Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
11-22-2019, 11:58 AM,
#1
Lightbulb  Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
अँधा प्यार या अंधी वासना ek Family ki Kahani


कहते हैं कि प्यार अँधा होता है. अगर किसी ने शादी से पहले सेक्स कर लिया तो वासना कहते हैं ऐसे प्यार को. इस कहानी की बात है तो पूछना यह है क्या एक अधेड़ आदमी को क्या एक जवान लड़की से प्यार हो सकता है? क्या एक जवान लड़की अपने बाप से भी बड़ी उमर वाले आदमी को सच में दिल से प्यार कर सकती है? आदमी की तरफ से उस प्यार को सिर्फ़ वासना का नाम देते हैं. तो क्या उसके दिल की गहराई में कोई झाँकता है जो मालूम हो कि वासना है या सच में प्यार है?................ अब जवान लड़के लड़की भी अगर शादी से पहले सेक्स करे तो भी ग़लत कहते हैं दुनिया वाले.... मगर मेरा कहना है कि हर किसम का प्यार होता है.

मैं कहूँगा कि पुराने ज़माने में लोग पहले शादी करते थे बिना लड़का लड़की को देखे, फिर सेक्स करने के बाद एक दूसरे से जुड़ जाते थे.... अब अगर पूछा जाए कि बिना किसी से प्रेम किए केसे सेक्स करते थे वह लोग? तो क्या वो वासना नहीं था? वो भी तो सेक्स करते थे बिना प्यार किए,तो इस लिए मेरा मानना है कि, आज के इस मॉडर्न ज़माने में, इस तेज़ रफ़्तार से बदलती दुनियाँ में प्यार भी बहोत तेज़ी के साथ बदला है और कयि प्रकार के रूप धारण किया है इस प्यार ने भी. इंसान भी वेसे ही बदले हैं उसी रफ़्तार के साथ, तो आज सेक्स हो या प्यार दोनों बराबर तोला जाता है. सेक्स के नाम पर प्यार तो कभी, प्यार के नाम पर सेक्स. अपनी रूह से, गहरी आत्मा से किसी को प्यार करने वाला तो करोरों में एक मिलेगा, तो उसकी बात क्यूँ करें वो अजूबा है. चलो आम लोगों की बात करें जो आज कल हमारे दायें बायें मौजूद हैं.....

इस कहानी में एसा ही कुछ प्यार से शुरू होगा और क्टा रूप धारण करेगा कहानी के अंत तक समझ में आएगा कि इंसान शुरू क्या करता है और उसका अंजाम क्या होता है.............
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11-22-2019, 11:58 AM,
#2
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
अपडेट 1- चावला साहब मीट्स संजना

चावला साहब का बहुत बड़ा बिज़्नेस था. शुरू से ज़मींदार थे उसके परिवार वाले और आज चावला साहब बड़े शहर्र में बड़े पैमाने पर बिज़्नेस करता है. पैदा गाओं में हुआ था एक ज़मींदार फॅमिली में और बड़े हवेली का मालिक था उसके दादा. इज़्ज़त वाले लोग थे जिनके नीचे हज़ारों
लोग काम करते थे. मगर आज के ज़माने में चावला साहिब गाओं की हवेली और ज़मीन बेच कर शहर्र में शिफ्ट हो गया पिछले 18 सालों से.
क्यूंकी चावला साहिब अपने खानदान का आखरी चिराग था, सो सारी ज़मीन और हवेली सब उसका अपना हो गया था.

बड़े शहर के शोर शराबे से कोई 2 किलोमीटर्स की दूरी पर एक आलीशान बंगलो टाइप घर है अभी उसका. चावला साहिब का पहला नाम सूरजप्रकाश हुआ करता था गाओं में. अब भी वोही नाम है मगर पिछले 18 सालों में सब उनको सिर्फ़ चावला साहब ही कहकर बुलाते हैं. बड़े बिज़्नेस पार्ट्नर्स, बड़े सोसाइटी के लोग, क्लब वाले, गोल्फ क्लब के साथी एट्सेटरा, सब उनको चावला साहिब से जानते हैं. इनके दो बेटे
हैं.

पहले बेटे का नाम विवान चावला, जो अभी करीब 40 यियर्ज़ का है और एक उस से छोटा बेटा जो तकरीबन 26 साल का है और जिस का नाम आराव है.

एक बेटी है, पूजा जिस की शादी हो चुकी और इसी शहर में रहती है मगर अक्सर अपने पिता के घर आया जाया करती है.

विवान शादी शुदा है; उसकी पत्नी , सानवी अभी कोई 27 या 28 साल की है और एक बेटी की माँ है. बेटी अभी छोटी है. **** साल की है. उसका नाम दीप्ति है. सब दीप बुलाते हैं उसको, नटखट है और सबकी दुलारी. घर में उसकी आवाज़ दिन रात गूँजती है. बहुत शोर मचाती रहती है. हल्ला गुल्ला सब दीप्ति का काम है.

चावला साहिब का छोटा बेटा आराव, भी अपने पिता के साथ ही बिज़्नेस संभालता है बराबर विवान की तरह. आराव बहुत शांत किस्म का लड़का है और बहुत फार्मबरदार है. अपने बाप और बड़े भाई की सभी बातें सुनता है. शर्मिला भी है वो, ज़ियादा बात भी नहीं करता था मगर
हां बिज़्नेस बहुत अच्छी तरह से करता है. काम में बहुत ध्यान देता है और कंपनी का बहुत अहम मेंबर है. उसकी अभी तक शादी नहीं हुई और चावला साहिब एक लड़की की तलाश में है उसके लिए. घर में एक बड़ी बहू तो है ही, अब एक और लाना था.

चावला साहिब पत्नी के देहांत के बाद ही अपनी ज़मीन वग़ैरह बेच कर सिटी में शिफ्ट हुआ और नया बिज़्नेस शुरू किया, यानी 18 साल पहले. दोनों बेटों और एक बेटी की देख भाल नौकरों ने ज़ियादा की क्यूंकी चावला साहिब बिज़्नेस में मसरूफ़ रहते थे. पैसे वाला था तो नौकरों की लाइन लगा दिया था अपने तीनों बच्चों की देख भाल के लिए. नौकरों की कमी होती गयी जब बच्चे बड़े होने लगे और ज़ियादा कम
हुए जब पहली दुल्हन सानवी घर में आई. हां एक ड्राइवर और एक बगीचे के देख भाल करने के लिए माली अभी तक है घर में. किचन खुद सानवी संभालती है. जो पहले से रसोई में काम करता था उसको कंपनी के किचन में भेजा गया.

आराव और सानवी की बहुत बनती है. बहुत प्यार है देवर भाबी के बीच. और छोटी दीप्ति तो पागल थी अपने चाचा के लिए. विवान का बेडरूम उपर वाले माले पर है और आराव का भी. चावला साहिब का कमरा नीचे है. किचन भी नीचे है. बहुत बड़ा लाउंज है नीचे ही जहाँ
सबको रिसीव किया जाता है. बिज़्नेस पार्ट्नर्स कभी आते थे तो सब उसी लाउंज में बैठते थे और किचन एक तरफ था तो सर्व करने के लिए
आसानी होती थी. वैसे एक छोटा सा किचन उपर भी है. लाउंज लगता था किसी बड़े 5 स्टार होटेल का लिविंग एरिया है.

असल कहानी तब शुरू होती है जब चावला साहिब आराव के लिए लड़की पसंद करता है. अगर आराव को ही लड़की चुनने की और पसंद करने की बात होती तो वो बूढ़ा हो जाता मगर कभी नहीं सेलेक्ट करता. वो इन सब चीज़ों से दूर भागता है. इतना शर्मिला है की अपनी भाबी से पहली बार बात किया 4 महीने शादी के बाद. चावला साहिब और विवान ने सानवी को समझा दिया था कि आराव को वक़्त दिया जाए
उस से दोस्ती करने की क्यूंके वो बहुत शर्मिला है, लड़कियों के मामले में वो ज़ीरो है. एक भी लड़की उसकी दोस्त नहीं थी. कॉलेज तो बाय्स कॉलेज में पढ़ा था तो सिर्फ़ लड़के दोस्त थे उसके . वो. इतना शर्मिला और चुप चाप सा था कि बाप ने सोचा कि अगर वो उसकी शादी नहीं करेगा तो आराव ऐसे ही रहेगा ज़िंदगी भर, बॅचलर ही मरेगा.

चावला साहिब ने कयि लड़कियों को देखा दोस्तों की तरफ से मगर एक भी पसंद नहीं आई थी अब तक आराव के लिए. फिर एक दिन चावला साहिब, को अपने गाओं की तरफ जाना था किसी काम के लिए, तो वहाँ उसका पुराना दोस्त आनंद भाई मिला. आनंद ग़रीब आदमी था और कुछ साल पहले चावला खानदान की हवेली का नौकर हुआ करता था. आनंद की एक बेटी थी उन दिनों जो 18 साल पहले पैदा हुई
थी. और जिसको चावला साहिब ने गोद में लिया था और एक सोने की नेकलेस पहनाई थी उसको. आनंद जी गाओं के दूसरे हिस्से में रहते थे जहाँ चौला साहिब का एक छोटा सा फार्म हाउस था और जो उससने आनंद की वफ़ादारी के लिए उसको गिफ्ट कर दिया था. गाओं का वो हिस्सा पहाड़ी इलाक़ा था, और आनंद का तो एक छोटा सा झोंपड़ी था इससे पहले.

जब चावला साहिब गाओं के उस हिस्से में गये तो आनंद से मिले और आनंद ने उनको घर आने की दावत दी. एक 4बाई4 में चावला साहिब गये थे उधर. वैसे तो ड्राइवर है उनका मगर कभी कभी खुद भी ड्राइव करते हैं और लोंग ड्राइव बहुत पसंद था चावला साहिब और दोनों बेटों को भी.

चावला साहिब जब खुद अपने दिए हुए घर के अंदर दाखिल हुआ तो उसको एक अजीब सी फीलिंग हुई. बहरेहाल, चावला साहिब को बैठाया गया और कुछ ही देर बाद एक बहुत खूब सूरत लड़की चाइ सर्व करने को आई. लड़की बेहद खूबसूरत थी, बहुत हॉट दिख रही थी, सेक्सी
थी, और बिलकूल गोरे रंग की मेम लग रही थी. चावला साहिब को बहुत हैरानी हुई इतनी खूबसूरत लड़की को आनंद के यहाँ देख कर.
बेशक सवाल किया के लड़की कौन है? आनंद भाई के जवाब देने से पहले लड़की ने खुद थोड़ा शरमाते हुए कहा,

“ लो! आप तो मुझे पहचानते ही नहीं, मैं तो आप को पहचान गयी क्यूँ कि आप के साथ मेरे केयी फोटोस हैं जब मैं बेबी थी….. आप तो आज भी बिलकूल वैसे ही दिख रहे हो जैसे 17 साल पहले दिखते थे. आप की उमर नहीं बढ़ती क्या?”

उसकी आवाज़ इतनी सुरीली थी कि चावला जी को उस लड़की को सुनते रहने का मन किया और कुछ हैरान नज़रों से आनंद के तरफ देखते हुए पूछने ही वाला था कि आनंद ने कहा,

“मेरी बिटिया है साहिब, वोही जो पैदा हुई थी जब आप हवेली बेचने वाले थे, फिर जब ये एक साल की हुई थी तो आप ने इसको नेकलेस दिया था और तस्वीरें खिंचवाई थी जो इस ने बहुत संभाल के रखे हैं. आप के बारे में हमेशा पूछती रहती है. इस ज़माने की लड़की है साहिब,
मोबाइल से दिन भर सेल्फिे लेती रहती है और वो कान में स्पीकर ठूँसे रहती है, पता नहीं क्या सुनती रहती है…..”

चावला साहिब की नज़रें उस लड़की के चेहरे से हट ही नहीं रही थी. उसने लड़की से पूछा, “मोबाइल यूज़ करती हो मतलब पढ़ी लिखी हो तुम? नेटवर्क आता है क्या यहाँ?”

और लड़की की जगह उसके पिता ने जवाब दिया, “कॉलेज भेजा था साहिब, छोटा सा शहर है ना इस गाओं के उस पार. वहीं जाती थी….. मगर कंप्लीट नहीं किया, इंग्लीश तो फटाफट बोलती है मगर गणित में बहुत वीक है, उसका मन नहीं लगता था कॉलेज में इसी साल की शुरू में जाना बंद किया. मैं ने भी कह दिया कि क्या उखाड़ लेगी पर लिख कर, घर के काम काज सीख ले शादी के बाद यही तो काम आएगी, घर के देख भाल करना….”

चावला साहिब के चेहरे में एक चमक सी दिखी, और फिर उस लड़की को उपर से नीचे देखता रहा मानों कि एक अप्सरा दिख गयी हो उसे. “इस मधुर आवाज़ की मालकिन का नाम क्या है आनंद?” चावला साहिब ने पूछा. तो लड़की ने खुद एक दिलकश मुस्कुराहट में जवाब दिया,
“संजना अट युवर सर्विस सर.”

चावला साहिब खड़े हो गये और लड़की को कहा, “अरे तुझे तो मेरे गले लगना चाहिए, आजा आजा, सीने से लगा लूँ तुझे!”

लड़की थोडा सा शरमाई पर चली गयी चावला साहिब की बाहों में यह कहते हुए, “मैं ने तो सोचा था कि मुझे देखते ही आप मुझको गले लगाओगे, मैं तो वेट कर रही थी, मगर आप ने तो मुझको पहचाना ही नहीं!”

ज़ोर से संजना को बाहों में भर के चावला साहिब उसकी पीठ थपथपा रहे थे, फिर उसके दोनों गालों पर चुंबन दिए, और लड़की ने भी चावला साहिब को गालों पर किस किया और कूदते हुए वापस किचन के तरफ चली गयी.

चावला साहिब को एक सुकून सा महसूस हुआ और एक अजीब सी फीलिंग हुई. उसको लगा कि कोई बरसों से बिछड़ा हुआ मिला जिसको
गले लगा के एक अंजान सी राहत मिली दिल के अंदर. चावला साहिब समझ नहीं पा रहा था कि यह फीलिंग कैसी थी.

संजना के जाने के बाद चावला साहब ने आनंद को बाहर चलने को कहा क्यूंकी उसको एक ख़ास बात करनी थी उस से. मगर ठीक तभी संजना वापस आई, और चावला साहिब जो खड़े हो गये थे बाहर निकलने के लिए, मूधकर मुस्कुराते हुए उसको देखने लगा. पर इशारे से, नज़रों के माध्यम से पता नहीं क्यूँ आनंद संजना को वापस जाने का इशारा कर रहा था. मगर संजना नहीं गयी और वहीं खड़ी रही चावला साहिब को मुस्कुराते हुए देखते. तो चावला साहिब ने कहा,
“मेरी बहू बनोंगी संजना?”

टू बी कंटिन्यूड......................
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11-22-2019, 11:58 AM,
#3
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
अपडेट 2 संजना वाटस्सॅप चावला साहब

यह सुनकर संजना का मुँह खुला का खुला रह गया और अपने पापा की तरफ देखने लगी. आनंद ने तन्हाई को तोड़ते हुए कहा, “पिछले एक साल से कहते कहते थक गया हूँ मगर यह शादी के लिए मानती ही नहीं!” आनंद ने गुस्स्से में संजना को तीर्छि नज़रों से देखा और हाथ से
अंदर जाने का इशारा किया, और इस बार संजना चुप चाप चली गयी.

तो चावला साहिब ने आनंद से कहा, “मुझे लगा कि तुम दोनों खुशी के मारे पागल हो जाओगे यह सुनकर कि मैं उसका हाथ अपने छोटे बेटे के लिए माँग रहा हूँ, क्यूँ के कौन ग़रीब एक करॉरपति के घर अपने बेटी को भेजना नहीं चाहेगा.”

आनंद ने उदास चेहरा बनाते हुए कहा, “यह बात नहीं साहिब, कौन नहीं खुश होगा आप के जैसे लोग के यहाँ अपनी बेटी देकर? मगर संजना बिलकूल ही शादी नहीं करना चाहती अभी. इस बात को लेकर कयि बार हमारी बहस हो चुका है. लड़ती है मुझसे, आप तो आज कल
के बच्चो को जानते ही हो साहिब, हमारा ज़माना नहीं रहा, यह जो चाहते हैं वोही करते हैं!”

चावला साहिब ने कहा, “साहिब इसकी ज़िंदगी में एक लड़का था. वो होता है ना बाय्फ्रेंड. जब यह कॉलेज में थी तो कुछ चक्कर था इसी लिए
तो मैं ने कॉलेज बंद करवाया इसका.”

चावला साहिब ने कहा, “यह कौन सी बड़ी बात है? इससे क्या फरक पड़ता है भाई? तुम बुलाओ उसको मैं बात करता हूँ.”

आनंद ने कहा, “नहीं साहिब जाने दो ना. छोड़ो इस बात को!”

तो चावला साहिब कुछ नाराज़ सा लगा और उठकर जाने लगा.

बाहर अपनी गाड़ी के पास खड़े चावला साहिब ने आनंद से कहा, “एक बार जाने से पहले बात तो करा दे अपनी बेटी से. मुझे आता है ऐसे मामले में बात निपटना. मगर आनंद खामोश खड़ा रहा. संजना सब सुन रही थी अंदर से तो बाहर खुद आ गई और आनंद उसको गुस्से भरी
नज़रों से देखने लगा. फिर चावला साहिब ने संजना से कहा, “अपना मोबाइल नंबर दे मुझे वक़्त आने पर मैं तुमसे बात करूँगा. तो संजना ने
नंबर दे दिया चावला साहिब को. और तुरंत मिस्कल्ल करने अपना नंबर दे दिया संजना को.

जब चावला साहिब चले गये तो संजना ने अपने बाप से कहा, “ झूट बोलने में तो माहिर हो आप. क्यूँ झूट बोला कि मेरा बाय्फ्रेंड था? झूठे पापा!”

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चावला साहिब कोई 5 किलोमीटर्स तक ड्राइव करते हुए पहुँचे थे कि उसकी मोबाइल बजी. उसने देखा कि संजना ने मेसेज भेजा है. “हाई” तो उसने रिप्लाइ किया “हाई” और ड्राइव जारी रखा. फिरसे मेसेज आया, “कहाँ तक पहुँचे हो आप?” तो चावला साहिब ने कार पार्क करके
सोचा छोटी सी चॅट करले इस लड़की से.

चावला साहिब: “अभी अभी तो निकला हूँ बस 5 या 6 किमी ड्राइव किया हूँ. क्यूँ क्या हुआ?”

संजना: “कुछ नहीं ऐसे ही आप ने नंबर दिया तो सोचा मेसेज कर लूँ थोड़ा सा हिहीही”

चावला साहिब को लगा लड़की बचकानी हरकतें कर रही है तो जवाब लिखा;

“देखो ड्राइव करते वक़्त तो मैं नहीं चॅट कर सकता घर जाने के बाद हम चॅट करेंगे ओके? आइ आम ड्राइविंग नाउ सो वी’ल्ल टॉक लेटर.
बाइ. टेक.केयर.”

और इतना कहकर चावला साहिब ड्राइव करने लगे जब संजना ने जवाब दे दिया, “ओके”

घर पहुँचने के बाद चावला साहिब की दिमाग़ में संजना बसी हुई थी. उसकी सुरीली आवाज़, उसकी लड़कपन, उसकी अदाए, उसका भोलापन, शुशीलता सब चावला साहिब को हैरान कर रहे थे. बहुत बरसों बाद आज चावला साहिब को ऐसा महसूस हो रहा था. क्या संजना में उसको अपनी बेटी पूजा दिखाई दे रही थी? क्या उस में उसको अपनी पत्नी की कुछ झलक दिख रही थी? या अपनी बड़ी बहू सानवी में कुछ
ऐसी अदाए या बात थी जो चावला साहिब को संजना में दिखी? क्यूँ वो उस भोली भाली लड़की के बारे में इतना सोच रहा था? चावला साहिब खुद को परेशान फील कर रहा था जब कार को गॅरेज में पार्क करके गॅरेज के दरवाज़े से जो सीधे किचन में खुलता है अंदर दाखिल हुआ तो
सामने सानवी को पाया जो मुस्कुराते हुए अपने ससुर का इस्तेक्बाल कर रही थी एक कप गरम चाइ के साथ.

चावला साहिब ने कहा, “अरे थॅंक्स बट नो, मुझे कुछ बहुत ठंडा पीने को मन कर रहा है, फ्रिड्ज में से कुछ खूब ठंडा मिलेगा?

सानवी, अपने नाक को टेढ़ा करते हुए एक मुस्कान में बोली, “क्या हो गया है आज सबको? सब चिल्ड ही माँग रहे हैं पीने को, आप की छोटी लाडली दीप्ति ने अभी अभी चिल्ड जूस माँगा. अब आप को भी चिल्ड पीना है जबके आप की फॅवुरेट तो गरम चाइ है; ओके ठीक है चिल्ड ही लाती हूँ आप बैठिए.”

चावला साहिब वहीं किचन में ही एक चेयर पर बैठ गये डाइनिंग टेबल के पास. अपना सर खुजाते हुए दीप्ति को आवाज़ दी साहिब ने, “किधर हो दीप्ति बेटा? छुपी हो क्या कहीं?”

फ्रिड्ज के पास से सानवी ने कहा, “वो कहाँ से दिखेगी आप को यहाँ इस वक़्त? टीवी के सामने बैठी है रिमोट हाथ में लिए और चॅनेल्स बदल बदल कर आनिमेशन्स देख रही है जूस पीते पीते”

और तब तक सानवी जूस लेकर पास आई और अपने ससुर को जूस देते और उसके चेहरे में देखते हुए पूछा, “कोई प्राब्लम है क्या पिता
जी? आप परेशान दिख रहे हो. कोई टेन्षन की बात हुई क्या ऑफीस में? आप ऑफीस ही गये थे ना?”

“नहीं नहीं मैं ऑफीस नहीं गया था, मैं अपने पुराने गाओं से वापस आ रहा हूँ अभी, 300 किमी ड्राइव किया ना इसी लिए शायद थक गया हूँ” ससुर ने जवाब दिया.

जानवी ससुर के पास बैठी और कहा, “तभी तो मैं सोचूँ जो आदमी पिछले 5 साल से अपने ऑफीस के काम सिर्फ़ ईमेल और वीडियो कॉन्फरेन्सिंग से करता है घर से ही तो आज ऑफीस क्यूँ गये हैं? तो गाओं का क्या हाल है पिता जी? सब खुशल मंगल है उधर? कुछ अपने
मिले वहाँ क्या?”

जिस वक़्त चावला साहिब ने सानवी के मुँह से (कुछ अपने) लव्ज़ सुने; तो उसको फिर उसी संजना की याद आई और दिल में एक टीस सा हुआ. तो वो सानवी के चेहरे में देखते हुए ढूँडने लगा कि क्या कोई ऐसी बात है उसमें जो संजना में छलक रही थी. और जब सानवी ने देखा के उसका ससुर उसके चेहरे में घूर रहे हैं तो पूछा, “क्या बात है पिता जी? आप सच में ठीक नहीं लग रहे आप को बुखार तो नहीं? देखूं?”
यह कहकर सानवी ने अपनी हथेली को अपने ससुर के गालों पर और गले पर लगाया उसकी टेंपरेचर चेक करने को. फिर कहा, नहीं फीवर
तो नहीं है मगर आप इतने परेशान क्यूँ हो? हुआ क्या? कोई मिला उधर क्या आप को? कुछ बात हुई होगी?”

चावला साहिब ने बात को टालते हुए कहा, “अरे नहीं रे, ऐसी कोई भी बात नहीं, मैं थक गया बहुत दिनों के बात इतना लंबा ड्राइव किया ना? हां उधर गाओं में एक पुराना दोस्त मिला, ग़रीब है बेचारा, फिर भी बेटी को पाल पॉस कर बड़ा कर दिया और लड़की शहर वाली लड़कियों
जैसी दिख रही है बिलकूल भी गाओं की छोरी नहीं दिखती मगर भोलापन वोही गाओं की है.”

सानवी ने फिर कहा, “आप भी ना पिता जी, इतने सारे ड्राइवर्स हैं कंपनी के, घर में भी ड्राइवर है तो आप ने क्यूँ ड्राइव किया इतने दूर तक? किसी भी एक ड्राइवर को कह देते वो ले जाता आप को…… और हां अच्छी बात है अगर आप के दोस्त ने अपनी बेटी की अच्छी देख भाल किया.”

तब तक दीप्ति उपर से नीचे स्टेर्स से उतरते हुए ज़ोरों से “दादा जी, दादा जी! चिल्लाते हुए अपने दादा की गोद में आ टपके” चावला साहिब ने उसको गले लगाते हुए गोद में लेकर “अरे मेरी गुड़िया, दादा की पूडिया, अभी से ही है यह तो बुढ़िया!” गुनगुनाने लगा. सानवी देखकर
हँसती जा रही थी.

और चावला साहिब दीप्ति को लेकर अपने कमरे में चले गये. सानवी सर हिलाते हुए बड़बड़ाई, “बच्चे के साथ पिता जी भी बिलकूल बच्चा बन
जाते है, बहुत प्यार है इन दोनों में”

अपने कमरे में चावला साहिब ने दीप्ति को बेड पर रखा क्यूंकी उसके मोबाइल में मेसेज की टोन बजी, और देखा तो संजना ने पूछा था, “आप अभी तक घर नहीं रीच हुए हो?”

चावला साहिब ने दीप्ति को तुरंत वापस अपनी माँ के पास वापस किया यह कहते हुए कि एक कान्फरेन्स चल रही है कंपनी वालों के साथ तो वो दीप्ति को उससे डिस्टर्ब मत करने दें. और जब चावला साहिब कान्फरेन्स करते थे तो अपने कमरे का दरवाज़ा हमेशा लॉक किया करते थे. तो वो वापस अपने कमरे में गये और बेड पर लेट कर वाट्सॅप पर संजना से चॅट करना शुरू किया.

चावला साहिब: “हां जी मैं घर आगया हूँ अब, अब हम बात कर सकते हैं. तो सूनाओ क्या हाल है?”

संजना: “हाल? अरे आप तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे कभी मिले ही नहीं, अभी कुछ देर पहले तो मिले थे हम. आप सेफ पहुँचे या नहीं यही पूछ रही थी”

चावला साहिब: “यू आर वेरी ब्यूटिफुल यू नो दट?”

संजना ने ब्लश वाली स्माइली के साथ कहा, “थॅंक यू बट मुझे नहीं लगता कि मैं सच मे ब्यूटिफुल हूँ, आप ऐसे ही कह रहे हो”

चावला साहिब: “अरे मेरी नज़रों से देखोगी तब ना पता चलेगा तुम्हें. अच्छा बताओ क्यूँ तुम्हारे पापा ने कहा कि तुम शादी नहीं करना चाहती?
क्या यह सच है?”

संजना: “नो यह झूठ है!”

चावला साहब: “तो फिर तुम्हारे पापा ने इनकार क्यूँ किया मेरी समझ में नहीं आई यह बात? वो बहाना बना रहा है, है ना?”

संजना रिप्लाइ नहीं कर रही थी… तो कुछ देर बाद चावला साहिब ने और मेसेज किया,

“हेलो यू देयर? जवाब क्यूँ नहीं दे रही हो?”

“हां यहीं हूँ. आप से यह सब बातें मिलकर करूँगी, मोबाइल पर बात समझाना मुश्किल लग रही है.

“क्यूँ? क्या तुम्हारा कोई बाय्फ्रेंड था सच में? अगर हाँ तो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता ये आज कल आम बात है. और क्या अभी तक तुम
उस बाय्फ्रेंड के साथ हो? क्या तुम उस से प्यार करती हो और तुम्हारे पापा नहीं चाहते? बताओ तो बात क्या है?

संजना ने फिर कहा, “ये बातें मिलने पर करेंगे. अभी कुछ और बात करें क्या?

चावला साहिब ने कहा, “ तो अब क्या बात करनी है?”

संजना, “कुछ भी. आप अपने बारे में बताओ, मैं अपने बारे में बताउन्गी हिहिहीही”

चावला साहिब ने कहा, “बहुत बच्पना है तुम में संजना!”

संजना: “हां मुझे पता है. पापा भी यही कहते है. मैं हूँ ही ऐसी. मुझे बच्पना करना और बच्चों जैसे बिहेव करने में बहुत मज़ा आता है हिहिहिहीही”

चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए लिखा, “ऐसे ही रहना हमेशा, तुमको बहुत ही सूट करती है तुम्हारी यह अदाए.”

संजना: “ह्म सूट करती है ना? तो ऐसे ही रहूंगी हमेशा मैं देख लेना जी”

“तुम्हारी आवाज़ सुनने को मन कर रहा है. बहुत प्यारा और मीठा बोलती हो, बिल्कुल सुरीली आवाज़ है, चलो बात करते हैं, सिर्फ़ कॉल करें
या वीडियो कॉल करें एक दूसरे को देख कर भी बात कर सकते हैं, क्या कहती हो?”

संजना ने टाइप किया, “स्शह नो, पापा ईज़ हियर वो हमें सुन लेगे और पूछेगे किससे बातें कर रही हूँ….. जब वो घर पर नहीं होंगे तब वीडियो कॉल करेंगे ओके?”

यह पढ़कर चावला साहिब को ऐसा फील हुआ कि वो एक नवजवान है और एक लड़की से चॅट कर रहा है जैसे एक बाय्फ्रेंड और गर्लफ्रेंड
अक्सर किया करते हैं…. चावला साहिब के जिस्म में एक अजीब सी रवानी दौड़ी और उसको कुछ अलग फील हुआ.

तो चावला साहिब ने पूछा, “इस वक़्त कहाँ हो घर के अंदर या बाहर?”

संजना: “अपने कमरे में हूँ”

चावला साहिब: “और उसी ड्रेस में हो जिस में थी जब मैं आया था?”

संजना: “हिहिहीही, ह्म अब थोड़ी देर में चेंज करूँगी”

चावला साहिब: “क्या तुम सिर्फ़ ड्रेस ही पहनती हो घर में? मेरा मतलब गाओं की लड़कियाँ तो ट्रडीशनल गाओं वाले ड्रेस पेहेन्ती हैं मगर तुम
तो एक शहर वाली लड़की की तरह ड्रेस हो, सिर्फ़ एक ड्रेस…….”

संजना: “मैं भी गाओं की ट्रडीशनल ड्रेस भी पेहेन्ति हूँ, कयि चोली और स्कर्ट भी हैं, पर जबसे कॉलेज जाना शुरू किया ना, तब से आदत हो गयी ड्रेस या टू-पीस पहनने की, पापा से ज़िद करके खरीदवाती हूँ, वो भी खुद खरीद के लाते है जब शहर जाते है तो. मगर आज जब मैं ने
आप को देखा तब जा कर ड्रेस पहनी थी जिस वक़्त आप अपनी कार से निकले, पापा से बात कर रहे थे तब ड्रेस चेंज किया वरना वोही चोली में थी मैं.”

यह सब पढ़कर चावला साहिब के जिस्म में एक गर्मी की रवानी दौड़ी…. उसको लगा कि फ्लर्ट कर रहे हैं दोनों…. अपने आप को संभालते और टॉपिक को बदलते हुए चावला साहिब ने लिखा, “तो बताओ मेरी बहू बनोंगी तुम?”

टू बी कंटिन्यूड..............
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11-22-2019, 11:59 AM,
#4
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Sanjana uss taraf muskura rahi thi aur apne honton ko danton mein dabate hue type kiya, “pata nahin hihihihi”

Chawla sahib: “mere ghar mein tum agayi to raaj karogi. Main bahot hi amir aadmi hoon, mera ghar bahot bada hai aur bahot saare car, luxuries sab kuch hein hamare paas.”

Sanjana: ”hmm maloom hai mujhe, aap kitne amir ho sab jaanti hoon. Bachpan se aap ke bare mein jaanti hoon. Aap ne yeh farm house nahin diya hota papa ko to hum jhompre mein hi rehte ab tak. Aap ki bahot ehsaan hein hum par. Mama ne mujhko sab bataya tha.”

Chawla sahib: “are haan tumhari maa nahin dikhi main bhi ab soch raha hoon, who kahin kaam karti hai kia?”

Sanjana udaas hote hue type kiya, “mama nahin rahe sahib, wo to 6 saal pehle, jab main 12 saal kit hi chal basse!”

Chawla sahib: “oh very sorry to hear that, main ne tumhare papa se poocha bhi nahin, unnko keh dena ke main ne tum se poocha aur mere sympathy dena ussko okay?”

Sanjana: “ are nahin ji, main nahin bataungi papa ko kea ap se chat kar rahi hoon, jab aap unn se milo tab khud kehdena, hamare chat ke baare mein mat batana ussko please okay Sir ji?”

Chawla sahib:”are kyun main ne usske saamne hi to tumko number diye to ussko pata hona chahiye ke hum communicate karenge nah? Aur please tum mujhko yeh sir aur sahib bolna bandh karo please!”

Sanjana: “to kia bullaun aap ko?”

Chawla sahib, “mujhe kia pata? (smiley)

Sanjana: “ papa yeh chat vaghaira kuch nahin samajhte, wo issko kuch ghalat chiz samajhte hein, gaon mein sms, chat, watsap, fb vaghaira ki bahot negative vibes hein. Yahan ke log samajhte hein ke bura kaam karte hein log inn sab chizon ke zarye. Bahot badnaam hein chat vaghaira iss gaon mein kyunke iss gaon ke 3 ladkiyon ke affair hue chat ke through aur….. aur……. Aur…..”

Chawla sahib:”aur kia?”

Sanjana: ”aur mujhe batana nahin ata… aur kuch hua teenon ladkiyon ke saath!”

Chawla sahib: “batao nah kia hua unn ladkiyon ke saath?”

Sanjana: “ofo samajh jao nah! Teenon pregnant ho gaye jinn se chat kar rahe the unn se hi!”

Chawla sahib ne muskurate hue type kiya, “matlab weh teenon ke boyfriends the aur chat karte the apne boyfriends se phir milne lage aur pyar kiya sab ne, to kia hua? Yeh to normal baat hai! Phir teenon ne shaadi kiye nah?”

Sanjana: “nahin, sirf ek ki shaadi hui, baaki ke do ne aatmahatiya kiye! Iss liye papa kehte hein ke chat, messages, fb google vaghaira sab jaan lewa hein…who to anpadh thehra kuch nahin samjhta main ussko samjhaate samjhaat thak gayi hoon par unnka opinion weisa hi hai. Bahot ghalat maante hein yahan ke log inn sab chizon ko. Shukar hai papa ko likhna padhna nahin ata varna mujhe sabhi messages ko delete karna padta.”

Yeh sab sunkar chawla sahib ne khud se kaha, “uff yeh kinn logon se paala par gaya hai ab dhatt!” phir bhi uss ne reply ye kiya,

“Tumhare papa purane khayaalaat ke hein, who ab bhi ussi zamaane mein ji raha hai jab hum gaon mein raha karte the, main alag hoon. Main modern hoon. Jeene ka dhang badal gaya hai mera. Khair chorro inn baton ko. Batao kab tumko dekh sakta hoon video call par? Tumhein dekhne ko bahot mann kar raha hai.”

Sanjana ne kaha, “shaam ko papa peene jaega Raghu ke yahan, tab video call karenge, main bhi tab tak naha kar change kar lungi, matlab abhi se ek ghanta baad. Okay?”

Chawla sahib: “Oh to who ab tak peeta hai, ok. Batao kaun si dress pehnogi nahane ke baad?”

Sanjana: “hihihihi, dekh lena video call karenge tab”

Chawla sahib: “nahin, mera matlab hai ke main tumko traditional dress mein dekhna chahta hoon!”

Sanjana: “yeh kia bat hui, main ne socha aap kahoge kea ap mujhko ek mini skirt ya ek saxy dress mein dekhna passand karoge magar aap bhi to purane khayaalat ke ho jo old fashioned gaon ki traditional dress mein dekhna chahti ho mujhe!”

Chawla sahib bole: “are Sanjana, gaon ki traditional dres bhi kitni sexy hoti hai, pata nahin tum aaj kal kaun si gaon ki dress pehenti ho, mere zamane mein to gaon ki ladkiyan ek choti si choli, aur ek bahot chota sa lehnga jo chipki renti thi kamar se jaanghon tak weisa pehente the, kia tum lambi skirt jeisa lenhga pehenti ho?”

Achaanak Sanjana ne type kiya, “papa bula rahe hein baad mein baat karti hoon bye.”

Chawla sahib kaafi heyraan the ke iss ladki ne ek baar bhi nahin poocha kea ap ka beta keisa hai, kia kaam karta hai, usski kia umar hai, who to sirf ussi se baat kiye jaa rahi hai jeise ussi se shaadi karni hai……. Magar chawla sahib ko Sanjana behad passand thi aur wo usske khayaalon mein chaayi hui thi.


Der ghante ke baad.

Chawla sahib lounge main baithe, ek whisky ka glass liye, jiss mein Jack Daniel whisky mein 3 tukde baraf ke ghul rahe the, apne android par nigahein lagaye baithe the. Suraj dhal raha tha aur Roshni dhima hote jaa raha tha, to Saanvi ne lights on kiye lounge ke aur apne sasur ko muskurate hue kaha, “aaj aap ne bahot savere hi whisky bana liye pita ji? Aur khud banaye mujhko nahin kaha banana ko aaj kyun? Lagta hai kissi ko yaad kar rahe aaj aap, hai nah?”

Chawla sahib thoda sa chohnka achanak, Saanvi ki awaaz sunkar aur apne kanpatti se glasses utaarte hue Saanvi ke chehre mein dekhte hue poocha, “koyi office se wapas nahin ayah ai ab tak?”

Saanvi wapas kitchen ke taraf jaate hue jawaab deti gayi, “aaj donon bhai restaurant se hokar aayeinguey humko khaane ke liye keh diye hein donon ne. jab aap ko bhook lage to bata dena khana pados dungi.”

Chawla sahib ne khud ko guilty jeisa mehsoos kiya ke usski bahu aaj uss se kuch door hai kyun ke aaj who khud sab kuch kar rahe hein jabke Saanvi hamesha usska sab kaam karti hai har roz. To wo haath mein whisky ka glass liye kitchen ke taraf jaane laga Saanvi ke paas.

Kitchen ki table par baith kar Chawla sahib ki ek tang zameen chhuh rahe the aur ek tang upar latke hue, apni bahu ke paas usske chehre mein muskurate hue dekh kar bola, “kyun aaj meri bahu kuch naraaz lag rahi hai mujhse? Kia baat ho gayi ji? Hmm?” Saanvi ne muskurate hue ek dish haath mein liye mez par rakhte hue sasur ko halke se dhaka dete hue kaha, “kyun? Aaj nasha ek hi whisky mein chad gaya kia? Bahot pyar ane laga mujhpar achanak?” aur turant wahan se micro wave ki taraf badhte hue Saanvi bolti gayi, “ab aap kahein to dusri whisky main bana dun yaa aap khud banaoge? Deepti abhi wapas niche aegi khane ke liye, iss se pehle aap apna khatam kar lijiye drink, tab tak main ek shower lekar aati hoon. Deepu aaye to ussko apne paas hi rok kar rakhna usski buri aadat hai jab shower mein hoti hoon to taka jhanki karti hai hahaha”


Yeh kh kar Saanvi chali gayi washroom ki taraf aur chawla ji ko yaad aya ke Sanjana ne bhi kaha tha ke wo bhi nahane jaegi….. lo firse Sanjanaa ki yaad agayi…har ek baat par Sanjana beech mein arahi thi…. Chawla sahib sochne lag eke ab tak usski dad pine ke liye chala gaya hoga aur video call karenge wo Sanjana ke saath. Magar ab to usski poti Deepu usske paas ane wali thi, ussko fikar hone laga ke kahin Sanjana thik tabhi call nah kare.

Buss itna hi socha ke deepu shor karte hue upar se niche stairs par ate hue dikhayi diye aur apne dada ko dekh kar apni totli awaaz mein chilatey hue kaha,”dadu, dadu mama bath ko gayi main abhi khabar leti hoon wait karo main abji aayi!” magar jaldi se dada ne ussko thaama aur kaha, “ale meli baby, jab koyi bath karta hai to use dekhna buri baat hoti hai, mama ko mat dekhna chahiye, chalo main tumko ek game dikhata hoon mobile par.” Game ka naam sunkar Deepti chhup ho gayi aur dada ke saath chali gayi. Apne room mein chawla sahib ne mobile lekar Deepu ko khelne ko diya aur dusri whisky banaya aur fir Sanjana ki soch mein doob gaye. Sochne laga ke kyun Anand usski shaadi se inkaar kar raha hai jabke Sanjana ne kaha ke usski koyi boyfriend nahin hai. To Anand ne jhoot kyun kahau uss se.

Aur thodi hi der baad Saanvi ek maxi mein, haath mein towel liye, sar ko ek taraf jhukaaye, partly apne baalon ko towel se ragadhte hue usske kamre aayi poochne ke deepu khana kahegi ke nahin. Yeh takriban har shaam ka scene tha uss ghar mein. Iss waqt ya to Saanvi drink bana rahe hote hein apne sasur ke liye ya to shower ke baad, wapas lounge mein couch par baith kar TV on karti hai, aur jinn dinon Aarav aur Vivaan ghar par hote so sab ikatha lounge mein baithte hein aur gupshup lagate hein. Par ziada tar Vivaan aur Aarav late hi ghar wapas ate hein, koyi 8 ya 9 baje. Abi to suraj dhala tha aur weh donon ne to resto ki program banye the to ghar mein sirf yeh teen jan the.

Jiss waqt Saanvi Deepti ko apne sasur ke bed se utha rahi thi, ussne poocha, “dusri drink ban aliya aap ne ya bana doon?” to sasur ussko ghaur se dekhte hue kaha, “jab tum shower lene gayi to banaya, magar aaj ek teesra lunga bana do ek aur, tumhari haath ka nasha alag hota hai hehehe!” to Saanvi ne deepti ko wapas bed par rakh kar apne sasur ke hath se glass liya aur usske liye ek drink banaayi. Sasur tab tak ussi ko dekh rahi thi. Saanvi bilkkol fresh dikh rahi thi, khule baal kuch bheege kuch sukhe, maxi dress mein wo jeise chamaak rahai thi. Saanvi jab glass thamaane aayi to note kiya ke sasur ussko jeise ghurr raha hai to hansste hue kaha, “aaj lagta hai aap ko pehli hi drink se charr gayi hai aur ab teesri le liya ludak jaoge, dekhna kahin girr nap ado aap, take care, main chali deepu ko khana khilaane.”

Wo deepu ko lekar chali gayi, aur jeise Chawla sahib ne teesri glass ki pehli sip liya usski mobile bed par bajne lagi…..Sanjana ke taraf se video call tha…..

To be continued…………
अँधा प्यार या अंधी वासना ek Family ki Kahani....The Innocent Wife​ (hindi version)....
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11-22-2019, 11:59 AM,
#5
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Ek haseen Muskaan ke saath Sanjana ne kaha, “hello to lo hum video chat par agaye ji”

Chawla sahib ne Sanjana ki Madhur awaaz aur dilkasht chehre ko dekhte hue muskurakar kaha, “Oh! Kitna Khushi ho raha hai mujhe tumko dekh kar main bayan nahin kar sakta, kitni haseen dikh rahi ho screen par tum! Lagta hai ek filmi heroine ho!”

Pehli chiz jo chawla sahib dekhna chahti thi wo yeh ke Sanjana keise dress thi uss waqt, magar sirf usski chehre hi dikh raha tha to ussne kaha, “ zara sa mobile ko door karo apne aap par dekhun to kia libaas pehni ho aur keisi dikh rahi ho iss waqt?!” to Sanjana ne “hihihihi” khilkhilate hue apne aap se mobile ko kuch door kiya ek pouch ke saath. Who kuch eisi dikh rahi thi.
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Chawla sahib ne ussko zoom karne ko kaha, ya dusri angle mein dekhne ki maan ki, to Sanjana ne mobile ki angle change kiya aur muskurate hue yeh pose dikha mobile par Chawla sahib ko:
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Chawla sahib jeise diwana hue jaa raha tha aur usske dekhte hue ussne ek sip liya apne whisky ka to Sanjana ne kaha, “aap bhi pee rahe ho papa ki tarah?”

Chawla sahib apne whisky ki glass ko ek taraf karte hue, Sanjana ko mobile par ghaur se dekhte hue kaha, “tum issi pose mein raho main save kar raha hoon iss angle mein tumko, behad khubsurat lag rahi ho, wah kia baat hai, tumhari khubsurti kamaal ki hai aur tumhari muskurahat to buss jaan lewa hai Sanjana!”

Sanjana ne hansste hue kaha, “mera pic save karke apne bete ko dikhaoge kia?” abhi mat dikhana kissi ko please, apne liye rakhna abhi ke liye okay?”

Chawla sahib par whisky ka nasha chadh raha tha aur usske mann mein ajib khayaalat arahe the us waqt to ussne achaanak Sanjana se kaha, “Tumhare blouse ke upar ke do button khol sakti ho kia?”

Sanjana ne shocked wala shakal banate hue apne khule munh par ek haath rakhte hue sharaarati awaaz mein kaha, “kyun? Haye ram eisa kyun keh rahe ho aap?” To chawla sahib ne socha shayad ussne ghalati kardi yeh kehkar, to ussko sorry kaha magar dekha ke Sanjana muskurate hue upar apne blouse ki 2 button khol rahi hai. Naah chahte hue bhi chawla sahib ne usski cleavage dekhte hi feel kiya ke usska lund pant ke andar machalne laga hai! Ek to nasha sa chhah raha tha whisky pine ka baad upar se yeh Sanjana ki jawaani aur usski Chanchal adaein aur usski muskurahat aur dilksasht surili awaaz ne chawla sahib ko pareshaan kar diya tha. Yeh shabaab ka nasha tha upar se…..

Sanjana, muskuraati jaa rahi magar apne cleavage par apne gesuwon ko jhatak diya to kum cleavage dikhne lage chawla sahib ko. Buss Sanjana ne button to khole magar blouse weisi hi thi, aur kuch khaas nahin dikh rahe the, magar Sanjana ka itna karna chawla sahib ke liye bahot badi baat thi.

Sanjana buss ek model ki tarah pose de rahi thi aur kabhi pouch to kabhi chehra bana rahi thi aur hanssti jaa rahi thi. Chawla sahib ne socha ke us mein bahot bachpana hai abhi ussko khud nahin pata ke wo kia kar rahi hai. To Sahab ne socha ke kuch batein kar liya jae uss se. Uss ne poocha,

“tumhare papa kitne baje wapas aeinguey?”

“pata nahin weise to ghanta der ghanta mein wapas ajaate hein magar kabhi kabhi do dhai ghanta lagaa dete hein jab usske friends se ziada bakbak karne lagta hai.” Sanjana ne muskurate hue apne honton ko twist karte hue jawaab diya.

To chawla sahib ne kaha, “tumhare papa ki kia problem hai? Kyun nahin chahta ke tumhari shaadi ho?”

Sanjana: “main ne kaha na ke ye sab baatein hum milenge tab karenge.”

Chawla: “Are magar baat to karna padega nah par keise? Abhi bhi to baat hi to kar rahe hein abhi hi kar lete hein”

Samjana ne apne baalon ko apne gaalon se piche karte hue ek Muskaan ke saath thoda dhire se kaha, “Aap dobara aiye hamare yahan, firse papa se baat kijiye, magar aap ke ane se pehle, mujhe unnko manane to do, main unnko convince karne ki koshish karungi aur jab wo haan kahe to main ap ko bolungi tab aap zaroor ana. Awoge nah?”

Chawla sahib apne mobile ko idhar udhar ghuma kar Sanjana ki cleavage ko dekhne ki koshish kar rahe the jeise ke ussko hillane se usko ziada dikhega, are utna hi dikhega jitna real mein hai nah? Unnko chadh gaya tha, nashi mein the wo to thoda ladhkadate zuban mein poocha,

“To tum keise manaoge unnko? Kia kahogi?..... ari tum apne aap ko full dikhao nah mujhe, sirf upar dikh rahi ho, selfie stick nahin hai kia? Complete dikhao mujhe….. main tumko dekhna chahta hoon”

Sanjana unnke ladhkhadaate zubaan sunkar hanss padi aur khilkhilaate hue boli, “aap ko to chadh gayi bilkool, papa bhi kabhi eise hi baat karte hein mujhse, bahot hanssi aati hai mujhe, aap jayiye ab main rakhti hoon!”

Yeh sunkar chawla sahib thoda apne aap ko sambhaalte hue mobile apne chehre ke paas late hue, bola, “bilkool bhi nahin mujhe kahan chadhi hai main to tumse thik se baat kar raha hoon”

Sanjana ne araam se apne mithi awaaz mein kaha, “ofo aap nashi mein hein aap ko kuch bhi yaad hi rahega kal, aur papa bhi ane hi wala hai, kal baat karte hein okay? Aap jaiye main cut karti hoon babyr, good night, sweet dreams. Sleep well and take care. Muuuuuaaaah.”

Chawla sahib ne apne honton ko twist karke kiss wala bana ke mobile ko kiss kiya jeise Sanjana ko kiss kar raha hai aur kaha, “wait jaane se pehle ek kissy to deti jao mujhe, ek hug bhi!”

Sanjana: “abhi abhi to kiss kiya aap ko, magar hug keise doon mobile par, jab aap aoge tab hug karlena, lo aur ek kissy “aur ussne bhi mobile ko kiss karte hue video call off kiya.

Chawla sahib ne jitney clicks kiye the usski tasveer ki baat karte waqy wo sab eke k karke dekhne laga apne mobile par, pics ko crop kar raha tha, usski cleavage ko zoom karke dekh raha tha, bed par leyth gaya aur socha ke ab Sanajana se milna bahot zaroori hai. Aur ab Sanjana ko watsap par text kiya yeh likh kar,

“Kia hum donon akele mil sakte hein? Kal tumhare papa kaam par chale jaye to kia tum mujhse milne aa sakti ho?”

Sanjana ne turant reply kiya, “are baba iss gaon mein sab log idhar udhar ghumte rehte hein sabhi ko har kissi ka pata rehta hai, do kadam chalungi to saare gaon ko pata chal jaega….to keise milne aungi, shaam ko mere ghar ane se pehle papa ko pata chal jaega, to main unn se kia kahungi ke kahan gayi thi?”

Chawla sahib ne reply kiya, “To kia tum kabhi bhi baahar nahin jaati? Din bhar ghar mein rehti ho?”

Sanjana: “Kahan jaungi sahab? Bus gaon mein hi ghumti hoon, udhar jo dam ban rahi hai dekhne jaati hoon kabhi, to kabhi nadi ke taraf tehelne nikalti hoon, sab log tokte hein ke kidhar jaa rahi hoon…. Ab sheher ke taraf nikli to bus lena padega tab to har ek ko pata chal jaega ke main bus se sheher gayi hoon to sab sawaal karenge ke college to jana chorr diya phir bus lekar kahan jaa rahi hoon. Aap samjhe baat ko?”

Chawla sahib reply type karne lage the ke Sanjana ki ek aur message aayi, to wo padhne laga, likha tha, “aap pehle papa se mil lijiye, baat ho gayi tab hum zaroor mil sakeingue, tab kissi ne bhi poocha balke sabko tab pata chal jaega kea ap mere rishtedaar ban gaye ho, to koyi tok taak nahin karega. (smiley)

To ab chawla sahib ne likha, “phit thik hai tum aaj hi apne papa ko manao, bilkool manao, unnko samjhao ke mere ghar mein tum bahot khush rahogi, unn se kaho ke eisa ghar naseeb walon ko milta hai to unnko bahot khush hona chahiye, main chahta hoon ke kal mujhe tum jawaab do ke tumhare papa mujhse milna chahte hein! Okay? Bye.”

Sanjana ne jaldi se type kiya “papa wapas agaye. Bye. See you tomorrow. TC”


Chawla sahib bed par leyte hue gehri soch mein doob gaye aur usski enkh lag gayi.

Raat ko barah baje jab Aarav aur usska bada bhai ghar wapas aaye tab Saanvi ko pata chala ke sasur ji ne khana nahin khaya kyun ke dinner padoste waqt ussne suna tha who chat par hai to socha ke business partners se baat kar rahi hai to usska dinner mez par serve karke unn se baahar se hi kah diya tha ke dinner serve ho gayi hai who aakar kha lein, aur Deepti sona chahti thi to wo upar chali gayi ussko sulane aur khud bhi so gayi. Jab Vivaan ne Saanvi ko jagaya aur poocha ke kyun dining table par papa ke plate weisa ke weisa hi hai……. To jaldi se Saanvi ne apne sasur ka darwaz khola aur andar dekha ke wo neendh mein hai. Bina change kiye hi so rahe hein. Saanvi ko ajeeb laga kyunke pehle eisa kabhi bhi nahin hua tha. Ussne unnko hilla kar jagaya, sharaab ki badbuh arahi thi to Saanvi ko pata chal gaya ke sasur ne ziada pee liya hogay issi liye so gaye. Keise bhi karke unn ko jagaya aur khan eke liye kaha…… apne enkhon ko massalte hue chawla sahib Saanvi ke piche dining table tak gaye….aur haath muhn dho kar Saanvi ke khana microwave mein heat karke unn ko padosa.

Khane ke baad takriban 2 baje Chawla sahib apne kamre mein gaye, to apne mobile ko uthaya firse Sanjana ki tasveeron ko dekhne ke liye, to dekha Sanjana ke 5 messages hein. Usska dil, bahot khush hua aur time chek kiya to subha ke sadhe ek baje ki send ki hui messages thi matlab jab wo khana kha rahe the tab Sanjana ne text kiya.

To message ko padhne se pehle ussne yeh type karke send kiya, “kia tum abhi jaag rahi ho?”

Wait karta raha koyi 5 mins magar jawaab nahin aya to ussne Sanjana ke message read kiye, Sanjana ne likha tha;

“Main ne papa se baat kar liya hai. Aap kal hi yahan aiye. Main ne unnko takriban mana liya hai phir bhi aap ko unn se baat karni hogi. Main bhi saath baat karungi. Aap kal hi zaroor aiyega. Main aap ka intezaar karungi. Muuuaaah.”

To be continued……………….
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11-22-2019, 11:59 AM,
#6
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Sanjana ki message padhkar Chawla sahib khush hua aur ussko ek umeed ki kiran nazar ayi. Phir bhi ussne Sanjana ko aur text kiya, “kitne baje ana chahiye mujhe kal? Tumhare papa to kaam par jaeinguey din mein, to shaam ko aaun kia?”

Koyi subha ke 9 baje Sanjana ki jawaab aayi, “are Sir, papa nahin honge tab bhi to aap aa sakte ho nah? Mujhse akele mein milna chahte ho na aap? To papa ke ane se kuch ghante pehle bhi aa sakte ho, hum akele honge, aap khush nahin honge mere saath akele?”

Yeh padhkar Chawla sahib itna khush hua ke turant wahan jaane ka mann bana liye, socha ke din bhar Sanjana ke saath waqt bitaega. Wo tayyar hua aur ghar se nikalne jaa raha tha 10 baje ke Saanvi ne dekha aur usske taraf aate hue kaha, “Are aap kahan chal diye itna subha subha, iss time to aap kahin nahin jaate ho balke aap ko to ab jaagna chahiye tha? Aap mujhse kuch zaroor chupa rahe ho pita ji, main kal se dekh rahi hoon. Koyi baat hai jo mujhe ajeeb lag raha hai. Kehye to kia baat hai?!”

Chawla sahib ne khud se kaha,”Iss se kuch chupana asaan nahin, yeh mujhko bahot kareeb se jaanti hai, mere har baat se wakif ho jati hai kia kahun iss se main?”

Aur ek jhoot mooth ke muskurahat ke saath ussne Saanvi se kaha, “ari bahu, unn donon bhaiyon ko mat batana main ek deal karne jaa raha hoon jo unn donon ko bilkool nahin pata, surprise dena hai donon ko.”

Saanvi ko dikh gaya ke usska sasur jhoot bol rahe hein to poocha, “Deal? Keisa deal? Kab contact kiya aap ne? aur kiss se bhala jo mujhe nahin pata?”

Chawla sahib bole, “wo video conferencing chal rahi thi kal raat der tak tabhi sab tey hua, ab nikalta hoon 11 baje wahan pohunch jana chahiye mujhe, wo log wait kar rahe honge. Chalta hoon shaayad late aaun, koyi bhi pooche kuch mat batana, kehna ke tumko kuch nahin pata. Main baad mein sab bataunga khud wapas aakar.”

Tab tak Deepti dawte hue aayi aur apne dada se apne haath feylaate hue kaha, “dada ji mujhe bhi lechalo car mein ghumne ko” par Saanvi ne ussko utha liya goad mein uss se yeh kehte hue ke dada ji kaam par jaa rahe hein apne sasur ko shak ki nigaah se dekhte hue. Aur kaha, “kia perfume lagaya hai aap ne aaj, bahot hi achchah mehek raha hai hmm? Ladies se deal karne ja rahe ho kia aap?”

Chawla sahib ne muskurakar Saanvi ko dekha aur apne 4x4 ke taraf chal diye. Jab reverse drive karke gadi ko ab aguey gate ki taraf chalne lage to Saanvi ne zor se kaha, “Pita ji Driver to lelo kissi ko? Aap kyun drive kar rahe ho?”

Magar gadi gate ke baahar nikal gayi aur Chawla sahib jaane lage. Wo uss waqt eisa mehsoos kar raha tha jeise ek bachcha apne parents se jhoot bolkar koyi ghalat kaam karne jaa raha tha. Khud ek jeet hua usska eisa mehsoos ho raha tha ussko.

Udhar Saanvi ghar ke andar jaate hue badbadaatu gayi, “pata nahin kia gul khila rahe hein pita ji bhi, wohi jaane kia maajra hai.”

Drive karte hue kuch ek ghanta ke baad Chawla sahib ne gadi roka aur Sanjana ko call kiya. Video call nahin normal call.

Sanjana ne call pick karte hue kaha, “ji, kehye keise ho aap?”

Chawla sahib: “main araha hoon”

Sanjana: “Really? No aap mazaak kar rahe ho”

Chawla sahib: “are sach main nikal chuka hoon ek ghanta pehle, car rok kar tumse baat kar raha hoon ek ghanta mein tumhare gaon pohunch jaunga. Phone iss liye kiya ke main tumse poochun ke kaun si dress pehne hue ho iss waqt?”

Sanjana: “hihihihi, kia aap bhi? Main sirf ek dress mein hoon black color ki.”

Ek photo bhejo jaldi se, agar mujhko passand aayi to ussi mein rehna, agar passand nahin aya to kuch aur pehena.” Ussne ye kaha Sanjana se.

Sanjana: “hihihihihi kia aap ladki ko dekhne arahe ho ji?”

Chawla sahib: “ofo send karo nah jaldi se!”

Sanjana ne ussko tease karte hue kaha, “nahin bhejti aap aakar khud dekh lo, tab bhi passand nahin aayi to bolna tab badal lungi.

To chawla sahib ne socha ke yeh bhi thik hai magar itna poocha,

“achcha yeh batao ke wo dress niche kahan tak reach hota hai ghutnon ke upar ya niche?”

Sanjana ne kaha “UPAR” aur zor se hanssi

To chawla sahib ne kaha, “fir thik hai I am coming sweetheart.”

To wo wapas drive karne lage. Chawla sahib ko eisa feel ho raha tha ke wo pehli baar ek ladki se milne jaa rahe hein. Bilkool wo wala feeling arahi thi jeise ek young ladka pehli baar apni girlfriend se milne jaa raha ho. Wo Sanjana ko uss dress mein imagine kar rahe the ke usski upar wale tangon ka hissa dikhega. Wo khub gori to hai hi, aur wo tang ka hissa ek ladki ka jo dhakka rehta hai, aur dress upar ho jata hai to kitna ziada gora aur safed ki milawat jeisa rang dikhta hai, usske bare mein sochte hue Chawla sahib drive kiye jaa rahe the tez raftaar se.

Usske dimaagh mein sirf aur sirf Sanjana chaaye hue the, kal raat wale pics jo video call ke dawraan ussne save kiye the mobile par check karte hue drive karte gaye. Usske jism mein ek jawaan leher dawd rahe the uss waqt.


Chawla sahib ek bahot handsome aadmi tha, umar kia hai usska koyi bhi kabhi exactly nahin bata paate. Usska sharir usski umar nahin dikhate the jab wo 25 saal ka tha to lagta tha 12 saal ka hai. Jab 40 ka hua to sab log sochte the ke wo 20 ki umar ka hoga. Jab 50 ka hua to 30 ka dikhte the. Eise bahot sare log hote hein jo ziada hi young dikhte hein apne umar se. Chawla sahib unn logon mein se tha. Magar Sanjana ko usska asli umar to pata tha phir bhi wo unnse eise batein karte jeise ke wo ek boyfriend se kar rahi ho. Eisa kyun tha kaun jaane?!

Takriban ek ghate ke baad chawla sahib ki gaadi ruki Sanjana ke ghar ke saamne. Jaldi se Sanjana baahar nikli aur khilkhilaati hanssti hui darwaaze ke paas wait karne lagi chawla sahib ke taraaf dekhte hue. Chawla sahib ne jab ussko dekha to bahot khush hue. Ussne socha ke dress bilkool weisi hai jeisa ussne ne socha tha. Sanjana kuch eisi dikh rahi thi uss dress mein.
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Chawla sahib chalte hue usske taraf badh rahe the aur usski nazar pehle Sanjana ki jaanghon par gaya, fir usske chaati par jahaan Sanjana ke baal ruke hue the, Chawla sahib ne note kiya ke dress V cut hai aur halki si cleavage to nazar arahe hein, aur saath baithe to aur bahot ziada dikhne ke chances hein……

To be continued………………………
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11-22-2019, 12:00 PM,
#7
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Jab chawla sahib Sanjana ke taraf badh rahe the usske chehre mein dekhte hue, to ekaat log usske gadi ke paas khade ussko dekh rahe the to Sanjana ne nazron se chawla sahib ko piche dekhne ke liye kaha. Chawla sahib nahin samjhe aur usske kaafi karib aagaye the to pucha, “kia?” to Sanjana ne kaha, “piche dekho”

Aur jab wo piche mudhe to dekha ek mahila, ek bachca aur do mard usske gaadi ke paas khade usske taraf dekhe jaa rahe the. To ussne unn logon se pucha, “kia hua?” Sanjana muskura rahi thi, to unn mein ek mard ne kaha, “kaun ho babu?” wo aadmi kuch budha tha, to usske paas khade dusre aadmi ne kaha, “are yeh to wohi gaon ke uss taraf ke haveli wala hai!”

Tab chawla sahib ne kaha, “haan main wohi hoon” phir budha aadmi jaldi se aakar chawla sahib ke paon mein gidh pade yeh kehte hue, “are maalik shama karna mujhe main ne aap ko nahin pehchana aap to maalik ho, yeh ghar bhi to aap ne hi Anandwa ko diya tha nah? Kahan rehte ho maalik barson baad nazar aaye ho!”

Chawla sahib ne ussko upar khade karte hue kaha, “koyi baat nahin aap se koyi ghalati nahin hui. Achcha mujhe kuch kaam hai iss farmhouse ki marammat ke liye iss liye aya hoon. Aap log apne apne kaam mein lag jayein. Itna kehkar Chawla sahib aguey badhe. Ussne socha tha ke Sanjana ko dekhte hi wo ussko zor se gale lagayega, ussko apni baahon mein jakar lega magar yahan to log piche khade jeise tamasha dekh rahe the. Usska plan fail hua nazar araha tha. Weh log wahin gaadi ke paas khade rahe aur kuch aur log bhi aakar saath judh gaye unnke gaadi ke paas.

Jab wo Sanjana ke bilkool paas agaye to ussne kaha, “keisi ho tum, weh log ab bhi yahin hein kia?” Sanjana ne hanste hue kaha, “haan weh log ab nahin jane wale yahan se, yahan kissi ki bhi car guzarti ya rukti hai to eise hi karte hein sab.” To bina piche mude chawla sahib ne sanjana ko andar chalne ke liye kaha. Aur Sanjana pehle andar daakhil hui aur usske piche chawla sahib andar gaye aur turant Sanjana ko apne bahon mein liya aur Sanjana ne khud apne bahon ko bhi chawla sahib ke kaandhon par kiya aur ek zor ka hug kiya unnko.

Ussko bahon mein jakre hue hi chawla sahib ne uss se kaha, “main ne socha tha ke jeise nazar aogi main tumko eise zor se bahon mein bhar lunga magar yeh log kamaal ke log hein sab eise ghurr rahe hein jeise ek chorr ko dekh liya ho!”

Sanjana unn ke baahon mein hi rahe aur kaha, “main ne bhi eisa hi socha tha kea ap aate hi mujhko hug karoge dwaar par hi magar mujhe bhi nahin pata tha ke weh log ajaeinge.” Aur chawla sahib apne haath ko Sanjana ke peeth par halke se ferrte hue pucha, “to batao keisi hai meri pyari, si Sanjana?” Sanjana ka sar Chawla sahib ke seene se lage hue the aur wo khaamosh rahi muskuraate hue fir chawla sahib ka haath Sanjana ke peeth par thapthapaate hue ahiste se usski ungliyon tale Sanjana ki bra ki strap feel hui. Aur Sanjana ke boobs usske chaati par dabe hue bhi feel kiya chawla sahib ne jiss se ussko garam feel hua aur khud Sanjana ko apne baahon se alag kiya usske chehre mein dekhte hue.

To Sanjana chawla sahib ka haath apne ungliyon mein pakar kar ghar ke andar lejaate hue kaha, “Welcome hai aap ko hamare yahan, balke aap ke khud ke ghar mein.” Chawla sahib Sanjana ko chalte hue nihaar rahe the, ussko upar se niche dekhte jaa rahe the, aur Sanjana ne apne dress ki niche wala hisse ko apne ungliyon mein thoda sa uthakar halke se upar karke ghumte hue ek round karte hue poocha, “aur mera dress keisi hai? Passand hai ya change karun issko? Hihihi” jiss waqt ussne veisa kiya to (last post ki photo mein dekhiye sab) – ek to wo dress ghutnon ke upar the aur ab usski uss action se dress aur thodi si upar gayi aur round kiya to usski khubsurat mulaayam jaanghein chawla sahib ko nazar aaye, jissko dekh kar chawla sahib hakbaka sa gaye aur apne pant mein halchal mehsoos kiya.

Phir chawla sahib khirki ke parde ko halke se hatta kar baahar apne car ke taraf dekha to Sanjana ne kaha, “weh log nahin jaeinge jab tak aap ki car yahan hai weh yahin raheinge balke aur bhi log ayeinge, yahan ke log eise hi hein. Bahot hi kum car andar gaon mein ate hein. Bus humko 150 metre door utaarte hein, humko chal kar yahan ta kana padta hai, raasta kachcha hai nah iss liye. Saal mein kabhi kabhar ek ya do car yahan ate hein to inn logon ke liye yeh kuch naya aur ajeeb hota hai. Unn logon ki fikar chorrye aap. Don’t worry your car will be fine.”

Tab tak ek sofe ke paas agaye the chawla sahib aur Sanjana ne unn ke baahon ko pakarte hue unnko wahan baithne ke liye kaha. To chawla sahib ne pucha, “mujhe meri car ki fikar nahin hai, main to soch raha hoon ke weh log yahan khirki ya darwaze ka paas to nahin ayenge sunne ya dekhne ke liye humko?” Sanjana ne hansste hue kaha, “nahin ji yahan to nahin ayeinge weh log. Unnke liye aap ki car ek nayi chiz hein aur aap bhi to bade aadmi ho, ab tak pura gaon jaan gaya hoga ke aap kaun ho aur yahan aaye ho.”

To chawla sahib ne kaha, “tab to tumhare papa ko pata chal jaega main kitne baje yahan aya hoon?” to Sanjana ne kaha, “to kia hua? Jaanne do unnko to maloom hai aap ane wale ho, magar time ke bare mein to sirf main aur aap jaante hein unnko to nahin bataya ke aap abhi awoge”

Tab Sanjana apne dayein jaate hue yeh kehti gayi, “main aap ke liye kuch Thanda laati hoon pine ke liye aap baithiye.” Aur wo kitchen ke taraf chali gayi. Chawla sahib ke samajh mein nahin araha tha ke wo kia karen ab, aur keise Sanjana se baat karen, karen bhi ya nahin. Kia karenge jab tak Sanjana ke papa wapas nahin ata! Ajeeb ajeeb ke khayal arahe the unnke dimaagh mein aur bahot ajeeb si feeling ho rahe the unnko. Wo iss bahot hi khubsurat ladki ke taraf aakarshit ho raha tha. Aur soch raha tha ke Sanjana ki kia feeling hai? Kia wo bhi unnko ussi tarah passand karte the ya wo unnko ek pita ke roop mein dekh rahe the? Magar kal chat ke dawraan Sanjana ne apne blouse ki do botton kyun khole the? Unnko khush karne ke liye ya eise hi?

Chawla sahib soch rahe the ke keise aguey badhen Sanjana ke saath. Unnka dimaagh garam ho gaya tha, aur ek darr bhi tha ke kahin yeh gaon wale mein se koyi paas aakar kuch dekh na lein aur pure gaon mein Sanjana badnaam na ho jae…… sochne lage ke keise Sanjana se approach kiya jae….. ussne socha ke ussko apne karib sofe par baithne ko kahega aur usski cleavage dekhne ki koshish karega aur dekhega ke Sanjana ki behaviour keisi hogi, usske taangon par apna haath bhi rakh sakta hai aur dekhega ke Sanjana ki reaction kia hogi…. Ye sab soch hi rahe the ke Sanjana ki awaaz ne ussko jeise ek neend se jagaya, “yeh liye Thanda pijiye aap”

Sanjana jhuki hui thi ek tray haath mein liye jiss mein ek glass juice tha. Chawla sahib ne glass lete waqt sidhe Sanjana ke cleavage ko dekha, jhukne se usski kale bra ke straps aur thoda sa Sanjana ke boobs goal, firm dikh rahe the. Safed aur gulaabi rang ki milawat thi, chawla sahib ne glass lete hue ek haath se apne lund ko pant mein seedha kiya jiss waqt Sanjana tray ko table par rakh rahe the.

‘Ab kia karun main’ Chawla sahib ne apne aap se pucha. Aur juice peete hue wo Sanjana ko apne paas khadi dekh rahe the to kaha, “aao baitho mere paas” aur muskuraate hue Sanjana unnke paas sofe par baithi. Turant cahwla sahib ne apne dayen baazu ko Sanjana ke kaandon par kiya kyunke wo unnke dayen taraf baithi thi, aur Sanjana ne unnke uss haath ke ungliyon ko apne dayan haath mein pakarte hue ek bachpane awaaz mein kaha, “To batao aap mere papa se kia kahoge ab?” ek gehri saans lete hue chawla sahib Sanjana ke cleavage ko hi dekhe jaa rahe the aur kaha, “tumhi batao kia kehna chahiye mujhe unn se?”

Sanjana boli, “are main kia bolun? Aap janon aap kiss liye aaye ho aur kia baat karna hai unnse!” juice ke glass khatam karte hi ussko mez par rakh kar Chawla sahib ne sanjana ke taangon par apne bayan haath rakha aur halke se apni ungliyon ko ferrte hue kaha, “tum pe bahot hi pyar ata hai, tum itni cute ho ke tum se bahot pyar karne ko mann karta hai chalo ek kissi do mujhe!” Sanjana ne hansste hue unnke gaal par ek kiss kiya. To Chawla sahib ne kaha, “idhar bhi iss gaal par bhi, to wahan bhi kiya, fir chawla sahib ne kaha, “aur ek, aur ek, aur ek karti jao bahot achcha lagta hai.”

Sanjana ne hansste hue kaha “kitna kiss karun aap ko! Bahot kiya. Aur chawla sahib ne kaha, “magar main ne to nahin kiya!” To Sanjana boli, “to karo kiss ne mana kiya aap ko?”

To Chawla sahib ka ek haath to Sanjana ke kaandhon par tha hi aur apne dusre haath se sanjana ke chahre ko apne haath mein lete hue apne munh ke paas kiya aur dayaan gaal ko kiss kiya, apne labon ko kaafi der tak usske gaal par dabaaye rakha, fir dusre gaal ko bhi bilkool ussi tarah kiss kiya, fir usske peshaani ko chumma fir thudi ko chuma fir halke se usske gale ko chuma, fir gardan ko chumte hue niche ke taraf chumte jaa raha tha yahan tak ke jeise Sanjana ko thoda piche ke taraf hona pada aur apne gardan ko piche karna pada aur chawla sahib usski cleavage ki shuruwaat ko halke se kiss karte hue usska baayan haath Sanjana ke jaanghon par halke se ferne lage, jab jhat se sanjana ne usske uss haath ko apne uangliyon mein thaama. Aur muskuraate hue Sanjana ne kaha, “bahot kiss kar liya aap ne chalo farmhouse ke piche ke taraf thoda ghumte hein!”


To be continued……………………
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11-22-2019, 12:00 PM,
#8
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Aur muskuraate hue Sanjana ne kaha, “bahot kiss kar liya aap ne chalo farmhouse ke piche ke taraf thoda ghumte hein!”


Itna kehte hue Sanjana Chawla sahib ka haath thaame ghar ke piche ke darwaze ke taraf se hote hue uss farmhouse ke piche nikle jahan ek bada sa baagicha tha, bade bade peyr, pawdhe, phool, chidyon ki awaaz bhi sunaayi de rahe the, aur ek thandi hawa ki leher mehsoos ho rahi thi uss jagah.

Sanjana Chawla sahib ka haath pakde jeise unnko khinchte hue aguey badh rahi thi ekaat baar muskuraate hue mudhkar unnko dekhte. Aur janaab to ladki ki jism nihaarte hue chal rahe the unnke piche piche. Usska dil kuch ziada hi fida tha uss ladki par jissko wo apne bet eke liye chunne wale the, magar soch raha tha kia ab irada badal liya jae? Magar irada badle bhi to keise? Kia kahega Sanjana ke pita se aur khud Sanjana se? usske dimaagh mein shaitaani khayaalaat ne ghar banana shuru kar diya tha. Ussne socha kissi bhi kimat par iss ladki ko khona nahin hai ab. Keise bhi ho ek rishta to banega chahe apne bete se shaadi hi karke. Chawla sahib yeh sab sochte hue Sanjana ki cleavage dekhne laga jab Sanjana ek bade se payr se peeth karke khadi hui aur chawla sahib ke chehre mein dekhte hue kaha, “Kitne saal hue jab aap aakhri baar iss jagah par aye the?” Aur Sanjana ko mehsoos hua ke chawla sahib kin azar usski chaati par hai, fir bhi ussne apne nazrein jhukaate hue ek Muskaan se baat kiye.

Chawla sahib Sanjana ke bahot karib khade hue aur jaan bujhkar apne ek tang ko Sanjana ke tangon ke beech karte hue usske gaal par se usski latt ko hatate hue kaha, “tum itni pyari keise ho, itni khubsurat aur haseen keise ho? Koyi bhi aadmi tumse pyar kar baithega!” Sanjana ke chehre par halki si laali aayi aur apne jaangon ke beech chawla sahib ke uss ek tang ko dabaate hue kaha, “jhoot keh rahe ho aap, main itni to naa hi khubsurat hoon aur na hi haseen” magar chawla sahib usski gaalon par apne haath ferrte hue kaha, “chiraag tale andhera! Tumko khud nahin pata ke tum kia ho Sanjana…. Iss gaon ke log tumko nahin cherrte? Koyi ladka ya aadmi ne kabhi tumhara taarif nahin kiya? Aur haan college jaati thi tab to bahot sare boyfriends diwane hue honge? Batao?!”

Uss waqt chawla sahib ki ghutna Sanjana ki jaanghon ke beech o beech mein tha aur Sanjana ko feel hua ke usska ghutna kariban usski panties ko chuh raha tha aur uss harkar ki vajah se usski dress kaafi upar uth gayi thi aur usski jaanghein bahot upar tak dikh rahe the to chawla sahib ki nazrein ussi par tike hue the…. Sanjana ne sarr utha kar dekha ke chawla sahib ki nazrein usski jaanghon par hein phir Sanjana ne uss jagah se nikalte hue ek bahana banate hue kaha, “wahan ek aam ka peyr hai wahan chalein?”

Chawla sahib ne usske piche chalte hue kaha, “tum baat ko taal rahi ho hai nah?” jisska jawaab Sanjana ne sirf muskurate hue diya. Aam ke peyr ke paas aakar iss baar Sanjana ne uss peyr se peeth lagakar nahin khada hua jeise pichle peyr par kiya tha, to ab Chawla sahib ko uss tarah usske tangon ke beech apna tang lagana naamumkin tha. To chawla sahib ne socha ke Sanjana weise situation avoid kar rahi hai jiss mein unnko usske jism ke karib hona pade. Yeh chawla sahib soch rahe the, magar kia Sanjana weisa hi kar rahi thi? Ya ussko passand tha ke chawla sahib usske uss tarah se chhuwe? Magar thodi si teasing kar rahi thi usske saath?

Ab uss peyr ke chaar kadam par ek bench tha jeise public gardens mein hua karta hai, to chawla sahib wahan jakar baith gaye aur Sanjana khud wahan unnke paas baithne ko aayi. To phir se situation weisa hi hua jo lounge mein tha ghar ke andar jab sofe par baithe hue the. Phir se chawla sahib ne ek haath Sanjana ke kaandhe par rakha aur ek haath Sanjana ke jaanghon par jabke usski dress aur upar ho gayi thi baithne ki wajah se. usski laal gulaabi jaanghein jo bahot naram the uss par chawla sahib ki ungliyan naach rahe the aur Sanjana ko uss waqt kia maza araha tha ya wo pareshaan ho rahi thi? Kia wo uss situation se phir se nikalna chahti thi ya enjoy kar rahi thi? Kaun usske dilka haal ko jaan sakta hai uss waqt? Iss ke baare mein Sanjana khud bategi kuch dinon baad ke wo kia feel kar rahi thi iss waqt.

Chawla sahib jeise usske saath flirt kar raha tha aur Sanjana unnko flirt karne de rahi thi buss dekhne se to eisa hi lagta tha. Aur ussko caress karte hue Chawla sahib ne phir kaha, “tum pe bahot hi pyar ata hai, naa jane kyun tums eek bandhan si mehsoos hoti hai. Tum mein kuch hai jo mujhe tumhare taraf khinchta hai wo kia hai? Tum batao?” Sanjana ne hansste hue kaha, “mujhe kia pata? Wo to aap janon!” phir Chawla sahib ne kaha, “tumko aur hug karne ko mann kar raha hai please stand up and give me tighter hug, please.” Sanjana ne inkaar nahin kiya aur khadi ho gayi. To jhatt se chawla sahib ne Sanjana ko apne baahon ke kaske bharte hue feel kiya Sanjana ke chuchiyon ko apne chest par dabte hue, kuchalte hue, aur Sanjana ne apne bahon ko unnke kamar se hote hue unnke peeth kar kiya. Magar chawla sahib ne kaha, “eise nahin apne baahon ko eise mere kaandhe ke upar karo.” Sanjana kad mein unnse chote the to ussko apne teos par khada hona par unnke kaandhon par apne baahon ko karne ke liye. Uss action se Sanjana ka chehra Chawla sahib ke kaafi karib ho gaye to Sanjana ne nazrein jhuka liye aur Chawla sahib ne apne pant ke andar apne lund ko bada hote mehsoos kiya jo Sanjana ke jaanghon par the uss waqt. Sanjana ne bhi wohi feel kiya to halke se piche hatti magar embrace mein hi rahe chawla sahib ke. Aur ussi position mein donon ek dusre ko bahon mein liye hue the aur Chawla sahib ne kaha, mujhe aur puppy karo jeise kiya tha kuch der pehle, please” aur Sanjana ne unnke chere mein dekhte hue unnke ek gaal par kiss kiya phir dusre gaal par aur usske peshaani par aur uss dawraan Chawla sahib ke haath Sanjana ke chutron par gaya aur ussko apne lund par dabaya. Tab jhat se Sanjana unnke baahon se nikli yeh kehte hue, “chorrye, kia kar rahe ho aap” uss waqt ek ragadh to hui Chawla sahib ke lund ka thik Sanjana ke choot ke upar kapdon ke upar hi sahi, chawla sahib ne achchi tarah se apne lund ko usski dress ke upar jaanghon ke beech usski choot par ragahdte hue mehsoos kiya. Sanjana ko bhi achi tarah wo feel hui tabi wo unnke baahon se nikli. Wo lamha dono ke liye ek tanhayi ka lamha ban gayaa. Kissi ne ek dusre ke kuch nahin kaha, aur Sanjana niche zameen dekhti rahi. Kuch do minat tak donon khamosh rahe, aur uss khamoshi ko ek chidya ne parr maarte hue toda jo udhkar unn donon ke beech se gayi.

Chawla sahib ka dil zoron se dhadak raha tha aur Sanjana ki bhi. Chawla sahib ab sochne laga kahin yeh baat wo apne pita ko nah bata dein. Ussko ek khauff sa mehsoos hua to Sanjana ke karib jaakar kaha, “yeh baat hum donon ke beech ki hai nah? Kahin kssi se isska zikr ro nahin karogi?” Sanjana apne chaati par haath rakhe hue khud apni dil ki tez dhadkanon ke feel kar rahi thi aur zameen dekhte hue sar hillatey hue nah mein jawaab diya. Matlab ke wo kissi se iss baat ke bare mein zikr nahin karegi. Phir bhi Chawla sahib ne kaha, “bol ke batao kia apne papa ko bataogi mere jaane ke baa diss bare mein?” to dhimi awaaz mein niche ke taraf hi dekhte hue Sanjana ne kaha, Nahin bataungi kissi ko bhi” ur chawla sahib ne “thank you very much kaha”

Ab chawla sahib ke samajh mein nahin araha tha ke kia baat karein Sanjana ke saath. Khud guilty mehsoos kar raha tha aur soch raha tha ke ussne bahot jaldbaazi kar diye shaayad. To baat ko phir se shuru karne ke liye kaha, “tumhare mobile kahan hai? Tumhare bahot saare selfies honge nah uss mein mujhe send karo saare ke saare, main apne mobile mein sab save karunga!” tab Sanjana muskuraayi aur kaha, “char mein hai chaliye aap ko dikhati hoon” phir chawla sahib ko ek idea sujha, ussne kaha, “are thehro to, mujhe tumhari kuch rasveerein to lene do abhi issi waqt. Kuch karo mere liye, main apne mobile mein tumko quaid karta hoon.”

Sanjana muskurate hue maan gayi aur khade hote hue kayi pose diye chawla sahib ko jissne Khushi Khushi nikaale, phir chawla sahib ne Sanjana ko uss bench par baithne ko kaha aur kayi tasveerien liye wahan baithe hue, tab Chawla sahib ne ussko leytne ko kahau ss bench par, Sanjana leyti aur ek do pose ke baad Chawla sahib ne ussko ek tang upar aur ek tang niche karne ko kaha, Sanajana ko pata tha agar weisa karegi to usski pantie nazar aegi to ussne inkaar kiya, phir chawla sahib keise bhi karke sabhi pose lene ke dawraan kayi eise pose liye jiss mein Sanjana ki jaanghein achchi tarah se dikh rake the unn mein se ek pose yeh wala tha jo chawla sahib ne bade itminaan se khinche, aur kyunke leyt kar Sanjana ne tang uthane se mana kiya to baith kar ek peyr ko thoda upar karne ke liye kaha jo Sanjana ne kiya aur yeh pose mila Chawla sahib ko ….. tasveer kuch eisa tha….
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To ab wahan se ghar ke andar jaane lage to chawla sahib iss tasveer ko apne mobile par dekhte hue apne lund ko pant ke andar seedha karte hue Sanjana ke piche ghar ke andar gaye jahan Sanjana ne apni mobile ke pics unnko dikhane ke liye laaye………..

To be continued………………
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11-22-2019, 12:00 PM,
#9
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Chawla sahib Sanjana ke paas baithe usske tasveeron ko dekhne ke liye. Aur ek baar phir bilkkol ek dusre ke kareeb ussi sofe par donon paaye gaye. Sanjana ko bilkool unn se satt kar baithna pada kyunke apne mobile se photos dikha rahi thi aur chawla sahib se phir saha nahin gaya aur usske haath fir daudne lage Sanjana ke jism par……. Kabhi usske jaanghon par to kabhi usske kamar par phir usske gardan par to kabhi usske peth par… Sanjana photos dikhaaye jaa rahi thi jeise kuch nahin feel kar rahi thi ke chawla sahib ussko charon taraf chhuh rahe hein….. to Chawla sahib ne socha ‘main issko itna chhuh raha hoon, magar abhi to kuch nahin keh rahi jeise ke kuch pata hi nahin, abhi abhi mere ungliyan usske donon jaanghon ke beech mein tha aur ussne hillne ki koshish bhi nahin kiya aur mere ungliyon ko wahin rehne diya, matlab raazi hai kia? Kia karun ab main ungliyon ko usske panties tak lajaun ke nahin’

Itna soch hi rahe the ke ussne apne haath ko Sanjana ke panties tak dhire dhire karne laga usske mobile par usske tasveerein dekhte hue. Sanjana uss waqt chawla sahib ke kaandhe par satti hui thi muskurate hue apne pics dikhate hue unnko jabke chawla sahib ka haath usske donon jaanghon ke beech tha. Chawla sahib ne ek baar usske chehre mein dekha aur jab dekha ke Sanjana koyi bhi resistance nahin dikha rahi thi to ussne apne ungli ko ahiste se usske panties par ferra aur uss waqt Sanjana ne apne donon jaanghon do ek saath dabaya jiss se chawla sahib ke haath wahin jeise quaid ho gaye. To chawla sahib ne socha ke Sanjana inkaar nahin kar rahi thi ke usska haath uss jagah par ho. Aur dhire se ek shararati Muskaan mein Sanjana ne chawla sahib ke kaan mein kaha, “aap ka haath wahan kia kar raha hai ji?” itna kaha ke Chawla sahib ne jhat se dusre haath se sanjana ki gardan ko apne karib khinchte hue apne honton ko Sanjana ke honton se lagaya. Uss harkat se Sanjana ki jism pura Chawla sahib par agaye to chawla sahib ne Sanjana ko baahon mein bhar liya aur ussne rasile honton ki chusne laga aur Sanjana ne kuch nahin kaha, na kuch kiya. Chawla sahib ne feel kiya ke jahan usske ungli usski panty chuh rahe the thodi se bheeg gayi hai…..

Yeh bahot jaldi, jhat se hua koyi 10 second mein aur tab Sanjana apne honth ko apne haath se ponchte hue zameen par dekhne lagi chehre mein laali ke saath. Chawla sahib ka dil bade zoron se dhadak raha tha magar Sanjana normal thi jeise kuch hua hi nahin, aur tab chawla sahib ka haath baahar ho gaye the kyunke ussne Sanjana ko hold kiya tha apne par lagate hue. Chawla sahib ne uss ungli ko dekha jo bheegi panth par the aur ussko chuss liya Sanjana ko dikhaate hue….. Tab Sanjana ne ahiste se poocha, “aap ne mujhe kiss kyun kiya yahan,” apne honthon ke taraf ungli se dikhate hue.

To chawla sahib ne kaha, “bahot mann kar raha tha tumko weise kiss karne ko, jab se aya hoon, tab se mann kar raha tha balke jiss din se tumko dekha hai tabhi se tumko apne baahon mein bharke weise tumhein chumne ko bada mann kar raha tha. To Sanjana phir apne shararati Muskaan mein boli, “okay ab kar liya nah to buss itna kaafi hai aap ka mann bharra to thik hai.”

Magar chawla sahib bole, “are mann kahan bhara yeh to sirf 10 second mein hi hua main to araam se, ziada lamba wala kiss karna chahta hoon tumhein!”

Sanjana ne muskurate hue kaha, “kyun? Eisa kyun? Main aap ki girlfriend hoon kia ji?” yeh kehkar Sanjana uth khadi hui apne mobile chawla sahib ke haath mein chorr kar. Aur usske opposite wale kursi par jaa baithi unnko dekhte hue aur hansste hue. Kuch chalchalta dikh rahi thi usski adaaon mein uss waqt. Lagta tha ke chawla sahib ko rijha rahi thi ya apne taraf aur bhi aakarshit kiye jaa rahi thi. Eisa chawla sahib ko laga. Chawla sahib ka lund jamke khada ho gaya tha pant ke andar aur unn se raha nahin jaa raha tha, to wo mobile sofe par rakh ke chalte hue Sanjana ke karib gaya.

Sanjana baithi thi, chawla sahib khade the, to zaahir hai ke jab chawla sahib usske karib aaya to usska lund usske pant ke andar Sanjana ko dikh raha tha, aur chawla sahib ek shaitani muskurahat ke saath apne kamar ko aguey karte hue jeise uss lund wale hisse ko Sanjana ke munh ke karib kiya. Lund pant ke andar zaroor tha magar wo form jo dikhta hai kissi ke lund khade hone par who saaf dikh raha tha aur wo Sanjana ke chehre ke bahot karib tha aur sirf agar chawla sahib kamar ko hilata to wo sanajan ke muhn par dab jata.

Sanajan unnko weise dekhte hue hanss pari, “hihihi jayiye aap eise kyun mere paas satke khade ho?” yeh kehkar wo uth kadi hui, aur chawla sahib ne ussko piche se thaama apne baahon mein aur usske kaanon mein bhunbhunaate hue kaha, “khada hoon haan thik kaha tumne khada ho gaya hoon tumne khada kiya, kia chiz ho tum, diwana bana diya hai mujhe tumne pata hai tumko, uss dawraan Chawla sahib apne lund ko pant ke andar se hi Sanjana ke chutron par zor se dabaate hue bol raha tha aur Sanjana unnke lund ko apne jism par achchi tarah se feel kar rahi thi. Sanjana ka chehra laal ho gaya tha aur mehsoos kar rahi thi chawla sahib kia kar rahe hein.

Ussi position mein chawla sahib ko thora apne ghutnon ko thedha karna pada khud ko Sanjana se behtar position mein ragahdne ke liye. Aur Sanjana jhuk gayi jiss tarah se chawla sahib ne ussko jakra tha uss wajah se yaane Chawla sahib ke pressure se ussko jhukna para aur jab jhuki to kehne ki zaroorat nahin ke usski gaand chawla sahib ke lund par ziada dab gaye jiss se chawla sahib ko behad mazaa aya. Eisa laga ke Sanjana unnko position de rahi hai ragadhne ke liye. Kyunke Sanjana kad mein unn se choti thi to chawla sahib ke donon baazu Sanjana ke kaandhe ke upar se hokar usske aaguey peth par se hote hue usski jaanghon par gaye aur ussne Sanjana ki dress ko upar karna chaha. Tab Sanjana ne unnke haath ko thaam liya magar dress thodi si uth hi gayi aur usski jaanghein bahot ziada nazar aaye chawla sahib ko to apne haath ko ussne unn mulaayam jaanghon par ferra, magar jaldi se Sanjana ne unnke haathon ko apne haath mein thaam liya, aur piche mudhkar kaha, “wo dekhiye baahar aap ke car ke paas ab kitne log ekathe ho gaye hein!”

Matlab Sanjana ne situation ko break kiya jiss se wo Chawla sahib ke baahon se nikal gayi aur kuch door khade hokar Chawla sahib ke chehre mein dekhti rahi muskuraate hue, iss baar usski muskurahat kuch sharmilee thi. Aur thoda sa Sanjana kaamp bhi rahi thi chawla sahib ne note kiya.

Wahin koyi 4 kadam ke doorie par khadi Sanjana ne tharrtharaate honton se pucha, “Ek baat batayiye mujhe aap”

To chawla sahib ne kaha, “haan poocho”

Sanjana unnke chehre mein dekhte hue ek lambi sanns lekar poocha, “Aap ne mujhko apne bete ke liye passand kiya nah?”

To chawla sahib ne bhi ek gehri saans liya aur kaha, “keise samjhaun tumhein main, haan tumko ussi ke liye passand kiya, magar ab samajh mein nahin ata kia karun, pyar ho gaya mujhe tumse. Tumhi batao main kia karun ab?”

Sanajan ne kaha, “yeh pyar nahin, vaasna hai!”

Chawla sahib ne kaha, “mera yakeen maanon, mere dil ke gehraayi se tumko chahta hoon raat din mere khayaalon mein rehne lagi ho, sach mein diwana ban gaya hoon tumhara, magar haan jaanta hoon koyi bhi yakeen nahin karega iss baat ko.”

Sanjana ne poocha, “aap ki umar kia hai? Shaayad aap mere papa se bhi bade ho halaan ke dikhta nahin, aap amir log ho to araam se jeete ho iss liye aap young nazar aate ho, aap mazdoori karte to jism kuch aur hote….”

Chawla sahib ne kaha, “are chorro iss umr ki baton ko; mere paas awo nah main tumko bahon mein bharna chahta hoon, apne papa ke ane se pehle mujhe aur pyar karne do tumhein. Kia pata eisa mauka mujhe phir mile nah mile?!”

Sanjana ne kaha, “mauka to bharpoor milega aap ko ab kyunke yeh ghar aap ka hai, papa lagbhag aap ke ghulaam, main aap ke ghulaam ki beti, kaun aap ko yahan ane se rok sakta hai bhala? Aap to jab bhi chaahe aa sakte ho. Mauka bahot milega aap ko to!”

Chawla sahib bola, “to awo nah, mauke ka faeda to uthane do mujhe, tumhare papa kea ne se pehle tumse mann bhar pyar to karun” itna kehte hue wo khud sanja a ke karib gaye aur ussko phir se baahon mein liya. Sanjana sarr niche jhukaaye unnke bahon mein chali gayi apne sar ko unnke chaati se lagaaye.

Chawla sahib ki baahein sajnana ke peeth par ferr rahe the aur Sanjana ne khud apni baahon ko unnke peeth par kar liya aur chawla sahib jhuk kar Sanjana ke honton ko phir se chumna chaha, par Sanjana ne apna chehra ek taraf kar liya aur chawla sahib ne kaha, “ek lamba wala kiss do mujhe iss baar please aur jeeb se kiss karna, apne jeeb ko baahar nikalo zara, innke rass ko chakhne do mujhe.”

Sanjana nah muskura rahi thi nah kuch bol rahi thi, khaamosh thi niche dekhte hue aur kaamp rahi thi uss pal ko. Chawla sahib ne usske kaampte hue jism ko feel kiya aur poocha, “kyun kaamp rahi ho? Darr rahi ho kia?” to Sanjana ne ek lambi saanss lete hue kaha, “pata nahin kyun. Eise haalat se nahin guzri hoon shaayad iss liye, ya kuch aur baat hai jo khud nahin samjh rahi hoon”

To Chawla sahib ne kaha, chalo ek guddy guddy kiss karo mujhe phir dekhna kaampna ruk jaega. Aur ussne Sanjana ki thudi ko apne hath se uthaate hue usske muhn ko apne munh se lagaya aur apne jeeb ko Sanjana ke munh ke andar daalne ki koshish kiya, magar shuru mein Sanjana munh nahin khol rahi thi to chawla saab ne dhire se kaha, “munh to kholo nah, chakhne do mujhe apne raseele lazatdaar rass ko please dear.”

Sanjana ne apne gardan ko upar kiya aur ahiste ahiste munh ko khola aur chawla sahib ke jeeb usske munh ke andar gaye aur donon ek dusre ko kiss karne lage…. Do minat tak weise rahe, chawla sahib uss kiss ka aanand le rahe the aur ussne note kiya ke Sanjana ne bhi apne jeeb chalaye usske muhn ke andar, fir 2 minat ke baad ruke, phir turant kiss kiye iss bar 4 minat tak. Sanjana ne chawla sahib ke jeeb ko chussa iss baar enkhen mundhte hue, magar chawla sahib ne enkhen khole rakha Sanjana ke chehre mein dekhte hue ke kiss tarah araam se Sanjana unnko kiss kar rahi thi. Fir ek pal ke liye ruke, aur phir se kiss kiye iss baar 5 minat se ziada chawla sahib ne Sanjana ke munh ka rass nichora aur Sanjana ne bhi chawla sahib ke munh ka rass piya. Kiss ke dawraan dono ek dusre se bilkool chipke hue the jeise do purana aashik kiss kar rahe hon! Sanjana ka badan bilkkol chawla sahib ke jism se chipki hui thi, usski boobs unnke chati par kuchal rahe the aur Chawla sahib ke donon haath Sanjana ke chuton ko massal rahe the phir bhi Sanjana kiss mein doobi rahi. Chawla sahib ne note kiya ke iss baar to Sanjana ne apne chutron ko massalne diye pehli baar ki tarah jhatak ke roka to nahin.

Aur chawla sahib ne yeh bhi note kiya ke Sanjana behtareen kisser hai. Bahot behtareen tarike se kiss kiya. To chawla sahib ne socha yeh ladki pehle bhi kiss kar chuke hai, isske boyfriend ne khub kiss kiya hua ussko. Chawla sahib ko pakka yakeen ho gaya ke yeh Sanjana ki pehli kiss to nahin ho sakta.

Kiss ke baad dhire dhire donon ek dusre ke baahon se alag hue, aur donon sofe par baithe. To chawla sahib ne kaha, “dekha kuch bhi to nahin hua aur tumhara kaampna bhi band ho gaya.” Aur chawla sahib ne muskuraate hue kaha, “Hey tum to bahot achcha kiss karti ho, mazaa agaya mujhe, lagta hai experience hai tumhein hmm? Bolo?!” Sanjana hanssi aur kaha, “nahin iss mein experience ki kia baat hai, yeh to naturally ho gaya, apne aap eisa hua mujhe to samajh mein nahin aaya main ne to wohi kiya jo aap kar rahe the, shuru mein main nahin samajh paa rahi thi ke kia karun, phir aap ne mere jeeb chussna shuru kiya, to dusri baar main ne aap ki jeeb chussa phir ek dusre ko veisa hi karte gaye, buss apne aap ho gaya.”

Aur chawla sahib ne dhire se usske kaanon mein kaha, “ab apne chaati par se dress ke yeh do pehle wale button kholo nah please.” Sanjana ne nakhrein wali ada mein kaha, “nahin.” Chawla sahib ne insist kiya phir bhi hansste hue Sanjana ne kaha nahin. To chawla sahib ne kaha, uss raat ko chat karte waqt to khola tha tumne!” To Sanjana ne kaha, “uss waqt aap saamne nahin the, door the mujhse, aaj mere paas baithe ho!” chawla sahib bola, “hmm tease karti ho mujhe hein, chalo main khud kholta hoon” yeh kehkar Chawla sahib ke donon haath usski chaati par gaye aur usski button ko kholne lage, magar Sanjana jhat se uth kadi hui aur hansste hue unnko apne jeeb se cherrte hue aguey wale darwaza ko khol kar baahar chali gayi aur jaate jaate apna Thenga dikhaya chawla sahib ko!

Chawla sahib ne kaha, ‘yeh to mujhko tarpa rahi hai jaan boojh kar lagta hai. Baahar chali gayi jahan se sab logon ko sab nazar aega, wahan to main ussko chuh bhi nahin sakta, ab kab andar aegi? Ab kia karun main?!’

Chawla sahib bhi baahar nikle aur zor se unn logon se kaha, “khabardaar agar meri gaadi ko ek kharoch bhi aayi to! Door raho sab meri car se!”

Aur Sanjana zor se hanssi. Phir mudhkar chawla sahib ko dekhte hue apni jeeb se unnko chirrhaate gaye.

Aur kuch der baad wahin se nazar aya ke Anand, Sanjana ke papa car ke paas ghar ke taraf aate hue. Sanjana ne apne daanton ko dabate hue dhire se kaha, “papa aa rahe hein aap koyi eisi veisi baat mat karna, sshhhh!! Bilkool chup! Okay samjhe aap?”

To be continued…………………
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11-22-2019, 12:00 PM,
#10
RE: Parivaar Mai Chudai अँधा प्यार या अंधी वासना
Anand ji andar aye, chawla sahib se mile, aur teenon andar sofe par baithe. Anand ji Sanjana ko kuch ajeeb nazron se dekh raha tha jeise ussko kuch shikaayat hai uss se. Aur Sanjana apne papa se jeise nazrein chura rahi thi. Chawla sahib ne note kiya ke jeise baap beti ek dusre se khaffa hein, to wo sochne laga ke shaayad Sanjana ne apne baap ko majbooran ya zabardasti se manwaya hai aur iss baare mein to bilkool bhi baat nahin kiya unhon ne Sanjana se ke keise usske pita raazi ho gaye jab pehle inkaar kiya tha. To unnhon ne Sanjana ke taraf dekhte hue kaha, apne papa kke liye kuch khaane pine ke liye lao to. Tab Sanjana ne apne papa ko dekhte hue muskurakar kaha, “kuch lenge aap papa?” iss se pehle ke anand ji kuch kehta chawla sahib ne kaha, “are puch kyun rahi ho, wo kaam se thake hare aaye hein tumko kuch serve karna chahiye bina puche!”

Tab Sanjana ke baap ne Sanjana ko pehle dekhte kaha, “nahin nahin kuch bhi nahin, phir Chawla sahib se kaha, “nahin ussko pata hai ke main wapas aakar kuch nahin leta naha dho kar baahar jata hoon.” Aur turant Sanjana ne baat jodhte hue jeise daante hue kaha, “haan pine jaenge Raghu ke yahan to abhi keise kuch lenge!” aur Anand ne kaha, “are haan Chawla ji ek ek peg ho jaaye? Main abhi Raghu ke yahan se lekar aata hoon!” chawla sahib jawaab dene hi wale the ke anand khada ho gaya phir se nikalne ke liye aur Sanjana ne kuch naraazgi dikhate hue kaha, “lo ab aap donon piyenge to koyi kaam ki baat nahin ho paaegi! Nahin papa yeh sahib aap ke desi daru nahin piyenge mere khayal se!”

Magar Chawla sahib chahta tha ke wo baahar jaein taake wo Sanjana ke saath aur kuch der akele reh paaye. Unnko uss waqt daaru ki nahin pari thi ke wo desi ho ya kuch aur unnko to sirf Sanjana ki akeli hone se matlab tha. Aur Sanjana ke pita yeh kehte hue nikle ek chotha sa baksa lekar, “tu kia jaane Sanju ke peene se baatein aur bhi majedaar hote hein!” to Sanjana ne ghussa dikhate hue apne papa ko teerchi nazar se dekhte hue kaha, “sab pata hai mujhe aap ko pine ke liye bahana jo mil gaya, khabardaar agar peekar aaye to, aur jaldi ana wahan pine mat baith jana!”

Anand ji hansste hue chale gaye to Chawla sahib ne jhat se piche se sanjana ko jakarte hue kaha, “main to bahot khush hoon ke wo phir jaa rahaa hai tum kyun ussko rok rahe ho, are mujhko to tumhare saath waqt bitana hai, samjha karo!” apne peeth par satte hue chawla ji ko Sanjana ne usske baazu ko apne chaati par thaame hue kaha, “haan jaanti hoon aap mauke ka bharpur faeda uthana chahte ho, jao main aap se baat nahin karti ab” aur munh phula kar unnke jakar se nikal kar ek koney mein khadi ho gayi! Baahar ek halki si baarish ki boondein khirki ki shishe par tapke to chawla sahib ne Sanjana ke taraf badhte hue kaha,

“kyun hum se khaffa ho gaye ey jane tamannah

Bheege hue mawsam ka mazaa kyun nahin lete”

To Sanjana ne muskurate hue kaha, “achcha aap ko sher o shayiri bhi aati hai?”

Chawla sahib ne kaha, “Are nahin yeh to ek purani geet hai!” aur Sanjana ko saamne se baahon mein zor se jakra aur apne honton ko usske chehre par ferrne laga. Sanjana ko gardan upar karna para jiss tarah se aur jiss position mein sahib ne ussko thaama tha, aur tab chawla sahib ka munh usski cleavage par gaye aur unnke jeeb Sanjana ke boob ke dikhte hue hisse par ferre, uss se Sanjana ka jism tharthara gayi aur usske gale se ek sisak nikli, aur uff karte hue wo phir se Chawla sahib ke chungal se nikalte hue kaha, “aaj ke liye itna kaafi hai aap ne bahot hi faeda uthaya aaj mera” aur hanssne lagi. Magar uss waqt ek dusre ke haath thaame hue the, balke Sanjana ne Chawla sahib ke donon haath apne haathon mein liye hue the aur unnke jakar se baahar thi. Donon khade the to chawla sahib ne kaha, “haan tumne yeh baat to bataya hi nahin ke pehle tumhara dad mana kar rahe the to keise tumne manaya unnko? Batao mujhe.” Yeh puchte waqt chawla sahib ki nazrein Sanjana ke boobs par the jeise wo nazron se usski measurement le rahe ho.

Sanjana ek do kadam chalte hue unn ka haath thaame hi jawab diya, “bahot kuch puch liya aap ne, bahot lambi discussion ke baad wo meri baat ko samjhe aur maane, yeh main aap ko kissi aur din samjhaungi, abhi wo time nahin aaya ke wo sab bataun aap ko.” Aur khilkhilaati hui kaha, “bahot lambi kahani hai ji, shayab aap tab sab jaankar naraaz honge ya to phir ziada khush bhi honge. Abhi aap ko utna nahin jaan paayi hoon ke bata sakun ke aap khush honge ya khaffa magar aap ki aashikana mizaaj dekhkar sochti hoon ke aap khush honge!”

Chawla sahib Sanjana ko kuch heyraan nazron se dekhte hue aur sochte hue kaha, “eisi kia baat hui ke abhi nahin bata sakti ho? Kuch hayraan kar deti ho kabhi tum mujhe. Khair tum jaanon ke kia baat hui hai magar chorro mujhe to tumse matlab hai nah, aao aur ek kissy do mujhe hmmm” itna kehte hi chawla sahib ne phir khade hi position mein Sanjana ke munh ko apne munh mein le liye aur Sanjana rok nahin paayi aur ek lambi kiss mein kho gaye donon, uss dawraan kehne ki zaroorat nahin hai ke chawla sahib ke donon haath Sanjana ke chutron par phir se ussko massalte hue apne lund par zor se dabaate hue ragadhte jaa rahe the aur kamar ko bhi hillate hue apne jism ko Sanjana ke jism par daba kar jeise khade position mein chod raha tha…… aur apne ek haath ko usski panti ke andar bhi kiya thik choot ke upar aur ek ungli se wahan massla to bheegi si mehsoos bhi kiya… Sanjana ki choti dress jaanghon ke bilkol upar uth gaye the jiss se usski jaanghen kafi ziada dikhne lage the aur panty bhi nazar ane lage the, aur chawla sahib ki enkhen khule the kiss karte waqt Sanjana ke jism ke uss hisse ko dekhne ke liye.

Uss lambi kiss ke baad Sanjana ne halke se dhakke dete hue unn se door hui ek lambi saanss lete hue aur hanffte hue kaha, “uff aap bhi nah, kitni der tak kiss karte ho, mera saanss phul gaya!” chawla sahib ek shaitani muskurahat mein kaha, “kiss to tum mujhe kar rahi thi jaaneman, main ne to sirf apne jeeb ko tumhare munh mein dala tha, wo to tum mere jeeb ke rass noichorr rahi thi hehehe”

Aur yeh sunkar Sanjana jeise sharmaa si gayi aur chehre par laali ke saath kaha, “hmm mujhe kia pata, main bhi kiss hi to kar rahi thi, aap ke haath bahot daudte hein mere jism par mujhe khayal hi nahin raha ke main kiss kar rahi thi ya aap, mere tawajuh aap ke haathon par ziada the ke aap mujhko kahan chhuh rahe ho…..”

Uss ungli ko jo chawla sahib ne usski bheege hue choot par masla tha wo Sanjana ko dikhaate hue chawla sahib ne uss ungli ko chussa. Aur Sanjana bilkkol laal ho gayi aur ek taraf dekhne lagi. Tab Chawla sahib ne Sanjana ka ek haath pakra aur apne taraf halke se khiincha, aur Sanjana usske chehre mein dekhte hue kaha, “hmm ab kia hai ji?” to Chawla sahib ne Sanjana ke uss haath ko apne pant ke upar apne sex par dabaya! Sanajana apne haath ko khich rahi thi usske tanne hue lund ko pant ke andar dekhte hue, jaise ke usska haath kissi gandi chiz par jaa rahi ho, wo expression de rahi thi Sanjana ka chehra uss waqt phir bhi chawla sahib kaamyab hue usska haath apne lund ke upar dabaane ko magar sirf kuch pal ke liye kyunke Sanjana ne jhat se apne haath khinch liya aur do kadam piche jaate hue kaha, “ bataiye, apne hone wali bahu ke saath koyi yeh sab bhi karta hai kia?” yeh kehkar wo hanss pari. Aur chawla sahib ne muskurate hue kaha, Tum bheeg gayi ho matla tumhara bhi mann kar raha hai, hai nah?” aur Sanjana niche dekhte hue kuch kaampte awaaz mein dhire se kaha, “aap jiss tarah aur jinn jagaon par mujhko chhuh rahe to bheegungi nahin bhala?” phir chawla sahib ne pucha, “to batao banogi meri bahu? Yeh teesri baar puch raha hoon tumse”

Sanjana bhi muskura rahi thi aur apne niche wale hoth ko apne danton mein dabaate hue kaha, “to aap kiss liye aaye ho? Yehi baat tey karne nah mere papa se baat karke?”

Aur phir se chawla sahib ne sanjana ko apne baahon mein bharte hue kaha, “samajh mein nahin araha ke ab main kia karun, aur kia kahun tumhare papa se” aur apne honton ko Sanjana ke gaalon par ferrne laga ussko seene se dabaate hue. Aur Sanjana ne kaha, buss ab chorrye mujhe papa aate hi honge….”

Aur sach mein Anand ji aaye apne sar se paani jhatakte hue kyunke baahar thodi baarish hone lagi thi. Aate hi wo muskuraate hue chawla sahib ke karib gaye aur dhire se kaha, “desi peene ka kuch alag hi mazaa hai sahib kuch hamare saath aaj cheers karlo”

Sanjana khade donon ko dekh rahi thi magar usski nazrein ziada Chawla sahib par the aur jeise ek khayal mein khoye hue dekh rahi thi Chawla sahib ko. Chawla sahib ne note kiya ke kiss andaaz se Sanjana ussko dekh rahi thi. Donon ke dil dhadak rahe the magar Anand ke saamne ajnabee jeise behave karna tha.

Koyi 15 minat baad donon mardon ne thoda pee liye the aur Sanjana ne pakoda padossa unnko, wo kitchen se ate jaate dikhaayi de rahi thi. Jab bhi aati to donon eise weise idhar udhar ke batein kar rahe hote, to Sanjana ne ek baar aakar khaffa hone ki awaaz mein kaha,

“jo baat karni hai wo to tum donon kar hi nahin rahe, pee rahe ho aur masti kiye jaa rahe ho aap log!”

To usske baap ne ussko paas baithne ko kaha aur usske sar par haath pherrte hue kaha, “ab tujhe badi jaldi hai paraya hone ki? Hmm?” aur chawla sahib ke taraf dekhte hue kaha, “maalik, yehi meri sab kuch hai, issko door karne ka bilkool mann nahin hai mera issi liye uss din inkaar kiya tha main ne, bilkool akela ho jaunga isske bina, sochkar darr lagta hai mujhe. Magar issko yakeen hai ke aap ke ghar mein yeh rani banke rahegi issi liye mujhko manaya issne ke main haan kahun.”

Chawla sahib ne kaha, “bilkool sahi kaha aap ki bitiya ne of course rani banke rahegi mere ghar mein iss mein koyi shak hai bhala?” Sanjana unnko dekh kar muskuraye jaa rahi thi aur kabhi apne papa ko dekhti aur thoda udaas ho rahi thi.

Anand ji ne kaha, “to baat pakki karne ki Khushi mein yeh ek peg aur Maalik, cheers!! Meri Sanjana aap ki hui Maalik.” Yeh sunkar chawla sahib ne dil mein kaha, “meri keise nahin hogi, yeh to meri ho chuki hai… aur udhar Sanjana ne bhi apne papa ki uss baat ko sunkar dil hi dil mein keh rahi thi muskurate hue ’main to innki ki kab ke ho chuki hoon papa, aap ko nahin pata’….. phir Sanjana ne enkhen churate hue ek nazar chawla sahib ko dekha aur muskura diye, aur chawla sahib ne bhi ussi waqt Sanjana ko dekhte hue ek sip le raha tha desi tharra ka….. to Sanjana ne kaha, “aap ko drive karni hai buss kijiye aur mat pijiye”

Yeh sunkar Anand ji ne kaha; “Aap batao ke ab kab keise hoga? Ek mangni vaghaira to hona chahiye nah? Aap ke bete ko dekha bhi nahin hai main ne aur bina dekhe haan keh diya, yakeen hai aap par ke aap ka beta bilkool aap ki tarah hi hoga.”

Ab yeh baat sunkar donon Sanjana aur Chawla sahib ke chehre se rang udh gaye ek dusre ke taraf dekhte hue!! Sanjana wait kar rahi thi ke ab chawla sahib kia jawaab denge. Aur chawla sahib soch mein par gaya ke ab kia kahein!

To Sanjana ne kaha, “Aap apne family ke saath kissi din aayiye hamare yahan main aap ke bete ko dekhna chahti hoon, aur aap ki ek aur bahu hai nah? Unn se bhi to milna hai mujhe.” Yeh baat kehkar jeise Sanjana ne chawla sahib ki kaam asaan kar diya aur ussne kaha,

“haan yeh bhi thik hai magar kia directly ek sagaayi nahin ho sakta jiss din hum log yahan aaye?”

To Sanjana ke papa ne kaha, “haan bilkol veisa hi hoga. Aap buss date batayiye main tayaari kar lunga. Agle hafte thik rahega kia?”

Chawla sahib ne kaha, “Aap ko kuch nahin karna hai main sab bandobasht kar lunga, sari zimedaari meri, main pure farmhouse ko sajwa dunga apne aadmiyon ko bhej kar aap ko ek bhi paisa nahin istemaal karna hai, sab kuch mere taraf se hi hoga. Kuch paise bhi bhejwa dunga sabhi samaan ke liye jiski zaroorat padegi uss mawke ke liye. Saare gaon walo ko amantrit karna aur uss gaon walon ko bhi bulana jahan mera haveli hua karta tha.”

Anaand ji khush hue aur Sanjana muskuraye jaa rahi thi. Tab chawla sahib ne kaha, “magar ek baat hai Anand; main kuch der Sanjana se apne ghar ke baare mein baat karna chahta hoon ke hum log keise rehte hein, hamara jeena yahan gaon ke jeene ke tarike se to alag hai nah bhai? To dekho baarish bhi tham gaya main Sanjana ko ek drive par lejata hoon, gaon bhi ghum lenge aur main uss se baat bhi kar lunga tum peena jaari rakho kyun thik hai nah?”

Sanjana samajh gayi ke chawla sahib phir uss ke saath akele hona chahte hein aur muskurate hue kaha, “drive par iss gaon mein kidhar jaenge bhala? kahan eisi jagah hai idhar?” Chawla sahib Sanjana ko ek enkh maarte hue kaha, “are bahot dinon se uss pahaadh ke taraf nahin gaya hoon udhar jaane ko mann tha chalo nah thoda ghum ke ayenge tumhara bhi mann behel jaega.”

Anand ji ne thode nashiley awaaz mein kaha, “haan beti jao, jao ghum aao gaadi mein maalik ke saath.”

Sanjana ko pata tha ke wo pahaadi ilaka bilkool sunsaan jagah hai jahan chawla ji use lekar jana chahte heijn, ussne socha, ‘lo ab phir mujhko jakreeinguey yeh issi liye mujhe udhar leja rahe hei, uff!”

To be continued…………….
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