Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
04-07-2019, 11:17 AM,
#1
Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
कामुक कलियों की प्यास


ये कहानी पिंकी ने लिखी है मैं इसे आप के लिए पेश कर रहा हूँ 
हैलो दोस्तो, आज आपकी दोस्त पिंकी आपके लिए एक कहानी लेकर आई है, इस कहानी में जरा भी मिलावट नहीं है, आपके सामने पेश कर रही हूँ, बस सेक्स के दौरान थोड़ा मसाला डाला है।
उम्मीद है आपको पसन्द आएगी, तो आइए कहानी के किरदारों से आपको मिलवा देती हूँ।
रचना गुप्ता… उम्र 20, फिगर 32-30-34 रंग दूध जैसा सफेद बदन, एकदम बेदाग। जब यह चलती है तो लड़कों की पैन्ट में तंबू और लबों पर ‘आह’ अपने आप आ जाती है।
इसकी छोटी बहन ललिता उम्र 18 फिगर 34-28-36..! यह भी अपनी बहन की तरह चाँद का टुकड़ा है। इसकी अदा पर भी सब फिदा हैं, यह जब चलती है तो इसकी पतली कमर बल खाती है और चूतड़ ऐसे मटकते हैं जैसे कोई स्प्रिंग लगी हुई हो।
लड़के तो क्या बुड्डों के लौड़े भी तनाव में आ जाते हैं।
इन दोनों का एक भाई है अमर उसकी उम्र 20 की है स्मार्ट.. हैण्डसम.. गुड लुकिंग.. बिल्कुल हीरो लगता है।
क्या बताऊँ, अमर की जितनी तारीफ करो, कम है, लड़कियाँ उसको देख कर उसकी हो जाने की कल्पना करती हैं।
दोस्तो, यह तो हो गया इनका परिचय। अब संक्षेप में आपको इनकी पिछली जिन्दगी भी बता देती हूँ।
इनके पापा जगन गुप्ता एक बहुत अमीर आदमी हैं, उनका कारोबार देश-विदेश में फैला हुआ है। वो अक्सर अपनी बीवी के साथ बाहर ही रहते हैं और ये सब एक आलीशान बंगले में रहते हैं।
दिन में घर के सारे काम नौकर करते हैं, एक औरत है जो खाना बनाती है पर घर में नहीं रहती है, रात का खाना बनाकर वो बाहर लॉन में एक कमरा है, वहाँ चली जाती है।
तो आप समझ ही गए होंगे कि ये तीनों एक घर में रहते हैं। अब एक साथ रहेंगे तो जवान जिस्म है कभी तो मन मचलेगा ही, तो आइए आपको बताती हूँ इनकी कहानी।
रचना- ललिता की बच्ची रुक.. मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी..!
ललिता भाग कर बेड पर चढ़ जाती है और रचना उसको वही। दबोच लेती है और उसके पेट पर बैठ जाती है।
रचना- अब बोल क्या बोल रही थी तू…!
ललिता- सॉरी दीदी.. अब नहीं बोलूँगी…!
अमर- यह क्या हो रहा है? तुम दोनों की मस्ती कभी ख़त्म नहीं होती क्या..! रचना हटो वहाँ से, स्कूल की छुट्टियाँ हैं, इसका मतलब यह नहीं कि तुम दोनों पूरा दिन मस्ती करो..!
रचना- बिग बी, आप भी तो हमारे साथ मस्ती करते हो ना…!
अमर- हाँ करता हूँ स्वीट सिस.. पर मजाक मस्ती का भी समय होता है और हर वक़्त लड़ना अच्छी बात नहीं है। अब मैं टीवी देख रहा हूँ कोई आवाज़ मत करना ओके..!
ललिता- ओके भाई.. आप जाओ हम चुपचाप रहेंगे।
अमर- आ जाओ साथ बैठ कर टीवी देखते हैं।
रचना- नहीं ब्रो, आप देखो हम यहीं हैं।
अमर वहाँ से चला जाता है और रचना लैपटॉप चालू करके नेट खोल लेती है।
ललिता- दीदी आज कुछ सेक्सी वीडियो देखें..! मज़ा आएगा…!
दोस्तों बीच में आने के लिए सॉरी.. मैं आपको बता दूँ ये दोनों बहनें तो हैं ही साथ में पक्की सहेलियाँ भी हैं और हर तरह की बातें एक-दूसरे से करती हैं, कभी-कभी नेट पे सेक्सी वीडियो भी देखती हैं।
आजकल 4 जी का जमाना है हर फ़ोन में नेट है। ये तो अमीर घर से हैं तो इनके लिए कंप्यूटर वगैरह तो आम बात है और ऊपर से इनके माता-पिता भी साथ में नहीं हैं, यानि कुल मिलाकर ये बिल्कुल खुले अंदाज की हैं।
रचना एक सेक्स साइट ओपन कर लेती है और दोनों सेक्सी वीडियो देखने लगती हैं, जिसमे एक काला आदमी एक लड़की की चूत में लौड़ा घुसा रहा था और झटके मार रहा था। वो लड़की ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी।
ललिता- दीदी कितना गंदा आदमी है दूसरा लगाओ…!
रचना दूसरा वीडियो लगा लेती है इसमें अमेरिकन लड़का-लड़की चुदाई कर रहे थे। दोनों आराम से उनको देख रही थीं। उनकी चूत पानी-पानी हो रही थी।
पंद्रह मिनट तक वे दोनों कई वीडियो देख चुकी थीं, पर अबकी बार जो वीडियो आया वो लैस्बो था।
रशियन स्कूल-गर्ल आपस में किस कर रही थीं और एक लड़की दूसरी के मम्मे दबा रही थी।
ललिता- ओ माय गॉड.. दीदी ये दोनों तो लड़की हैं..! क्या सच में दो लड़कियाँ आपस में ऐसा करती हैं?
रचना- करती हैं, तभी तो यह वीडियो बनाया गया है।
ललिता- ऐसा करने से मज़ा आता है क्या?
रचना- हम जब भी सेक्सी वीडियो देखते हैं हमें मज़ा आता है और हमारी पैन्टी गीली हो जाती हैं। आज हम आपस में करें? शायद ज़्यादा मज़ा आए…!
ललिता- हाँ दीदी मज़ा आएगा..! आप रूम लॉक कर आओ.. आज तो प्रेक्टिकल करेंगे ही …’वाउ’…!
रचना दरवाजा बन्द कर आती है, दोनों अपने पूरे कपड़े निकाल देती हैं। यह इनके लिए कोई नई बात नहीं थी। अक्सर एक दूसरे के सामने कपड़े बदलने के लिए ये नंगी हो चुकी थीं। नई बात तो आपके लिए है दोस्तो।
दोनों के नंगे जिस्म चमक रहे थे। रचना के गोरे बदन पर एकदम गोल आकार के 32″ के मम्मे और डार्क पिंक निप्पल, जो नुकीले तीर के जैसे खड़े थे, किसी को भी बस में करने को काफ़ी हैं।
ललिता का जिस्म भी एकदम गोरा है और उसके खड़े मम्मे जो 34″ के थे कयामत ढा रहे थे।
ललिता के भी निप्पल पिंक थे, पर लाइट पिंक। ललिता छोटी थी, पर उसके मम्मे रचना से बड़े थे, और रस से भरे हुए थे।
अब आपको रचना की चूत का नज़ारा दिखाती हूँ।
उसकी चूत पर हल्के रुई के जैसे मुलायम रोयें थे। एकदम क्लीन चूत नहीं थी, बस बहुत कम बाल थे, जिनके बीच में चूत के दरवाजे कस कर बंद थे, जैसे बरसों से किसी घर का गेट बन्द हों, उसे खोला ना गया हो।
एकदम टाइट चूत थी।
अब ललिता की चूत भी देख लो, यह एकदम क्लीन थी, जैसे आज ही शेव की हो। चूत की फाँक गुलाबी और चूत के एक फाँक पर एक तिल है।
सफ़ेद चमकती चूत पर ये काला तिल.. हय क्या गजब लग रहा था..! आप कल्पना करके देखो मन मचल ना जाए तो कहना…!
दोनों की कमर भी नागिन जैसी बल खाती हुई थी। उसके नीचे जो पिछाड़ी थी, उफ.. ! क्या कहने..! पाँच बार लंड का पानी निकल कर एकदम बेजान कर लो और फिर इस गाण्ड पर निगाह करो अगर लौड़ा झटके ना खाने लगे तो मेरा नाम बदल देना..!
हुस्न की अप्सराएं थीं दोनों बहनें।
दोनों बेड पे लेट गईं और एक-दूसरे को चूमने लगीं। रचना अपनी जीभ ललिता के मुँह में डाल देती है, ललिता उसको चूसने लगती है। एक हाथ से रचना उसके मम्मे दबाने लगती है, ललिता को मज़ा आने लगता है, वो भी अपने हाथ से रचना के चूतड़ों को दबा रही थी।
5 मिनट तक चूमाचाटी करने के बाद दोनों अलग होती हैं।
रचना को ललिता के मम्मे दबाने में बड़ा मज़ा आ रहा था, वो उसके चूचुक को मुँह में लेकर चूसने लगती है।
ललिता- सी..सी…उफ.. दीदी दर्द हो रहा है आप दाँत से काटो नहीं प्लीज़…!
रचना- आह.. ललिता मज़ा आ रहा है तेरे मम्मे कितने मस्त हैं… मैं इनको दबा-दबा कर फ़ुटबाल बना दूँगी..!
ललिता- आह.. दीदी दर्द होता है.. आराम से दबाओ ना.. और मुझे भी आपके मम्मे दबाने हैं।
रचना- नहीं तुम बस मेरे मम्मे चूसोगी.. वो भी आराम से.. मेरे मम्मे कड़क हैं तो दबाने से दुखते हैं..!
ललिता बड़े प्यार से रचना के मम्मे चूस रही थी और रचना उसकी गाण्ड को दबा रही थी।
रचना- तुम लेट जाओ, मैं तुम्हारी चूत में उंगली डालती हूँ, मज़ा आएगा।
ललिता- ओके दीदी, वैसे भी चूत में कुछ हो रहा है..!
रचना ललिता की चूत में अपनी ऊँगली घुसाने की कोशिश करती है पर ललिता को बहुत दर्द होता है।
ललिता- उऊ आ.. प्लीज़ नहीं, दीदी बहुत दर्द होता है..!
रचना- अरे क्या हुआ अभी तो अन्दर डाली भी नहीं और तुमको दर्द हो गया ..! उस क्लिप में तो वो आदमी कितना बड़ा लंड डाल रहा था…!
ललिता- मुझे नहीं पता.. मुझे दर्द हुआ..! बस आप ऊपर से ही इसको दबाओ..! उसी में मज़ा आ रहा है…!
रचना चूत को दबा दबा कर मज़ा ले रही थी। कभी रगड़ती तो कभी उसको दबाती..
दोनों एकदम गर्म हो गई थीं।
अब रचना ललिता के ऊपर आ गई और दोनों चूतों को आपस में मिला कर हिलने लगीं।
सेक्स की आग उनमें भड़क गई थी। वो एक-दूसरे को चूम रही थीं और चूत को रगड़ रही थीं।
रचना- आ.. आह.. ललिता मज़ा आ रहा है उफ़फ…!
ललिता- हाँ दीदी मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है उफ़.. मेरी ये निगोड़ी चूत में कुछ हो रहा है ..उ कककक…!
रचना- आह.. मुझे भी कुछ हो रहा है अये.. हय.. आह.. आई.. ईई…!
दोनों की चूत पानी छोड़ देती हैं। आज पहली बार दोनों बहनें झड़ी थीं। दोनों अलग हो जाती हैं।
ललिता- आह.. दीदी आज कितना मज़ा आया.. पता नहीं मेरी चूत से चिपचिपा सा क्या पानी जैसा निकला.. लेकिन जिन्दगी में ऐसा मज़ा कभी नहीं आया…!
रचना- मेरा भी पानी निकला है, यह शायद चूत का पानी है, हमने वीडियो में देखा था न.. वो आदमी उस लड़की के मुँह पर पानी गिरा रहा था.. यह वैसा ही पानी है..!
ललिता- दीदी हम रोज ऐसा करेंगे.. बहुत मज़ा आता है।
रचना- हाँ ललिता हम पहले वीडियो देखेंगे फिर वैसा ही करेंगे।
दोनों बहने नंगी ही बातें कर रही थीं। तभी बाहर से दरवाजे पर दस्तक हुई।
तो रचना ने कहा- दो मिनट रूको हम चेंज कर रहे हैं।
अमर- जल्दी करो.. मुझे तुमसे बात करनी है।
दोनों जल्दी-जल्दी कपड़े पहनती हैं। जल्दबाज़ी में ब्रा-पैन्टी नहीं पहनती, बस टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन कर दरवाजा खोल देती हैं।
अमर- क्या कर रही थीं दोनों.. कितनी देर लगा दी दरवाजा खोलने में..!
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04-07-2019, 11:17 AM,
#2
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
रचना- कुछ नहीं भाई.. आप कहो क्या बात करनी है..!
अमर- यार मैं बोर हो रहा हूँ चलो कोई गेम खेलते हैं..!
रचना- कौन सा गेम भाई…!
अमर- अब सारे सवाल यहीं पूछोगी क्या ? चलो मेरे रूम में ललिता आ जाओ…!
ललिता- आप जाओ मैं बाद में आती हूँ मुझे बाथरूम जाना है।
अमर के रूम में आकर रचना बेड पर बैठ जाती है। अमर उसके पास खड़ा हो जाता है। तब उसकी नज़र रचना के मम्मों पर जाती है। ब्रा ना होने की वजह से टी-शर्ट के गले से दूध जैसे सफ़ेद मम्मे साफ नज़र आ रहे थे।

ब्रा ना पहने हुए होने की वजह से टी-शर्ट के गले में से दूध जैसे सफेद मम्मे साफ नज़र आ रहे थे। अमर रचना के मस्त मम्मों को निहार रहा था, उसका लंड हरकत करने लगा था।
दोस्तों अमर जानता है कि रचना उसकी सग़ी बहन है, पर लौड़ा किसी रिश्ते को नहीं मानता है, उसे तो बस चूत से मतलब होता है। जब भी कोई मस्त माल दिखे, वो अपनी औकात में आ जाता है।
रचना को जब यह अहसास हुआ तो वो झट से खड़ी हो गई।
अमर- क्या हुआ? बैठो ना..!
रचना- भाई आपने बताया नहीं कि कौन सा खेल खेलेंगे?
तभी ललिता भी कमरे में आ गई।
ललिता- हाँ भाई मैं भी आ गई हूँ, अब बताओ क्या खेलें?
अमर- हम कुश्ती करेंगे.. मज़ा आएगा..!
रचना- क्या यह भी भला कोई खेल हुआ?
अमर- अरे बहुत मज़ा आएगा.. तुम दोनों एक तरफ़ और मैं अकेला.. हम बड़ा वाला गद्दा ज़मीन पर डाल लेंगे.. अगर तुम दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मेरी नाक ज़मीन पर लगा दी, तो तुम जीत जाओगी और अगर मैंने तुम्हारी लगा दी.. तो मैं जीत जाऊँगा.. ओके?
ललिता- ओके.. भाई.. लेकिन हम जीत गए, तो हमारा क्या फायदा.. पहले वो तो बताओ..!
अमर- हारने वाला.. जीतने वाले को, जो वो माँगे, देना पड़ेगा..!
रचना- वाउ..! तब तो हम ही जीतेंगे और आप हमें शॉपिंग करवाओगे.. ओके..!
अमर- ओके.. लेकिन मैं जीता तो?
ललिता- भाई आप हारने वाले हो, बस अगर ग़लती से जीत भी गए तो तब बता देना कि आपको क्या चाहिए.. ओके..!
अमर- ओके.. पर कोई चीटिंग नहीं करना. सिर्फ नाक ही टिकानी है बाकी बदन से कोई मतलब नहीं होगा..!
रचना- ओके भाई..!
जैसे ही अमर ने 1-2-3 बोल कर ‘स्टार्ट’ बोला, दोनों बहनें उसके पैरों को पकड़ कर खींचने लली, अमर गद्दे पर गिर गया।
तब रचना अमर को धक्का देकर पेट के बल करने की कोशिश करती है ताकि उसकी नाक ज़मीन पर लगा सके।
मगर अमर भी कहाँ कम था, उसने रचना को बांहों में भर लिया, उसके मम्मे अमर के सीने में धँस गए और अमर ने उसे कस कर दबोच लिया।
अमर का लौड़ा तन कर सीधा रचना की चूत पर सैट हो गया।
रचना ने पैन्टी नहीं पहनी थी और निक्कर भी पतली थी तो उसको लंड का अहसास सीधा अपनी चूत पर हो रहा था।
उधर ललिता रचना को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। रचना तो लंड के अहसास से गनगना गई थी, उसने अपने आपको ढीला छोड़ दिया था और अमर भी लंड को चूत पर रगड़ रहा था।
ललिता- दीदी आप कोशिश करो ना छूटने की.. नहीं तो भाई जीत जाएँगे..!
रचना ने अपनी ताक़त लगाई और ललिता ने अमर के हाथ खोल दिए, रचना आज़ाद हो गई और उसने जल्दी से उठ कर अमर के पैर पकड़ लिए।
तब उसकी नज़र अमर के लौड़े पर पड़ी जो एकदम अकड़ा हुआ था।
अमर ने सूती पायजामा पहना हुआ था और शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था, क्योंकि पायजामे पर अमर के लंड से पानी की बूँद निकली थीं, जो बाहर साफ दिख रही थीं।
रचना ने पैर पकड़ने के बहाने से लंड को छू लिया, जिससे उसको बड़ा मज़ा आया।
इधर अमर भी मज़े ले रहा था।
करीब 15 मिनट तक इनका ये खेल चलता रहा, अमर कभी रचना के मम्मों को दबाता, कभी अपने होंठ मम्मों पे रख देता, तो कभी रचना की गाण्ड को हाथ से दबा देता, कभी-कभी ललिता के मम्मों को भी दबाता, कभी उसको नीचे पटक कर अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ता।
आख़िरकार अमर का लौड़ा बेहद गर्म हो गया, वो समझ गया कि अगर ये खेल यूं ही चलता रहा तो उसका पानी छूट जाएगा और उसने जानबूझ कर उनको मौका दिया और अपनी नाक जमीन पर टिका दी।
दोनों बहनें खड़ी होकर कूदने लगी- हम जीत गए…हम जीत गए…
अमर- अच्छा बाबा… मैं हारा.. पर रूको मैं दो मिनट में बाथरूम जाकर आया.. ज़ोर की ‘सूसू’ आई है..!
अमर भाग कर बाथरूम में चला गया और अपने लण्ड, जो उसकी सगी बहनों के बदन से रगड़ कर खड़ा हुआ था, को निकाल कर मुठ्ठ मारने लगा, एक मिनट में ही उसके लौड़े ने पानी छोड़ दिया।
इधर रचना और ललिता खुश थीं कि वो जीत गई हैं और शॉपिंग की बात कर रही थीं कि क्या-क्या लेना है।
अमर बाहर आया तो दोनों की बातें चालू थीं।
अमर- क्या बातें हो रही हैं दोनों में.. मैं ज़्यादा कुछ नहीं दिलाऊँगा.. बस एक-एक ड्रेस दोनों ले लेना.. ओके..!
ललिता- नहीं भाई आपने कहा था, जो हम चाहें आप दिलाओगे.. अब आप चीटिंग कर रहे हो..!
रचना- हाँ ब्रो.. यह गलत बात है.. हाँ.. जो हम चाहेंगे, आपको दिलवाना होगा..!
अमर- ओके.. मेरी बहनों अब तैयार हो जाओ, दोपहर का खाना भी हम बाहर ही खाएँगे और शॉपिंग भी हो जाएगी।
रचना- वाउ.. भाई यू आर बेस्ट ब्रो इन दि वर्ल्ड..!
ललिता- नो.. भाई.. शाम को जाएँगे ना.. प्लीज़ दोपहर को मुझे अपनी सहेली के यहाँ जाना है, आज वहाँ लंच के लिए मुझे बुलाया है, बाकी सब सहेलियाँ भी आ रही हैं।
अमर- नो.. अभी मतलब अभी.. तुमको नहीं जाना, तो रचना को बता दो तुम्हें क्या चाहिए हम ले आयेंगे.. ओके..!
ललिता- ओके.. आप जाओ और दीदी जो आपको अच्छा लगे आप ले आना।
रचना- हाँ ललिता, मैं ले आऊँगी।
ललिता- तो चलो.. हम तैयार हो जाते हैं। आप भाई के साथ चली जाना, मैं अपनी सहेली के यहाँ निकल जाऊँगी..!
रचना- मैं सुनीता को बता कर आती हूँ कि लंच ना बनाए हम बाहर जा रहे हैं..!
अमर- ओके.. अब जाओ, मैं भी रेडी हो जाता हूँ।
दोनों वहाँ से निकल जाती हैं और अमर भी बाथरूम में फ्रेश होने चला जाता है।
सुबह 11 बजे ललिता अपनी सहेली के पास चली गई और अमर भी रचना को लेकर शॉपिंग के लिए बाइक से निकल गया।
अमर ने नीली जींस और सफ़ेद टी-शर्ट पहनी थी और रचना ने काली टी-शर्ट और नीली जैकेट और काली जींस पहनी थी।
बाइक पर वो अमर से चिपक कर बैठी हुई थी।
आज पहली बार उसको अमर भाई से ज़्यादा कुछ महसूस हो रहा था। एक तो उसने ललिता के साथ लैस्बो किया और फिर कुश्ती के दौरान जो हरकतें अमर ने की वो उसको बार बार बेचेन कर रही थीं। उसने भी तो अमर के लंड को कई बार छुआ था।
अमर- हाँ.. तो रचना बताओ..! कहाँ चलें.. शॉपिंग के लिए..!
रचना- भाई सिटी सेंटर से अच्छी जगह क्या होगी.. लंच भी वहीं कर लेंगे।
अमर- हाँ.. यही ठीक रहेगा।
रचना एकदम कस कर अमर को पकड़े हुई थी। उसके मम्मे अमर की पीठ में धंसे हुए थे और उसके दोनों हाथ अमर की नाभि पर थे। जैसे ही स्पीड ब्रेकर आते.. वो जानबूझ कर अपना हाथ लौड़े पर ले जाती।
उसकी इस हरकत से अमर के लौड़े में भी तनाव आ गया था, पर जींस के कारण इतना पता नहीं चल रहा था।
जैसे ही बाइक सिटी सेंटर के पास रुकी, एक कार भी ठीक उनके बराबर में आकर रुकी।
रचना भी नीचे उतर गई, अमर ने बाइक को साइड में लगाया, तभी कार से एक 22 साल का लड़का उतरा जो काफ़ी हैण्डसम था।
उसे देख कर अमर चौंक जाता है और जब उसकी नज़र अमर पर पड़ी, तो वो भी आँखें फाड़े अमर को देखने लगा।
अमर- हे.. आई डोंट विलीव शरद.. तू कब आया यार..!
शरद- अबे साले मैं तो कब से यहीं हूँ तेरा कोई अता-पता ही नहीं है। पूरे 5 साल बाद मिला है तू..!
अमर- रचना, यह मेरा बेस्ट-फ्रेंड है शरद.. और दोस्त, यह मेरी छोटी बहन रचना है..!
शरद- हाय रचना.. यू आर लुकिंग वेरी नाइस यार..!
रचना- थैंक्स ..!
शरद ऊपर से नीचे रचना को निहार रहा था और रचना भी उसकी नज़र को देख रही थी।
तभी अमर ने कहा- यार हम लोग शॉपिंग के लिए आए हैं। तुम इतने समय बाद मिले हो तो साथ में लंच करेंगे.. ओके .!
और वे एक-दूसरे को अपने फोन नम्बर दे देते हैं।
शरद- सॉरी यार.. अभी तो एक बहुत जरूरी काम के सिलसिले में आया हूँ। अब तो तेरे घर आकर ही कभी खाऊँगा..!
अमर- ओके दोस्त.. जरूर आना.. मैं तुम्हारा वेट करूँगा..!
शरद वहाँ से चला गया और वो दोनों भी अन्दर चले गए।
अमर- हाँ तो मेरी बहना क्या चाहिए.. बताओ?
रचना- अभी तो देख रही हूँ भाई।
अमर- ये देखो, यह ब्लू टी-शर्ट कितनी अच्छी है ना.. यह ले लो..!
रचना- नहीं भाई ये तो बकवास है.. मुझे नहीं लेनी..!
अमर- ओके तुम्हें जो अच्छी लगे, वो ले लो और ललिता के लिए भी ले लेना, मैं थोड़ा उस तरफ अपने लिए कुछ देखता हूँ। तुम्हें जो लेना है ले लो ओके..!
रचना अपने और ललिता के लिए दो ड्रेस ले लेती है और दूसरी साइड जाकर ब्रा और पैन्टी भी ले लेती है।
अमर भी कुछ शर्ट और जींस ले आता है।
अमर- क्यों रचना हो गया सब.. या कुछ बाकी है..!
रचना- हाँ हो गया भाई.. आप मुझे पैसे दे दो, मैं काउंटर पर बिल दे देती हूँ।
अमर- साथ चल रहे हैं ना.. मैंने भी तो कपड़े लिए ही लिए हैं.. सब कपड़े एक जगह कर दो, मैं बिल दे देता हूँ।
रचना ने ब्रा-पैन्टी ली थी, इसलिए वो नहीं चाहती थी कि अमर को पता चले, पर अमर के ज़िद करने पर उसने सारे कपड़े एक जगह कर दिए।
काउंटर पर जब एक-एक करके सारे कपड़ों के कोड मारे जा रहे थे, तब अमर की नज़र रेड ब्रा-पैन्टी के सेट्स पर गई।
उसके बाद और भी ब्रा-पैन्टी सामने आईं, पिंक और ब्लैक एक ब्राउन भी थी।
रचना अमर से अपनी नज़रें चुरा रही थी और अमर भी उसकी तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहा था। वहाँ से निकलकर दोनों रेस्तरा में बैठ जाते हैं।
अमर- क्या खाओगी रचना..!
रचना- जो आपको अच्छा लगे..।
अमर- नहीं तुम बताओ, जब कपड़े अपनी पसन्द के लिए हैं, तो खाना भी तुम ही बताओ..!
रचना- इश्श.. भाई.. सॉरी.. प्लीज़ मत सताओ ना आप..!
अमर- ओके एक शर्त पर..! अगर तुम अपने सारे कपड़े जो लिए हैं, एक-एक करके मुझे पहन कर दिखाओगी तो..!
रचना- ओके.. भाई घर जाकर पक्का दिखाऊँगी..!
अमर- देखो बाद में नाटक मत करना.. वरना मैं तुमसे बात भी नहीं करूँगा।
रचना- हाँ भाई.. कहा ना, दिखा दूँगी..!
अमर- आज जो जो लिया है.. सब.. ओके..!
रचना को अमर की बात समझ नहीं आ रही थी कि आख़िर वो चाहता क्या है।
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04-07-2019, 11:17 AM,
#3
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
रचना- हाँ भाई हाँ.. अब क्या लिख कर दूँ..!
अमर की आँखों में एक चमक सी आ गई और ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने आप लंड पर चला गया, लेकिन जल्दी ही वो संभल गया।
अमर ने खाने का ऑर्डर कर दिया, दोनों ने आराम से खाना खाया और कुछ इधर-उधर की बातें करने लगे।
लंच के बाद वो वहाँ से घर के लिए निकल पड़े।
घर पहुँच कर रचना ने एक मादक अंगड़ाई लेते हुए कहा- ओह भाई बहुत खाना खा लिया.. अब तो नींद आ रही ही.. आआ उउउ..!

रचना कुछ नहीं बोलती और बैग उठा कर अपने रूम में चली जाती है। अमर भी उसके पीछे-पीछे रूम में चला जाता है।
रचना बैग को साइड में रख कर बेड पर गिर जाती है।
अमर- यह क्या है? अब तुम दिखा रही हो या नहीं..!
रचना- दिखाऊँगी न..! भाई थोड़ा आराम तो करने दो..!
अमर- ठीक है, करो आराम, मैं जाता हूँ और अब मुझसे बात मत करना.. ओके..!
रचना- ओह भाई.. आप तो नाराज़ हो गए.. अच्छा बाबा.. यहाँ बैठो, मैं अभी दिखाती हूँ आपको !
रचना बैग से अपने कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई और कपड़े पहन कर बाहर आई।
रचना- यह देखो, कैसी लग रही हूँ भाई, मैं?
अमर- अच्छी लग रही हो, अब दूसरा ड्रेस भी पहन कर दिखाओ।
रचना- भाई मैंने एक ही ड्रेस लिया है, दूसरा ललिता का है.. ओके..!
अमर- मैं जानता हूँ कि दूसरा ललिता का है, पर तूने अपने लिए और भी कुछ लिया है न..! वो पहन कर दिखाओ।
रचना- आर यू क्रेजी..! आप क्या बोल रहे हो..! मैंने और क्या लिया है?
अमर- अंडर-गारमेंट्स लिए हैं न..!
रचना- तो आप का मतलब मैं आपको वो पहन कर दिखाऊँ.. भाई आप ठीक तो हो न..!
अमर- इसमें ठीक होने की क्या बात है, तुमने वादा किया था ओके.. और उसमें क्या है?
रचना- भाई मुझे शर्म आ रही है, आप कैसी बात कर रहे हो?
अमर- क्यों.. स्वीमिंग के समय में भी तो सिर्फ़ अंडरवियर में तुम्हारे सामने होता हूँ और तुम भी तो स्विम सूट में मेरे सामने आती हो..!
रचना- वो दूसरी बात है भाई, ऐसे बिकनी में आना अच्छा नहीं लगता न…!
अमर- अरे पागल.. बड़ी-बड़ी फिल्म स्टार बिकनी में पोज़ देती हैं और 5 साल पहले याद है हम जंगल में घूमने गए थे, तब बारिश में भीग गए थे और सारे कपड़े गीले हो गए थे, तब मॉम ने हमें नंगा ही गाड़ी में बैठाया था। दूसरे कपड़े भी नहीं थे हमारे पास..!
रचना- भाई उस समय हम छोटे थे न.. तो चलता है..!
अमर- तो अब कौन से बड़े हो गए और क्या फ़र्क पड़ गया है, अब यार तुम तो कहती हो कि मुझे फिल्म में हीरोइन बनना है, ऐसे शरमाओगी तो तुम हीरोइन कैसे बन पाओगी?
रचना- हाँ भाई.. मेरा बहुत मन है कि मैं हीरोइन बनूँ..।
अमर- तेरा काम बन सकता है, आज जो मेरा दोस्त मिला था न.. शरद..! वो दुबई में ही बड़ी-बड़ी फिल्मों में पैसा लगाता है, उसकी बहुत पहचान है। अमिताभ से लेकर शाहिद कपूर तक और कटरीना से लेकर सोनाक्षी तक सब के साथ उसका उठना-बैठना है।
रचना- ओह.. रियली भाई..! आप उससे बात करो न.. प्लीज़ मुझे भी कोई रोल दिलवा दे..!
अमर- ओके मैं बात कर लूँगा, पर पापा को क्या कहोगी?
रचना- पापा की टेंशन मत लो, मैं उनको मना लूँगी, बस आप एक बार बात तो करो अपने दोस्त से..!
अमर- ओके कर लूँगा.. यार, अब तुम जल्दी से बिकनी पहन कर आओ, मैं भी तो देखूँ कि मेरी बहन कैसी दिखती है।
रचना शरमाति हुई बाथरूम में जाकर ब्लैक वाला सैट पहन कर बाहर आई।
अमर तो नजरें गड़ाए उसकी गदराई जवानी को देखने लगा- दूधिया बदन पर काली ब्रा में उस के मम्मे बाहर निकलने को बेताब थे और उसकी पैन्टी चूत को छुपाने में नाकाम हो रही थी।
अमर का लंड पैन्ट में तन गया था।
रचना- ऐसे क्या देख रहे हो भाई?
अमर- देख रहा हूँ कि मेरी बहन कितनी सुंदर है।
रचना- रियली भाई.. थैंक्स..!
अमर- ब्रा-पैन्टी में इतनी खूबसूरत लग रही हो, अगर ये भी ना हो तो क्या मस्त लगोगी..!
“धत्त भाई.. आप भी..!” बोल कर रचना भाग जाती है और बाथरूम बन्द कर लेती है।
अमर- रचना क्या हुआ यार.. प्लीज़ बाहर आओ न..!
रचना- बस भाई.. मैंने आपको दिखा दिया, अब मैं कपड़े पहन कर आ रही हूँ।
अमर- क्यों वो रेड, पिंक और ब्राउन भी तो हैं वो भी पहन कर दिखाओ न..!
रचना- दो ललिता के लिए हैं, मेरी नहीं हैं भाई..!
अमर- अच्छा रेड वाली तो दिखाओ न..!
रचना- नहीं भाई अब आप अपने दोस्त से बात करो पहले.. उसके बाद आप जो कहोगे मैं दिखा दूँगी।
अमर- सच्ची..! जो मैं कहूँ.. वो दिखाओगी तुम?
रचना- हाँ भाई पक्का वादा है, पर आप बस अपने दोस्त से बात करो।
अमर- ओके.. मैं अभी उसको फ़ोन करके कल मिलने को बोलता हूँ, अब तो आ जाओ बाहर..!
रचना- भाई आप जाओ मैं थक गई हूँ बाथ लेकर सोऊँगी अब..!
अमर- ओके मैं अभी जाता हूँ और शरद से बात करता हूँ।
अमर वहाँ से अपने रूम में आया और शरद को फ़ोन करके ‘बहुत जरूरी काम है’ कह कर शाम को मिलने को बुलाया।
शरद से बात करने के बाद अमर नंगा हो गया और अपने लंड को सहलाने लगा।
अमर- ओह माई स्वीट सिस्टर, तेरे मम्मे क्या कमाल के हैं, उफ.. तेरा गोरा बदन, तेरी चूत भी कितनी प्यारी होगी.. आह आ आ.. साली बहुत नखरे हैं तेरे.. अब देख कैसे तुझे मजबूर करता हूँ नंगी होने के लिए।
रचना के नाम की मुठ मार कर अमर शान्त हो गया और सो गया।
शाम को अमर तैयार होकर बाहर निकला और घर से थोड़ी दूर एक स्टोर के पास खड़ा हो गया। करीब 5 मिनट में शरद भी आ गया। अमर कार देखकर झट से अन्दर बैठ गया, शरद ने कार को आगे बढ़ा देता दिया।
शरद- हाँ भाई.. अब बोल ऐसा कौन सा जरूरी काम है जो तूने अर्जेंट बुलाया है?
अमर- अरे यार तू गाड़ी चला, बस मैं बताता हूँ सब..!
शरद- वैसे जाना कहाँ है, यह तो बता यार..!
अमर- जाना कहीं नहीं है, बस कार को हाइवे पर ले ले.. लॉन्ग-ड्राइव भी हो जाएगी और बात भी..!
शरद- अच्छा ठीक है, अब तू बात तो शुरू कर यार..!
अमर- यार तेरे तो फिल्म वालों से बहुत कनेक्शन हैं, मेरी बहन के लिए बात करनी है तुझसे..!
शरद- क्या..! फिल्म में तेरी बहन को रोल चाहिए..! कौन सी बहन को..!
अमर- यार सुबह तो देखा है रचना को..!
शरद- अच्छा.. अच्छा कैसा रोल चाहिए.. उसे..! वो तो यार अभी बच्ची है।
अमर- उसको हीरोइन का रोल करना है।
शरद- तेरा दिमाग़ खराब है क्या..! हीरोइन का रोल नहीं होता, वो फिल्म की मेन किरदार होती है, और दूसरी बात अभी यार वो बहुत छोटी है।
अमर- अरे यार तुम बात को समझ नहीं रहे हो.. रोल-वोल कुछ नहीं दिलवाना है, उसको बस ये तसल्ली देनी है कि तुम उसको हीरोइन बना दोगे।
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04-07-2019, 11:18 AM,
#4
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद- ऐसा क्यों.. यार अपनी ही बहन को धोखा दे रहे हो, पूछ सकता हूँ क्यों..?
अमर- अरे यार धोखा नहीं दे रहा.. बस उसको बकरा बना रहा हूँ।
शरद- अरे यार वो लड़की है, उसको बकरा नहीं बकरी बनाओ हा हा हा हा..!
अमर भी हँसने लगता है और अपने मन में कहता ही बकरी नहीं उसको तो मैं घोड़ी बनाऊँगा..!
शरद- क्या सोच रहा है..!
अमर- कुछ नहीं यार.. बस ऐसे ही..!
शरद- अच्छा यह बता कि मेरे बोलने से वो मान जाएगी क्या?
अमर- नहीं यार वो बहुत स्मार्ट है, ऐसे नहीं मानेगी.. तू थोड़ी एक्टिंग करना.. बस आज रात को तू मेरे घर आ जा, बाकी क्या करना है ये तू खुद सोच लेना..!
शरद- ओके, मैं 9 बजे आऊँगा लेकिन यार एक बात कहूँ मुझे उसकी कुछ पिक लेनी होगी, ताकि उसको लगे कि रियल में उसको फिल्म में रोल दिलवा रहा हूँ।
अमर- हाँ क्यों नहीं यार.. ले लेना..!
शरद- यार वो तेरी सग़ी बहन है.. डर रहा हूँ कुछ गलत ना हो जाए..और कहीं तुमको बुरा ना लग जाए।
अमर- क्यों मुझे को क्यों बुरा लगेगा यार..!
शरद- अब यार तू तो जानता ही है न.. कि आजकल की हीरोइन कैसी होती हैं.. उसी टाइप के पिक लेने होंगे..!
अमर- तो ले लेना न..! यार मुझे कुछ बुरा नहीं लगेगा, मैं तो खुद उसको बोल कर आया हूँ ये सब बातें कि फिल्म लाइन में शर्म नाम की कोई चीज नहीं होती है, वो रेडी है यार..!
शरद- यार एक बात समझ नहीं आ रही.. तू आख़िर चाहता क्या है.. साफ-साफ बता न..! अपनी सग़ी बहन को मेरे सामने अध-नंगा करने को भी तैयार है, यार मुझे ये सिर्फ़ बकरा बनाने की बात तो नहीं लगती.. बात कुछ और ही है..!
अमर- अरे यार अब तुझसे क्या छिपाऊँ, तू अध-नंगी की बात कर रहा है, मेरा बस चले तो उसको पूरी नंगी कर दूँ.. पागल हो गया हूँ मैं उसकी जवानी देख कर..!
शरद- क्या तू होश में तो है..! वो तेरी सग़ी बहन है यार..!
अमर- तो क्या हुआ दुनिया में बहुत से बहन-भाई चुदाई करते हैं.. मैं कर लूँगा, तो कौन सी आफ़त आ जाएगी..!
शरद- यार तेरे मन में यह ख्याल आया कैसे और इस गंदे काम में तेरी मदद करके मुझे क्या मिलेगा..!
!
अमर- मेरे मन में ये कैसे आया, इस बात को गोली मार और रही तेरे फायदे की बात..! तो यार तू भी चूत का स्वाद चख लेना..!
यह सुनकर शरद की आँखों में चमक आ गई क्योंकि वो तो सुबह ही रचना पर फिदा हो गया था और उसे इस बात का अफ़सोस भी था कि अमर कैसा भाई है, जो अपनी बहन को चोदना चाहता है, पर दिल में ख़ुशी भी थी कि उसको एक कच्ची कली बिना मेहनत के चोदने के लिए मिल रही है।

यह सुनकर शरद की आँखों में चमक आ गई क्योंकि वो तो सुबह ही रचना पर फिदा हो गया था और उसे इस बात का अफ़सोस भी था कि अमर कैसा भाई है जो अपनी बहन को चोदना चाहता है, पर दिल में ख़ुशी भी थी, कि उसको एक कच्ची कली बिना मेहनत के मिल रही है।
अमर- क्या सोचने लगा यार? अभी से मेरी बहन के ख्यालों में खो गया क्या?
शरद- नहीं यार… वो बात नहीं है, पहले में रचना से मिलूँगा, उसके बाद ही कुछ बता पाऊँगा कि तुम्हारा प्लान कितने दिन में पूरा होगा और हाँ, वहाँ उसके सामने मैं जैसा भी बर्ताव करूँ, तू ज़्यादा बीच में मत बोलना, ओके..!
अमर- ओके.. यार बस तू उसको पटा लेना, एक बार वो ‘हाँ’ कर दे, तो मज़ा आ जाएगा।
शरद- अब चलें, बात बहुत हो गई है..!
अमर- हाँ चलो.. अभी ललिता भी नहीं होगी.. तो आराम से उससे बात हो जाएगी।
शरद- यह ललिता कहाँ है?
अमर- मेरी छोटी बहन ललिता अपनी सहेली के यहाँ गई हुई है, रात तक ही आएगी, तब तक रचना को पटाते हैं।
शरद ने हाँ में सर हिलाया।
शाम के 6 बजे दोनों अमर के घर पहुँच गए। अमर अपने कमरे में शरद को बैठा कर खुद रचना के रूम में गया।
उस समय रचना तैयार हो रही थी, शायद सोकर उठी होगी और नहा कर तैयार हो रही थी, उसके लंबे बाल भीगे हुए थे, वो उनको सुखा रही थी।
रचना- अरे भाई आप.. आओ न..! कहाँ चले गए थे आप.. मैं आपके रूम में गई, तो आप नहीं थे..!
अमर- मेरी स्वीट सिस्टर, तेरे लिए ही बाहर गया था। कोई अच्छा सा ड्रेस पहन कर मेरे रूम में जल्दी से आ जा। शरद आया है तुमसे मिलने ! मैंने उससे तेरे लिए बात कर ली है।
रचना- ओह.. वाउ.. भाई आप कितने अच्छे हो.. मैं बस अभी आई..!
अमर- कोई अच्छी सी ड्रेस पहनना.. वो तेरा इंटरव्यू लेंगा। पहले तो उसने मना कर दिया था, पर मैंने दोस्ती का वास्ता दिया, तब यहाँ आया है। अब बाकी तुम संभाल लेना..!
रचना- ओके भाई, अब आप जाओ वो अकेले बैठे होंगे। मैं बस 5 मिनट में तैयार होकर आई.. !
अमर वापस शरद के पास गया और उसे समझा दिया कि अब संभाल लेना.. वो आती होगी।
तकरीबन दस मिनट बाद रचना कमरे में दाखिल हुई तो दोनों उसको देख कर बस देखते ही रह गये..
रचना ने गुलाबी जालीदार टॉप पहना हुआ था, जिसमें से उसकी काली ब्रा भी साफ दिखाई दे रही थी और उसका गोरा बदन भी दिख रहा था।
नीचे एक काले रंग की शॉर्ट-स्कर्ट जो जरूरत से कुछ ज़्यादा ही छोटी थी। यूँ समझो कि बस चूत से कोई 2-3 इंच नीचे तक..
अगर कोई थोड़ा सा झुक कर देखे तो उसकी पैन्टी भी दिखाई दे जाए।
उसकी गोरी-गोरी जांघें क़यामत ढहाने को काफ़ी थीं।
शरद- ओह वाउ… यू लुकिंग गॉर्जियस..!
रचना- थैंक्स शरद जी..!
अमर भी बस उसकी खूबसूरती को देखता ही रह गया। दोनों के लौड़े पैन्ट में तन गए थे।
शरद- आओ रचना.. यहाँ बैठो..!
रचना उन दोनों के सामने कुर्सी पर बैठ जाती है, जैसे उसका इंटरव्यू होने वाला हो।
अमर- रचना मैंने बड़ी मुश्किल से शरद को यहाँ बुलाया है, ये कुछ पूछना चाहते हैं..!
शरद- अब बस भी करो, तुम ही बोलते रहोगे या मुझे भी बोलने दोगे?
अमर- सॉरी यार..!
शरद- देख यार बुरा मत मानना, वैसे तो हम दोस्त हैं, पर काम के मामले में किसी तरह का दखल पसंद नहीं करता हूँ। अब चुप रहो, मुझे रचना से बात करनी है।
रचना- आप क्या पूछना चाहते हो?
शरद- सबसे पहली बात तो यह कि इतनी कम उम्र में तुमको हीरोइन बनने का ख्याल कैसे आया?
रचना- मेरी उम्र कम कहाँ है, पूरी 18 की हो गई हूँ, आलिया भट्ट भी तो इसी ऐज की होगी..! वो कैसे बन गई?
शरद- ओहो आलिया की बराबरी कर रही हो जान.. उसका बाप डायरेक्टर है, समझी तुम..!
रचना चुपचाप उसकी तरफ देखने लगी।
“ओहो.. सॉरी मैंने ‘जान’ बोल दिया.. दरअसल यह मेरी आदत है कि काम के समय बात करते समय सामने वाले को ‘जान’ बोलता हूँ।”
रचना- कोई बात नहीं आपने जान ही तो बोला है न…! और रही बात मेरे हीरोइन बनने की, तो आपकी इतनी पहचान कब काम आएगी..! प्लीज़ शरद जी प्लीज़..!
अमर- हाँ यार, मेरी बहन के लिए तुमको इतना तो करना ही होगा..!
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04-07-2019, 11:18 AM,
#5
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद- यार अमर, प्लीज़ चुप रहो, हीरोइन बनना इतना आसान नहीं है एक्टिंग, डांस सब आना चाहिए और सबसे जरूरी बात फिल्म लाइन में बहुत कुछ करना होता है.. तुम मेरा मतलब समझ रहे हो न?
अमर कुछ बोलता, इससे पहले रचना बोल पड़ी- शरद जी डांस मुझे बहुत अच्छा आता है, रही बात एक्टिंग की, आप अभी आजमा लो और जो आप कह रहे हो न.. मैं सब समझ रही हूँ, आप एक मौका तो दो..! प्लीज़ प्लीज़..!
शरद- ओके कल मेरे साथ स्टूडियो चलो, वहाँ कुछ पिक लेंगे.. मैं किसी अच्छे डायरेक्टर से बात करूँगा। रही बात फाइनेंस की, वो मैं कर दूँगा, पर स्क्रीन टेस्ट के बाद ही मैं कुछ बता पाऊँगा..!
रचना- ओहो थैंक्स.. थैंक्स.. शरद जी, आप बहुत अच्छे हो, थैंक्स..!
इतना बोलकर रचना उठ कर शरद से चिपक जाती है, शरद अपने हाथ उसकी कमर पर रखना चाहता था, पर उसने ऐसा किया नहीं, बस उसके नरम मम्मे और गर्म जिस्म का अहसास लेता रहा। अमर पीछे से अंगूठा दिखा कर शरद को विश कर रहा था कि प्लान काम कर रहा है।
शरद- अरे अरे, यह क्या कर रही हो, ओके.. अब मैं जाता हूँ, लेट हो रहा हूँ।
अमर- ओके.. मैं तुमको बाहर तक छोड़ आता हूँ..!
रचना- आप खाना हमारे साथ खाइए न.. प्लीज़..!
शरद- अभी बिज़ी हूँ.. फिर कभी जरूर आऊँगा पक्का..!
शरद बाहर की तरफ़ चल देता है, अमर भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है।
दो कदम चलकर वो वापस मुड़ता है और रचना के पास आकर अमर को कहता है, “तुम दो मिनट बाहर जाओ, मुझे रचना से कुछ जरूरी बात करनी है।
अमर बिना कुछ बोले बाहर चला जाता है।
शरद- रचना तुम बहुत सुन्दर हो, एक हीरोइन का सुन्दर होना बहुत जरूरी है पर एक बात ध्यान से सुनो, आजकल की फिल्मों में बोल्ड सीन होते हैं, मुझे गलत मत समझना पर आज रात अच्छे से सोच लो फिर कल जवाब देना और अमर को इस बारे में मत बताना..!
रचना- शरद जी मैं जानती हूँ आप बेफ़िक्र रहो, मैं कैसा भी सीन कर सकती हूँ..!
शरद- अभी तुम जोश में बोल रही हो, कल तक सोच लो.. ओके..!
रचना- इसमें सोचना क्या..! मेरी आज भी ‘हाँ’ है और कल भी ‘हाँ’ ही रहेगी..!
शरद- ओके.. अब एक काम बताता हूँ कोई अच्छी फिल्म देखो और उसके कुछ डायलोग याद करो, कल टेस्ट देना है न.. कोई दमदार गुस्से वाले सीन याद करना, मैं देखना चाहता हूँ तुम गुस्से में कैसी दिखती हो। कल सुबह दस बजे तैयार रहना ओके.. बाय..!
रचना- ओके शरद जी, थैंक्स अगेन..!
शरद बाहर चला जाता है। घर के बाहर जाकर अमर खुश होकर शरद को बोलता है, “यार तुम कमाल हो.. इतनी आसानी से उसको मना लिया..!”
शरद- इतना खुश मत हो यार, अभी तो शुरूआत है इतनी जल्दी वो मानने वाली नहीं, तभी तो उसको फोटो शूट का कहा है। अब तुम सुबह तक ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे बनता काम बिगड़ जाए। मैं कल सुबह दस बजे आ रहा हूँ.. ओके…! बाकी बातें कल बताऊँगा।
शरद के जाने के बाद अमर अन्दर आया, रचना ने उसको भी ‘थैंक्स’ बोला और आगे की तैयारी के लिए अपने कमरे में चली गई। अमर ने भी उससे ज़्यादा बात नहीं की।
रात को ललिता भी आई।
अमर ने रचना को मना कर दिया था कि ललिता को अभी कुछ मत बताना, तो उसने ललिता को कुछ नहीं बताया, बस सुबह की शॉपिंग के बारे में बात की।
सब रात का खाना खाकर सो गए, पर रचना को तो डायलोग्स याद करने थे, तो वो मूवी देख रही थी।
रात को करीब एक बजे वो भी सो गई।
सुबह के 8 बजे रचना की आँख खुली, वो बाथरूम में चली गई, एक घंटा बाद वो एकदम तैयार होकर बाहर आई।
तब तक ललिता और अमर भी उठ गए थे। रचना ने सिंपल सा ड्रेस पहना था ब्लू-जींस और क्रीम टी-शर्ट।
वो नहीं चाहती थी कि ललिता को शक हो।
अमर अपने कमरे से बाहर आया तो रचना हॉल में सोफे पर बैठी थी।
अमर- गुड-मॉर्निंग बहना.. जल्दी उठ गईं और यह क्या पहना है, कल जो पहना था, वैसा ही कुछ पहनती तो ज़्यादा खूबसूरत लगती, शरद आता ही होगा..!
रचना- सस्स चुप रहो.. ललिता सुन लेगी..! मैंने बैग में अच्छे कपड़े डाल लिए हैं, फोटो शूट के दौरान वही पहन लूँगी !
वो दोनों बात कर रहे थे, तभी ललिता आ गई। वो दोनों चुप होकर नाश्ता करने लगे।
उस दौरान रचना ने अमर से कहा- मेरी सहेली का फ़ोन आया था, मैं वहाँ जा रही हूँ।
ललिता इस बात पर ज़्यादा गौर नहीं किया और बस नाश्ता करती रही।
करीब 9.45 को शरद का फ़ोन आया कि वो बस 5 मिनट में आ रहा है।
अमर ने उसे ‘ओके’ बोला और अमर और रचना घर के बाहर आ गए।
इतने में शरद की कार भी आ गई, शरद नीचे उतरा तो अमर उसे एक तरफ़ ले गया।
अमर- कहाँ जाना है हमें?
शरद- हमें नहीं, बस रचना मेरे साथ जाएगी स्टूडियो में, वहाँ उसके थोड़े फोटो निकाल कर वापस ले आऊँगा, बाद में तुमको फ़ोन करूँगा कि कुछ सेक्सी पिक चाहिए, तुम उसको बोलना और घर में ही उसके पिक लेने के बहाने जो चाहो करना, पर मुझे भूलना नहीं यार..!


शरद की बात सुनकर अमर के चेहरे पर ख़ुशी आ जाती है, अमर- अरे यार, कैसी बात कर रहा है मैं तुमको कैसे भूल जाऊँगा और
वाह यार मान गया तेरे दिमाग़ को, मज़ा आ गया, अब तुम लोग जाओ मुझे भी एक काम से जाना है, बाद में बात करते हैं।
शरद रचना को लेकर वहाँ से चला जाता है।
शरद- इस बैग में क्या है रचना?
रचना- फोटो निकालने के लिए अलग-अलग ड्रेस चाहिए न..! इसलिए मैंने अपने अच्छे-अच्छे ड्रेस ले लिए हैं..!
शरद- गुड, वेरी स्मार्ट-गर्ल, पर जान.. कपड़ों का बंदोबस्त मैंने कर लिया है, चलो देखते हैं तुम क्या लाई हो..! अगर कुछ अच्छे ड्रेस हुए तो वो भी पहन लेना..!
कार सड़क पर दौड़ती रही, दोनों के बीच ज़्यादा बात नहीं हुई, बस सामान्य बातें ही होती रही।
लगभग 15 मिनट बाद कार एक बड़े से विला के सामने रुकी।
रचना- यह कहाँ आ गए हम, आप तो स्टूडियो लेकर जा रहे थे न?
शरद- अरे यार, मैं कोई छोटा-मोटा आदमी तो हूँ नहीं, जो किसी भी स्टूडियो में तुमको ले जाऊँ, यह मेरा विला है और इसमें स्टूडियो है। हम यहीं फोटो निकालेंगे।
रचना- ओके शरद जी.. जैसी आपकी मर्ज़ी..!
अन्दर जाकर शरद ने रचना को एक बड़े से कमरे में बैठाया। रचना को अजीब सा लगा कि इतने बड़े घर में कोई नहीं दिखाई दे रहा है।
शरद- क्या सोच रही हो रचना?
रचना- कुछ नहीं.. आपका घर इतना बड़ा है और यहाँ कोई नहीं है.. क्या आप अकेले रहते हो?
शरद- अरे यार, पूरी फैमिली दुबई में है और यहाँ सब नौकर संभालते हैं। आज मैंने सब को छुट्टी दे दी है ताकि आराम से तुम्हारा टेस्ट ले सकूँ। यह लो पेप्सी पियो, चिल मारो यार..!
रचना- ओके, जैसा आप ठीक समझो।
शरद- रचना आओ, अब काम शुरू करते हैं। बाद में डायरेक्टर साब भी आते होंगे तुम्हारा स्क्रीन टेस्ट वो ही लेंगे। मैं बस तुम्हारी अच्छी सी पिक निकाल कर उनको दे दूँगा।
रचना यह बात सुनकर खुश हो जाती है।
शरद- अपनी ड्रेस दिखाओ, कौन-कौन सी है, मैं बताता हूँ वो पहनो..!
रचना बैग से कपड़े निकाल कर शरद के सामने रख देती है। उन सब को शरद गौर से देखता है, उनमें कुछ जींस टी-शर्ट और स्कर्ट थे।
शरद- नहीं यार इनमें तो वो बात नहीं कि कोई हीरोइन पहने !
रचना- सॉरी शरद जी, मुझे यही अच्छे लगे तो मैं ले आई। अब आप बताओ मैं क्या पहनूँ?
शरद ने उसे एक लिबास देकर कहा- वो सामने बाथरूम है, पहन कर आओ, मैं कैमरा सैट करता हूँ।
रचना ने उस ड्रेस को पहन लिया।
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04-07-2019, 11:18 AM,
#6
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
दोस्तो, वो एक ब्लू हाफ-पैन्ट या यूं कहो कि चड्डी थी, क्योंकि जाँघ पूरी दिख रही थीं, बस चूत और चूतड़ों को ढका हुआ था और ऊपर के लिए एक हरी जैकेट जो इतना छोटी थी कि बस मम्मे ही छुप सकें, वो भी आधे..! बाकी ऊपर की गहराई साफ दिख रही थी।
रचना वैसे तो खुले दिमाग़ की लड़की थी और ऐसे कपड़े पहनने में उसको कोई परेशानी नहीं हुई, पर शरद के सामने वो भी ऐसी जगह जहाँ उन दोनों के अलावा कोई नहीं था, उसको थोड़ा अजीब लग रहा था।
पर वो अपने दिमाग़ से सारी बातें झटक कर बाहर आ गई।
शरद- ओहो वाउ.. क्या मस्त लग रही हो.. गुड..!
उस ड्रेस में रचना बहुत सेक्सी लग रही थी। शरद का लौड़ा तन गया था, पर वो जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था।
उसने रचना के 5-6 पिक लिए और पोज़ बताने के बहाने से कभी उसके लिप्स को टच करता तो कभी मम्मे को, उसके पीछे आकर उसके कूल्हों पर लौड़ा छुआ देता और हाथ उसके मम्मे पर रखता कि ऐसा पोज़ बनाओ, हाथ थोड़ा ऊपर करो, हाँ.. ऐसे ही..! इस तरह बस वो रचना को छू कर मज़ा ले रहा था।
रचना को थोड़ा अजीब तो लग रहा था, पर वो सब बातों को अनदेखा कर रही थी।
शरद- गुड शॉट.. जान, अब दूसरा ड्रेस पहनो.. ये लो..!
रचना उस ड्रेस को देखती है, वो एक जालीदार बॉडी फिट मैक्सी थी। जिसमें जाली इस टाइप की थी कि बड़े-बड़े होल हों और बहुत पतली मैक्सी थी। उसमें से बदन साफ दिखाई दे।
रचना- शरद जी ये कुछ ज़्यादा ही पतली और खुली नहीं है क्या..!
शरद- ओहो जान.. मैंने पहले ही कहा था, आजकल की फिल्मों में जितना बॉडी को दिखाओगी उतना ही लोग एंजाय करेंगे और उस हीरोइन की उतनी ही अधिक डिमांड होगी। अब तुम अभी से ऐसा कर रही हो, तो आगे क्या पता किसी फिल्म में बिकनी का पोज़ देना पड़े, तब क्या करोगी..! तुमसे नहीं होगा, जाने दो।
रचना- सॉरी.. सॉरी.. शरद जी, मैं बस पूछ रही थी, अब आप जैसा कहो मैं करूँगी।
शरद- यहाँ आओ.. मेरे पास बैठो और गौर से मेरी बात सुनो..!
रचना- वहाँ आ जाती है और बेड पर बैठ जाती है।
शरद- देखो रचना, इसीलिए मैं अमर को साथ नहीं लाया, क्योंकि शायद उसके सामने तुम ऐसे कपड़े नहीं पहनती और ये कुछ भी नहीं हैं, कभी-कभी बाथरूम में नहाने का सीन आएगा, तो तुम्हें ब्रा-पैन्टी के भी पोज़ देने होंगे। अभी में तुम्हारी एक मस्त सी एल्बम बना कर डायरेक्टर को दूँगा ताकि वो मना ना कर पाए। इसलिए अभी बोल दो क्योंकि इस लाइन में बहुत कुछ सहना पड़ता है। तुम बात को समझ रही हो न..!
रचना- हाँ शरद जी, मैं समझ रही हूँ। आप निश्चिन्त हो जाओ, अब मैं कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी।
उसके बाद शरद ने अलग-अलग पोशाकों में रचना के फ़ोटो खींचे, यहाँ तक कि ब्रा-पैन्टी के पोज़ भी ले लिए और इस दौरान कई बार रचना के मम्मे और चूतड़ छूए।
!
अब रचना को भी मज़ा आने लगा था।
शरद- यू लुकिंग वेरी नाइस बेबी.. अब ये वाइट सिल्क की साड़ी पहन कर आओ और हाँ अन्दर ब्रा-पैन्टी मत पहनना।
रचना- लेकिन शरद, ये तो बहुत पतला कपड़ा है और यह साड़ी कहाँ है? यह बहुत छोटा सा कपड़ा है, पूरे बदन पर ठीक से आएगा भी नहीं..!
शरद- अरे यार, तुम्हें कोई माँ का रोल करना है क्या जो 6 मीटर की साड़ी चाहिए? एक सेक्सी हीरोइन का रोल करना है.. अब जाओ पहन कर आओ..!
रचना- चुपचाप अन्दर जाकर ब्रा-पैन्टी निकाल देती है और वो सिल्क की साड़ी या यूं कहूँ कि वो कपड़ा अपने बदन पर लपेट कर आ जाती है।
शरद तो बस रचना को देखता ही रह जाता है। उस कपड़े में से रचना का पूरा बदन साफ-साफ दिख रहा था। उसके मम्मे के निप्पल भी दिख रहे थे।
शरद एक-दो तस्वीरें खींचता है, फिर एक स्प्रे-पम्प लाता है, जिसमें पानी था और अब वो रचना के मम्मे और चूत पर पानी मारता है।
रचना- आप यह क्या कर रहे हो?
शरद- जान, तुम्हारे जिस्म को थोड़ा गीला कर रहा हूँ ताकि ऐसा लगे कि कोई हसीना अभी-अभी नदी में नहा कर आई हो और तुम्हारे जिस्म की खूबसूरती भी नजर आएगी।
रचना- ओके शरद जी.. जैसा आप को ठीक लगे कर लीजिए।
शरद ने रचना पर पानी का स्प्रे मार कर एकदम गीला कर दिया तो अब उसके भीगे हुए मम्मे साफ दिख रहे थे और उसकी चूत भी नज़र आ रही थी। उस हालत में एक-दो फ़ोटो लेकर शरद ने उसको स्टाइल बताने के बहाने से पीछे से पकड़ लिया और उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा।
!
रचना- ओके शरद जी.. बहुत पिक ले लीं, अब तक आपका डायरेक्टर नहीं आया?
शरद- आता ही होगा, अब पिक तो ले लीं, अब थोड़ी एक्टिंग भी देख लेता हूँ।
रचना- ओके.. आपने कहा था, मैं वैसे डायलोग याद करके आई हूँ।
शरद- वो बाद में.. पहले एक्टिंग करो, मान लो तुम्हारा बॉय-फ्रेंड रूठा हुआ है तुम उसको मना रही हो।
रचना- ओके पहले मैं कपड़े तो बदल आऊँ।
शरद- अरे नहीं इन कपड़ों में रोमान्टिक फीलिंग्स आएगी। अब इस कुर्सी को अपना बॉय-फ्रेंड समझो और इसे मनाओ।
रचना- हा हा हा.. कुर्सी को बॉय-फ्रेंड..! आप मजाक अच्छा कर लेते हो..! मैं इस कुर्सी को मनाऊँ..!
शरद- ओके.. सॉरी ऐसा करो, मुझे अपना बॉय-फ्रेंड समझो और मनाओ ओके…!
रचना- हाँ, यह ठीक रहेगा।
शरद बेड पर बैठ गया और रचना फिल्मी डायलोग मार कर उसे मनाने की कोशिश करने लगी, पर शरद उसे बार-बार टोक कर कहने लगा- ऐसे नहीं, और करीब आओ !
और 15 मिनट की मेहनत के बाद उसने रचना को मजबूर कर दिया कि वो उसको अपने असली बॉय-फ्रेंड के जैसे मनाए।
अब रचना भी समझ गई कि शरद कौन सी फीलिंग की बात कर रहा है, उसने आगे बढ़ कर शरद के गाल पर एक चुम्बन कर दिया। शरद कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने भी रचना को बांहों में भर कर एक ज़बरदस्त चुम्मा ले लिया।
दोनों के होंठ मिले हुए थे और शरद रचना के होंठों को चूस रहा था, उसकी पीठ पर हाथ घुमा रहा था।
रचना गर्म होने लगी थी। 5 मिनट चुम्बन चलता रहा, किसी लड़के के साथ रचना का यह पहला चुम्बन था।
इस ज़बरदस्त चुम्बन से उसकी चूत गीली हो गई थी।
वो शरद से अलग हो गई।
शरद- दैट्स गुड.. ये है रियल एक्टिंग.. अब बनी न बात…!
रचना को समझ नहीं आया कि यह क्या था..!
शरद उसको सिखा रहा था या असल में उसको चूम रहा था।
रचना- ये एक्टिंग थी..! मगर आपने तो मुझे रियल में चूमा है।
शरद- ओहो जान.. तुम कितनी भोली हो, ये एक्टिंग ही थी। यार अब फिल्म हीरोइन बनोगी तो ये सब चलता ही रहेगा.. हीरो के साथ भी ये सब करना पड़ेगा और कई बार तो एक ही सीन को कई बार करना होता है और भी बहुत से पोज़ देने होंगे।
रचना- फिल्म में सब रियल में होता है क्या..! मैं तो समझती थी बस ऐसे ही होता होगा…!
शरद- अरे यार सब रियल होता है, अब भी बोल्ड सीन करना है या नहीं…!
रचना- अब यहाँ तक आकर मैं पीछे नहीं हटूँगी, अब जो होगा देखा जाएगा…!

शरद- अरे यार, सब रियल होता है.. अब भी बोल दो कि करना है या नहीं..!
रचना- अब यहाँ तक आकर मैं पीछे नहीं हटूँगी, अब जो होगा देखा जाएगा।
शरद- तुम अमर की बहन हो इसलिए मैं इतनी मेहनत कर रहा हूँ, वरना मेरे पास समय नहीं होता है। अब एक सीन और समझाता हूँ यह बहुत जरूरी है क्योंकि अभी मेरे साथ कर लोगी तो आगे तकलीफ़ नहीं होगी। डायरेक्टर चैक करेगा, बाद में हीरो के साथ भी करना है तो अभी से आदत डाल लो ओके..!
रचना- ओके, मैं रेडी हूँ क्या करना है…!
शरद- एक और रोमॅंटिक सीन करेंगे और जो मैं करूँगा, तुम बस मेरा साथ देना…!
रचना- फिर से वही सीन..! कोई नॉर्मल करते है ना…!
शरद- अरे यार नॉर्मल तो कोई भी कर लेगा.. यह जरूरी है ताकि तुम्हें पता लग जाए कि आगे क्या करना है और अबकी बार हमारा यह सीन रिकॉर्ड होगा, वो देखो वीडियो कैमरा, मैंने सैट किया हुआ है ताकि डायरेक्टर को सीधा ये टेप ही दे देंगे।
रचना ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और शरद ने वीडियो ऑन करके उसके पास आकर उसे बांहों में भर लिया।
शरद- आओ जान.. इस दुनिया से दूर हम एक अलग दुनिया बसाएँगे।
रचना- हाँ मेरे सपनों के राजा, ले चलो मुझे कहीं दूर यहाँ से..!
शरद- आओ आज हम अपने प्यार में ऐसे खो जाते हैं कि कोई हमें जुदा न कर सके। आज इन दो जिस्मों को एक कर लेंगे हम।
इतना बोलकर शरद ने रचना को गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया।
अब शरद रचना को चूमने लगा, अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
रचना पहले ही बहुत गर्म हो रही थी, अब वो लंबी-लंबी साँसें लेने लगी और शरद उसके जिस्म से खेलने लगा, कभी उसकी गर्दन पर चुम्बन करता तो कभी होंठों पर…!
अब शरद के हाथ रचना के मम्मों पर आ गए थे। वैसे तो कपड़े के नाम पर बस वो पतला सा कपड़ा था, जो हो या ना हो कोई फर्क नहीं पड़ता था।
रचना- सी..सी आ.. आप.. आह.. ये क्या कर रहे हो आ…ह !
शरद- जान यह रोमान्स का सीन है, ऐसे बहुत मौके आएँगे लाइफ में.., इसलिए आज अच्छी तरह सीख लो…!
रचना- आ..ह लेकिन ये ठीक नहीं है आप तो मेरे आ…ह..!
रचना की बात पूरी होती, इससे पहले शरद बोल पड़ा।
शरद- यार मैंने पहले ही सब समझा दिया था अब बार-बार नहीं समझाऊँगा मैं..! अब करो या उठ जाओ…!
रचना- स..स.. सॉरी शरद जी.. अब नहीं बोलूँगी, आप करते रहो.. मैं पागल हूँ, जो बार-बार भूल जाती हूँ कि आप मुझे सिखा रहे हो।
शरद- ओके, अब बस फील करो कि तुम अपने बॉय-फ्रेंड के साथ मस्ती कर रही हो और यार तुम भी थोड़ा कुछ करो..! रियल लगना चाहिए.. तभी तो हीरोइन बनोगी…!
अब रचना भी शरद को चुम्बन करने लगी थी और शरद कपड़े के ऊपर से ही रचना के निप्पल चूसने लगा था। रचना बहुत गर्म हो गई थी। उसकी चूत में खुजली होने लगी थी, वो बार-बार अपने हाथ से चूत को सहला रही थी।
शरद- ऐसे ही जान.. ऐसे ही… गुड उम्म.. उम्म आ उम्म…!
रचना- सी.. आ उम्म.. उम्म्म आ…!
शरद दोनों निप्पलों को चूसता-चूसता अब रचना के पेट पर चुम्बन करने ल्गा और अपना हाथ अब रचना की चूत पर ले जाकर उसकी चूत को दबाने लगा।
रचना- आ सी सी आह यहाँ आ.. यहीं करो अफ आ..!
शरद- जान, यह कपड़ा बीच में आ रहा है तुम कहो तो हटा दूँ…!
रचना पर सेक्स का खुमार चढ़ चुका था। उसके सोचने की ताक़त ख़त्म हो चुकी थी।
रचना- आह निकाल दो.. आह..मेरे बदन में कुछ हो रहा है आ…ह..!
शरद- कहाँ जान.. मुझे बताओ मैं सब ठीक कर दूँगा…!
रचना चूत पर हाथ लगा कर बोलती है, “यहाँ..!”
शरद- अभी लो जान मैं सब ठीक कर दूँगा।
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04-07-2019, 11:18 AM,
#7
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
इतना बोलकर शरद वो कपड़ा पूरा हटा देता ही रचना एकदम नंगी शरद की नज़रों के सामने थी। उसके 32″ के गोल-गोल मम्मों और एकदम डबल-रोटी जैसी फूली हुई चूत और वो गोरा बदन जिसे छूते ही बदन में करंट दौड़ जाए। शरद का लौड़ा पैन्ट को फाड़कर बाहर आने को बेताब था।
रचना- सी सी आह.. शरद आह… कुछ करो न… मेरा जिस्म गर्म हो रहा है…!
शरद पागलों की तरह रचना पर टूट पड़ा उसके निप्पलों को चूसने लगा और मम्मों को दबाने लगा।
रचना-. आ आह.. प्लीज़ आराम से दबाओ ना.. आह.. दुखता है आह.. उफ सीसी आ आप नीचे कुछ करो न.. आ.ह..!
शरद- जान ऐसे कहो.. मेरी चूत में कुछ करो अब खुल कर बोलो यार…! तुम हीरोइन बनने वाली हो…!
रचना- आह.. प्लीज़ आह.. मेरी चूत को शान्त कर दो आ.ह…!
शरद ने पास में रखी आयल की बोतल से उंगली पर तेल लगाया और रचना की चूत की फाँक खोल कर अपनी उंगली अन्दर घुसाने लगा।
चूत बहुत टाइट थी, उंगली जा नहीं रही थी, पर वो थोड़ी सी उंगली घुसा कर हिलाने लगा।
रचना- आह… सस्स… उफ़फ्फ़… ओह… आ शरद… आ बहुत आग लग रही है आह …चूत में… आ ज़ोर से करो ना आ थोड़ा और अन्दर करो ना आ.हह..!
शरद जानता था कि अगर उंगली ज़्यादा अन्दर की, तो इसकी सील आ जाएगी.. और इसका पानी निकल जाएगा और ये शांत हो जाएगी, इसके बाद इसे चोदना मुश्किल हो जाएगा।
रचना- उफ करो ना.. शरद प्लीज़ आ..ह..!.
शरद- मेरी जान उंगली से कुछ नहीं होगा.. अब तो तुम्हारी चूत की प्यास लौड़े से ही मिट सकती है.. कहो तो निकालूँ.. लौड़ा बाहर…!
रचना- आ..ह अब जो निकालना है आ उफ निकाल लो.. मेरे जिस्म में आग लग रही है प्लीज़ आह.. जल्दी कुछ करो…!
शरद तो इसी इन्तजार में था।, एक मिनट में ही पूरे कपड़े निकाल दिए।
रचना की नज़र शरद के लौड़े पर गई तो उसकी सांस अटक गई उसे देख कर क्योंकि शरद का लौड़ा 9″ लंबा और 3″ मोटा था, किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था।
रचना- ओह माई गॉड.. आह.. शरद ये क्या है इतना बड़ा और मोटा ओफ…!
शरद- हाँ जान यही तुम्हारी चूत की प्यास बुझाएगा अब…!
रचना- नहीं.. नहीं.. शरद मैं मर जाऊँगी प्लीज़ ऐसे ही उंगली से कुछ कर दो..! आ मेरी चूत में आ…ह..!
शरद- अरे जान कुछ नहीं होगा.. बस मैं थोड़ा सा डालूँगा तुम्हारी चूत को शान्त करने के लिए…!
रचना- ओके.. पर आराम से.. आ ह.. मेरा फर्स्ट टाइम है…!
शरद- डर मत जान.. आज तेरी सील तोड़ कर तुझे स्वर्ग की सैर करा दूँगा मैं.. पहले इसे चुम्बन तो कर ले…!
शरद रचना के मुँह के पास लौड़ा ले जाता है। रचना बहुत गर्म थी और फिर उसने सेक्सी वीडियो में भी देखा था कि कैसे लौड़े को चूसते हैं। बस उसने भी लौड़े पर जीभ फेरना शुरू कर दिया, लंड के सुपारे को मुँह में लेकर चूसने लगी। उसने पूरा मुँह खोला, तब कहीं जाकर लौड़ा अन्दर गया। बहुत मोटा था ना..!
दो मिनट अच्छे से चूसने के बाद रचना ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और शरद को कहा- अब बर्दाश्त नहीं होता.. डाल दो इसे चूत में…!
शरद पास पड़े तेल को लौड़े पर अच्छे से लगाया और रचना की चूत में भी अन्दर तक तेल डाल दिया।
शरद- जान अब मैं लौड़ा चूत में डालने जा रहा हूँ थोड़ा दर्द होगा, बर्दाश्त कर लेना.. बाद में मज़े ही मज़े हैं।
रचना- उफ आह… डाल दो आह.. जो होगा देखा जाएगा ऊ.. आ…ह..!
शरद लौड़े को चूत पर टिका कर एक हाथ से चूत की फाँकें खोली और दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़ कर उसकी टोपी चूत में फँसा दी। रचना को थोड़ा दर्द हुआ, उसने थोड़ा हिलना चाहा पर शरद ने उसको मौका नहीं दिया और जल्दी से एक झटका मार दिया !
लौड़ा चूत की दीवारों को चीरता हुआ रचना की सील को तोड़ता हुआ 4″ अन्दर घुस गया।
रचना की चूत की माँ चुद गई ..!
रचना- आआआआआ… आआआआअ आआआ एयाया…
रचना की चीख इतनी तेज थी कि पूरे घर को हिला कर रख दिया।
शरद ने जल्दी से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उनको चूसने लगा।
रचना की आँखों में आँसू आ गए थे, वो दर्द से चीखना चाहती थी, पर मजबूर थी।
वो शरद को हटाना चाहती थी, पर शरद ने कस कर उसके हाथ पकड़ रखे थे।
लगभग 5 मिनट तक शरद ने लौड़े को कोई हरकत नहीं दी, बस उसी अवस्था में रचना के होंठ चूसता रहा।
जब उसे लगा कि रचना का विरोध बन्द है तब उसने अपने होंठ हटा दिए।
रचना- उउउ उउउ.. प्लीज़ आह शरद आ बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ निकल लो उउउ उउउ आह आह…!
शरद- अरे जान प्लीज़ तुम रो मत.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. बस तुम चुप हो जाओ…!
रचना- आ..ह.. मेरी चूत में आ.अ बहुत दर्द है… प्लीज़ आप निकाल लो ना आ..अ..प्लीज़ शरद जी प्लीज़…!
शरद- अरे जान, अभी तो तुमने कहा था कि अब पीछे नहीं हटूँगी और तुम्हारी चूत की खुजली भी ऐसे ही मिटेगी.. तुम बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो जान…!
रचना- आ आ अ..ओके.., पर आपका बहुत बड़ा है.. आअ. अपने एक साथ क्यों डाल दिया आ आह…!
शरद अगर रचना को बोलता कि अभी उसका आधा लौड़ा भी नहीं गया तो वो फिर से चिल्लाने लगती, इसलिए उसने झूट कहा।
शरद- जान, सॉरी लेकिन पूरा नहीं गया है बस थोड़ा सा और है पर तुम फिकर मत करो मैं बस इतने से ही तुमको आराम-आराम से चोदूँगा…!
रचना- आअ.. ओके अफ उ आ…!
अब शरद अपने लौड़े को धीरे-धीरे हिलाने लगा।
रचना का दर्द से बुरा हाल था, और वो आहें भर रही थी, मगर शरद को कुछ नहीं बोल रही थी। उसकी चूत में जो खुजली हो रही थी, वो मिट चुकी थी, क्योंकि दर्द ज़्यादा था और मज़ा कम..
मगर अब वापस उसकी चूत फड़फड़ाने लगी थी, वो ओर्गज्म के करीब थी…!
रचना- आ आह आईईइ आईईइ.. शरद आ मेरी चूत में दर्द के साथ-साथ आ अफ कककक आ गुदगुदी आ हो रही है..!
शरद- आअ.. जान तुम झड़ने वाली हो.. आ आ रोको मत… निकल जाने दो अपना पानी…!
रचना- आ..अ.. शरद आ..अ.. थोड़ा स्पीड में हिलो.. आ..अ..आ अई आआ..!
शरद समझ गया कि रचना झड़ रही है उसकी चूत का पानी शरद अपने लौड़े पर महसूस करता है और पानी छूटने से चूत पूरी गीली हो गई थी और रचना ने चूत को ढीला छोड़ दिया था।
इस मौके का फायदा उठा कर शरद ने अपने होंठ रचना के होंठों पर रखे और अपने लौड़े को टोपी तक बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा, पूरा 9″ का लौड़ा चूत को फाड़ता हुआ चूत में समा गया।
!
इस शॉक से बेख़बर रचना तो अपने ओर्गज्म में खोई हुई थी, पर जैसे ही लौड़ा दनदनाता हुआ अन्दर गया, रचना की आँखें चढ़ गईं, उसे दुनिया घूमती हुई दिखने लगी।
उसके होंठ बन्द थे, पर वो इतनी ज़ोर से चिल्ल्लाई, अगर उसका मुँह बन्द ना होता, तो शायद बाहर तक उसकी आवाज़ जाती। उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया और वो धीरे-धीरे बेहोशी के आलम में जाने लगी।
जब शरद को लगा रचना बेहोश हो गई है वो स्पीड से उसको चोदने लगा ताकि बेहोशी में उसको दर्द का अहसास ना हो और उसकी चूत भी ‘फ्री’ हो जाए।
शरद का चोदने का अंदाज निराला था। वो पूरा लौड़ा बाहर निकालता और एक झटके में पूरा अन्दर डाल देता और स्पीड इतनी थी कि 5 सेकंड में लौड़ा दो बार अन्दर-बाहर हो रहा था।
शरद का स्टेमिना बहुत स्ट्रोंग था। लगभग 5 मिनट तक वो लगातार ऐसे ही झटके मारता रहा।
उसने रचना की चूत को रेलगाड़ी बना दिया था। उसका लौड़ा चूत की जड़ तक चोट मार रहा था। अब रचना होश में आने लगी थी। पूरे दस मिनट बाद उसको होश आया था। शरद वैसे ही लगा हुआ था।
रचना- अई..आह आह ऊउउ उउउ उ मर गई आआ आह आ आ…!
शरद- ऊऊआ क्यों जान आ आ..ह.. जाग गई नींद से आ आ…ह..!
रचना- आ..अ..आ आ.. आप बहुत ग…गंदे हो आ कितना द..द..दर्द कर दिया उउउ उउउ आ प्लीज़ निकाल लो आ मैं दर्द से आह मर जा.उंगी आ.ह..!
शरद- कुछ नहीं होगा जान.. आ उहह.. अब पूरा लौड़ा चूत में समा गया है..! ये लो आ बस थोड़ी देर की बात है.. आ..ह.. मेरा गरमा-गरम पानी तेरी चूत के दर्द को मिटा देगा उहह उहह…!
रचना- अईए इ उफ़फ्फ़ ससस्स कककक आह आ प्लीज़ आह ओ ओो बहुत आह दर्द आ हो रहा है..!
करीब 5 मिनट तक रचना ऐसे ही चीखती रही, अब वो दोबारा अपने चरम पर आ गई थी अब उसको थोड़ा मज़ा आने लगा था।
रचना-. अई.. आह ज़ोर से करो आ या या फक मी.. आ फक हार्ड ओफफ्फ़.. फू..ओ आ फास्ट आ फास्ट स्वीट-हार्ट.. आह आ.ह..!
शरद- ये हुई ना बात आ.. उहह ये लो आ एयाया आआ आआ अई…!
शरद का लौड़ा अब इतनी गर्म और कच्ची चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सका और पिचकारी मारने लगा।
रचना की चूत की दीवारों पर जब पहली बार पुरुष के वीर्य ने छुआ तो उसका बाँध भी टूट गया, उसको इतना मज़ा आया, शरद के पानी की पिचकारी के अहसास से वो चूत को भींच और खोल कर झड़ रही थी और शरद भी लगातर पानी छोड़ रहा था, जैसे आज पूरी चूत को पानी से भर देगा और रचना भी ऐसे झड़ रही थी जैसे जिंदगी में दोबारा कभी मौका नहीं मिलेगा।
तकरीबन 2-3 मिनट तक दोनों के पानी का संगम होता रहा और उसके बाद दोनों शान्त पड़ गए। शरद उसी अवस्था में रचना पर पड़ा रहा।

शरद का लौड़ा अब इतनी गर्म और कच्ची चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सका और पिचकारी मारने लगा।
रचना की चूत की दीवारों पर जब पहली बार पुरुष के वीर्य ने छुआ तो उसका भी बाँध टूट गया। उसको इतना मज़ा आया, शरद के पानी की पिचकारी के अहसास से वो चूत को भींच और खोल कर झड़ रही थी और शरद भी लगातार पानी छोड़ रहा था जैसे आज पूरी चूत को पानी से भर देगा और रचना भी ऐसे झड़ रही थी जैसे जिंदगी में’ दोबारा कभी मौका नहीं मिलेगा।
2-3 मिनट तक दोनों के पानी का संगम होता रहा और उसके बाद दोनों शान्त पड़ गए। शरद उसी अवस्था में रचना के ऊपर पड़ा रहा। करीब 5 मिनट बाद रचना को दबाव महसूस हुआ तो उसने शरद को उठने को कहा।
शरद जब उठा तो ‘पक्क’ की आवाज़ के साथ उसका लौड़ा चूत से बाहर आया और एक दर्द की लहर रचना के जिस्म में दौड़ गई।
रचना- आईईईई उफफफफ्फ़…!
शरद के लौड़े में अभी भी जान थी, वो खून और पानी से सना हुआ था। पूरा बेड भी खून से लाल हो गया था। जब रचना की नज़र बेड पर गई उसके होश उड़ गए और वो रोने लगी।
शरद उसी हालत में उठा और उसने वीडियो कैमरा बन्द किया, फिर रचना के पास आकर उसको चुप करने लगा।
शरद- अरे जान, इसमें रोने की क्या बात है? पहली बार मैं तो खून आता ही है। तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम टेस्ट में पास हो गई हो अब मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें हीरोइन बनवा दूँगा… प्लीज़ चुप हो जाओ…!
रचना चुप हो गई और एक हल्की सी मुस्कान देते हुए बोली- आह शरद जी… बहुत दर्द हो रहा है। मैं उठ भी नहीं पा रही हूँ.. और ये सब खून छी.. कितना गंदा फील हो रहा है।
शरद- ओह मेरी जान को ये सब पसन्द नहीं है, अभी लो जान मैं तुम्हें गोद में उठा कर ले जाता हूँ…..!
शरद रचना को गोद में उठा कर बाथरूम ले गया और शावर ऑन कर दिया, हल्का गर्म पानी आने लगा, बाथरूम बहुत बड़ा और आलीशान था।
वहाँ पर बहुत किस्म का सौन्दर्य प्रसाधन का सामान था। शरद रचना को एक आराम कुर्सी जो प्लास्टिक की थी, उस पर लिटा दिया और गर्म पानी से उसकी चूत को मसल साफ करने लगता है।
रचना- अई उफ़ आराम से करो दुःखता है…!
शरद- ओह सॉरी जान अब मैं आराम से करूँगा।
शरद 15 मिनट तक रचना की चूत और मम्मों को हल्के हल्के सहला कर अच्छे से धोता है और रचना भी लंड को साफ कर देती है। अब उसको भी मज़ा आने लगा था। वो लंड को आगे-पीछे कर रही थी। लंड पूरा कड़क था और झटके खा रहा था।
शरद- क्यों जान क्या इरादा है? लौड़े को बहुत प्यार से सहला रही हो…!
रचना- नहीं कुछ नहीं… बस सोच रही हूँ कि यह इतना मोटा और लंबा लौड़ा मेरे अन्दर कैसे गया !
!
शरद- यह गया, तब ही तो तुम बेहोश हो गई थीं, बस मौका देख कर मैंने खूब चुदाई की, तब जाकर कहीं ये मूसल तुम्हारी चूत में सैट हो पाया समझी..!
रचना- आप बहुत बदमाश हो, मेरे बेहोश होने के बाद भी करते रहे, मुझ पर रहम नहीं आया आपको? अगर मैं मर जाती तो?
शरद- जान अगर चुदाई से कोई मरता, तो इस देश में कोई शादी नहीं होती, कोई लड़की चुदती नहीं पूरी दुनिया का नाश हो जाता और रही बात रहम की, तो यह दर्द तो हर लड़की को सहना पड़ता है, तभी तो उसकी सील टूटती है और बाद में वो आराम से चुदाई का मज़ा ले पाती है समझी…!
रचना- हाँ समझ गई, पहले बस वीडियो में देखा था, आज रियल में लौड़ा देख लिया..!
इतना बोल कर रचना को अहसास हुआ कि उसने यह क्या बोल दिया, वो मुँह घुमा कर मुस्कुराने लगी।
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04-07-2019, 11:18 AM,
#8
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद- अच्छा तो मेरी जान… सेक्सी वीडियो भी देखती हैं.. गुड अब यह भी बता दो कभी सेक्स किया है किसी के साथ या नहीं?
रचना- कैसी बातें करते हो शरद, आप भी हटो न… मुझे शर्म आ रही है…..!
शरद- ओये होए.. रचना बेबी को शर्म आ रही है चिकनी, मेरे सामने नंगी बैठी हो, मेरा लौड़ा सहला रही हो, अब इससे ज़्यादा क्या कह दिया मैंने जो शर्म आ गई?
रचना- आप पागल हो एकदम… आज मेरा पहली बार है और ये आपको भी पता है, फिर भी पूछ रहे हो कि मैंने पहले सेक्स किया या नहीं..!
शरद- मेरी जान… तुम्हारे निप्पल और चूत को देख कर लगता है सेक्स नहीं किया है, पर कोई इनके मज़े ले चुका है मेरे पहले ये अनछुए नहीं हैं समझी..! सील तो मैंने तोड़ी है, पर किसी के साथ मस्ती तो पहले कर चुकी हो तुम ! है ना?
रचना- ओ माई गॉड ! कितने स्मार्ट हो आप ! हाँ मस्ती की है, पर कोई बॉय नहीं गर्ल के साथ ओके…!
शरद- ओह वाउ लेसबो गुड यार, किसके साथ अब ये भी बता दो…!
रचना- प्लीज़ अभी नहीं, फिर कभी बताऊँगी अब नहाना हो गया, चलें बाहर यहाँ से…!
शरद- हाँ जान चलो…!
रचना जब खड़ी हुई तो उसको बहुत दर्द होने लगा चूत में, उसने एक लंबी सी ‘आह’ भरी।
शरद- अरे अरे.. रूको ऐसे एक झटके से उठोगी तो दर्द होगा ना.. चलो मैं ही लिए चलता हूँ रूम में..!
शरद उसे गोद में उठा कर बाहर ले आया और बेड के पास एक कुर्सी पर बिठा दिया, फ़िर उसे बदन पौंछने के लिए तौलिया दिया और खुद चादर उठा कर एक कोने में डाल कर दूसरी चादर बिस्तर पर बिछा दी।
रचना कुर्सी पर आराम से बैठी सब देख रही थी। जब सब काम हो गया तो शरद ने रचना को उठा कर बेड पर लिटा दिया।
रचना- उफ़ शरद जी… बहुत दर्द हो रहा है.. मैं घर कैसे जाऊँगी.. आपका वो डायरेक्टर नहीं आया अभी तक?
शरद- अरे बेबी आ जाएगा.. चिंता मत करो और अब कैसा डायरेक्टर…..! अब तो तुम पास हो गई हो, बस जब वो आए उसको अच्छे से मिलना.. तुम समझ रही हो ना..! बाकी मैं संभाल लूँगा।
रचना- ओके.. अब मैं रेडी हो जाऊँ..!
शरद- सॉरी बेबी… मैंने झूट कहा कि वो अभी आने वाला है, वो लंच पर आएगा, अभी तो बहुत टाइम बाकी है, थोड़ी मस्ती करते हैं न..!
रचना- क्या.. प्लीज़ शरद जी… वो आएगा न? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप मेरा फायदा उठा रहे हो..!
शरद- वॉट..! तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है न..! मैं तुमको ऐसा लगता हूँ यार… तुमको हीरोइन बनाने के लिए मैंने कितनी मेहनत की है
और रही बात सेक्स की तो तुम जानती हो, इसमें मेरी ग़लती नहीं है, हम दोनों ही गर्म हो गए थे। वैसे भी फिल्म लाइन में जब तुम आ ही रही हो तो कभी ना कभी कोई डायरेक्टर या हीरो के साथ तो चुदोगी ही, यहाँ सब चलता है, अगर मैंने तुम्हारी चूत की ओपनिंग कर दी, तो क्या गलत हो गया…!
रचना- ओके शरद जी.. आप कह रहे हो तो मैं मान लेती हूँ.. बस मेरा सपना पूरा कर दो प्लीज़.. चाहो जितनी बार मुझे चोद लो, प्लीज़…!
शरद- बेबी मैं वादा करता हूँ.. तुमसे आज दोपहर को तुम्हें पता चल जाएगा कि मैं झूट नहीं बोल रहा हूँ…! अब प्लीज़ जब तक वो ना आए एक बार और मस्ती करते है न…! देखो मेरा अज़गर कैसे फुंफकार रहा है…!
रचना ज़ोर से हँसने लगी तो शरद ने बेड पर चढ़ कर उसके मुँह में लौड़ा घुसा दिया। रचना इस अचानक हुए हमले से बेख़बर थी। शरद ने सुपाड़ा मुँह में डाल दिया तो अब रचना दोनों हाथों से लौड़ा पकड़ कर उसको चूसने लगी।
शरद- उफ़ जालिम.. क्या गर्मी है तेरे होंठों में…! आह… चूस जानेमन आह…! मेरे लौड़े के नसीब में इतने मखमली होंठ लिखे थे, ये मैं सोच भी नहीं सकता था.. आह…!
रचना को बहुत तकलीफ़ हो रही थी, पर वो पूरा लौड़ा मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी और उसके दाँत भी लौड़े को छू रहे थे क्योंकि शरद का लौड़ा बहुत मोटा था।
लगभग 5 मिनट तक वो शरद के लौड़े को चूसती रही कभी उसके गोटी चूसती कभी लौड़ा.. कभी अपनी जीभ पूरे लौड़े पर घुमाती थी।
शरद- उफ़.. आह.. वाउ.. यार तुम तो बहुत मज़े से चूस रही हो.. लगता ही नहीं कि पहली बार है.. जान तुम तो टॉप की हीरोइन बनोगी..!
यह बात सुनकर रचना खुश हो गई और ज़ोर-ज़ोर से लौड़ा चूसने लगी।
शरद- बस जान… अब पानी मुँह में ही निकालने का इरादा है क्या… आ जाओ तुम्हारी चूत का दर्द ठीक कर देता हूँ मैं…!
रचना- नहीं शरद बहुत दर्द होगा.. अभी भी मेरी चूत दु:ख रही है आप मुँह से काम चला लो न.. और मेरा मन भी है तुम्हारा रस पीने का बस वीडियो में देखा था, आज पीना चाहती हूँ…!
शरद- अच्छा.. ठीक है जान निकाल दो मेरा पानी मुँह में.. पर तुम लेट जाओ मैं तुम्हें प्यार करूँगा बस.. लौड़ा नहीं डालूँगा…! फिर हम 69 का पोज़ बना लेंगे.. तुम लौड़े का रस पीना और मैं तुम्हारी चूत को चाट कर आराम दूँगा।
रचना लेट जाती है और शरद उसको नरम होंठों को चूसने लगता है। लगभग 5 मिनट के फ्रेंच किस के बाद वो उसकी गर्दन से लेकर मम्मों तक चूसना शुरू कर देता है।
रचना- आह.. सी..सी.. शरद आह.. उफ़.. होंठों के स्पर्श और हाथों के दबाव से आह.. चूत में कुछ हो रहा है.. आ.. उह.. अई कककक ह..!
शरद रचना के कड़क मम्मों को दबा रहा था और निप्पल को चूस रहा था। अब शरद धीरे-धीरे रचना के पेट पर पहुँच जाता है और उसकी चूत पर होंठ टिका देता है।
क्या मस्त फूली हुई चूत थी रचना की…! और अभी की चुदाई से और सूज गई थी।
रचना- आआ उफफफ्फ़… कककककर रहे हो शरद जी आ..ह.. आपके होंठ बहुत गर्म है आ ..ह…मज़ा आ गया उफ़ प्लीज़ आह… चूसो ना…!
शरद चूत को चूसते-चूसते ही साइड चेंज कर लेता है और अब शरद का लौड़ा रचना के मुँह के पास था। उसने झट से लौड़ा मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।
अब दोनों रस की दुनिया में खो गए थे, 5 मिनट में ही शरद ने रचना की चूत को चूस कर इतना गर्म कर दिया कि रचना सिसकारने लगी और अपनी टाँगों को भींच कर मदहोश होने लगी।
यह देख कर शरद बैठ गया और हँसने लगा।
रचना- आ..ह.. आप उठ क्यों गए उफ़.. सीसी मेरी चूत का ..उफ़.. पानी निकलने ही वाला था आ..ह.. प्लीज़ आओ..न…..!
शरद- जानेमन लौड़ा चूत पर फेरने दो मज़ा आएगा और तुम्हारा पानी भी निकल जाएगा।
रचना- आप को जो भी करना है ..आह…जल्दी करो उफ़ आ..हह…!
शरद ने रचना की जांघों को हाथों से पकड़ कर उसकी टाँगों को फैला दिया और अपना लौड़ा हाथ से पकड़ कर चूत पर रगड़ने लगा।
रचना मस्ती में आ गई, उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
शरद ने धीरे-धीरे लौड़ा रगड़ा और टोपी चूत में घुसा कर हल्का-हल्का अन्दर-बाहर करने लगा।
रचना- उ उफ़फ्फ़ आ..ह.. प्लीज़ आ मत तड़पाओ आह डाल दो आ..ह.. अब बर्दाश्त नहीं होता आह…!
शरद थोड़ा सा लौड़ा और अन्दर डालकर हिलाने लगा।
रचना- आ..ह.. अई उपप्प्स दर्द हो रहा है.. आ पर मज़ा भी आ आ रहा है…! आ डालो आ ज़ोर से करो ना आ..हह…!
शरद बहुत शातिर था, एक-एक इन्च करके लौड़ा आगे बढ़ा रहा था।
वैसे तो अभी कुछ देर पहले उसने अपने 9″ के लौड़े से चूत को पूरा खोल दिया था और बेहोशी का फायदा उठाकर खूब झटके मारे थे पर अब वो आराम-आराम से डाल रहा था, क्योंकि रचना की चूत बहुत सूजी हुई थी और उसको काफ़ी दर्द भी था।
अभी तो वो उत्तेजना के करीब थी, तो दर्द का अहसास नहीं हो रहा था।
रचना- आ..हह.. शरद कितना गया आ..हह.. स्पीड से करो न…!
शरद- आधा गया है.. स्पीड से करूँगा तो दर्द होगा और स्पीड में पूरा अन्दर चला जाएगा…!
रचना- आ..हह.. एयाया आह ऑश फक मी.. आ..हह.. फास्ट आ अई डाल दो पूरा आ मैं बर्दास्त कर लूँगी आ..ओफफ़ो..!
शरद ने एकदम धीरे से पूरा लौड़ा चूत की गहराई तक पहुँचा दिया और अब वो पूरी गति से रचना की चूत चोदने लगा।
रचना- अयाया… अयाया… उफफफ्फ़… मर गई अई… ऑश आ अई आआ… अई अहहह ..!
शरद- उः उः उः क्यों जान… आ मज़ा आह उः उः आ रहा है ना… आ उहह निकाल लूं क्या.. आ हू उः उः …!
रचना- अई आ… न न नहीं आ करते आ रहो… आ होने दो… आ दर्द आज आ जितना आ होना है आ उफ़ फास्ट और फास्ट आह मैं गई आ फक मी आ… फक मी आ फक हार्ड… आ आ मैं गई उूउउ उईईईई… ह अयाया अई आआ… अयाया आहा हः आहह..!
रचना गाण्ड को उठा-उठा कर झड़ने लगी थी, पर शरद अभी कहाँ झड़ने वाला था। इतनी देर रचना ने उसके लौड़े को मुँह से चूसा और अब 15 मिनट से वो चूत में था, वो ताबड़तोड़ चुदाई में लगा हुआ था।
पाँच मिनट बाद रचना को चूत मैं जलन होने लगी।
रचना- अई आ शरद आ मेरी चूत में बहुत जलन हो रही है आ प्लीज़ अब निकाल लो.. आ मेरे मुँह में अपना पानी निकालना आ मुझे भी आ टेस्ट करना है आ..हह….!
शरद ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और जल्दी से हाथ पकड़ कर रचना को बिठा कर खुद खड़ा हो गया और लौड़ा उसके मुँह में दे दिया और झटके मारने लगा।
शरद- आ..हह. उफ़ जान मेरा माल आ रहा है उफ़फ्फ़ हू हू हू अई चूसो आ पूरा मुँह में लो आह…!
शरद के लंड से एक बहुत तेज़ पिचकारी निकली जो सीधे रचना के गले में गई और उसके बाद खूब सारा रस उसके मुँह में भर गया। मुँह में लौड़ा लगा होने के कारण रचना पूरा पानी गटक गई। तब शरद ने लौड़ा बाहर निकाला।
शरद- क्यों रानी कैसा लगा टेस्ट…!
रचना- अजीब सा था.. पर मज़ा बहुत आया और चूत में अब दर्द का अहसास हो रहा है…!
शरद- जान ये लौड़े पर भी पानी लगा है इसे भी साफ करो मज़ा आएगा…!
रचना ने लौड़े को जीभ से चाट-चाट कर साफ कर दिया और बेड पर निढाल होकर पसर गई।
रचना- ओह शरद आप कितने अच्छे हो.. मज़ा आ गया आ..आज तो…!
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04-07-2019, 11:18 AM,
#9
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद के लौड़े पर पानी लगा हुआ था।
शरद- जान.. ये लौड़े पर पानी लगा है, इसे भी साफ करो न..मज़ा आएगा..!
रचना ने लौड़े को जीभ से चाट-चाट कर साफ कर दिया और बेड पर निढाल होकर पसर गई।
रचना- ओह शरद आप कितने अच्छे हो.. मज़ा आ गया आ..आज तो…!
शरद- जान.. मेरी बात मानती रहोगी तो ऐसे ही मज़ा करती रहोगी.. अब तुम थोड़ा आराम कर लो.. मैं फ्रेश हो जाता हूँ। वो डायरेक्टर आता ही होगा।
रचना- मुझे भी तो तैयार होना है और मेरी चूत में बहुत दर्द है, मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ.. अब क्या करूँ?
शरद ने टेबल की दराज में से कुछ दवाई की गोलियाँ और एक क्रीम रचना को दी और उसको कहा- अभी एक गोली खाकर यह क्रीम अच्छे से चूत पर लगा लो और एक घंटा सो जाओ, आराम मिल जाएगा, तब तक मैं नहा कर आता हूँ..!
रचना- लेकिन मैं सो जाऊँगी तो रेडी कब होऊँगी.. आपने कहा कि वो आता ही होगा..!
शरद- अरे यार, तुम हीरोइन बनने जा रही हो, उसको आने में समय लगेगा और वैसे भी उसके आने के बाद तुम सीधे थोड़े उसके सामने आओगी पहले मैं तुम्हारी तारीफों के पुल बनाऊँगा.. बाद में तुमको बुलाऊँगा। अब सो जाओ..! ओके टेन्शन मत लो, मैं हूँ न..!
रचना- आई लव यू शरद जी.. आप बहुत अच्छे हो..!
शरद- ओके जान.. अब सो जाओ बाय स्वीटी.. मैं अभी आता हूँ।
शरद बाथरूम में चला जाता है और रचना अपनी चूत पर अच्छे से क्रीम लगा कर गोली लेकर लेट जाती है, 5 मिनट में ही वो नींद के आगोश में चली जाती है।
शरद बाथरूम में था तब उसको मोबाइल की रिंग सुनाई देती है, तो वो बाहर आकर फ़ोन उठाता है।
शरद- हैलो.. अमर, बोलो कैसे फ़ोन किया..?
अमर- अरे यार कितना समय हो गया, कहाँ हो..! फोटो निकले क्या..!
शरद- हाँ यार कुछ पिक लिए, पर रचना बहुत शातिर है, जल्दी हाथ में नहीं आएगी इसलिए एक डायरेक्टर से बात की है। उसको उससे मिलवा कर ही आगे का प्लान सोचूँगा।
अमर- ओह वाउ.. गुड यार.. रचना कहाँ है अभी..!
शरद- मैंने उससे कहा है कि डायरेक्टर शाम को आएंगे, तब तक मेरे साथ लंच कर लो, पर वो नहीं मानी और कहा कि अपनी किसी सहेली के यहाँ जा रही है। शाम को आ जाएगी वापस।
अमर- ओह कहाँ चली गई.. तुमने उसे किधर छोड़ा है..!
शरद- कहाँ यार… मैंने कहा कि मैं छोड़ देता हूँ, पर वो टैक्सी लेकर निकल गई है.. ओके..! अब मैं थोड़ी देर में आता हूँ। तुम घर के बाहर मिलना..!
अमर- ओके फ्रेंड बाय..!
शरद जल्दी से तैयार होकर अपनी कार में अमर के पास पहुँच गया।
अमर- आओ मेरे यार.. क्या खबर है अब बताओ..!
शरद- यार जो फ़ोन पर बताया था वही बात है.. तेरी बहन तीखी मिर्ची है, हाथ भी नहीं लगाने देती..!
अमर- हाँ यार वो तो है, पर तुम क्यों हाथ लगा रहे हो, पहले मैं उसको चोदूँगा, उसके बाद तुम, ओके..! इसमें कोई फेर-बदल नहीं होगा।
शरद- यार मैंने कब मना किया है, पर छूकर मज़ा तो लेने दो प्लीज़..!
अमर- अच्छा ठीक है ले लो मज़े.. छू कर, पर ध्यान रखना कोई गड़बड़ ना हो जाए।
शरद- कुछ नहीं होगा, अब मुझे जाना है रचना का फ़ोन भी बन्द है उसे बताना था कि 4 बजे तक आ जाए, पर न जाने कहाँ बिज़ी है वो..!
अमर- हाँ मैंने भी ट्राई किया, पर उसका फ़ोन बन्द आ रहा है, पता नहीं कहाँ बिज़ी है…!
शरद- यार उसका कोई बॉय-फ्रेंड तो नहीं है न.. कहीं ऐसा ना हो हम देखते रह जाएं और कोई और उसके मज़े ले ले..!
अमर- नहीं नहीं यार.. मुझे अच्छी तरह से पता है उसका कोई बॉय-फ्रेंड नहीं है, हाँ.. फ्रेंड बहुत हैं.. आ जाएगी तुम टेन्शन मत लो यार..!
शरद- ओके.. अब मैं जाता हूँ, अगर उसका कोई फ़ोन आए, तो बता देना उसको कि 4 बजे से पहले वहीं आ जाए, जहाँ से गई थी।
अमर ‘ओके’ बोलकर उसको अंगूठा दिखा देता है और खुद रचना का फ़ोन ट्राई करने लगा। शरद वापस घर आकर किसी को फ़ोन करने लगा।
5 मिनट तक बात करने के बाद वो रूम में गया जहाँ रचना बेख़बर एकदम नंगी सोई हुई थी।
शरद उसके पास गया और उसके होंठों पर उंगली घुमाने लगता है और एक क़ातिल मुस्कान उसके होंठों पर आ गई।
!
शरद- रचना, तुम कितनी प्यारी और सेक्सी हो ! कसम से दो बार चोद चुका हूँ, पर लौड़ा अभी भी तेरी जवानी को देख कर झटके खाने लगा है क्या संगमरमरी जिस्म है तेरा.. और ये कसे हुए मम्मे.. टाइट चूत उफ्फ.. काश.. तुम हमेशा मेरे पास रहतीं, पर अफ़सोस तेरी किस्मत बहुत खराब है तुमने मेरे साथ जो किया है उसका इतना भयानक बदला लूँगा कि तेरी रूह भी कांप जाएगी। अब तूने जो किया है इसका अंजाम तो तुझे भुगतना ही होगा। अब देख मैं तेरे साथ क्या-क्या करता हूँ। तुझे मैं कठपुतली की तरह नाच नचाऊँगा.. हा हा हा हा हा हा हा हा..!
अपने आप से बात करता हुआ शरद अपने कपड़े उतार कर रचना के पास लेट जाता है और उसके मम्मों को सहलाने लगता है दस मिनट तक वो उसके मम्मों को सहलाता रहा, तब कहीं रचना की नींद खुली।
रचना- उहह ओह शरद आपने मुझे उठाया क्यों नहीं.. समय क्या हुआ है..!
शरद- ये उबासियाँ लेना बन्द करो, जाओ नहा लो जल्दी से वो बस आने वाला है ओके..! जल्दी जाओ अब..!
रचना- आप नहा कर कब आए और आपने कपड़े नहीं पहने अब तक..!
शरद- अब ये बातें बाद में करना, जाओ 5 मिनट में रेडी होकर आओ फास्ट..!
रचना जल्दी से बाथरूम में चली गई, उसका दर्द अब कम था, पर उसकी चाल उसकी हालत ब्यान कर रही थी कि कितनी ज़बरदस्त चुदी है वो..!
15 मिनट में वो तैयार होकर आ गई, तब तक शरद भी तैयार हो गया।
रचना- कैसी लग रही हूँ मैं..!
रचना ने एक ब्लू लाइनिंग का शर्ट और वाइट जींस पहनी थी, बहुत मस्त पटाका लग रही थी वो।
शरद- व्हाट ए सेक्सी यार.. बस अब तो धरम अन्ना मान ही जाएगा..!
रचना- थैंक्स शरद जी, और ये धरम अन्ना कौन है?
शरद- अरे यार, बहुत बड़ा डायरेक्टर है, अभी आने वाला है.. तुम ठीक से बात करना और हाँ तुम्हारा फ़ोन ऑफ है, उसको ऑन करो और अमर से कहो तुम यहाँ पहुँच गई हो अभी..!
रचना- लेकिन अमर को तो पता है कि मैं आपके साथ आई हूँ फिर फ़ोन क्यों..!
शरद ने उसको बताया कि वो गहरी नींद में थी तब उसने अमर से झूठ कहा और उसे पूरी बात समझा दी ताकि अमर को उनकी चुदाई का पता ना चल जाए।
बेचारी रचना शरद की बातों में आ गई और उसने अमर से बात कर ली।
रचना की नज़र दीवार घड़ी पर पड़ी तो वो चौंक गई।
रचना- ओ माई गॉड 4 बज गए, मैं इतनी देर तक सोती रही। आपने कहा था वो लंच पर आएगा, पर अब तो?
वो आगे कुछ बोलती डोर-बेल की आवाज़ आने लगी।
शरद- ये बातें बाद में..! अब तुम यहाँ बैठो, जब मैं आवाज़ दूँ, तब स्टाइल से चलकर आना, ओके..!
रचना- चूत में अभी भी दर्द है, स्टाइल से चलने की बात कर रहे हो आप..! मैं ठीक से चल पाऊँ यही बहुत है..!
शरद- ओके..ओके.. जैसे भी आओ, आ जाना पर धरम अन्ना से ठीक से बात करना बहुत गुस्से वाला आदमी है वो..!
शरद नीचे जाकर दरवाजा खोल देता है। एक लंबा-चौड़ा काला मद्रासी बाहर खड़ा था।
शरद- आओ धरम अन्ना आओ क्या हाल है..!
धरम अन्ना- मैं ठीक हूँ जी कहाँ है वो लड़की जरा जल्दी दिखाओ न, मेरे को काम है, ज़्यादा समय नहीं रुक सकता जी..!
शरद- धरम अन्ना अन्दर तो आओ, अब क्या यहीं गेट पर ले आऊँ उसको..!
शरद उसको अन्दर ले आया और हॉल में सोफे पर बिठा दिया।
शरद- रचना जल्दी से आ जाओ, डायरेक्टर साब को जाना है, उनको जल्दी है.! किसी काम से जाना है..!
शरद की आवाज़ सुनकर रचना मटकती हुई वहाँ आई, उसको दर्द था, पर दर्द को सहन करके बड़ी अदा के साथ आई थी और आते ही धरम अन्ना को ‘हैलो सर’ बोल दिया।
धरम अन्ना- हैलो हैलो जी बैठो जी..!
शरद ने रचना को इशारा करके बैठने को कहा तो वो धरम अन्ना के पास जाकर बैठ गई।
यह देखकर धरम अन्ना खुश हो गया।
धरम अन्ना- लड़की तो अच्छी है, लेकिन थोड़ा छोटा होना जी.. तुम जानते धरम अन्ना रांग काम कभी नहीं करता जी..! ये तो कच्ची कली है, हमको पका पपीता चाहिए जी.. न मुश्किल जी.. बहुत मुश्किल..!
शरद- अरे धरम अन्ना जी, आप इसकी उम्र पर मत जाओ, और कच्ची नहीं है यह..! मैंने पका दिया है, आप कहें तो और ट्रेनिंग दे दूँगा, पर प्लीज़ आप एक बार गौर तो कीजिए, मेरी खातिर..!
रचना के चेहरे पर घबराहट के भाव आ गए थे धरम अन्ना के ‘ना’ कहने से..!
शरद की बातों से उसे हौसला मिल रहा था और वो नज़रें टिकाए बस धरम अन्ना को देखे जा रही थी।
धरम अन्ना ऊपर से नीचे रचना को घूरने लगा और फ़िर शरद की तरफ़ देखने लगा।
शरद- धरम अन्ना जी, क्या सोचने लगे?
धरम अन्ना- तुम बोलता तो मैं मान लेता जी.. पर फिर भी मैं ये लड़की को पूछना माँगता कि इसको कोई प्राब्लम तो नहीं जी.. बाद में काम शुरू करने के बाद कोई नाटक नहीं होना जी..!
रचना- नहीं नहीं सर.. आप बेफ़िक्र रहो, आप जैसे कहोगे मैं वैसे करने को तैयार हूँ.. प्लीज़ आप ‘हाँ’ कह दो..!
धरम अन्ना- हम को बहुत काम होना जी, लेकिन शरद हमारा खास आदमी… इसके वास्ते मैं यहाँ आया और अभी भी मेरे को जल्दी जाना था जी, लेकिन तुमको देखा तो रुकने का मन किया जी, अब तो टेस्ट लेकर ही जाऊँगा..!
शरद- हाँ क्यों नहीं धरम अन्ना जी ये एकदम तैयार है..!
रचना- हाँ सर, आप बताओ क्या करना है..!
धरम अन्ना रचना के चेहरे पर हाथ फेरने लगता है फिर धीरे-धीरे वो हाथ को उसकी कमर से लाता हुआ उसके मम्मों पर ले आता है। रचना जानती थी कि ये गलत हो रहा है, पर शरद उसको इशारे से समझा देता है कि करने दो, इसलिए वो चुप रही और इतना तो उसको पता था हीरोइन बनना इतना आसान नहीं है। वो चुपचाप बैठी रही।
धरम अन्ना- शरद धरम अन्ना.. तुम बोलता है तो मैं इसको मौका देता.. पर एक टेस्ट लेना चाहता.. क्या बोलता जी तुम..!
धरम अन्ना बात करता जा रहा था और उसके हाथ बराबर हरकत कर रहे थे। वो रचना के मम्मों को दबा कर मज़ा ले रहा था।
शरद- धरम अन्ना मेरी जुबान का भरोसा नहीं क्या..! बोलो कब लेना चाहते हो टेस्ट.. कहो तो अभी दिलवा दूँ..!
धरम अन्ना- ना रे.. अभी हमको काम होना जी.. कल आप इसको लाना जी वहाँ हम टेस्ट लेगा। हम तुमको फ़ोन पर टाइम का बताना जी… ये बेबी का लाइफ बना दूँगा जी..!
रचना खड़ी हो गई और धरम अन्ना को ‘थैंक्स’ बोला।
धरम अन्ना- अरे बेबी.. थैंक्स नहीं बोलो जी.. मैं तुमको ‘आकाश’ पर बैठा दूँगा जी.. अभी आओ थोड़ी देर मेरा गोद में बैठो.. आओ आओ..!
धरम अन्ना ने रचना का हाथ पकड़ कर उसको गोद में बैठा लिया।
रचना ने जींस पहनी थी फिर भी धरम अन्ना का कड़क लौड़ा वो महसूस कर रही थी।
5 मिनट तक धरम अन्ना बातें करता रहा और रचना के मम्मों के मज़े लेता रहा और उसकी गाण्ड का अहसास लौड़े को कराता रहा।
फिर वो रचना का हाथ चूम कर चला गया।
शरद उसको बाहर तक छोड़ने गया। रचना वहीं सोफे पर बैठी रही।
शरद- थैंक्स धरम अन्ना.. तुम मेरे कहने पर यहाँ आए..!
धरम अन्ना- कोई बात नहीं जी लड़की अच्छी.. पर थोड़ी कच्ची.. तुम उसको पक्का करो जी.. मैं जाता, कल उसको लाना जी.. काम हो जाएगा..!
इतना बोलकर धरम अन्ना चला गया।

धरम अन्ना के जाने के बाद शरद अन्दर आ जाता है रचना भाग कर उससे लिपट जाती है।
रचना- थैंक्स शरद जी.. थैंक्स.. आपकी वजह से उसने ‘हाँ’ कर दिया, आप बहुत अच्छे हो।
शरद- अच्छा-अच्छा ठीक है.. अब बैठो, कुछ जरूरी बात करनी है।
दोनों सोफे पर बैठ गए, रचना बहुत उत्साहित थी, उसका चेहरा खिला हुआ था।
शरद- हाँ तो जान.. अब कहो कैसा लगा डायरेक्टर से मिल कर? और उसने जो कहा उस पर गौर किया तुमने?
रचना- बहुत अच्छा लगा, पर वो मद्रासी था ना धरम अन्ना.. कभी नाम नहीं सुना उसका और उसकी हरकतें भी ठीक नहीं थी। आपके कहने पर मैं चुप थी और उसकी बातें भी नहीं समझ आईं कि अभी कच्ची है, पकाओ वगैरह वगैरह..!
शरद- जान.. वो कोई छोटा-मोटा आदमी नहीं है बड़ी-बड़ी हिट फ़िल्में बनाई हैं और रही उसकी हरकत की बात, तो मैंने पहले ही कहा था इस लाइन में ये सब आम बात है। वो तुमको आजमा रहा था, अगर तुम कुछ बोलतीं, तो वो मना कर देता ! समझी?
रचना- आजमा रहा था.. मैं कुछ समझी नहीं?
शरद- अरे यार… तुमको फिल्म में हीरोइन लेगा अगर ऐसा कोई सीन आएगा और तब तुम मना कर दो तो..! इसलिए वो चैक कर रहा था कि ऐसे सीन के लिए तुम तैयार हो या नहीं और कच्ची का मतलब है एक्टिंग में.. समझी..! अब कल उसके पास जाना है, आओ मैं तुमको समझा देता हूँ कि क्या करना होगा। वहाँ आ जाओ रूम में, आराम से समझाता हूँ।
दोनों रूम में चले गए।
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04-07-2019, 11:18 AM,
#10
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
रचना- हाँ मैं तैयार हूँ.. शरद जी अब बताओ क्या करना होगा।
शरद- सबसे पहले तो मेरी बात गौर से सुनो अमर को इन सबके बारे में कुछ मत बताना। बस कोई साधारण सी बात बता देना। शायद उसको अच्छा ना लगे ये सब..!
रचना- नहीं नहीं.. शरद जी, आप अमर की टेन्शन मत लो, उसी ने मुझे यह सब बताया था कि इस लाइन में क्या-क्या होता है और उसने तो मुझे..!
रचना बोलते-बोलते चुप हो जाती है।
शरद- क्या उसने मुझे…! जान पूरी बात बताओ शरमाओ मत, मेरा जानना जरूरी है।
रचना पूरी बात बता देती है कि कैसे अमर ने गेम खेलने के बहाने उसके मम्मों को दबाया और ललिता के बारे में भी सब कुछ बता दिया ब्रा-पैन्टी में अमर के सामने गई.. वो बात भी बता दी।
शरद- ओ माई गॉड.. ये सब बातें सुनकर मैं समझ गया कि अमर बहुत चालाक है।
रचना- क्या मतलब चालाक है..!
शरद- जान वो सब मैं बाद में बताऊँगा। बस तुम उसको ऐसा कुछ नहीं बताओगी अगर हीरोइन बनना है तो.. उसको कहना बस नॉर्मल पिक लीं और धरम अन्ना से मिलीं, उन्होंने टेस्ट के लिए कल बुलाया है। इसके अलावा ज़्यादा बात भी मत करना ओके..!
रचना- ओके बाबा नहीं कहूँगी, अब कल की तैयारी करें..!
शरद- ओके मैं यहाँ बैठता हूँ, तुम वहाँ से आओ.. समझो मैं धरम अन्ना हूँ अब जो मैं पूछू उसका जवाब देना।
रचना- ओके..!
शरद ने बेड पर बैठ कर रचना को आने का इशारा किया।
रचना बड़ी स्टाइल से चलती हुई उसके पास आकर बैठ गई।
शरद- तुमको हीरोइन बनना है, यह बताओ कोई हॉट सीन आएगा तो कोई नाटक नहीं करोगी ना?
रचना- नहीं सर.. आप जो कहोगे, मैं करूँगी।
शरद- गुड, समझदार हो, अच्छा तुम्हारे अनार का साइज़ क्या है?
शरद ने रचना के मम्मों को दबा कर यह बात बोली।
रचना- सर 32″ है।
शरद- वेरी गुड.. अब बेबी जरा दिखाओ तो कैसे हैं ये अनार..!
रचना- शरद जी.. क्या सच में धरम अन्ना ये सब कहेगा..!
शरद- क्यों कोई प्राब्लम है तुमको, यार मैं तो बस अंदाज़ा लगा रहा हूँ, कहे या ना कहे पर तुमको तो रेडी रहना चाहिए ना.. हर बात के लिए..!
रचना- शरद जी मैं रेडी हूँ, पर उसने कुछ किया तो..!
शरद- देखो रानी… वो सिर्फ़ जिस्म देखेगा, छू कर महसूस करेगा.. इससे ज़्यादा कुछ नहीं, मैं साथ रहूँगा न.. डरती क्यों हो..!
रचना- ओके बाबा, तुम हो तो किस बात का डर, अब तो मैं उसके सामने नंगी भी हो जाऊँगी। बस आप मेरे साथ रहना मगर वो मान तो जाएगा न..!
शरद- जानेमन… नंगी होने की जरूरत नहीं पड़ेगी, धरम अन्ना ऐसा कुछ नहीं करेगा, मैं जानता हूँ उसको और मानेगा क्यों नहीं, थोड़ा भी ना नुकुर करे तो साले के लंड पर हाथ रख देना। साला ‘ना’ को भी ‘हाँ’ बोलेगा.. हा हा हा हा हा..!
दोनों खिलखिला कर हँसने लगे।
रचना- शरद सच बताओ न.. मैं क्या करूँ कल?
शरद- देखो जान… वैसे तो मैंने उसको पटा लिया है, पर फिर भी कल थोड़ा बहुत कुछ हो तो संभाल लेना। तुम ‘समझ’ रही हो न मैं क्या कह रहा हूँ..!
रचना- हाँ शरद जी.. मैं समझ रही हूँ सच कहूँ तो मुझे आपसे प्यार हो गया है। अब यह जिस्म सिर्फ़ आपका है, कोई दूसरा इसको टच भी करता है तो बुरा लगता है। आपने बहुत मज़े दिए मुझे, अब आप जो कहोगे मैं करने को तैयार हूँ, बस मुझे हीरोइन बना दो प्लीज़..!
शरद- ओके जान मेरा वादा है तुमसे, तुम फिल्म में ‘मेन-हीरोइन’ का काम जरूर करोगी। अब खुश.. बस अपने शरद की इज़्ज़त का ख्याल रखना..!
रचना खुश होकर शरद से लिपट गई और उसे चूमने लगी।
शरद भी उसके होंठों को चूसने लगा, दोनों एक-दूसरे को कस कर भींच लिया।
करीब 5 मिनट के चूमा-चाटी के बाद शरद उसको बाँहों में उठा कर बेड पर लिटा दिया और उसके मम्मों को दबाने लगा।
रचना पर मस्ती चढ़ने लगी और वो शरद के शर्ट के बटन खोलने लगी।
शरद भी उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी।
अचानक शरद को कुछ याद आया और वो उठ गया।
रचना- उहह डार्लिंग आओ ना.. क्या हुआ ससस्स कहाँ जा रहे हो.. आ जाओ ना..!
शरद- रूको जान… रिकॉर्डिंग ऑन कर दूँ, हमारे प्यार को कैमरे में बंद कर दूँ ताकि कभी भी तुम्हारी याद आए तो मैं उसको देख लूँ !
शरद वीडियो-कैमरा ऑन करके उसको सैट करके आ गया।
रचना- आ..ह स्वीटहार्ट मेरी याद आए तो मुझे बुला लेना.. इस रेकॉर्डिंग में क्या रखा है.. उफ़ आ..ह.. आराम से दबाओ ना.. अइ कक उफफफ्फ़..!
दोनों मस्ती में खो चुके थे और शरद ने एक-एक करके रचना के सारे कपड़े निकाल दिए।
रचना ने भी शरद का शर्ट निकाल दिया पर पैन्ट अभी बाकी थी।
अब रचना का नंगा जिस्म जलने लगा।
रचना- उफ़ आह स्वीटहार्ट… मेरे तो सारे कपड़े निकाल दिए आ..प.. अपनी पैन्ट आ..ह.. निकालो ना आ..ह.. रूको… मैं ही निकालती हूँ..!
रचना ने शरद को लिटा दिया और उसकी पैन्ट खोलने लगी।
साथ-साथ वो अपनी जीभ से शरद के पेट पर चाट भी रही थी। बड़ी ही अदा के साथ उसने शरद की पैन्ट निकाली और अंडरवियर के ऊपर से ही लंड को दाँतों से हल्का काटने लगी।
शरद- आ..ह.. उफ़फ्फ़ जान क्या इरादा है आओच ओफफफ़ो नहीं आ..हह..!
रचना हल्की मुस्कान दे रही थी, अब उसने वो आख़िरी कपड़ा भी निकाल दिया था।
शरद का लौड़ा एकदम तना हुआ, रचना के मुँह के पास था। रचना ने झट से उसे मुँह में भर लिया और चूसने लगी।
शरद ने रचना को पकड़ कर उल्टा कर दिया और उसकी चूत चाटने लगा अब दोनों मस्ती में आ गए।
दस मिनट तक दोनों उसी अवस्था में मस्ती करते रहे, रचना की चूत पानी छोड़ने लगी थी।
अब शरद के बर्दाश्त के बाहर था, उसने रचना को हटाया और खुद बैठ गया।
रचना- उहह क्या है.. शरद आ..हह.. मज़ा आ रहा था… आप हट क्यों गए.. चाटो ना.. आ..हह.. प्लीज़..!
शरद- जान देखो लंड बेकाबू हो गया है, अब इसको चूत में डालना ही पड़ेगा। यह नहीं मानेगा..!
रचना लेट गई, बोली- तो आ जाओ ना… रोका किसने है.. अब ये चूत तुम्हारी है… जब चाहो चोद लो..!
शरद- जान ऐसे नहीं अब डॉगी स्टाइल में करूँगा.. चलो बन जाओ कुतिया..!
रचना- वाउ… मज़ा आएगा.. मेरा भी मन था ऐसे करने का.. पर आराम से करना..! बड़ी मुश्किल से चूत का दर्द कम हुआ है।
रचना कुतिया बन गई और दोनों पैरों को फैला कर घुटनों के बल ऐसे आई कि उसकी गाण्ड पीछे को उभर आई, उसकी फूली हुई चूत भी बाहर आ गई।
शरद तो यह नजारा देख कर काबू से बाहर हो गया, जल्दी से उसके पीछे आया, लौड़े पर थोड़ा थूक लगाया और ठूँस दिया चूत में..!
रचना- अई आह उफ़फ्फ़ मज़ा आ गया शरद आ बस ऐसे ही धीरे-धीरे अन्दर जाने दो.. उफ़..!
शरद बहुत एक्सपर्ट था, वो बड़े आराम से अपना लौड़ा अन्दर-बाहर कर रहा था। रचना पर मस्ती चढ़ने लगी थी। अब वो गाण्ड को पीछे धकेल कर चुद रही थी।
लगभग 5 मिनट तो शरद धीरे-धीरे करता रहा, पर उसके बाद उसने स्पीड बढ़ा ली। अब दोनों की जाँघों की आवाज़ आने लगी थी, ठप.. ठप..
शरद का पूरा लौड़ा अन्दर जा रहा था।
शरद- आ… आ..हह.. जान तीसरी बार उः… उः… आ… आ… चोद रहा हूँ तुम्हारी चूत अहहा… अहहा… अहहा… अभी भी बहुत टाइट है.. ऐसा लग रहा है पहली बार चोद आ आ रहा हूँ उफ़ मज़ा आ रहा है आ..हह..!
रचना- आआ… आआ… आह उईईइ… चोदो आ आज उफ़फ्फ़ मेरी चूत को आह आह कर दो ढीला आह… आह..!
शरद धकाधक लौड़ा पेलने लगता है और रचना उत्तेजना में आ गई थी।
रचना- आ आआ… उईईइ… सस्सस्स… फास्ट आआ… फास्ट आआ… फक मी अई… फक हार्ड.. आआ आआ ई म गॉन अई अई ..!
रचना की नन्ही सी चूत पानी छोड़ गई पर शरद के लौड़े में अभी बहुत जान बाकी थी, वो फुल स्पीड में लगा हुआ था।
15 मिनट बाद भी जब शरद का पानी नहीं निकला तो रचना चीखी- आआ… एयाया आ… शरद आ… प्लीज़ अब जल्दी अई… आहह निकाल दो ना अई मेरी कमर में दर्द होने लगा है अई अई..!
शरद कुछ नहीं बोला और रचना की गाण्ड पर थप्पड़ मारने लगा, सफेड चूतड़… लाल हो गए।
रचना- आआ उईईइ मा..र.. आह मार क्यों रहे आआ हो उफ़फ्फ़ प्लीज़ शरद.. लगती है.. अई नहीं उ उफ़फ्फ़ आआ आह…!
शरद- जान… उहह… उहह… वाइल्ड-सेक्स का मज़ा लो आ आ उहह उहह उहह..!
रचना- आ अब लेट कर करो ना.. अई प्लीज़ दर्द हो रहा है प्लीज़ अई अई..!
शरद ने लौड़ा बाहर निकाला और एक झटके में रचना को लिटा कर उसके पैर कंधे पर रख कर लौड़ा वापस चूत में घुसेड़ दिया।
रचना- अई… उफ़फ्फ़… इतनी स्पीड में अई अई… ये सब किया आ मुझे तो आ समझ ही नहीं आया… आ आ अब ठीक है उफ़ मेरी चूत में कुछ हो रहा है… आ अई… अई फ… उक्क मैं आ.. शरद आ ज़ोर से करो.. आह मज़ा आ रहा है.. उ उईईइ… एयाया एयाया… आ अई आ..!
15 मिनट तक तूफान चलता रहा और उसके बाद दोनों शान्त हो गए और अलग-अलग होकर बेड पर निढाल हो कर पसर गए।
रचना- आ..ह शरद मज़ा आ गया.. उफ़ चूत में जलन होने लगी है.. पर मज़ा भी खूब आया। कभी सोचा भी नहीं था एक ही दिन में ऐसे तीन बार चुदाई होगी। वो भी इतने मोटे और लंबे लौड़े से आ..हह.!
शरद- जान ये मैं हूँ जो इतने प्यार से तेरी चूत का मुहूरत किया वरना कोई दूसरा होता तो पहली चुदाई के बाद खड़ी भी नहीं हो पाती। अब यह क्रीम साथ ले जाना, घर रात को चूत में अच्छे से लगा कर सोना.. सुबह तक तुम एकदम ठीक हो जाओगी।
रचना- ओह शरद जी, आप मेरा कितना ख्याल रखते हो आई लव यू..!
शरद उसको अच्छे से समझा देता है कि अमर को क्या बोलना है और अगर वो उसको पूछे कि दोपहर को कहाँ गई थी, तो ऐसे विहेव करना जैसे किसी लड़के से मिलने गई हो तुम…!
रचना- ओके बाबा समझ गई, सारी बात लेकिन लड़के से क्यों.. कोई लड़की से भी तो मिल सकती हूँ..!
शरद- अरे बुद्धू तुम नहीं समझोगी, बस मैंने जैसा कहा है वैसा करो अमर को ये लगना चाहिए कि तुम्हारा कोई बॉय-फ्रेंड है, बस बाकी मैं संभाल लूँगा।
रचना- अरे बाबा ठीक है, अब मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा आप ऐसा क्यों बोल रहे हो। मैं उसको बोल दूँगी वैसे कई लड़के भी मेरे दोस्त हैं। उनमें से किसी का भी नाम ले दूँगी..!
शरद- नो.. नाम किसी का मत लेना.. बस ऐसे ही बोल देना..!
रचना- ओके माई स्वीटहार्ट नहीं लूँगी नाम.. अब मैं फ्रेश हो जाऊँ..!
शरद- मन तो करता है एक बार और तेरी चूत का स्वाद लूँ, पर ज़्यादा लेट करना ठीक नहीं होगा। जाओ तुम रेडी हो जाओ मैं खुद तुमको छोड़ने जाऊँगा।
रचना- मेरे स्वीटहार्ट… अब मैं आपकी हूँ जब चाहो चोद लेना… लव यू मेरे स्वीटू.. ओके आप भी रेडी हो जाओ..!
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