Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ बनाया
01-11-2019, 01:13 PM,
#1
Star  Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ बनाया
मेरे घर में हम 3 लोग रहते हैं | मैं दीपक जिसे सब प्यार से दीपू कहते हैं | मेरी मम्मी मंजू ओर बहन पूजा | पहले मैं आपको अपने घर के बारे में बता दूँ | मेरे पापा का जब मैं 8 साल का था एक एक्सीडेंट में उनकी डेथ हो गई थी | मेरे पापा एक बहुत बड़े गवर्नमेंट एम्प्लोई थे सो इसलिए हमें पेंशन के रूप में एक बहुत ही बड़ी अमाउंट हर मंथ मिलती थी | मेरे पापा के पास पहले ही काफ़ी प्रॉपर्टी थी सो हमें उस से काफ़ी रेंट आता था जिससे हमारा गुज़ारा बड़े अच्छे तरीके से होता था | हमें किसी चीज़ की कभी कोई कमी महसूस नही होती थी | पापा की डेथ के बाद मम्मी ने ना दूसरी शादी की ना ही कभी किसी दूसरे मर्द के बारे में सोचा | उसने अपना सारा ज़ीवन हम दोनो भाई बहन की प्रवरिश के लिए ऐसे ही निकाल दिया | ऐसा नही था कि मेरी मम्मी खूबसूरत नही थी बल्कि वो बहुत ही खूबसूरत जिस्म की मालकिन थी | जिसे कोई एक बार देख ले तो बस उसे देखता ही रहे | और मुझे यकीन था कि मेरी मम्मी को देखने के बाद ऐसा ही कोई मर्द होगा जो अपना लंड सहलाए बिना रह पाता होगा | मेरी मम्मी लंबी ऊँची कद 5.5 फ़ीट और मेरी मम्मी का शरीर ऐसा है कि कोई देखे तो तड़प उठे | एकदम गोरी चिट्टी 38 साइज़ की बड़ी बड़ी टाइट चुचियाँ 30 कमर और 40 के गोल मटोल चूतड़ | मम्मी का शरीर भरा हुआ है लेकिन एकदम सुडोल , कहीं से कोई फैट नही, मेरी बहन पूजा भी एकदम मम्मी पर गई है | भरा हुआ शरीर 34 साइज़ की चुचियाँ, गोल मटोल चूतड़ और एकदम गोरी |पूजा इतनी मस्त ओर हॉट थी कि ना जाने स्कूल के कितने ही लड़के उसके पीछे पड़े थे | घर के बाहर पूजा की मस्त जवानी की एक झलक पाने के लिए स्कूल के लड़के तो क्या मोहल्ले के अंकल भी इंतज़ार में खड़े रहते थे और जब वो पूजा की मस्त मोटी मोटी टाइट चुचियाँ और बाहर निकली हुई गांड को देख लेते तो तो उन सब से कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता | वो सब जाकर पूजा के नाम की मुट्ठ मारते थे | मेरी बहन पूजा और मैं एक ही कॉलेज में पड़ते थे, पूजा फाइनल ईअर में थी और मैं फर्स्ट ईअर में, हम दोनो साथ ही कॉलेज जाते, हम दोनो भाई बहन कम और दोस्त ज़्यादा थे | दोनो में बहुत हँसी मज़ाक होता था, मैं कॉलेज मैं बास्केटबॉल टीम में था और पूजा मेरा हर मैच देखने आती थी | पूजा कॉलेज जाते समय अपने शरीर को पूरा ढकती लेकिन घर में ज़्यादातर छोटी मैक्सी पहन कर रहती, मम्मी भी ज़्यादातर साड़ी और ब्लाउज़ में ही रहती थी, मम्मी और पूजा के बीच बहुत अच्छी ट्यूनिंग थी | सब कुछ अच्छा चल रहा था, मैं ज़्यादातर समय या तो बास्केटबॉल या जिम में बीताता | घर पर मम्मी और पूजा माँ बेटी कम और दोस्त ज़्यादा बनकर रहती, तब तक मेरे मन मे उनके लिए कुछ नही था | पूजा पड़ने में ज़्यादा अच्छी नही थी, फिर एक दिन वो हुआ जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया |
Reply
01-11-2019, 01:13 PM,
#2
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
एक बार कॉलेज में छुट्टी हुई तो मैं दीदी को देखने जब उसके क्लास रूम में गया तो रूम खाली था | मैं दरवाजे से वापिस मुड़ने लगा तो मुझे दरवाजे के पीछे से कुछ फुसफुसाहट सी होती सुनाई दी | मैं रुक गया और सुनने लगा | लड़की की दबी हुई आवाज़ “रोहित,,प्लीज़ छोड़ो मुझे अब, सब लोग जा चुके हैं..”

रोहित : बस एक किस और... बस एक... फिर चलते हैं |

लड़की : बस....बस .... अब छोड़ो भी मुझे |

रोहित : थोड़ा सा और प्लीज़...... बस एक बार ..... एक लिप् किस करने दो फिर चली जाना मेरी जान |

लड़की : ना... आआहा... अभी नही फिर कभी |

रोहित : अच्छा यह तो देखने दो पेंटी कौन से कलर की पहनी है आज |

लड़की : शटअप .... रोहित .... प्लीज़ मुझे जाने दो अभी |

रोहित : तू कुछ मत कर बस ऐसे ही खड़ी रहना ..... मैं बैठके खुद तेरी सलवार खोल के देख लेता हूँ |

लड़की : आह नो नो |

लग रहा था रोहित नीचे बैठके लड़की की सलवार खोल के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था |

रोहित : यार हाथ क्यों पकड़ रही ओ मेरा ...... और अपनी टांगे क्यों बंद कर रही हो |

लड़की : प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ रोहित फिर कभी.... देख लेना |

रोहित : ओक ठीक है ..... एक किस तो ...... |

लड़की : ओके लास्ट वन |

फिर “पुच्च” की हल्की सी आवाज़ आई और किस के बाद लड़की शायद रोहित की गिरफत से निकलके जाने लगी तो लग रहा था जैसे रोहित ने पीछे से फिर से उसे दबोच लिया हो और उसके बूब्स मसलने लगा हो | अब जैसे लड़की उसकी बाहों में कसमसाती हुई हल्की सी फुसफुसाहट में बोली “रोहित बस भी करो प्लीज़ .... दीपू मेरी वेट कर रहा होगा .... प्लीज़ छोड़ो” अपना नाम सुनके मेरे कान खड़े हो गए | यह पूजा दीदी की ही आवाज़ थी | मैं दरवाजे के थोड़ा और करीब हो गया | अब उनकी तेज साँसों और किस्सिंग की आवाज़ सुनाई दे रही थी जैसे एक दूसरे के जिस्म को मसल रहे हों | मेरी दीदी किसी के साथ मज़ा ले रही थी | पता नही क्यों मुझे यह सब सुनके बहुत मज़ा आ रहा था और अपनी दीदी के बारे में ऐसा करते सोचके तो मेरा लंड अपने आप खड़ा होना शुरू हो गया |

फिर कुछ सेकेंड्स के बाद दीदी की आवाज़ आई “आह .... रोहित ....”

रोहित : यार क्या कर रही हो अपनी लेग्स तो खोल | 

दीदी : हाथ बाहर निकालो..... प्लीज़ बाहर निकालो हाथ मेरी पेंटी से .... मुझे कुछ हो रहा है |

शायद रोहित ने दीदी को पीछे से पकड़े हुए अपना हाथ दीदी की पेंटी में डालके दीदी की चूत पे हाथ रख दिया था | अब दीदी शायद घर जाने और मेरे बारे में भूल चुकी थी और नशीली आवाज़ में उसके कराहने की आवाज़ आ रही थी जैसे “आह .... उम्म्म.... रोहित मेरी जान ..... मेरी जान निकल रही है” शायद दोनों आउट ऑफ कंट्रोल होते जा रहे थे और उनके अंदर का गरम पानी उबाले मारने लगा था |

रोहित दीदी को गरम करने का अपना काम करता रहा और उसके बोलने की कोई आवाज़ नही आई |

फिर कुछ देर बाद जैसे मदहोशी की आवाज़ में दीदी बोली “मत करो ना ......... प्लज़्ज़्ज़ ...... मैं पागल हो रही हूँ”

फिर “पुच्च पुच्च” की हल्की हल्की सी आवाज़ आने लगी | लग रहा था दीदी और रोहित पूरा मज़ा ले रहे हैं लेकिन वो तो मज़ा ले रहे थे मगर मुझे पहली बार पता नही क्यों यह सब सुनके अजीब सी फीलिंग हो रही थी | मेरा लंड पेंट में से उबरा हुआ नज़र आ रहा था और बहुत अच्छा लग रहा था | मैं उनकी मस्ती भरी आवाज़ें सुनके ही मस्त हुआ जा रहा था तभी दीदी बोली “रोहित ...... अब इसे क्यों नीचे कर रहे हो” |

रोहित : पेंटी उतारने दो ना प्लीज़ |

दीदी : पागल हो गए हो क्या.... मैं ऐसा कुछ नही करूँगी ... वो भी यहाँ |

रोहित : नही पूजा मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा लेकिन मुझे बस अपनी पेंटी तो उतार के दे दो आज |

दीदी : ना... नही नही... मैं घर कैसे जाऊंगी | 

रोहित : सलवार के नीचे से क्या पता चलेगा यार |

दीदी : नही मैं घर से दूसरी ला दूँगी .... यह रहने दो |

रोहित : यार वो तो कल लाकर दोगी आज रात मैं क्या करूँगा प्लीज दे दो आज तुम्हारी इस पेंटी पर अपना निकालूँगा प्लीज जान |

मैं भी उनके मज़े के साथ पूरा मज़ा ले रहा था | तभी पीछे से मेरा दोस्त मोहित आ गया और बोला “दीपक तू यहाँ क्यों खड़ा है यार ... घर नही जाना”

मैंने कहा “यार दीदी को ढूंड रहा हूँ” |

वो बोला “दीदी गेट पे तुमको ढूंड रही होगी ... चल गेट पे देखते हैं” 

‘साले ने सारा मज़ा खराब कर दिया’ यह सोचता मैं उसके साथ गेट की तरफ चला गया | हम गेट के पास जाके खड़े हुए तो कुछ ही देर में दीदी भी उसी रूम की तरफ से गेट की तरफ भागी आ रही थी और बोली “सॉरी दीपू मैं लेट हो गई” शायद मुझे एक्सक्यूस देना उसने ज़रूरी नही समझा | लेकिन उसकी सिलवट पड़ी शर्ट और लाल हुए होंठों से सॉफ पता चल रहा था कि वो अभी अभी कौनसा खेल, खेल के आ रही थी | शायद उसने मेरी और मेरे दोस्त की बातचीत सुन ली थी | इसी लिए जल्दी से भाग के हमारे पीछे ही आ गई थी | आज मैं पहली बार अपनी दीदी को इतने ध्यान से देख रहा था | कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन कितनी सेक्सी थी साली, किसी हेरोइन से कम नही लग रही थी 
Reply
01-11-2019, 01:13 PM,
#3
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
पतला लंबा जिस्म, उसके गोरे लाल गाल जैसे मक्खन में सिंधूर मिक्स किया हो, गोल गोल गोरी लंबी टांगें, होंठ तो इतने लाल कि लग रहा था जैसे अभी खून टपक पड़ेगा, स्लिम जिस्म पे गोल गोल मुम्मे उसकी शर्ट में बहुत टाइट नज़र आ रहे थे | गांड के बट्स के उपर उभरी हुई सलवार कितनी सेक्सी लग रही थी | दीदी चलती तो गांड पे लंबी चोटी जैसे दीदी की गांड को थपथपा रही हो, गोल घुटने, लंबी गर्दन, आगे से लटकते थोड़े थोड़े कट किये हुए बाल दीदी की गोरी गालों पे कितने खूबसूरत लग रहे थे, आज पहली बार मैंने दीदी के जिस्म के एक एक हिस्से की अपनी आँखों से तलाशी ली थी |

दीदी की स्लिम बॉडी पे अगर कोई हिस्सा उभरा नज़र आता था तो वो दीदी की शर्ट में टाइट चूचियां और पीछे से उभरी हुई गांड बाकी सारा जिस्म लंबा पतला था | मेरा ध्यान दीदी के जिस्म की तरफ था और मेरा लंड दीदी की सेक्सी बॉडी देख के करेंट पकड़ रहा था लेकिन दीदी इधर उधर देख रही थी | शायद देख रही थी कि हमे घर ले जाने वाली स्कूल बस निकल चुकी थी | फिर दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुझे उस के लाल हुए जिस्म की तरफ इतने ध्यान से देखता देख के पहले आँखों के इशारे से पूछा फिर बोली “क्या है” | मैं कुछ नही बोला | उसकी तरफ देखता रहा | चोर की दाड़ी में तिनका, जैसे उसे अपने पकड़े जाने की टेंशन होने लगी थी |

दीदी फिर बोली “दीपू, ऐसे मेरी तरफ क्या देख रहा है”

मैं “दीदी बस कहाँ है” 

दीदी ने अपने लेफ्ट मुम्मे पे हाथ रखा और ठंडी सांस लेते बोली “बस शायद चली गई हम लोग लेट हो गए, चलो रिक्शा पे जाना पड़ेगा”

रिक्शा पे मैं दीदी के साथ सटके बैठ गया | आज पहली बार मुझे दीदी के करीब बैठने में कितना मज़ा आ रहा था | रिक्शा पे बैठे बैठे भी मेरा ध्यान दीदी की गोल गोल गोरी गोरी लंबी टांगों पे ही जा रहा था और पेंट के अंदर मेरा लंड तंबू मे बम्बू की तरह खड़ा बेकाबू हो रहा था लेकिन मैंने पेंट की पॉकेट में हाथ डाल के अपने लंड को दबा रखा था | मेरा दिल चाह रहा था कि मैं किसी तरह दीदी की थाई पे हाथ रखूं | लेकिन डर भी रहा था फिर रास्ते में सड़क खराब होने की वजह से रिक्शा पे झटका लगा तो मैंने झट से अपने राईट हैण्ड से से दीदी की लेफ्ट थाई को पकड़ लिया | मेरा लेफ्ट हैण्ड अपनी पॉकेट में लंड को पकड़े था लेकिन अगले ही झटके में मुझे लेफ्ट हैण्ड को भी पॉकेट से बाहर निकाल के एक साइड से रिक्शा को पकड़ना पड़ा | अब मैंने एक हाथ से दीदी की लेफ्ट थाई को पकड़ा था और दूजे हाथ से लेफ्ट साइड से रिक्शा का किनारा | मेरा लंड पेंट में तना हुआ अब सॉफ नज़र आ रहा था | दीदी के कुछ ना बोलने की वजह से मेरा हौसला बड़ता गया, मेरा ध्यान दीदी की टांगों और अपने हाथ की पोज़िशन पे था और दिल धक धक कर रहा था | रिक्शा टूटी हुई सड़क पे जा रहा था और झटके लग रहे थे | इन्ही झटकों की हेल्प से मेरी कोशिश अपने हाथ को दीदी की चूत की तरफ सरकाने की थी और काफ़ी हाथ दीदी की चूत के करीब चला भी गया | जैसे मेरा हाथ दीदी की चूत की तरफ सरकता तो सलवार मेरे हाथ के आगे अटकी होने के कारण दीदी के गोरे गोल नंगे घुटने भी दिखाई देने लगे थे | मेरा हाथ दीदी की टांग और थाई के जॉइंट पे पहुँच चुका था लेकिन इससे आगे जाने की हिम्मत नही हो रही थी | मैंने टेडी आँख से देखा तो दीदी का ध्यान मेरे लेफ्ट साइड से तंबू की तरह उठी मेरी पेंट पे था | मेरी ग़लती कि मैने अपनी आँखे दीदी की आँखों में डाल ली तभी दीदी चौंकी और बोली “दीपू अब रास्ता सही है आराम से बैठ” | मेरे उसकी जांघ से हाथ उठाते ही दीदी उपर उठ के अपनी कमीज़ और सलवार सेट करने लगी थी और हम घर के करीब भी पहुँच चुके थे | मेरा सारा मूड खराब हो चुका था | घर पहुँचते ही दीदी अपने कपड़े उठाके टाय्लेट में चली गई और फिर 15-20 मिनिट के बाद कपड़े चेंज करके ही पंजाबी सूट में बाहर निकली | दिखने में वो अब कुछ रिलैक्स लग रही थी |
रात को जैसे ही मैं दीदी के रूम के पास से निकला | मुझे लगा कि दीदी किसी से बात कर रही है | जब मैंने ध्यान लगा कर सुना तो पता चला कि दीदी फ़ोन पर उसी लड़के रोहित से बात कर रही थी | मुझे उस लड़के की बात तो नही सुन रही थी पर दीदी की बात सुन रही थी | 

दीदी : हाँ हाँ रोहित तुझे कहा ना कल दे दूँगी... तुझे अपनी पेंटी | 

फिर दूसरी तरफ से उस लड़के ने कुछ कहा तो दीदी ने उस से कहा यार मैने डाल ली है अपनी वही लाल पेंटी जो सुबह डाली थी और दीदी उससे काफ़ी देर तक फ़ोन पर बातें करती रही | मेरा लंड ये बात सोचकर और भी हार्ड हो रहा था कि कल दीदी उसे अपनी यूज्ड पेंटी देगी और वो लड़का पता नही दीदी की यूज्ड पेंटी के साथ पता नही क्या करेगा | सुबह जब दीदी मम्मी के बुलाने पर नाश्ते के लिए नीचे आई तो मैं बहाना बना कर उपर दीदी के रूम में गया और जल्दी से दीदी का पर्स खोल कर देखा उसमें दीदी की लाल पेंटी पड़ी थी | मैने एक बार उससे निकाला और अपने होंटो से लगा कर अपने लंड पर लगाया और जल्दी से उसे दीदी के पर्स में रख दिया | मैं अब रोज़ दीदी की हर हरकत को नोट करने लगा था,पता नही क्यों?
Reply
01-11-2019, 01:13 PM,
#4
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
दीदी का थोड़ा सा भी नंगा जिस्म देखकर मुझे अब बहुत मज़ा आता था | मुझे बहुत कुछ समझ आने लगा था तब मैंने पूरा होश नही संभाला था | मुझे सेक्स के बारे में कुछ ख़ास नही पता था | लेकिन लंड अक्सर अपने आप खड़ा होना शुरू हो जाता था | दोस्तों के साथ बात करते हमेशा यह जानने की कोशिश करता कि सेक्स कैसे करते हैं | लंड कहाँ डालते हैं लड़की के पीछे वाले छेद में या आगे वाले छेद में उसके बाद जब मुझे मुट्ठ मारने के मज़े का पता चला तो मैं हर वक़्त सेक्स के बारे में ही सोचता रहता था और मुट्ठ मारकर खूब मज़ा लेता था,वक़्त गुज़रता गया , मैं अपनी ही बहन का दीवाना हुआ जा रहा था | वैसे भी बाहर किसी लड़की की चूत देखना आसान नही था | इसलिए मैं घर में ही पूजा दीदी पे ट्राइ करने लगा | पहले पूजा दीदी मेरे सामने ही कपड़े चेंज कर लिया करती थी लेकिन जब से हम रिक्शा पे एक साथ आए थे तब से उसने भी थोड़ा हिचकिचाना शुरू कर दिया था | मेरी कोशिश यह रहती थी कि किसी तरह दीदी का जिस्म देखूं या पेंटी के अंदर झांकु कि चूत कैसी होती है क्योंकि अब तक तो बस मुझे मुट्ठ मारने का पता था | मैंने कभी रियल में चूत नही देखी थी लेकिन अब दीदी भी नोटीस करने लगी थी कि मैं उसे टच करने की कोशिश करता हूँ |

मेरे दिमाग़ में अपनी दीदी को कैसे चोदना है इसकी प्लानिंग होनी शुरू हो गई थी | साली मेरी बहन किसी और से सेक्स का खेल खेल रही थी | मेरे दिमाग़ में यही चल रहा था कि इसको मैं ही चोदुंगा लेकिन कैसे यह उस वक़्त बहुत मुश्किल लग रहा था क्यॉंकि मेरे पास तो कोई टिप्स देने वाला भी नही था कि ऐसे करो या ऐसे ना करो फिर भी हिम्मत नही छोड़ी , रोहित हम दोनो बहन भाई का सीनियर था | उस को मैंने कई बार दूसरी लड़कियों के साथ भी देखा था | मुझे पता था कि वो मेरी बहन की चूत मारना चाहता है बस | लेकिन मेरी बहन को पता नही उस में क्या नज़र आया जितनी सेक्सी और खूबसूरत मेरी दीदी थी मुझे सारे स्कूल में ऐसी लड़की नज़र नही आती थी | सब लड़के उसके पीछे पीछे होते थे, लेकिन रोहित तो है भी कुछ खास नही था शायद उसमें लड़की को पटाने की कला थी | मेरी बहन इतनी सेक्सी थी कि उसने मुझे भी पागल किया हुआ था | सेक्स के मामले मे मैं बहुत गरम था | पता नही एक दिन में कितनी बार दीदी को सोचके मुट्ठ मारता था | बस उसी को दिमाग़ में रखकर वक़्त गुज़रता जा रहा था और मुझे यही डर रहता था कि कहीं मेरी बहन बाहर से किसी से ना चुद जाए | अगर ऐसा होगा, एक तो बदनामी, स्कूल में सब मेरा मज़ाक उड़ाते, दूसरा अगर मेरी बहन पेट से हो जाती तो आख़िर घरवालों को ही उसे सम्भालना पड़ता,तीसरा पता नही दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स करने वाला रोहित, उसके साथ सेक्स सेफ भी था या नही | हो सकता था कोई बीमारी वगेरा भी हो | सुनने में यह भी आता था कि वो ड्रग्स भी लेता है | लड़कियों को पटाने में भी उसका रेकॉर्ड था | मेरे दिमाग़ में जब भी दीदी का रोहित के साथ चूमा चाटी वाला सीन आता तो मुझ से कंट्रोल नही हो पाता और मुझे उसी वक़्त मुट्ठ लगानी पडती थी |

कुछ दिन बाद स्कूल में किसी लड़की ने मुझे बताया कि तुम्हारी दीदी अपने क्लास रूम में रो रही है | मैं वहां गया तो कुछ लडकियाँ उसे चुप करवा रही थी | मैंने जाके उसका चेहरा अपने हाथों मे लेकर पूछा “क्या हुआ दीदी”,उसने मेरी तरफ देखा फिर मुझ से लिपट कर रोने लगी लेकिन कुछ बोली नही | दीदी अपना मुंह मेरी चेस्ट में छुपा रही थी | दीदी को अपनी बाहों में संभाल कर आज मुझे अजीब सी फीलिंग हो रही थी | ‘वाह!! क्या मज़ा आ रहा था मुझे | उसकी दोनो बड़ी बड़ी चूचियां मेरी चेस्ट के सामने पूरी तरह दब चुकी थीं | मेरा दिल धक धक कर रहा था |

मैंने ढीला सा रोने वाला मुंह बनाके बाकी लड़कियों को कहा, “आप लोग साइड पे हो जाओ प्लीज़” | पता नही कब मेरा एक हाथ दीदी की गांड, बट्स के उपर उसकी स्कर्ट पे था | फिर दूसरे लेफ्ट हैण्ड से मैं उसका चेहरा उपर करके पूछने लगा, “बताओ तो सही दीदी हुआ क्या है” | उसकी आँखें झुकी हुई थी | वो मेरी आँखों में आँखें नही डाल रही थी |

कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन | उसका गोरा रंग लाल हो चुका था और एक एक आँसू उसकी गालों पे बहुत मज़े से चल रहा था | इस वक़्त मैं अपनी बहन की पूरी बॉडी और गरम साँसों को बिल्कुल करीब से महसूस कर रहा था | उसकी चुचियां उसकी ASS बट्स, उसका पेट, उसकी कमर, उसके होंठ तो मेरे होंठों के बिल्कुल करीब थे | दिल कर रहा था अभी चूस लूँ, दीदी के रस भरे होंठो को,लेकिन मज़बूर था | मैं इस सेक्सी पूजा दीदी का छोटा भाई था और सबके सामने कुछ भी नही कर सकता था | शुक्र है मैंने व-शेप अंडरवेयर पहन रखा था | उसमे मेरा लंड पूरा टाइट हुआ खड़ा था | अपनी बहन का देहकता बदन फील करके शायद मेरा लंड भी मुझ से कह रहा था कि बहन होगी तेरी, मेरा तो ये चोदने का समान है | वो रोई जा रही थी और मैं अपना मज़ा ले रहा था | कोई कुछ बता भी नही रहा था कि क्या हुआ है | फिर मैंने एक लड़की से पूछा कि आपको पता क्या हुआ | वो बोली पता नही रोहित और ऋतु का कोई चक्कर है | इन दोनो में कोई झगड़ा हुआ है और प्रिन्सिपल सर ने दोनो को वॉर्निंग दी है और कल अपने पेरेंट्स या गार्डियंस को साथ लाने को कहा है |

मैं समझ गया कि क्या झगड़ा हुआ होगा,चलो मेरे लिए अच्छा ही था | अब मुझे अपना रास्ता सॉफ दिखाई देने लगा था | मैं दीदी को चुप तो करवा ही रहा था लेकिन मेरा दिमाग़ बस अपनी सेक्सी बहन को चोदने की प्लानिंग मैं लगा था | दीदी के जिस्म ने अभी जो मेरे अंदर आग लगा दी थी उसको शांत करने का मौका नही मिल रहा था | घर जाते ही मैंने बाथरूम से दीदी की पेंटी उठाई और उसकी स्मेल लेने लगा | धुली हुई पेंटी से भी शायद उसकी चूत की थोड़ी बहुत स्मेल आ रही थी, मेरे अंदर का पानी और भी उबाले मारने लगा, मैंने पहले इमेजिन किया कि पेंटी का कौनसा हिस्सा दीदी की मस्त चिकनी चूत को छूता होगा फिर उस हिस्से पे अपनी जीभ फिराई और फिर उसी हिस्से को अपने लंड पे रखके मुट्ठ मारना शुरू कर दिया | आँखें बंद हो गई | दिमाग़ में वही तस्वीर थी | दीदी का मुझ से लिपटना और दीदी की तनी हुई चुचियों की चुभन मुझे अभी भी फील हो रही थी | उसका देहकता बदन उसके लाल होंठ सोचते सोचते मेरी मुट्ठ मारने की स्पीड तेज होती जा रही थी | अब मेरे दिमाग़ में खाली उसके लाल होंठ फ़्लैश कर गये और एक ख्याल आया कि काश मैं दीदी के होंठों पे अपने लंड का पानी निकालूँ | फिर ऐसा लगा कि जैसे पूजा दीदी के पिंक होंठ मेरे लंड के बिल्कुल सामने मेरे लंड का पानी निकलने की इंतज़ार कर रहे हों | उसी वक़्त मेरे अंदर से गरम मलाई निकली और मैंने अपने लंड को दीदी की पेंटी के अंदर ही मसल दिया | पेंटी के चूत वाले हिस्से से लेकर उपर तक सारी पेंटी मेरे लंड की मलाई से भर गई | मैंने अपने लंड को पेंटी के सूखे हिसे से पोंछके धीरे से पेंटी इस तरीके से वापिस रख दी कि उसमें पड़ा मेरा कम नीचे ना गिरे | अब ऐसा करना यानी दीदी की पेंटी पर अपने लंड का पानी निकालना मेरा रोज़ का काम हो गया था | लेकिन पता नही क्यों दीदी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी | आख़िर वो अपनी पेंटी तो चेक करती ही होगी फिर भी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी | मैं उसकी तरफ से बस एक प्लस पॉइंट का इंतज़ार कर रहा था |
Reply
01-11-2019, 01:13 PM,
#5
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
उस दिन घर आ के पहली बार मैंने दीदी को इतनी कन्फ्यूज़्ड ओर डिप्रेस्ड देखा | आख़िर आज दीदी को मेरी हेल्प की ज़रूरत भी पड़नी ही थी | शाम को दीदी मेरे पास आई और बोली “दीपू अब क्या करें, कल प्रिन्सिपल ने पेरेंट्स को साथ लाने को कहा है” | मैंने कहा, “दीदी मम्मी को ले जाओ” | वो कुछ सोचने लगी फिर बोली “अगर मुझे पता होता कि रोहित ऐसा है तो मैं कभी भी....” फिर कुछ कहती कहती रुक गई | मैंने कहा, “बात क्या हुई थी दीदी”

दीदी : वो सब छोड़, तू एक बात बता तू एक काम करेगा |

मैं : क्या दीदी |

दीदी : कल सुबह तू मेरे साथ प्रिन्सिपल के पास चलेगा |

मैं : ओक दीदी |

दिल को लगा शायद दीदी की हेल्प करके मुझे दीदी को चोदने का कोई रास्ता मिल जाए | उधर हमारे कॉलेज के प्रिन्सिपल का रेकॉर्ड भी कोई अच्छा नही था | वो एक नंबर का ठरकी बुढ़ा था | उसकी बीवी मर चुकी थी ओर एक लड़की थी जिसकी शादी कर चुका था और अभी भी अपनी शादी करने की सोच रहा था | कॉलेज में कोई भी नई मैडम उसकी मर्ज़ी के बिना अपायंट नही होती थी और अपायंट करने की उसकी कुछ अपनी पर्सनल शर्तें होती थी |
नेक्स्ट डे हम दोनो बहन भाई सीधा प्रिन्सिपल के ऑफीस में गये | उसने पूजा दीदी को खड़े रहने को बोला और मुझे चेयर पे बैठने को, मैं बैठ गया और अभी कहने ही लगा था कि “सर हमारे पेरेंट्स” | प्रिन्सिपल ने मेरी बात काट दी और बोले “बाहर कहीं गई होंगे ना ... स्टूडेंट्स अक्सर ऐसे बहाने करते हैं ... देखो बेटा तुम ही बताओ कि रोहित अच्छा लड़का है क्या”

मैं “नो सर” 

प्रिन्सिपल “फिर भी तुम अपनी बहन की हेल्प कर रहे हो.... रोहित की जगह अगर कोई ओर लड़का होता तो शायद मैं यह एक्शन ना लेता .... हम लोग तुम लोगो को ग़लत रास्ते और ग़लत लोगो से बचाने के लिए ही यह सब करते हैं”

मैंने मौका देखके अटैक किया “सर दीदी सारी रात रोती रही है कि पता नही सुबह क्या होगा इसे बहुत टेंशन हो रही है सर”

प्रिन्सिपल “देखो बेटा, हमारा मक़सद सिर्फ़ तुम को समझाना है और कुछ नही, टेंशन वाली कोई बात नही, इधर आओ बेटा मेरे पास” दीदी मेरी चेयर के पीछे खड़ी थी वो प्रिन्सिपल की बड़ी सारी ऑफीस टेबल की लेफ्ट साइड से घूमके प्रिन्सिपल की चेयर के पास जा के खड़ी हो गई | मैं प्रिन्सिपल के सामने बैठा था लेकिन ऑफीस टेबल के उस पार प्रिन्सिपल की चेयर को उपर से ही देख सकता था | प्रिन्सिपल ने दीदी का हाथ पकड़ा और बोला “देखो बेटा रोहित अच्छा लड़का नही है उसकी कंपनी तुम्हारे लिए अच्छी नही है .... अगर तुमको कोई परेशानी या किसी चीज़ की ज़रूरत है तो तुम सीधा मेरे ऑफीस में आ जाया करो”

फिर प्रिन्सिपल ने आज का न्यू पेपर उठाया ओर मेरे सामने रखते हुए कहा, “देखो बेटा आज कल शहर में क्या क्या हो रहा है.... यह न्यूज़ पड़के देखो ज़रा ....” मैंने अपनी आँखें न्यूज़ पेपर पे घुमानी शुरू कर दी इस बीच मेरी हल्की सी नज़र दीदी की तरफ गई | मैंने उसके फेस को देखा वो लाल हो रहा था | दीदी लंबी लंबी सांसें ले रही थी | जिससे उसकी शर्ट से उसकी चुचियां उपर नीचे होते बिल्कुल सॉफ दिखाई दे रहीं थीं | मुझे कुछ समझ ना आया जब मैंने थोड़ी नीचे नज़र डाली तो ऐसा लग रहा था कि दीदी की कमर के नीचे उसकी स्कर्ट में कुछ रैंग रहा है | मुझे समझते देर नही लगी कि वो प्रिन्सिपल सर का हाथ था | वो राईट हैण्ड से अपनी ड्रोज़ में कुछ ढूंड रहे थे और उनका लेफ्ट हॅंड दीदी का रेस्पॉन्स चेक कर रहा था | फिर कुछ देर बाद प्रिन्सिपल सर बोले “दीपक बेटा तुम को क्लास लगानी होगी... तुम अगर जाना चाहो तो जाओ डोंट वरी फ़िक्र की कोई बात नही”
मैं “नही सर मेरा पहला पीरियड फ्री है आज” | मुझे पता चल गया था कि साला मुझे भगाने के चक्कर में है | 
फिर बोला “मैं तुम्हारी दीदी का एक टेस्ट लूँगा ओर इस को एक क्वेस्चन सॉल्व करने के लिए दूँगा अगर यह एक अच्छी स्टूडेंट है और इसने सॉल्व कर दिया तो फिर मैं इसकी वॉर्निंग भी वापिस ले लूँगा.... ठीक है” फिर सिर ने एक पेन और खाली पेपर निकाल के अपनी चेयर के करीब दीदी के सामने रख दिया और मुझे बोले “बेटा तुम सामने सोफे पे बेठ जाओ .... आज टीचर्स मीटिंग है...... टीचर्स भी आते ही होंगे” मैं चेयर से उठा तो प्रिन्सिपल सर ने मुझे न्यूज़ पेपर भी साथ ले जाने को कहा | मैं सामने परे लेफ्ट सोफे पे बैठ गया और न्यूज़ पेपर पढने लगा |

प्रिन्सिपल और दीदी को देखने के लिए मुझे अपने राईट कंधे की तरफ गर्दन घुमाना पड़ना था | अब प्रिन्सिपल सर दीदी को कुछ समझा रहे थे | शायद कोई क्वेस्चन दे रहे थे और बिना मेरी परवाह किये अपने लेफ्ट हैण्ड से अपना दूजा काम भी किए जा रहे थे | दीदी भी उनके और नज़दीक सरक गई थी | मेरी आँखें बेशक न्यूज़ पेपर पे थी लेकिन कान उन दोनों की हरकतों की तरफ ही थे | कुछ देर बाद दीदी, सर की चेयर के करीब ही थोडा झुकी और कुछ लिखने लगी अब दीदी के झुकने से प्रिन्सिपल को अपना काम करने में और भी आसानी हो रही थी | उनका व्यू और भी अच्छा हो गया था | मैंने एक नज़र प्रिन्सिपल की तरफ डाली उनका ध्यान दीदी की गांड की तरफ था | लग रहा था कि वो दीदी की चूतड़ पे हाथ फिरा रहे हैं | मैंने भी नज़र बचा के देखना शुरू कर दिया | मेरा लंड खड़ा हो चुका था | मैंने अपनी पेंट की पॉकेट में हाथ डालके अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया | फिर कुछ देर बाद ज़ोर से टक की आवाज़ आई | साफ पता चल रहा था कि दीदी की पेंटी की एलास्टिक की आवाज़ है लेकिन मैंने नोटीस नही लिया | इससे शायद वो डिस्टर्ब हो जाते | मैं न्यूज़ पेपर पढ़ने का नाटक करता रहा | फिर थोड़ी देर के बाद नज़र घुमाई तो दीदी टेबल पे पेपर पे झुकी कुछ लिख रही थी लेकिन पीछे से उसकी गांड धीरे धीरे हिल रही थी और प्रिन्सिपल सर के दोनों हाथ टेबल के नीचे थे | ऐसा लग रहा था कि वो चेयर पे बैठे एक हाथ से अपने लंड को हिला रहे हैं और दूजा हाथ दीदी की टांगों और गांड पे फिरा रहे हैं | उनकी चेयर पीछे की तरफ सरकी हुई थी, फिर कुछ देर बाद सर ने जानबुझ के अपनी चेयर के सामने जिस जगह उनकी टांगें होती हैं वहाँ पे अपना पेन गिरा दिया और दीदी को बोले “बेटा पेन उठाना ज़रा” | मैं टेडी आँख से सब देख रहा था | दीदी उनकी चेयर के आगे बेठ गई और पेन उठा के उठने लगी तो सर ने पहले मेरी तरफ देखा फिर मुझे न्यूज़ पेपर पढ़ता देख जल्दी से अपने दोनो हाथ दीदी के कन्धों पे रख के उसको उठने नही दिया | फिर दीदी की शर्ट के गले से अपना हाथ अंदर डाल के उनकी चुचियों को दबाना शुरू कर दिया | कुछ ही देर के बाद प्रिन्सिपल की “आह... ऊ.... हुउऊहू...ओ” की हल्की सी आवाज़ आई शायद उनकी पिचकारी छूट गई थी और दीदी झट से उठ के खड़ी हो गई |

दीदी की शर्ट के उपर वाले दोनो बटन खुले थे और उनमें से नज़र आ रहे दीदी के गोरे गोरे मुम्मे बहुत सेक्सी लग रहे थे | दीदी झट से बोली “सर मैं जाऊं अब”
प्रिन्सिपल “हाँ बेटा........ तुम लोग जाओ ..... और हाँ पूजा बेटा अगर तुम्हे कोई भी तकलीफ़ हो तो सिधा मेरे पास चली आना किसी प्रकार की जिझ्क मत करना ठीक है” | हम प्रिन्सिपल के रूम से निकल आये | बाहर आके दीदी मुझ पे भड़क रही थी और बोली ”सर ने कहा था जाने को... फिर भी दफ़ा क्यों नही हुआ .... शुक्र है फिर भी वो मान गये” |
Reply
01-11-2019, 01:14 PM,
#6
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
दीदी की शर्ट के ऊपर वाले 2 बटन अभी भी खुले थे | उनमें से नज़र आ रही गोरी चूचियां मेरी हवस को और हवा दे रही थीं | मेरा ध्यान दीदी के बूब्स पर ही था और मैं ऐसे ही पॉकेट में हाथ डाले लंड को मसलता हुआ दीदी के साथ चल रहा था | फिर कुछ देर बाद मैंने कहा “दीदी अब तो शर्ट के बटन तो बंद कर लो” |
दीदी “तू अपना काम कर ओके, मुझे पता है क्या करना है” | वो मुझ पे भड़क रही थी तो सामने से टीचर आ गया | दीदी के बाहर झाँक रही चुचियों पे उनकी सीधी नज़र गई और वो अपने होंठों को गोल होने से रोक ना सके | मुंह से एक आवाज़ निकली जैसे बहुत तेज मिर्ची खाने के बाद हमारे मुंह से निकलती है “इइसस्स्स्स्सस्स” | दीदी स्माइल के साथ उन्हें “गुड मॉर्निग सर” कह के आगे बढ़ गई | साली मेरी ही किस्मत खराब थी बाकी सब को पूजा दीदी का साथ मिल रहा था बस मैं ही तरस रहा था |

कुछ दिन बाद मैं अपने दोस्तो के साथ फ्री पीरियड में ग्राउंड में जाके बेठ गया | मैंने दूसरी ग्राउंड में नज़र मारी तो वहाँ पहले ही कुछ लोग बैठे थे और कुछ खेल रहे थे | ग्राउंड में एक साइड पे 1 चेयर रखी थी | उस पे टीचर बैठे थे | उनके आस पास कुछ ओर स्टूडेंट्स भी बैठे थे | मैं और मेरे दोस्त उस तरफ चल दिए | उनमें मेरा दोस्त मोहित भी साथ था | हम सब टीचर के पीछे जा के खड़े हो गये | सामने दीदी एक लड़की के साथ बैडमिंटन खेल रही थी | दीदी जैसे जैसे उछल कूद कर रही थी | उसके बूब्स भी वैसे ही अप डाउन हो रहे थे और कभी कभी जब दीदी जंप लगा के हिट करती तो स्कर्ट के नीचे से गोरी लंबी टांगों के ऊपर ब्लैक कलर की पेंटी भी नज़र आ जाती थी | मेरे ख्याल से सब लोग दोनो लड़कियों के सेक्सी जिस्म की उछल कूद का मज़ा ले रहे थे | ना कि गेम का | मेरे दोस्त ओर मैं हम सब भी यह सब देखने लगे |

फिर मोहित बोला “दीपक उसके मुम्मे देख, केसे उछाल रहे हैं”

मैंने कहा, “साले पूजा दीदी है” |

मोहित, “सॉरी यार,एक बात बोलूं , गुस्सा तो नही करेगा”

मैंने कहा, “बोल” | मुझे पता था कि वो क्या बोलने वाला है लेकिन मुझे उसके मुंह से सुनके और भी मज़ा लेना था |

मोहित “यार देख गुस्सा मत होना, लेकिन जो बात सच है वो सच है” |

मैंने कहा “कुछ बोलेगा या नहीं” |

मोहित “देख तुझे खराब लगेगा, लेकिन यार पूजा दीदी बहुत सेक्सी है, कितने लड़के उसके पीछे लगे हैं , तू क्या सोचता है कि यह सब लोग बैडमिंटन की गेम देखने के लिए बैठे हैं , सब पूजा दीदी की टांगें और मुम्मे देखने बैठे हैं, यार जब पूजा दीदी उछल उछल कर शॉट लगाती है तो देख पूजा दीदी के मोटे मोटे मुम्मे कैसे उछल रहे हैं और पूरे स्कूल के लड़कों ने पूजा दीदी का नाम सेक्सी बिच रखा हुआ है” |

यह सब मुझे तो पहले ही पता था | लेकिन उसके मुंह से सुनने में और मज़ा आ रहा था लेकिन एक्टिंग करनी भी ज़रूरी थी क्योंकि आख़िर वो सेक्सी बिच मेरी बड़ी बहन थी | फिर मैंने मोहित को कहा “साले तू ऐसे कैसे बोल रहा वो मेरी बड़ी बहन है” |

मोहित “हाँ यार इसलिए तो तुझे बता रहा हूँ , एक बात और भी है , लेकिन छोड़ , तू सच में गुसा हो जाएगा” |

मैंने कहा “साले इतना कुछ तो पहले ही बोल चुका है, अगर फिर भी कुछ बाकी है तो बोल ले ”

मोहित “देख पूजा तेरी बहन है, मुझे पता है , मेरी भी बहन जैसी ही है , लेकिन वो सच में इतनी सेक्सी है कि मुझे रोज़ उसके नाम पे 1-2 बार मुट्ठ मारनी पडती है” |
मैं “साले क्या बकवास कर रहा तू” |

मोहित “चल छोड़ , कोई और बात कर , मुझे पता था तू गुस्सा करेगा” | कुछ टाइम के बाद हमारे बाकी दोस्त मोहित को बोले “मोहित हम टाय्लेट जा रहे हैं, तुझे भी आना है या अभी और मैच देख के आएगा” यह कह के वो हंसने लगे |

मोहित ने स्माइल करते ना जाने के लिए सर हिला दिया और उनके जाने के बाद मोहित फिर मुझे बोला, “दीपक तुझे पता है यह सब टाय्लेट क्यों गए, सब मुट्ठ मारने गए हैं, सब टाय्लेट में जाकर पूजा दीदी को याद करके मुट्ठ मरेंगे” |

मैं चुप रहा लेकिन मुझे मोहित की हालत भी समझ आ रही थी और खुद की भी | मैं तो पूजा दीदी का सगा भाई होने के बावज़ूद कंट्रोल नहीं कर रहा था | बाकी सब की तो बात ही अलग थी | दीदी को सेक्सी दिखने का बहुत शौक था | उसे शॉर्ट स्कर्ट पहनने का बड़ा शौंक था | उसकी फिगर और लिप्स हॉलीवुड हीरोइन एंजला जोली के जैसे थे | वो अपने आप को कैटरीना कैफ़ के साथ कंपेयर करती थी | उसका 5.7” लंबा गोरा जिस्म, कैटरीना से कम भी नहीं था | जब वो पंजाबी सूट के साथ पटियाला सलवार पहनती तो सभी पीछे मुड़ मुड़ के देखते थे और जब जीन्स और टॉप पहनती तो उसका एक एक अंग तीर की तरह चूभता था | जब कभी वो शॉर्ट स्कर्ट पहनती तो मैं शॉर्ट स्कर्ट में उसके झुक के कोई चीज़ उठाने का इंतज़ार करता रहता | जिस से दीदी की पेंटी नज़र आ सके | 1-2 बार मैंने देखा कि जब उसने जीन्स के साथ कमर के ऊपर तक का स्माल टॉप पहना होता तो उसे देखके मेरी तो हालत खराब होती ही थी मगर मेरी नज़र भी उसकी तरफ बार बार जाती थी | लेकिन लाख कोशिश के बाद भी मुझसे कुछ नही हो पा रहा था | अपनी बहन को चोदने के लिए किसी की अड्वाइज़ भी तो नहीं ले सकता था | जब भी मैं दीदी के बूब्स को या उसके जिस्म के किसी भी हिस्से को सहला के सिड्यूस करने की कोशिश करता तो वो मुझे डांट देती, ”दीपू क्या कर रहा है, दिमाग़ सही है तेरा” | मैं डर जाता और काँपने लगता और कुछ भी ना कर पाता | अब कई बार मैं सोचता हूँ कि जितना एक्सपीरियेन्स लड़की को सिड्यूस करने और चोदने का मुझे अब है अगर तब होता तो बहुत आसानी से दीदी को उसी वक़्त चोद देता शायद जब मैं दीदी को सिड्यूस करने की कोशिश करता था तो उसपे भी असर होता था और वो इस लिए डांट देती थी कि कहीं वो आउट ऑफ कंट्रोल होके अपने छोटे भाई के साथ कुछ कर ना बैठे और मेरी बात बनते बनते बिगड़ जाती थी | अब मुझे लग रहा है कि उस वक़्त की मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी मेरी घबराहट और डर था और कुछ भी नहीं | एक बार मेरे एग्जाम चल रहे थे | मैं और दीदी दोनो एक रूम में सोते थे | बेड अलग अलग थे लेकिन रूम एक ही था | मैं पढ़ रहा था और दीदी सो रही थी | रात काफ़ी हो चुकी थी | पढ़ते पढ़ते मेरी नज़र दीदी के जिस्म की तरफ गई | उसका चेहरा मेरी तरफ था | उसने मेरी तरफ करवट ले रखी थी | उसकी चुचियां और पिंक लिप्स देखके पता नहीं कब मेरा मूड फिर बनना शुरू हो गया | मैं धीरे धीरे पागल हो रहा था | मैं दीदी की तरफ देखता रहा और अपने ट्राउज़र के अंदर हाथ डाल के अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया | मैंने धीरे से बोला, “दीदी....... दीदी” | उसने जवाब नहीं दिया | मुझे लग रहा था कि दीदी जाग रही है और सोने की एक्टिंग कर रही है | मैंने बुक साइड पे रखी और शॉर्ट्स से अपना लंड बाहर निकाल के स्ट्रोक करना शुरू कर दिया | मेरे दिमाग़ में ऐसा था कि दीदी सोने की एक्टिंग करती सब कुछ देख रही है और मैं भी उसे सब कुछ दिखाना चाहता था | 
Reply
01-11-2019, 01:14 PM,
#7
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
मैंने अपना लण्ड हाथ में पकड़ा और दीदी के बेड के नज़दीक चला गया, फिर उसके चेहरे के करीब खड़ा होकर मैंने मूठ मारना शुरू कर दिया। 

एक बार फिर तसल्ली करने के लिये मैंने दीदी को बुलाकर चेक किया-“दीदी, दीदी…” 

वो नहीं बोली, तो मैंने धीरे-धीरे अपने लण्ड की टोपी दीदी के होंठों से छुआ दी। मेरे लण्ड से निकला प्री-वीर्य दीदी के होंठ पे लग गया। 

और उस लूबिकैंट से दीदी के होंठ और मेरे लण्ड में एक ग्लू जैसा, पतले तार जैसा कनेक्शन बन गया। मैं मूठ मारे जा रहा था, दिल चाह रहा था कि उसका नाइट सूट उतारकर अपना लण्ड उसके अंदर कर दूं। लेकिन डरता भी था, कि अगर जाग गई तो पता नहीं क्या हो जायगा? 

मेरा दिल चाह रहा था कि दीदी का टाप उठाकर उसके पेट और चूचियों को किस करूँ, उसकी चूत चाटूं, लेकिन इतनी बहादुरी किधर से लाता? मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे बहुत भूख के टाइम पे मुझे टाप क्लास मिठाई की दुकान में बंद कर दिया हो, लेकिन किसी भी चीज़ को खाने का हुकुम ना हो। मेरे सामने हाट केक पड़ा था लेकिन टच तक नहीं कर सकता था। 

फिर दीदी ने हल्की सी अंगड़ाई के साथ अपना जिश्म सीधा कर लिया और अपने दोनों हाथ पेट पे रख लिए। अब उभरी हुए चूचियां गले की तरफ से आधी नंगी नज़र आ रही थीं, बाकी का टाप चूचियों के नीचे एकट्ठा होने की वजह से गोरी-गोरी नाभि भी सॉफ नज़र आ रही थी। दीदी के ट्राउजर की इलास्टिक के साथ-साथ थोड़ी सी गुलाबी कलर की पैंटी की इलास्टिक भी नज़र आ रही थी। बस अब कंट्रोल करना मुश्किल था, तो मैंने अपनी मूठ मारने की स्पीड तेज और तेज कर दी। 

सामने पड़ा दीदी का गोरा बदन देखकर मेरे लंड से पानी निकलने में ज्यादा टाइम नहीं लगा। मैं दायें हाथ से मूठ मार रहा था और जब मेरा पानी निकलने लगा तो मैंने अपना बायां हाथ आगे करके लण्ड के पानी को दीदी के ऊपर गिरने से रोकने की कोशिश की, लेकिन फिर भी मेरी पिचकारी से 3-4 बूँद दीदी के टाप पे गिर गई। मैं जल्दी से लण्ड पकड़े सीधा अटैच्ड टायलेट में चला गया और वहां पे पहले पेजाब करके फिर लण्ड को सॉफ करने लगा। 

जब फ्लश करने के बाद टायलेट से बाहर निकला तो दीदी आँखें मलती टायलेट के सामने खड़ी स्लीपी आवाज़ में बोली-“दीपू, तुम अभी तक सोये नहीं? सो जाओ अब सुबह कर लेना बाकी…” 

मैं दीदी के टाप पे पड़े अपने वीर्य की 3-4 बूँदों की तरफ देखकर बोला-“बस दीदी, अब हो गया, बाकी कल देखूंगा…”

मेरे बाहर आते ही दीदी टायलेट में चली गई। मैं अपने बेड पे ढेर गया और दिमाग़ में ख्याल आ रहा था, मुझे लग रहा था कि दीदी जाग रही थी, और हो सकता है कि मेरा लण्ड देखकर उसका मूड बन गया हो और वो भी अब फिंगरिंग करने के लिए टायलेट में गई हो। मगर पता कैसे लगाया जाये कि दीदी के दिल में क्या है? वैसे भी अब तक कितनी बार तो कोशिश कर चुका हूँ, उल्टा बातें सुननी पड़ती हैं। 

लेकिन मैं तो अब शांत हो चुका था इसलिये सोचने लगा-“दीदी, अपने आपको पता नहीं क्या समझती हैं? साला जब भी कोशिश करता हूँ, डाँट देती है। अगर दिल है तो चुप रहकर भी तो रेस्पॉन्स दे सकती है? फिर सोचा कि चल छोड़ कोई और लड़की देख ले चोदने के लिये। लेकिन जब भी कोशिश करता था कि किसी दूसरी लड़की से 

बात करके उसको चोदने की प्लानिंग कर लूँ तो मेरा दिल नहीं मानता था। ऐसा लगता था कि मेरी दीदी जैसी सेक्सी और खूबसूरत लड़की और कोई बनी ही नहीं है, दीदी की बड़ी-बड़ी गोल मस्त चूचियां और उभरी हुई गाण्ड हमेशा मेरी आँखों के सामने रहती थी और जो चुदाई का मज़ा अपनी बहन के साथ है वो किसी और के साथ नहीं मिल सकता…” 

फिर एक दिन दीदी अकेली सोफे पे लेटी टीवी देख रही थी, उसने हल्के ब्लैक कलर की पतली और एकदम फिट सलवार कमीज़ पहन रखी थी। उसने दाईं कोहनी पे अपना वजन रखा हुआ था और टांगें भी तकरीबन सोफे के ऊपर ही थीं, उसकी दाईं बाँह और दाईं टांग नीचे वाली साइड और बाईं बाँह और बाईं टांग ऊपर वाली साइड पे थी, उसके दायां हाथ के ऊपर उसका दायां गाल था जिससे उसके सर का वजन बैलेन्स हुआ था। दाईं साइड पे टेढ़ी लेटी होने के कारण दीदी की कमीज़ का कमर से नीचे का हिस्सा बल खाकर उसके पेट पे आ चुका था, जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच वाला हिस्सा भी सॉफ-सॉफ नज़र आ रहा था। पटियाला सलवार में मेरी बहन की टांगें उसके नरी तक नज़र आ रही थीं। 

लेकिन उसका ध्यान तो टीवी की तरफ था। मैं कुछ देर खड़ा अपनी दीदी की सेक्सी बाडी को देखता रहा, मेरी नज़र दीदी के सर से शुरू हुई, दीदी के सिल्की बाल, गोरी लंबी गर्दन, और उसके गोरे जिश्म पे कमीज़ के गले में से बाहर झाँक रही तनी चूचियां, पतली कमर, फिर उभरी हुई गाण्ड और लंबी टांगें, मैं देखकर पागल हो रहा था। लेकिन दीदी को कुछ खबर ही नहीं थी। उसकी चुनरी भी साइड पे पड़ी हुई थी। मैंने सोचा मौका अच्छा है दीदी को गरम करके देखता हूँ। 

मैं सीधा दीदी के सामने खड़ा हो गया तो वो चिल्लाने लगी-“पीछे हट, इधर आकर नहीं बैठ सकता, टीवी के आगे क्यों खड़ा होता है?” 

मैं दीदी वाले सोफे के सेंटर में बैठ गया, मतलब अब दीदी की चूत का हिस्सा मेरी कमर के पीछे था। मैं थोड़ा सा और पीछे को सरक गया। अब दीदी का पेट और चूत की गम़ी मेरी कमर को महसूस हो रही थी। मेरे पीछे दायें साइड पे दीदी की चूचियां और चेहरा था और बाईं साइड पे लंबी टांगें और पैर थे। 

मैंने डरते-डरते अपना बायां हाथ दीदी के घुटने पे रख दिया और दायें हाथ से दीदी से रिमोट माँगने लगा-“दीदी रिमोट देना…” 

दीदी-“चुप करके बैठ। मुझे हकीकत देखने दे पहले, बाद में ले लेना…” 

मुझे कौन सा रिमोट चाहिये था, मैं तो अपना काम करने का बहाना ढूँढ रहा था। मैं तो खुद दीदी के हाथ में इस रिमोट की जगह अपना रिमोट, यानी कि अपना लण्ड पकड़ाना चाहता था। मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ दीदी के घुटने से ऊपर उसकी चिकनी मुलायम जांघों की तरफ सरकाना शुरू कर दिया, क्या मुलायम और गोल-गोल टांगें थी दीदी की, बिना ट्रिम किए भी कोई बाल ना होने के कारण टांगें और भी चिकनी लग रही थीं। मैं हल्की-हल्की मालिश करता हुअ घुटने से अपना बायां हाथ ऊपर जांघ की तरफ ले आया और सोचने लगा कि लगता है कि दीदी को भी मज़ा आ रहा है और प्लानिंग करने लगा कि दायें हाथ से दीदी की चूची को कैसे टच करूँ? 

दीदी की चुप्पी से मुझे लग रहा था कि दीदी भी मज़ा ले रही है। लेकिन मैं डरता भी था, मैंने शॉर्टस और टी-शर्ट पहन रखी थी, शॉर्टस में मेरा लण्ड उठक बैठक करने लगा था। मैं यह सोचकर बेकाबू हुआ जा रहा था
Reply
01-11-2019, 01:14 PM,
#8
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
दीदी अब तक कुछ नहीं बोली, इसका मतलब ग्रीन सिग्नल है और वो गरम हो गई है, और हो सकता है आज बात बन जाये, अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था मेरा दायां हाथ धीरे-धीरे दीदी की चूची की तरफ सरकने लगा और अब दिल कर रहा था कि बायें हाथ को झटके से उठाकर दीदी की चूत पे रखकर मसलना शुरू कर दूं। मैंने दीदी का चेहरा पढ़ने की कोशिश की तो वो पूरे ध्यान से टीवी में मस्त लग रही थी। आज दिमाग़ में आ रहा था कि जो होगा देखा जायगा, आर या पार कर डालना है आज। 

मेरे जिश्म में जैसे 440 वोल्ट का करेंट दौड़ने लगा था, हाथ काँपने लगे थे। मैंने बाये हाथ को सरकाते-सरकाते आख़िरकार हल्के से दीदी की चूत पे रख दिया। कुछ सेकेंड के लिये मेरा सारा जिश्म फ्रीज हो गया, कोई हरकत नहीं हुई। फिर दिल में आया कि साले तू टारगेट पे तो पहुँच चुका है, अब आगे बढ़। मेरा हाथ दीदी की दोनों टांगों के बीच उसकी पटियाला सलवार के ऊपर हल्के से पड़ा था, अब अगला काम चूत को मसाज देना था। मैंने हिम्मत करके टांगों के बीच चूत के ऊपर हल्के से रखे अपने बायें हाथ को दीदी की चूत पे सलवार के ऊपर से ही ग्रिप कर लिया। अगले ही पल दीदी की दोनों टांगें पूरी खुल गईं, मेरा हाथ पूरा चूत पे टांगों के बीच चला गया। 

और फिर उससे अगले पल ही झटके से दीदी उठकर सोफे पे बैठ गई और तड़ातड़ 4-5 थप्पड़ मेरे सर और कानों पे दिए, और बोली-“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यह सब करने की?” 
मेरा रंग पीला पड़ गया होंठ सूखने लगे, मैंने अपने गालों और कानों पे दोनों हाथ रख लिये और मैं-“सारी दीदी, सारी दीदी…” कहकर अपना मुँह छुपाने लगा। 

सनडे की दोपहर होने की वजह से मम्मी अपने रूम में रेस्ट कर रही थीं। 

दीदी जोर-जोर से चिल्लाने लगी-“मैं अभी तुम्हारा इलाज करती हूँ…” 

मैं-“सारी… सारी दीदी, प्लीज़्ज़ धीरे बोलो…” 

दीदी-“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? मम्मी को भी तो पता चले कि तुम्हारी नियत क्या है?” यह कहती हुई वो सोफे पे फिर उसी तरह दायें साइड की तरफ लेटी हुई मम्मी को आवाज़ लगाने लगी। 

तो मैंने झट से दीदी के मुँह पे अपना हाथ रख दिया, तो उसके मुँह से ‘उम्म्म्माआ’ ही निकल सका। फिर मैं दबी हुई आवाज़ में बोला-“दीदी, मैं सारी बोल रहा हूँ, और यह भी कहता हूँ कि दुबारा ऐसा नहीं करूँगा, लेकिन प्लीज़्ज़ अब चुप हो जाओ…” 

वो अपने दोनों हाथों से अपने मुँह से मेरा हाथ उठाने की कोशिश करने लगी। मैंने थोड़ा सा हाथ ढीला किया तो उसके मुँह से फिर जोर से आवाज़ निकलने लगी-“मुंम्म्म…” 
मैंने फिर जोर से दीदी के होंठ पे अपना बायां हाथ दबा दिया। मेरा भी अब दिमाग़ खराब हो गया था, गुस्से से भी और सेक्स से भी। सोफे पे आधी लेटी हुई दीदी की टांगों के नीचे से दायां हाथ डालकर मैंने उसका सारा जिश्म सोफे पे रख दिया और बायें हाथ से दीदी के होंठ दबाये हुए ही मैं दायें हाथ को दीदी की चूत के अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। 

दीदी हैरानी से मुझे देखने लगी, और अपने आपको छुड़ाने के लिये स्ट्रगल करने लगी। मैं उस पे भारी पड़ रहा था, मैंने दायें हाथ से दीदी का सूट ऊपर करके अंदर हाथ डाल दिया, फिर उसकी चूचियों को जा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर चिकने पेट पे हाथ फिराता सलवार को खोलने की कोशिश करने लगा। लेकिन जब नाड़ा नहीं खुला तो ऐसे ही हाथ अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। 

लेकिन दीदी ने नाड़ा कस के बांधा हुआ था और अब उसके हाथ मेरे दायें हाथ को सलवार के अंदर जाने से रोकने की कोशिश करने लगे थे। मैंने काफ़ी कोशिश की लेकिन मेरा हाथ सलवार के अंदर नहीं जा पाया तो मैंने सलवार के ऊपर से ही अपने दायें हाथ से दीदी की चूत को मसलना शुरू कर दिया। उसके दोनों हाथ मेरे दायें हाथ को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसका बस नहीं चल रहा था। वो अपनी टांगों की उछल-कूद करके मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश कर रही थी। 

तभी मैं अपना मुँह अपने बायें हाथ के करीब उसके होंठों के पास ले जाकर बोला-“ठीक है, अब अगर तुमने बताना ही है तो डर किस बात का? अब जो मेरा दिल कहेगा वोही करूँगा, अब यह बताना कि मेरी चुदाई हो गई…” 

दीदी के मुँह से ‘म् म्म्मम’ ही निकल पाया। वो अपने सर को झटके देकर आज़ाद होने की कोशिश कर रही थी, उसकी टांगें ऊपर-नीचे चलती रही। वो अपने आपको आज़ाद करने के लिये पूरा स्ट्रगल कर रही थी, लेकिन उसका बस नहीं चल रहा था। वोही दीपक जो अपनी इस बहन से थर-थर काँपता था, आज उसी बहन पे जबरदस्ती सवार होने जा रहा था। आज मुझे भी और उसे भी यह एहसास हो गया कि मर्द मर्द होता है और औरत औरत। 

करीब 5-10 मिनट तक हम बहन भाई कुश्ती करते रहे और इस 5-10 मिनट में दीदी की चूत को जबरदस्ती अपने हाथ से मसाज करते हुये, मुझे जो मज़ा आया था वो आज तक पहले कभी नहीं मिला था। कभी-कभी दीदी की टांगें अपने आप खुल जाती और वो स्ट्रगल करना बंद कर देती, जैसे थक गई हो, लेकिन यह ज़रूरी नहीं था कि थक गई हो, यह भी हो सकता था कि उसे भी मज़ा आने लगा हो? जब वो ढीली पड़ जाती तो मैं कोशिश करता कि अपनी बिचली उंगली को दीदी की चूत के अंदर घुसेड़ सकूँ। लेकिन बाहर से ऐसा करना मुश्किल था, एक तो दीदी की सलवार और उसके बाद पैंटी, और जब मैं उंगली घुसेड़ने की कोशिश करता तो दीदी फिर अपनी टांगों से मुझे हिट करने की कोशिश करती, और कभी उसके हाथ मेरे बायें हाथ को मुँह से उठाने की कोशिश करते और कभी मेरे दायें हाथ को चूत से उठाने की, कभी-कभी मुझे यह भी लगता कि अब दीदी को मज़ा आ रहा है। 

लेकिन साली फिर भी नाटक पूरा कर रही थी। मेरा लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। कुश्ती करते-करते दीदी का गरम जिश्म महसूस करके मुझे लग रहा था कि पता नहीं कब मेरी पिचकारी निकल जाये… बस थोड़ा जोर जबरदस्ती करते-करते ध्यान बँट जाता था, इसलिये अब तक वीर्य निकलने से बचा हुआ था। अब मैंने अपना हाथ दीदी की चूत से उठा लिया और फिर से उसकी सलवार खोलने की कोशिश करने लगा। लेकिन साली ने मेरा हाथ तक तो अंदर नहीं जाने दिया था तो सलवार का नाड़ा कैसे खोलने देती? 

मैं कोशिश करता रहा, और जब नाड़ा नहीं खुल पाया तो मैं उसके ऊपर चढ़ गया। और मैंने अपने दायें हाथ से दीदी की चूचियां दबानी शुरू कर दी। वो अभी भी अपने हाथों से मेरे हाथों को पकड़कर रोकने की कोशिश कर रही थी। मेरा बाया हाथ एक ही जगह पे दबाने की वजह से वो थोड़ा थक गई, तो मैंने झटके से अपना बायां हाथ दीदी के होंठों से उठाकर उस पे दायां हाथ रख दिया। फिर बायें हाथ को दीदी की कमीज़ के गले से अंदर कर दिया। मेरा हाथ सीधा दीदी की दाईं चूची की निपल पे चला गया। मैंने पहले अपनी पहली उंगली और अंगूठे से दीदी की निपल को थोड़ा मसला, निपल एकदम सख़्त था। फिर अपने हाथ से दीदी की गोल-गोल चूचियां दबाने लगा। 

आज पहली बार मैंने दीदी के अंदरूनी जिश्म को छुआ था। अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था, लगता था कि मेरी पिचकारी निकल जायेगी, लेकिन तभी दीदी ने अपने दोनों हाथों से मेरे मुँह पे थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। लेकिन मुझे उसकी परवाह नहीं थी, मेरे लिये तो अच्छा ही हुआ कि मेरा ध्यान फिर थोड़ा बँट गया और मेरी पिचकारी निकलने से बच गई। 
अब मैंने अपने बायें हाथ को अंदर ही से दूसरी चूची की तरफ घुमा दिया। मैं बड़ी-बड़ी दोनों चूचियां दबा रहा था, एकदम पत्थर के जैसे सख़्त टाइट चूचियां थीं दीदी की, लेकिन स्किन उतनी ही साफ्ट थी। मेरा लण्ड मेरे शॉर्ट में लोहे की रोड जैसा खड़ा था, और मेरा दिल कर रहा था कि किसी तरह जल्दी से इसे दीदी की चूत में डाल दूं। लेकिन दीदी साली नाड़ा तो खोलने नहीं दे रही थी। 

मैंने फिर अपने बायें हाथ से कोशिश किया, लेकिन नाड़ा खोल पाना बहुत मुश्किल था, टाइम बरबाद करना ही लग रहा था। फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया कि नाड़ा तोड़ दूं, तो मैंने वो भी कोशिश कर लिया। लेकिन शायद मेरी किस्मत खराब थी, मेरे कितने ही झटके देने के वाबजूद भी नाड़ा टूटने का नाम नहीं ले रहा था। फिर मैंने ऐसे ही बिना नाड़ा तोड़े और खोले सलवार को नीचे खींचकर उतारने की कोशिश की, तो सलवार थोड़ी सी नीचे सरकी फिर अटक गई। 

सलचार दीदी की मोटी गाण्ड से ऐसे कैसे नीचे आ सकती थी, हो सकता था सलवार नीचे सरक भी जाती, लेकिन एक हाथ से उसे नीचे खींचना मुश्किल था, सारी कोशिश बेकार जा रही थी। फिर मैंने दीदी की कमीज़ उसके पेट से ऊपर उठा दी और उसके गोरे पेट और नाभि पे किस करने लगा। मेरे अंदर का गरम पानी अंतिम सीमा पे था, लग रहा था अब पिचकारी छूटने ही वाली है। 
Reply
01-11-2019, 01:15 PM,
#9
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
तभी दीदी ने फिर से मुझे हिट करने के लिए अपनी बाईं टांग मोड़ करके ऊपर उठाई तो मैंने उसी वक़्त अपनी बाईं बाँह दीदी की टांग के पीछे से घुमा दी। अब दीदी की बाईं टांग मेरे कंधे पे आ गई, फिर मैंने झट से अपना दायां हाथ दीदी के होंठ से उठाकर उस पे अपना बायां हाथ रख दिया और फिर दाईं वाली बाँह को भी दीदी की दाईं वाली टांग के पीछे से घुमाकर दीदी के मुँह की तरफ आगे को झुक गया। अब दीदी की दोनों टांगें मेरे कंधों पे थीं, और एकदम फिट चुदाई का स्टाइल बन चुका था। 
काश कि दीदी की सलवार का नाड़ा खुल या टूट गया होता तो अब मुझे अपना लण्ड दीदी की चूत के अंदर करने में कोई परेशानी नहीं होनी थी। मेरा लण्ड मेरी शॉर्टस के अंदर डंडे जैसा खड़ा था, मैंने अपना शॉर्ट एक हाथ से खींचकर नीचे किया और एक टांग शॉर्ट से बाहर निकाल ली। फिर ऐसे ही सलवार के ऊपर से दीदी की चूत का निशाना लगाकर उसको हिट करना शुरू कर दिया। 

दीदी की दोनों टांगें मेरे कंधों पे थीं और उसका का पूरा जिश्म मेरे सीने के सामने था। मैं कुछ देर ऐसे ही सलवार के ऊपर से दीदी को चोदने और चोदने की एक्टिंग करता रहा। मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मैं दीदी 

को चोद रहा हूँ। लेकिन कोई जायदा नहीं था, ऊपर से मेरे लण्ड का पानी निकलने के बहुत करीब था, मेरी सांस भी फूल गई थी, लेकिन दीदी को सबक सिखाना भी बहुत ज़रूरी था। फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और मैंने एक-एक करके दीदी की दोनों टाँगों को छोड़ दिया, फिर दीदी के पेट के ऊपर बैठ गया। 

मेरा 8” इंच लंबा और 2½” मोटा खड़ा लण्ड देखकर दीदी की आँखें फटने की तरह हो गईं। 

मेरा एक हाथ दीदी के होंठ पे था और दूसरे से मैंने अपने लण्ड को मूठ मारना शुरू कर दिया। मेरा लण्ड पानी छोड़ने के लिए तो पहले ही तैयार था, इसलिये बहुत मुश्किल से 40-50 सेकेंड ही मूठ मार पाया होऊूँगा कि मेरे अंदर से गरम क्रीम की पिचकारी छूटी, जो सीधी दीदी की चूचियों से होती हुई उसके चेहरे की तरफ गई। मेरे लण्ड की सारी क्रीम दीदी की चूचियों के ऊपर कमीज़ पे जाकर गिरी थी और उसमें से 1-2 बूँद दीदी की गर्दन, गालों पे और उसके होंठ पे गिरी थी। 

अब दीदी भी ढीली पड़ चुकी थी और मैं तो बिल्कुल ढीला पड़ गया था। 

मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर बैठा रहा फिर ठंडी सांस ली और उसके ऊपर से उठ गया। फिर मैं अपनी शॉर्टस पहनता हुआ टायलेट की तरफ जाता हुआ बोला-“अब जिसको बताना होगा बता देना, लेकिन यह भी सोच लेना कि मेरे पास भी बताने के लिये बहुत कुछ है, स्कूल से लेकर अब तक की तुम्हारी चोदा-चोदी, और मम्मी को बहाना लगाकर नाइट क्लब जाने तक…” 

दीदी कुछ नहीं बोली, और आँखें फाड़-फाड़कर मेरी तरफ देखती रही। फिर गाल पे लगे वीर्य की बूँद को हाथ से पोंछने लग गई। मैं टायलेट से वापिस आया तो वो सोफे पे बैठी रो रही थी, फिर अपने रूम में चली गई, शायद कपड़े चेंज करने के लिये। 

मेरा दिल अभी भी डर रहा था केज कहीं वो मम्मी को ना बता दे? मैं बैठा सोचता रहा, फिर दिमाग़ में बचने की तरकीब आ गई। मैं मम्मी के रूम में गया और मम्मी को बोला-“मैंने आपसे कोई बात करनी है अकेले में…” और मम्मी से प्रोमिश लिया कि आप दीदी को कुछ नहीं कहोगे और ना ही उससे कुछ पुछोगे । फिर मैंने स्कूल से लेकर एक-एक बात तरीके से मम्मी को बतानी शुरू कर दी। 

मैंने मम्मी को कहा-“मैं आपको टेंशन नहीं देना चाहता था, इसलिए पहले नहीं बताया। लेकिन अब बात बहुत बढ़ रही है…” 

मम्मी सोचने लगी और बोली-“मैं दो महीने के अंदर-अंदर इसकी शादी कर दूंगी…” 

अब मुझे अपनी साइड सेफ नज़र आ रही थी, अगर दीदी कुछ बताती भी तो मम्मी इतनी जल्दी उस पे यकीन नहीं करती। 

दीदी ने उस दिन के बाद मुझसे बात करना बंद कर दिया और मेरे रूम में सोना भी बंद कर दिया, और दीदी मुझसे सीधे मुँह बात नहीं करती थी। तकरीबन दो महीने के बाद पूजा दीदी की मँगनी हो गई, मँगनी के बाद दीदी दिन रात अपने मंगेतर के साथ फ़ोन पे लगी रहती थी, और अब खुलकर अपनी मर्ज़ी करने लगी थी, 

मम्मी और मेरी मर्ज़ी के खिलाफ हर काम करती और फिर मँगनी के दो महीने के अंदर ही दीदी की शादी हो गई। 

उस वक़्त दीदी 21 साल की थी और मैं 20 साल का। दीदी की शादी वाले दिन मैं बस यही सोचता रहा की जीजू के तो मज़े हो गये, जो उन्हें पूजा दीदी जैसा माल मिला। वो तो आज पूरी रात पूजा दीदी को सोने ही नहीं देंगे। पूरी रात पूजा दीदी को नंगी करके अलग-अलग स्टाइल में पूजा दीदी को चोदेंगे। 

मुझे सिर्फ़ इस बात का बहुत दुख हो रहा था कि मेरा पुजा दीदी को चोदने का सपना बस सपना ही बनकर रह गया, लेकिन अब में क्या कर सकता था? क्योंकि अब दीदी की चूत पर जीजू के लण्ड का नाम लिख दिया गया था। मुझे तो दीदी की सुहगरात वाली रात को नींद ही नहीं आ रही थी, बार-बार मेरी आँखों के सामने दीदी की सुहगरात का ही दृश्य सामने आ रहा था की कैसे अब जीजू ने दीदी का ब्लाउज़ उतारा होगा और अब दीदी की जा उतारकर उसके मोटे-मोटे मम्मे दबा रहे होंगे, दीदी के निपल को चूस रहे होंगे, अब जीजू ने दीदी की पैंटी उतारकर नंगी करके दीदी की टांगें खोलकर उसकी चूत चाट रहे होंगे। हाए अब दीदी को अपना लौड़ा चुसवा रहे होंगे। 

कभी ऐसा दृश्य मेरी आँखों के सामने होता की दीदी के ऊपर चढ़कर दीदी को चोद रहे होंगे, कभी दीदी को अपने लण्ड पर बैठाकर, और कभी दीदी को घोड़ी बनाकर चोद रहे होंगे। 

बस यही बातें सोच-सोचकर मेरा लण्ड बैठने का नाम नहीं ले रहा था। दीदी की शादी का दिन मुझसे बहुत मुश्किल से कटा। उसके हाथों में लगी मेहन्दी और सुहाग का जोड़ा किसी भी जवान आदमी को पागल कर सकता था, वो कितनी खूबसूरत और सेक्सी लगती थी। लेकिन वो मुझे करीब आने का मोका भी नहीं देती थी। 

फिर आख़िरकार डोली तक ले जाने के वक़्त मेरी तमन्ना पूरी हो गई। वो मेरे गले मिलकर रो रही थी और मैं अपना मज़ा ले रहा था, और कार में बिठाते वक़्त भी मैंने उसकी चूचियों को दबाने और चूत को छूने का मौका नहीं छोड़ा। शादी के काफ़ी दिन बाद दीदी धीरे-धीरे मुझसे बात करने लगी थी, लेकिन मेरे दिल में दीदी के लिए आज भी वोही फीलिंग्स थीं, जो उसकी शादी से पहले थी, लेकिन एक बात का बहुत दुख भी था कि मैं अपनी बहन को शादी से पहले चोद नहीं पाया, आज भी दीदी घर में आती तो मैं उसके पूरे जिश्म को बहुत ध्यान से देखता तो मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। 

इस बात का उसे भी पता था, शायद मुझे तरसाने के लिये वो और भी सेक्सी बनकर आती थी, और कभी-कभी मेरे सामने ही अपने पति के साथ नोक-झोंक भी करती रहती थी। 
जीजू के साथ मेरे सामने दीदी को इस तरह की हरकतें करते देखकर मुझे मन ही मन दीदी पर बड़ा गुस्सा आता, और मैं दीदी को मन ही मन बहुत गालियां देता की साली अब रोज दिन में 4-5 बार जीजू का लण्ड चूत में लेती होगी, तभी साली कुछ ज्यादा ही गदरा गई है और मुझे अपनी जवानी दिखा-दिखाकर जला रही है। कहते हैं कि ‘अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो वो एक ना एक दिन आपको हासिल हो ही जाती है’ यह मेरा अनुभव भी कहता है। 

शादी के दो साल बाद एक दिन दीदी और जीजू घर में आये, शाम को दीदी बोली-“दीपू अपने जीजू के साथ जाओ, वो कहीं जाने को बोल रहे थे…” 

मुझे दीदी की बात पे गुस्सा आता था फिर भी मैं कार निकालकर जीजू के साथ चला गया। जीजू खुश मिज़ाज आदमी थे, वो दीदी से करीब 5 साल बड़े थे, पहले उनका बिजनेस बाम्बे में था और वो वहीं रहते थे। शादी के बाद वो पंजाब में ही आ गये। उनका रंग गोरा और हाइट 5’9” थी। 

मुझे लग रहा था कि हाइट के हिसाब से उनका लण्ड भी मेरे लण्ड से बड़ा होगा, जिससे वो दीदी को पूरी रात रगड़-रगड़कर चोदकर खुश रखते होंगे। लेकिन पूजा दीदी इन दो सालों में अब तक माँ नहीं बनी थी, इसलिये मैं सोचता था कि शायद जीजू ने पूजा दीदी को अभी तक माँ इसलिए नहीं बनाया होगा की वो अभी दीदी की जवानी का पूरा मज़ा लूटना चाहते होंगे। पूजा दीदी की टाइट चूत जो की बच्चा होने से खुल जाती, उसे एक दो साल तक और मारकर अच्छी तरह पूजा दीदी की जवानी को निचोड़ लेना चाहते थे। पर बात वो नहीं थी बात दरअसल दूसरी थी की पूजा दीदी अब तक माँ क्यों नहीं बनी थी? ये बात मुझे जीजू ने बताई। 

कार को रोड पे चढ़ते ही मैंने जीजू से पूछा-“जीजू कहाँ जाना है?” 

तो वो बोले-“यार जाना कहाँ है, किसी अच्छे से होटेल में चल, जहाँ पे रश ना हो, आराम से बैठकर गप्पें लगा सकें और बातें भी कर सकें…” होटेल में पहुँचकर जीजू ने कॉर्नर वाली टेबल पसंद की, सामने के 1-2 टेबल बबिी थे, बाकी तकरीबन सब टेबल खाली पड़े थे। व्हिस्की भी आ गई और चिकेन भी, हम पीने लगे, मेरे एक लाइट पेग खतम करते-करते जीजू 2-3 डबल पेग गटक जाते। ऐसा लग रहा था जैसे जीजू अपने अंदर व्हिस्की भर रहे हों। लेकिन मैं उनको रोक भी नहीं सकता था, क्योंकि आख़िरकार वो मेरे जीजू थे। मेरे दूसरा ड्रिंक लेने तक उनका पाँचवा ड्रिंक था। जल्दी-जल्दी पीने से जीजू का अब अपने आप पे कंट्रोल नहीं लग रहा था, नशा अब उनके सर चढ़ चुका लगता था। 

उन्होंने बात शुरू की-“दीपक यार, तुमने कोई गर्लफ्रेंड नहीं रखी?” 

मैं-“नहीं जीजू…” 

जीजू-“यार लगता है तू शर्मा रहा है, मुझे अपना जीजू नहीं दोस्त समझ यार, खुलकर बात कर…” 

मैं जीजू से ज्यादा खुलना नहीं चाहता था। मुझे जीजू इतने पसंद नहीं थे क्योंकि आख़िर वो मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज़, यानी मेरी दीदी, मुझसे छीनकर ले गये थे, वो दीदी जिसकी जवानी का मज़ा मैं लेना चाहता था। अब वो पूजा दीदी से मज़ा ले रहे थे। लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि जीजू को कोई टेंशन है जो मेरे साथ शेयर करना चाहते थे। 
मैंने कहा-“नहीं जीजू, ऐसी कोई बात नहीं है…” 

जीजू-“यार, शादी से पहले तो सब करते हैं, शरमाता क्यों है? मैंने भी बहुत रंडीबाजी की है, लेकिन तू कोई भी एक गर्लफ्रेंड रख ले मगर किसी ऐसी वैसी लड़की के पास मत जाना, क्योंकि कभी-कभी बाद में पंगा पड़ जाता है, फिर डॉक्टर के पास घूमते फिरो…” 

फिर थोड़ा रुक के बोले-“यार, मुझे एक सलाह लेनी है तेरी, लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे कहूँ?” 

मैं-“जीजू, अभी तो आप मुझे अपना दोस्त कह रहे थे, और फिर सलाह लेने में क्या है? मैं तो आपका अपना ही हूँ…” 

जीजू के चेहरे पे टेंशन आ गई थी उन्होंने फिर एक लार्ज पेग बनवाया और एक ही बार में सारा अंदर। फिर जीजू बोले-“यार, मुझे तेरी हेल्प की ज़रूरत है…” यह कहते-कहते जीजू का चेहरा उदास सा हो गया और आँखें भारी-भारी सी लग रही थीं। 

मैं-“ओके जीजू, आप बताओ तो सही…” 

जीजू-“यार, मैं अपने घरवालों, अपने माँ बाप, भाई बहनों को कैसे समझाऊ? वो लोग मेरा जीना हराम कर रहे हैं, वो बातों-बातों में ही मुझे जलील करते रहते हैं…” 

मैं-“क्यों, क्या हुआ जीजू, ऐसा क्यों?” 

जीजू-“दीपक, मुझे यह भी नहीं समझ में आ रहा है कि मैं किस पे भरोसा करूँ? दो साल हो गये लेकिन अब सब का मुँह बंद करने के लिए कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा…” 

मैं-“जीजू, बात क्या है, आप बताओ तो सही, मुझे बताओ क्या करना है?” 

जीजू-“हाँ… दीपक, पूजा की बात सही है, तू कर सकता है तुझ पे भरोसा भी किया गया सकता है और तुम किसी को बता भी नहीं सकते…” 

मैं-“बोलो जीजू, क्या करना है?” 

जीजू-“यार काम तो कुछ टेढ़ा है, पता नहीं तू इसे भी करेगा या नहीं?” 

मैं-“जीजू प्रोमिश, आप जो बोलोगे मैं करूँगा, आप टेंशन मत लो, और मुझे बताओ आख़िर बात क्या है?” 

जीजू-“यार, मैंने 14 साल की उमर में ही अयाशी शुरू कर दी थी, बहुत गलत काम किए, नशा, और रंडीबाजी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, इसीलिये मुझे आज यह दिन देखना पड़ रहा है। हमारी शादी को दो साल हो गये लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा, मैं बाप नहीं बन सकता, लेकिन मुझे बच्चा चाहिये तो बस पूजा से ही…” 

मैं-“फिर क्या है जीजू इस में कौन सी बड़ी बात है? आप दोनों किसी डॉक्टर से चेक करवा के ट्रीटमेंट करवा लो, यह तो कामन है आजकल…” 

जीजू-“हम सब कुछ कर चुके हैं यार, डॉक्टर भी कुछ नहीं कर सकते। मैंने दवा भी बहुत खाई, सब कुछ किया, कहाँ-कहाँ नहीं चेक करवाया, लेकिन मुझसे कुछ होता ही नहीं है। मेरा उसके ऊपर रखते ही हो जाता है, यह सब मेरे नशा और रंडीबाजी का नतीजा है। पूजा बिल्कुल सही है, मुझे मान लेना चाहिये कि मेरी मर्दानगी खतम हो गई है…” यह कहते-कहते उनका मुँह रोने जैसा हो गया, और वो अपने बालों को नोंचने लगे। 
Reply
01-11-2019, 01:15 PM,
#10
RE: Incest Kahani जीजा के कहने पर बहन को माँ �...
मैं-“जीजू, आप टेंशन क्यों ले रहे हो? कोई ना कोई हल निकल आएगा, किसी देसी हकीम से चेक करवा लेते हैं…” 

जीजू-“कुछ नहीं हो सकता यार, लेकिन मुझे बच्चा चाहिये कैसे भी, अपने रिश्तेदारों का मुँह बंद करने के लिये मुझे कुछ भी करना पड़ेगा, बस मुझे बच्चा चाहिये…” और यह कहते हुये जीजू ने और व्हिस्की का ऑर्डर कर दिया। इस बार उन्होंने मेरा पेग भी एससट्रा लार्ज बनवाया था। 

मैं कुछ नहीं बोला, लेकिन मेरी आँखें चमकने लगी थीं। अब सारी कहानी समझ आ रही थी, कितने साल के बाद मेरी मुराद पूरी होने वाली थी, मैंने ड्रिंक उठाया और इस बार मैं भी जीजू की तरह एक ही बार में सारा गिलास खाली कर गया। 

जीजू फिर बोले-“कुझे बच्चा चाहिये कैसे भी, लेकिन किस पे भरोसा किया जाये, हमारी यही प्रोबलम है? मैं और पूजा एक साल से ऐसा आदमी ढूँढ रहे हैं, जो पूजा के साथ सेक्स करके हमें बच्चा दे सके और किसी को पता भी ना चले, लेकिन ऐसा कोई आदमी हमारी नज़र में नहीं आया। कल यही सोचते-सोचरे और बातें करते-करते पूजा के मुँह से अचानक तुम्हारा नाम निकल गया। 

तो मैंने झट से पूजा को कहा-“हम दीपक पे 100% भरोसा कर सकते हैं, लेकिन पता नहीं वो माने या ना माने? मैंने कैसे भी करके पूजा को तो मना के अपने साथ कर लिया लेकिन मुझे पता था कि तुम नहीं मनोगे। फिर भी पूजा ने मुझे तुमसे बात करने के लिये फोर्स किया और कहा कि एक बार पूछने में क्या हर्ज है? दीपक तुम हमारी हेल्प कर सकते हो। प्लीज़्ज़… ना मत कहना। मुझे पता है कि तुम दोनों बहन भाई हो लेकिन इसके बिना और कोई रास्ता भी तो नहीं…”


मैं-“जीजू, आपका मतलब कि मैं पूजा दीदी से सेक्स करके पूजा दीदी को माँ बना दूं, और आपको बच्चा दूं?” 

जीजू-“हाँ दीपक, प्लीज़्ज़… हम तुम्हारे अलावा और किसी पे भरोसा नहीं कर सकते, पूजा की फिकर मत करो, उसे मैंने मना लिया है, वो तैयार है तुमसे बच्चा हासिल करने के लिए…” 

मैं-“पूजा दीदी मेरी सगी बहन है, जीजू, आप किसी दोस्त की हेल्प क्यों नहीं लेते?” 

जीजू-“नहीं यार, किसी पे भी भरोसा नहीं किया जा सकता। कल को वोही दोस्त दूसरे दोस्तों को कहेगा कि यह आदमी नामर्द है, इसकी बीवी का मेरे साथ चक्कर है, मुझसे पूरी तरह फँसी हुई है, रोज उसको चोदता हूँ, मेरी रखैल है आदि। और फिर वो कभी भी अपने दोस्तों को भी ला सकता है और फिर वो सब भी तुम्हारी बहन के साथ मस्ती करेंगे, मेरे घर में, मेरे ही बिस्तर पर, वगैरा वगैरा। दीपू, अगर कोई एक-दो आदमी हों तो ठीक है। पर सोचो अगर कल को उसने तुम्हारी दीदी को रंडी बनाकर हर रोज अपने किसी ना किसी दोस्त अपने क्लाइंट के नीचे लिटा दिया, तब क्या होगा? कितनी बदनामी होगी? और ये भी हो सकता ही की वो तुम्हारी दीदी को माँ बनाकर सारी उमर ब्लैकमेल करे, और फिर हमसे बच्चा भी ले जाए। सोचो इस हालत में क्या होगा? और एक दूसरा रास्ता है की मैं तुम्हारी बहन पूजा को किसी दूसरे शहर में ले जाऊूँ और वहां किसी लो क्लास वेटर, ड्राइवर या फिर किसी रिक्शावाले से चुदवाकर बच्चा पैदा करूं। पर पूजा किसी लो क्लास आदमी का बच्चा पैदा नहीं करना चाहती। अगर तू राज़ी नहीं हुआ तो फिर मजबूरन मुझे उसे इस बात के लिए राज़ी करना पड़ेगा की पूजा अब इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं है की उसे किसी लो क्लास आदमी के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करना होगा। वैसे दीपू, ये लो क्लास के मर्द तुम्हारी दीदी जैसी मस्त पटाका माल को चोदने के लिए एकदम तैयार भी हो जाएंगे। अब अगर तुम तैयार नहीं होते तो अब यही एक रास्ता है। और अगर कोई रिलेटिव होगा तो वो ब्लैकमेल भी कर सकता है और मुझे बदनामी से बहुत डर लगता है…” 

अब लार्ज पेग अंदर जाने और पूजा दीदी को चोदने के खयाल से ही मैं हवा में उड़ने लगा था, मैंने टेंशन की एक्टिंग करते हुए एक और लार्ज पेग मारा और जीजू को बोला-“जीजू, अगर किसी को पता चल गया तो?” 


जीजू एकदम उत्तेजित होते हुए बोले-“न, न… नहीं पता चलेगा दीपक, हम तीनों के अंदर ही बात रहेगी, हम लोगों ने प्लान बना रखा है कि हम तीनों कल शिमला चलेंगे, घूमने के लिए, और वहीं पे होटेल में सब होगा…” 

मैं-“जीजू, इस बात की क्या गारन्टी है कि मेरे 1-2 दिन सेक्स करने से दीदी प्रेग्नेंट हो जायेगी?” 

जीजू-“यार वो टेंशन तू मत ले, मुझ पे छोड़ दे सब। मैं तो शिमला तुम लोगों के साथ इसलिए जा रहा हूँ कि तुम लोगों को आपस में सेक्स के लिये खोल सकूँ, उसके बाद मैं पूजा को तुम्हारे पास एक महीने के लिए घर पे छोड़ जाउन्गा, जब तक कि वो पेट से नहीं हो जाती…” 

मैं कुछ सोचने की एक्टिंग करता चुप बैठा रहा। फिर कुछ देर के बाद बोला-“जीजू, पूजा मेरी बहन है, क्या उसके साथ ये सब करना ठीक होगा? अगर किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे?” 

मेरी बात सुनकर जीजू बोले-“दीपू, तेरी सब बातें जानता हूँ की तू कब से पूजा पर लाइन मारता है। पूजा ने मुझे सब बता दिया है की कैसे तूने एक बार उसे पकड़कर सोफे पर लिटा दिया था और फिर उसकी टांगें चौड़ी करके अपने कंधे पर रखकर तू तो उसको उस दिन ही ठोंकने वाला था, वो तो पूजा की किस्मत अच्छी थी कि उस दिन जो तुझसे उसकी सलवार का नाड़ा नहीं टूटा। अगर उस दिन तुझसे पूजा की सलवार का नाड़ा टूट गया होता तो तूने उसी दिन पूजा को नंगी करके अपना ये मोटा लंबा लण्ड उसकी चूत में डालकर उसकी चूत का कबाड़ा कर दिया होता। वो तो ये सब भी बता रही थी की तेरी आँखें हमेशा से उसकी चूचियों और चूतड़ों पर लगी रहती थीं…” 

जीजू की बात सुनकर मैं झेंप गया, मेरे मुँह से कुछ भी नहीं निकल रहा था। फिर में धीरे से बोला-“जीजू, दीदी माँ नहीं बन सकती, कहीं कमी दीदी में तो नहीं?” 

तो जीजू बोले-“अरे यार नहीं, कमी तो तब होगी उसमें जब मैं उसको चोद पाता…” 

जैसे ही जीजू से कहा की वो दीदी को चोद नहीं पाते तो मुझे झटका लगा। तो क्या इसका मतलब दीदी अभी तक कुँवारी ही है? तो मैंने जीजू से कहा-“जीजू, ऐसी क्या बात है? क्या आपका लंबा नहीं?” 

तो वो बोले-“यार, अब मेरा खड़ा ही नहीं होता… और अगर किसी दिन पूजा जबरदस्ती खड़ा भी कर देती है तो साली को जब भी नंगी करता हूँ, तो मेरा लण्ड पानी छोड़ देता है…” 

तो मैं मन ही मन मुश्कुराया और अपने आपसे बोला-“ये साला कंज़र है…” और हम दोनों कुछ देर ऐसे ही चुप बैठे रहे। मेरे दिमाग़ में अब आगे की प्लानिंग आने लगी, जिससे की मैं पूजा जैसे माल को बिना किसी रोक- टोक के जब चाहूँ चोद सकूं। मैं ये बात पक्का कर लेना चाहता था की कहीं जीजू एक बार पूजा दीदी को मुझसे चुदवाकर माँ बनने बाद कहीं पूजा दीदी से मुझे संबंध बनाने ही ना दें और मैं पूजा दीदी को जब भी अपने सामने पाऊूँ और मुझे अपनी जवानी दिखा-दिखाकर चिढ़ाती रहे। क्योंकि जीजू ये जानते थे की मैं पूजा को सेक्स के बाद में उसकी मर्ज़ी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकता था, उसे ब्लैकमेल करके चोद नहीं सकता था, क्योंकि आख़िरकार पूजा मेरी सगी बहन थी और अगर मैं बाद में पूजा को सेक्स के लिए ब्लैकमेल करता और किसी को पता चल जाता तो इसमें मेरी ही बदनामी होती। 

इसलिए थोड़ा चुप रहने के बाद मैंने जीजू से कहा-“जीजू, मान लीजिए की अगर मैंने पूजा दीदी से सेक्स करके उन्हें माँ बना दिया और आप पूजा दीदी को लेकर अपने घर चले जाएंगे। आप तो जानते ही हैं की मेरे जैसा जवान लड़का अगर एक बार पूजा दीदी जैसी हाट लड़की के साथ सेक्स कर लेगा तो क्या उसके बाद वो बिना किसी औरत के रह पाएगा? फिर पता नहीं पूजा दीदी मुझे कभी अपने बदन पर हाथ लगाने देगी या नहीं? हो सकता है की फिर मैं पूजा दीदी के जिश्म को याद कर-करके किसी रंडी के पास जाने लगूं और अपनी लाइफ बर्बाद कर लूं…” 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी sexstories 334 40,943 07-20-2019, 09:05 PM
Last Post: sexstories
Star Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही sexstories 487 199,132 07-16-2019, 11:36 AM
Last Post: sexstories
  Nangi Sex Kahani एक अनोखा बंधन sexstories 101 199,542 07-10-2019, 06:53 PM
Last Post: akp
Lightbulb Sex Hindi Kahani रेशमा - मेरी पड़ोसन sexstories 54 44,800 07-05-2019, 01:24 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna kahani वक्त का तमाशा sexstories 277 93,722 07-03-2019, 04:18 PM
Last Post: sexstories
Star vasna story इंसान या भूखे भेड़िए sexstories 232 70,376 07-01-2019, 03:19 PM
Last Post: sexstories
Thumbs Up Incest Kahani दीवानगी sexstories 40 50,314 06-28-2019, 01:36 PM
Last Post: sexstories
Lightbulb Bhabhi ki Chudai कमीना देवर sexstories 47 64,639 06-28-2019, 01:06 PM
Last Post: sexstories
Star Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली sexstories 65 61,303 06-26-2019, 02:03 PM
Last Post: sexstories
Star Adult Kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा sexstories 45 49,132 06-25-2019, 12:17 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 2 Guest(s)