Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
08-27-2019, 01:27 PM,
#31
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
मतलब रामू काका भी उसका इंतजार कर रहे थे और एक रवि है जो कि उसके पहले ही सो जाता है
आरती ने धीरे से दरवाजे को ढकेल दिया और
रामू काका के पास चली गयी।
रामु काका ने उसको खिंच कर अपने करीब बैठा लिया
रामू---- बहु रानी डर नही लगा दिन में सोनल ने भी देख लिया था तब भी।
‌आरती क्या कहती कि उससे अब चुदाई बिना नही रहा जाता। उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थी आज का कदम उसे कहाँ ले जाएगा वो नहीं जानती थी हाँ एक बात वो जरूर जानती थी कि वो अपने तन की भूख के आगे झुक गई है और वो उसे शांत करने के लिए अब कोई भी कदम उठा सकती है उसके बिस्तर के पास बैठेते ही रामू अपने आप ही उठकर बैठ गया और एक हाथ से उसने आरती के घुटनों को पकड़कर उसे थोड़ा सा और पास खींचा आरती को तो कोई दिक्कत ही नहीं थी वो और आगे हो गई वो लगभग अब रामु काका के बिस्तर पर ही पड़ी थी। रामू अब धीरे-धीरे आरती के रूप के दर्शन करने के मूड में थे आज पहली बार आरती उसके कमरे में बिना बुलाए आई है वो जानते थे कि आरती को क्या चाहिए और वो भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार थे जब आरती ने खाने के बाद उससे पूछा था कि जल्दी सो जाते है क्या तभी से अपने अंदर की आग को किसी तरह से अपने में समेटे हुए थे और जब आरती उसके पास लेटी थी तो वो कहाँ रुकने वाले थे अपने हाथों से आरती के गाउनके ऊपर से ही उसके टांगों को अपने हाथों से सहलाते हुए उस डिमलाइट में आरती की ओर देख रहे थे।
रामु ने जैसे ही आरती को अपने गोद में पाया वो कुछ करता पर एक ही धक्के में वो नीचे गिर पड़ा और आरती को अपने ऊपर अपने लण्ड पर सवार होते हुए देखता रहा आरती की उत्तेजना इतनी थी, कि वो इस इंतजार मे भी नहीं थी कि रामू काका उसके अंदर समाए इससे पहले ही उसने अपने को थोड़ा सा ऊपर उठाया और अपनी चुत को खोलकर उसके मोटे से लण्ड को अपने अंदर उतार लिया।
बाहर आरती का ये रूप देख कर दो जोड़ी आंखे भी हैरान थी, यहा आरति खुद चुद रही थी।

वो धीरे धीरे उसके लण्ड पर बैठने लगी गीले पन के होते हुए लण्ड बड़े ही आराम से उसके अंदर समा गया आरती के मुख से एक लंबी सी सिसकारी निकली और वो धम्म से रामू काका के ऊपर गिर पड़ी जैसे जो उसे चाहिए था वो तो अब उसके अंदर है अब कौन उससे अलग करेगा वो थोड़ा सा रुकी

पर रामू काका तो तुरंत ही अपने मिशन में लग गये थे धीरे-धीरे अपनी कमर को उचका कर अपने लण्ड को आरती की चुत में अड्जस्ट करने लगे थे आरती भी थोड़ा सा हिल कर अपने आपको उसके साथ ही अड्जस्ट करती हुई उनके शरीर को फिर से पानी बाहों में भरने को कोशिश करती जा रही थी

रामू भी अपनी बाहों को घुमाकर आरती को अपने सीने से लगाए धीरे-धीरे नीचे से धक्के लगाता जा रहा था पर वो जानता था कि वो ज्यादा देर का मेहमान नहीं है क्यों कि जो हरकत आज आरति ने उसके साथ की है अगर वो किसी के साथ करे तो कोई भी आदमी आरति की चुत तक पहुँचने से पहले ही ढेर हो जाएगा वो उन आँखो को भूल नहीं पाया था जो कि उसके लण्ड को चूसते हुए आरती की थी वो नीचे पड़े हुए आरती को अपने बाहों में भरे हुए जोर-जोर से धक्कों को अंजाम दे रहा था और अपने मुकाम की ओर बढ़ रहा था

और आरती अभी अपने अंदर उठ रहे तुफ्फान को धीरे-धीरे थामने की कोशिश में लगी थी पर रामू काका के धक्के इतने जोर दार थे कि वो जितना भी काका को जोर से जकड़े, हर धक्के में वो छूट जाते थे लण्ड अंदर बहूत अंदर तक पहुँच जाता था और उसके अगले कदम के नजदीक ले जाता था वो किसी तरह से अपने को हर धक्के के साथ फिर से एडजस्ट करने की कोशिश करती पर ना जाने क्यों उसने अचानक ही काका को छोड़ कर सीधी उनके लण्ड पर ही बैठ गई अब वो सीधी हर धक्के में ऊपर उछलती और फिर नीचे बैठ जाती,

उसके उछलने से जो नजर रामू देख सकता था वो शायद कामदेव को भी नसीब नहीं हुआ होगा रामू हर धक्कों के साथ ही आरती की उछलती हुई चुचियों को भी अपनी हथेलियो में कस कर निचोड़ता जा रहा था और अपनी गति को भी नहीं धीमा किया था

आरती भी हर धक्के के साथ ही अपनी सीमा को पार करती जा रही थी और काका के कसाव के आगे अपने शरीर में उठने वाली उमंग को अपने शिखर तक पहुँचाने में लगी हुई थी वो निरंतर अपने को रामू काका के हाथों के सहारे छोड़ कर उछलती जा रही थी और अचानक ही अपने अंदर आए उफ्फान के आगे उसका शरीर निश्चल सा हो गया और सांसों को कंट्रोल करते हुए उसका शरीर भी काका के दोनों हाथों के आगे झुक गया

दोनों हाथों के आगे मतलब चुचियों को कसे हुए रामू के दोनों हाथों के आगे आरती को लटके हुए देखता हुआ रामू अब भी, आरती को जोर दार तरीके से निचोड़ता जा रहा था वो भी, अपने आखिरी चरम पर था पर जैसे लगता था कि वो अपना पूरा दिन का गुस्सा आज आरती को निचोड़ कर ही निकाल देना चाहता था सो वो कर रहा था वो भी अपने शरीर की हर इंद्रियो को अपने लण्ड की ओर जाते हुए महसूस करता जा रहा था और ढेर सारा वीर्य उसके लण्ड से चूत पर आरती के अंदर और अंदर तक पहुँच गया

उसकी गिरफ़्त थोड़ी ढीली हुई और आरती धम्म से उसके ऊपर ढेर हो गई रामू की कमर अब भी चल रही थी वो अपनी आख़िरी बूँद को भी निचोड़ कर आरती के अंदर तक उतार देना चाहता था सो वो कर रहा था अपनी दोनों बाहों को उसने आरती के चारो ओर मजबूती से घेर रखा था और धीरे-धीरे वो और भी मजबूत होती जा रही थी

अब दोनों शांत हो गये थे दोनों एकदूसरे के पूरक बन गये थे और शांत थे सांसें गिन रहे थे या फिर एक दूसरे के छोड़ने का इंतजार कर रहे थे कोई नहीं जानता था पर दोनों वैसे ही बहुत देर तक लेटे रहे एक दूसरे के ऊपर और फिर धीरे से रामू ने आरती को हिलाया
रामू- बहू
आरती- उूउउम्म्म्मम
रामू- उठो हहुउऊउउ
आरती भी थोड़ा सा हिली और अपने को रामू से अलग करने लगी वो आज वाकाई बहुत थक चुकी थी।
बाहर से देख रही वो आंखे जा चुकी थी,

किसी तरह से खड़ी हुई और अपनी पैंटी को ढुड़ने लगी पर वो कही नहीं दिखी सो अपनी गाउनको उठाकर रामू काका की ओर पीठ कर उसे अपने सिर के ऊपर से डालकर पहन लिया और धीरे से गाउनको नीचे ले जाते हुए उठ खड़ी हुई और एक बार रामू काका की ओर देखा और मुड़कर बाहर जाने लगी,
रामु--- बहु सोनल का क्या करना है।
आरती-- क्या करना है मतलब?
रामू---- अगर उसने साहब को बता दिया तो ,
आरती---कुछ सोचती हूं मैं।
और कमरे से बाहर निकल गयी।

उसके कदम ठीक से नहीं पड़ रहे थे बहुत ही थकान लग रहा था पर एक तरंग उसके शरीर में थी जो उसे और भी मदहोशी के आलम की ओर ले जा रही थी वो किसी तरह से कमरे से बाहर निकली और सीढ़िया उतरती हुई अपने कमरे में आ गई कमरे में रवि अब भी सो रहा था आरती बाथरूम में गई और अपने को साफ करके वापस रवि के पास आके
सो गई थकान के चलते वो कब सो गई उसे पता नहीं चला हाँ… सुबह जब रवि ने उसे उठाया तो 10 बज चुके थे
रवि उसके लिए चाय कमरे में ही ले आया था आरती चाय पीते हुए अपने पति को तैयार होते देख रही थी वो अब भी बेड पर ही थी

रवि- क्या बात है बहुत देर तक सोई कल रात को नींद नहीं आई क्या

आरती- हाँ…

रवि- रात को कहाँ गई थी

आरती- मुह की च्याय बहार आकर गिरी
उसके सिर पर जैसे आसमान गिर गया हो चेहरा सफेद हो गया था जब रवि ने उससे पूछा ।
रवि ने घबराते देख खुद ही जवाब दिया
रवि- टीवी देख रही थी क्या

आरती- हाँ… नींद नहीं आ रही थी इसलिए

रवि- इसलिए तो कहता हूँ थोड़ा सा घर के बाहर निकलो घर में पड़ी पड़ी बोर भी हो जाती हो और कोई एक्सर्साइज भी नहीं तो थकान कहाँ से होगी

आरती- जी
पर आरती के दिमाग़ में वो बात घूम रही थी कि कल रात को जो उसने किया था अगर रवि बाहर निकलकर उसको ढूँढता तो .........आरति की जान निकल जाती है सोचकर।
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08-27-2019, 01:28 PM,
#32
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
रवि---- आज तुम मेरे साथ चलो शोरूम।
आरती--- शोरूम? मैं क्या करुँगी शोरुम,?
रवि--- अरे चलो तो सही,
आरती--- आज नही कल चलूंगी।
रवि--- जैसी तुम्हारी मर्जी।
फिर दोनों नीचे आ जाते है और डाइनिंग टेबल पर नास्ता करने लगते है, सोनल अभी उठी नही थी।
रवि नास्ता करके बाहर निकल जाता है, उसकी कोई कॉल आयी हुई थी,
इस बात से अनजान की सोनल उठ कर वही गार्डन में है,
हां विनोद, मैंने मोनिका से बात कर ली है, और वो तैयार है. तुम शोरूम के पीछे वाले फ्लैट में पहुँचो और मैं मोनिका को लेकर आता हूँ…….अरे आरती की चिंता मत करो, वो अंदर है.’ रवि विनोद (आरती के भाई) से बात कर रहे थे. सोनल गलती से उनकी बाते सुन ली थी, पर सोनल को ये समझ नहीं आ रहा था की पापा मोनिका को लेकर क्यूँ जा रहे हे. सोनल ने उनके पीछे जाने का तय किया.
रवि अंदर जाकर आरती को बोलकर कार ले कर निकलता है, उससे पहले ही सोनल बाहर जाकर ऑटो कर लेती है और कार का पीछा करती है,
रवि अगले मोड़ पर कार को रोकता है तो सोनल देखती है कि सर् को दुप्पटे से बिल्कुल ढके एक लड़की कार में सवार होती है

सोनल को कुछ गलत लगा, वैसे उसने कभी अपने पापा के बारे में गलत नहीं सोचा की वो गलत काम कर सकते है, सोनल अपने पापा जैसा ही अपना पति चाहती थी, काफी मासूम और सीधासाधा. वो चाहने लगी थी अपने पापा को,
रवि ने मोनिका को कार में पीछे बिठाया और फ्लैट के रस्ते की ओर चले गए, सोनल भी ऑटो में उनके पीछे पीछे चल पडी. वो कार में थे तो आसानी से पहुँच गए पर सोनल ऑटो से जा रही थी, सोनल पीछा तो नहीं कर सकती थी पर उसे रास्ता पता था. करीब आधे घंटे बाद सोनल वहां पर पहुँची, सोनल ने ऑटो वाले का किराया चुका कर फ्लैट की तरफ गयी। और फ्लैट के पास पहुची। फ्लैट का दरवाजा लॉक था अंदर से , सोनल को कोई रास्ता नही मिला तो सोनल बैक साइड पहुँचि, वहा बैक साइड में छोटी सी दीवार थी उसके कूदने के बाद एक और बैक डोर था। सोनल वो दीवार फांद कर अंदर गयी और डोर चेक किया । किस्मत से डोर ओपन था, सोनल धीरे से अंदर दाखिल हुईं,

फिर उसे अंदर से अजीब आवाज़ सुनाई दी, सोनल अंदर हाल में आ गयी, वैसे वैसे आवाज़ तेज़ होती गयी. उसे आसानी से पता चल गया की ये आवाज़ चुदवाने की है और धीरे धीरे उसने मोनिका की आवाज़ को पहचान लिया. एक मिनट के लिए सोनल रूक गयी, की कहीं वो गलत तो नहीं कर रही, अगर पापा को पता चल गया तो क्या होगा.

पर फिर सोचा की शायद विनोद मामा मोनिका को चोद रहे हो और पापा सिर्फ उसे छोड़ने आये हो तो..ये सोचकर सोनल फिर से दरवाजे की तरफ़ आगे चली. आगे चलते ही उसने डोर ओपन दिखा और पीछे हट गयी फिर उस ने इधर उधर देखा कि कैसे देखूं कि पापा को पता ना चले.

उसने दूसरी तरफ एक रोशन दान दिखा, सोनल वहा पहुची और देखा वहा कपड़ो की गठरियां पड़ी है, सोनल उनपर चढ़कर रोशनदान तक पहुच गयी। अब फिर सोनल ने ऊपर हो कर देखा तो मोनिका कुत्ते की स्टाइल में थी और रवि मोनिका को जमकर चोद रहे थे..रवि और निशा पूरे नंगे थे. सोनल ने कभी आपमे पापा को ऐसे नहीं देखा था.

सोनल अपने पापा को और पापा के लंड को देखकर हैरान हो गयी..रवि जबरदस्त दम लगाकर मोनिका को चोद रहे थे, मोनिका की जांघे लाल लाल हो गयी थी मतलब रवि उसे आधे घंटे से चोद रहे था. रवि ने उसके बालों को पकड़ के रक्खा था उसका सर भी पीछे खींचकर रक्खा था और वो कुतिया की तरह चुदवा रही थी. सोनल एक दम सुन्न हो गयी थी.

‘विनोद..तुम भाई अगली बार से मत आना, तुम कुछ करते नहीं हो और बस बैठ के देखते रहते हो..क्यूँ मोनिका.’ रवि ने मोनिका को धक्के मारते हुए कहा.

‘ह ह…ह ह्ह्ह्ह…हां साहब जी.’ मोनिका की जबान लडखडा रही थी, वो काफी थक गयी थी. रवि रूकने का नाम नहीं ले रहे था. रवि के पाँव के थपेड़ो की आवाज़, ऊपर से मोनिका की जबरदस्त चुदाई की आवाज़ सुनकर सोनल की चूत भी गीली हो गयी. पता ही नहीं चला कब सोनल का हाथ उसकी अपनी चूत पर चला गया.

सोनल उन दोनों को देखकर जीन्स के ऊपर से ही अपनी चूत मसलने लगी. मोनिका कुतिया की तरह झुकी हुई थी और उसने अपने दोनों हाथ मेज पर लगा कर रक्खे थे. रवि के लंड के धक्के इतने जोरदार थे कि उसकी छाती मेज से टकरा रही थी. सोनल ने देखा की मोनिका मेज को मुट्ठी में लेने की कोशिश कर रही थी, सोनल का अंदाज़ा सही था वो अब झाड़ने वाली थी.
और सोनल के मन में आया ही था की एकदम से वो ढीली हो गयी और उसकी चूत का पानी निकल गया और वो नीचे गिर गयी. रवि का लंड बहार आ गया.सोनल ने देखा सच में उसके पापा का लंड रामू से कम नहीं था. सोनल तो उसे देखते ही पागल हो गयी. और उसे ही देखती रही. फिर रवि ने मोनिका को उठाया और आराम से बिठाया.

मोनिका भी समझ गयी और अपने घुटनों पर बैठ कर रवि के लंड को हिलाने लगी. रवि ने झट से लंड उसके मूंह में डाल दिया और उसके मूंह को चोदने लगे..बेचारी मोनिका..सोनल उसकी हालत समझ रही थी वो काफी थक गयी थी. उधर विनोद मामा बस देखे जा रहे थे. फिर रवि ने अपने लंड को बहार निकला और अपने हाथो से लंड को हिलाने लगे और हट गए..अब सोनल उनके लंड को देख नहीं पा रही थी.

‘ओह्ह्ह..आआअह्ह्ह….बस इतनी सी आवाज़ निकली और उसके पापा के लंड से वीर्य छुट गया..’ सोनल अपने पापा के लंड को देखने के चक्कर में भूल गयी की वो गठरियों पर खडी थी और उसके हिलते ही गठरियां हिल गया और सोनल नीचे गिर गयी. सोनल सीधा गठरियों के साथ नीचे आ गयी. तीनो आवाज सुनकर चौंक गए और रवि ने एकदम से अपनी पेंट उठा ली. और बाहर आकर देखा तो सामने सोनल को पाया। सोनल भी शरमा गयी, सोनल को और कुछ नहीं सुझा तो वो वहां से चल दी. अब सोनल पापा का सामना नहीं कर सकती थी. पापा क्या कहेंगे..

सोनल पापा के डर से जल्दी से चले जा रही थी और इतने में सोनल ने कार के आने की आवाज़ सूनी और मुड़कर देखा. उसके पापा ही आ रहे थे, उन्होंने उसकी ओर देखा और सोनल ने शर्म से आँखे नीचे कर ली, उसे शर्म और डर दोनों लग रहा था. सोनल डर के मारे अपनी टीशर्ट को उंगलियों से खेलने लगी.


‘बैठो..घर अभी दूर है..’ रवि सोनल के पास आकर रुके और कहा. सोनल तो एक ही सेकंड में बैठ गयी. रवि कार चलाने लगा। सोनल एकदम सुन हो कर बैठी थी तभी रस्ते में उसे समझ आया कि मोनिका भी उसकी बगल में बैठी है। तब सोनल को कुछ हौसला हुआ कि मैंने कौनसा गुनाह किया है जो मैं डर रही हूँ, पापा को देखो गलत काम उन्होंने किया फिर भी बिना किसी शर्म और डर के कैसे चौधरी की तरह कहा कि बैठो…
और मोनिका मेरी बगल में बैठी है। सोनल फिर से पापा के मर्दाना होने पर फ़िदा हो गयी.

अब सोनल डर नहीं रही थी, सोनल को पता नहीं क्यो अपने पापा पर प्यार आ रहा था, उन्होंने जो किया वो गलत था, उनकी इज्जत के लिए घर की इज्जत के लिए. पर पता नहीं सोनल अपने पापा की ओर खिंच रही थी. सोनल ने बिना डर के अपने पापा के कंधे पर अपना हाथ रख दिया. जैसे बीवी अपने पति के कंधे पर हाथ रखती है ऐसे. बस अब सोनल के मन में चल रहा था कि किसी तरह अपने पापा के लंड को छूना है. क्या जालीम लंड है उसके पापा का.
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08-27-2019, 01:28 PM,
#33
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
सोच ही सोच में घर के करीब पहुँच गये, रवि ने उनको घर से पहले उसी मोड़ पर उतार दिया जहा से मोनिका को पिक किया था।
सोनल और मोनिका दोनो पैदल घर की तरफ चल पड़ी।
दोनो शांत चल रही थी, सोनल ने ही चुपी तोड़ी,
मोनिका कब से चल रहा है ये सब,
मोनिका--- सोनल बेबी प्लीज् मेम साहब को मत बताईयेगा। पिछले छह महीने से चल रहा है,
सोनल---- चिंता ना करो मैं किसी को नही बताऊँगी लेकिन तुम्हे घर चल कर मुझे सारी बात बतानी होंगी।
मोनिका--- ठीक है मैं सब कुछ बात दूँगी तुम्हे। वैसे आप क्यो जानना चाहती हो।
सोनल--- बस मन है जानने का।
दोनो घर पहुच जाती है, मोनिका अपने क्वाटर में और सोनल घर मे जाती है,
आरति-- कहा थी सोनल बेटा।
सोनल--- एक फ्रेंड को कुछ प्रॉब्लम हो गयी थी उसके घर गयी थी।
आरती चाह कर भी ज्यादा नही पूछ पाती। उसे आजकल सोनल से डर लगता था क्या कब बोल दे।
आरती--- बेटा वो स्कूल नही जाएगी आज।
सोनल--- नही।
सोनल अपने कमरे में चली जाती है, आरति सोनल कर रहते रामू काका को बुलाने या उसके पास जाने से डरती है और अपने कमरे में चली जाती है। आरती के जाते ही सोनल बाहर आती है और किचन में रामू को कहती है कि मोनिका को उसके कमरे भेज दे उसका सर दर्द कर रहा है हेड मसाज करवानी है।
रामू क्वाटर जाकर मोनिका को बुला लाता है और सोनल के रूम में भेज देती है।
मोनिका के रूम में आते ही सोनल उसे अपने पास बेड पर बैठा लेती है और उसे पापा के साथ कैसे उसकी चुदाई स्टार्ट हुई पूछती है। मोनिका रवि के साथ अपनी पहली चुदाई की बात बताती है कि छह महीने पहले आरती सोनल के साथ अपनी बहन के घर गयी हुई थी , आरती रात वही रुकने वाली थी.शाम का समय रवि अकेला था घर मे, रामू काका और जया काकी बाजार गए हुए थे और मोनिका आई बरतन माँजने, मोनिका के दिल मे तेज़ गुदगुदी सी होने लगी, अकेला घर, उसमे वो और रवि अकेले, सोच रही थी कि काश रवि उसको बाहों मे भर कर नंगा कर दे, और उसके खूबसूरत जिस्म को देखे. मगर हमेशा की तरह अपनी इच्छा को दबाए रखा, ऐसा करना ठीक नहीं था, वो शादी शुदा और मैं भी. पर ऐसे महॉल मे मैं बहुत ही गरम हो रही थी और शायद साहब जी भी। साहब अपने लंड को अपने आप ही मसलने लगे, मोनिका किचन मे बर्तन मांज रही थी, किचन के बाद डाइनिंग रूम थी और उसके बाद आपका कमरा, जैसे कि मुट्ठी मारने मे और भी मज़ा आए तो साहब ने कमरे मे रखे ड्रेसिंग टेबल के आईने को घुमा कर ऐसे रखा जैसे कि कमरे के दूसरे तरफ खड़े होकर साहब डाइंग रूम का दरवाज़ा देख सके, जहाँ से मैं बर्तन माँजने के बाद आती और साहब एक दम नंगे होकर अपने लंड को मसल्ने लगा और आईने की तरफ देखते रहे, सोचा अगर मैंने देख लिया और कुच्छ कहती भी है तो कह देते कि मैं तो अपने कमरे मे कपड़े बदल रहा था और आईने की तरफ ध्यान नहीं गया कि बाहर से दिख रहा है.
थोरी देर के बाद बर्तन धोने के बाद मैं डाइंग रूम में आ गयी, मेरा दिल और भी ज़ोर से धरकने लगा, सामने कमरे में साहब ननगे खड़े थे, ऐसा ही हुआ उसे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे अपने कपड़े बदल रहै है। उनका नँगा बदन देख कर मुझे भी कुछ कुछ होने लगा, अपने आप एक हाथ चोली के अंदर बूब्स से खेल रहा था और दूसरा हाथ घाघरे के उपर से चूत पर रखा था, शायद साहब ने मुझे आईने से देख लिया था, मेरी धरकन और भी तेज़ होने लगी, समझ गयी कि आग उधर भी लगी थी, दो बार नहीं सोचा और धड़कते दिल से, साहब वैसे ही नंगा बाहर की तरफ आ गये,मैं मदहोश आँखें बंद किए अपने जिस्म से खेल रही थी, साहब के आने की आहट से चौंक उठी और घबरा कर जल्दी से अपनी चुननी ठीक करने लगी और साहब ने मेरे हाथ थाम लिए और कहा–“घबराओ मत मोनिका, मैं भी तुम्हे प्यार करने के लिए बेचैन हो रहा हूँ.”

शरमाती घबराती मैं कहने लगी–“आपको आईने मे नंगा देख कर अपने आप को रोक नहीं पाई, एक मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, मगर मैने नहीं समझा कि आप मुझे देख लोगे.” मेरी इस अदा ने साहब को और भी मदहोश कर दिया और साहब बोले कि–“मैने जानभुज कर आईना ऐसे ही रखा था जिससे मैं तुम्हे देख सकूँ और शायद तुम भी मुझे देख सको.” साहब मेरा कोमल चेहरा अपने दोनो हाथो मे लेते हुए आगे कहा–” तुम बहुत ही खूबसूरत हो मोनिका, तुम्हारा यह चेहरा एक गुलाब के फूल जैसा सुन्दर है और तुम्हारे यह दो होंठ जैसे गुलाब की दो पंखुरियाँ हो, चूमने को जी करता है.” मैं शरमाते हुए कहने लगी–“मुझे जाने दो बाबूजी, यह ठीक नहीं है, मुझे शरम आती है.” साहब मेरी बात अनसुनी करके अपने तपते होंठ मेरे काँपते होंठो पर रख दिए, कितने कोमल होंठ थे साहब के, कितनी मिठास थी उन होंठो मे.

मैं शरमाती, अपनी आँखें झुककर कहने लगी–“ऐसा मत कहिए बाबूजी, ऐसा मत कीजिए, मैं सह नहीं पाउन्गि, आज तक किसी ने मेरी तारीफ नहीं की, मैं तो खामोश अपने तन को राहत देना चाहती थी, आप का नंगा बदन,उठा हुआ….मैं तडप उठी, पर आप ने देख लिया.”

साहब ने हैरानी मे पूछा–“क्यूँ, तुम्हारा मर्द तुम्हारी तारीफ नहीं करता, इतनी हसीन,इतनी खुबुसरत हो तुम.”

मैंने अपना सिर नीचा कर लिया –“कहना नहीं चाहिए, पर मेरा मर्द तो शराब के नशे मे धुत रात को आता था और मेरी तरफ देखता भी नहींथा, जब उसकी इच्छा होती थी अपनी पतलून नीचे करके मेरा घाघरा उपर करके बस अपनी आग ठंडी कर लेता था और मैं तड़पति रह जाती थी , अब तो उसे मरे भी कितने महीने हो गये है,”
“तुम्हारा मर्द बदनसीब है, इतनी सुन्दर औरत और देखता भी नहीं था, मैने तो जब से तुम्हे देखा है, फिदा हो गया हूँ तुम पर. जी करता है तुम्हे देखता ही रहूं, अपनी बाहों मे लेकर प्यार करूँ और तुम्हारा यह प्यारा मुखरा चूमता रहूं.” कहते हुए साहब ने मुझे अपने आगोश मे ले लिया. चुपचाप मैं उनकी बाहों मे समा गयी और अपना सिर उनके सीने पर रख लिया, उससे बहुत ही राहत मिल रही थी, मेरा घबराना कुच्छ कम हुआ था. इन सभ बातों मे साहब लंड भी थोड़ा सा मुरझा गया था, मेरा खूबसूरत, कोमल जिस्म उनकी बाहों मे था, मुझे भी बहुत ही अच्छा लगा रहा था, थोरी देर तक ऐसे ही मुझे अपनी बाहों मे बाँधे रखा और फिर मेरे गाल को सहला कर मेरा मुँह उपर किया, हमारी निगाहें मिली, प्यार भरा था उनकी आँखों मे, उसे अपना महसूस कर रहा थी, शायद वो भी ऐसा ही महसूस कर रहै थे इसीलिए वो भी बेफिकर मुझे अपनी बाहों मे बाँधे थे, मैने उनका माथा चूम लिया और उन प्यारी सी आँखों पर अपने होंठ रख कर एक चुंबन दिया और तो साहब ने कहा–“मोनिका, आज मैं तुम्हे प्यार करके तुम्हारी यह तडप निकाल दूँगा, और तुम्हे महसूस कराउँगा कि तुम वाकई मे कितनी हसीन हो.” कहते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए, इस बार मैं नहीं हटी और उनके चुंबन का जवाब अपने चुंबन से दिया, मैने अपने होंठ नहीं हटाए और उनके होंठ अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी, जवाब मे वो भी मेरा उपर का होंठ चूसने लगे.मैं बिना होंठ हटाए कहने लगी–“मुझे पिघला दिया तुमने, बेताब थी ऐसे चुंबन के लिए, मेरा दिल इतना धड़क रहा है कि ऐसे लग रहा है की उच्छल कर बाहर आ जाएगा.”

मेरे गाल को चूम कर कहने लगे–“मैं भी सुनू कैसे धड़क रहा है तुम्हारा दिल.”

कहते हुए वे नीचे हुये और अपना कान मेरे कोमल सीने पर रख दिया, एक लंबी साँस ली मैंने, वाकई मे बहुत ही तेज़ धड़क रहा था, उनकी बाहें मेरी कमर के इर्द गिर्द थी,
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से नंगे होकर लिपट गये और चुम्मा चाटी करने लगे। साहब मेरे दूध हाथ से दबाने लगे। मुझे अभी बहुत मजा मिल रहा था। फिर साहब मेरे मस्त मस्त दूध पीने लगे। मेरी चूत ढीली और रसीली होनी लगी। मैंने उसके मोटे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। धीरे धीरे साहब का लंड खड़ा होने लगा। आधे घंटे तक उन्होंने मेरे इतना दूध पिया की मेरी छातियाँ बिलकुल लाल लाल हो गयी। कई बार चुदास में आकर साहब ने मेरे दूध को अपने दांत से काट लिया। मैं तडप उठी।
फिर वो मेरी चूत पर आ गये और मेरी रसीली बुर पीने लगे। आह मुझे बहुत सुख मिला। मेरी चूत से माल निकलने लगा जिसको वो चाट रहे थे। इसी बीच मैंने थोडा सा मूत दिया। साहब वो भी चाट गये। फिर उन्होंने व्हिस्की की बोतल उठा ली और मेरी चूत पर धीरे धीरे गिराने लगे। और नीचे मुँह लगाकर पीने लगे। कम से कम यही खेल २ घंटा चला। साहब कभी मेरी चूचियों पर व्हिस्की डालकर पीते, तो कभी चूत पर। फिर उन्होंने मेरे दोनों घुटने खोल दिए और लंड मेरे चुत में डाल दिया।

"मोनिका!!..तुमको चोद तो रहा हूँ..पर ऐसे चूत देना की लगे की मैं अपनी पत्नी को चोद रहा हू!!" साहब बोले

ये सुनकर मैंने उनको अपनी बाँहों में भर लिया और उसी तरह से चुदवाने लगी जैसी मेरा पति मुझे चोदा करता था। कुछ दी देर में साहब ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली और मुझे पटर पटर करके चोदने लगे। मेरा और उसका पेट पट पट की आवाज करते हुए बड़ी तेज तेज टकरा रहा था। मैं मजे से चुदवा रही थी।

"आआआआ ...साहब जी...औ.र तेज चोदो..आह आह ...फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आज!!" मैंने किसी रंडी की तरह चिल्लाने लगी तो साहब भी जोश में आ गये। उन्होंने मेरे दोनों कंधे कसके पकड़ लिया और जल्दी जल्दी मुझे ठोंकने लगे। लगा जैसे कोई चुदाई वाली मशीन मुझे चोद रही है। साहब मेरी गर्मा गर्म सिकारियां, मेरी कामुक आवाजों का भरपूर आनंद ले रहे थे। मुझे फट फट फरके फक कर रहे थे। वो बहुत मेहनत से मेरे साथ मेरी चिकनी योनी में सम्भोग कर रहे है। मुझे बहुत मजा मिला। आज कई महीने बाद फिर से मेरी चूत का सटर उठा और उसका उदघाटन हुआ। साहब मेरे दूध भी पी रहे थे और मेरे सेक्सी ओंठ पी चूस रहे थे। ३० मिनट बाद साहब मेरी चुत में आउट हो गये।

फिर मैं उसने किसी जोंक की तरह चिपक गयी और प्यार करने लगी।

"मोनिका!!!..कैसी चुदाई की मैंने...क्या तुम्हारे मर्द से जादा अच्छी चुदाई की???" साहब ने पूछा

"हाँ .साहब ! आपके लौड़े में तो अभी बहुत दम है। एक साथ आप कई औरतों को चुदाई के खेल में हरा दोगे!!" मैंने कहा

उसके बाद मैं साहब का लंड चूसने लगी। इतने गोरे मस्त लौड़े को मुँह में लेकर चुसना बहुत गर्व की बात थी। कितना बड़ा, कितना गुलाबी और कितना मीठा लौड़ा है साहब का। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रख दिया और अपने मुँह की ओर धक्का दे देकर वो लंड चुस्वाने लगे। उनको भी इसमें बहुत मजा मिल रहा था। मैं उनकी गोलियां भी मुँह में भरकर चूस लेती थी। मैं गले तक साहब का लौड़ा चूस रही थी। उनके लंड से माल रिसने लगा था क्यूंकि वो बहुत उत्तेजित महसूस कर रहे थे। फिर लंड चुस्वाने के बाद साहब ने मुझे बिस्तर पर कुतिया बना दिया। मैं अपने दोनों हाथों और घुटनों पर कुतिया बन गयी। साहब मेरी गांड पीने लगे। मुझे एक अलग सा नशा छाने लगा। फिर उन्होंने मेरी गांड में ढेर सारा तेल लगा दिया और लंड मेरी गांड में डाल दिया और फिर वो मेरी गांड मारने लगी।

शुरू शुरू में मुझे लग रहा था इतना मोटा लंड मैं बर्दास्त नही कर पाउंगी, पर 10 मिनट बाद मेरी गांड का छेद खुल गया और मैं मजे से उछल उछलकर कर गांड मरवाने लगी।

"आह आह आह ..हा हा हा!!" करके साहब मेरी गांड चोद रहे थे। कुछ देर बाद तो जैसे मुझे गांड मरवाने का चस्का लग गया। डेढ़ घंटे तक साहब ने मेरी गांड दबाकर चोदी, उसके बाद साहब ने अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। उसके बाद फिर कुतिया बनाकर मेरी चूत मारी। अब तो जब भी मूड होता है साहब मुझे फ़्लैट में ले जाकर मेरी चुदाई करते है,
ऐसे मोनिका ने अपनी चुदाई की कहानी बता दी सोनल को।
सोनल---- फिर विनोद मामा कब साथ मिले तुम लोगो के।
मोनिका---- एक दिन मम्मसहब घर नही थी, तुम स्कूल गयी थी तब मैं और साहब उनके रूम में मस्ती कर रहे थे तब तुमारे मामा आ गए थे अचानक। तब से ही वो कभी कभी आ जाते है। हां वैसे उनका आना न आना एक ही बात है उनका लण्ड बिल्कुल छोटा है और जल्दी झड़ जाते है, फिर बैठकर देखते रहते है मुझे चुदवाते हुए तुमारे पापा से।
सोनल मोनिका की चुदाई कहानी सुनकर बहुत गर्म हो गयी, वो पहले ही अपने पापा की चुदाई लीला देखकर मदहोश थी, अब मोनिका की स्टोरी सुनकर और हो गयी।
मोनिका चोर आँखों से सोनल को देखा वो पलट कर मोनिका को ही देख रही थी। मोनिका ने नजरंदाज कर दिया। सोनल कुछ बैचेन नजर आ रही थी।
अचानक मोनिका ने सोनल को पुकारा- सोनल बेबी, तुम ये जानकर क्या करोगी ।
उसकी आवाज में भारीपन था।
मोनिका ने कहा- तुम्हारे पापा और मैं बस मजा ले रहे हैं एक दूसरे के जिस्म का !
सोनल- मैं पागल हो रही हूँ ये सब देख कर, एक अजीब सी आग भर रही है। मैं क्या करूँ?
मोनिका- मेरी जान आ, आ जा, तुझे कुछ नया मजा दूँ जिंदगी का।
सोनल- नही, ये ग़लत है, मैंने कभी किसी के साथ कभी ऐसा नहीं किया। तुम तो वैसे भी लड़की हो।
मोनिका- तो आज कर ले। आ जा ऐसा मौका दुबारा नहीं आता।
सोनल- मुझे शर्म आ रही है !
मोनिका- अपने कपड़े उतार दे सारे ! एकदम नंगी हो जा ! फ़िर शर्म जाती रहेगी।
और फ़िर मोनिका ने सोनल को एकदम नंगा कर दिया। वो ऑंखें बंद कर के लेटी थी।
मोनिका- अब बोल क्या हो रहा है?
सोनल- कुछ नही, एक अजीब सा नशा बढ़ रहा है जिस्म में।
मोनिका- बोल क्या चाहती है?
सोनल- मुझे किस करो, मेरे होंठों में, जैसे तुम और पापा कर रहे थे।
और मोनिका सोनल के सिरहाने बैठ गई और उसके सर को अपने हाथों में ले कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूसने लगी। सोनल भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उसकी किस में शामिल हो गई। सोनल और मोनिका एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थी, कभी अपनी अपनी जीभ निकालते और एक दूसरे से मिलते हुए एक दूसरे के मुंह में घुसा देते। कुछ देर ये सिलसिला चलता रहा।
अब मोनिका सोनल के मम्मों को हाथों में ले कर चूसने लगे, एक एक हाथ उसके जिस्म को टटोल रहा था। उसकी जांघों पर फिसल रहा था। सोनल अपने आप में नहीं थी, उसके अन्दर जैसे एक चिंगारी उठ रही हों। गरम आहों से कमरा भर गया था।सोनल से अब बर्दाशत नहीं हुआ। मोनिका सोनल का सारा रस पी जाने को बेताब थी। सो मोनिका ने सोनल की टाँगे खोल कर में अपनी जीभ एक दम से उसकी चूत में घुसा दी।
सोनल- सी स्स्स्स हाय ! ये क्या कर दिया मोनिका ! स्स्स्स्स हाय !
मोनिका बेतहाशा उसके रस को चूसे जा रही थी और उसके सारे जिस्म को चाटने में व्यस्त थी। दोनों सेक्स का भरपूर मजा ले रही थी। मोनिका ने सोनल को अचानक उल्टा कर दिया और उसके चूतड़ ऊपर उठा दिए। अब मोनिका ने अपने जीभ उसके पीछे घुसा दी।
सोनल की सिस्कारियां बढ़ रही थी- हाय, मोनिका ये क्या आग लगा थी, घुसा दे अपनी जीभ, अपने उंगलिया मेरे पीछे। चोद मुझे अपनी जीभ से।
मोनिका और तेजी से उसे अपनी उँगलियों से चोदने लगी, कभी आगे से कभी पीछे से, तब तक मोनिका सोनल के नीचे लेट कर उसे चाटने लगी, सोनल बुरी तरह से गीली थी। मोनिका सोनल की चूत को चाट चाट कर उसकी आग बुझाने में लगी थी।
सोनल के शांत हो जाने के बाद सोनल ने मोनिका को चोदा जैसे मोनिका ने उसको किया था।
उस दिन दोनो ने चार बार एक दूसरे को चोदा। शाम कब हो गई पता ही नहीं चला।
सोनल और मोनिका खुश थी कि मोनिका इसलिए कि सोनल भी उनके खेल में शामिल हो गई है। अब ये खेल और मजेदार हो गया था, और सोनल इसलिए कि वो अब जल्द ही अपने पापा को हासिल कर लेगी।
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08-27-2019, 01:28 PM,
#34
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
रात को रवि लेट आया सब खाना खा कर सो गए थे और अब सिर्फ सोनल जग रही थी, जैसे ही रवि ने बेल बजायी, सोनल ने दौड़ कर दरवाजा खोला,
रवि ---‘हाँ..क्या हुआ, सोनल सोई नही अभी तक
. सोनल(कुछ उदास आवाज में)---कुछ नहीं हुआ. अभी खाना लेकर आती हूँ.’ और सोनल खाना लेकर आयी और पापा के पास रखकर चली गयी. रवि ने खाना निपटाकर और हाथ धोकर उप्पेर चले गए तो सोनल समझ गयी की पापा जल्दी सो कर उससे दूर रहना चाहते हे. पर अब सोनल शर्म तोड़कर उप्पेर चली गयी और रूम में जाकर देखा कि आरती सो चुकी है और रवि सोने की तय्यारी में है, सोनल अपने पापा के पास गई और बोली
‘पापा..इतनी जल्दी सो ना है..’

‘हाँ..बेटा, अब इतनी रात में ओर तो क्या करेंगे..तू भी सो जा.’ और वो अपना कमीज उतारने लगे, सोनल पापा की चौड़ी छाती को देख रही थी. रवि ने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी. सोनल को ऐसे उनके बदन को देखते हुए रवि ने देख लिया.
‘क्या देख रही है सोनल..जा सो जा’ रवि ने उसे होश में लाने के लिए कहा

‘पापा..वो क्या है कि अब अकेले में डर सा लगता है..’

‘इसमें कैसा डर, तू बचपन से अकेले ही सोती हुई बड़ी हुई है, ..’ रवि ने उसे समझाते हुए कहा और बेड पर बैठ गए. सोनल भी अपने पापा के जवाब के लिए तैयार थी.

‘हाँ पापा पर आज डर लग रहा है..’ और इससे पहले कि रवि उसे मना करे सोनल रवि के पास उनके बेड पर जा कर बैठ गयी और बड़े सेक्सी आवाज़ में कहा.
‘पापा प्लीज..जब तक नींद आने न लग जाये तब तक सोने दो, फिर मैं चली जाउंगी.’
रवि ने एक नजर सोनल की ओर देखा, अब उनके पास कोई चारा नहीं था. कितना भी कठोर बाप हो पर बेटी ऐसे कहे तो मान ही जाता है. और रवि भी मान गए. उन्होंने कहा ठीक है नीचे तुम्हारे कमरे में चलो और सो जाओ, सोनल तुरन्त रवि का हाथ पकड़ खिंचते हुए नीचे अपने रूम में ले आयी। और बेड पर लेट गयी और रवि भी लेट गया. रवि ने एक हाथ अपने सर के नीचे रक्खा और दूसरा अपनी छाती पर और आँखे बंद कर के लेट गए.

सोनल भी फिर हिम्मत करते हुए रवि के छाती पर रक्खे हुए हाथ को पकड़ा और उसे साइड में रख कर उस पर अपना सर रख कर लेट गयी, मतलब सोनल रवि के हाथ को तकिया बना कर सो गयी. रवि ने एकदम से फिर से सोनल की ओर देखा और इस बार सोनल ने उन्हें एक कातिल मुस्कराहट दी. और रवि से चिपक कर सो गयी. सोनल ने अपना हाथ रवि की छाती पर रख दिया और रवि की छाती को सहलाने लगी.

रवि सिर्फ बनियान औरपजामे में थे और अब पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा था. सोनल ने तभी आईडिया निकाला
‘पापा..आपकी छाती पर कितने सारे बाल है..’

‘क्यूँ तुम्हे कोई तकलीफ है..’

‘नहीं पापा..मुझे क्यों तकलीफ होगी..आप भी ना. हमेशा गुस्से से बात करते हो, मैं तो ये कह रही थी कि कितने अच्छे लगते है आपके सीने पर ये बाल. इन्हें सहलाने में भी मजा आता है.’ और सोनल ने रवि से भोले अंदाज़ में कहा और उनहे हाथ से हटकर सोनल रवि के सीने पर आ गयी. अब सोनल रवि से एकदम चिपक गयी थी. सोनल ने हिम्मत कर के अपने पाँव भी रवि के पाँव पर रख दिए थे और धीरे धीरे उसके पाँव को भी सहला रही थी.

बेचारे रवि सोनल के मासूम डायलाग से चुप हो गए और कुछ नहीं बोल पाए. सोनल ने अब उनके बालों को चूमना शुरू कर दिया..बाल तो बहाना थे सोनल तो अपने पापा को चूम रही थी. पर अब तक रवि की ओर से कोई हरकत नहीं हो रही थी. सोनल चूमते चूमते पापा की छाती पर निप्पल को पकड़ लिया और अपने होठो में दबा लिया..और उसे चूसने लगी..जैसे सोनल ने ऐसा किया रवि के बदन में एक अंगड़ाई सी आ गयी और छटपटा उठे.


‘सोनल ये तुम क्या कर रही हो..’ रवि ने अब बिलकुल नोर्मल तरीके से बात की, अब उनकी आवाज़ में कठोरता नहीं थी. अब वो पिघल रहे थे.

‘कुछ नहीं पापा..मुझे आपके बाल पसंद आ गए है..कितने घने है..और मुलायम भी. आप सो जाइये.’ और इतना कहकर सोनल ने उनके होठो पर अपनी ऊंगली रख दी उन्हें चुप करने के लिए.

फिर सोनल उन्हें चूमते चूमते उनकी गरदन चूमने लगी..पर अब रवि की हिम्मत नहीं हो रही थी सोनल को डांटने की. पर वो समझ रहे थे कि सोनल उन्हें किस करने का सोच रही हूँ तो वो अपने गरदन सोनल जिस और चूमती उस और से दूसरी और हटा रहे थे.
‘पापा..आपकी मूछ को एक बार चूम लू.’ सोनल अपने पापा के होठो के ठीक ऊपर थी.

‘नहीं बेटा…उधर नहीं.’ रवि के मूंह से अब बेटा भी निकलने लगा था.

‘पापा प्लीज..मुझे आपकी मूछे पसंद है..’ और सोनल ने इतना कहते ही अपने पापा के होठो पर अपने होठ रख दिया और उन्हें चूमने लगी. जाहिर सी बात है रवि अब भी कोई हरकत नहीं कर रहे थे. पर सोनल फिर अब ठीक उनके ऊपर ही आ कर लेट गयी और अपने पापा को बेशर्मी से चूम रही थी.

फिर सोनल ने अपने हाथ को पापा के हाथ पर रक्खा और जोर से रवि की उँगलियों में अपनी उंगलिया मिला ली. जिससे उन्हें सिग्नल मिले और रवि भी कुछ करे. और रवि भी अब कमजोर पड़ने लगे और उन्होंने भी सोनल के होठो को चूमना शुरू किया. सोनल अपनी प्लानिंग में कामयाब होती दिख रही थी सोनल और भी जोश में आ गयी और रवि को जंगली की तरह से चूमने लगी.

अब रवि भी सबर खो रहा था वो भी सोनल को किस कर रहा था और अब उसके हाथ सोनल के बदन पर घूम रहे थे. सोनल ने फिर अपने पापा के मूंह में अपनी जीभ दे दी और रवि ने उसकी और देखा और बिना कुछ बोले फिर से उसकी जीभ को चूसने लगे. अब सही मौका था सोनल अपने पापा के लंड के ठीक ऊपर आ गयी और अपनी गांड को अपने पापा के लंड पर घिसने लगी.

रवि के लंड को छूते ही उसे एहसास हो गया था कि वो कड़क हो चूका है..अब उसने अपने हाथ को नीचे किया और पापा के पजामे में उसे डाल ही रही थी कि रवि ने उसके हाथ को पकड़ लिया और अपने मूंह से उसकी जीभ को भी निकाल दिया और बोले

‘हे भगवान..सोनल तुम ये क्या कर रही हो..मैंने भी ये क्या कर दिया..’ रवि ने अपने मूंह पर हाथ रखते हुए कहा. रवि अब उठकर बैठ गए थे और सोनल की ओर देख रहे थे. सोनल भी रवि के साथ ही बैठ गयी और रवि के सामने सर झुका कर बैठी रही और सर नीचे करके ही सोनल ने हलकी सी आवाज़ में कहा
पापा आई एम् सॉरी..पर आपको सुबह को देखने के बाद मुझे मोनिका से जलन होने लगी है. और आप को देखकर मुझे पता नहीं क्या हो रहा है.’ सोनल इतना कहकर रवि की गोद में सर रख दिया और बेटी की तरह लेट गयी. रवि ने अपनी गोद में सोने से मना नहीं किया.

‘नहीं बेटा..तुम्हारी मुश्किल ठीक है, पर तुम जो कर रही हो वो गलत है.’ अबकी बार रवि ने उसके सर पर प्यार से हाथ घुमाकर बात की थी. सोनल अपने पापा की बात सुन रही थी पर उसे तो सेक्स का भूत सवार था. रवि बात कर रहा था तभी सोनल ने अपने पापा के पजामे पर से ही अपने पापा के लंड को पकड़ लिया..और उसे अपनी मुट्ठी में मसलने लगी.

‘नहीं सोनल ऐसा मत करो..तुम समझदार लड़की हो.’ रवि अभी भी मना कर रहे थे. पर सोनल रूक नहीं रही थी. सोनल ने अपने पापा की पैन्ट की हुक और चैन खोल दी और अपने पापा के लंड को हाथ में पकड़ लिया. रवि भी उसका हाथ छूते ही जैसे करंट लगा हो ऐसे हिल गए.

‘देखो सोनल , मुझे उस्काऊ मत . मुझे मजबूर मत करो..’ रवि अब उसे डराना चाहता था. सोनल ने अब तक अपने पापा के लंड को आज़ाद कर दिया था और वो बाहर आ गया था. सोनल ने पहलीबार इतने करीब से लंड देखा था. रवि के लंड को देखते ही सोनल गॉद में से उठकर बैठ गयी और अपने पापा के लंड को देखने लगी. रवि ने पास में पड़ी चादर से उसे ढक लिया.

तो सोनल ने रवि की ओर देखा और रवि को झट से धक्का दे कर लिटा दिया, इससे पहले की रवि कुछ समझे सोनल अपने पापा पर चढ़ गयी और 69 की पोजीशन में आ गयी और चादर हटाकर अपने पापा के लंड को अपने हाथ में लेकर मुठ लगाने लगी।


लंड इतना मोटा था की उसके हाथ में भी नहीं समां रहा था. सोनल की गांड रवि की ओर थी, रवि ने अपनी ताकत से उसे एक ओर हटा दिया पर सोनल ने रवि के लंड को नहीं छोड़ा. सोनल मुठ लगाती गयी अब रवि को पता नहीं गुस्सा आ गया और उन्होंने उसे जोर से पकड़ कर धक्का दे दिया.

रवि की ताकत इतनी थी कि सोनल सामने की दीवार से टकरा गयी. सोनल अब हार चुकी थी, उसे लगा था कि जबतक वो पापा के पास रहेगी तब तक उन्हें मना सकती है पर अब वो गुस्सा हो गए थे और उन्होंने उसे अलग कर दिया था, अब वो नहीं मानेंगे. सोनल उनकी और पीठ कर के दीवार से चिपक कर खडी थी, और दीवार को मारने लगी.

पर इतने में पता नहीं रवि को क्या हुआ कि वो सोनल के पास आये और जोर से उससे टकरा गए, सोनल को और भी दिवार से चिपका दिया. रवि ने उसे कस कर दीवार से सटा दिया था. फिर रवि ने उनके दोनों हाथो को पकड़ा और उसके दोनों हाथो को अपने हाथो से दोनों और फैला दिए और सोनल के कान में बोले..

‘किसी को पता तो नहीं चलेगा..’ सोनल मन ही मन खुश हो गयी पर सोनल ने अपने पापा की बात का जवाब नहीं दिया. रवि ने उसे पकड़ कर पलटा दिया और अपनी ओर घुमा लिया. सोनल नीचे देख रही थी तो रवि ने उसके चेहरे को ऊपर किया..और सोनल के होठ पर होठ रख कर उसे किस करने लगे. सोनल ने उन्हें अपने से हटा दिया और कहा

‘ऐसे ही प्यार करना था तो वो तो किसी से भी कर सकती हू..मुझे मोनिका की तरह जंगली प्यार चाहिए.’ सोनल ने बेशरम बनते हुए रवि से कहा. रवि भी उसकी बात सुनते ही उससे चिपके हुए थे तो थोड़े से दूर हुए और उसकी ओर देखा।
सोनल भी बड़ी अदब से उनकी ओर देख रही थी की वो अब क्या करते हे. इससे पहले कि सोनल कुछ समझ पाती। रवि उसके पास आये अपने दोनों हाथ उसके टॉप पर रक्खे और एक ही झटके में उसके टॉप को फाड़ दिया.

सोनल तो अपने पापा को देखती ही रह गयी, इससे पहले कि वो और कुछ समझे। रवि ने उसके बूब्स को अपने दोनों हाथो में दबोच लिया, उनके हाथो ने जैसे उसके बूब्स को दबाया कि वो सहन नहीं कर सकी और 3 इंच ऊपर हो गयी. फिर रवि ने उसे फिर से पकड़ा और बिस्तर की ओर धक्का दिया.
सोनल बिस्तर पर गिरी और सोनल ने उनकी ओर देखा, अब रवि मे पुराने वाला मर्द जाग गया था, वो सच में सोनल की ओर ऐसे बढ़ रहे थे की मानो उसका रेप करनेवाले हो. सोनल अब सच में खुश हो गयी और सोनल ने अपने आप ही अपनी ब्रा और जीन्स को जिस्म से निकाल दिया. अब वो सिर्फ पेन्टी में थी. उसे ऐसे देखकर रवि उसके ऊपर झपटे और उसे बालों से पकड़ा और उसे घुटनों के बल पर बैठा दिया और अपना लंड उसके मुह में डालने लगे.
सोनल गोरे चिट्टे लंड को देखे जा रही थी | रवि अब थोडा बेशरमी पे उतर आये थे उन्होंने ने सोनल से कहा : “एक बार पकड़ के देख ना कितना गरम हो गया है . “. सोनल जैसे नींद से जागी और नॉटंकी करते हुए बोली : ” नहीं मैं इसे हाथ भी नहीं लगाउंगी, मुझे इसे देखकर डर लग रहा है “| रवि ने जबरदस्ती सोनल का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया और ऊपर नीचे करने लगे | थोड़ी देर बाद सोनल की झिझक भी खत्म हो गयी और वो खुद ही हाथ चलाने लगी | रवि की मज़े से आखे बंद होने लगी थी ओर उनके मुह से सिसकियाँ निकलने लगी थी | सोनल जब लंड पे हाथ फेरते हुए नीचे करती तो चमड़ी के नीचे आते ही उसे रवि का लाल रंग का सूपाड़ा दिखने लगता |थोड़ी देर बाद ही रवि ने सोनल से कहा : “एक बार मुह में ले कर देख ना कितना मज़ा आता है “…..पापा की बात सुनते ही सोनल ने अपने हाथ चलाना बंद कर दिया ओर बोली : “छी कैसी गन्दी बाते करते हो आप, यहाँ से तो पेशाब करते है मैं मुह में कैसे ले सकती हू “. इसपर रवि ने कहा : “कुछ गन्दा नहीं है, येही जब तेरे अंदर जायेगा तो तुझे इतना मज़ा आएगा कि तू सोच भी नही सकती “. सोनल ने इसपर आश्चर्य से कहा “ये मेरे अंदर कैसे जायेगा, ये तो कितना मोटा है “. रवि ने कहा: ” मेरी रानी बड़े आराम से जायेगा तेरे अंदर देखना तुझे कितना मज़ा आएगा, अच्छा चल मुह मैं मत ले पर एक बार चाट के तो देख जैसे आईसक्रीम चाटती है “. सोनल अपने पापा की बात मानते हुआ घुटनों के बल बैठ गयी ओर लंड को एक हाथ से पकड कर अपना मुह उसके पास लायी.| लंड के पास आते ही उसकी मादक सी महक सोनल की नाक में गयी तो वो थोड़ी मदहोश सी हो गयी और धीरे से अपना मुह खोलकर जीभ को बाहर निकाला | उसके छोटे से मुह के सामने लंड काफी विशाल लग रहा था |

सोनल ने रवि की आखो में देखते हुए धीर से लंड पे अपनी जीभ रखी, और मुह को ऊपर की तरफ ले जाते हुए लंड का पहली बार स्वाद चखा | रवि की तो मज़े से आह निकल गयी और वो लंड चटाई का मज़ा लेने लगे |रवि ने थोड़ी देर बाद सोनल से कहा ” एक बार सुपाडे को तो चाट के देख “.सोनल ने वैसा ही किया .| सोनल की जीभ सुपाडे पे पड़ते ही लंड ने मज़े में ठुमका लगाया और थोडा सा उछल गया | लंड को ऐसा करते देख सोनल की हंसी निकल गयी | उसे इस खेल में अब मज़ा आने लगा था, वो बार -२ अपनी जीभ सुपाड़े पे ले जाकर चाटने का प्रयास करती और हर बार लंड एक ठुमका लगता | रवि तो मज़े से दोहरे हुए जा रहे थे सोनल की इस हरकत पे | सोनल अपना काम किये जा रही कि तभी रवि ने उसे रुकने का इशारा किया और सोनल लंड चाटना छोड कर रवि के जांघों को पकड़ कर बैठी रही, रवि ने सोनल का मुह खुलवाकर फिर से लण्ड मुह में डालने लगे, उसका लंड सोनल के मूंह में आधे से ज्यादा नहीं जा रहा था पर रवि ने उसके सर को पीछे से पकड़ा और उसके सर को हिला हिला कर अपने लंड को उसके मूंह में घुसाने लगे. जब पूरा लंड उसके मूंह में चला गया तो उन्होंने कुछ भी नहीं किया बस उसके सर को पकड़ के रक्खा, अब उस से सांस भी नहीं ली जा रही थी, सोनल अपने हाथ को उनके घुटनों पर मारने लगी.
फिर भी रवि ने नहीं छोड़ा, थोड़ी देर उसे तड़पाया और फिर उसे छोड़ा. और अपने लंड को बाहर निकाला, और सोनल अपनी छाती पर हाथ रख कर सांस ले रही थी, पर रवि ने फिर से उसके मूंह को पकड़ और लंड को अन्दर डाल दिया और इस बार लंड को अन्दर बाहर करने लगे. इतनी जोर से कर रहे थे कि फिर से उसे सांस लेने नहीं दे रहे थे.

फिर रवि को लगा कि अब सोनल से सहा नहीं जा रहा है तो रवि ने उसे छोड़ दिया और नीचे गिरा दिया. अब सोनल कुछ भी करने के हालत में नहीं थी, सोनल ने ही अपने पापा के अन्दर के शैतान को मजबूर किया था. सोनल बस अपने दोनों हाथो को ऊपर कर के लेटी रही और अपने पापा को देखने लगी.
रवि अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे, फिर रवि ने उसके दोनों पाँव को पकड़ा और पाँव पकड़ कर उसे अपनी ओर खिंचा, सोनल ऊपर हो गयी और अब सोनल सिर्फ सर के बल थी, उसके दोनों पाव रवि के कंधे को छू रहे थे. रवि ने फिर सोनल की पेन्टी को पकड़ा और निकाल दिया.

फिर रवि ने सोनल की चूत को देखा, सोनल की चूत पर हलके हलके से बाल थे, रवि ने बाल को अलग किया और अपनी ऊंगली से सोनल की चूत को मसलने लगे, सोनल तो तड़प उठी. रवि ने सोनल की चूत को दो उंगलियों से अलग किया और अपना अंगूठा उसके अन्दर डाल दिया. और शैतानी हरकत करने लगे कि अपने अंगूठे के नाखून से सोनल की चूत के अन्दर दर्द पहुचाने लगे. और सोनल को सही में दर्द होने लगा था. सोनल छटपटा रही थी.

फिर रवि ने सोनल को पलटा दिया और ऊपर अपने मूंह के पास कर दिया. सोनल को ऊपर कर के मेरी चूत को चाटने लगे. रवि का लंड सोनल के सामने था. सोनल भी उनके लंड को चूसने लगी. वो खड़े खड़े ही सोनल को 69 पोजीशन में लेकर मजे उठा रहे थे.

फिर रवि ने सोनल को नीचे छोड़ दिया और सोनल पेट के बल नीचे गिर गयी, रवि भी नीचे घुटनों के बल बैठ गए और सोनल को मोनिका की तरह कुतिया स्टाइल में बैठा दिया और सोनल की चूत में अपना लंड घूसा दिया. आम इंसान की तरह नहीं शैतान की तरह पूरा लंड अन्दर डालने जा रहे थे पर गया नहीं, सोनल कुँवारी थी।
आधा ही गया और इतने में भी सोनल को लगा कि उस्की चूत की चमड़ी छिल गयी, सोनल से रहा नहीं गया ओर सोनल कुतिया स्टाइल से नीचे गिर गयी, रवि ने बड़ी बेरहमी से उसे उठाया और फिर से लंड अंदर डाल दिया, इस बार रवि ने अपने दोनों हाथो से बने उतने जोर से उसकी चूत को फैला दिया और लंड पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया और चोदने लगे. सोनल की चुत चिर गयी थी, उसकी झिल्ली फ़ट चुकी थी और खून का फवारा चल पड़ा। रवि ने अपना लण्ड बाहर निकाला और सोनल की चुत को कपड़े से साफ कर फिर से लण्ड अंदर घुसा दिया। अब धीरे धीरे सोनल को भी मजा आने लगा था। अपने पापा की चुदाई देखने में जितना मजा सोनल को आ रहा था उससे कई अच्छा उसे अब लग रहा था, दर्द तो बेहिसाब हो रहा था पर उसकी मन की इच्छा पूरी हो रही थी. उसके अपने पापा एकदम तेज़ी से उसकी कमर को पकड़ कर चोद रहे थे और ऊह्ह..ओह्ह..ऊह्ह्ह्ह…की आवाज़ लगा रहे थे, उनका हर धक्का उसे लग रहा था.

अब रवि को लगने लगा का था की सोनल एंजाय करने लगी है तो रवि ने स्पीड और बढ़ा दी और सोनल को चोदने लगे. फिर रवि ने सोनल को अलग कर दिया और उसे पकड़ के अपनी गॉद में बिठा लिया और उसे चोदने लगे. सोनल अपने पापा की गोद में बैठकर उन्हें किस करने लगी और उनके बालों को सहलाने लगी. रवि बिना रुके उसे चोदे जा रहे थे.

करीब करीब 15-20 मिनट से उसे चोद रहे थे,पिछले कई महीनो से सोनल हस्तमैथुन कर रही थी पर कभी इतनी नही झड़ी थी. अब इतनी चुदाई के बाद उसे लग रहा था की वो अब झाड़ने वाली है. रवि उसे बिना थके चोद रहे थे, सोनल अपने पापा को और जोर से और जोर से कह रही थी.
फिर रवि ने उसे अपने दोनों कंधो से पकड़ा और नीचे कर दिया, मतलब अब सोनम बिस्तर से ऊपर थी पर रवि के दोनों हाथो के सहारे थी, और रवि उसे चोद रहा था. सोनल को अपने पापा की ताकत का तब एहसास हुआ की वो ऐसे उसे हवा में पकड़ कर चोद रहे थे. पर उनकी इस हरकत से उसकी चूत के अन्दर और दबाव बढ़ने लगा और सोनल मचलने लगी. सोनल को अब लगा की वो झाड़ने वाली है.

रवि को भी शायद पता चल गया था, पर वो जोर जोर से उसे लंड से धक्के लगा रहे थे, सोनल कन्ट्रोल कर रही थी की उसकी चूत का पानी ना निकले पर वो हार गयी और उसके बदन में एक झटका सा लगा और सोनल ने एक जोर से करवट ली और रवि समझ गए और रवि ने उसे छोड़ दिया और सोनल नीचे बिस्तर पर गिर गयी और रवि ने लंड बहार निकाल दिया और एक ही सेकंड में सोनल झाड गयी.

सोनल को इतनी हसीन चुदाई नसीब हुई थी, सोनल खुश हो रही थी. रवि ने उसकी चूत की ओर देखा और उसकी चूत के बहते पानी को देखा..सोनल ने अब चैन की सांस ली, और पलट कर सीधी हो गयी और रवि को अपनी चूत की ओर देखते देखा और उनके लिए सोनल ने अपने दोनों पाँव फैला लिये और उन्हें जी भर कर अपनी चूत दिखाने लगी.। सोनल की चूत से पहलीबार में ही इतना पानी निकला था और सोनल ने अब जाना की चुदाई का सुख क्या होता है. पर अभी उसके पापा का पानी निकलना बाकी था और रवि ने पास में पडी अपनी पेण्ट को उठाया और सोनल की चूत के पानी को पोछा और सोनल की चुत के जी-स्पॉट को मसलने लगे

और जो पानी रूक गया था वो फिर से झटके ले कर बाहर आने लगा..सोनल भी फिर से एक दो बार करवट ले उठी. पर रवि ने उसे पकड़ा और उसके दोनों पाँव को पकड़ कर फैला लिया और उसके दोनों हाथो की और ले लिया,इतना उसके पाव को फैला दिया. फिर उसके हाथो से ही उसके पांवो को पकड़ा दिया और उसकी चूत चाटने लगे.

अब उसकी चूत सूख चुकी थी पर रवि चाटने लगे थे, रवि ने अपनी जीभ से उसकी चूत को बहोत देर तक चाटा और फिर सोनल के दोनों बूब्स के निप्पल को पकड़ा और उसे जोर से दबा दिया और फिर से सोनल की चूत गीली सी होने लगी. रवि ने फिर उनकी चूत में अपनी दो उंगलिया डाल दी और उसे अन्दर बाहर करने लगे. सोनल फिर से बेकरार होने लगी थी.

रवि ने फिर सोनल की चूत से उंगलिया बाहर निकाली और सोनल की चूत पर मूंह रक्खा और अपने दोनों हाथो से सोनल की गांड के छेद को चौड़ा कर दिया. सोनल को कुछ समझ नही आया की अब क्या होने वाला है, रवि ने धीरे से अपनी एक उंगली सोनल की गांड में डाल दी.

‘पापा प्लीज् इस तरफ नहीं करो, बहुत डर होगा, ..प्लीज’ सोनल का प्लीज कहने का ये मतलब नहीं था कि पापा मुझे मत चोदो पर सोनल ये कहना चाहती थी की गांड जरा आराम से मारना. रवि भी समझ गए

‘मुझे देखते ही पता चल गया था, वरना अब तक तो अन्दर डाल कर खून निकाल दिया होता.’ और रवि ने जोर लगा कर दूसरी उंगली भी डाल दी. सोनल दर्द से कराह उठी…..सोनल की गांड में जबरदस्त दर्द हो रहा था. अब तक तो रवि ने उंगलियों से चोदना भी नहीं शुरू किया था,वो थोड़ी देर रुके और फिर उंगलिया अन्दर बाहर करने लगे. सोनल फिर दर्द से कराहने लगी.
फिर रवि ने ना आव देखा ना ताव और सोनल के गांड पर अपना लंड रक्खा और पास में पड़े क्रीम से लंड को चिकना किया और थोडा क्रीम सोनल की गांड में भी डाला और लंड धीरे धीरे कर के सोनल की गांड में डाल दिया. इतनी क्रीम डालने के बाद भी सोनल से दर्द नहीं सहा जा रहा था.
‘पापा मत करो..प्लीज..मुझसे से नहीं सहा जा रहा.’

‘मैंने कहा था मुझे मजबूर मत करो..’ और सोनल को इतना कहकर रवि मुस्कुराया और सोनल भी उनकी बात पर हंस पडी और रवि ने उसे मुस्कुराते देखा और सोनल की ओर झुके और सोनल के होठो को चूसने लगे, उसका लंड सोनल की गांड में था. और लण्ड बिना कुछ किये ही उसकी गांड को जला रहा था. पर रवि ने सोनल के होठो को चूसते चूसते लंड को बाहर निकाला और फिर जोर से अन्दर डाल दिया..सोनल अपने पापा के होठो में होठ डालने के बावजूद भी दर्द के मारे ऊपर हो उठी, पर उसके पापा नहीं हटे..अब सोनल की समझ में आया की उसके मूंह से जोर से चीख ना निकले इसीलिए रवि उसे किस कर रहे थे.

फिर रवि धीरे धीरे कर के बड़ी बेरहमी से चोदने लगे और जब तक सोनल शांत नहीं हुई तब तक वो उसे किस भी करते रहे. सोनल को लगने लगा था कि मेरी गांड सच में फट गयी है पर वो कुछ नहीं कर सकती थी, रवि उसे फिर से उसी तेज़ी से चोद रहे थे, गांड थोड़ी छोटी होने से रवि के मूंह से भी दर्द की आवाज़ आ रही थी. पर रवि बिना रुके चोद ही रहे थे.

बिना झाडे तक़रीबन अब एक घंटा होने आया था और रवि सोनल को चोद रहे थे.
फिर रवि ने सोनल को फिर से कुतिया स्टाइल में बिठा दिया और उसकी गांड मारने लगे. सोनल अब जोर जोर से दर्द के मारे चिल्ला रही थी. कुतिया स्टाइल में पता नहीं रवि का लंड तो कुछ और ही पावर में आ जाता था और चूत में तो सह भी लेती पर गांड में नहीं सहा जा रहा था,

सोनल तकिये पर अपनी मुट्ठिया मारने लगी..फिर से रवि ने सोनल को 10 मिनट तक चोदा और सोनल फिर से अपने आप को रोक नहीं पाई और सोनल फिर से झाड गयी.

इस बार सोनल की हालत ऐसी नहीं थी की सोनल बैठ सके पर सोनल फिर भी बैठी और एकदम से उसने अपने पापा के लंड को पकड़ा और जोर जोर से अपने मुट्ठी में हिलाने लगी ताकी उनका वीर्य निकल जाये और वो शांत हो जाये..

फिर सोनल ने तुरंत उसे अपने मूंह में ले लिया और जम कर चूसने लगी और आखिर कर उसके पापा के लंड से जोरदार पिचकारी सोनल के मूंह में निकली और सोनल फिर भी लंड को हिलाती रही जब तक एक एक बूँद खाली ना हो जाये. सोनल ने रवि के लण्ड से पानी और अपनी गांड का माल भी चाट कर साफ कर दिया। अब सोनल को समझ मे आ गया कि क्यो उसकी मम्मी रामु का लौडा चूस रही थी । फिर सोनल ने रवि को देखा उनकी आँखों में अब थकावट भी थी और चमक भी.

फिर रवि अपने घुटनों के बल पर बैठे और सीधे नीचे गिर और लेट गए. सोनल भी इतना थक गयी की लेट गयी, तब सोनल को ना गांड फटने का दर्द था, ना ही चूत का. दोनों बस सोना चाहते थे, दोनो लिपट कर सो गए.....
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08-27-2019, 01:28 PM,
#35
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
अगली दिन सुबह रवि आरती के उठने से पहले ही अपने कमरे में पहुच जाता है और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस जाता है, फ्रेश होकर नीचे चला जाता है, चाय के लिए, तब तक सोनल भी उठ कर डाइनिंग टेबल पर आ जाती है, सामने रवि को बैठा देख कर सोनल शर्मा जाती है, फिर किसी तरह अपने को संभाल कर गुड़ मॉर्निंग किस करती है अपने पापा को,
और बैठ जाती है, कुछ देर में आरती भी निचे आ जाती है,
आरती--- रात को कब आये थे तुम। जगाया भी नही और अब भी उठ कर नीचे आ गए अब भी नही उठाया।
रवि--- वो तुम गहरी नींद में थी तो डिस्टर्ब नही किया, सुबह भी मै जल्दी उठ गया तो नीचे आ गया।
आरती---हम्म्म्म।
सोनल---- गुड़ मॉर्निंग म्मा, आप की कितनी गहरी नींद होती है, जो आपको पापा के आने जाने का भी नही मालूम पड़ता। लगता है दिन में काफी मेहनत का काम करती हो आप जिससे थक जाती होगी।
आरति----हैन अरे नही बेटा मैं कहा काम करती हूं, काम तो सारा रामू काका करते है,
सोनल---- क्या रामू काका, मम्मी रामू काका कोनसा काम करते हैं? तंज कसते हुए।
आरती चोंक कर --- सोनलल्लल बेटा घर का काम की बात कर रही हु।
सोनल---- मम्मी मैं भी उसी काम की बात कर रही हु।
रवि----- ये क्या चल रहा है दोनो मा बेटी में।
अच्छा आरति आज चल रही हो क्या शोरूम?
आरती न चाहते हुए भी हां भरती है और रवि और आरति दोनो उठकर तैयार होने कमरे में चले जाते है।
फिर रवि और आरति नास्ता करके शोरूम के लिए निकल जाते है।
शोरूम पहुचने पर दोनो केबिन में जाते है।
रवि आरति की बैठने को कहता है और कुछ डॉक्यूमेंट निकालता है और आरती के सामने रख देता है,
आरती डॉक्यूमेंट देख कर कंफ्यूज हो जाती है,
आरती---- ये क्या है रवि।
रवि---- ये डॉक्यूमेंट एक नई शॉप के है, मैं एक फैक्टरी ओपन कर रहा हु आउटर सिटी में आरती गारमेंट्स के नाम से और उसमें आप एमडी रहेगी।
आरती---- मैं मैं नही बनना कुछ।
रवि--- क्या मैं मैं लगा रखी है अरे अब कार चलाना सिख रही हु बस राउंड करती रहना और घर मे कोनसा काम करती हो इसी बहाने तुमारा टाइम पास हो जाएगा।
रवि आरति को लेजाकर फैक्ट्री दिखाता है, और स्टाफ से मिलवाता है , उनमे एक व्यक्ति आरती को दिखायी देता है जिसका नाम लखन होता है एक दम राक्षस टाइप, लंबा चोड़ा सेहतमंद , रंग काला बिल्कुल डरावना, लेकिन रवि के सामने हाथ बाँधे खड़ा रहता है, और नजर भर के भी आरति की तरफ नही देखता।
सबके जाने के बाद आरती रवी से लखन के बारे में पूछती है, रवि उसे बताता है कि ये सबसे वफादार और भरोसेमंद आदमी है, और रवि के काम देखता है फैक्ट्री के।
इन सब कामो में दोनो को मालूम ही नही पड़ता कि कब शाम हो जाती है, फिर रवि आरति को लेकर घर के लिए निकलता है, लेकिन गाड़ी एक रेस्टोरेंट कम बार मे के लिए मोड़ देता है।

आरती एक अंजानी खुसी के पीछे भागने लगी थी वो बहुत खुश थी उसके चेहरे को ही देखकर यह लगता था। उसे पता ही नही था कि गाड़ी कहाँ जा रही थी आरती को इससे कोई मतलब नहीं था वो अपने विचारों में ही गुम थी पर जब गाड़ी किसी रेस्तरॉ में रुकी तो वो थोड़ा सा ठिठकि और रवि की ओर मुड़कर देखने लगी

रवि- अरे यार थोड़ा सा सेलिब्रेट भी तो करना है

आरती---घर चलते है वही सेलेब्रेट करेंगे सोनल के साथ।

रवि- अरे सोनल को छोड़ो वो तो उसे हम अलग से पार्टी दे देंगे। हमें तो आपके साथ सेलेब्रेट करना है चलो ।
और रवि और आरती दोनों रेस्टोरेंट में दाखिल हो गये बहुत कुछ आर्डर कर दिया और आखिर में एक-एक पैग भी आर्डर किया

आरती- दो किसलिए

रवि- एक मेरे लिए और एक तुम्हारे लिए

आरती- मेरे लिए पागल हो गये हो में नहीं पीउँगी
रवि- अरे यार स्कोच ही तो है एक में कुछ नहीं होता
आरती-- नहीं नहीं नशा हो गया तो बाप रे नहीं
तब तक वेटर पैग भी ले आया तो रवि ने एक तो अपने लिए उठा लिया और दूसरा आरती की ओर बढ़ा दिया
रवि- देखो कितने सारे लोग बैठे है और सभी लडीस या लड़कियाँ एक दो पेग पी रही है अरे यार कुछ नहीं होता

आरती- नहीं बस

रवि- तुम्हारी मर्ज़ी पर एक घुट तो ले ही सकती हो सिर्फ़ मेरी खातिर सेलेब्रेशन के लिए

आरती ने ग्लास उठ लिया और रवि ने चियर्स किया

रवि- नये एमडी और फैक्टरी के लिए
और हँसते हुए एक लंबा सा घुट मार लिया। आरती ने भी एक छोटा सा घुट लिया कोई बहुत बुरा स्वाद नहीं था पर डर था अंदर इसलिए ग्लास रख दिया

रवि- बुरा लगता हो तो छोड़ देना नहीं तो एक पेग में कुछ नहीं होता

आरती- नहीं घर में सोनल है अगर पता चल गया तो गजब हो जाएगा

रवि- अरे यार सोनल क्या कहेगी, अभी तक सो चुकी होगी। कुछ नहीं होता पी लो पर धीरे-धीरे

आरती भी सोचने लगी ठीक ही तो है कौन सा सोनल के पास जाना है और पी भी रही है तो अपने पति के साथ और उसी के कहने पर कोई दिक्कत हुई तो रवि तो है ही

खाना आने तक आरती ने धीरे-धीरे एक पेग खतम कर दिया था और रवि का साथ दे चुकी थी पर रवि ने दो और पेग आर्डर कर दिया। आरती गुस्से से रवि की ओर देखी वो दो पी चुका था फिर से दो क्यों

खाने के साथ ही आरती ने दो और रवि के तीन पेग पी चुके थे आरती का शरीर उड़ रहा था वो बिल्कुल बेफिक्र थी बहुत मजा आ रहा था आज पहली बार उसने शराब चखी थी या पी थी उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसके शरीर में एक अजीब सी फुर्ती आ गई थी वो रवि की हर बात पर बहुत ही ज्यादा चाहक रही थी या फिर जोर-जोर से हँस रही थी। रवि भी नशे की हालत में था वो देखकर ही अंदाज़ा लगा सकती थी पर वो तो खुद ही अपने काबू मे नहीं थी। चुननी कहीं जा रही थी और कदम भी ठीक से नहीं पड़ रहे थे

हां पर मजा बहुत आ रहा था वो और रवि लगभग झूलते हुए एक दूसरे को सहारा देते हुए बाहर अपनी गाड़ी पर आ गये थे और घर की ओर रवाना हो रहे थे

गाड़ी में बैठे ही रवि थोड़ा सा चुपचाप था पर आरती तो बिल्कुल बिंदास हो गई थी

आरती- चलो अब ड्राइवर

रवि- हाँ… कुछ मीठा हो जाए

आरती- यहां नहीं घर चलो

रवि- पति हूँ प्लीज थोड़ा सा बाकी घर में ठीक है

आरती- नहीं कोई देख लेगा नहीं

रवि- अरे यार देखने दे पति हूँ कोई ऐसा वैसा नहीं हूँ
और आरती के बिना पूछे ही उसने आरती के माथे के पीछे हाथ फँसा कर आरती को अपने पास खींच लिया और एक लंबा सा चुंबन उसके होंठों पर जड़ दिया आरती कुछ कहती तब तक तो हो चुका था जो होना था

आरती का पूरा शरीर सिहर उठा। रवि के बारे में उसकी धारणा एकदम से बदल गई थी वो भी तो एक जंगली की तरह ही था या सिर्फ़ दिखाने को ऐसा तो उसने कभी नहीं किया वो अवाक सी रवि की ओर देखती ही रह गई रवि हँसते हुए गाड़ी का इग्निशन ओन करके बड़ी ही सफाई से पार्किंग से निकला और कोई फिल्मी गाना गुनगुनाते हुए गाड़ी ड्राइव करने लगा

रवि- क्यों कैसा लगा

आरती- धात कोई देख लेता तो

रवि- कहो तो मैं रोड में ही गाड़ी रुक कर फिर से किस करू

आरती- नहीं कोई जरूरत नहीं है

रवि ने अचानक ही फिर से गाड़ी रोक ली और बिना किसी ओपचारिकता के फिर से आरती को अपनी ओर खींचकर एक लंबा सा चुंबन फिर से जड़ दिया और हँसते हुए गाड़ी चलाने लगा

आरती के होंठों पर भी एक हँसी फूट पड़ी और रवि के किस करने से जो थूक उसके होंठों पर लगी थी उसे चाट कर अपने मुख में ले लिया

आरती---आज तो बहुत रोमँटिक हो गये हो

रवि- आज में बहुत खुश हूँ आज से तुम मेरी बिज़नेस पार्ट्नर भी हो लाइफ पार्ट्नर भी हो और क्या चाहिए एक इंसान को अब में बाहर का काम देखूँगा और तुम यहां का

आरती- बाहर का मतलब

रवि- अरे यार अभी कुछ नहीं बस घर चले फिर तुम्हें बहुत प्यार करूँगा और फिर कहूँगा ठीक है

आरती थोड़ा सा शर्मा गई थी हाँ… उसे बहुत जरूरत थी रवि के प्यार की वो बहुत गरम हो चुकी थी किस ने तो जैसे आग में घी का काम कर दिया था पीने से तो वो बहुत उत्तेजित थी ही पर फिर किस उउउफफफ्फ़ जल्दी से घर आ जाए
घर पहुँचते ही कामया भी अपनी ओर से जल्दी से निकली और रवि भी पर जैसे ही डाइनिंग रूम को पार करने वाले थे कि सोनल को टेबल पर बैठे देखा तो दोनों चौक गए।
अरे सोनल बेटा सोई नही अभी तक---- रवि
नही,पापा tv देख रही थी,--- सोनल।
खाना खाओगे पापा,
नही बेटा खा कर आये है, तुम सो जाओ जल्दी tv बंध करके।
रवि पहले कमरे में निकल जाता है, आरति कुछ देर बाद लगभग दौड़ती हुई अपने कमरे में पहुँची तो देखकर सन्न रह गई। रवि तो बिस्तर पर लेट चुका था हिल भी रहा था मतलब सोया नहीं था उसका इंतजार कर रहा था वो जल्दी से अपने कपड़े लेके बाथरूम में घुसी और अपने को रवि के लिए तैयार करने लगी आज उसने रवि का लाया बेबीडोल वाली गाउन पहनी थी जो कि अंदर तो सिर्फ़ एक शमीज जितनी लंबी थी और बहुत ही महीन थी जाँघो के बहुत ऊपर ही खतम हो जाती थी
दो धागे समान स्टीप से बस उसे लटकाए हुए थे आरती के कंधे पर। आरती ने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपना मेकप भी थोड़ा सा ठीक किया और ऊपर गाउनका दूसरा हिस्सा जो कि पैरों तक जाता था पर था वो भी वैसा ही महीन पर ढकने को अच्छा था पहनकर अपने कमरे में वापस आ गई पर यह क्या कमरे में रवि के हल्के खर्राटे सुनाई दे रहे थे सो चुका था वो बेड के पास जाके रवि को एक दो बार धक्के भी मारे पर वो तो जैसे कुम्भकरण की नींद में था

उसे कोई चिंता ही नहीं थी जो भी बातें उसने गाड़ी में की थी या फिर आने तक की थी वो सब खतम वा फिर वो सब फालतू था आरती का दिमाग खराब होने को था वो वही बेड पर बैठ गई थी और रवि की ओर देखती रही उसने गुस्से में आके अपनी गाउन भी उतार दी और रवि को एक बार-बार फिर अपने हाथों से थोड़ा सा धकेला पर कहाँ रवि तो अपनी निद्रा में मस्त था अपनी इस दुनियां को छोड़ कर कही और ही पहुँच गया था पर आरती क्या करे वो तो कुछ और ही मूड में थी आज उसने पहली बार शराब भी पी थी और जो भी रवि रास्ते भर उसके साथ करता हुआ आया था
उससे उसके शरीर में एक भयानक आग लग गई थी वो उसे शांत करना चाहती थी पर रवि को उसकी कोई चिंता नहीं थी वो तो सो चुका था । आरती को इसी तरह मजधार में छोड़ कर आरती बेड के कोने में बैठकर अपने आपको कोष रही थी और रवि की ओर देखते हुए अपने भाग्य पर जो इतना इतरा रही थी वो सब यहां आने के बाद फुस्स हो जाता था वो गुस्से में अपनी चादर खींचकर अपने तकिये में मुँह छुपाकर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी


लाइट भी बंद करदी और सुबह से लेकर शाम तक की घटना को परत दर परत खोलने की कोशिश करने लगी सुबह से कितना अच्छा दिन निकला था हर किसी ने उसे कितना इज़्ज़त दी थी हर कोई उसके आगे पीछे घूमता हुआ नजर आया था हर कोई उसकी एक झलक पाने को उतावला था चाहे वो फैक्टरी में हो या फिर शोरुम में ही क्यों ना हो पर रात होते होते रवि ने सब कचरा कर दिया उसकी नजर में उसकी क्या इज़्ज़त थी वो जान गई थी उसकी नजर में आरती क्या थी वो जान गई थी
उसे कोई फिकर नहीं थी आरती की। उसे तो सिर्फ़ पैसा खर्च करना आता है या फिर पैसा कमाना आता है और कुछ नहीं पत्नी को खुश रखने के लिए वो पैसा खर्च जरूर कर सकता था पर टाइम नहीं उसके पास आरती के लिए टाइम नहीं था उसे आरती की कोई जरूरत नहीं थी थी तो बस अपनी फर्म को एस्टॅब्लिश करने के लिए एक इंसान की या फिर एक नौकर की नौकर जो कि उसके बातों में उठे और फिर उसके आनुरूप चले बस और कुछ नहीं

अचानक ही आरती के दिमाग में नौकर रामु काका की याद ताजा हो आई वो कैसे इस बात को भूल गई आज तो वो दिन में भी घर में नहीं थी दोपहर को भी रामू काका के साथ उसका मिलन नहीं हुआ था और नहीं ही मनोज अंकल के साथ वो ड्राइविंग ही सीखने गई थी

हन सच ही तो है वो भी कैसे इन दोनों को भूल गई वो तो हमेश ही तैयार मिलेंगे रामू तो घर का ही आदमी है जैसे ही आरती के जेहन में यह बात आई तो उसके शरीर में एक उत्तेजना की लहर फिर से दौड़ गई जो लहर वो अब तक दब चुकी थी। आरती से गुस्सा होकर पर जैसे ही रामू काका के बारे में सोचने लगी वो फिर से कामुक हो उठी वो अपने ही हाथों से अपनी चुचियों को चद्दर के नीचे दबाने लगी थी अपनी जाँघो को सिकोड कर अपने को शांत करने की कोशिश करने लगी थी अपनी सांसों को एक बार फिर से नियंत्रण में लाने की कोशिश करने लगी थी पर कहाँ जो उसने आज दिन भर नहीं किया था वो अब उसे बस लेटे ही लेटे शांत नहीं कर सकती थी उसे रामू काका के पास फिर से जाना ही होगा उसे आज किसी भी हालत में अपने तन को शांत करने जाना होगा नहीं तो वो शायद पागल हो जाए उसकी जाँघो के बीच में एक अजीब सी गुदगुदी से होने लगी थी वो सोच नहीं पा रही थी कि क्या करे पर कहते है ना जब इंसान इस तरह की स्थिति में हो तो उसके पास दो ही विकल्प होते है एक कठिन और एक आसान

उसने भी आसान तरीका ही चुना और धीरे से अपने बेड से उठी और एक नजर रवि के सोते हुए जिश्म की ओर डाली और पैरों में अपनी सॅंडल डालकर धीरे-धीरे कमरे के बाहर की ओर चल दी वो अपने को अब नहीं रोकना चाहती थी या कहिए रुक नहीं सकती थी वो अपने आप में नहीं थी उसे एक मर्द की जरूरत थी रोज उसके शरीर को मसलने के लिए उसे मर्द चाहिए ही था वो अब ऐसी ही हो गई थी चाहे वो रवि हो या फिर रामु काका हो या फिर मनोज अंकल ही क्यूँ ना हो उसे तो बस एक मर्द की चाहत थी जो उसके इस नाजुक और काम अग्नि से जल रहे तन की भूख को मिटा सके


वो एक बार पलटकर रवि की ओर देखा और बाहर निकल गई और हाँ… आज उसने एक काम और किया बाहर जाते हुए उसने डोर बाहर से लॉक कर दिया था बाहर का एक बार उसने ठीक से जायजा भी लिया अपने कदमो को वो रामू काका के कमरे की ओर ले जाने से नहीं रोक पा रही थी वो कुछ बलखाती हुई सी चल रही थी या फिर नशा शराब का था या उसके शरीर में उठने वाली सेक्स की आग का था पर उसकी चाल में एक मदहोशी थी उसके आँखें नम थी उनमें एक उम्मीद थी और एक सेक्स की भूख शायद अंधेरा ना होता तो और भी अच्छा से देखा जा सकता था वो बिल्कुल नशे की हालत में चलते हुए रामु काका के कमरे के बाहर पहुँच गई थी अंदर आज अंधेरा था शायद काका सो गये हो या फिर जाग रहे हो


चाहे जो भी हो वो रवि की तरह नहीं है वो जरूर उसकी जरूरत पूरी करेंगे नहीं तो उसकी छुट्टी कल से काम बंद सोचते हुए उसने बंद दरवाजे को हल्के से धकेला जो कि धीरे से खुल गया काका नीचे बिस्तर पर सोए हुए थे दरवाजे की आहट से भी वो नहीं उठे पर हाँ… उनके शरीर में एक हरकत जरूर हुई वो बेधड़क अंदर घुस गई और धीरे से रामु काका के पास बिस्तर के पास जाके घड़ी हो गई रामु काका अब तक दूसरी तरफ चेहरा किए सो रहे थे वो खड़ी-खड़ी सोच रही थी कि आगे क्या करे कैसे उठाए इस जानवर को हाँ जानवर ही था बस अपने मन की ही करता था और जैसे चाहे वैसे उसे आरती की कोई सुध लेने की जैसे जरूरत ही नहीं होती थी पर हाँ… उनका स्टाइल उसे पसंद था जो भी करे उसे अच्छा लगता था और बहुत अच्छा उसके तन और मन को शांति मिलती थी

वो थोड़ी देर खड़ी रही फिर अपने पैरों से धीरे से रामू काका के कंधे पर हल्के से से थपकी दी

आरती- काका एयेए
काका एकदम से पलटे उनका चहरा उसे नहीं दिखा हाँ… पर उसके यहां होने की संभावना उन्हें नहीं थी वो झट से उठकर बैठ गये कल की तरह आज भी वो ऊपर से नंगे थे और चद्दर से अपनी कमर तक ढँका हुआ था वो जैसे ही उठे उनका हाथ आरती की टांगों से लेकर जाँघो तक फिरने लगा

आरती- आआआआआह्ह ककयाआआआआआ हमम्म्मममममममममममम

वो खुरदुरे हाथ और दाढ़ी वाले चहरे का उसकी जाँघो पर घिसना आरती को एक लंबी सी आअह्ह निकालने से नहीं रोक पाया वो उत्तेजना की चरम पर एक झटके में ही पहुँच गई थी उसकी जाँघो के बीच में अजीब सी गुदगुदि होने लगी थी लिप्स आपस में एक दूसरे के ऊपर होने लगे थे जीब से अपनी सांसों को और चेहरा ऊपर उठाकर वो अपने आप पर कंट्रोल करना चाहती थी उसकी सांसें कमरे में एक अजीब सी हलचल मचा रही थी नीचे रामू काका अपने काम में लगे थे अपने हाथों में आई इस हसीना को अपने हाथों से घुमा-घुमाकर हर एक अंग को ठीक से तराशी हुई जगह को अपने हाथों से देख रहे थे वो आरती की कमर तक पहुँच गये थे और अपने होंठों से उन सारी जगह से जहां से वो होकर आए थे अपनी छाप छोड़ते हुए जा रहे थे अपनी होंठों से अपनी जीब से वो आरती के हर अंग को चूम रहे थे और जीब से चाट कर उसका रस सेवन कर रहे थे

आरती का पूरा शरीर जल रहा था और अब तो काका ने अपनी उंगली भी उसकी चुत में फँसा दी थी एकदम से चिहुक कर आरती ने अपनी दोनों जाँघो को थोड़ा सा अलग किया और काका की उंगलियों को अपने अंदर और अंदर तक जाने का न्योता दिया वो अपनी उंगलियों से काका के बालों खींचकर अपने पेट के चारो ओर घुमा रही थी, और जोर-जोर से सांसें ले रही थी वो अपना चहरा उठाकर सीलिंग की ओर देखती हुई नीचे हो रही हर हरकत को अपने जेहन में समाती जा रही थी आरती के होंठों से अचानक ही एक लंबी सी चीख निकल गई थी जब काका ने अपनी जीब उसकी चुत के ऊपर से फेरी

आरती के हाथों में जाने कहाँ से इतना जोर आ गया था कि वो काका के माथे को अपनी जाँघो के पास और पास खींचने लगी थी और उधर काका भी आरती के इशारो को समझ कर पूरे जोश के साथ आरती की चुत पर टूट पड़े थे वो अपनी जीब से ठीक उसके ऊपर दो तीन बार घुमाकर अपनी जीब को धीरे-धीरे अंदर तक घुसाने की कोशिश में लगे थे । आरती भी काका का पूरा साथ दे रही थी काका के घूमते हुए हाथों को वो भी दिशा देने की कोशिश करने लगी थी अपने नंगे बदन के हर हिस्से को काका के हाथों की भेट चढ़ाना चाहती थी जो सुख उसे अभी मिल रहा था वो काका के हाथों के स्पर्श से और भी बढ़ जाता था वो अपने आप पर काबू पाना चाहती थी पर काका के होंठों और जीब के आगे वो बिल्कुल अपाहिज थी उनकी हर हरकत से वो उछल पड़ती और जोर-जोर से सांसें फैंकती या फिर जोर से अपने होंठों को भिच कर अपने होंठों से से निकलने वाली चीख को दबा लेती पर ज्यादा देर वो यह कर नही पाई थी काका की एक हरकत से वो अपनी जगह पर से हिल गई थी और अपने हाथों की पकड़ को वो काका के माथे पर और भी सख़्त कर अपनी जाँघो के बीच में जोर से भिच लिया और एक लंबी सी चीख उसके मुख से अनायास ही निकल गई और अपनी जगह से गिरने को हुई


पर तभी एक जोड़ी हाथों ने उसे संभाल लिया और उसकी चीख को भी अपने होंठों के अंदर दबाकर उसे कमरे से बाहर जाने से रोका अब उसके शरीर में दो जोड़ी हथेली घूम घूमकर उसके शरीर की रचना को देख रही थी आरती को इस अचानक आए इस बदलाब का अंदाजा भी नहीं लगा और वो उस स्थिति में थी वो घूमकर अपने पीछे आए उस सख्स को धकेलने की कोशिश कर रही थी जो कि अपने हाथों से उसे बड़े ही प्यार से सहला रहा था और उसके गाउनके अंदर तक अपने हाथों को पहुँचा कर, उसकी चुचियों को अपनी जकड़ में ले आया था वो अपने होंठों से आरती के होंठों को सिले हुए अपनी जीब को उसके मुख में घुमाकर उसे और भी उत्तेजित कर रहा था जब उसकी अपनी अधखुली आखो से अपने पीछे आए उस सख्स पर नज़र गई तो एक बार चौंक गई थी वो तो रामू काका थे तो नीचे कौन था जो कि उसे परम आनंद के सागर में गोते लगा रहा था वो अपने मुकाम पर पहुँचने ही वाली थी वो किसी तरह से अपनी गर्दन घुमाने की कोशिश करती पर उसमें इतना जोर नहीं था

वो दो बहुत मजबूत हाथों के गिरफ़्त में थी जो कि उसके हर अंग को छू रहे थे और और निचोड़ भी रहे थे उसके हर अंग ने अब उसका साथ देना छोड़ दिया था वो अब पूरी तरह से दोनों मर्दो के सुपुर्द थी और वो दोनों जो चाहते थे वो कर रहे थे आरती की चीखे लगातार बढ़ती जा रही थी पर वो कही काका के मुख के अंदर घूम हो जाती थी काका उसके होंठों के साथ लगता था कि उसके पूरे चहरे को ही अपने मुख के अंदर ले लेना चाहते थे नीचे बैठे उस इंसान ने तो कमाल कर दिया था उसने आरती की दोनों जाँघो को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया था और उसके पैर अब जमीन पर नहीं थे वो गिर जाती अगर रामू काका ने उसे ऊपर से कस कर जकड़ नहीं रखा होता अब वो हवा में अपनी जाँघो को उसे सख्स के कंधों पर रखे हुए अपनी कमर को उचका कर उस इंसान के मुख पर जोर-जोर से धक्के मार रही थी और अपनी छाती को आगे की और बढ़ा कर अपने शरीर को और भी धनुष जैसे करती हुई अपनी चरम सीमा की ओर आग्रसर होने लगी थी उसके पूरे शरीर में एक सिहरन के साथ एक बहुत बड़ी सी उथल पुथल मची हुई थी वो अपने एक हाथ से नीचे उस सख्स को अपनी योनि में घुसाने की कोशिश कर रही थी और एक हाथ से उसपर खड़े हुए काका को अपने होंठों के पास खींच कर अपनी जीब से उनके मुख का स्वाद लेने में लगी थी अचानक ही उसके शरीर मे एक जबरदस्त निचोड़ आया और वो वैसे ही हवा में अपने शरीर का साथ छोड़ कर लटक गई उसके शरीर में अब कोई जान नहीं बची थी वो एकदम निढाल हो चुकी थी

वो दोनो मर्दों के बीच में अपने शरीर को नहीं संभाल पाई थी जाने कौन था वहाँ पर जो भी था उसने उसे वो आंजाम दिया था जिसे वो चाहती थी उसका शरीर पसीने में लत पथ रामू काका के सहारे था और वो अब अपने होंठों को धीरे-धीरे आरती के होंठों से अलग भी करते और धीरे से फिर से अपने होंठों में दबा भी लेते आरती तो जैसे जन्नत की सैर कर रही थी नीचे से वो सख्स अभी भी उसकी योनि से निकल रहे हर ड्रॉप को अपनी जीब से चाट कर अपने मुख में भर रहा था जैसे कि कोई सहद का एक भी ड्रॉप वो वेस्ट नहीं करना चाहता था उसकी मजबूत पकड़ से वो पूरी तरह से उसकी गिरफ़्त में थी और उसे कोई चिंता नहीं थी कि वो गिर जाएगी उसकी जांघे अब भी उस सख्स के कंधे पर ही थी और कमर के ऊपर का हिस्सा रामु काका की गिरफ़्त में वो पूरी तरह से सुरक्षित थी हवा में भी


पर अब धीरे-धीरे नीचे वाले सख्स की पकड़ ढीली होने लगी थी और उसने धीरे से आरती की दोनों जाँघो के बीच से अपने चहरे को निकाल लिया था और किसी बहुत ही नाजुक चीज की तरह से आरती को उठाकर वही नीचे बिस्तर पर लिटाने लगा था ऊपर से रामू काका भी उस इंसान का साथ दे रहा था वो भी अब धीरे से आरती को उठाकर अपने हाथों को उसकी चुचियों पर रखकर आरती को बिस्तर पर लिटाने की कोशिश करने लगा था आरती को जैसे अपने शरीर के अंदर उठ रहे उफान को ठंडा करने वाले का चहरा देखना था आखिर कौन था वो जो काका के कमरे में उनके पहले से आके लेटा हुआ था पर उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी उसकी आँखें नहीं खुल रही थी उन दोनों ने उसे निचोड़ कर रख दिया था वो एक सुख के समुंदर में गोते लगा रही थी वो अब जमीन पर उस सख़्त के बिस्तर पर पड़ी हुई थी जहां उसकी नाक में सड़न की गंध भी आ रही थी और पसीने की भी वो निढाल सी लेटी हुई थी और दो सख्स का अपने पास बैठे हुए होने का एहसास भी कर रही थी कोई भी बातें नहीं कर रहा था बस दो जोड़ी हाथ एक बार फिर से उसके शरीर पर घूमने लगे थे और बहुत ही धीरे-धीरे शायद उसकी नजाकत को देखते हुए आरती का यह पहला एहसास था दो जोड़ी हाथ उसके शरीर के चारो ओर घूमते हुए उसे वो आनंद दे रहे थे कि जिसका कि उसने कभी भी अनुमान तक नहीं लगाया था वो वैसे ही निश्चल और निढाल पड़ी हुई उन हथेलियो को अपने शरीर पर घूमते हुए महसूस कर आई थी और फिर से अपने आपको एक बार फिर से काम अग्नि की भेट चढ़ाने को तैयार हो रही थी उसके हाथ पाँवो में एक बार फिर से जान पड़ने लगी थी वो अपने को फिर से उत्तेजित महसूस करने लगी थी वो कमर के नीचे बिल्कुल नंगी थी और ऊपर नाम मात्र के गाउनसे ढँकी हुई थी दो जोड़ी हाथ उसके गाउनको भी उतारने में लगे थे और उन्हें कोई नहीं रोक सकता था और जो रोक सकता था वो तो खुद उनकी इच्छा में शामिल थी वो अपनी सांसों को फिर से बढ़ने से रोकने लगी थी और शरीर की हलचल को भी धीरे-धीरे अपने अंदर तक ही समेट कर रखना चाहती थी पर वो किसी ना किसी तरह से उसके शरीर में या फिर उसकी सांसों से प्रदर्शित हो ही जाता था एक होंठ उसके होंठों से जुड़े और बहुत ही प्यार से उनको चूमकर अलग हो गये

- कैसा लगा बहू

आरती- हमम्म्ममम।
Reply
08-27-2019, 01:28 PM,
#36
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
फिर उसका चहरा घुमा एक हाथों ने घुमाया और फिर से दूसरी तरफ से एक होंठों ने उसके होंठों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और बहुत देर तक उनको अपने होंठों के बीच में लेकर चूमता रहा उसके शरीर में एक साथ बहुत से हाथ और होंठ घूमने लगे थे जहां भी वो महसूस कर पाती वहां एक हथेलियाँ जरूर होती थी

- बहू आज लाखा मेरा भाई भी आया है ये भी अब शहर काम करने आया है और आज से यही इस घर में रहेगा हुहम्म्म्मममममममममम
और एक बार फिर से वो दूसरे सख्स ने उसके होंठों को अपने कब्ज़े में ले लिया अच्छा तो वो लाखा काका थे जो कि रामु काका के बिस्तर पर सोए हुए थे अब तो आरती के शरीर में फिर से एक अजीब सी स्फूर्ति आ गई थी आज का पल वो खोना नहीं चाहती थी उसकी चुत में फिर से हलचल होनी शुरू हो गई थी और रामू काका तो उसे किस कर रहे थे पर लाखा काका तो फिर से अपनी उंगली उसकी चुत में डाले उसे फिर से उत्तेजित करने में लगे थे रामु काका उसे किस करते हुए उसकी चूचियां निचोड़ रहे थे जो कि उसे आज बहुत ही अच्छा लग रहा था और नीचे लाख काका भी उसकी चुत के अंदर अपनी उंगलियों को बहुत ही तेजी से अंदर बाहर कर रहे थे अचानक ही लाखा काका ने उसकी जाँघो को अलग किया और अपने लण्ड को एक ही झटके में उसके अंदर तक उतार दिया। आरती बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इस तरह के बरताब के लिए और एक लंबी सी चीख उसके मुख से निकली जो कि झट से रामू काका ने अपने मुख के अंदर लेके कही गुम करदी अब लाखा काका नीचे से उसकी चुत के अंदर-बाहर हो रहे थे और बहुत ही तेजी के साथ हो रहे थे जिससे कि उसका पूरा शरीर ही बिस्तर पर ऊपर-नीचे की ओर हो रहा था पर रामू काका की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जैसे वो उसे उनके हाथों से छोड़ना ही नहीं चाहते हो वो कस कर आरती को छाती से जकड़े हुए अपने होंठों से आरती के होंठों को पी रहे थे और बहुत ही बेदर्दी से उसकी चूचियां को दबा भी रहे थे आरती के मुख से निरंतर चीख निकल रही थी और उसकी चुत में एक बार फिर से तूफान आने लगा था पर वो सांसें भी नहीं ले पा रही थी रामू काका और लाखा काका ने उसे इतनी जोर से जकड़ रखा था कि वो हिल भी नहीं पा रही थी बस उनकी मर्ज़ी की हिसाब से उनके हाथों का खिलोना बनी हुई थी लाखा काका तो जैसे जंगलियो की तरह से उसे भोग रहे थे वही रामू काका भी बहुत ही उत्तेजित से दिख रहे थे वो अब आरति के होंठों को काटने भी लगे थे और उसकी जीब को खींचकर अपने होंठों के अंदर तक ले जाते थे आरती की जान निकल गई थी। उसके शरीर का रोम रोम उसके हाथों के सुपुर्द था और जैसा वो दोनों चाहते थे कर रहे थे कोई डर नहीं था उनके मन में ना कोई चिंता बस अपने हाथों में आई इस हसीना को चीर कर रख देना चाहते थे

लाखा काका की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी जैसे कि वो अपने मुकाम पर पहुँचने ही वाले थे पर जाने क्या हुआ कि रामू काका की पकड़ अचानक ही उसके सीने पर से थोड़ी ढीली हुई और

रामू- लाखा हट अब मुझे करने दे

लाखा- अरे रुक जा बस थोड़ी देर

रामू- अरे हट ना साले तू ही करेगा क्या मुझे भी मौका दे साले

लाखा- रुक यार साली दोनों को खुश किए बिना कहाँ जाएगी बस हो गया तू मुँह में डाल दे जबरदस्त चूसती होगी । डाल साली के मुँह में

आरती नीचे पड़ी हर धक्के में कोई ना कोई आवाज सुन जरूर रही थी पर धक्के इतने जबरदस्त होते थे कि पूरी बातें उसे सुनाई नहीं दी थी पर हाँ इतना जरूर था कि दोनों एक दूसरे को हटाकर उसे चोदना चाहते थे पर अचानक ही उसके मुख से चीख निकलती, वही रामू काका ने जबरदस्ती उसके बालों को खींचकर अपने लण्ड पर उसका मुख रगड़ने लगे थे उसकी सांसों को एकदम से बंद कर दिया था रामू काका के उतावले पन ने पर उनके जोर के आगे वो कहाँ एक ही झटके में उसके मुख में रामु काका का लंबा और सख़्त सा लण्ड समा गया था वो गूओगू करती हुई अपने को संभालती तब तक तो रामू काका के हाथों के जोर से वो खुद आगे पीछे होने लगी थी आरती का शरीर अब अपने शिखर पर पहुँचने ही वाला था और इस तरह से छीना झपटी और बेदर्दी उसने पहली बार सहा था जिससे की वो कुछ ज्यादा ही जल्दी झड़ने लगी थी वो अपने चेहरे को रामू काका के लण्ड से अलग करने की कोशिस करने लगी थी और कमर के हर एक झटके के साथ ही वो दूसरी बार झड़ने लगी थी लाखा काका भी झड़ गये थे पर अभी भी लगातार झटके लगा रहे थे इतने में

रामू- साले हट हो तो गया
और उसने लाखा को एक धक्का दिया और उसे पीछे की ओर धकेल दिया और जल्दी से अपने लण्ड को निकाल कर आरती की जाँघो के बीच में बैठ गया और किसी ओपचारिकता के बिना ही एक ही झटके में अपना लण्ड उसके अंदर तक उतार दिया आरती जो कि झड चुकी थी और अपनी सांसों को नियंत्रण करने में लगी थी इस अचानक आक्रमण के लिए तैयार नहीं थी पर अब क्या हो सकता था रामू काका तो जानवरो की तरह से उसे चोद रहे थे उन्होंने कसकर आरती को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर टूट पड़े थे और जम्म कर अपने पिस्टन को अंदर-बाहर कर रहे थे इतने में लाखा भी रामु को उससे अलग करने लगा था तो रामु की पकड़ थोड़ी सी ढीली हुई पर एक और मुसीबत उसके सामने थी लाखा काका ने अपने लण्ड को उसके मुख में घुसा दिया उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि उसे कैसा लगेगा वो दोनों अपने हिसाब से उसे मिल बाँट कर खा रहे थे और वो भी बिना किसी ना नुकर के सब झेल भी रही थी उसके मुख में जैसे ही लाखा काका ने अपना लण्ड डाला उसे उबकाई सी आने लगी थी पर लाखा काका ने जोर से उसका माथा पकड़ रखा था और अपने लण्ड को आगे पीछे कर रहे थे उधर रामु काका भी अपने पूरे जोर से आरती को चोद रहे थे या कहिए अपना गुस्सा निकाल रहे थे जो भी हिस्सा उनके हाथों में आता उसे मसलकर रख देते थे या फिर जो भी हिस्सा उसके होंठों में आता वहां एक काला दाग बना देते थे आरती तो जैसे मर ही गई थी उनकी हरकतों के आगे वो कुछ भी नहीं कर पा रही थी बस हर धक्के में आगे या फिर पीछे हो जाती थी और लाखा काका के लण्ड को अपने गले तक उतरते हुए महसूस करती थी वो कब झड़ गई उसे पता नहीं चला पर हाँ… थोड़ी देर बाद दोनों शांत होकर उसके शरीर के हर हिस्से सटे हुए थे वो अब भी खाँसते हुए सांस ले रही थी पर वो दोनों तो जैसे मर ही गये थे उसके शरीर को किसी गद्दे की तरह समझ कर वही सो गये थे वो भी बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी और उसके जेहन में कोई भी बात आने से पहले ही वो भी वही सो गई
वो सो क्या गई बल्कि कहिए निढाल हो चुकी थी उसका शरीर और दिमाग़ बिल कुल सुन्न हो गया था जिस तरह से रामू और लाखा काका ने उसे यूज़ किया था वो एक खतर नाक मोड़ पर थी वो अपने आपको किस तरह से संभाले वो नहीं जानती थी

उसके शरीर के ऊपर दोनों किसी मुर्दे की तरह लेटे हुए थे और अपने मुख से निकलने वाली लार से उसे भिगो रहे थे और अपने हाथों से उसे जाने नहीं देना चाहते थे वो सोई हुई अपनी परिस्थिति को समझने की और अपने आपको इस तरह की परिस्थिति से अलग करने के बारे में कही अपने जेहन में सोच रही थी पर उसके हाथों और पैरों में इतनी ताकत
ही नहीं बची थी कि वो अपने को हिला भी सके और ऊपर से यह दो राक्षस उसके ऊपर उसे अभी तक कस के पड़े हुए थे उनकी सांसें अब भी उसके शरीर पर पड़ रही थी आरती बिल्कुल नंगी थी उसके शरीर में जहां तहाँ लाल काले धब्बे उभर आए थे पर उसे कोई होश नहीं था वो तो बेसूध सी पड़ी हुई थी थोड़ी देर बाद उसे अपने नीचे की ओर कोई हरकत होते सुनाई दी रामू काका थे या लाखा काका थे पता नहीं पर जो भी था वो आगे की ओर जो सख्स था उसे हिलाकर उठा रहा था
- ओये लाखा उठ बहू को उसके कमरे में छोड़ देते है।
लाखा- हाँ… अरे रुक यार थोड़ी देर रुक जा देखने दे

और दोनों झुक कर आरती को छूकर देख रहे थे शायद जानना चाहते थे कि जिंदा है कि मर गई आरती भी थोड़ा सा कसमसाई उनके हाथों के आगे

रामू- बहू उठो और अपने कमरे में जाओ बहुत देर हो गई है

आरती- हाँ… उूउउम्म्म्म और एक बड़ी सी अंगड़ाई लेकर फिर से सिकुड़ कर सो गई

लाखा- अभी मन नहीं भरा यार और देख इसे भी कोई फरक नहीं पड़ता थोड़ी देर रुक जा ना फिर आपण दोनों छोड़ आएँगे
और झुक कर आरती के चहरे को अपनी हथेलियो के बीच में लेकर उसके होंठों को चूसने लगा था बड़े ही प्यार से उसके मुख के अंदर तक अपनी जीब को ले जाकर लाखा आरति को बहुत देर तक किस करता रहा उसे इस तरह से देखकर रामु भी अपने हाथ आरती की जाँघो के चारो ओर घुमाने लगा था उसके हाथों में आई इस सुंदरी का वो हिस्सा लगता था वो किसी के साथ शेयर करने के मूड में नहीं था वो अपने होंठों को भी जोड़ कर आरती की जाँघो और टांगों को फिर से किस करने लगा था और ऊपर से लेकर पैरों के तले तक किस करते हुए जा रहा था आरती जो कि अब भी अपनी दुनियां से दूर अपने ऊपर हो रहे इस नये आक्रमण को धीरे-धीरे बढ़ते हुए सहन कर रही थी पर इस बार दोनों के हाथों और होंठों में जानवर पना नहीं था प्यार था और बहुत ही नर्मी से पेश आ रहे थे वो अपने आपको कभी सीधा तो कभी उनके किसके साथ अपने शरीर को इधर उधर करती जा रही थी उनके हाथों और उंगलियों के इशारे वो भी समझ रही थी पर जान तो बिल्कुल बची ही नहीं थी वो चाह कर भी उन दोनों को रोक नहीं पा रही थी वो इतना थक चुकी थी कि अपने हाथ पैरों को भी सीधा करने के लिए उसे बहुत ताकत लगानी पड़ रही थी पर ना जाने क्यों उसे दोनों के इस तरह से अपने जिस्म से खेलते हुए देखकर अच्छा लग रहा था वो अपने शरीर पर होने वाली हर हरकत को सहने को तैयार हो रही थी उसके अंतर्मन में एक आग फिर से भड़क ने लगी थी उसने अपने हाथों को फिर से आगे करके लाखा काका को छूने की एक कोशिश की लाखा जो की उसके होंठों को चूमने में लगा था

अचानक ही आरती के शरीर में हुई हरकत से थोड़ा सा ठिठका पर जैसे ही आरती की हथेलिया उसके सिर के चारो ओर गई वो अस्वस्त हो गया कि आरति को कोई आपत्ति नहीं है वो फिर से अपने काम में जुट गया आरती की टांगों में भी धीरे-धीरे जान फुक रहा था रामू और अपने होंठों से उसके हर कोने को चूमने की कोशिश कर रहा था और आरति भी अब धीरे से अपनी टांगों को मोड़कर या फिर थोड़ा उँचा करके उसे अपने यौवन कर रस पिला रही थी रामू को भी पता चल गया था कि आरती को कोई आपत्ति नहीं है सो वो भी आरती के शरीर पर फिर से टूट पड़ा था अब तो दोनों फिर से आरती के शरीर को रौंदने लगे थे अपनी हथेलियो से और होंठों से जहां मन करता वहां किस करते और जहां मन करता वहाँ जोर से दबाते या फिर सहलाते लाखा काका तो ऊपर से आरती को किस करते हुए उसकी चुचियों पर आके रुक गये थे पर रामु काका उसकी टांगों से लेकर उसकी कमर तक आ चुके थे वो अपनी जीब को निकाल कर अब आरती की नाभि में झुका हुआ था और अपनी जीब को जहां तक हो सके वो उसके अंदर तक घुसा देना चाहता था वो अब भी आरती को अपनी गोद में लिए हुए था उसकी कमर से वो आरती को अपने लण्ड के ऊपर रखे हुए धीरे-धीरे अपने काम को अंजाम दे रह था और ऊपर लाखा भी आरती को अपनी दोनों बाहों में कसे हुए उसकी एक चूची को अपने होंठों के अंदर लिए हुए जम कर चूस रहा था वो अपने हाथों से दूसरी चुचि को धीरे धीरे दबा के उन्हें भी खुश करने की कोशिश कर रहा था

रामू भी अब तक उसकी नाभि को छोड़ कर आरती के शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर चल दिया था होंठों को उसके शरीर से बिना अलग किए वो अब भी आरती को बेतहाशा किस करते जा रहा था और आरती जो कि बस किसी तरह से अपने ऊपर हो रहे इस दोहरे आक्रमण को झेल रही थी अब फिर से काम अग्नि के भेट चढ़ने वाली थी उसके शरीर में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर बहुत ही गति से फेलने लगी थी वो अपनी सांसों को फिर से अपनी नाक और मुख से जोर से छोड़ने लगी थी और रामू काका और लाखा काका की हर हरकत पर फिर से अपने शरीर को मरोड़ कर उनकी हरकतों का आनंद लेने लगी थी वो जानती थी कि अब की बार वो दोनों को अपने जहन में उतारने में उसे कोई दिक्कत नहीं होगी और वो अपने को उस एनकाउंटर के लिए बिल्कुल तैयार कर रही थी वो अब अपने मुख से निकलने वाली सिसकारी को भी सुन सकती थी जो कि कमरे में बहुत ही तेजी से फेल रही थी


रामु अपने आपको आरती की चुचियों तक ले जाने में कोई देरी नहीं करना चाहता था और वो पहुँच भी गया लाखा को थोड़ा सा हटाकर उसने भी एक चुचि पर अपना कब्जा जमा लिया अब तो दोनों लाखा और रामू ने जैसे आरती को आपस में बाँट लिया हो दोनों अपने-अपने हिस्से को चूमकर और चाट कर आरति के हर अंग का स्वाद लेने में लगे हुए थे
आरती को भी जैसे जन्नत का मजा आने लगा था दोनों जिस तरह से उसकी चूचियां चुस्स रहे थे वो उसके लिए एक नया और और बिल कुल अनौखा अनुभव था दो होंठ उसकी एक-एक चुचि को अपने मुख में लिए हुए उसका रस चूस रहे थे और दोनों ही बिल्कुल अलग अलग अंदाज में दोनों के हाथों का दबाब भी अलग था और सहलाने का तरीका भी आआआआअह्ह
एक लंबी सी सिसकारी आरती के मुख से निकलकर पूरे कमरे में फेल गई उसकी सिसकियो में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना थी वो अब लाखा काका और रामू काका की गिरफ़्त में भी मचल रही थी जैसे ही दोनों के चूसने की रफ़्तार बढ़ने लगी थी रामू और लाखा आरती को सहारा देकर अब उठा चुके थे और दोनों ओर से उसे घेरे हुए उसकी चुचियों को ऊपर उठाकर चूस रहे थे वो एक-एक निपल्स को मुख में डाले हुए जोर-जोर से चूसते जा रहे थे और बीच बीच में पूरा का पूरा चुचि को अपने मुख के अंदर घुसाकर जोर से काट भी लेते थे और अपने हाथों से बाहर निकाल कर जोर से दबा भी देते थे आरती का सिर ऊपर हवा में लटका हुआ था पर साँसे अभी भी बहुत तेजी चल रही थी दोनों अपने हिस्से का काम बहुत ही सही अंदाज से अंजाम दे रहे थे रामू और लाखा ने आरती को अपनी एक-एक जाँघ के सहारे बैठा रखा था और अपने एक-एक हाथों को भी उसकी पीठ पर फेर रहे थे दूसरे हाथ से दोनों आरति को चुचियों से लेकर जाँघो तक और फिर टांगों के तले तक सहलाने में व्यस्त थे

आरती के शरीर में उठने वाली वासना की तरंगे अब उसके बस से बाहर थी वो अपने शरीर को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और अपने मुख से जोर से सांसें लेते हुए अपनी सिसकारी और अह्ह्ह को रोकने की जी भर के कोशिश करती जा रही थी पर वो उसके मुख से फिसलते हुए पूरे कमरे को भरती जा रही थी उसकी सिसकारी जब तेज होने लगी तो अचानक ही एक जोड़ी होंठों ने उसे अपने होंठों के अंदर लेके बंद कर दिया अब आरती फ्री थी कितना भी जोर से सिसकारी लेने को वो कौन था इससे उसे फरक नहीं पड़ता पर जो भी था उसे किस करना आता था और बहुत ही अच्छे ढंग से किस करना आता था अब तो वो बिल्कुल उत्तेजित थी होंठों के बीच में जब भी वो अपनी जीब से उसके मुख के अंदर चुभलाने लगता तो वो मस्त हो करके अपने सीने को और आगे बढ़ा देती वो जो सख्स उसकी चूचियां अपने मुख लिए हुए था वो भी कस कर उसकी चूचियां अपने एक हाथ से थामे दूसरे से उसे चूसते जा रहा था अब तो दोनों की उंगलियां धीरे धीरे उसकी चुत के अंदर-बाहर भी होने लगी थी पर दोनों बारी बारी से उसकी चुत के अंदर-बाहर कर रहे थे उसकी चुत रस से भरी हुई थी और अब अपने अंदर की चाह को मिटाने के लिए उत्तेजित भी थी और लाखा तो जैसे अब अपनी पर ही उतर आया था
वो आरती को अपने सीने से लगाए हुए जोर से भीचे हुए उसकी चुचियों को और निपल्स को अपने दाँतों से काट-ता जा रहा था और जोर से अपनी उंगली को उसकी चुत में घुसाता जा रहा था लगता था कि जैसे उसकी अंतिम सीमा तक पहुँचना चाहता था उधर रामू भी अपनी उत्तेजना को नहीं रोक पा रहा था और आरती को बाहों में भरे हुए उसके होंठों पर लगा हुआ था एक हाथ में उसके कभी-कभी लाखा के छोड़ने से एक चुचि आ जाती थी तो उसे वो बहुत जोर से निचोड़ता था उसे कोई डर नहीं था क्योंकी उसने आरती का मुख बंद कर रखा था वो कोई भी अब धीरे नहीं कर रहा था वो भी जानवर हो चुका था और बहशी के समान आरती को निचोड़ने में कोई नहीं रहा था वो भी अपनी उंगली को आरती की जाँघो के बीच में घुसाता था पर जब वहां लाखा की उंगलियां होती थी तो आरती की जाँघो को सहलाकर वापस अपने लिए जगह बनाता था दोनों के हिस्से में आए आरती का शरीर को दोनों अपने तरीके से सहला रहे थे और जोर से उसे इश्तेमाल करते जा रहे थे पर अचानक ही लाखा एकदम से आरती की जाँघो के बीच में पहुँच गया और बिना किसी पूर्व चेतावनी के ही एक ही धक्के के उसके अंदर तक समा गया वो अचानक ही आरती के पूरे शरीर को अपने गिरफ़्त में लेने को हुआ और रामू के हाथों से छुड़ा कर उसने आरती को अपनी बाहों में भर कर अपनी गोद में बिठा लिया था और आरती की गर्दन और गालों को चूमे जा रहा था पर आरती का पूरा शरीर जैसे लटका हुआ था वो जब तक कुछ करती तब तक तो लाखा ने उसपर पूरा नियंत्रण कर लिया था और उसके होंठों को भी ढूँढ़ कर अपने होंठों से दबा लिया था लाखा घुटनों के बल बैठा हुआ कामया को गोद में लिए हुए झटके लगाता जा रहा था और हर धक्के में आरती उसकी गोद में उच्छल कर उसके कंधे से ऊपर चली जाती थी रामू जो कि वही पास बैठे हुए लाखा को अपनी हरकत करते हुए देख रहा था और अचानक अपने हाथों से आरती के निकल जाने के बाद सोच ही रहा था कि कहाँ से अपना कब्जा शुरू करे तभी आरती पीछे की ओर धनुष जैसे हुई तो रामू ने लपक कर आरती को अपने हाथों से सहारा दिया और कसकर फिर से आरती के होंठों पर झुक गया वो भी अपने को किसी तरह से रोके हुए था पर आरती को इस तरह से उछलते हुए देखकर वो भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और वो भी एक बहशी बन गया था वो जोर-जोर से आरती को चूमे जा रहा था और अपनी दोनों बाहों को आरती के शरीर के चारो ओर घेर कर अपने सीने से कस के लगाए हुए था लाखा भी अपने पूरे जोर से आरती की कमर को जकड़े हुए नीचे से धक्के लगाते जा रहा था और लाखा आरती को चूमते हुए देखता जा रहा था शायद वो अपने चरम सीमा की ओर पहुँचने ही वाला था क्योंकी उसके धक्के अब बहुत ही गतिवान हो गये थे और वो आरती को थोड़ा सा ऊपर करके लगातार धक्के लगा रहा था
और उधर रामू भी अपने आपको और ज्यादा नहीं रोक पाया तो वो आरती के पीछे की ओर हो गया और पीछे से अपने लण्ड को आरती के चुतरो को छू रगड़ने लगा था और लाखा की ओर देखते हुए

रामू- लाखा, अब छोड़ मुझे भी करना है

लाखा आआह्ह रुक जा यार बस हो गया

रामू को कहाँ शांति थी उसने एक बार अपने हाथों को आरती और लाखा के बीच में डाल ही दिया और आरती की कमर को पकड़कर एक ही झटके में आरती को अपने पास खींच लिया आरती जो कि एक लाश के समान थी एक ही झटके में रामू की गोद में पहुँच गई और लाखा काका के हाथों से छूट गई अब वो पीछे से रामू काका की गोद में पहुँच गई थी और एक फ्रॉग की तरह से नीचे गिर पड़ी पर गिर पड़ी क्या लाखा कहाँ छोड़ने वाला था उसने आरती को झट से खींच कर अपने हाथों से संभाला और उसके चहरे को अपने लण्ड के आस-पास घिसने लगा और रामू ने देर नहीं की और झट से आरती के पीछे से उसकी चुत में झट से घुस गया और क्या अपने जोर से उसे लगा जैसे कि अपनी हवस को अंजाम देने की कोशिश कर रहा हो वो बहुत उत्तेजित था उसकी हरकतों को देखकर ही कहा जा सकता था उसे कोई चिंता नहीं थी ना तो आरती की और नहीं लाखा की वो तो बस आरती के अंगो को पीछे से निचोड़ता हुआ अपने लण्ड को आरती की चुत में बिना किसी रोक टोक के लगातार अंदर और बहुत अंदर तक जा रहा था आरती जो की अब दोनों ओर में अटकी हुई थी अब उसके मुख में लाखा काका के लण्ड से एक लंबी सी पिचकारी निकलकर उसके गले तक उतरगई थी और नीचे रामू काका के लण्ड से निकली पिचकारी उसके अंदर बहुत अंदर तक कही जाकर समा गई थी एक गरम सी बौछार दोनों और से उसके शरीर के अंदर तक उतरगई थी आरती ने अपने जीवन का पहला और बहुत ही दर्दनाक सेक्स आज की रात किया था पर एक बात जरूर थी उसने एक बार भी किसी को मना नहीं किया था जाने क्यों उसे इस तरह से अपने शरीर को रौंदने वाले रामु और लाखा पर कही से भी गुस्सा नहीं था वो बिल्कुल निश्चल सी नीचे पड़ी हुई थी जैसे कोई मर गया हो और उसके मुख की ओर लाखा काका बैठे हुए थे और नीचे की ओर रामु काका लंबी सांसें लेते हुए अपने आपको कंट्रोल कर रहे थे सभी बहुत थके हुए थे और किसी के शरीर में इतनी जान नहीं बची थी कि जल्दी से हरकत में आए
कुछ 20 25 मिनट बाद अचानक ही लाखा और रामू जैसे नींद से जागे हो अपनी जाँघो के पास आरती को इस तरह से नंगे पड़े हुए देखकर दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा

लाखा- क्यों इसे कमरे में कैसे ले जाए

रामू- रुक बहू उूुउऊबहुउऊउ
और आरती को थोड़ा सा हिला के देखा आरती के शरीर में जान कहाँ थी इस तरह से हिलाने से क्या होना था अगर झींझोड़ कर उठाया नहीं गया तो शायद वो वही ऐसे ही पड़ी रहती सुबह तक पर लाखा और रामू को उससे ज्यादा फिकर थी वो आरती के शरीर को अपने हाथों से एक बार अच्छे से सहलाते हुए अपने मुख को आरती के कानों के पास तक ले गये और धीरे-धीरे उसको आवाज लगाते हुए उसे उठाने लगे किसी तरहसे उठाकर बैठा लिया दोनों ने

लाखा--- वो रहा गाउन तेरे पीछे दे

रामू ने अपने पीछे से गाउन उठाकर लाखा की ओर किया और आरती को सीधा करके उसके माथे के ऊपर से दोनों मिलकर उसे गाउन पहनाने में लगे थे बीच बीच में अपने हाथों से उसकी गोल गोल चूची को भी अपने हाथों से छू लेते थे और उसके पेट से लेकर नीचे तक उसे देखते हुए उसे सहला भी देते थे
लाखा- अब तो छोड़
रामू- तू भी चल ध्यान देने थोड़ा सा चल
और दोनों आरती को अपने हाथों से उठाने को उतावले हो उठे पर यह सौभाग्य रामू ने उठाया और आधी नंगी आरती को बिना, पैंटी के ही वैसे गाउन मे लेके बाहर आ गये लाखा धीरे-धीरे घर का जायजा लेने लगा था और रामू अपनी बाँहों में भरे हुए आरती को उसके बेडरूम तक ले जाने लगा था लाखा आगे जाकर देख रहा था और पीछे रामु उसे लिए हुए दबे कदम आरती के कमरे तक पहुँच गये

कमरे के बाहर रामु और लाखा दोनों रुक गये और फिर लाखा ने आरती को एक बार फिर से होश में लाना चाहा

लाखा- बहू उठो बहू

पर आरती तो जाने कहाँ थी वो अब भी मुर्दे की भाँति रामू काका की बाहों में पड़ी हुई थी
लाखा- अब हाँ…

रामू- रुक दरवाजा खोल

लाखा- नहीं मरवाएगा क्या भैया है अंदर

रामू- नहीं बहू नहीं पहुँची ना तो तू भी और में भी और यह भी कोई नही बचेगा। अपनी गोद में लिए आरती की ओर इशारा करते हुए रामू ने जताया।
Reply
08-27-2019, 01:29 PM,
#37
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
लाखा ने बड़ी हिम्मत करते हुए दरवाजे को धकेला पर वो नहीं खुला
लाखा- अंदर से बंद है
रामु काका और लाखा के चहरे से रंगत उड़ गई थी पर तभी उनका ध्यान नीचे लॉक पर गया और देखकर थोड़ी सी हिम्मत बनी कि वो तो बाहर से बंद था लाखा ने धीरे से उसे खोला और अंदर आ कर देखा अंदर रवि दूसरी तरफ मुँह किए सो रहा था अंदर मस्त एसी की ठंड थी और दरवाजा खुलते ही बाहर तक आने लगी थी लाखा ने दरवाजा खोलकर रामू की ओर देखा रामु धीरे से आरती को गोद में लिए अंदर की ओर हुआ और बहुत ही धीरे से आरती को भैया के पास सुलाकर वैसे ही दबे कदम बाहर की ओर हो लिया दरवाजे पर लाखा वैसे ही खड़ा हुआ रामु को सबकुछ करते हुए देख रहा था और उसका साथ देने को खड़ा हुआ था

रामु अपने काम को अंजाम देने के बाद वैसे ही दबे कदम बाहर आ गया और दरवाजा बंद करते हुए दोनों जल्दी से अपने कमरे में आ गये थे




दोनो के चहरे में एक संतोष था और एक अजीब सी खुशी भी थी जैसे कोई मैदान मारकर आए हो कमरे में पहुँचते ही दोनों कमरे को ठीक करने में लग गये थे
लाखा- यार मजा आ गया बहू तेरे कमरे में भी आ जाती है

रामु- हाँ यार दूसरी बार ही आई है

लाखा- साले बताया नहीं तूने तो साले खेल रहा था हाँ… बहुत मजे है तेरे तो।

रामु- अरे यार क्या बताता तुझे तो पता है फिर तू कौन सा साधु है तूने भी तो कोई कमी नहीं छोड़ी ना आज। सब वसूल कर लिए।

लाखा- हाँ यार क्या माल है साले मेंने भी कभी नहीं सोचा था कि इस घर की बहू को भी भोगने का मिलेगा यार गजब की माल है

रामु- हाँ… साला भैया खुश नहीं कर पाता होगा नहीं तो क्या वो अपने पास आती

लाखा- हाँ यार साला खाली कपड़े और गाड़ी ही देता होगा ही ही और बाकी हम देते है हा हा हा
रामु भी उसकी हँसी में शामिल हो गया और कुछ देर बात करते हुए दोनों कब सो गये पता ही नहीं चला

उधर आरती जब अपने बिस्तर पर पहुँची तो उसे थोड़ा बहुत होश था पर शरीर में इतना जोर नहीं था कि उठ सके या कोई काम कर सके वो वैसे ही बहुत देर तक लेटी रही और फिर बहुत संघर्ष करके अपने आपको एक चादर से ढँक कर सो गई।
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08-27-2019, 01:29 PM,
#38
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
आरती के जेहन में अब तक लाखा और रामू की छवि छाइ हुई थी किसी तरह से उन दोनों ने मिलकर उसे निचोड़ कर रख दिया था उसका बुरा हाल हो रहा था और उसकी चूचियां और शरीर का हर हिस्सा दर्द में बदल चुका था वो लेटी हुई अपने बारे में सोच रही थी और पास में लेटे हुए अपने पति के बारे में भी वो क्या से क्या हो गई थी आज तो जैसे वो अपनी नजर से बहुत गिर चुकी थी उसने जो आज किया था वो क्या कोई घर की बहू करती है
क्या उसने जो भी किया उसके लिए ठीक था जाने क्यों वो इस बात के निर्णय पर नहीं पहुँच पाई और शून्य की ओर देखती हुई कब सो गई पता ही नहीं चला


सुबह जब आखें खुली तो रवि उसकी बगल में नहीं था शायद नीचे चाय पीने गया था वो जल्दी से उठी और झट से बाथरूम में घुस गई नहाते समय उसे अपने शरीर में काले नीले धब्बे दिखाई दिए और मिरर में देखकर वो चकित रह गई थी यह धब्बे कल रात का परिणाम था उसके शरीर के साथ हुए कर्म की निशानी थे पर एक सी मुस्कान उसके होंठों में दौड़ गई थी क्या वो इतनी गिरी हुई है कि लाखा और रामू उसके शरीर में इस तरह के निशान छोड़ गये।
क्या वो इतनी कामुक है कि उसे कल पता भी नहीं चला कि क्या हो गया पर हाँ… उसे दर्द या फिर कुछ भी अजीब सा नहीं लगा था तब अच्छा ही लगा होगा नहीं तो वो संघर्ष तो करती या फिर कुछ तो आशा करती जो उसे अच्छा नहीं लगने का संकेत होता पर उसने तो बल्कि उन दोनों का साथ ही दिया और उन्हें वो सब करने दिया जो कि वो चाहते थे हाँ… उसे मजा ही आया था और बहुत मजा आया था उसने कभी जिंदगी में मजा कभी नहीं लिया था वो भी सेक्स का वो इतना कभी नहीं झड़ी थी जितना कि कल रात को वो कभी सेक्स में इतना नहीं थकि थी जितना कि कल रात को उसके शरीर का इस्तेमाल भी कभी किसी ने इस तरह से नहीं किया था कि जितना कि कल हाँ… यह सच था और उसी का
ही परिणाम था यह जो की उसके शरीर में जहां तहाँ उभर आए थे वो अपने शरीर को घुमाकर हर हिस्से को एक बार देखना चाहती थी उसकी जाँघो में नितंबों में जाँघो के पीछे के हिस्से में कमर में नाभि के आस-पास और चूचियां में और निपल्स में गले में हर कही उसे दिख रहे थे वो मिरर में एक बार अपने को देखकर और फिर अपने शरीर को मिरर में देखने लगी थी कितनी सुंदर है वो क्या शरीर पाया है उसने मस्त चूचियां जो की निपल्स के साथ किसी की चोटी की तरह से सामने की ओर देख रहे थे उसके नीचे पतली सी कमर उसके बीच में गहरी नाभि जो कि उसके शरीर को और भी ज्यादा सुंदर बना देती थी नीचे नितंबों का सिलसिला होते हुए जाँघो से नीचे तक टाँगें जो कि उसके शरीर को किसी बोतल के शेप में चेंज कर देती थी

कंधों के ऊपर से सुराहीदार गर्दन और फिर उसका प्यारा सा चहरा लाल होंठ उसके ऊपर नोक दार नाक पतली सी और फिर उसकी कातिल निगाहे जो कि बहुत कुछ ना कहते हुए भी बहुत कुछ कह जाती थी

वो खड़ी-खड़ी अपने को बहुत देर तक इसी तरह से देख रही थी कि डोर पर नॉक होने से वो वापस वास्तविकता में आई और बाहर खड़े रवि को आवाज दी
आरती- जी

रवि- जल्दी निकलो मुझे जाने में देर हो जाएगी

आरती- बस दो मिनट
और वो जल्दी से अपने आपको संभाल कर बाहर आने की जल्दी करने लगी बाहर आते ही उसे रवि अपने आफिस बैग में कुछ करता दिखा

रवि- कल क्या हुआ था तुम्हें

आरती---- क्यों

रवि उसके पास आया और, माथे को और फिर होंठों को चूमते हुए उसकी आखों में आँखे डालकर कहा
रवि- बिना पैंटी के ही सो गई थी

आरती- छि छि तुमने देखा

रवि- ही ही हाँ… नशा ज्यादा हो गया था क्या

आरती- जंगली हो तुम

रवि- यार यह तो मैंने नहीं किया
वो आरती की गर्दन और गाल के नीचे तक लाल और काले निशानो की ओर इशारे करता हुआ बोला

आरती- हाँ…और कहाँ से आए है, किसने किया

रवि- यार नशे में था पर सच बताऊ तो मुझे कुछ याद नहीं

तब तक आरती पलटकर अपने ड्रेसिंग टेबल तक पहुँच चुकी थी वो रवि से नजर नहीं मिला पा रही थी
पर रवि उसके पीछे-पीछे मिरर तक आ गया और उसे पीछे से पकड़कर कंधों से बाल को हटा कर उसकी पीठ पर आया और गर्दन पर निशानो को देखकर छूता जा रहा था

रवि- सच में डियर मुझे कुछ भी याद नहीं सॉरी यार

आरती- धात जाइए यहां से और अपने को झटके से रवि से अलग करती हुई वो अपने बालों पर कंघी फेरने लगी थी रवि भी थोड़ी देर खड़ा हुआ कुछ सोचता रहा और फिर घूमकर बाथरूम की ओर चल दिया
रवि- आज आओगी ना

आरती- नहीं मन नहीं कर रहा

रवि- घर में क्या करोगी आ जाना सोनल के साथ उसकी भी छुटिया है।

आरती- देखती हूँ मन किया तो
और रवि बाथरूम की ओर चला गया था। आरती अपने आपको संवारती हुई अपने पति के बारे में सोचने लगी क्या वो जो कर रही है वो ठीक है उसका पति उसे कितना प्यार करता है और वो उसे धोका दे रही है

हां धोखा ही तो है वो सोच रहा है कि वो दाग उसने दिया पर हकीकत तो कुछ और ही है वो मिरर के सामने अपने से अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी और वापस अपने बिस्तर पर आके बैठ गई और कंघी करने लगी उसके दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थी पर उसे अपने पति को धोखा देना अच्छा नहीं लगा उसका मन एकदम से निराश सा हो गया वो शायद रो भी देती पर रवि को क्या बताती कि वो क्यों रो रही है इसलिए चुपचाप बैठी हुई बाल ठीक करके उसके आने का इंतेजार करने लगी

रवि जब तक बाहर आया तब तक वो थोड़ा सा नार्मल हो चुकी थी पर जेहन में वो बातें चाल तो रही थी रवि के तैयार होने के बाद जब वो नीचे गया तो वो भी उसके साथ ही नीचे गई डाइनिंग टेबल पर सजे हुए डिश और खाने को देखकर वो भी थोड़ा सा नार्मल होती चली गई और खाना परोश कर रवि को खिलाने लगी थी
फिर कल की तरह ही पूरी शाम तक वो अपने पति और सोनल के साथ ही रही
उसके मन में एक बार भी कही कोई त्रुटि नहीं आई या फिर कहिए सेक्स के बारे में कोई भी सोच नहीं आई वो इसी तरह से अपने शाम तक का टाइम निकाल कर जब अपने पति के साथ घर पहुँची तो बहुत थक गई थी घर पहुँचकर भी उसने ना तो रामू काका से नजर ही मिलाई और नहीं लाखा काका के सामने कोई उत्तेजना ही

इसी तरह रात को भी आरती अपने कमरे में ही रही रात को रवि के साथ सेक्स का मजा भी लिया और बहुत ही प्यार भरी बातें भी की रवि उसे बहुत छेड़ रहा था उसे बार-बार अपने काम के बारे में पूछकर उसे एमडी एमडी कहकर, छेड़ता जा रहा था उसे भी अपने पति की छेड़ छाड़ अच्छी लग रही थी वो अगर इतना ध्यान उसे दे तो क्या जरूरत है उसे किसी के पास जाने की अगर वो उसे समय दे तो क्या जरूरत है उसे किसी से समय माँगने की वो बहुत खुश थी और अपने बिस्तर पर पड़े हुए वो एक चरम सुख का आनद ले रही थी उसे आज साफ्ट सेक्स में मजा आ रहा था कितना प्यार करते है रवि उसे कितने हल्के हाथों से और कितने जतन से कही उसे चोट ना लग जाए या फिर निशान ना पड़ जाए कितने प्यार से उन्होंने उसकी चुचियों को छुआ था और कितने प्यार से उन्हें मुख में डालकर चूसा भी था वो एक परम आनंद के सागर में गोते लगा रही थी जब रवि ने उसकी चुत के अंदर प्रवेश किया तो आआआआआह्ह एक सिसकारी उसके मुख से आनयास ही निकल गई थी और वो रवि के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुबलने लगी थी कितना आनंद और सुख है रवि के साथ कोई चिंता नहीं कैसे भी और किसी भी वक़्त वो अपने पति के साथ आनंद ले सकती थी रवि की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और वो अब पूरी गति से आरती पर छाया हुआ था और आरती भी अपने पति का पूरा साथ दे रही थी और आज तो कुछ ज्यादा ही

वो हर धक्के पर उच्छल जाती और अपनी बाहों के घेरे को और भी रवि के चारो ओर कस्ति जा रही थी हर धक्के को वो भी रवि के धक्के के साथ मिलाना चाहती थी और हर धक्के के साथ ही वो रवि को किस भी करती जा रही थी और उसके होंठों के बाद अब तो वो उसकी जीब को भी अपने होंठों में दबा कर अपने मुख के अंदर तक ले जाने लगी थी आरती की सेक्स करने की कला से रवि भी हैरान था और वो जानता था, कि आरती बहुत ही गरम है और वो अब ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाएगा जिस तरह से आरती अपनी कमर को उछाल कर उसका साथ दे रही थी उसे अंदाजा हो गया था कि आरती भी कभी भी उसका साथ छोड़ सकती है आरती के होंठों से निकलने वाली हर आवाज अब उसे साफ-साफ सुनाई दे रही थी जो कि उसके कान के बिल्कुल करीब थी और भी उसे उसके करीब खींचने की कोशिश कर रही थी

रवि ने भी अपने पूरे जोर लगाकर आरती को अपनी बाहों के घेरे में कस रखा था और लगातार अपनी स्पीड को बढ़ा रहा था हर धक्के में वो आरती के जेहन तक उतर जाना चाहता था और उसे रास्ता भी मिल रहा था आज आरती उसे पागल कर दे रही थी वो जिस तरह से अपनी दोनों जाँघो को उसकी कमर के चारो ओर घेर रखा था उससे वो बहुत ज्यादा ऊपर भी नहीं हो पा रहा था उसकी जकड़ इतनी मजबूत थी कि वो छुड़ाने की कोशिस भी नहीं कर पा रहा था
आरती- जोर से रवि और जोर से

रवि- हूँ हूँ आअह्ह हाँ…

आरती- और कस कर पकडो प्लीज और कस कर मारो प्लीज
रवि अपनी पूरी ताकत लगाके आरती को जकड़े हुए था पर आरती उसे और भी पास और भी नजदीक लाने की कोशिस कर रही थी वो उत्तेजना में जाने क्या-क्या कह रही थी वो अपने पूरे जोर से आरती के अंदर-बाहर हो रहा था पर आरती के मुख से निकल रहे शब्दों को सुनकर, सच में पागल हुए जा रहा था वो अपनी पूरी शक्ति लगाकर आरती को चोदने में लगा था पर आरती को उपने शिखर में पहुँचने में अभी थोड़ी देर थी वो रवि को जितना हो सके उसने जोर से कस कर भिच रखा था और लगातार अपनी कमर को हिलाकर रवि के लण्ड को जितना हो सके अंदर तक ले जाने की कोशिश करती जा रही थी वो एक साधारण औरत जैसा बिहेव नहीं कर रही थी वो एक सेक्स मेनिक जैसी हो गई थी और अपने ऊपर अपने पति को ही निचोड़ने में लगी हुई थी वो अपनी चुत को भी सिकोर्ड कर उसके रस को अपने अंदर तक समा लेने चाहती थी


और उधर रवि जितना रुक सकता था रुका और धम्म से आरती के ऊपर ढेर हो गया वो अपनी पूरी शक्ति लगा चुका था और आरती को चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ा था पर पता नहीं आरती को क्या हो गया था कि आज वो उसका साथ नहीं दे पाया वो अब भी नीचे से धक्के लगा रही थी और रवि के सिकुडे हुए लिंग को अपने से बाहर निकलने नहीं दे रही थी अचानक ही आरती जैसे पागल हो गई थी एक झटके से अपनी जाँघो को खोलकर वापस आपास में जोड़ लिया और रवि को नीचे की ओर पलट दिया और खुद उसके ऊपर आके उसके ऊपर सवार हो गई अब आरती रवि को चोद रही थी ना कि रवि आरती को। रवि शिथिल होता जा रहा था उसके शरीर में इतनी भी ताकत नहीं थी कि वो आरती को सहारा दे और उसे
थामे। पर आरती को जैसे किसी तरह की मदद की जरूरत ही ना हो वो रवि के ऊपर सवार होकर अपनी कमर को तेजी चलाकर अपनी हवस को शांत करती जा रही थी पर शायद रवि के सिकुड़ जाने के बाद उसे इतना मजा नहीं आया था वो एकदम से रवि के सीने में गिर गई और उसे चूमते हुए
आरती- प्लीज रवि थोड़ी देर और प्लीज करो ना आआआआआआअ
आरती की कमर अब भी अपने अंदर रवि के लण्ड को निचोड़ जा रही थी पर रवि में अब ताकत नहीं बची थी सो वो अपने हाथों को उसकी कमर के चारो और लेजाकर कस के उसे पकड़ लिया और नीचे से धीरे-धीरे धक्के मारने लगा था ताकि आरती को शांत कर सके पर आरती ने तो जैसे आशा ही छोड़ दी थी वो रवि के सीने से चिपकी हुई अपने कमर को आगे पीछे करती जा रही थी और रवि के सीने पर किस करते-करते अपनी उंगलियों से उसके बालों को खींचने लगी थी

रवि- आहह क्या करती हो

आरती- धात थोड़ी देर और नहीं कर सके

रवि- अरे आज क्या हुआ है तुम्हें पहले तो ऐसा नहीं देखा

आरती- एक तो इतने दिन बाद हाथ लगाते हो और फिर अधूरा ही छोड़ देते हो
और रवि के ऊपर से अपनी साइड में उतरगई रवि को भी दुख हुआ और आरती को अपनी बाहों में भर कर उसके गालों को चूमते हुए कहा

रवि- अरे यार पता नहीं क्या हुआ आज पर पहले तो ऐसा नहीं हुआ

आरती- बुड्ढे हो गये हो और क्या सिर्फ़ दुकान और, पैसा ने तुम्हें बूढ़ा बना दिया है और कुछ नहीं
और गुस्से में पलटकर सोने की कोशिश करने लगी पर नींद कहाँ वो अपनी अधूरी छोड़ी हुई वासना को कैसे पूरी करे सोचने लगी।
वो अचानक ही रवि की ओर मूडी और फिर से रवि को अपनी बाहों में भर कर उसे किस करने लगी
रवि को भी लगा कि शायद गुस्से के कारण उसने जो कहा उसके लिए शर्मिंदा है सो उसने भी आरती को अपनी बाहों में भर लिया और वो भी आरती को किस्स करने लगा था पर आरती के दिमाग में कुछ और ही था वो रवि को किस करते हुए अपना एक हाथ नीचे उसके लण्ड तक पहुँचा चुकी थी रवि एक दम भौचक्का रह गया वो आखें खोलकर आरती की ओर ध्यान से देखने लगा आरती के चहरे पर एक कातिल सी मुश्कान थी जैसे वो कह रही हो कहाँ जाओगे बचकर वो रवि के लण्ड को अपने हाथों में लेकर उसे अपने लिए तैयार करने चेष्टा में थी उसकी आखों में एक अजीब सी चमक थी जो कि रवि ने आज से पहले कभी नहीं देखी थी वो एक अलग सी आरती को देख रहा था पर हाँ… उसे अपनी पत्नी का यह अंदाज अलग और अच्छा लगा वो भी फिर से अपनी में आने लगा था आरती की हथेलियो में उसके लण्ड को एक नई उर्जा मिल रही थी और उसके किस में भी एक अलग ही बात थी जो कि आज तक उसने कभी महसूस नहीं किया था


आरती रवि के लण्ड को धीरे-धीरे अपने हाथों से सहलाती हुई रवि के होंठों को किस करती जा रही थी और एकटक रवि की ओर देखती जा रही थी फिर धीरे से रवि के होंठों को छोड़ कर वो रवि के सीने के बालों में अपने होंठों को एक दो बार घुमाकर उसके पेट और नाभि तक पहुँच गई थी उसका एक हाथ अब भी उसके लण्ड पर ही था जो कि अपने अस्तित्व में आने लगा था और थोड़ा बहुत झटके लेकर अपने आपको जगा हुआ परवर्तित करवाने की चेष्टा में था आरती के होंठों से रवि के शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी और वो झुक कर अपनी पत्नी को उसे इस तरह से प्यार करते हुए नीचे की ओर जाते हुए देख रहा था वो आरती के सिर को सहलाते हुए अपने तकिये में चुपचाप लेटा हुआ था आरती के होंठों ने जब उसकी नाभि और पेट को छोड़ कर अचानक ही उसके लण्ड को किस किया तो वो लगभग चौक गया और नीचे की और देखते हुए अपनी पत्नी के सिर पर अपने हाथों के दबाब को बढ़ते हुए पाया था शायद हर मर्द की चाहत ही होती है कि कोई औरत उसके लण्ड को चूसे बिस्तर पर एक वेश्या जैसे वर्ताव करे पर जब यह सब होने लगता है तो एक बार आश्चर्य होना वाजीब है और रवि को भी हो रहा था पर आरती जिस तरह से उसके लण्ड को अपने मुख के अंदर लेकर खेल रही थी या फिर उसके लण्ड को अपने लिए तैयार कर रही थी वो अपना आपा खो चुका था अपने लण्ड को आरती के मुख में डालने की शायद वो चाहत रवि के अंदर भी थी पर शायद कह नही पाया था पर आज तो जैसे वो आरती को अपने लण्ड का स्वाद लेने के लिए दबाब भी बनाने लगता जैसे ही आरती की जीब ने उसके लण्ड को छुआ वो अपने शरीर में झटके को नहीं रोक पाया।
रवि-----------आआआआह्ह आरतीआआआआआअ

आरती- हाँ… क्या

रवि- प्लीज एक बार चूस लो प्लीज बहुत इच्छा थी प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
आरती- हाँ… एक बार क्यों
और चप से उसके लण्ड को अपने मुख के अंदर ले गई और प्यार क्या होता है यह अब समझ में आया रवि को जैसे ही आरती ने अपने होंठों के बीच में उसके लण्ड को दबा के आगे पीछे अपने होंठों को किया वो तो जैसे पागल ही हो गया अपनी कमर को उठाकर आरती के मुख में अपने लण्ड को घुसाने की कोशिश करने लगा था और आरती जो कि रवि की स्थिति से भली भाँति वाकिफ थी अपने हाथों को जोड़ कर और अपने होंठों को जोड़ कर उसने अपने खेल को अंजाम देना शुरू कर दिया जीब का साथ भी लेती जा रही थी रवि अब पूरी तरह से तैयार हो चुका था और अब वो फिर से आरती को चोदने को तैयार था वो अपने हाथों को बढ़ा कर आरती के शरीर को छूने का मजा ले रहा था रवि अब धीरे-धीरे उठकर बैठ गया था और आरती उसके सामने घुटनों के बल बैठी हुई प्रणाम करने की मुद्रा में बैठी हुई रवि के लण्ड को चूसती जा रही थी रवि अपनी पत्नी को अपने हाथों से सहलाते हुए अपनी कमर को भी एक बार-बार झटके दे चुका था आरती को अपने मुँह में रवि के लण्ड का सख्त होना अच्छा लग रहा था वो भूल चुकी थी कि वो अपने पति के साथ है और किसी के साथ नहीं पर वो मजबूर थी जो आग उसके शरीर में लगी थी अगर वो उसे नहीं बुझाएगी तो वो पागल हो जाएगी या फिर से उसके कदम बहक जाएँगे इसलिए वो अपने पूरे जोर से रवि को अपने लिए तैयार करने में जुटी थी उधर रवि भी पूरी तरह से तैयार था उसके मुख से अचानक ही एक आवाज आरती के कानों में टकराई
रवि- आरती निकल जाएगा

आरती ने झट से रवि के लण्ड को छोड़ दिया और एकदम से घुटनों के बल खड़ी हो कर रवि के होंठों को चूमते हुए
आरती- नहीं अभी मत निकालना प्लीज अंदर करो
और खुद ही रवि के दोनों ओर अपनी जाँघो को खोलकर बैठ गई और अपने ही हाथों के सहारे से रवि के लिंग को अपनी उत्तेजित चुत के अंदर डालने की कोशिश करने लगी रवि भी कहाँ पीछे रहने वाला था एक ही झटके में आरती के अंदर तक समा गया





आरती जो कि अब तक बस किसी तरह से अपने को रोके हुए थी पर जैसे ही कामेश उसके अंदर तक पहुँचा वो तो जैसे पागल ही हो गई अपने हाथों से जैसे इस बार उसे नहीं जाने देना चाहती थी वो खुद ही अपने अंदर तक उसके लण्ड को समाने की कोशिश में लगी थी वो अपने को उपर नीचे करते हुए रवि को अपनी दोनों बाहों के घेरे में लिए उसकी गोद में उछल कर अपने को शांत करने की कोशिश करने लगी थी

रवि जो कि अब पूरी तरह से तैयार था और आरती के उतावलेपन से थोड़ा सा परेशान जरूर था पर एक बात तो थी कामया के इस तरह से उसका साथ देने से वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था हर एक धक्के में वो आरती के जेहन तक समा जाता था और फिर अपने को थोड़ा सा सिकोड़ कर फिर से वो आरती के अंदर तक चला जाता था आरती जो कि उसके ऊपर बैठी हुई थी अपनी दोनों जाँघो से रवि की कमर को कस कर जकड़े हुई थी हर धक्के पर आरती के मुख से
कामया- ऊऊऊऊओह्ह… रवि प्लीज थोड़ा जोर से उउउम्म्म्मममम
और रवि के होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसती और अपनी बाहों के घेरे को और भी उसके गले के चारो और और कसते जाती जाँघो का कसाव भी बढ़ता जाता
रवि- और जोर से और जोर से
रवि भी क्या करता आरती को झट से नीचे गिरा कर उसके ऊपर सवार हो गया और जोर से अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा पर आरती तो जैसे भूखी शेरनी थी रवि के बालों को पकड़कर उसने अपने होंठों से जोड़ रखा था और लगातार उससे रिक्वेस्ट करती जा रही थी
और जोर से और जोर से
रवि का दूसरी बार था पर वो अपने जोर में कोई कमी नहीं ला रहा था उसकी हथेली आरती के बालों का कस कर जकड़कर अपने होंठों से लगाए हुए था और बाहों के घेरे को कसकर आरती के सीने के चारो ओर कस रखा था अपने शरीर के जोर से उसे बेड पर निचोड़ रहा था और कमर के जोर से उसे भेदता जा रहा था और टांगों के ज़ोर से अपनी गिरफ़्त को बेड पर और मजबूती से पकड़े हुए था पर आरती लगातार उसे
और जोर से कहती हुई उससे किसी बेल-की भाँति लिपटी हुई थी और लगातार हर चोट पर रवि की चोट का साथ देती जा रही थी रवि अपने आखिरी पड़ाव की ओर आग्रसर था पर आरती का कही कोई पता नहीं था वो लगातार अपनी कमर को उछाल कर अपनी उत्तेजना को दिखा रही थी पर रवि और कहाँ तक साथ देता वो झर झर करता हुआ झड़ने लगा था दो चार धक्कों के बाद ही वो अपने शिखर की ओर चल दिया आरती ने जैसे ही देखा कि रवि उसका साथ छोड़ने को है वो एकदम से भयानक सी हो गई और रवि को पलटकर झट से उसके ऊपर सावर हो गई ताकि बचाकुचा जो भी है उससे ही अपना काम बना ले वो नहीं चाहती थी कि वो अपने आपको तड़पता हुआ सा पूरीजागे या फिर अपनी आग को बुझाने को नौकरों के पास जाए

वो जैसे ही रवि पर सवार हुई रवि तो ठंडा हो गया पर आरती उसके ऊपर सवार होकर जैसे तैसे अपने को शांत कर सकी नहाई नहीं थी ना तो सुख के सागार में गोता ही लगाया था पर हाँ… नदी के किनारे खड़े होने से थोड़े बहुत पानी से भीग जरूर गई थी जैसे नहाई हुई हो और रवि के ऊपर गिर कर उसे और जोर से किस किया और अपनी जगह पर पलट गई

रवि- क्या हो गया है तुम्हें

आरती- क्या कुछ नहीं बस ऐसे ही

रवि- पर आज तो कमाल कर दिया

आरती- अच्छा नहीं लगा तो कल से नहीं करूँगी

रवि- अरे यार तुम भी ना
और आरती को कस कर अपनी बाहों में भरकर सो गया
पर आरती की आखों में नींद नहीं थी वो जागी हुई थी और अपने अतीत और भविष्य के बारे में सोच रही थी



आरती की आखें जरूर खुली थी पर वो सोई हुई थी उसके पति की हथेलिया अब भी उसकी चुचियो पर थी और वो उन्हें धीरे-धीरे मसल रहा था रवि शायद नींद के आगोश में समा गया था क्योंकी उसके मसलने की प्रक्रिया धीरे-धीरे मध्यम पड़ती जा रही थी पर आरती जागी हुई थी और सोच रही थी आखिर क्यों रवि उसका साथ नहीं दे पाया आखिर क्यों
क्या वो ही इतनी कामुक हो गई है कि अब रवि उसके लिए पर्याप्त नहीं है या फिर रवि पहले से ही ऐसा है पर पहले तो वो कई बार रवि से अपने को छुड़ाने के लिए संघर्ष कर चुकी है पहले तो रवि उसे निचोड़ कर रख देता था तो अब क्या हुआ ठीक है कोई बात नहीं कल देखेंगे सोचते हुए आरती सो गई। सुबह भी वो रवि से पहले ही उठ गई थी। रवि
अब भी सो रहा था ।

बाथरूम से फ्रेश होकर जब वो बाहर आई तो उसने ही को उठाया रवि हड़बड़ा कर उठता हुआ अपने काम में लग गया फिर दोनों नीचे जाकर सोनल के साथ चाय पिए और फिर अपने कमरे में आकर जाने की तैयारी में जुट गये रवि आरती से कुछ कम बाते कर रहा था
आरती- क्या हुआ

रवि- क्यों

आरती- रोज तो बहुत बातें करते हो आज क्या हुआ

रवि- अरे नहीं यार बस कुछ सोच रहा था

आरती।- क्या
Reply
08-27-2019, 01:29 PM,
#39
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
रवि- अरे यार वो धरम पाल जी है ना उनके बारे में

आरती- यह धरम पाल कौन है

रवि- अरे वो फैक्टरी वाले काम में में पार्टनर बनाया है

आरती- तो

रवि- वो चाहते है कि उनके लड़के को भी शामिल किया जाए

आरती- तो क्या कर लो

रवि- हाँ कर तो लो वो नहीं तो उनका लड़का ही सही पर साला झल्ला है

आरती- झल्ला ....................

रवि- हाँ यार ढीला है

आरती- हाँ… हाँ… हाँ… हूँ हीही

रवि- हाँ… देखोगी तो हँसोगी

आरती- क्यों

रवि- अरे कुछ भी कहो समझ ही नहीं आता से डील की बातें करो तो बगले झाँकने लगता है अरे कुछ तो सिखाया पढ़ाया हो तब ना

आरती- अरे तुम तो जबरदस्ती परेशान हो रहे हो ऐसा है तो अच्छा ही है उसे कुछ समझ नहीं आएगा और तुम अपना काम करते जाना और क्या

रवि आरती की ओर आश्चर्य से देखने लगा उसके होंठों में एक हँसी थी एक आँख दबाकर वो आरती के नजदीक आया और झट से अपने होंठों से आरती के होंठों को कस कर चूम लिया

रवि- अरे वाह मेडम सच ही तो कहा तुमने साले को ले लेता हूँ हाँ यार लेकिन परेशानी एक है

आरती- क्या

रवि- वो दिन भर तुम्हारे पीछे पड़ा रहेगा

आरती- मेरे पीछे क्यों

रवि--- अरे वो जो फैक्टरी बन रही है ना उसमें भी उन्होंने फाइनेंस किया है और एक्सपोर्ट में भी उनका पार्ट्नर शिप है इकलौता बेटा है थोड़ा मेंटल प्राब्लम है दो या तीन लड़कियों के बाद है ना साला वो भी लड़कियों जैसा ही हो गया है।
आरती- तो क्या हुआ में संभाल लूँगी कौन सा मुझे उसे हाथों से खिलाना है दौड़ा दूँगी दिन रात और वो कितने साल का है

रवि- है तो 23 24 साल का पर बहुत ही दुबला पतला है और लड़कियों जैसा है बड़ा लचक कर चलता है हिहीही

आरती- धात तुम तो ना चलो। जल्दी से तैयार हो जाओ सोनल वेट करती होंगी।
और दोनों झट पट तैयार होने लगे थे। जब वो नीचे पहुँचे तो सोनल नहीं आई थी। डाइनिंग टेबल पर खाना लगा था आरती और रवि के बैठने के बाद सोनल भी आ गयी और सभी खाना खा के बाहर की ओर निकल गये

इसी तरह से दो तीन दिन निकल गये कोई बदलाब नहीं आया आरती के जीवन में रोज सुबह वो सोनल के साथ ही निकल जाती और शाम को अपने पति और सोनल के साथ ही वापस आती और रात को भी वो अपने पति के साथ ही रहती
हर रात वो अपने शरीर की संतुष्टि के लिए अपने पति को उकसाती और अपनी ओर से कोई भी कमी नहीं रखती पर रवि हर बार दो बार में सिर्फ़ एक बार ही आरती को साथ दे पाता था हर बार पहले झड़ जाता और दूसरी बार में थोड़ा बहुत आरती को संतुष्ट कर देता

पर आरती को यह प्यार कुछ जम नहीं रहा था पर वो एक पति व्रता नारी की तरह अपने पति का साथ देती रही वो एक सेक्स मशीन बन चुकी थी रवि भी उसे उकसाता था वो उसे अपने साथ होते हुए हर खेल को बहुत ही अच्छे तरीके से अपना लेता था वो आरती को खुश देखना चाहता था और उसे किसी भी तरह से मना नहीं करता था

आरती जब उसका लण्ड व फिर उसके शरीर को किस करती तो वो उसे खूब प्यार से सहलाता और उसे और भी करने को उकसाता था आरती को मालूम था कि रवि को यह सब अब अच्छा लगने लगा था सो वो अपने तरीके से रवि के साथ खेलती और अपने को पतिव्रता स्त्री के रूप में रखती जा रही थी

अब तो आरती बिज़नेस में भी थोड़ा बहुत इन्वॉल्व होने लगी थी लोग बाग अब उसे थोड़ा सीरियस्ली लेने लगे थे और बहुत कुछ बताने भी लगे थे कॉंप्लेक्स के काम के बारे में भी उसे रिपोर्टिंग करने लगे थे उसे पता था कि स्टोर में क्या शार्ट है क्या मंगाना पड़ेगा कौन सा स्टाफ क्या करता है और किसकी क्या रेपोंसिबिलिटी है कौन सा काम धीरे चल रहा है और कौन सा काम आगे

कौन कहाँ जाता है और कौन छुट्टी पे है और भी बहुत कुछ अब रवि आरती को बहुत से डीलर से भी मिला चुका था और बहुत सी बातें भी समझा चुका था आरती अब एक निपुण बिज़नेस विमन की तरह रेएक्ट करने लगी थी उसकी चाल में एक कान्फिडेन्स आ गया था जो पहले नहीं था अब वो बहुत ही कॉनफीदेंतली बातें करती कोई इफ’स आंड बॅटस नहीं होते थे। सोनल सुबह हमेशा उसके आस-पास होती, कभी रवि भी जाता उसके साथ और दुपहार को जब वो शोरुम पहुँचती तब भी वो शोरुम मे बहुत से बदलाब ले आई थी ड्रेस कोड जारी कर दिया था और शोरुम में गानो की धुन हमेशा बजती रहती थी कोल्ड ड्रिंग्स कस्टमर्स के लिए सर्व होने लगी थी एक कोने को बच्चो के लिए डेवेलप किया था जहां कष्टमर के बच्चे खेल सके बड़े-बड़े सेट भी लगा दिया था शोरुम में और भी बहुत कुछ कर दिया था आरती ने जो कि उसके पति और सोनल को बहुत ही पसंद आया


आरती का जीवन अब बहुत ही संतुलित सा हो गया था बीच में उसकी मम्मी का फोन भी आया तो उन्होंने भी आरती को बहुत बधाई दी और अपने काम को ठीक से करने की नसियात भी दी। रवि और सोनल को आरती का इस तरह से बिज़नेस में इन्वॉल्व होना बहुत ही अच्छा लगा था और वो दोनों ही आरती को और भी सजेशन्स देने को उकसाते रहते थे उनका शोरुम उस इलाके का एक ऐसा शोरुम हो गया था जिसे देखकर बड़े दुकान दार अपने हिसाब से अपनी दुकान को रेनवेट करने लगे थे पर आरती के सामने वो कुछ नहीं कर पाते थे उसका दिमाग हमेशा कुछ ना कुछ अलग करता रहता था
इसी तरह आरती का जीवन आगे चलता जा रहा था

पर यह कहानी तो कुछ और ही कहने को बनी है तो अब वो बातें करते है ठीक ओके…

तो हमेशा की तरह आज भी आरती रवि और सोनल के साथ ही तैयार थी शोरुम जाने को। खाने के बाद रवि तो चला गया पर आरती और सोनल जब बाहर निकले तो आज वो रवि के साथ ही फैक्टरी का काम देखने चली गई और रवि का दिन आज कल थोड़ा बहुत व्यस्त सा हो गया था वो शोरुम पर कम टाइम दे पा रहा था उसका ज्यादा ध्यान फैक्टरी की ओर था और वहां की मशीनों को सेट करने का काम भी सोनल और आरती ने संभाल लिया था
रवि- आरती अब सोच रहा था कि शोरुम में आना बंद कर दूं

आरती- क्यों

रवि- अरे यहां आने से बाहर का काम थोड़ा सा सफर हो रहा है और कुछ परचेजर्स भी जब देखो तब बुला लेते है इसलिए

आरती- आप देखो जो ठीक लगे

रवि- तुम क्या कहती हो

आरती- ठीक है पर वहां के डील्स जो होते है वो सोनल कर लेंगी उसे इंटरेस्ट भी है।

रवि- अरे तुम तो हो तुम डील करना शुरू करो

आरती- अरे मुझसे नहीं बनेगा रोज तो प्राइस उप्पर नीचे होते है।
आरती- अरे तो क्या जब बढ़ते है तो रुक जाओ और जब घट-ते है तो खरीद लो और क्या है इसमें

आरती- पता नहीं

रवि- अरे तुम चिंता मत करो सोनल तो है सीख जाओगी
और रवि की गाड़ी तब तक फैक्टरी के अंदर पार्क हो गई थी

आस-पास के लोग सावधान हो गये थे और रवि और आरती की ओर देखते हुए नमस्कार करते जा रहे थे। रवि आरती के साथ आफिस की ओर बढ़ा था पर आरती थोड़ा सा रुक कर सामने से खड़े होकर एक बार ऊपर की ओर देखते हुए अपने नाम से बन रही। फैक्टरी की ओर देखा

रवि- आओ

आरती- आप चलिए में थोड़ा देखकर आती हूँ

और रवि अंदर आफिस की ओर चला गया आरती इधर उधर टहलती हुई सी लोगों को अपने काम में लगे हुए देखती जा रही थी और एक-एक करके सीढ़िया चढ़ती हुई हर फ्लोर में काम का जाएजा लेती जा रही थी जहां भी जाती लोग एक बार उसे जी भर के देखते और झुक कर सलाम भी करते अब तो आरती को यह आदत सी पड़ गई थी सो कोई ज्यादा तवज्जो नहीं देती थी वो इधर उधर देखती हुई हर फ्लोर के कोने तक देखती और फिर एक फ्लोर ऊपर चढ़ जाती

लगभग हर फ्लोर में काम अपनी तेज गति से चल रहा था और हर कोई काम में ज्यादा ही व्यस्त दिखाई दे रहा था आरती का ध्यान बारीकी से हर काम को अंजाम देते हुए देखते हुए जा रही थी। थर्ड फ्लोर तक ही बना हुआ था और उसके ऊपर छत थी इसलिए वहां सिर्फ़ लिफ्ट का टवर था और डक्ट बने हुए थे स्टेर केस का रास्ता भी था और खुली छत थी आरती चलती हुई थर्ड फ्लोर पर खड़ी होकर सामने का नजारा देखती रही बहुत ही मन भावन था हर तरफ काम से लगे हुए लोग काम से खाली होकर बाहर की ओर जा रहे थे तो कुछ लोग समान भर कर अंदर की ओर आ रहे थे

आरती ने फिफ्थ फ्लोर को धीरे-धीरे घूमकर पूरा देखा वहां लोग भी कम थे और धूल भी थोड़ा कम उड़ रही थी सो आरती को कोई दिक्कत नहीं हो रही थी जब वो सीढ़िया उतर कर नीचे की ओर जाने को हुई तो ना जाने क्यों वो ऊपर छत की ओर देखती हुई रुकी और वहां का क्या हाल है जान-ने के लिए ऊपर की ओर चल दी छत में कोई नहीं था एकदम खाली था बहुत तेज हवा चल रही थी यहां वहां थोड़ा बहुत समान फैला हुआ था पर कोई काम करता हुआ नहीं दिखा वो थोड़ी देर रुक कर वहां का हाल जानकर सामने साइन को देखती हुई वापसा नीचे की ओर जाने को पलटी ही थी कि
उसे कोई चीज गिरने की आवाज आई उसका सिर उस तरफ घूम गया वहां कोई नहीं था पर गिरा क्या वो अपने को रोक ना पाई और उस गिरने वाली चीज को देखने को वो आगे बढ़ी पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया डक्ट और बड़े-बड़े पाइप के बीच में उसे कुछ भी ना दिखा पर फिर से किसी आहट ने उसे चोका दिया वो किसी चीज के हिलने की आवाज़ थी या फिर कुछ गड़बड़ थी जो भी हो आरती जल्दी से एक डक्ट के पीछे से जहां से वो आवाज आ रही थी वहां पहुँचने लगी थी जैसे-जैसे वो डक्ट के पीछे की ओर देखने को आगे बढ़ती जा रही थी उसे आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी उसे इतना तो पता चाल गया था कि जरूर कोई गड़बड़ है पर क्या पता नहीं

आवाज से अंदाजा लगाया जा सकता था कि दो जने है पर क्या उठा रहे है या कुछ खिसका रहे है पता नहीं हाँ… हाँफने की आवाज जरूर आ रही थी आरती दबे पाँव जैसे ही वहां डक्ट के पीछे पहुँची तो चिहुक कर एकदम से पीछे की ओर हट गई जो उसने देखा उस चीज की कल्पना भी उसने यहाँ नहीं की थी।
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08-27-2019, 01:29 PM,
#40
RE: Kamvasna आजाद पंछी जम के चूस.
वहाँ एक इंसान ने एक औरत को अपने से सटा कर रखा था और अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ उसके साथ संभोग कर रहा था और वो दो नो अपने इस खेल में इतना लिप्त थे कि उन्हे आरती के आने तक की भनक नहीं लगी उस औरत की साड़ी उसके कमर के ऊपर थी और टाँगें कमर तक नंगी थी साँवले रंग की वो औरत उस आदमी की तरह पीठ किए हुए थी और वो आदमी उसको कमर से पकड़कर अपने लण्ड को उसके चुत में पीछे से घुसाए हुआ था और अपने दोनों हाथों से उसे कस कर पकड़े हुए था और लगातार झटके दे रहा था आरती के चिखने से उनकी नजर एक दम से इधर घूमी और औरत के मुख से एक चीख निकल गई और वो एक ही झटके से अपने को उस आदमी के चुंगल से छुड़ा कर वहां से भाग गई


पर वो आदमी वही खड़ा रहा और एकटक आरती की ओर ही देखता रहा आरती उस इंसान को एकटक देख रही थी कमर के नीचे से नंगा था वो बहुत ही तगड़ा और मास पेशिया कसी हुई थी लंबा और काला सा था बहुत ही बलिष्ठ था वो और किसी सांड़ की तरह अपने लण्ड को हवा में लहरा कर खड़ा था उसका लण्ड किसी मूसल की तरह सामने की ओर मुँह उठाए झटके ले रहा था बहुत ही लंबा और मोटा सा था वो । आरती की सांसें रुक गई थी और वो उस इंसान को एकटक पैर से लेकर माथे तक आश्चर्य से देखती ही रह गई उस इंसान के चेहरे पर भाव बदल रहे थे पर डर के भाव नहीं थे उसके हाथ से उस लड़की के निकल जाने के बाद के भाव थे जो कि उसे अधूरे में ही छोड़ कर भाग गई थी। आरती उसे देखती ही रह गई जब उसके चहरे के भाव एकदम से किसी जानवर से बदल कर किसी निरीह प्राणी में तब्दील हुई तो उसके चहरे पर एक दया की माँग थी उसके चहरे पर एक हवस की जगह अब दयनीय स्थिति में पहुँचने के भाव थे वो धीरे से अपने लण्ड को अपने ही हाथों से धीरे से पकड़कर आरती की आँखो में आँखे डाले अपने लण्ड को कस कर पकड़कर एक दो लंबे लंबे झटके दे रहा था जैसे कि वो खड़े-खड़े ही आरती के साथ संभोग कर रहा था आरती के शरीर में एक अजीब सी झंझनाहट दौड़ गई थी और वो सांसें रोके उस इंसान की हरकतों को देखती ही रह गई वो ना तो हिल पा रही थी और नहीं इधार उधर देख ही पा रही थी वो इंसान धीरे-धीरे उसकी ओर ही बढ़ रहा था और अपने लण्ड को अपनी मुट्ठी में बाँधे हुए उसकी ओर ही देखता हुआ लंबे लंबे झटके दे रहा था

वो और कोई नहीं भोला था(फैक्ट्री का केअर टेकर) जो कि उसकी ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा था पर आरती को जैसे साँप सूंघ गया था वो अपनी सांसें रोके हुए भोला को अपनी ओर बढ़ते देखती ही रही और भोला उसके सामने आके थोड़ी दूर पर ही रुक गया और उसकी आँखों में आखों डाले अपने लण्ड को सहलाते हुए झटके दे रहा था आरती की नजर भी आनयास ही उसके उस लंबे और मोटे से लण्ड पर टिक गई थी और उस सांड़ को अपनी ओर बढ़ते हुए देखते हुए अपनी सांसों को गति देने की कोशिश कर रही थी पर सांस जैसे मुख और नाक में अटक गई हो वो खड़ी हुई उसे देखती रही और भोला उसकी ओर देखते हुए अपने लण्ड को झटके देता रहा और एक क्षण ऐसा आया कि उसके लण्ड से एक लंबी सी पिचकारी सी निकलकर आरती के पैरों के पास जमीन पर गिर गई उसके वीर्य के कुछ छींटे उसके पैरों पर भी गिरे जो कि उसके सेंडल को थोड़ा बहुत गीला कर गये


आरती के मुख से अचानक ही एक लंबी से सांस निकली और भोला के चहरे की ओर देखने लगी आआआआआआअह्ह, उसे भोला के चहरे पर एक सुकून सा दिखाई दिया जो कि उसे देख रहा था और अब भी उसके चहरे पर एक दयनीय सा भाव था शायद कह रह हो बहुत देख चुकी मुझे अब तो कुछ कर और भोला ने अपना हाथ आरती की ओर बढ़ाया ताकि वो आरती को छू सके।
पर आरती को जैसे ही उसके सामने एक लंबा और काला सा हाथ दिखा उसने अपने शरीर के पूरे जोर से भोला को एक धक्का दिया ताकि भोला उसे छू ना सके पर धक्का इतना तेज था कि भोला के पैर लड़खड़ा गये और वो डक्ट के पीछे रखे छोटे बड़े पाइप पर फिसल गया और सीधे पीछे की ओर गिर पड़ा और गिरता ही चला गया।
आरती को जैसे ही होश आया तो उसने पलटकर लंबे लंबे पग भरती हुई जल्दी-जल्दी नीचे की ओर दौड़ लगा दी थर्ड और फर्स्ट फ्लोर तो बिना कुछ सोचे ही उतरगई पर ग्राउंड फ्लोर पर आते आते वहां मची हुई खलबली को देखकर वो थोड़ा सा सहज हुई और बिना किसी की ओर देखे और बिना किसी के जाने ही वो जल्दी से नीचे की ओर उतरगई थी जब वो आफिस में घुसी तो, अपने पति को फोन पर उलझे पाया और सेंटर टेबल पर अपनी काफी का कप ढँका हुआ पाया आरती पसीना पसीना हो चुकी थी । रवि की नजर एक बार उसपर पड़ी और फिर वो फोन पर उलझ गया

आरती को भी शांति मिली ना तो किसी को कुछ पता चला और ना ही किसी ने उसे कोई हरकत करते हुए ही देखा वो आराम से बैठकर काफी पीने लगी थी

इतने में एक आदमी केबिन में दाखिल हुआ और आरती और रवि की ओर देखते हुए
- सर मेम वो भोला छत से नीचे गिर गया है बहुत चोट लगी है उसे हास्पिटल ले जा रहे है

रवि- क्या छत से कैसे

- सर पता नहीं शायद पाइप पर से पैर फिसल गया होगा बच गया नीचे ग्राउंड फ्लोर में रेत के ऊपर गिरा

रवि- हाँ हाँ… ले जाओ में भी आता हूँ मेम को छोड़ कर
रवि जल्दी से आरती की ओर देखते हुए

रवि- चलो तुम्हें शोरुम छोड़ दूं पता नहीं कैसे गिर गया में जरा हास्पिटल से हो आता हूँ

रवि- जी
वो चुप थी पर अंदर एक उथल पुथल मची हुई थी अगर भोला को कुछ हो गया तो कही ज्यादा चोट तो नहीं आई आरती को लिए रवि शो रूम पहुँचा और सोनल को भी भोला के गिरने की खबर बताया। रवि थोड़ी देर बाद ही शोरुम छोड़ कर हास्पिटल की ओर लपका
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