरी ओर रजनी की फूली हुई चूत उसको परेशान करने लगती है. रजनी की उमर उस समय 45 साल थी और उसके दो ही बच्चे थे, राज जो कि 25 साल का था और रश्मि जो कि 18 साल की थी, रजनी के पति करीब 3 साल पहले बीमारी की वजह से मर चुके थे, चूँकि उनकी सरकारी नौकरी थी इसलिए अनुकंपा में राज को उनकी जगह जॉब मिल गई थी और वह नगर पालिका में बाबू के पद पर जाय्न हो गया था.

रजनी एक तेज तर्राट महिला थी लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी एक ही थी जिसका नाम था लंड, लेकिन छोटी जगह मे रहने के कारण वह अपनी भावनाओ को हमेशा दबाती आई थी और जब भी उसको लंड की ज़्यादा चाह होती तब वह अपने हाथो से ही अपनी फूली हुई चूत को कुचल लेती थी. मोहल्ले के कई मर्द उस पर कामुक निगाहे डालते थे लेकिन वह किसी के हाथ नही आई थी और फिर छोटी जगह होने की वजह से कोई इतनी हिम्मत कर भी नही पाता था कि उसको फसा सके. रजनी का जिस्म बहुत ही गोरा और भरा हुआ था, उसकी आदत हमेशा से अपनी साड़ी को अपने साल खाए हुए पेट और गहरी नाभि के नीचे बाँधती थी, जिसके कारण कोई भी जब उसके गदराए साल खाए पेट और गहरी नाभि को देखता तो उसका लंड खड़ा हुए बिना नही रह सकता था. उसके गदराए पेट और बड़ी सी गहरी नाभि को जब मुहल्ले का कोई भी आदमी बाहर नल पर पानी भरते देखता तो वह ज़रूर अपने लंड को मसल्ने पर मजबूर हो जाता था. रजनी की जांघे खूब मोटी-मोटी और कसी हुई नज़र आती थी और उसके दूध 40 साइज़ के उसके ब्लाउज में समाते ही नही थे इसीलिए उसके ब्लॉज के उपर के दो बटन कितना भी बंद कर दो लेकिन थोड़ी देर बाद अपने आप खुल जाते थे.

और रजनी हरदम अपने मोटे-मोटे कसे हुए दूध की ओर ध्यान नही दे पाती थी. और उसका पल्लू जब उसके दूध से सरक जाता और किसी मनचले की पूरी नज़रे उसके दोनो दूध के बीच की गहराई में समा जाती थी तब रजनी को ध्यान आता और वह अपने पल्लू को अपने दूध पर डाल लेती थी. रजनी का सबसे मादक और कामुक हिस्सा जो था वह थी उसकी मोटी-मोटी फैली हुई गदराई गान्ड, उसकी मोटी गान्ड तो ऐसी थी कि देखने पर लगता था कि कोई उसके चूतड़ के दोनो भारी-भारी पाटो को फैलाए हुए है, मतलब उसकी गान्ड के दोनो पाटो के बीच बहुत ज़्यादा गॅप था और कोई भी जब उसकी मोटी गदराई गान्ड को देखता तो यही सोचता होगा कि उसका लंड सीधे बिना उसकी गान्ड के मोटे-मोटे पाटो को फैलाए ही उसकी गान्ड में घुस जाएगा, कुल मिला कर रजनी 45 की होने के बाद भी पूरी तरह सुडोल और भरी हुई थी.
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08-16-2019, 12:07 PM,
#3
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
उसकी फूली हुई चूत और गदराई मोटी गान्ड की कल्पना करके कई लोग रोज अपना लंड हिलाते होंगे, वह अक्सर बाहर के नल से पानी भरने जाती थी और वहाँ आस पास के लोग बस उसको भारी बाल्टी उठाने के लिए झुकने का ही इंतजार करते थे ताकि उसके मोटे-मोटे चुतड़ों का पूरी तरह से दीदार हो जाए. रजनी को बेड पर लेटे हुए लंड लेने की खूब इच्छा हो रही थी और वह सीधे लेटे हुए अपने पेट की तरफ से अपनी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर अपनी फूली हुई चूत को धीरे-धीरे सहला रही थी. और अपने मन में अपनी चूत को सहलाते हुए)- कितनी जल्दी झान्टे बढ़ जाती है अभी एक हफ्ते पहले ही तो बनाई थी, जब झांट बना कर अपनी फूली हुई चूत पर हाथ फेरो तो बड़ा अच्छा लगता है. पर अपने नसीब में बस खुद के हाथो से ही अपनी चूत को सहलाना लिखा है. अभी तो उंगली भी नही कर सकती कहीं राज ना आ जाए.. (और रजनी अपनी कल्पना में मोटे-मोटे लंड को सोच-सोच कर गरम हो रही थी और उसकी आँखो में नींद नही थी, करीब 1 घंटे बाद राज अंदर आता है और अपनी मम्मी के साइड में लेट जाता है, ज़्यादा थके होने के कारण उसकी जल्दी ही नींद लग जाती है.


करीब 10 मिनट बाद रजनी अपने बेटे की ओर करवट लेकर अपनी आँखे खोल कर अपने बेटे को देखने लगती है. पहले तो उसे राज को देख कर प्यार आता है और वह मुस्कुराकर राज के सर के बालो में अपनी उंगलिया फसा कर उसके सर को सहलाने लगती है, और फ्लॅशबॅक में जाकर अपने बीते हुए दिनो को याद करती हुए..) अगर राज ना होता तो इसके पापा के मरने के बाद हम माँ बेटियो का क्या होता? (और राज को देख कर उसे उस पर प्यार आता है और वह राज के गाल को अपने मूह से चूम लेती है, तभी राज एक दम से करवट लेकर सीधा होकर सो जाता है और अचानक उसका टॉवेल उसकी कमर से अलग हो जाता है. रजनी की निगाहे राज के अंडरवेर में समाए मोटे लंड पर पड़ती है तो उसके चेहरे का रंग एक दम से फीका पड़ जाता है और वह एक टक राज के मोटे लंड जो कि सोया हुआ भी काफ़ी मोटा लग रहा था को घूर-घूर कर देखने लगती है.

उसकी चूत मे एक दम से चिकनाहट अपने आप बढ़ जाती है और जब वह राज के चेहरे को देखती है तो उसे अपने बेटे मे छुपा एक कसीला जवान मर्द नज़र आने लगता है और वह राज को प्यार से देखती है और उसका हाथ अपने आप ही अपने बेटे के गाल को छूने के लिए चला जाता है और आज वह पहली बार अपने बेटे के गालो को किसी मर्द के गाल समझ कर हाथ लगा रही थी. कुच्छ देर तक रजनी राज के चेहरे और कभी बीच-बीच में उसके मोटे लंड को देखती है और फिर मुस्कुराकर राज के सर के बालो में अपनी उंगलिया फसा कर उसके सर को सहलाने लगती है और अपने मन मे सोचती है..) अब राज भी बड़ा हो गया है और शादी लायक नज़र आने लगा है, पर इसके लंड का साइज़ तो काफ़ी बड़ा नज़र आ रहा है, क्या इसने कभी किसी को चोदा होगा? अरे नही! यह तो बड़ा ही सीधा लड़का है यह ऐसी हरकत नही कर सकता है. पर इसका लंड कितना बड़ा है, जब खड़ा होता होगा तो कितना बड़ा हो जाता होगा? रजनी की चूत काफ़ी गीली हो गई थी और वह अपने हाथों से अपनी चूत को सहलाती हुई राज के बारे में सोचती हुई सो जाती है.

सुबह-सुबह 4 बजे करीब, राज अचानक नींद में करवट लेकर अपनी एक टाँग अपनी मम्मी रजनी के मोटे-मोटे गदराए चुतड़ों पर रख लेता है और उसका मोटा लंड विकराल रूप धारण किए खड़ा रहता है और वह सीधा उसकी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड की दरार में साड़ी के उपर से ही घुसा रहता है. रजनी की नींद जब खुलती है तो अपनी गदराई मोटी गान्ड में कुछ महसूस करती है और अपने हाथ को पीछे ले जाती है उसके हाथ में अपने बेटे का मस्त तना हुआ लंड आ जाता है और रजनी के होश उड़ जाते है! वह धीरे से करवट लेती है लेकिन राज की टाँग उसके उपर से हटती नही है और राज का घुटना सीधे उसकी फूली हुई चूत के उपर आ जाता है और रजनी के मूह से एक हल्की सी सिसकी निकल जाती है. जब वह गर्दन घुमा कर राज की ओर मूह करती है तो राज मस्त खर्राटे लेकर सोया हुआ रहता है, रजनी की फूली हुई चूत में राज के घुटनो का भारी वजन उसकी चूत को और फूलने पर मजबूर कर देता है और उसका चेहरा लाल हो जाता है.

रजनी को अपनी फूली हुई चूत पर राज के पेर के घुटनो का वजन बहुत अच्छा लगता है और वह अपने हाथ को राज के घुटनो के उपर रख कर हल्के से अपनी फूली हुई चूत पर दबाती है तो उसकी चूत से पानी आ जाता है और वह आआअहह करके अपनी दोनो टाँगो को थोड़ा और फैला लेती है और उसके ऐसा करने से राज के पेर के घुटने का सीधा वजन उसकी फूली हुई चूत के तने हुए भज्नाशे पर पड़ जाता है और रजनी अपने दाँतों से अपने होंठ को कस कर दबा लेती है.

चूँकि रजनी पेंटी नही पहनती थी इसलिए उसकी साड़ी और पेटिकोट के पतले कपड़े के उपर से उसकी मस्तानी फूली हुई चूत पूरी उभरी हुई नज़र आ रही थी और उससे रहा नही जा रहा था और वह राज के घुटनो को हल्के से अपनी फूली हुई चूत पर दबा रही थी. तभी राज नींद में अपने हाथ को अपनी मम्मी के मोटे-मोटे दूध पर रख कर उससे सट जाता है और उसका मोटा लंड जो सुबह-सुबह कुछ ज़्यादा ही तना हुआ था उसकी मम्मी की मोटी जाँघो में चुभने लगता है और रजनी की फूली हुई चूत से पानी बह कर उसकी गदराई गान्ड के छेद तक पहुच जाता है. रजनी एक तरह से अपने बेटे की बाँहो में जकड़ी सीधी लेटी हुई थी और उसके बेटे के पैर का घुटना उसकी फूली हुई चूत में रखा हुआ था और उसका मोटा लंड उसकी मम्मी की मोटी जाँघ में साइड से धसा हुआ था.

रजनी से रहा नही जाता है और वह अपने बेटे के लंड को उसके अंडरवेर के उपर से धीरे से पकड़ कर जब उसकी लंबाई और मोटाई का अनुभव करती है तो उसकी चूत का खड़ा हुआ मोटा दाना कूदने लगता है और वह अपनी चूत मराने के लिए तड़पने लगती है. आज उसे बहुत दिनो बाद असहनीय पीड़ा अपनी चूत में महसूस होने लगती है वह बहुत संभाल-संभाल कर अपने बेटे के मोटे लंड को अपने हाथो से दबा-दबा कर उसकी मस्त मोटाई और लंबाई का जयजा लेती है और अपने मन में बस यही सोचती रहती है कि हे भगवान राज का लंड कितना बड़ा और कितना मोटा है.. उसकी फूली हुई चूत इस कदर खुजलाने लगती है कि वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथों में कस्ति हुई उसकी मोटाई की कल्पना करते हुए अपनी आँखे बंद किए हुई मस्ती मे डूबी रहती है.

तभी अचानक राज करवट लेकर अपनी टाँगे अपनी मम्मी की चूत से हटा कर सीधा लेट जाता है और रजनी हड़बड़ा कर उसके लंड को छोड़ देती है, और जब राज की ओर देखती है तभी उसकी नज़र राज के लंड की ओर पड़ती है और उसके मोटे लंड को जो कि उसके अंडरवेर को छत की ओर उठाए सीधा तना हुआ था को देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है और जहाँ उसकी चूत गीली हो जाती है वही उसका गला सूखने लगता है.

रजनी पागलो के तरह अपने बेटे के खड़े लंड को लेटी-लेटी घुरती रहती है और अपने हाथ को अपनी साड़ी के अंदर डाल कर अपनी फूली हुई चूत को सहलाती रहती है. जब उससे रहा नही जाता है तो वह हिम्मत करके डरते हुए राज के लंड को धीरे से अपने हाथ में पकड़ कर हल्के से उसके लंड को दबाती है और उसकी चूत पानी-पानी हो जाती है और वह जैसे ही राज के लंड को थोड़ा ज़ोर से अपने हाथ से पकड़ कर दबाती है राज एक दम से दूसरी ओर करवट ले लेता है. और उसकी पीठ उसकी मम्मी की तरफ हो जाती है और रजनी का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है तभी सुबह के 6 बजे का अलार्म बज उठता है और रजनी एक दम हड़बड़ा कर उठ जाती है.

रजनी राज के उपर एक चादर डाल कर धीरे से रूम के बाहर चली जाती है और फिर राज के रूम का दरवाजा बजा कर रश्मि को उठाती है. रश्मि तैयार हो जाती है और कुछ देर बाद राज भी अपनी बाइक की चाबी लेकर रश्मि को बैठाता है और उसे उसके स्कूल के सामने ले जाकर उतारते हुए…)

राज- आराम से सोच समझ कर पेपर लिखना और कोशिश करना कि कोई भी प्रश्न छूटना नही चाहिए.

रश्मि (अपने दोनो हाथों से अपने भाई के हाथ को पकड़ कर..)- उहुउऊ भैया मुझे तो बहुत डर लग रहा है.

राज (मुस्कुराता हुआ उसके गाल पर हाथ फेर कर..)- अरे पागल! डरती क्यों है जा आराम से पेपर करना तू पास हो जाएगी.

रश्मि (मुस्कुराकर) भैया क्या मेरी जगह तुम एग्ज़ॅम नही दे सकते..?

राज (मुस्कुराकर उसके गाल पर चपत लगाते हुए..)- अब जाती है या दूं एक रख कर…!

रश्मि (मुस्कुराते हुए..)- जाती हूँ जाती हूँ बिगड़ते क्यो हो? अच्छा भैया बाइ!

राज (मुस्कुराकर)- चल बेस्ट ऑफ लक!!! (रश्मि मुस्कुराते हुए एग्ज़ॅम हॉल की ओर चल देती है और राज वापस घर आकर ऑफीस जाने की तैयारी करने लगता है, आज रजनी की नज़रे अपने बेटे के लिए बदली हुई नज़र आ रही थी, जब राज अपने कपड़े पहन रहा था तो रजनी उसको बड़ी हसरत भरी निगाहो से देख रही थी.

उसकी फूली हुई चूत उसे रात भर से परेशान कर रही थी, उसे अब उसका बेटा कामदेव का अवतार नज़र आने लगा था. राज अंडरवेर और बनियान पहने खड़ा हुआ ड्रेसिंग टेबल के सामने अपने बाल जमा रहा था और रजनी उसके कसिले बदन को बड़ी चाहत से घूर रही थी. तभी शीशे में देखता हुआ कुछ गुनगुनाते हुए अपने बाल सवार रहा था तभी उसकी नज़र अपनी मम्मी पर पड़ती है और अपनी मम्मी की कातिल निगाहो को जब वह अपने बदन को घूरते हुए पाता है तो एक पल के लिए उसकी नज़र अपनी मम्मी की नज़र के उपर ठहर जाती है.


फिर कुछ सोच कर वह मुस्कुराता हुआ फिर से अपने बाल सवारने लगता है और) राज- मम्मी चाइ तो पिला दो..!

रजनी (मुस्कुराकर)- बेटे चाइ के बजे दूध पिया कर..

राज- सॉरी!

रजनी- कुछ नही! अभी लेकर आती हूँ. (और फिर रजनी किचन की और अपनी मोटी गदराई गान्ड को हिलाते हुए जाने लगती है और राज पलट कर अपनी मम्मी को एक नज़र उपर से नीचे टक मारते हुए देखता है और फिर ना जाने क्या सोच कर मुस्कुरा देता है. कुछ देर बाद रजनी चाइ लेकर आती है और राज चाइ पीने लगता है लेकिन जैसे ही वह अपनी नज़रे अपनी मम्मी की ओर करता है, रजनी उसे ही देखती रहती है.)
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08-16-2019, 12:07 PM,
#4
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
राज (मुस्कुराकर)- क्या बात है मम्मी? ऐसे क्यो देख रही हो?

रजनी (मुस्कुराकर)- देख रही हूँ मेरा बेटा कितना हॅंडसम और जवान हो गया है, अब लगता है तेरी शादी करने का वक़्त आ गया है.

राज- अरे मम्मी! अभी से मुझे शादी करके क्या करना है?

रजनी- बेटा तेरी हर तरह से देखभाल के लिए तेरे लिए बीबी तो लाना ही पड़ेगी ना.

राज (मुस्कुराते हुए अपनी मम्मी को देख कर)- मम्मी आप से बेहतर देखभाल मेरी और कौन कर सकती है?

रजनी- (मुस्कुराते हुए..) पर बेटे बीबी और मम्मी में बहुत फ़र्क होता है.

राज (मुस्कुराकर अपनी मम्मी के खूबसूरत चेहरे की ओर देखता है और फिर…) तो ठीक है मम्मी आप ही देख लो मेरे लिए कोई लड़की, लेकिन अपने जैसी ही बीबी लाना मेरे लिए ढूँढ कर.

रजनी (मुस्कुरा कर उसके गाल को खिचती हुई..) पगले मेरे जैसी बीबी क्या करेगा? मेरे जैसी भारी बीबी मिल गई तो तू संभाल नही पाएगा उसे?

राज- अरे आप फिकर मत करो मम्मी में सब संभाल लूँगा, और वैसे भी मुझे तो आप जैसी पर्सनॅलिटी की औरते ही अच्छी लगती है.

रजनी (मुस्कुराकर)- क्या बात है? बड़ा देखने लगा है आज कल तू औरतो को…

राज (मुस्कुराकर) अरे नही मम्मी! में तो मज़ाक कर रहा था!!!

रजनी- कहीं तेरा किसी लड़की या औरत से कोई चक्कर तो नही चल रहा है.

राज- अरे क्या बात करती हो मम्मी? भला मुझसे कौन औरत फसेगि?

रजनी- क्यों? अच्छा भला तो है, ध्यान रखना आज कल की औरते बहुत चालाक होती है कब जवान लड़के को फसा ले कुछ पता नही चल पाता है.

राज- अरे नही मम्मी में तो औरतो से दूर ही रहता हूँ और वैसे भी मुझे मेरे ऑफीस से ही फ़ुर्सत नही मिलती तो फिर इन सब कामो के लिए वक़्त ही कहाँ है?

(और राज अपना बॅग लेकर जैसे ही रोज की तरह अपनी मम्मी के गले लगता है, रजनी आज कुछ अलग ही अंदाज में अपने बेटे को अपनी बाँहो में भर लेती है और उसके गाल को अपने रसीले होंठो से चूम लेती है, राज को रोज की झप्पी से कुछ अलग अहसास होता है और रोज से कुछ ज़्यादा देर तक उसकी मम्मी उससे चिपकी रहती है और फिर राज जब अपनी मम्मी से अलग होकर उसके चेहरे की ओर देखता है तो आज उसे उसकी मम्मी का चेहरा काफ़ी सुर्ख लाल नज़र आता है और वह अपनी मम्मी के चेहरे को देखते हुए कुछ सोचने लगता है, तभी रजनी उसके गालो पर हाथ फेरती हुई..)

रजनी- अच्छा बाइ बेटे!

राज- (एक दम से मुस्कुराकर) बाइ मम्मी!! (और फिर राज अपने ऑफीस की ओर निकल जाता है.!)

(रश्मि एग्ज़ॅम हॉल से बाहर अपना मूह लटकाए बाहर निकलती है और उसकी नज़र कोमल पर पड़ती है कोमल उसकी खास सहेली थी जो कि उसकी ही क्लास में पढ़ती थी.)

कोमल- हे रश्मि! क्या हुआ? कैसा गया तेरा पेपर?

रश्मि- (अपना मूह बना कर..) यार हल तो मेने पूरा कर दिया है पर अब कॉपी चेक करने वाले के उपर है कि वह पास करता है या नही वैसे मेरा पेपर तो हमेशा अच्छा ही जाता है पर पता नही नंबर. क्यों कम आते हैं.

कोमल- (मुस्कुराकर रश्मि की मोटी गान्ड पर अपना हाथ मारते हुए..) जा एक बार कॉपी चेक करने वाले को अपनी मोटी गान्ड नंगी करके दिखा दे फिर देखना तू सीधे मेरिट में आएगी.

रश्मि- (उसको घूर कर देखती हुई..) तेरा मूह कभी बंद नही रह सकता है, यहाँ में टेन्षन मे हूँ और तुझे मज़ाक सूझ रही है.

कोमल- (उसकी गाल खीच कर) अरे जानेमन चलो में तुम्हारी टेन्षन अभी दूर कर देती हूँ.

रश्मि- (उसको देख कर) वो कैसे?

कोमल- अरे में तेरे लिए एक बहुत ही मस्त फोटो आल्बम ले कर आई हूँ, उसमे बहुत ही मस्त चुदाई के फोटो है और बिल्कुल जैसा लंड तुझे अच्छा लगता है बिल्कुल वैसे ही मोटे-मोटे लंड के बड़े ही कलरफुल फोटो है. तू जब देखेगी तो तेरी चूत एक दम मस्त हो जाएगी.

रश्मि- (कोमल की बात सुन कर इधर उधर अपनी नज़रे दौड़ाती हुई..) कहाँ है बता ना?

कोमल- अरे पागल अब यहीं देखेगी क्या चल हम लोग पीछे वाले गार्डेन में कहीं एक तरफ बैठ कर आराम से देखेगे.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए..) चल!

(और फिर दोनो गार्डेन की ओर जाने लगते है कोमल गार्डेन में बैठते अपने बॅग को खोल कर अपनी बुक के अंदर से एक बड़ी सी आल्बम निकालती है और जैसे ही उसको खोलते हुए पहला फोटो रश्मि को दिखाती है, रश्मि की आँखे खुली की खुली रह जाती है, उस फोटो में एक लड़की एक लड़के के मोटे लंड को अपने हाथो मे कसे हुए उसके लंड के टॉप को अपना मूह खोल कर मूह मे लेने की तैयारी के पॉज़ में रहती है.
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08-16-2019, 12:09 PM,
#5
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
रश्मि उस फोटो को देख कर सिहर जाती है और उसकी फूली हुई चूत उस मोटे लंड को देख कर कुलबुलाने लगती है.)

कोमल- (मुस्कुरा कर रश्मि के दूध को अपने हाथो से पकड़ कर दबा देती है और..) क्यों डार्लिंग!! कैसा है ये मोटा लंड, तेरी फूली हुई चूत तो इसको देख कर पकड़ने लगी होगी, क्यों है ना?

रश्मि- (उसको देख कर मुस्कुराते हुए..) तू शांति नही रख सकती मुझे अच्छे से देखने तो दे..

(और फिर रश्मि उस आल्बम के हर पेज को पलट-पलट कर देखने लगती है, कोमल रश्मि को मुस्कुराती हुई देखती रहती है और फिर एक फोटो को देख कर..)

कोमल- हे देख रश्मि! कैसा पूरी चूत को फाड़ कर अंदर तक घुसा हुआ है हे कितना मज़ा आ रहा होगा इस लड़की को.

(रश्मि का चेहरा पूरा लाल हो गया था और उसकी साँसे काफ़ी तेज हो गई थी.)
कोमल- अरे इतना घबरा कर क्यो देख रही है आराम से बैठ कर देख.
रश्मि- (कोमल को देख कर मुस्कुराते हुए..) कहाँ से लेकर आई है तू यह आल्बम?

कोमल- अरे बस मत पूछ बड़ी मुश्किल से जुगाड़ लगाया है.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए उस आल्बम को अपने बॅग में डाल कर..) अब ये तुझे कल मिलेगी.

कोमल- (मुस्कुराकर) अरे यही देख कर अपनी चूत में उंगली कर ले.
रश्मि- (मुस्कुराकर) नही! मुझे यहाँ देखने में मज़ा नही आ रहा है. में अपने घर पर आराम से देखूँगी.

कोमल- (रश्मि की स्कर्ट में हाथ डाल कर उसकी पेंटी के उपर से उसकी फूली हुई चूत को अपने हाथों में भर कर मसल्ति हुई..) अरे मेरी रानी! इन फोटो को देख-देख कर शांति नही मिलेगी तेरी इस फूली हुई चूत को, किसी मोटे लंड का इंतज़ाम कर ले और जब किसी मोटे लंड से चुदेगि तभी असली मज़ा आएगा.

रश्मि- (कोमल को देख कर..) क्या तूने किसी मोटे लंड को अपनी चूत मे लिया है?

कोमल- अरे मुझे तो किसी के साथ मोका ही नही मिला में तो अपने घर के आस पास के कई लड़को को खूब हंस-हंस कर देखती हूँ, पर कोई लड़का इतनी हिम्मत ही नही दिखाता की वह मुझसे बात भी कर सके.
(तभी रश्मि का मोबाइल बजता है और वह अरे भैया का फोन है दो मिनट चुप हो जा…)

रश्मि- हेलो!

राज- हां! रश्मि एग्ज़ॅम हो गई?

रश्मि- हन भैया!

राज- कैसा रहा पेपर?

रश्मि- बहुत अच्छा गया है भैया..

राज- अच्छा ठीक है! में 10 मिनट में आता हूँ.

रश्मि- ओके भैया!

कोमल- (मुस्कुराते हुए..) क्या हुआ क्या कह रहे थे तेरे भैया?

रश्मि- कुछ नही! वो लेने आ रहे है मुझे

कोमल- बेचारे राज भैया सोचते होंगे कि उनकी प्यारी बहना एग्ज़ॅम दे कर बाहर उनका वेट कर रही होगी. उन्हे क्या मालूम कि उनकी गुड़िया रानी तो मोटे-मोटे लंड के दर्शन करके मस्त हो रही है.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए..) चुप कर कमिनि! जब देखो उल्टी बात करती है.
कोमल- रश्मि एक बात कहूँ.

रश्मि- क्या?

कोमल- तेरे भैया भी तो काफ़ी गबरू जवान है उनका लंड भी काफ़ी मोटा होगा.

रश्मि- (अपनी आँखे निकाल कर कोमल को देखती हुई..) तो…

कोमल- अरे मेरी जान मेरे घर में तो में अपने माँ-बाप की एक्लोति बेटी हूँ. पर सच कहूँ अगर तेरे भैया जैसा मेरा भी कोई गबरू जवान भाई होता तो में उसका ही लंड ले लेती, तू अपने भैया को ही क्यो नही फसा लेती? आराम से घर मे ही रोज तुझे चुदने को मिल जाएगा और तेरी फूली चूत जो हमेशा किसी मोटे लंड के लिए तड़पती रहती है उसे बैठे बिठाए एक तगड़े लंड से चुदने का मोका मिल जाएगा.

रश्मि- (कोमल को मारती हुई..) कमिनि! कभी तो सोच समझ कर बोला कर, वह मेरे भैया है. में उनके बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती हूँ?

कोमल- अरे आज कल तो लड़किया सबसे पहले अपने भाई से ही चुदती है, और सारे भाई भी अपनी गंदी नज़रे सबसे पहले अपनी माँ बहनो पर ही मारते हैं.

रश्मि- बेशरम! चुप कर जो देखो वो बोले चली जा रही है.

कोमल- अच्छा तुझे यकीन नही आता ना तो में तुझे कल की ही मेरे बिल्डिंग की एक घटना बताती हूँ.

रश्मि- (उसको देखती हुई..) कौन सी घटना?

कोमल- अरे हम जिस मकान में रहते है उसमे और भी किरायेदार रहते है, और उन्ही मे एक भैया है जो जॉब करते है और एक सिंगल रूम लेकर रहते हैं, उन भैया की उमर 30 साल के लगभग है और अभी दो दिन पहले उनकी ही उमर की एक लड़की उनके घर आई तो मकान मालकिन ने पूछा कि वह कौन है? तो उन भैया ने कहा कि वह उनकी दीदी है.

रश्मि- फिर क्या हुआ?

कोमल- आजकल गर्मी पड़ने लगी है और रात को लाइट भी चली जाती है तो काफ़ी लोग रात को छत पर सोते हैं, परसो रात को उन भैया ने छत पर दूसरे लोगो से थोड़ा दूर दो बिस्तेर लगा दिए और फिर रात को 11 बजे तक वो और उनकी दीदी छत पर आए और अपने-अपने बिस्तेर पर पास-पास सो गये, उसी छत पर मकान मालकिन भी सोई हुई थी और रात को करीब 1 बजे मकान मालकिन को प्यास लगी होगी तो उसकी नींद खुल गई और उसने जब दूसरी ओर लेटे-लेटे देखा तो उसके होश उड़ गये वो भैया अपनी दीदी की मॅक्सी को उपर तक चढ़ा कर उसके उपर लेट कर मस्ती से उसे कस-कस कर चोद रहे थे. पता नही मकान मालकिन ने कब तक उनकी चुदाई देखी और फिर जब सुबह-सुबह वो भैया ऑफीस जा रहे थे तो मकान मालकिन ने उनको बुला कर अपना रूम खाली करने को कह दिया. जब उन भैया ने कारण पूछा तो मकान मालकिन ने कहा कि मेरे घर में और भी लोग रहते हैं और उन्हे ऐसे लोग नही चाहिए अपने मकान मे जो तुम्हारे जैसी घटिया हरकत करते है. वो भैया मकान मालकिन से कुछ बोल नही पाए और आज फिर मकान खाली करके चले गये.

रश्मि- पर तुझे यह सब कैसे पता चला?

कोमल- अरे मुझे क्या सारे मोहल्ले को पता है हमारी मकान मालकिन ने दूसरी औरतो को बता दिया और फिर तू तो जानती है औरतो के पेट में बात पचती कहाँ है, इस तरह सभी को पता चल गया.

(तभी रश्मि का फोन फिर बजता है और वह फोन देख कर चल कोमल भैया आ गये और वह फोन उठा कर बस भैया दो मिनट में आ गई और फिर गार्डन से बाहर आ जाते है. सामने राज अपनी बाइक लेकर खड़ा रहता है और..)

कोमल- (रश्मि के साथ चलते-चलते उसका हाथ दबा कर) अरे रश्मि कितने हॅंडसम है तेरे भैया, ज़रा सोच इनका लंड कितना मोटा और मस्त होगा.

रश्मि- (उसको घूर कर देखती हुई..) चुप कर कमिनि!

कोमल- (मुस्कुराकर) देख रश्मि! या तो तू अपने भैया को फसा कर अपनी चूत मरवा ले या फिर अगर तुझे इंटेरेस्ट नही है तो बोल में ट्राइ करती हूँ. तू नही तो में ही तेरे भैया से चुदने को तैयार हूँ.

रश्मि- (कोमल को घूर कर आँखे दिखाती हुई..) खबरदार जो मेरे भैया पर अपनी कमिनि नज़रे मारी तो…

कोमल- तू बड़ी पागल है ना खुद चुदती है और ना मुझे ही चुदने का मोका देती है.

रश्मि- चुप कर कमिनि! भैया सुन लेंगे.. (और फिर…)

कोमल- कैसे हो भैया?

राज- ठीक हूँ कोमल! तुम बताओ तुम कैसी हो और पेपर कैसा रहा आज का?

कोमल- एक दम फर्स्ट क्लास.

राज- (रश्मि को देख कर..) और तेरा..

रश्मि- (मुस्कुराकर) मेरा भी फर्स्ट क्लास.

राज- (रश्मि के गाल पकड़ कर खिचता हुआ मुस्कुराकर..) तेरा फर्स्ट क्लास तो रिज़ल्ट आने पर ही पता चलेगा चल बैठ.

(रश्मि उचक कर अपने मोटे चूतड़ बाइक की सीट पर रखती हुई बाइ कोमल! और कोमल अपना हाथ हिलाकर रश्मि को उसके भाई की ओर मुस्कुराकर इशारा करती हुई बाइ! रश्मि उसको मुस्कुराकर घूर कर देखती हुई मारने का इशारा करती है और राज अपनी बाइक आगे बढ़ा देता है, रश्मि उस आल्बम को पाकर अंदर ही अंदर काफ़ी खुस थी और उसकी चूत बार-बार फूल रही थी और फिर वह कोमल की बातों को याद करते हुए खो गई और उसने अपने हाथ से अपने भैया की कमर को जैसे ही पकड़ा उसकी चूत एक दम से फड़कने लगी और उसे ना जाने क्यों अपने भैया पर प्यार आ गया और उसने अपने सर को अपने भैया की पीठ से टिका कर मुस्कुराते हुए कोमल की बातों को सोचने लगी…)

राज- क्या बात है पेपर अच्छा नही गया क्या?

रश्मि- हूँ!

(राज एक आइस क्रीम के ठेले पर बाइक रोक कर दो आइस क्रीम लेकर एक रश्मि को देता हुआ उसके गोरे गालो पर हाथ फेर कर..)

राज- चल टेन्षन मत कर फैल भी हो गई तो में तुझे कुछ नही कहूँगा.

रश्मि- (मुस्कुराकर) सच!!!!

राज- (उसके गोरे गालो को सहला कर उसे प्यार से देखता हुआ..) मच!!!!
(और फिर दोनो भाई बहन एक दूसरे को देखते हुए आइस क्रीम खाने लगते हैं. रश्मि अपने भाई का चेहरा मंद-मंद मुस्कुराकर देखती है अपने मन में सच मुच भैया लगते तो बहुत स्मार्ट है और इनकी बॉडी भी बहुत कसी हुई है वाकई इनका लंड भी बहुत मोटा होगा!)

राज- क्या देख रही है?

रश्मि- (मुस्कुराकर अपनी नज़रे इधर उधर नचाते हुए..) कुछ नही!

(फिर रश्मि कुछ सोच कर..) भैया आपको मेरी सहेली कोमल कैसी लड़की लगती है?

राज- (रश्मि के इस तरह के सवाल पर उसे गौर से देखता हुआ.. कुछ सोच कर..) अच्छी लड़की है, खूबसूरत है लेकिन तुझसे ज़्यादा खूबसूरत नही है.

रश्मि- (मुस्कुराकर राज को ऐसी नज़रो से देखती है जैसे अभी उसको पकड़ कर चूम लेगी और आगे बढ़ कर अपने भाई के गालो को अपने दाँतों से काट लेगी, लेकिन वह अपनी मस्ती अपनी आइस क्रीम को अपने दाँतों से ज़ोर से काट कर दबा लेती है और राज उसके आइस क्रीम से भीगे हुए होंठो को देख कर मुस्कुराता हुआ..)

राज- तुझे आइस क्रीम बहुत पसंद है ना!

रश्मि- (आइस क्रीम के बाइट को अपने मूह में भर कर) हूँ.

राज- (अपनी आइस क्रीम ख़तम करता हुआ..) और लेगी..?

रश्मि- (मुस्कुराकर) ले लो.

(राज एक और आइस क्रीम लेकर रश्मि को देता है और फिर उसे बाइक पर बैठा कर अपने घर की ओर चल देता है, घर पहुच कर वह रश्मि को उतारता है और फिर ऑफीस के लिए चला जाता है.)

रजनी- आ गई लाडो रानी, कुछ करके भी आई है या कॉपी में कोई फिल्मी स्टोरी लिख कर आ गई.

रश्मि- हां! तू मेरा दुश्मन फिल्म की स्टोरी लिख कर आई हूँ.

रजनी- (मुस्कुराते हुवे..) फिर तो हो गई तू पास!!!

रश्मि- वो तो में हो ही जाउन्गी…!

रजनी- जा जाकर यूनिफॉर्म उतार दे रोज स्कूल से आकर दिन भर पहने रहती है और फिर रोज धोना मुझे पड़ता है.

(रश्मि वही खड़ी-खड़ी अपनी शर्ट उतार कर अपनी मम्मी के मूह पर फेक देती है और अपनी स्कर्ट को भी उतार कर अपनी मम्मी पर फैंकती है और रजनी उसकी स्कर्ट को अपने हाथ से पकड़ते हुए, उसे ब्रा और पेंटी में उसके गदराए बदन को देख कर..)

रजनी- अरे दुष्ट कही की कुछ तो शरम किया कर इतनी बड़ी घोड़ी हो गई है पर हरकत अभी भी बच्चो की तरह है यही खड़ी-खड़ी नंगी हो गई, कहीं अचानक तेरा भाई आ गया तो, घर में जवान भाई है और इस बेशर्म को बिल्कुल भी हया नही है.

रश्मि- (अपनी मम्मी को मुस्कुराकर आँख मारती हुई अपनी गदराई मोटी गान्ड को मटकाते हुए अपने रूम की ओर जाने लगती है और अपने मन मे अपनी मम्मी के बारे में सोचती हुई..) खुद बड़ी सती सावित्री बनती है और खुद को नही देखती कि खुद आधा नंगा पेट दिखाते हुए साड़ी पहनती है और ब्लॉज के उपर के बटन तो लगता है जानबूझ कर तोड़ लेती है आधे से ज़्यादा दूध तो बाहर ही झाँकते रहते है, और उपर से अपनी गदराई मोटी गान्ड मटका-मटका कर घर के बाहर तक जा-जा कर झाड़ू मारते हुए पूरे मोहल्ले के मर्दो को अपनी अध नंगी जवानी दिखाती रहती है. किसी दिन किसी ने पकड़ कर चोद दिया तो फिर सारी गर्मी निकल जाएगी. खुद तो बड़ी-बड़ी घोड़ियो से भी ज़्यादा मस्ता रही है और मुझे जब देखो उपदेश देती रहती है.

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08-16-2019, 12:09 PM,
#6
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
(रात को रजनी और रश्मि बैठी रहती है और दोनो अपनी-अपनी सोच मे डूबी हुई एक दूसरे को खा जाने वाली नज़रो से देखती रहती है और एक दूसरे से कोई बात नही करती है. रश्मि अपने मन में सोचती है उस सेक्सी फोटो के आल्बम को देखने का मज़ा तो रात को लेट कर ही आएगा पर क्या करूँ मुझे तो मम्मी के साथ सोना पड़ेगा. अगर आल्बम कल मिल गई होती तो आराम से भैया के रूम में सो कर देखती पर अब मम्मी के सामने कैसे देखूँगी? क्या करूँ? क्या करूँ?

उधर रजनी अपने मन में सोचती है. आज तो इस दुष्ट के साथ सोना पड़ेगा, अगर आज भी राज के रूम में सो जाती तो राज के मोटे लंड को छूने का मोका मिल जाता हे कितना मोटा लंड है मेरे बेटे का और रश्मि को खा जाने वाली नज़रो से देखती हुई कमिनि जा के राज के रूम में नही सो जाती है यहाँ मेरा मूह देखते बैठी है.

रश्मि मन में सोचती है कि चुपचाप जाकर भैया के रूम में लेट जाती हूँ और जब भैया आ जाएगे तो में सोने का बहाना कर के नही उठुन्गी और फिर भैया को मजबूरन मम्मी के साथ सोना पड़ेगा, हाँ यह ठीक रहेगा, और फिर रश्मि चुप चाप उठ कर अपने मोटे चूतड़ मटकाती हुई राज के रूम में जाने लगती है.

रजनी उसको देख कर मुस्कुराते हुए अरे मेरी प्यारी बेटी मेरे मन की बात पढ़ गई क्या, काश ये वही सो जाए. थोड़ी देर बाद राज घर आ जाता है और रोज की तरह रजनी उसको खाना लगा कर दे देती है और फिर चुप चाप बैठ कर उसे देखने लगती है.

राज- क्या हुआ मम्मी रश्मि सो गई क्या?

रजनी- हां! लगता है आज फिर तेरे ही कमरे में सो गई है.

राज अपना खाना ख़तम करके अपने रूम मे जाता है उसकी आहट सुनकर रश्मि अपनी आँखे बंद कर लेती है और सोने का नाटक करने लगती है, राज उसके पास जा कर बैठ जाता है और प्यार से उसके गाल सहलाता हुआ रश्मि, ओ रश्मि, सो गई क्या?? रश्मि उसकी बात का कोई जवाब नही देती है, तभी रजनी रूम में आती है.

रजनी- क्या हुआ बेटे सो गई ना..

राज- हां मम्मी! लेकिन कोई दिक्कत नही है आप आराम से सो जाओ में यही इसके पास सो जाता हूँ.

(राज की बात सुन कर दोनो माँ-बेटी की साँसे उपर नीचे होने लगती है और दोनो मे से कोई कुछ नही कह पाता है.)

राज- (अपनी मम्मी को देख कर) क्या हुआ मम्मी क्या सोच रही हो?

रजनी- कुछ नही बेटे, तो क्या तू यही सोएगा?

राज- हां मम्मी! बड़ा बेड है कोई दिक्कत नही है में आराम से सो जाउन्गा.

(रजनी का चेहरा राज की बात सुन कर मुरझा जाता है और वह पलट कर अपने रूम में चली जाती है. राज वही बैठा हुआ रश्मि के चेहरे को देखता रहता है और रश्मि की साँसे जैसे रुक जाएगी, वह बिल्कुल सावधानी से सोने की आक्टिंग करके लेटी हुई थी और अपने दिल को बहुत कंट्रोल कर रही थी लेकिन फिर भी उसका दिल बड़े जोरो से धड़क रहा था. राज उसके पास से उठ कर अपनी अलमारी से कोई बुक उठा लेता है और वही रश्मि के बगल में लेट कर पढ़ने लगता है और रश्मि अपनी आँखे धीरे से खोल कर राज को देखने लगती है, काफ़ी देर तक रश्मि अपनी किस्मत को कोस्ती रहती है और फिर उसकी नींद लग जाती है. लेकिन रश्मि यह भूल जाती है कि वह फोटो आल्बम को अपने बॅग से निकाल कर अपने भैया के बेड के नीचे रख कर लेटी हुई थी ताकि रात को देख सके, राज थोड़ी देर तक बुक पढ़ता है फिर ना जाने क्या ढूढ़ने के लिए वह अपने बेड के गद्दे को उठा कर जैसे ही देखता है उसको वह फोटो आल्बम नज़र आ जाती है, और वह जब उस आल्बम को खोल कर देखता है तो उसके होश उड़ जाते है. वह आल्बम के सारे फोटो को बारी-बारी से देखता हुआ बीच-बीच में रश्मि के चेहरे की ओर देखता जाता है.

राज अपने मन में सोचता है हे भगवान इतनी सेक्सी आल्बम किसकी है इसे कौन लाया होगा, उसके घर में उसकी मम्मी या रश्मि दो ही लोग है तो फिर या तो यह मम्मी कहीं से लेकर आई है या फिर रश्मि, लेकिन रश्मि तो बच्ची है यह स्कूल में पढ़ती है यह भला कहाँ से लेकर आई होगी, इस तरह की आल्बम तो इतनी आसानी से मिल नही सकती है, क्या रश्मि कहीं से लेकर आई है मगर इस छोटी सी लड़की, बस इतना सोच कर राज की नज़र पहली बार रश्मि के जवान गदराए जिस्म पर पड़ती है और वह रश्मि के एक-एक अंग को बड़े गौर से देखने लगता है. रश्मि का चेहरा उसे किसी हुश्न की परी जैसा नज़र आने लगता है और जब वह अपनी निगाहे रश्मि की टी-शर्ट मे तने हुए उसके बड़े-बड़े दूध पर डालता है तो उसके मन में वासना की लहरे दौड़ जाती है. वह उस आल्बम को देख कर पहले ही उत्तेजित हो गया था, लेकिन जब अपनी कमसिन बहन के गदराए तने हुवे बड़े-बड़े दूध को गौर से देखता है तो उसका मोटा लंड झटके मारने लगता है.

राज अपनी नज़रो को धीरे से रश्मि की स्कर्ट में समाई मोटी गदराई गान्ड पर ले जाता है और उसकी मोटी गान्ड को देख कर पागल हो जाता है. और जब उसकी नज़रे और नीचे रश्मि की गोरी-गोरी टाँगो की पिंदलियो पर पड़ती है तो अपनी बहन की गदराई जवानी उसे पागल कर देती है और वह रश्मि की गोरी-गोरी पिंदलियो पर अपने हाथ को रखने से नही रोक पाता है. और धीरे-धीरे अपनी बहन की नंगी टाँगो को सहलाने लगता है, राज का टावल हट जाता है और उसका लंड उसकी अंडरवेर फाड़ने की कोशिश करने लगता है. राज रश्मि के चेहरे को गौर से देखता है और अपनी बहन के गुलाबी गालो और रसीले होंठो को देख कर एक पल तो उसे ऐसा लगता है कि वह उसके चेहरे को अपने हाथो में भर कर उसके रसीले होंठो को खूब कस कर चूस ले.

वह बड़े ही प्यार से अपनी बहन के भरे हुए गुलाबी गालो पर अपने हाथ को फेरता हुआ उसके मुलायम स्पर्श को महसूस करता है, फिर अचानक कुछ सोच कर वह उस आल्बम को फिर से उसी जगह रख देता है और रश्मि के साइड में लेट कर फिर से उसी सोच में डूब जाता है.

रश्मि कितनी बड़ी हो गई है मुझे तो आज तक अहसास ही नही हुआ. और फिर से रश्मि को उपर से नीचे तक देखता है. उसकी ओर करवट लेकर रश्मि के गोरे गुलाबी गालो को अपने हाथों से सहलाता हुवा. कितनी खूबसूरत है यह लड़की और रश्मि के गुलाबी गालो को अपने होंठो से चूम लेता है. रश्मि के जिस्म से उठती खुश्बू जब उसकी नाक में जाती है तो राज पागल हो जाता है और अपने आप को रोक नही पाता है और रश्मि के जिस्म से अपने जिस्म को सटा कर लेट जाता है. रश्मि का नरम-नरम मखमली गदराए बदन का अहसास राज को पागल कर देता है और वह रश्मि एक बार तो कस कर अपनी बाँहो से चिपका लेता है और अपने होंठो से रश्मि के होंठो को चूम लेता है, तभी रश्मि थोड़ा कसमसाती है और राज एक दम से उससे दूर हो जाता है.

रश्मि करवट लेकर दूसरी ओर मूह कर लेती है, राज चुपचाप लेटा हुआ रश्मि की मोटी गदराई गान्ड के उठाव को देखता है और अपना हाथ लेजा कर उसकी मोटी-मोटी गदराई गान्ड पर फेरते हुवे अपने हाथ से हल्के हल्के रश्मि की गान्ड के भरे हुए पाटो को दबा-दबा कर उसके गुदाज चुतड़ों का साइज़ महसूस करने लगता है. फिर राज अपना हाथ हटाकर अपनी अंडरवेर में अपना हाथ डाल कर उसे मसल्ते हुवे सोचने लगता है, ये भी तो हो सकता है कि यह आल्बम मम्मी की हो! तो क्या मम्मी ऐसी आल्बम देखती है? हो भी सकता है. आख़िर मम्मी भी तो अच्छि ख़ासी जवान नज़र आती है. और फिर राज के दिमाग़ में अपनी मम्मी का गदराया हुवा बदन घूमने लगता है, ऐसा लगता है मम्मी लंड के लिए बहुत तरसती होगी, जब से पापा मरे हैं उसकी चूत को लंड भी तो नसीब नही हुआ है. ऐसी आल्बम मम्मी ही कहीं से लाई होगी. लगता है मम्मी अपनी चूत मराने के लिए बहुत ज़्यादा तड़प रही है.

तभी उसे ना जाने क्या सूझता है और वह चुपचाप अपने बेड से उठ कर बाहर निकल जाता है और अपनी मम्मी के रूम की ओर जाता है और धीरे से दरवाजा बजाता है.)

रजनी- कौन है राज?

राज- हां! मम्मी में ही हूँ.

रजनी- रुक बेटा! आती हूँ… (और आकर दरवाजा खोल कर राज को देखने लगती है.)

राज- वो क्या है ना मम्मी! मुझे नींद नही आ रही थी तो सोचा शायद आप जाग रही होगी तो थोड़ी देर आपसे ही बाते करता हूँ.

रजनी- (मुस्कुराकर) आ जा अंदर आ जा..

(और रजनी अपने भारी-भारी गदराए चुतड़ों को मटकाती हुई बेड की ओर जाने लगती है और राज जिस लिए वहाँ आया था उसकी नज़रे वही काम करने लगती है, राज आज पहली बार अपनी मम्मी की गदराई जवानी को अपनी आँखो से पी रहा था, वह बड़ी ही हसरत भरी निगाहो से अपनी मम्मी के मोटे-मोटे गदराए हुए मटकते चुतड़ों को देख रहा था और उसका दिल जोरो से धड़क रहा था. राज अपने मन में अपनी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड को देख कर सोचने लगा… हे भगवान कितने मोटे-मोटे और खूबसूरत चूतड़ है मेरी मम्मी के? जब साड़ी के उपर से इतने मस्त नज़र आ रहे है तो मम्मी के चूतड़ पूरे नंगे कैसे नज़र आते होंगे? पूरी नंगी कैसी गदराई और मस्त नज़र आती होगी? इतने मोटे-मोटे चुतड़ों को नंगा करके चूमते हुए कैसा लगता होगा? राज का मोटा लंड उसकी अंडरवेर में पूरी तरह तन चुका था और वह उसे अड्जस्ट करने लगा तभी…)

रजनी- क्या हुवा बेटे? वहाँ क्यो रुक गया आ बेड पर आकर लेट जा!

राज- जी मम्मी!

(और राज अपनी मम्मी को देखता हुआ उसके पास आकर लेट जाता है और रजनी भी उसकी ओर करवट लेकर लेट जाती है और उसके गदराए बड़े दूध से उसका पल्लू हट जाता है और राज की नज़र सीधे अपनी मम्मी के गदराए हुए बड़े-बड़े दूध पर पड़ जाती है. तभी राज अपनी मम्मी को देखता है और दोनो की नज़रे मिल जाती है और रजनी को आज पहली बार उसकी नज़रे कुछ बदली हुई नज़र आती है और वह अपने बेटे की ऐसी नज़रो को देख कर मन ही मन मुस्कुराते हुए..)

रजनी- क्या बात है? कुच्छ परेशानी तो नही है ना तुझे?

राज- (मुस्कुराकर) नही मम्मी! ऐसी कोई बात नही है बस लेटा हुआ था लेकिन आज पता नही नींद नही आ रही थी तो सोचा आपसे ही जाकर बाते करता हूँ.

रजनी- (राज के गाल पर हाथ फेरती हुई..) अच्छा किया! अब एक काम कर यही सो जा में तेरे बालो में हाथ फेर देती हूँ तुझे जल्दी नींद आ जाएगी.

राज- (मुस्कुराकर) ठीक है!

(और अपनी आँखे बंद कर लेता है और रजनी उसके बालो में अपना हाथ फेरने लगती है, राज का मूह थोड़ा नीचे था जिसके कारण उसने जब अपनी आँखे खोल कर देखा तो उसे उसकी मम्मी का नंगा उठा हुआ गदराया पेट और गहरी नाभि नज़र आने लगी और उसका मोटा लंड अपनी मम्मी की गदराई जवानी को देख कर फिर से पूरी तरह तन गया था, उसके लंड की खाल उसके टोपे पर चढ़ि हुई थी और उसकी इच्छा हो रही थी कि वह अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर अपने लंड की खाल को नीचे करके अपने टोपे को बाहर कर दे. लेकिन वह ऐसा नही कर सकता था क्योकि उसकी मम्मी उसकी हरकत को देख सकती थी. कुच्छ देर तक रजनी उसके बालो को सहलाती रही और राज अपने मूह को अपनी मम्मी के मोटे-मोटे दूध से सटाये हुवे उसके बदन की खुसबू लेता हुवा लेटा था.राज नही जानता था कि उसकी मम्मी उसके सोने का इंतजार कर रही है. और रजनी जब भी राज को धीरे से आवाज़ लगा कर पुछि..)

रजनी- राज आ रही है नींद…

राज- हां मम्मी!

(रजनी उसके सर को सहला-सहला कर थक गई, तब राज ने अपनी मम्मी को देख कर मम्मी अब आप भी सो जाओ बहुत रात हो गई है.)

रजनी- ठीक है बेटे!

(और रजनी अपनी आँखे बंद कर लेती है और राज अपनी मम्मी के भरे हुए चेहरे को बड़ी गौर से देखने लगता है उसके भरे हुए गाल और बड़े-बड़े रसीले होंठ देख कर राज का लंड झटके मारने लगता है और वह अपनी मम्मी के रसीले होंठो को अपने मूह में भर कर पीने के लिए तड़पने लगता है. और फिर वह अपनी मम्मी के भरे हुए भारी भरकम जिस्म को उपर से नीचे तक देखता हुआ अपने मन में सोचता है… हे कितनी गदराई हुई है मेरी मम्मी, पूरी नंगी करके चिपकने पर कितना अच्छा लगता होगा? और राज अपने लंड को सहलाता हुआ कभी अपनी मम्मी के उठे हुवे गदराए पेट कभी उसकी मोटी-मोटी गान्ड और कभी उसकी मोटी-मोटी चुचियो को देख-देख कर पागल हो जाता है. वह अपनी मम्मी के चेहरे को देख कर ही काफ़ी उत्तेजित हो चुका था और उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था. लेकिन वह चुपचाप अपने मोटे लंड को अपने हाथों में थामे पड़ा रहता है और फिर उसकी नींद लग जाती है. उधर रजनी भी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के अहसास को याद करके पानी-पानी हो रही थी लेकिन जब उसे भी कोई आशा नज़र नही आती है तो वह भी अपनी मोटी गदराई जाँघो के बीच अपनी फूली हुई पनियाई चूत को दबाए हुए सो जाती है.)

(नेक्स्ट डे रश्मि आराम से सोती है क्योंकि उसका नेक्स्ट पेपर एक दिन बाद था, और राज रोज की तरह उठ कर रेडी हो जाता है और फिर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगता है, तभी रश्मि उठ कर वहाँ आती है और राज के सामने आ कर…)


रश्मि- गुड मॉर्ंनिंग भैया!

राज- (रश्मि को देख कर मुस्कुराते हुवे..) गुड मॉर्निंग रश्मि!

रश्मि- भैया सॉरी! हां में रात को आपके बेड पर फिर सो गई थी.

राज- (रश्मि की गदराई जवानी पर एक नज़र मारता हुआ..) तो क्या हुआ? तेरा जब जहाँ मन करे सो जाया कर. इस घर में तेरा-मेरा वाली कोई चीज़ नही है, सब तेरी ही है समझी.

रश्मि- (मुस्कुरा कर) समझ गई. भैया एक पेज मुझे भी दो ना.

(राज उसे न्यूज़ पेपर का एक पेज निकाल कर दे देता है और रश्मि उसको अपनी जाँघो पर रख कर पढ़ने लगती है. राज रश्मि की गदराई मोटी-मोटी चुचियो को देखने लगता है और उसका लंड खड़ा हो जाता है. तभी उसके खूबसूरत चेहरे को देखता है और उसका मन करता है कि रश्मि को अपनी गोद में बैठा कर खूब चूमे उसके गदराए बदन को अपने हाथो में भर-भर कर खूब सहलाए. रश्मि बीच-बीच में राज को देख लेती है तब राज जल्दी से अपनी नज़रे पेपर पर लगा देता है.
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08-16-2019, 12:09 PM,
#7
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
रश्मि एक ही रात में राज की नज़रो मे उतर जाती है और राज उसके लाजवाब हुस्न को पीने के लिए तड़पने लगता है. उसे समझ नही आता है कि इतनी खूबसूरत और मस्तानी लड़की पर आज तक उसकी ऐसी नज़रे पहले कभी पड़ी क्यों नही. तभी दूसरी ओर से रजनी चाइ लेकर आती है और राज और रश्मि को चाइ देकर वह भी वही बैठ कर चाइ पीने लग जाती है. राज एक नज़र अपनी मम्मी की गदराई जवानी पर मारता है और फिर धीरे-धीरे चाइ की चुस्किया लेने लगता है.

कुच्छ देर बाद राज अपने ऑफीस की ओर चला जाता है और रश्मि बाथरूम में जाकर नहाने लगती है. रजनी राज के रूम में जाकर उसके रूम की सफाई करने लगती है. और जैसे ही राज के बेड के गद्दे को उठती है उसकी नज़र उसी आल्बम पर पड़ जाती है और वह उसी बेड पर बैठ कर जैसे ही उस आल्बम का पहला पेज पलटती है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है.

रजनी अपने मन में.. बाप रे राज ऐसी आल्बम देखता है मुझे तो यकीन नही होता वह इतना सेक्सी है. दिखता तो कितना भोला है और ओफ्फ कितना बड़ा लंड उस लड़की की चूत में घुसा हुआ है. रजनी उन पिक्स को देख कर पागल हो जाती है और बार-बार एक-एक सीन को पलट-पलट कर देखने लगती है. उसकी फूली हुई चूत एक दम गीली हो जाती है. वह जल्दी से उस आल्बम को पूरी देख कर फिर से वही रख देती है और चुपचाप बाहर आ जाती है. और कुछ देर के लिए बाहर आकर बैठ कर गहरी साँसे लेती हुई… मुझे तो पता ही नही था कि राज चूत मारने के लिए इतना तड़प रहा है. ज़रूर उन फोटो को देख-देख के अपना लंड हिलाता होगा. उसका लंड भी तो कितना मोटा और बड़ा है जिसकी चूत में घुसेगा वह तो मस्त हो जाएगी. ऐसे मोटे लंड से चुदने के लिए तो में भी तड़प रही हूँ. काश राज जैसा मोटा लंड मेरी चूत को भी फाड़ देता तो कितना मज़ा आता. हे क्या करूँ मेरी चूत तो बहुत खुजलाने लगी है. जब से राज के लंड को अपने हाथो से दबोचा है उसकी मोटाई के अहसास ने मेरी चूत की खुजली और भी बढ़ा दी है. राज भी चूत के लिए कितना प्यासा है तभी तो ऐसी आल्बम देखता है. कुच्छ ऐसा नही हो सकता कि राज का लंड मुझे अच्छे से देखने को मिल जाए.

तभी एक दम से रजनी चौक जाती है और रश्मि बाथरूम से नहा कर केवेल पेंटी पहने हुए बाहर आ जाती है, और अपनी मम्मी को देख कर मुस्कुराते हुए अपनी मोटी गान्ड मटकाते हुए अपने रूम की ओर चल देती है. रजनी रश्मि की मोटी गान्ड को देख कर अपने मन में… इस कामिनी की मोटी गान्ड भी खूब मटकने लगी है. इस पर ध्यान नही दिया तो यह जल्दी ही किसी मोटे लंड को अपनी चूत में भर लेगी इसके लक्षण ठीक नही दिखते हैं. घोड़ी इतनी बड़ी हो गई है फिर भी शरम नही आती है कैसे अपनी मोटी-मोटी गान्ड को मटका कर इतरा-इतरा कर चल रही है. बहुत ही चुदासी निकलेगी यह.

दोपहर को रजनी अपने रूम में जाकर सो जाती है और रश्मि अपने भैया के रूम को अंदर से बंद करके उस आल्बम को खोल कर देखने लगती है और उसकी फूली हुई चूत पानी छोड़ने लगती है. वह उस फोटो आल्बम को देख कर बहुत गरम हो जाती है और अपनी फूली हुई चूत के खड़े दाने को अपने हाथो की उंगलियो से सहलाते हुए गहरी-गहरी सिसकिया लेती हुई उस फोटो को देखने लगती है. जब उससे रहा नही जाता है तब वह अपनी पेंटी को उतार कर स्कर्ट उपर करके नंगी हो जाती है और उस आल्बम के मोटे-मोटे लंड को देख-देख कर अपनी चूत में अपनी एक उंगली डालकर मूतने वाली पोज़िशन में बैठ कर चूत में उंगली करने लगती है. वह बहुत देर तक अपनी चूत में लगातार उंगली करती है और उसकी चूत दर्द करने लगती है लेकिन उसका पानी नही निकल पाता है और जब वह थक जाती है तो गहरी-गहरी साँसे लेती हुई बाथरूम में जाकर अपनी चूत को ठंडे पानी से धो लेती है और वापस आकर सीधे कोमल को फोन लगाती है.)

कोमल- हेलो!

रश्मि- कमिनि कहीं की! ऐसी आल्बम दी है उसके साथ एक डिल्डो भी दे देती.

कोमल- (हँसते हुए) क्या हुआ मेरी रानी? क्यों इतना नाराज़ हो रही है?

रश्मि- अरे यार कोमल मुझसे तो नही हो रहा है मेरी तो चूत हाथ से रगड़ने पर दुखने लगी है.

कोमल- अरे पगली अब तेरे लिए डिल्डो कहाँ से लाऊँ?

रश्मि- कोमल कुछ तो आइडिया बता. नही तो में तड़प कर ही मर जाउन्गी.

कोमल- (मुस्कुराकर) एक आइडिया है?

रश्मि- क्या?

कोमल- तेरे भैया का मोटा लंड!

रश्मि- (गुस्से से कोमल को चिल्ला कर) कोमल बंद कर अपनी बकवास! में यहाँ दर्द से तड़प रही हूँ! और तुझे मज़ाक सूझ रहा है.

कोमल- माइ स्वीट हार्ट! में मज़ाक नही कर रही हूँ. में तेरे लिए सीरियस हूँ.

रश्मि- अब बस भी कर! बड़ी आई! मज़ाक नही कर रही है, मज़ाक नही तो और क्या है यह, जो चीज़ पोज़िबल ही नही है उसके बारे में तू मुझे सलाह देकर मज़ाक नही तो और क्या कर रही है?

कोमल- (कुच्छ सोच कर) अच्छा बाबा! नाराज़ मत हो में एक काम करती हूँ. में तेरे लिए किसी बॉय फ्रेंड का इंतज़ाम कर दूं तो चलेगा?

रश्मि- नही-नही मुझे डर लगता है.

कोमल- उफफफफ्फ़ हो ना घर में चुदना चाहती हो और ना बाहर ही किसी का लंड लेना चाहती हो तो क्या करूँ तेरे लिए? आसमान से लंड उतर कर आएगा क्या?

रश्मि- अच्छा तू मेरी किसी से दोस्ती तो करा दे फिर मुझे अगर ठीक लगेगा तो में सोचूँगी पर किसी भी ऐरे गैरे से मेरे बारे में कुछ कह मत देना नही तो में तेरी जान ले लूँगी.

कोमल- अरे पागल है क्या? क्या में इतना नही समझती, तू फिकर मत कर एक लड़का है वह मुझ पर लाइन मारता है हम कल उससे मिलते है और टाइम पास करते हैं. अगर तुझे पसंद आया तो तू अपनी लाइन जमा लेना. वैसे मुझे तो वह पसंद नही है. अब तू मिल कर देख लेना.

रश्मि- चल ठीक है. कल एग्ज़ॅम के बाद मिलते हैं.

कोमल- ओके बाइ डार्लिंग!

रश्मि- बाइ रश्मि!

(उस दिन उस आल्बम को अपने बॅग में वापस रख लेती है. और उस रात दोनो माँ बेटी साथ में सोती है और राज अपने रूम में सोता है. और जब वह बेड के नीचे देखता है तो उसे कुछ नही मिलता है और वह अपनी मम्मी और बहन के बारे में सोचता हुआ सो जाता है.)

रजनी- (रश्मि के सर पर हाथ फेरते हुए..) कल के पेपर की पढ़ाई हो गई..?

रश्मि- मम्मी अब मेरा पढ़ने लिखने में मन नही लगता है.

रजनी- तो फिर क्या करने का मन है तेरा?

रश्मि- (मुस्कुराकर अपने मन में..) अब तो मेरा चूत मराने का मन होता है.

रजनी- क्यों दाँत दिखा रही है?

रश्मि- (मुस्कुराकर) कुछ नही.

रजनी- बेटी अब बचपाना छोड़ दे! अब तू बड़ी हो गई है.

रश्मि- अच्छा, तो में कौन सा बचपाना दिखाती हूँ?

रजनी- देख बेटी अब अपनी चाल ढाल और रहन सहन का अंदाज थोड़ा चेंज कर. अब तू एक जवान लड़की हो गई है.

रश्मि- (अपने मन में... मम्मी एक बार जब में किसी मोटे लंड से अपनी चूत मरा लूँगी तो तुम्हे मेरी चाल भी बदली हुई नज़र आने लगेगी. एक बार मेरी चूत फटने तो दो..) मम्मी एग्ज़ॅम के बाद में कही घूमने जाउन्गी.

रजनी- कहाँ?

रश्मि- भैया से कहती हूँ कि मुझे कहीं घुमाने ले जाए!

रजनी- तेरे भैया को फ़ुर्सत ही कहाँ है, वह बेचारा अपनी ड्यूटी बजाए या तुझ आवारा को घुमाता फिरे.

रश्मि- अरे देखना में भैया से एक बार कहूँगी, और वह मुझे कहीं ना कहीं ज़रूर घुमाने ले जाएँगे.

रजनी- ठीक है, ठीक है अब जाकर लाइट बंद कर्दे फिर सुबह एग्ज़ॅम के लिए भी जाना है ना. पता चला वहाँ एग्ज़ॅम हो गई और यहाँ घोड़ी घोड़े बेच कर सो रही है. और रश्मि को ढकते हुए अब जा भी.

रश्मि- मम्मी उस जनम में तुम ज़रूर मेरी सास रही होगी और में तुम्हारी बहू..!

रजनी- (मुस्कुराकर) जितना दिमाग़ तेरा इन बातों में चलता है उतना अगर पढ़ाई में चला लेती तो पूरे स्कूल में टॉप आती.

रश्मि- (मुस्कुराकर) चलो तुम्हे यह तो लगा कि मेरा दिमाग़ कितना तेज चलता है और फिर रश्मि कमरे की बत्ती बुझा कर अपनी मम्मी के पास लेट जाती है.

(सुबह राज रश्मि को एग्ज़ॅम सेंटर पर छोड़ कर निकल जाता है और रश्मि अपनी एग्ज़ॅम के बाद सीधे कोमल से मिलती है और कोमल फिर एक लड़के से उसे मिलाती है. कोमल रश्मि को आँख मार… यार में अभी 10 मिनट में आती हूँ तब तक तुम दोनो बाते करो और कोमल वहाँ से चली जाती है. रश्मि उस लड़के के पास खड़ी हुई बस एक ही सवाल पूछती है कि… क्या नाम है तेरा तभी दूसरी ओर से एक बाइक आकर उसके पास रुकती है और रश्मि जब पलट कर देखती है तो राज उसको देख रहा था. राज को देख कर वह लड़का वहाँ से चल देता है और रश्मि राज के पास जाकर…)

रश्मि- अरे भैया आ गये आप.

राज- कौन था वह लड़का?

रश्मि- पता नही!

राज- तो फिर उसके पास क्यों खड़ी थी?

रश्मि- वो क्या है ना…

राज- देख रश्मि मुझे तेरा लड़को से दोस्ती करना बिल्कुल पसंद नही है, स्कूल आती हो अपनी पढ़ाई करो और सीधे अपने घर की ओर बढ़ जाओ. बेकार में किसी से ज़्यादा दोस्ती यारी करने की कोई ज़रूरत नही है. समझी!

रश्मि- जी भैया!

राज- चलो बैठो बाइक पर!

(और रश्मि अपने मोटे चूतड़ उचका कर बैठ जाती है. और राज अपनी बाइक चला देता है. रश्मि पीछे बैठी-बैठी अपने मन में… बड़े आए लड़को से दोस्ती ना किया करो. अरे मेरी चूत फड़कती है तो तुम्हारा क्या जाता है? कितना सीधा लग रहा था वह लड़का दो मिनट में सारा खेल खराब कर दिया अब ऐसा तो है नही कि तुम्हारी बहन मोटे लंड के लिए मर रही है और तुम अपने लंड से उसकी चूत को फाड़ सकते हो. राज उसी आइस क्रीम के ठेले के पास अपनी बाइक रोक देता है और रश्मि उतर जाती है.)

राज- आइस क्रीम खाएगी?

रश्मि- (अपना मूह फूला कर) नही.

राज- (मुस्कुराकर उसके गाल पर अपना हाथ फेरते हुए…) नाराज़ हो गई मुझसे!

(रश्मि अपने मूह को फुलाए हुए इधर उधर देखने लगती है राज उसके गुस्से से लाल खूबसूरत चेहरे को देख कर मस्त हो जाता है और उसका दिल करता है कि रश्मि का गुस्से से लाल चेहरा चूम कर उसे मना ले पर कुछ सोच कर, अपने कान पकड़ कर अच्छा बाबा आइ आम सॉरी!)

रश्मि- (मुस्कुराकर उसके हाथ को उसके कान से हटाते हुए..) भैया आप माफी माँगते हुवे अच्छे नही लगते.

राज- (मुस्कुराकर) अरे भैया! दो आइस क्रीम देना.

(और फिर रश्मि और राज आइस क्रीम खाते हुए एक दूसरे को मुस्कुराकर
देखने लगते है.)

राज- देखो रश्मि आज कल के लड़को से दोस्ती अच्छी नही होती है. बहुत कम लड़के ऐसे होते है जो लड़की को सम्मान की नज़र से देखते है बाकी सब आवारा गर्दि के अलावा कुछ नही करते इसलिए में तुम्हे उनसे दूर रहने के लिए कहता हूँ.

रश्मि- (मस्कुरा कर राज को देखती हुई अपने मन में..) भैया आप कहते तो ठीक हो लेकिन तुम्हारी बहन क्या करे उसको तो एक मोटे लंड से चुदने की चाहत है और अगर आपको अपनी बहन का इतना ही ख्याल है तो अपने मोटे डंडे को मेरी चूत में भर कर मेरी चूत फाड़ क्यो नही देते? एक बार मुझे अपने मोटे लंड से चोद दो तो फिर में किसी लड़के को क्या दुनिया के किसी भी मर्द को ही देखना बंद कर दूँगी.

राज- क्या सोच रही हो?

रश्मि- कुछ नही!

राज- देखो रश्मि अब तुम बड़ी हो गई हो इसलिए में तुम्हे ज़्यादा फोर्स नही करूँगा क्योंकि तुम अपना अच्छा बुरा खुद समझ सकती हो, मेरा फर्ज़ था तुम्हे आगाह करने का इसलिए मेने तुम्हे टोंक दिया. अब अगर तुम्हे मेरी बात बुरी लगती है तो फिर में तुम्हे हाथ पकड़ के तो रोक नही सकता. आगे जो भी करना सोच समझ के करना.

रश्मि- (मुस्कुराकर अपने मन में… भैया तुम्हे में बड़ी लगने लगी हूँ तो फिर मेरे गदराए बदन को एक बार अपनी निगाहो से देखो तब तुम्हे पता चल जाएगा कि इस लड़की को अब किस चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ रही है. और मुझे तुम्हारा भाषण नही बल्कि तुम्हारा मोटा लंड चाहिए बोलो दे सकते हो? और फिर अचानक रश्मि के मूह से दुबारा ज़ोर से निकल जाता है...) बोलो भैया दे सकते हो?

राज- (उसको देख कर) क्या?

(रश्मि को एक दम अपनी ग़लती का अहसास होता है और वह मुस्कुराकर एक आइस क्रीम और क्या?)

राज- (मुस्कुराते हुए..) अरे भैया एक आइस क्रीम और दे दो.

रश्मि- भैया एक बात कहूँ..

राज- हां बोल!

रश्मि- भैया मेरी एग्ज़ॅम के बाद हम कहीं घूमने चले!

राज- कहाँ जाना है तुझे?

रश्मि- जहाँ आप ले चलो.

राज- ठीक है में आज ही लीव अप्लिकेशन दे देता हूँ तेरी एग्ज़ॅम जब तक ख्तम होगी मेरी छुट्टी भी सेक्षन हो जाएगी.

(रश्मि खुश होकर राज का मूह अपने होंठो से चूम लेती है और राज एक दम से रश्मि को देखता रह जाता है और फिर रश्मि को इतना खुश देख कर वह भी मुस्कुरा देता है, राज अपनी बाइक स्टार्ट करता है और रश्मि अपने भारी चुतड़ों को उचका कर सीट पर टिका देती है और फिर दोनो अपने घर आ जाते है. राज रश्मि को ड्रॉप करके वापस अपने ऑफीस निकल जाता है. रश्मि जैसे ही घर के अंदर जाती है कोमल का कॉल आ जाता है और रश्मि.)

रश्मि- हां! बोल.

कोमल- क्यों जान कहाँ गायब हो गई उस लोंडे को लेकर?

रश्मि- अरे आज तो तूने मुझे मरवा ही दिया था.

कोमल- क्यो क्या हुआ? (रश्मि उसे अपने भैया वाली बात बता देती है और कोमल सुन कर..)

कोमल- लगता है जान तेरे भैया तुझे दूसरे लड़के के साथ देख कर जल भुंज गये थे.

रश्मि- पता नही यार पर में तो एक दम से डर गई थी.

कोमल- एक बात कहूँ!

रश्मि- हां बोल!

कोमल- थोड़ा सा अपने भैया पर ध्यान दे के देख, तुझे तेरे भैया से अच्छा कोई नही चोद सकता है.

रश्मि- क्या बकवास कर रही है.

कोमल- देख में तो तेरी बात का ही जवाब दे रही हूँ. कभी अपने भैया के चेहरे को पढ़ने की कोशिश तो कर. मुझे तो लगता है वह तुझे ज़रूरत से ज़्यादा चाहता है.

रश्मि- (अंदर ही अंदर खुश होती हुई..) तू यह कैसे अंदाज़ा लगा रही है?

कोमल- अच्छा तेरे भैया ने तुझे डाटने के बाद बाद में यह भी कहा होगा कि तू उनकी बात से नाराज़ तो नही है.

रश्मि- (कोमल की बात सुन कर चौक जाती है) हां-हां. कहा था.

कोमल- तो फिर ऐसा लगता है मेरी रानी कि तेरे भैया भी तुझ पर मरते हैं.

रश्मि- तू भी ना कोमल कुछ भी बोलती रहती है चल अब फोन रख हम बाद में बात करेंगे.

कोमल- चल ठीक है ओके बाइ!

(रश्मि फोन काटने के बाद एक पल के लिए कोमल की बात को सोचने लगती है और फिर मुस्कुराती हुई जैसे ही मुड़ती है सामने रजनी खड़ी रहती है.)

रजनी- क्या गुपचुप बाते हो रही थी कोमल और तुझ में?

रश्मि- (मुस्कुराकर) कुछ नही मम्मी वो तो यह कह रही थी कि रश्मि आजकल तेरी मम्मी कुछ ज़्यादा मोटी दिखने लगी है.

रजनी- (मुस्कुराकर) बेटी जब में तेरी उमर में थी तब में भी ऐसे ही बाते बनाने में माहिर थी. तू अपनी मम्मी को बेवकूफ़ समझती है क्या.

रश्मि- ओफफफ्फ़ हो मम्मी अब हम बच्चो की बातों से आप को क्या लेना है?

रजनी- इतनी बड़ी घोड़ी है और अपने आप को बच्चा कहती है.

रश्मि- (मुस्कुराकर) अच्छा में आपको एक बात बताना तो भूल ही गई भैया और हम मेरी एग्ज़ॅम के बाद घूमने जा रहे हैं.

रजनी- अच्छा! कहाँ जाने का इरादा है तुम लोगो का?

रश्मि- यह तो मुझे नही पता भैया ही जाने कहाँ ले जाएगे मुझे.

(उसके बाद रश्मि बाथरूम में जाकर हाथ मूह धोकर आती है और जाकर शीशे के सामने अपने चेहरे को देखने लगती है, और अपने मन में सोचती हुई… क्या में खूबसूरत दिखती हूँ या नही, भैया को में कैसी लगती हूँ पता नही, पर कोमल सही कह रही थी मुझे भैया के चेहरे को पढ़ना होगा कि उनके मन में क्या चल रहा है.
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08-16-2019, 12:10 PM,
#8
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
इसी तरह दिन बीत जाते हैं और रश्मि की एग्ज़ॅम के लास्ट दिन रश्मि कोमल के साथ गार्डन में बैठी रहती है और उसके मोबाइल पर राज का फोन आता है.)

राज- रश्मि आज मुझे थोड़ा अर्जेंट वर्क आ गया है तो में एक घंटे बाद आउन्गा, अगर तुम चाहो तो रिक्शा पकड़ कर घर आ जाओ.

रश्मि- नही भैया आप एक घंटे बाद आ जाओ, में तब तक कोमल के साथ गार्डन में बैठ कर आपका वेट करती हूँ.

राज- अच्छा ठीक है में जल्दी आने की कोशिश करूँगा.

रश्मि- ओके भैया!

कोमल- (मुस्कुराती हुई..) क्या कह रहे थे तेरे भैया?

रश्मि- उनको थोड़ा टाइम लगने वाला है आने में.

कोमल- चल अच्छा है! तब तक हम यही बैठ कर गप्पे मारते हैं.

रश्मि- यार! आज से छुट्टिया शुरू हो गई और अब तेरा क्या प्लान है कहाँ छुट्टिया मनाने जा रही है या फिर यहीं रहेगी?

कोमल- अरे में कहाँ जाउन्गि मुझे तो यही रहना है पर तेरा अपने भैया के साथ जाने का प्रोग्राम फिट हुआ कि नही?

रश्मि- अब देखती हूँ! आज भैया से बात करूँगी.

कोमल- अच्छा ये बता तुझे वो फोटो कैसे लगे?

रश्मि- बहुत ही मस्त थे लेकिन जब से मेने वह सब देखा है मेरी चूत मुझे रात-रात भर सोने नही देती है उसमे एक मीठा सा दर्द बना ही रहता है.

कोमल- अरे तो अपने भैया से अपनी चूत की थोड़ी बहुत मालिश करवा लेती रानी.

रश्मि- (अपना मूह बना कर..) मेरा भैया मुझे तो ढंग से छूता नही मेरी चूत क्या छुएगा.

कोमल- मेरी जान! तूने कोशिश ही नही की होगी नही तो मर्द तो औरत की चूत छुना क्या उसे चाट भी जाते हैं.

रश्मि- (कोमल को देख कर..) हे! ये चाटने चटवाने की बात मत कर कोमल, मुझसे अपनी फूली हुई चूत वैसे भी संभाली नही जा रही है, और तू है बस मेरा पानी बहाने पर लगी हुई है.

कोमल- अच्छा रश्मि एक बात मुझे सच-सच बता.

रश्मि- क्या?

कोमल- अगर तेरे भैया तुझे चोदना चाहे तो तू उनसे अपनी चूत मरवाएगी कि नही?

रश्मि- अरे कामिनी तूने मुझे वह फोटो दिखा के इतना पागल कर दिया है कि में खड़े-खड़े अपने भैया का लंड लेने के लिए तैयार हूँ, पर मेरी किस्मत इतनी जोरदार कहाँ है. ना जाने कब तक मेरी चूत मुझे तड़पाती रहेगी.

कोमल- रश्मि तू बहुत सेक्सी है तुझे देख कर तो सच में तेरे भैया का लंड दिन भर खड़ा रहता होगा.

रश्मि- अरे, खड़ा रहने भर से क्या होता है? जब मेरी चूत में घुस कर उसे फाड़ दे तब ना कुछ राहत मिलेगी.

कोमल- रश्मि तेरे भैया का लंड सच में बहुत मोटा होगा, क्या तू सह लेगी अपने भैया का लंड?

रश्मि- बात तो ऐसी कर रही है जैसे मेरे भैया आज ही मुझे चोदने वाले हों, ख्यालो की दुनिया से निकल और कुछ सही आइडिया दे नही तो अपना मूह बंद करके चुप चाप बैठ जब देखो बस सपने दिखाने के काम करती है.

कोमल- रश्मि तू तो ऐसी बात करती है जैसे मुझे बड़ा भारी एक्सपिरिन्स हो लौन्डो को फसाने का, लेकिन हाँ तेरे जैसा गबरू जवान भाई मेरा होता तो में तो अब तक उससे कई बार अपनी चूत फडवा चुकी होती.

रश्मि- बड़ी आई चूत फदवाने वाली, दूर से सब को ऐसा ही लगता है. जब मेरा भैया सामने आएगा तो बिना उसके लंड डाले ही तेरी गान्ड फॅट जाएगी.

कोमल- पर तू कोशिश तो कर सकती है ना..

रश्मि- वो कैसे?

कोमल- तू अपने भैया से ज़्यादा से ज़्यादा चिपकने की कोशिश करा कर जब तक वह तेरे गदराए बदन को छुएगा नही उसका ध्यान तेरी ओर कैसे जाएगा?

रश्मि- और कहीं भैया ने मुझे खीच कर एक झपट टिका दिया तो?

कोमल- अरे अब इस तरह डर-डर कर जिएगी तू अपने भैया का क्या कुत्ते का लंड भी नसीब नही होगा और ऐसी ही दिन रात आग में जलती रहेगी.

रश्मि- तेरी चूत में खुजली नही होती क्या, तू क्यों नही अपनी चूत मारने की बात करती है?

कोमल- अरे अब कोई मुझे चोदने के लिए आगे नही आता है तो क्या करूँ? मोहल्ले वालो के सामने नंगी जाकर खड़ी हो जाउ क्या? अगर तुझमे हिम्मत है तो अपने भैया को कह दे कि एक बार वह अपने मोटे लंड से मेरी चूत को कस कर चोद दे.

रश्मि- (अपना मूह बना कर..) बड़ी आई मेरे भैया का लंड लेने वाली, खबरदार जो मेरे भैया की तरफ आँख उठा कर भी
देखा तो में तेरी जान ले लूँगी.

कोमल- (मुस्कुराकर) ओफफफफफ्फ़ हो जलन! इतनी ज़्यादा जलन! तेरे भैया अगर मुझे चोद भी देंगे तो तेरा क्या बिगड़ जाएगा?

रश्मि- मेरे भैया ऐसे हर किसी लड़की को थोड़ी चोदेन्गे वो तो सिर्फ़ अपनी बीबी या फिर....

कोमल- (मुस्कुराकर) या फिर तुझे चोदेगे यही ना?

रश्मि- (अपनी आँखे निकाल कर कोमल को देखती हुई..) मेरा भाई है. मुझे चोदे या कुछ भी करे तुझे उससे क्या?

कोमल- अच्छा-अच्छा तेरा भाई तेरा है और किसी का नही पर अगर में तेरे भैया की बीबी होती तब भी क्या तू मुझसे ऐसे ही जलती?

रश्मि- बड़ी आई मेरे भैया की बीबी बनने वाली, अपना मूह देखा है कभी आईने में?

कोमल- (रश्मि की बात सुन कर थोड़ा मुँह बना कर..) क्या में इतनी बुरी लगती हूँ?

रश्मि- (कोमल के सीरीयस चेहरे को देख कर..) नही यार में तो मज़ाक कर रही हूँ! तू तो बुरा मान गई.

कोमल- नही रश्मि में तेरी बात का कभी बुरा नही मानती हूँ, मेरी लाइफ में तेरे सिवा कोई मेरा हमदर्द और हमराज़ नही है. तू मेरे लिए क्या है यह तू नही जानती है.

रश्मि- (मुस्कुराकर) चल अब ज़्यादा नौटंकी मत कर और आगे बोल क्या कह रही थी कि तू मेरे भैया की बीबी होती तो में तुझसे जलती कि नही, यही ना?

कोमल- हां!

रश्मि- अगर तू मेरे भैया की बीबी होती तो फिर पता नही में अपने भैया से दूर ही रहती वो भी तेरी खुशी के लिए.

कोमल- और अगर में तेरे भैया को यह कह देती कि तुम्हारी बहन तुमसे अपनी चूत मराना चाहती है तो फिर..?

रश्मि- (कुछ सोच कर..) पहले ये बता कि अगर तू मेरी भाभी होती तो मुझे अपने भैया से चुदवाने में मदद करती कि नही?

कोमल- (मुस्कुराकर) क्यों नही? ज़रूर करती, आख़िर पहले तू मेरी सहेली है बाद में मेरी ननद बनती ना.

रश्मि- (मुस्कुराकर) याद रखना अपनी इस बात को संयोग का कुच्छ कहा नही जा सकता है. यह पोज़िबल तो नही है कि तू मेरी भाभी बनेगी लेकिन यह असंभव भी नही है. कहीं तू मेरी भाभी बन कर आ गई तो याद रखना पहला हक़ मेरे भैया पर मेरा ही होगा. समझी!

कोमल- (मुस्कुराकर रश्मि के दूध को दबाते हुए..) अरे मेरी रानी! तेरे लिए में अपना पति क्या अपनी जान भी दे सकती हूँ. मौका लगे तो कोमल को तू आजमा कर देख लेना.

(दोनो की बाते चल ही रही थी कि राज का फोन आ जाता है और फिर रश्मि और कोमल गार्डन के बाहर निकल जाती है और सामने राज खड़ा रहता है.)

कोमल- हेलो राज भैया!

राज- हे कोमल कैसी हो तुम?

कोमल- बस भैया फाइन!

राज- तो आज तुम लोगो का एग्ज़ॅम ख़तम हुआ!

कोमल- (मुस्कुराकर) हां भैया! एग्ज़ॅम ख़तम और छुट्टिया शुरू..

राज- चलो अच्छा है अब कुछ समय आराम से छुट्टिया बीताओ, में भी रश्मि को लेकर एक हफ्ते के लिए कश्मीर जा रहा हूँ. इस बार हम वही घूम कर आएँगे. (रश्मि राज की बात सुन कर खुशी से झूम उठती है और कोमल को बाइ करके अपने गदराए चुतड़ों को उचका कर बाइक पर चढ़ जाती है और राज उसको लेकर घर की ओर चल देता है.)

रश्मि- भैया! आज आइस क्रीम नही खिलाओगे क्या?

राज- क्यों नही पर आइस क्रीम के पहले चल तुझे पानिपुरी खिलाता हूँ. तुझे पसंद है ना?

रश्मि- बहुत.

(राज अपनी बाइक को पार्क करके रश्मि का हाथ पकड़ कर पानिपुरी के ठेले की ओर चल देता है और फिर वहाँ दोनो पानिपुरी खाते है और फिर आइस क्रीम खाते हुए एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते हैं.)

रश्मि- भैया! हम कब निकल रहे है?

राज- कल!

रश्मि- (खुशी से उछलती हुई..) सच!!!!

राज- हां! पर में सोच रहा था कि मम्मी को भी साथ ले चलें क्या?

रश्मि- (राज की बात सुन कर अपना मूह बनाते हुवे) मुझे नही मालूम.

राज- (रश्मि के चेहरे के भाव को पढ़ कर) पर पता नही मम्मी जाना चाहेगी कि नही.

रश्मि- अरे भैया मम्मी को कहाँ ले जाओगे वह वैसे भी कहीं जाने के नाम पर आलस करने लगती है.

राज- (मुस्कुराता हुआ..) क्यों? तेरा मन नही है क्या मम्मी को ले जाने का?

रश्मि- (अपनी नज़रे चुराते हुवे..) मुझे क्या करना है आपकी मर्ज़ी जिसे चाहो ले जाओ.

राज- (मुस्कुराकर) अच्छा! तेरा मन नही है तो नही ले जाते हैं.

रश्मि- (अंदर ही अंदर खुश होती हुई, उपरी नाटक दिखा कर..) नही मेने कोई मना नही किया है, बाकी आपकी जैसी मर्ज़ी नही ले जाना है तो मत ले जाइए.

राज- (उसके गाल को खिचते हुवे..) तू मम्मी से क्या कह रही थी?

रश्मि- (राज को देखती हुई..) क्या कह रही थी?

राज- यही कि मम्मी पिछ्ले जानम में लगता है तुम मेरी सास थी, और में तुम्हारी बहू.

रश्मि- (मुस्कुराकर) वो तो में ऐसे ही मज़ाक कर रही थी.

राज- (मुस्कुराकर) वैसे इस जनम में भी तू मम्मी की बहू जैसी हरकते ही कर रही है.

(रश्मि अपने भैया की बात को समझ जाती है और अपनी नज़रे इधर उधर मटकाती हुई मुस्कुराने लगती है और राज उसके नज़ो-नखरे वाले अंदाज को देख कर मस्त होता रहता है और उसके कदम अपनी बहन को अपनी बाँहो में लेने के लिए बहकने लगते हैं. वह रश्मि के हुस्न का दीवाना हो जाता है और रश्मि के नशीले योवन की मस्ती को पीने के लिए तड़पने लगता है. जब वह रश्मि के खूबसूरत चेहरे को अपने मूह से चूमने भर की कल्पना करता है तो उसका लंड खड़ा हो जाता है और वह सोचता है… रश्मि मे गजब की कशिश है जब इसका खूबसूरत रूप ही मुझे पागल कर देता है तो इसके मखमली मुलायम बदन को अपनी बाँहो में लेकर भरते समय मेरा क्या होगा? यह तो किसी अप्सरा से भी कही ज़्यादा खूबसूरत है और पता नही मुझे इसका चेहरा इतना अच्छा क्यों लगता है? मुझे अपनी लाइफ में कुछ नही चाहिए मुझे बस रश्मि चाहिए. बस रश्मि.

रश्मि- (राज को हाथ लगा कर हिलाते हुए..) क्या हुआ भैया? कहाँ खो गये?

राज- (मुस्कुराता हुआ..) कुछ नही बस ऐसे ही कुछ याद आ गया था.

(रश्मि राज के चेहरे को गौर से देखती है और उसकी नज़रे पढ़ने की कोशिश करती है लेकिन तभी राज रश्मि की आँखो में देखता है और एक पल के लिए दोनो की आँखे एक दूसरे से मिल जाती है और दोनो की आँखो से एक दूसरे के लिए चाहत भरी ख्वाहिशे निकालती रहती है.)
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08-16-2019, 12:10 PM,
#9
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
अगले दिन राज अपनी बहन को लेकर कश्मीर घूमने के लिए निकल पड़ता है और वो लोग अपनी ट्रेन पकड़ कर चल देते है दोनो का रिज़र्वेशन रहता है और दिन में दोनो आमने सामने की बर्थ पर बैठे हुए खिड़की से बाहर का नज़ारा देखते रहते है, राज खिड़की में देखते हुए रश्मि की ओर अपनी तिरछी नज़रे करके उसको उपर से नीचे तक देखता है, रश्मि ब्लू कलर के जीन्स और येल्लो कलर को टाइट टीशर्ट पहने रहती है, राज रश्मि के मोटे-मोटे बड़े-बड़े कठोर दूध को देख कर मस्त हो जाता है और उसका लंड खड़ा होने लगता है, वह रश्मि के चेहरे की ओर देखता है रश्मि उस समय बहुत ही खूबसूरत नज़रआ रही थी, रश्मि की हाफ बाँह की टीशर्ट उसकी कलाई पर एक घड़ी उसके कंधे तक लेज़र किए हुए बाल, उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी और उसके रसीले होंठो पर हल्की लिपस्टिक उसे बहुत खूबसूरत बना रही थी, राज हसरत भरी निगाहो से उसके रूप सोन्दर्य को देख रहा था, उसका दिल कर रहा था क़ि रश्मि को अपनी गोद में बैठा कर उसके रसीले होंठो को खूब कस के चूमे और उसकी कसी हुई मस्तानी छातियों को अपने सीने से लगा कर उसे अपनी बाँहो में भर ले, उसका लंड अपनी बहन की गदराई जवानी को देख कर पूरी तरह तन चुका था, वह अपने मन में अपने आप से बाते कर रहा था, रश्मि तू कितनी खूबसूरत है, काश एक बार तू मेरी बाँहो में आ जाती तो में तुझे इतना प्यार करता कि तू सारी जिंदगी मेरी बाँहो से दूर होने का नाम नही लेती, तेरी इस कातिल अदाओं ने और मदमस्त कसी हुई जवानी ने मुझे पागल कर दिया है, राज रश्मि के दूध को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था और रश्मि अपना मूह खिड़की की ओर करे हुए बाहर का नज़ारा ले रही थी, फिर एकाएक रश्मि ने अपनी नज़रो को एक पल के लिए राज की ओर किया और राज को बड़े गौर से अपने कसे हुए दूध को देखते हुए पकड़ लिया,

रश्मि ने जैसे ही की आँखो को देखा राज ने भी उसके दूध से नज़रे हटा कर रश्मि की आँखो में देखा और राज थोड़ा घबरा गया लेकिन फिर नॉर्मल होने की कोशिश करता हुआ रश्मि को देख कर थोड़ा सा मुस्कुरा दिया, रश्मि ने भी राज को देख कर एक स्माइल दे दी,राज फिर से खिड़की के बाहर देखने लगा और रश्मि राज को तिरछी नज़रो से देखती हुई अपने मन में खुस होती हुई सोचने लगी, क्या बात है आज तो भैया मेरे तने हुए दूध को कैसी खा जाने वाली नज़रो से देख रहे थे, कहीं ऐसा तो नही कि भैया भी मन ही मन में मुझे चोदना चाहते हो, लगता है भैया को मेरे दूध बहुत अच्छे लगते है और मेरे दूध की मोटाई और कसावट देख कर उनका मन मेरे दूध को अपने हाथ में भर कर दबाने और मसल्ने का कर रहा होगा, पर भैया ने आज से पहले कभी मेरे दूध को इस तरह नही देखा, लगता है आज में बहुत ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत लग रही हू, तभी तो मेरे हुस्न ने मेरे भैया को भी मेरी ओर देखने पर मजबूर कर दिया, अगर भैया मुझे चोदना चाहते होंगे तो एक बार फिर उनकी नज़रे मेरे कसे हुए दूध पर ज़रूर जाएगी तभी राज रश्मि की ओर मूह करता है और उसकी नज़रे सीधे रश्मि के कसे हुए दूध पर जाती है और फिर वह जल्दी से अपनी नज़रे रश्मि के चेहरे की ओर कर लेता है, इतनी देर में रश्मि उसकी नज़रो को समझ जाती है और मुस्कुराकर

रश्मि- भैया में आपके पास उधर खिड़की की तरफ बैठ जाउ

राज - मुस्कुरा कर आ जाओ

रश्मि - सीट से खड़ी होकर राज की ओर अपनी मोटी गान्ड करके झुक कर सीट से अपना बॅग और चादर उठाने लगती है और

राज रश्मि की जींस में कसी हुई मोटी गान्ड को देख कर मस्त हो जाता है और उसका मन होता है कि रश्मि की मोटी गान्ड को उसकी कमर में हाथ डाल कर अपनी गोद में रख ले, तभी रश्मि पलट कर राज की जाँघो में हाथ रखती हुई उसके करीब खिड़की के पास बैठ जाती है, रश्मि के उसके करीब आते ही रश्मि के जिस्म से उड़ती हुई महक राज को मस्त कर देती है और वह बिल्कुल करीब से रश्मि के गुलाबी गालो उसके रसीले होंठो और उसकी बड़ी-बड़ी तनी हुई कठोर चुचियो को देखने लगता है, उसके इतने करीब एक गदराई और खूबसूरत लड़की का अहसास उसे पागल किए रहता है और वह अब बड़ी आसानी से रश्मि के कसे हुए रसीले दूध को देखता रहता है और उसका लंड उसकी पेंट में खड़ा हो जाता है, रश्मि कुछ देर तक खिड़की के बाहर देखती रहती है फिर राज के कंधे पर अपने सर को रख कर उसके हाथ की बाँहो को पकड़ कर बैठ जाती है,

राज अपने हाथ को रश्मि की पीठ के पीछे से लेजा कर उसकी दूसरी साइड की बाँहो को पकड़ कर
राज - क्या हुआ बोरियत हो रही है क्या
रश्मि- मुस्कुराकर नही ऐसी कोई बात नही है
राज - बहुत चुप-चुप है कुछ बोल ना
रश्मि- अपने मन में क्या बोलूं भैया मेरी चूत तो तुम्हारे मोटे लंड को लेने के लिए तड़प रही है, पता नही तुम कब अपनी बहन की फूली हुई चूत को अपने मोटे लंड से फाड़ोगे,
राज - उसकी बाँहे दबाता हुआ, क्या हुआ कुछ बात करो ना
रश्मि- अपना सर उसके कंधे से उठा कर, भैया में इन कपड़ो में कैसी लग रही हूँ
राज - मुस्कुराकर एक दम मस्त
रश्मि- क्या
राज - उसके गोरे गालो को खिचता हुआ, मेरा मतलब है तू बहुत खूबसूरत लग रही है
रश्मि- मुस्कुराकर सच
राज - रश्मि की बाँहो को पकड़ कर अपनी ओर दबाते हुए तू दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है
रश्मि- अपने उसके कंधे पर फिर से अपना सर रखती हुई, अपने मन में जब में आपको इतनी अच्छी लगती हूँ तो मुझे एक बार अपने मोटे लंड से चोद क्यो नही देते,

दोनो भाई बहन बैठे-बैठे एक दूसरे के बारे में बस कल्पना करते रहते है और ट्रेन अपनी रफ़्तार से दौड़ती रहती है, जब रात हो जाती है तो उनके आस पास की बर्थ खाली ही रहती है और राज रश्मि को उसकी बर्थ पर जाकर सोने के लिए कहता है तो रश्मि उसे कहती है, नही भैया में तो आपके पास ही बैठूँगी
राज - क्यो तुझे नींद नही आ रही है क्या
रश्मि- नही अभी तो नही आ रही है और आएगी तो में आपके कंधे पर सर रख कर सो जाउन्गी, पर अगर आपको लेटना हो तो में अपनी सीट पर चली जाती हूँ
राज - नही-नही बैठी रहो में भी अभी नही सोना चाहता हूँ
खिड़की से ठंडी हवा उनके बदन पर पड़ती रहती है और रश्मि अपने भैया से चिपकी हुई उसके कंधे पर अपना सर रखे बैठी रहती है, राज रश्मि के पीछे से हाथ डाले उसकी दूसरी साइड की बाँहो पर अपने हाथ को हल्के -हल्के फेरता रहता है, वह कभी उसके बालो में उंगलिया चलता है कभी उसकी बाँहो को सहलाता रहता है, रात को लगभग 11 बज चुके होते है और दोनो चिपके हुए बैठे रहते है रश्मि अपनी आँखे बंद किए राज के कंधे पर सर रख कर बैठी रहती है,
राज - रश्मि के सर पर अपना मूह फेरता हुआ, रश्मि सो गई क्या
रश्मि- जागती रहती है पर कोई जवाब नही देती है
राज - रश्मि, ओ रश्मि, सो गई क्या
रश्मि- जब दुबारा कोई जवाब नही देती है तो राज अपने होंठो को उसके गुलाबी गालो से चिपका लेता है और धीरे-धीरे अपनी बहन के गोरे-गोरे गालो को चूमने लगता है, रश्मि राज की इस हरकत से सिहर जाती है और उसकी चूत फूलने लगती है, राज उसके गालो को चूमता हुआ धीरे से कहता है रश्मि तू बहुत खूबसूरत है,

रश्मि- अपनी आँखे बंद किए हुए अपने मन में खूबसूरत हूँ तो अपने मोटे लंड से मुझे चोद क्यो नही देते भैया
राज - धीरे से रश्मि के गालो को अपने होंठो से सहलाता हुआ, मेरी गुड़िया कितनी बड़ी हो गई है मुझे तो अहसास भी नही था
रश्मि- अपने मन में, एक बार अपनी गुड़िया को पूरी नंगी करके उसकी चूत देख लो तब पता चलेगा आपको कि आपकी गुड़िया कितनी बड़ी हो गई है, आपके मोटे लंड को अपनी चूत में पूरा एक बार में ही भर लेगी

राज - रश्मि, ओ रश्मि, ऑफ हो मम्मी सच कहती है यह लड़की तो सचमुच घोड़े बेच कर सोती है चाहे कोई कहीं भी हाथ लगा दे,

रश्मि- अपने मन में भैया में तो सोने का नाटक ही इसलिए कर रही हूँ ताकि तुम कहीं तो मुझे हाथ लगाओ, इतना क्यो डरते हो भैया एक बार मेरे कसे हुए दूध ही दबा दो

राज सोचता है कि बेचारी बैठी-बैठी सो गई में एक काम करता हूँ में खिड़की की तरफ बैठ जाता हूँ और इसका सर अपनी गोद में रख कर इसे सुला देता हूँ यह कब तक ऐसे ही बैठी-बैठी सोएगी और फिर राज धीरे से उठ कर रश्मि को थोड़ा खीच कर बर्थ पर लिटा देता है और उसके सर के पास आकर खुद खिड़की के पास बैठ कर रश्मि के सर को अपनी जाँघो पर रख लेता है और धीरे-धीरे अपने हाथो से रश्मि के सर पर अपना हाथ फेरते हुए उसे देखने लगता है, रश्मि अपने मन में भैया सर क्या सहला रहे हो अपनी बहन के कसे हुए दूध सहलाओ ना,

राज धीरे से रश्मि के गोरे-गोरे गालो पर हाथ फेरता है और उसके मुलायम गालो के स्पर्श से उसका लंड टनटना जाता है, वह धीरे से रश्मि के रसीले होंठो पर अपने हाथ की उंगलिया फेर कर देखता है और अपने मन में हाई रश्मि कितने कोमल होंठ है तेरे, काश में इन रसीले होंठो का रस पी पाता, तभी राज की नज़र रश्मि की तनी हुई कसी चुचियो पर जाती है और वह अपनी आँखो के सामने इतनी बड़ी-बड़ी कठोर चुचियो को देख कर सिहर जाता है और उसका दिल उन तनी हुई कसी चुचियो को छूने का करने लगता है, वह इधर उधर देखता है उस कॉमपार्टमेंट में एक्का दुक्का लोग होते है और वह भी घोड़े बेच कर सो रहे होते है, रश्मि अपनी आँखे बंद किए पड़ी रहती है और उसकी चूत पूरी तरह गीली रहती है और वह अपने भैया के कुछ करने की राह देखती रहती है,

राज जब रश्मि की छातियो को अपने हाथ में भरने का सोचता है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है और वह उस कॉमपार्टमेंट की लाइट बंद कर देता है और फिर हिम्मत करके रश्मि के एक दूध पर अपने हाथ को धीरे से रख देता है, रश्मि को इतना यकीन नही था कि राज वाकई उसके दूध पर अपने हाथ रख देगा और रश्मि राज की इस हरकत से एक दम से सिहर जाती है और उसका दिल बहुत जोरो से धड़कने लगता है और उसकी साँसे तेज हो जाती है, उधर राज जब रश्मि की गदराए दूध के गुदाज और भरे-भरे माँस का स्पर्स अपने हाथो से महसूस करता है तो उसका दिल धड़क जाता है और उसका लंड पूरी तरह तन कर खड़ा हो जाता है, दोनों भाई बहन की दिलो की धड़कन बहुत तेज हो जाती है और राज का हाथ अपनी बहन के गुदाज कसे हुए दूध पर रखा-रखा काँपने लगता है, पर राज उस अहसास को पाकर मस्त हो जाता है उसने आज तक किसी भी लड़की के दूध को अपने हाथो से नही छुआ था इसलिए उसके मोटे दूध का गुदाज अहसास उसे पागल कर देता है,

रश्मि अपने मन में, ओह भैया बहुत अच्छा लग रहा है पर इतना क्या दर रहे हो थोड़ा कस-कस कर मेरे दूध दबा दो में कुछ नही कहुगी ऐसे कब तक हाथ रखे रहोगे,

राज जैसे रश्मि के मन की बात जान गया हो और वह धीरे से रश्मि के दूध को हल्के-हल्के दबा-दबा कर देखने लगता है, वह जैसे-जैसे रश्मि के दूध दबाता जाता है उसका मन करता है कि और कस कर दबाए और वह थोड़ा ज़ोर लगा कर रश्मि के दूध को मसल देता है और उसकी इस हरकत से रश्मि की जान निकल जाती है, रश्मि की साँसे पूरी रफ़्तार से चलने लगती है और उसकी चूत फूल-फूल कर बुरी तरह फड़कने लगती है

राज की हिम्मत थोड़ी बढ़ती है और वह रश्मि के दूध को कभी धीरे-धीरे और कभी थोड़ा ज़ोर से अपने हाथों में भरने लगता है, रश्मि अपने भैया पर मर मिटती है और अपने मन में हे भैया आज तुमने अपनी बहन का दिल जीत लिया है अब तो में चाहे जैसे भी हो तुम्हारे ही मोटे लंड से अपनी चूत फडवाउंगी, अब तो में तुमसे ज़रूर अपनी चूत मरवाउन्गी भैया, तुम बहुत अच्छे हो भैया, आज तो लगता है मेरी जान ले लोगे, ऐसे ही दबाते रहो भैया, ऐसे ही थोड़ा
कस कर दबाओ भैया बिना किसी डर के मस्लो अपनी बहन के मोटे-मोटे दूध को,

राज रश्मि के मोटे-मोटे दूध दबा-दबा कर मस्त हो गया था और फिर उसने थोड़ी और हिम्मत दिखाते हुए रश्मि के दूसरे दूध को भी अपने हाथों में भर कर हल्के-हल्के दबाने लगा और बीच-बीच में कभी-कभी थोड़ा ज़्यादा ज़ोर से भी रश्मि के कसे हुए गुदाज दूध को मसल्ने लगा था, रश्मि अपनी मोटी जाँघो के बीच अपनी चूत दबाए करवट लेकर राज की जाँघो में अपना सर रखे हुए लेटी थी, राज अब कभी रश्मि के एक दूध कभी एक साथ दोनो दूध को हल्के- हल्के दबाते हुए उनके गदराए पन को महसूस कर रहा था और उसका मन रश्मि के रसीले होंठो को चूसने का बहुत करने लगा और वह चाह रहा था कि रश्मि के मूह को वह अपने मूह से खूब चूमे और अपनी प्यारी बहन को अपने होंठो से खूब चूम-चूम कर प्यार करे लेकिन सिचुयेशन कुछ ऐसी थी कि वह खुल कर रश्मि के साथ कुछ कर भी नही सकता था और फिर उसे रश्मि के जागने का भी डर लग रहा था, फिर भी राज ने रश्मि को थोड़ा ताक़त लगाकर सीधा लिटा दिया जिससे रश्मि के होंठ पूरी तरह उसके सामने आ गये और फिर वह धीरे से रश्मि के उपर झुक कर उसके रसीले होंठो पर अपने होंठ रख कर एक गहरा चुंबन ले लेता है, राज रश्मि के चेहरे से आती मादक सुगंध से पागल हो जाता है और रश्मि अपने भैया द्वारा अपने रसीले होठ चूमने से एक दम मस्त हो जाती है और उसकी चूत उसकी पेंटी को पूरी गीली कर देती है,
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08-16-2019, 12:11 PM,
#10
RE: Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम
राज को रश्मि के होंठो का स्पर्श बहुत अच्छा लगता है और वह एक बार और झुक कर रश्मि के होंठो पर फिर से गहरा चुंबन दे देता है और उसका लंड झटके मारने लगता है, राज फिर से रश्मि के दोनो कसे हुए दूध पर अपने हाथ फेरता हुआ उन्हे बड़े प्यार से सहलाता है और रश्मि अपने भैया के सहलाने से मस्त हो जाती है और अपने भैया को ना जाने कितनी बार आइ लव यू कह चुकी होती है और शायद राज के दिल तक उसके आइ लव यू की आवाज़ चली जाती है इसलिए राज जब देखता है कि कोई बड़ा स्टेशन आ रहा है तो वह एक बार जल्दी से रश्मि के रसीले होंठो को खूब कस कर अपने होंठो से चूस्ता है और उसके मोटे-मोटे दूध को अपने हाथो से इस बार थोड़ा तेज दबा कर आइ लव यू रश्मि कह कर उसके होंठ को एक बार और चूम कर फिर सीधा बैठ जाता है और फिर ट्रेन की खिड़की से चाइ वाला, पकोडे वाला, आलुबाड़ा गरम, समोसा गरम की आवाज़ आने लगती है और राज रश्मि के सर पर हाथ फेरता हुआ रश्मि को जागता है, कुछ देर बाद रश्मि करवट लेकर जागने का नाटक करती हुई

रश्मि- भैया मुझे पानी पीना है और उठ कर बैठ जाती है

राज उसे पानी की बोटेल देता हुआ, चाइ पीना है क्या

रश्मि- हूँ

राज - खिड़की से दो कप चाइ ले लेता है और फिर दोनो भाई बहन चाइ पीने लगते है, तभी उनके कॉमपार्टमेंट में एक और फॅमिली आ जाती है और फिर वो लोग आते ही सोने की तैयारी करने लगते है, राज की एक एल बर्थ और एक एम बर्थ होती है और वह रश्मि को बीच वाली सीट पर चढ़ा कर सुला देता है और खुद नीचे वाली सीट पर सो जाता है,


अगले दिन वह दोनो जम्मू पहुचते है और वहाँ एक होटेल में एक रूम बुक कर लेते है, रूम के अंदर जाकर रश्मि सीधे बेड पर जाकर गिर जाती है और राज को देखते हुए

रश्मि- ओह भैया में तो बहुत थक गई हू पूरा बदन टूट रहा है

राज - मुस्कुराकर ठीक है तुम आराम कर लो तब तक में नहा कर फ्रेश हो जाता हूँ और फिर राज अपनी शर्ट उतारता है और बनियान भी उतार देता है, रश्मि उसकी कसी हुई बॉडी अपनी आँखे फाड़-फाड़ कर देखने लगती है, फिर राज जैसे ही अपनी पेंट उतारता है रश्मि सीधे उसके अंडरवेर के उठे हुए भाग को घूर कर देखती है और तभी राज रश्मि की ओर देखता है तो रश्मि इधर उधर अपनी नज़रे मारने लगती है राज जल्दी से पेंट उतार कर मुस्कुराता हुआ टॉवेल पहन कर अटैच बाथरूम में घुस जाता है और रश्मि अपने मन में कितना भी छुपा लो भैया अपने मोटे लंड को लेकिन एक दिन तुम्हारा मोटा लंड मेरी फूली हुई चूत को ज़रूर फाड़ेगा और फिर रश्मि मुस्कुराती हुई लेट जाती है, थोड़ी देर बाद राज नहा कर बाहर आता है और रश्मि उसके चिकने बदन को बड़े प्यार से देखती हुई लेटी रहती है और जब

राज उसको देखता है तो उसकी नज़रे रश्मि की नज़रो से मिलती है और

राज - ऐसे क्या देख रही है

रश्मि- मुस्कुरा कर कुछ नही

राज - तू नही नहाएगी, जा जाकर नहा ले सारी थकान उतर जाएगी

रश्मि- मुस्कुराती हुई अपने मन में, भैया आज तो तुम ही नहला दो ना मुझे पूरी नंगी करके, एक बार मुझे नंगी देख लोगे तो अपनी बहन को चोदने के लिए पागल हो जाओगे, और फिर मुस्कुराकर चलो अच्छा है कल रात तुमने यह तो बता दिया कि तुम भी मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे हो, फिकर मत करो तुम्हारी गुड़िया रानी तुम्हारी बाँहो में जल्दी ही पूरी नंगी हो कर आएगी,

राज - मुस्कुराकर क्या बात है आज बहुत मुस्कुरा रही है

रश्मि- मुस्कुराते हुए कहाँ मुस्कुरा रही हूँ

राज - मुस्कुराकर, तो फिर ये क्या है

रश्मि- वो तो में यहाँ आकर बहुत खुस हूँ इसलिए

राज - चल ठीक है ऐसे ही मुस्कुराती रहा कर मसूकुराते हुए तू बहुत अच्छी लगती है

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में, और जब पूरी नंगी देख लोगे ना तो कहोगे कि रश्मि तू पूरी नंगी बहुत अच्छी लगती है,

राज - रश्मि तू जाकर नहा ले में खाना ऑर्डर कर देता हूँ फिर हम दोनो 2-3 घंटे आराम से सोएगे उसके बाद शाम को कहीं घूमने चलेगे

रश्मि- उठते हुए ठीक है भैया और फिर रश्मि गाना गुनगुनाते हुए "चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी" और बाथरूम की ओर अपने भारी-भारी चूतड़ मटकाते हुए चल देती है और राज मुस्कुराता हुआ उसके मटकते चुतड़ों को देखने लगता है और रश्मि बाथरूम में घुस जाती है, राज रेडी होकर खाने का ऑर्डर कर देता है और फिर आकर बेड पर बैठ जाता है, थोड़ी देर बाद रश्मि बाथरूम से आवाज़ देती है

रश्मि- भैया

राज - क्या हुआ

रश्मि- भैया प्लीज़ मेरे बॅग से मेरे कपड़े दे दो

राज - अच्छा देता हूँ

राज रश्मि के बॅग को खोल कर उसमे से कई सारी ड्रेस बाहर निकाल कर, रश्मि कौन सी ड्रेस दूं

रश्मि- बाथरूम में मुस्कुराते हुए धीरे से अरे पहले तो मेरी ब्रा और पेंटी दे दो,

रश्मि- अरे भैया कोई भी दे दो

राज - अच्छा-अच्छा लाया, राज उसके सारे कपड़े देखने लगता है और तभी उसकी नज़र रश्मि की रेड कलर की मुलायम सी पेंटी पर पढ़ती है और वह उस पेंटी को उठा कर देखने लगता है और ना जाने उसे क्या होता है और वह रश्मि की पेंटी को अपने होंठो से चूमते हुए उसकी खुश्बू सूंघने लगता है और उसका लंड एक दम से खड़ा हो जात है, वह थोड़ी देर तक रश्मि की पेंटी को चूमता हुआ सूँघता है फिर सोचता है रश्मि तो कोई भी कपड़ा अंदर ले कर नही गई है तो क्या उसे पेंटी भी दूं, फिर कुछ सोच कर नही-नही पता नही वह क्या सोचेगी और राज उसको एक स्कर्ट और टीशर्ट ले जाकर दे देता है, रश्मि थोड़ा सा दरवाजा खोल कर अपने कपड़े ले लेती है और स्कर्ट और टीशर्ट को देख कर

रश्मि- अपने मन में मुस्कुराकर क्या भैया मेरी ब्रा और पेंटी तो आपने दी ही नही अब क्या स्कर्ट के नीचे मुझे नंगी ही रखने का इरादा है और फिर मुस्कुराती हुई पूरी नंगी खड़ी होकर अपने गदराए जिस्म को टवल से पोछती है और फिर बिना ब्रा के टीशर्ट पहन लेती है जिसमे उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह तन कर टीशर्ट से अपनी गोलाई को साफ-साफ दिखाने लगते है और फिर रश्मि अपने दूध को अपने हाथो में भर कर वाह भैया एक ही रात में तुमने तो अपनी बहन के दूध दबा-दबा कर कितने बड़े-बड़े कर दिए है आज तो मेरी टीशर्ट में नही समा रहे है लगता है टीशर्ट को फाड़ कर बाहर आ जाएगे और फिर रश्मि अपनी फूली हुई चूत पर हाथ फेरती हुई अपनी चूत से बात करती हुई चूत को सहला कर तू फिकर मत कर मेरी रानी एक दिन मेरे भैया तुझे भी खूब अपने मूह से चूम-चूम कर तुझे खूब सहलाएगे और फिर अपना मोटा लंड डाल कर तुझे एक ही बार में फाड़ कर रख देंगे, और फिर रश्मि जल्दी से अपनी छोटी सी स्कर्ट जो उसके घुटनो के थोड़ा उपर तक आती थी को पहन कर अपने गीले बालो में टॉवेल बाँध कर बाहर आ जाती है, रश्मि जैसे ही नहा कर बाहर आती है राज उसके लाजवाब हुस्न को देखता ही रह जाता है और उसका दिल करता है अभी जाकर रश्मि को अपनी गोद में उठा कर खूब प्यार करे, रश्मि राज को देख कर मुस्कुराते हुए

रश्मि- भैया यह ड्रेस अच्छी तो लग रही है ना


राज - सीधा उसके तने हुए कसे-कसे टीशर्ट में समाए दूधो को देख कर हाँ रश्मि तू इस ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही है,

रश्मि- सच्ची

राज - मुस्कुराकर मुच्चि और फिर दोनो हँसने लगते है

थोड़ी देर बाद उनका खाना आ जाता है और दोनो खाना खा कर बेड पर एक दूसरे की ओर करवट ले कर लेट जाते है रश्मि अपने मन में भैया शायद नही जानते है कि में स्कर्ट के अंदर पूरी नंगी हूँ और

राज - अपने मन में मेने रश्मि को पेंटी और ब्रा नही दी थी इसके दूध तो ऐसे ही लग रहे है जैसे टी-शर्ट के अंदर इसने कुछ नही पहना है पर शायद यह स्कर्ट के अंदर भी नंगी है, बेचारी शर्म के कारण मुझसे पेंटी माँग नही सकी और फिर इसे बाद में मेरे रहते पहनने का मोका भी नही लगा,

राज - रश्मि के गाल को अपने हाथो से खिचता हुआ आज बहुत ज़्यादा ही मुस्कुरा रही है ज़रूर कोई बात है

रश्मि- अपनी मुस्कुराहट को छुपाने की कोशिश करती हुई, नही-नही भैया कोई बात नही है

राज - उसके माथे पर हाथ फेर कर सहलाते हुए तू बहुत खुश है ना यहाँ आकर

रश्मि- हूँ

राज - उसके मोटे-मोटे दूध को देखने लगता है और रश्मि उसकी नज़रो को अपने दूध पर पड़ते देख लेती है और जैसे ही राज उसकी आँखो में देखता है रश्मि अपनी नज़रे नीचे कर लेती है, दोनो के चेहरे की हँसी गायब हो जाती है और रश्मि जब फिर से राज को नज़रे उठा कर देखती है तो राज उसके खूबसूरत चेहरे को ही देखता रहता है, और जब वह फिर से रश्मि के सामने ही उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध को देखता है तो रश्मि का चेहरा एक दम सीरीयस हो जाता है और वह फिर से अपनी नज़रे नीचे कर लेती है और अपने मन में खुश होती हुई लगता है भैया मेरे दूध को पीने के लिए बिल्कुल पागल हुए जा रहे है,

राज – रश्मि

रश्मि- अपनी नज़रे उठा कर राज को देखती है

राज - रश्मि में तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ

रश्मि- राज की बात सुन कर थोड़ा घबरा जाती है और उसके मूह की ओर देखने लगती है लेकिन राज फिर चुप हो जाता है और उसका चेहरा एक दम गंभीर हो जाता है, रश्मि अब तक उसके आगे बोलने का इंतजार करती है, जब राज कुछ नही कहता है तब

रश्मि- बोलो ना भैया क्या कहना चाहते हो

राज - कुछ नही बाद में बताउन्गा

रश्मि- क्या कुछ खास बात है

राज - हाँ बात तो खास है पर में समझ नही पा रहा हूँ कि तुझसे कैसे कहूँ

रश्मि- मुस्कुराकर भैया इतना क्या सोच रहे हो जो कहना है कह दो ना

राज - रश्मि के चेहरे को देख कर मुस्कुराता हुआ, नही में नही कह पाउन्गा

रश्मि- कुछ सोच कर, भैया ऐसी क्या बात है जो आप नही कह पा रहे है

राज - रश्मि में पहले सोचूँगा उसके बाद मुझे ठीक लगेगा तो में कहूँगा

रश्मि- भैया कुछ टेन्षन वाली बात तो नही है ना

राज - मुस्कुराकर पता नही टेन्षन भी हो सकती है या फिर सारे जहाँ की खुशी भी मिल सकती है

रश्मि- भैया मुझे तो आप की बात समझ ही नही आ रही है

राज - इसीलिए में कह रहा हूँ ना कि पहले में अच्छे से सोचूँगा फिर अगर मुझे ठीक लगा तो में कहूँगा चल अब थोड़ा सा सो कर आराम कर ले फिर शाम को हम घूमने चलेगे

रश्मि- ओके भैया और फिर अपनी आँखे बंद कर के अपने मन में सोचने लगती है, कहीं भैया मुझे डाइरेक्ट्ली यह तो नही कहेगे कि रश्मि में तुझे चोदना चाहता हूँ, अगर उन्होने मुझसे ऐसा कहा तो में क्या जवाब दूँगी, बाप रे भैया तो बहुत ही ख़तरनाक है ना जाने उनके मन में क्या चल रहा है, पर एक बात तो तय है कि वो मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे है, पर में उनकी बहन हूँ इसलिए अपने दिल की बात मुझसे कह नही पा रहे है, शायद वह सोचते होंगे कि अगर उन्होने मुझसे ऐसी बात कही तो में बहुत गुस्सा हो जाउन्गी, कही ऐसा तो नही कि भैया मुझसे सचमुच प्यार करने लगे हो और मुझसे आइ लव यू कहने का सोच रहे है और कह नही पा रहे है, हाँ-हाँ यही बात है, पर में कैसे पता करूँ कि यही बात है, एक काम करती हूँ अंधेरे में तीर चलाती हूँ देखती हूँ कि निशाना लगता है कि नही और पलट कर

रश्मि- भैया में समझ गई कि आप क्या बात मुझे बताना चाह रहे थे

राज - आश्चर्य से रश्मि का मूह देखता हुआ, क्या समझ गई

रश्मि- मुस्कुराकर पर मुझे शरम आती है,

राज - के होश उड़ गये रश्मि की बात सुन कर क्योकि वह ग़लत ही अंदाज़ा लगा रहा था फिर भी पॅशन रखते हुए, क्या शरम आ रही है, अपने भैया से भी कोई शरमाती है क्या, चल बता क्या समझ गई तू,

रश्मि- मुस्कुराकर आप डांटोगे

राज - थोड़ा खुस होता हुआ, अरे पगली में कभी तुझे डाँट सकता हूँ क्या, तू तो मुझे इतनी प्यारी लगती है कि में तेरी हर ग़लती माफ़ कर सकता हूँ चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यो ना हो, चल अब बता भी दे,

रश्मि- नही में नही बताउन्गी और दूसरी और मूह करके राज की ओर अपनी पीठ कर लेती है,

राज - उसको पकड़ कर अपनी और खीच कर अपनी ओर घुमा कर, मुस्कुराते हुए बताती है कि नही

रश्मि- राज से छूटने की कोशिश करती है और राज उसको पूरी तरह खीच कर अपने सीने से लगा कर चल जल्दी बता दे नही तो में नही छोड़ूँगा

रश्मि- मुस्कुराते हुए अच्छा बाबा बताती हूँ पहले मुझे छोड़ो तो सही

राज - उसको छोड़ कर हाँ अब बता

रश्मि- वो में यह समझ गई कि और रश्मि एक दम से बेड से उठ कर दूर खड़ी होकर अपनी जीभ दिखा कर उसे चिड़ाती हुई जाओ नही बताती क्या कर लोगे
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