Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 01:26 PM,
#31
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
दीपिका मॅम के बारे मे मैने अभी तक जो नोट्स बनाए थे ,उसके अनुसार ,वो एक बिंदास और हवस की पुजारीन थी, ये बताना मुश्किल था कि वो आज तक किस-किस के साथ सोई होगी, अपने पूरे मादक जिस्म का उसने अच्छा ख़ासा इस्तेमाल किया था, और रिसेस के बाद होड़ का कंप्यूटर लॅब मे आना शायद उसकी वजह दीपिका मॅम का जिस्म ही होगा, दीपिका मॅम चालाक भी बहुत थी ,वो बखूबी जानती थी कि किस लड़के को कैसे फसाना है, इसीलिए फिज़िक्स लॅब मे उसने बिना जान पहचान के मेरा हाथ नरक के द्वार से टच करा दिया था... मेरी इस स्टोरी मे दीपिका मॅम का किरदार बड़ा अजीब था ,क्यूंकी कभी-कभी उसकी स्माइल मुझे डरा देती थी , ना जाने वो जिस्म की प्यास मे क्या कर बैठे....लेकिन लौंडा मैं भी होशियार था और दीपिका मॅम की तरह दिमाग़ का इस्तेमाल करना मैं भी जानता था....उसके बाद मैं एश के टॉपिक मे आया, दो सिगरेट मैं ऑलरेडी पी चुका था इसलिए और सिगरेट पीने का मन नही कर रहा था,लेकिन मैने फिर भी एक सिगरेट और सुलगाई और एश के बारे मे सोचने लगा......

उस वक़्त पूरे कॉलेज मे शायद एश ही ऐसी थी, जिसके लिए मेरे दिल मे अरुण से भी ज़्यादा फीलिंग्स थी...एश के बारे मे भी मैने कुछ नोट्स बनाए थे, और उसके अनुसार वो एक रिच, स्वीट, इनोसेंट और बहुत जल्द गुस्सा हो जाती थी...एश की तरफ मेरा अट्रॅक्षन इसलिए था क्यूंकी वो सेम टू सेम वैसी लड़की थी,जैसी मैं चाहता था...मुझे आज के मॉडर्न जमाने मे एक मॉडर्न गर्ल फ्रेंड चाहिए थी, जिसके स्टाइलिश हेरस्टाइल हो, जिसके होंठ ऐसे हो कि देखते ही किस करने का मन करे, गाल ऐसे हो कि देखते ही प्यार से छुने का मन करे, आँख ऐसी हो कि उनमे डूब जाने का मन करे, और वो मुझसे लड़े, जैसा कि एश करती थी....क्यूंकी मुझे खूबसूरत लड़कियो से लड़ने मे बहुत मज़ा आता है....

अब जब एश के बारे मे सोचा था तो गौतम का ख़याल आना लाज़िमी था, मेरी तीसरी सिगरेट भी ख़त्म होने कगार मे थी और मैं उखड़े हुए मन से गौतम के बारे मे सोचने लगा,..गौतम भी एश की तरह रहीस था जो उसे देखकर ही लगता था, एश को लेकर शायद वो कन्फ्यूज़ था कि वो उससे प्यार करता है या नही , क्यूंकी हमारा मन एक बच्चे की तरह होता है, जिसे यदि शुरू मे मिठाई का एक टुकड़ा दिखाया जाए तो वो उसे झट से पकड़ लेता है, लेकिन यदि उसी समय मिठाई का बड़ा टुकड़ा उस बच्चे को दिखाया जाए तो वो पहले वाले को छोड़ कर दूसरे वाले टुकड़े को पकड़ लेता है, मैं उस वक़्त स्योर तो नही था लेकिन मेरे हिसाब से गौतम का केस कुछ ऐसा ही था, बचपन मे एश के करीब रहा तो एश से लगाव हो गया लेकिन जब कॉलेज आया तो उसने वही हरकते करनी शुरू कर दी ,जो एक छोटा सा बच्चा करता है....गौतम, एश से प्यार भले ना करता हो,लेकिन वो उसे पसंद ज़रूर करता था, अभी तक मैं सिर्फ़ सीडार को एमटीएल समझता था लेकिन अक्सर ऐसे कयि एमटीएल मिल जाते है, गौतम भी एमटीएल था, वो मेरी तरह बास्केट बॉल का धांसु प्लेयर था और उसकी आज तक बॅक भी नही लगी थी, और मैने उसी समय अंदाज़ा लगा लिया था कि जब कॉलेज की बॅस्केटबॉल टीम बनेगी तो एक बार फिर मेरी और उसकी तकरार होगी, बीसी मुझे हर फील्ड मे टक्कर देने के लिए गौतम तैयार खड़ा था...
"हां बोल अरुण..."मैने कॉल रिसेव की,
अरुण मुझसे पुच्छ रहा था कि मैं इतनी रात तक कहाँ हूँ, मेरे ख़याल से पहले उसने सीडार के पास कॉल किया होगा और फिर मेरे पास....
"यहीं बाहर टहल रहा हूँ..."मैने कहा...
"कहाँ है, मैं भी आता हूँ..."
"तू क्या करेगा..मैं टहलते -टहलते बहुत दूर निकल गया हूँ..."
"अमेरिका पहुच गया क्या , नौटंकी बंद कर और वापस हॉस्टिल की तरफ बढ़..."
"चल ठीक है..."मैने कॉल कट करके मोबाइल जेब मे डाला और हॉस्टिल की तरफ बढ़ चला....
अब टॉपिक अरुण था, अरुण एक पोलीस इनस्पेक्टर का लौंडा था और मेरा बेस्ट फ्रेंड भी,...वो हमेशा यही चाहता कि मैं भी वही करूँ जो वो करता है...रात भर उसके साथ सिगरेट पियू , दारू पीने मे उसका साथ दूं , वो ये भी चाहता था कि मैं एश के बारे मे सोचना छोड़ दूं,क्यूंकी वो लड़कियो पर भरोशा नही करता था, उसका कहना था कि गर्ल्स लाइक आ एटीम मशीन, जिसमे कोई भी कार्ड डालकर अपना काम निकाल सकता है, लड़कियो के लिए उसके दिल मे सिर्फ़ एक अरमान था, वो अधिक से अधिक लड़कियो को करना चाहता था,....
"इधर देख बे कुत्ते..."अंधेरे मे अरुण ने मुझे आवाज़ दी , वो थोड़ी ही दूरी पर था ....
"इतनी रात को क्या चौकीदारी कर रहा है...."जब मैं उसके पास गया तो वो मुझसे बोला"चल एस.पी. के बंग्लॉ मे घूम के आते है..."
"मूर्ख है क्या, पोलीस वाले गान्ड मे डंडा पेलेंगे..."
"आजा, "अरुण ने मेरा हाथ पकड़ कर ज़बरदस्ती मुझे घसीटा....
"वो बोर्ड देख रहा है, एस.पी. के घर के बाहर..."जिसपर एस.पी. का नाम लिखा हुआ था,उसे देखकर अरुण बोला...
"स.एल. डांगी, पोलीस अधीक्षक..."
"एक दिन वहाँ मेरा भी नाम होगा और तू ऐसे ही मेरे घर के बाहर खड़े होकर ,बोर्ड पर लिखा नाम पढ़े...अरुण कुमार, आइपीएस ऑफीसर... "
"आँड मत खा और बता मुझे बुलाया क्यूँ है..."
"फिज़िक्स पढ़ कर बोर हो गया था ,तो सोचा की टाइम पास करूँ..."
"यदि तेरा टाइम पास हो गया हो तो अब वापस चले...."
"एश से तेरी बात कहाँ तक पहुचि..."बीच रास्ते मे उसने पुछा...
"इंतियाल स्टेट मे है..."
"मैं बोल रहा हूँ ,तुझे...छोड़ दे उसको, इन लड़कियो को तू नही जानता...."
"जैसे तेरे पास लड़कियो को बनाने वाली फॅक्टरी हो, जब देखो तब फेक्ता रहता है..."
"देख अरमान,..."अरुण वही रास्ते मे खड़ा हो गया , और बोला"दुनिया मे लाखों लड़कियो का प्यार सिर्फ़ चूत-लंड का होता है, उन लाखों लड़कियो मे से कुछ ही लड़किया ऐसी होती है ,जिनका लव लेफ्ट साइड वाला होता है और एश-गौतम का लव लेफ्ट साइड वाला है..."
"तुझे फोन करके उसने बताया क्या..."वहाँ से आगे बढ़ते हुए मैने कहा....
"तेरा दिमाग़ सटक गया है क्या, या फिर तू अँधा हो रेला है... एसा को कभी देखा है कभी दूसरे लड़के की तरफ देखते हुए या फिर गौतम को किसी लड़की की तरफ देखते हुए,दोनो स्ट्रॉंग बॉन्ड मे बँधे हुए है, उन्हे कोई ब्रेक नही कर सकता...."
"उस बॉन्ड को फतेहाल गरम कर दो, टूट जाएगा और मैं वही करने वाला हूँ...."
"सिंपल लॅंग्वेज मे एक्सप्लेन कर सकता है क्या "
"विभा, किस दिन काम आएगी....उसे स्ट्रॉबेरी बहुत पसंद है, "
"मेरी भी सेट्टिंग जमा ना, उससे..."
"पहले मेरा काम तो निपट जाए..."
जिस दिन मैने ऐसा करने का सोचा था ,शायद उसी दिन मैने खुद को अपनी ज़िंदगी का विलेन बना लिया था, मुझे ऐसा बिल्कुल भी नही करना चाहिए था,किसी हालत मे नही करना चाहिए था...लेकिन मैने किया , दिल और दिमाग़ दोनो से किया...

आख़िर कार वो दिन आ गया जिसका इंतेज़ार हम सभी को था, एलेक्षन आज ही था और मैं आज भी क्लास से बंक मार के सीडार के साथ घूम रहा था, अरुण आज भी मेरे साथ था.....मैने जैसा सोचा था, वैसे ही दो लड़को को सीडार ने खड़ा किया था, हमारा प्लान गौतम और वरुण को समझ तो आया ,लेकिन बहुत देर मे आया....अभी इस वक़्त जहाँ वोटिंग पड़ रही थी, मैं वहाँ सीडार के साथ बैठा हुआ था...हमारी पार्टी के कुछ और लड़के भी वहाँ साथ मे थे...वरुण भी वही साथ मे गौतम के साथ बैठा हुआ था,उनके साथ भी कुछ लड़के थे....अक्सर हम सबकी निगाहे मिल जाती और आँखो ही आँखो मे हम ज्वालामुखी उतर कर सामने वालो को धमकी देते.....वो आख़िरी स्टेज था वोटिंग का और आज सॅटर्डे भी था इसलिए कॉलेज जल्दी ख़त्म हुआ....

कॉलेज ख़त्म होने के बाद एश भी गौतम के पास आई, और उसे अपने साथ घर जाने के लिए कहा....
"कुछ देर रूको, फिर चलते है..."गौतम के जवाब पर एश इधर उधर देखने लगी...उसने मुझे भी देखा,लेकिन मुझसे अपनी नज़रें ऐसी हटा ली ,जैसे की वो मुझे फर्स्ट टाइम देख रही हो...वो आज भी मुझे हर दिन की तरह बहुत प्यारी लगी, उसे देखते ही लेफ्ट साइड धड़का और दिल किया उसे जल्दी से जाकर अपनी बाहो मे समेट लूँ,लेकिन मैने ऐसा कुछ भी नही किया...मैं वही सीडार के साथ अपने पार्टी वाले लोगो के साथ बैठा रहा....वो आज भी हर दिन की तरह सीधे मेरे दिल मे उतर रही थी, वही भूरी आँखे, वही शरीर...अब जैसे मोहब्बत इस सीने को चीर कर निकलने वाली थी....
"उससे बात करने का मन कर रहा है...."मैने अरुण से कहा...
"चुप साले, लफडा करेगा क्या..."
"कुछ जुगाड़ जमा ना भाई..."
"कोई जुगाड़ नही है, यदि तूने ऐसी हरकत की तो पहले गौतम तुझे मारेगा और उसके बाद मैं तुझे जान से मार दूँगा...."
जब कुछ जुगाड़ नही हुआ तो मैने अपना मोबाइल निकाला और उस दिन कॅंटीन मे एश को तीन-टीन लॅंग्वेज मे बोले गये आइ लव यू ,के वीडियो को देखने लगा....
एश जब तक वहाँ रही मैं उसे देखता रहा, कभी छुप-छुप के ,तो कभी डाइरेक्ट्ली....लेकिन हर वक़्त निगाह उसी पर टिकी रही और फिर.....वो चली गयी, गौतम के साथ...उसने जाते वक़्त भी एक बार पलट कर नही देखा.....उसकी दुनिया जैसे घर से निकलकर गौतम मे ख़त्म हो जाती थी उसे बाकियो से कोई मतलब नही था की बाकी क्या कर रहे है, क्या नही कर रहे है....उसे शायद इसकी भी परवाह नही थी कि मैने उसे एक हफ्ते तक क्यूँ परेशान किया....
"बीसी , किस्मत ही खराब है..."एश और गौतम के जाने के बाद मैने सामने वाली टेबल पर ज़ोर से अपना हाथ दे मारा....
"तोड़ दे, टेबल को...लवडे पैसा भरना फिर..."
और उसके बाद मैने सच मे वो टेबल तोड़ दिया, वहाँ मौजूद सभी लोग चौक गये, सीडार और बाकी सीनियर्स वहाँ से जा चुके थे, बस हम कुछ ही लड़के वहाँ बैठे थे....जब मैं गुस्से से टेबल तोड़ रहा था तो कयि लड़को ने अरुण से ये भी पुछा कि मैं ऐसा क्यूँ कर रहा हूँ, तो अरुण ने उन्हे जवाब दिया कि मैं एलेक्षन जीतने की खुशी मे टेबल तोड़ रहा है.......
"बस हो गया या कुछ और करने का विचार है..."मैं जब शांत हुआ तो अरुण ने मुझसे पुछा"सिगरेट पिएगा..."जवाब मे मैने सिर्फ़ अपना हाथ उसकी तरफ किया.....
एलेक्षन ख़त्म हुआ तो सोचा कि थोड़ी बहुत पढ़ाई-लिखाई अब हो जाएगी,लेकिन तभी फ्रेशर पार्टी सर पर आ गयी, सब उसके फंक्शन की तैयारियो मे जुड़ गये...हमारे यहाँ फ्रेशर पार्टी ब्रांच वाइज़ होती थी,एक बार मैं होती थी और एक बार हॉस्टिल के सीनियर्स अलग से पार्टी देते थे....लेकिन मज़ा तो मैं वाली पार्टी मे ही आता था क्यूंकी वहाँ हमारे कॉलेज की आइटम लोग भी रहती थी और रात भर नाच-गाने का प्रोग्राम चलता था, हर बार फ्रेशर पार्टी ब्रांच वाइज़ होती थी,लेकिन इस बार नही हुई थी...इस बार सब ब्रांच वालो का एक साथ फंक्षन था....ये सोच बिल्कुल ही बेकार था, ये बात अलग है कि उस वक़्त वो मुझे पसंद आया क्यूंकी सब एक साथ रहेंगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा...

उस दिन सनडे था, अरुण सुबह से ही रूम से गायब था, उसका खास दोस्त होने के नाते जब वो सुबह जा रहा था तो मुझे पुछना चाहिए था कि वो कहाँ जा रहा है,लेकिन मैने नही पुछा, और दोपहर को जब मैं चादर तान के गहरी नींद मे था तो मेरे रूम का दरवाज़ा बहुत ज़ोर से किसी ने पीटा...
"अबे, आ रहा हूँ..."बोलकर मैं फिर सो गया और कुछ देर बाद फिर दरवाज़ा किसी ने ज़ोर से पीटा...
"क्या है, जा बाद मे आना..."बोलकर मैं फिर सो गया और दरवाज़ा पर एक बार फिर ज़ोर से दस्तक हुई....
"अबे मैं हूँ,अरुण...."
"बाद मे आना, अभी मूठ मार रहा हूँ....बस निकलने ही वाला है..."
"जल्दी खोल दे यार, वरना लंबे से पेला जाउन्ग..."और उसने एक बार फिर दरवाज़ा ज़ोर से पीटा...
"रुक आ रहा हूँ..."अरुण को गालियाँ देते हुए मैने बिस्तर छोड़ा और रूम का गेट खोला.."क्या है, क्यूँ इतना तूफान मचा रक्खा है..."
"फस गये बे..."अंदर आते ही अरुण ने दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर कंबल ओढ़ कर बोला"अभी कोई टीचर आए तो बोल देना कि...सर इसकी तबीयत दो दिन से खराब है..."
"कौन सर आ रहे है.."गेट खोलते हुए मैने कहा"और तेरी इतनी क्यूँ फट रही है..."
"गर्ल्स हॉस्टिल घुसे थे, तो कुछ लड़कियो ने देखकर शोर मचा दिया और अब उनकी हॉस्टिल वॉर्डन यहाँ आ रही है....."
"निकल रूम से.."अरुण का कंबल दूर करते हुए मैने कहा"तेरे चक्कर मे मैं भी जाउन्गा...."
"संभाल ले यार,फिर एक खुशख़बरी दूँगा..."और उसने फिर से कंबल तान ली...
गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन उन दो तीन लड़कियो के साथ हॉस्टिल मे आई,जिन्होने शोर मचाया था कि कुछ लड़के उनके हॉस्टिल मे है....मुझे उस वक़्त कुछ नही सूझा, सो कर उठा था इसलिए दिमाग़ को रन करने मे अभी थोड़ा टाइम लग रहा था...लेकिन फिर भी मैने कुछ किया...मेरे पास जो एक कंबल पड़ी थी उसको भी अरुण के उपर डाल दिया और उसे काँपने के लिए बोल दिया....और अपनी रुमाल को पानी से भिगो कर उसके सर पर रखा और गेट खोल दिया...
"ये कौन सोया हुआ है..."गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन हमारे हॉस्टिल के वॉर्डन के साथ अंदर आई,और जिन दो लड़कियो ने अरुण और इसके दोस्तो को देखा था वो दोनो बाहर ही खड़ी रही....
"सर, ये मेरा दोस्त है...बेचारा बहुत बीमार है दो दिनो से..."मैने अरुण के सर से रुमाल हटाकर भिगोया और वापस उसके सर पर रखते हुए कहा"दो दिन से ये उठा भी नही है..."
"तो इसके घरवालो को इनफॉर्म किया..."
"वो रेलवे स्टेशन मे है, बस कुछ देर मे ही आ जाएँगे..."
"यू नालयक, ये बीमार है और तुम मुझे आज बता रहे हो"और फिर गर्ल'स हॉस्टिल की वॉर्डन की तरफ देखकर हमारे वॉर्डन ने वहाँ से चलने के लिए कहा....
उन सबके जाने के बाद मैने गेट बंद किया , अरुण पसीने से भीगा हुआ था...
"अब बता ये सब क्या चूतियापा है..."मैने पुछा...
"भू किसी लड़की को आइ लव यू ,बोलने गया था..तो मैं भी उसके साथ हो लिया..."
"तेरी गान्ड मे क्या खुजली थी, जो तू भी चला गया..उस चूतिए के साथ..."
"घंटा का चूतिया...वो तेरी तरह फटू नही है...वो बिंदास उस लौंडिया को आइ लव यू ,बोल के आया है और उसने कहा है कि यदि वो लड़की सेट हो जाएगी तो वो मुझे भी उसकी चूत दिलाएगा..."
"अबे चोदु, बाहर अपने प्यार का इज़हार करते तो क्या होता, उसी ने अपने हॉस्टिल वॉर्डन को बताया होगा कि कुछ लड़के उनके हॉस्टिल मे घुस आए है..."
"अबे कुछ लड़कियो ने देख लिया था, उन्होने शोर मचा दिया..."
"चल ये बता..."टॉपिक चेंज करते हुए मैने सिगरेट की पॅकेट उठाई और धुआ अरुण के मूह पर फेक्ता हुआ बोला"यही खुशख़बरी तू सुनाने वाला था क्या मुझे..."
"अरे हां, मैं तो भूल ही गया..."उसने मेरे कंधे पर अपना हाथ रक्खा और ज़ोर से मेरा गर्दन दबाते हुए बोला"हम न्सुई एलेक्षन जीत गये...."
"बीसी, गर्दन छोड़..मारेगा क्या..."
"चल आज दारू पिलाएगा..."
" सिगरेट...दारू मैं नही पीता..."
" रुक जा ,जब सीडार प्रेसीडेंट बनने की खुशी मे पार्टी देगा,तब तेरे आगे से भी और पीछे से भी दारू भरेगा...और तूने अपना मोबाइल क्यूँ ऑफ किया हुआ है, सीडार ने मुझे कॉल किया था और उसी वक़्त मैं और भू गर्ल'स हॉस्टिल मे थे और सीडार के उसी कॉल की वजह से हम पकड़े गये...यदि टेक्निकली देखा जाए, तो उसकी वजह तू है"

"यदि टेक्निकली देखा जाए तो उस खड़ूस वॉर्डन से तुझे बचाया भी मैने ही है..."जब अरुण ने गर्दन से अपना हाथ नही हटाया तो मैने उसे बिस्तर पर धक्का देते हुए कहा"ये बता गौतम ,2न्ड एअर से जीता या हारा...."

"जीत गया बीसी,...उनकी पार्टी सिर्फ़ सेकेंड एअर से जीती है और फर्स्ट एअर मे तो तू एकतरफ़ा जीता है,आज तक कोई इतने वोट्स से नही जीता...."
" अभी तू देख, मैं इस कॉलेज का नक्शा ही बदल दूँगा....वैसे थॅंक्स "मैने फिर एक कश खींचा और बोला"फ्रेशर पार्टी कब है..."
"कौन सी वाली, हॉस्टिल वाली या फिर..."
"वही,जिसमे टीचर्स, लड़किया,सिटी वाले भी शामिल रहते है..." अरुण को बीच मे रोक कर मैने कहा...
"तू उस पार्टी मे जाने के अरमान छोड़ दे,...सीडार जाने नही देगा..."
"क्यूँ..."मैं चौक गया था,जब उसने कहा की सीडार मुझे पार्टी मे जाने नही देगा....
" हॉस्टिल वाले कभी ,उस पार्टी मे नही जाते...स्पेशली वो जो सीडार के करीब रहते है..."
"क्यूँ,.."मैं फिर चौक गया, क्यूंकी ये सब तो मुझे मालूम ही नही था....
"फ्रेशर पार्टी का सारा मॅनेज्मेंट सिटी वाले देखते है और अपनी होशियारी छोड़ते रहते है...हॉस्टिल वाले ना तो कलेक्षन मे पैसे देते है और ना ही उस पार्टी मे जाते है...."

"ये तो ग़लत है यार ! "मैं इस बार भी चौका,लेकिन थोड़ा कम....."ये तो बिल्कुल ग़लत है यार, ऐसे मे तो लफडा और बढ़ता है...."
"देख अरमान , मैने कहीं पढ़ा था कि एक अकेला इंसान समुंदर के तूफान मे कश्ती नही चला सकता,..."
"मैं दा रॉं हूँ , खुद को तो समुंदर के तूफान से निकाल ही सकता हूँ...."हँसते हुए मैने कहा...
"मतलब की तू उस पार्टी मे जाएगा..."
"मैं नही, सीडार खुद भेजेगा उस पार्टी मे मुझे और तुझे भी....और कोई है..."
"भू को ले लेते है...लेकिन तू ये करेगा कैसे...सीडार कोई दूध पीता बच्चा नही है"
"यदि सीडार कोई दूध पीता बच्चा नही है तो मैं भी कोई दूध पीता बच्चा नही हूँ, आइ आम अरमान, एक यांत्रिकी अभियंता(मेकॅनिकल इंजिनियर )"
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08-18-2019, 01:26 PM,
#32
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
" हां, उसने बिल्कुल ऐसा ही बोला..."मैं ताव से बोला"उसे हमारी पॉवेर दिखानी ही होगी, हॉस्टिल की पॉवेर दिखानी होगी.."और फिर थोड़ा रुक कर मैने तेज आवाज़ मे कहा"उसे आपकी पॉवेर दिखानी होगी, एमटीएल भाई..."
"कितने लड़को को लेकर जा रहा है..."
"वैसे तो मैं अकेले ही चला जाता, लेकिन फिर भी दो लड़के है साथ मे..."
"और यदि मैं सही हूँ,तो वो दो लड़के वही है...जो आज सुबह गर्ल्स हॉस्टिल मे घुसे थे,राइट..."
"आपको कैसे पता "मैने शॉक्ड होते हुए कहा, तो सीडार ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रक्खा और बोला"और कितने झूठ बोलेगा...सीधे-सीधे क्यूँ नही बोलता कि तेरा मन वेलकम पार्टी मे जाने का है..."
"ये भी पता है "
अभी मैं और सीडार सीनियर हॉस्टिल के बाहर कुर्सियो पर बैठे थे, और जैसा कि अक्सर होता था शाम ढलते ही आस-पास का महॉल ठंडी हवाओं से भर कर एक अजीब सा सुकून देता था, ऐसा सुकून,जो सिर्फ़ वही मिल सकता था....सीडार अपनी जगह से खड़ा हो गया...
"तू ये सोच रहा होगा कि, ये खबर मुझे तेरे खास दोस्त अरुण या फिर हमेशा सबकी न्यूज़ रखने वाले भू ने दी है....."
"नही..बिल्कुल नही, अरुण कभी नही बताएगा और वैसे भी हॉस्टिल मे हम तीनो के अलावा और भी कयि लोग रहते है,जिनमे से वो मोटा वॉर्डन भी है...."

सीडार कुछ देर तक मुझे ही देखता रहा,वो कुछ बताना चाहता था...कुछ कहना चाहता था,लेकिन अभी वो इस कशमकश मे था कि ,वो मुझे ये बताए या जाने दे...सीडार बहुत देर तक मुझे देखते रहा,जैसे वो मुझे पढ़ने की कोशिश कर रहा हो,अब वो बेचैन हो उठा और सिगरेट का एक कश लेकर उसे वही फेक दिया....अब मेरी नज़र सीडार से हटकर आधी ख़त्म हुई सिगरेट पर थी,जो तेज हवा के बहाव मे इधर-उधर दोलती हुई सुलग रही थी....वाहा सिगरेट के आलवा कुछ और भी ऐसा था जो सुलग रहा था....

"सुन, किसी को बताएगा तो नही..."वापस चेयर पर बैठ कर सीडार बोला"जब मैं फर्स्ट एअर मे था ,तब मैं बिल्कुल तेरी तरह था...मैं भी यहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ पढ़ने आया था...लेकिन फिर जैसा तेरे साथ हुआ...वैसा मेरे साथ भी हुआ था, मैं अपने लक्ष्य से भटक गया, और इसकी वजह थी एक लड़की...."

मेरा फील्ड भले ही अलग हो,लेकिन इतना तो मैं जानता था कि यदि कोई स्टोरी, कोई दास्तान ,या कोई हादसा,या फिर कोई ऐसा शक्स जो हमारी ज़िंदगी से रिलेटेड रहता है, उसमे अपने आप इंटेरेस्ट आने लगता है...मेरा भी इंटेरेस्ट बढ़ने लगा और मैने भी आधी जली हुई सिगरेट को एक कश मारकर वही फेक दिया.....
"एक लड़की..."मैं बोला...
"हां, फर्स्ट एअर मे मैं भी,उसके लिए पागल था....कयि बार कोशिश की उसे दिल की बात बताने की, और एक दिन जब मैने हिम्मत करके उससे अपनी मोहब्बत का इज़हार किया तो पता चला कि वो तो किसी और से सेट है...."

"फिर आपने क्या किया..."अब तो कसम से मुझे सीडार की इस स्टोरी मे इंटेरेस्ट आ गया था,मैं बोला"क्या वो लड़की...अब भी कॉलेज मे है..."
"गर्ल फ्रेंड-बाय्फ्रेंड तो आजकल हर हफ्ते बदलते रहते है,इसमे कोई बड़ी बात नही थी....लेकिन उसके कुछ दिनो के बाद ही पूरे कॉलेज मे ये न्यूज़ फैल गयी कि उन दोनो के बीच.....तू समझ सकता है मैं क्या कहना चाहता हूँ, "

"मतलब कि, सारी दूरिया ख़त्म...जो काम शादी के बाद होता है,वो पहले ही हो गया...है ना.."मैने पुछा...

"हां बिल्कुल..."सीडार के चेहरे पर उदासी बढ़ती जा रही थी,जिसे दूर करने के लिए उसने एक सिगरेट और सुलगाई और बोला"वो जानती थी कि मैं उससे प्यार करता हूँ ,इसलिए वो मुझे और जलाती थी...वो मुझे जब भी देखती तो अपने बाय्फ्रेंड से ऐसे चिपक जाती,जैसे बीसी दोनो को फ्विक्विक से जोड़ दिया गया हो....यदि मैं ग़लती से कभी कभार कॉलेज के गार्डेन मे चले जाता और हमारी मुलाक़ात हो जाती तो फिर वो सिर्फ़ मेरा कलेजा जलाने के लिए अपने बाय्फ्रेंड को मेरे सामने किस करने लगती..."

"नाम बताओ,साली का अभी छोड़ के आता हूँ..."मैं गुस्से से बोला और ये गुस्सा दिल से निकला था....

"इसके बाद भी बहुत कुछ हुआ, दोस्त...उस लड़की ने अपने बाय्फ्रेंड को जो की फाइनल एअर मे था,उसे बता दिया कि मैने उसे प्रपोज़ किया था और उसके बाद उसका बाय्फ्रेंड अपने दोस्तो के साथ मिलकर मुझे हर दिन टॉर्चर करते...कभी रिसेस मे तो कभी क्लास मे आकर सबके सामने....जिस लड़की को मैने प्रपोज़ किया था ,वो मेरे ही क्लास की थी...इसलिए शायद उसी के कहने पर उसका वो फाइनल एअर का बाय्फ्रेंड क्लास मे आकर मेरी बेज़्ज़ती करता...और एक दिन हद हो गयी, उन्ही के किसी दोस्त मे से जो कि मुझसे एक साल सीनियर था...उसने मुझे बुरी तरह पीटा, कयि घंटो तक पीटा, और फिर धमकी दी कि यदि मैने किसी को बताया तो वो हॉस्टिल मे घुसकर मुझे मारेगा और हॉस्टिल मे ही मुझे मेरे रूम के पंखे से लटका देगा....."

"फिर..."माँ कसम मुझे उस वक़्त बहुत गुस्सा आ रहा था, यदि वो लड़का जिसने सीडार के साथ ये सब किया था ,वो अभी मिल जाता तो मैं उसे पंखे से लटका देता....

"वही उसने ग़लती कर दी..."सीडार की बेचैनी अब थोड़ी कम हुई ,वो बोला"जिस वक़्त उसने कहा था कि वो मुझे हॉस्टिल मे आके मारेगा...उसी वक़्त मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया सूझा...और दूसरे दिन जब वो कॉलेज के बाइक स्टॅंड पर बैठा था तो मैने उसे उसके पूरे खानदान की गाली दी...और एक धांसु डाइलॉग भी मारा..."सीडार अब मुस्कुराते हुए बोला, शायद अब उसके अंदर की कड़वाहट हट रही थी...
"कौन सा डाइलॉग..."
"मैने कहा कि....यदि एक बार लंड फेक कर मारूँगा तो तेरा पूरा खानदान चुद जाएगा...."
"आगे की स्टोरी मैं,समझ गया...उसके बाद वो अपने कुछ दोस्तो के साथ हॉस्टिल मे घुसा होगा और आप सबने उन सबकी अच्छि-ख़ासी धुलाई की होगी..."
"ये तो सही है,लेकिन उसकी रियल पेलाइ तब हुई, जब मैं सेकेंड एअर मे था...न्सुई का एलेक्षन जीतने के बाद मैने उसे और उसके दोस्तो को उसी ग्राउंड पर ले गया जहाँ,उसने मुझे मारा था और उसके बाद सेम टू सेम वैसा ही हुआ...जैसा कि तूने वरुण के साथ किया था...और तू यकीन नही मानेगा उस दिन तूने डाइलॉग भी वही मारा था जो मैने आज से दो साल पहले मारा था...आप फिज़िक्स के खिलाफ नही जा सकते...ये हमारा तकिया कलाम था..."
"उसके बाद..."
"उसके बाद हम ने शराब की एक एक बोतल उनके लिए मंगाई और हर एक की आधी बोतल खुद पीकर आधे मे और फिर जबरन उन सबको पिलाया...."
"रियली,...पहले क्यूँ नही बताया,वरना वरुण के साथ भी मैं वही करता...."
"अब मेरी छोड़ और अपनी बता, वो लड़की तुझे पसंद है ना...क्या नाम है उसका,...वो खुराना की लौंडिया..."
"एश..."मैने बुरी शकल बनाते हुए कहा"डॉन'ट कॉल हर लौंडिया ,एमटीएल भाई..."
"ओके, नही बोलूँगा....और सुन बिंदास जा...सिटी वाले कुछ नही करेंगे..."
"एलेक्षन जीत गया ,इसलिए क्या..."
"वो तुझे कुछ नही करेंगे वो इसलिए नही कि तू एलेक्षन जीत गया है..."जब मैं जाने के लिए खड़ा हुआ तो एमटीएल ने मेरे कंधे पर हाथ रक्खा और मेरे साथ चलने लगा
"फिर किसलिए वो मुझे कुछ नही करेंगे..."
"वो इसलिए क्यूंकी पार्टी कंट्री क्लब मे हो रही है, और सीसी का रास्ता ,हमारे हॉस्टिल के सामने से जाता है...लेकिन यदि फिर भी यदि उन्होने तुम तीनो मे से किसी को छुआ भी तो जस्ट आ मिस कॉल....फिर देखना उनका क्या हाल करूँगा..."
"मतलब,मैं बेफिकर जाउ..."
"अभी फ़ारसी मे समझाया क्या..."
"थॅंक्स एमटीएल भाई...."वहाँ से अपने हॉस्टिल की तरफ बढ़ते हुए अचानक ही मुझे कुछ याद आया, जो मैं भूल गया था...मैने पीछे पलट कर देखा तो सीडार भी अपने हॉस्टिल की तरफ बढ़ रहा था...
"एमटीएल ,भाई..."थोड़ी तेज आवाज़ मे मैने कहा"बुरा ना मानो तो,कुछ पुच्छ सकता हूँ क्या..."
"क्या..."
"जिस लड़की को आप पसंद करते थे, उसके बाय्फ्रेंड का क्या नाम था..."
"वरुण वेर्मा....."सीडार ने मुझे जोरदार झटका देते हुए एक झटके मे आन्सर दिया और वापस हॉस्टिल की तरफ बढ़ चला.....
"वरुण वो लड़का था, तो फिर उसकी गर्ल फ्रेंड जिस पर सीडार का दिल आया था...वो थी विभा..........

कितना अच्छा लगता है,जब कोई खोई हुई चीज़ वापस मिल जाती है तो....एक अजीब सी खुशी ने मेरे दिल को उस वक़्त घेर रक्खा था...क्यूंकी आज मेरा खास दोस्त अरुण मेरे दूसरे खास दोस्त वरुण के साथ था, और वो दोनो मेरे साथ थे....अपने फ्लॅट की बाल्कनी मे खड़े होकर,मैं बाहर होती बारिश को निहार रहा था और ना चाहते हुए भी मेरे आँखो के सामने वो नज़ारा आ रहा था जब मैं 8थ सेमेस्टर मे था और उसी की वजह से मुझसे कभी नाराज़ ना होने वाला मेरा दोस्त मुझसे इस कदर खफा हुआ कि उसने मुझसे बात तक नही की थी...और आज कॉलेज ख़त्म होने के 6 महीने बाद वो वापस मेरे पास आ गया था, उसने शायद अपने दिल को समझा लिया था कि जो कुछ भी 8थ सेमेस्टर मे हुआ था ,उसकी वजह मैं नही था, बाहर होती बारिश को मैं बाल्कनी से निहार ही रहा था कि मेरा मोबाइल बज उठा, आज दूसरा दिन था जब मैं काम पर नही गया था, इसलिए मैने सोचा कि कॉल इंडस्ट्री वालो की होगी.....जब मैने कॉल पिक अप नही की तो मोबाइल खुद ब खुद बजना बंद हो गया, और मैं फिर से बाहर होती बारिश को देखने लगा....अरुण और वरुण इस वक़्त शराब के चपेट मे आकर बिस्तर पर पड़े थे,..
"ये साले मेरे बगैर काम नही कर सकते क्या..."जब मोबाइल मे रिंग फिर से शुरू हुई तो खुन्नस मे मैने कहा, ये जानते हुए भी कि मेरी इस आवाज़ को सुनने वाला वहाँ कोई नही है....मैने दूसरी बार भी मोबाइल नही उठाया , मैने देखा तक नही की कॉल किसकी है, लेकिन जब तीसरी बार कॉल आई तो मैने स्क्रीन पर नंबर देखा...
"निशा...."मैं थोड़ा हैरान था कि निशा ने कैसे कॉल कर दी,क्यूंकी कल रात ही उसने हमारे सेक्स रीलेशन को ख़त्म कर दिया था....मैने कॉल उठाया"हेलो,..."
"क्या कर रहे हो, खाना खाया..."
"हां,..."घड़ी मे टाइम देखते हुए मैने कहा"शाम को चार बजे, दोपहर का खाना खिलाने का इरादा है या अड्वान्स मे रात का..."
"आक्च्युयली ,मुझे कुछ अजीब सा फील हो रहा है..."बोलते हुए वो रुक गयी और थोड़ी देर तक वो चुप ही रही...
"निशा...हेलो.."
"हां.."
"क्या बोल रही थी..."
"तुम्हे थोड़ा अजीब लगेगा ,लेकिन कल तुम्हारे जाने के बाद मैं तुम्हे ही याद कर रही थी..."
"व्हाई ? "
"आइ डॉन'ट नो...लेकिन कुछ अच्छा नही लग रहा आज..."
"व्हाई ? "मैने फिर इतना ही कहा...
"तुमसे मिलने का दिल कर रहा है, तुम्हे देखने का दिल कर रहा है...तुम्हे किस करने का दिल कर रहा है...."
मैं इस इंतेज़ार मे कुछ नही बोला कि वो अब लास्ट मे बोलेगी कि"तुमसे चुदने का दिल कर रहा है..."लेकिन वो चुप हो गयी,वो आगे कुछ नही बोली...
"आर यू ओके !!"
"नो, कुछ भी ओके नही है, आइ'म फीलिंग वेरी बॅड, कॅन यू कम हियर.."
"व्हाई ? "मैं इस बार बुरी तरह चौका,..क्यूंकी मुझे यकीन नही हो रहा था हर दो दिन मे नये लंड की तालश करने वाली निशा को आज क्या हो गया है....
"मम्मी-पापा आ गये क्या "
"वो कल आएँगे...इसीलिए तो तुम्हे बुला रही हूँ, अभी आ सकते हो क्या, आइ नीड टू टॉक...मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा, "
"अभी...इस वक़्त..."बाहर तेज होती बारिश को देखकर मैने कहा"रात को मिलते है..."
"नो..नो...प्लीज़ अरमान ,अभी आओ,.."
"अभी, भीग जाउन्गा, बीमार हो जाउन्गा..."
"मैं कुछ नही जानती, तुम आओ बस"
"बाहर बारिश हो रही है और मेरे पास छाता भी नही है..."मैने टालते हुए कहा,क्यूंकी मेरा बिल्कुल भी मन नही था....
"भूलो मत कि तुम्हारे जिस्म के प्यास को मैने दूर किया था..."वो आवाज़ तेज करती हुए बोली"मैने कहा ना आओ..."

यदि आज से पहले यही बात निशा ने कहा होता तो मैं बिल्कुल जाता, खुशी से जाता...लेकिन आज मेरा मन बिल्कुल भी नही था...मैं जैसे अब ज़िंदगी मे आगे बढ़ना चाहता था, निशा से दूर जाना चाहता था...
"सॉरी निशा...मैं तुम्हारा गुलाम नही हूँ और अपनी आवाज़ की फ्रीक्वेन्सी कम करो..."
बहुत दिनो बाद मेरी आवाज़ मे इंजिनियरिंग की झलक दिखी थी,
"व्हाट सॉरी"
"पका मत यार, बाइ..."कहते हुए मैं कॉल कट की और अंदर आकर मोबाइल बिस्तर पर फेका और बिस्तर पर बैठ गया, और सोचने लगा कि ये सब क्यूँ और कैसे हुआ...मुझमे इतनी हिम्मत कैसे आ गयी आज....ये हिम्मत तो कयि दिनो पहले दम तोड़ चुकी थी....जैसा कि मुझे उम्मीद थी निशा ने फिर कॉल की ,लेकिन मैने अबकी बार मोबाइल ही स्विच ऑफ कर दिया..
"अब लगा साली फोन,..."
"क्या हुआ बे..."वरुण उठकर बिस्तर पर बैठ गया और अपनी आँखे मलते हुए टाइम पुछा और मुझे बोला कि मैं उसे आगे की स्टोरी बताऊ...
"एक-एक पेग और मार लेते है देन..."
"एक पेग मेरे लिए भी..."नींद मे ही अपना हाथ उपर उठाते हुए अरुण बोला......
.
सीडार से उस दिन मिलने के पहले मैं एश और अपनी लव स्टोरी को 1+1 ईक्वल टू 2 वेल क्वेस्चन की तरह बेहद ईज़ी समझ रहा था, लेकिन जबसे ये पता चला था कि सीडार किसी जमाने मे विभा से प्यार करता था ,तब यही 1+1=2 वाला क्वेस्चन बहुत हार्ड हो गया था,...क्यूंकी इसमे विभा शामिल थी, और मेरे प्लान के मुताबिक मैं विभा को किसी मोहरे की तरह इस्तेमाल करने वाला था, जिससे विभा की आँखो मे आँसू भी आ सकते थे और यदि विभा की आँखो मे आँसू देखकर सीडार का बरसो पुराना प्यार जाग गया तो फिर मेरी खटिया खड़ी हो जाती, उपर से गौतम भी मुझसे बदला लेता...और उसके साथ वरुण भी होता....एक पल तो ख़याल आया कि मैं ये सब छोड़ कर दूसरा प्लान सोचु, लेकिन दूसरा प्लान था ही नही...फिर मुझे सीडार की हालत दिखी कि वो कैसे विभा को वरुण के साथ वो सब कुछ करते हुए देखता होगा, कितना सहा होगा....जब उसके सामने आकर कोई बोलता होगा कि वरुण ने विभा को चोदा तो उसे कैसा फील होता होगा....मैं इस डर मे था कि कहीं यही सब कुछ मेरे साथ भी ना हो जाए, कहीं कल कोई मुझे ये न्यूज़ ना दे कि गौतम ने एश को........
"माँ चुदाये दुनियादारी,..."मैं अंदर ही अंदर बिलख पड़ा, मैं ये चाहता था कि सीडार मेरे रास्ते मे ना आए और वही दूसरी तरफ ये भी चाहता था कि विभा मेरे काम आए, घंटो सोचा, कॉपी पर एश,अरमान,गौतम,विभा,सीडार लिखकर कयि डाइयग्रॅम और प्लान भी बनाया...लेकिन कुछ भी नया आइडिया नही आया....

"जो होगा देखा जाएगा, फिलहाल तो वेलकम पार्टी का प्लान बनाया जाए..."जिस काग़ज़ मे मैने लिखा पढ़ी की थी उसे फाड़ते हुए अरुण को आवाज़ दी"कहाँ है बे, जल्दी चल...वरना देर हो जाएगी..."
.
एकदम तैयार होकर,सूट बूट और पर्फ्यूम मारकर हम तीनो कंट्री क्लब मे पहुचे , कंट्री क्लब के ग्रीन ग्राउंड मे स्टेज बनाया गया था और उसके नीचे बैठने का बंदोबस्त किया गया था,लगभग सभी वहाँ आ चुके थे, और जब हम तीनो ने वहाँ एंट्री मारी तो...वो नज़ारा देखने लायक था...सिटी वाले सीनियर्स का फेस मुझे देखते ही लाल हो गया, सिटी वाले सारे सीनियर्स को देखकर थोड़ा डर तो लगा लेकिन फिर सीडार की कही हुई बात याद आई तो मैने डर को अपने अंदर से निकाल फेका और आगे उस तरफ बढ़ा...जहाँ मेरे क्लास वाले बैठे थे....
"अबे तुम लोग "नवीन ने हमे देखकर अपनी आँखे फाडी,..
"मूह बंद कर वरना कोई मूत के चला जाएगा..."वही उसके बगल मे बैठ कर मैने कहा....
हमारे वहाँ आने से सीनियर्स के बीच डिस्कशन शुरू हो गया था, वरुण ने मुझे देखा ,घूरा और फिर वहाँ से चला गया...मुझे उस दिन अहसास हुआ कि मैं कितना फेमस हूँ कॉलेज मे
"एश आई है क्या..."नवीन से मैने पुछा...
"आई तो थी, एकदम कर्री माल लग रही थी आज तो..."
"चुप कर वरना ,यही चोदुन्गा...ये बता वो है क्या..."
"वो देख..."इधर उधर कुछ देर तक अपनी नज़रें घुमाने के बाद नवीन ने कहा"वो देख ,सबसे आगे...दोनो हाथ मे हाथ डाल कर बैठे है..."


.
मैं वहाँ अपनी जगह पर बैठ कर उस मॉडर्न लड़की को निहार रहा था ,जो मुझे बहुत क्यूट,स्वीट लगती थी...इतनी क्यूट कि दुनिया का कूटेस्ट वर्ड भी उसकी क्यूटनेस को बयान ना कर पाए, जिसकी मुस्कान ऐसी थी कि जिसे देखकर मैं उसकी हँसी को अपने अंदर फील करने लगता था और मेरी वो फीलिंग ,उसकी हँसी की पहचान करा देती थी......

मैं वही अपनी जगह पर अपने दोस्त नवीन के बगल मे बैठकर उस एंजल को निहार रहा था जिसके लिए लिए मेरे पास शब्द नही थे, मैं उससे उस वक़्त सिर्फ़ लड़ना झगड़ना चाहता था,क्यूंकी यही वो एक ज़रिया था...जिससे हम दोनो...हम दोनो नही सिर्फ़ मैं उसके करीब आता था...

मैं वही अपनी जगह पर अपने सबसे खास दोस्त अरुण के बगल मे बैठकर उस लड़की को निहार रहा था, जो अभी किसी बात पर हंस रही थी,उसे हस्ते हुए देखकर ,दिल कर रहा था कि मैं बस वहाँ से उठकर सीधे उसके पास चला जाउ और दुनिया भर मे जितनी भाषा होती है ,उन तमाम भाषाओ मे अपने अरमानो को उस खूबसूरत मॉडर्न अप्सरा के सामने ज़ाहिर कर दूं....

लेकिन उस वक़्त मैं रुक गया,मैं अपनी जगह से हिला तक नही और अपने अरमानो को लेफ्ट साइड मे समेटे हुए वही बैठ कर उसे सिर्फ़ देखता रहा...मैं उसे निहार रहा था जिसे मेरी बिल्कुल भी परवाह नही थी, जिसे कोई फरक नही पड़ता कि मैं कौन हूँ, क्या हूँ और किसलिए उससे लड़ता फिरता हूँ, उसे परवाह है तो सिर्फ़ खुद की, खुद के प्यार की, खुद के अरमान की....उसके अरमान के सामने इस अरमान के अरमान कोई मायने नही रखते...कहीं ये मेरा वन साइड लव ,मेरे लेफ्ट साइड को इस कदर ना बर्बाद कर दे कि बड़ी सी बड़ी बर्बादी समुंदर मे एक बूँद पानी जैसी लगे....वो वहाँ बैठी हुई अपने सपनो के अरमान गौतम के साथ हंस रही थी और मैं वहाँ अपने खास दोस्त नवीन, भू और अरुण के साथ पीछे बैठ कर उसे निहार रहा रहा था...सिर्फ़ और सिर्फ़ निहार रहा था.....

"मैं अभी आया..."अपने तीनो दोस्तो से बोलकर मैं वहाँ से उठा, और उस रास्ते पर चलने लगा...जो एश की तरफ की जाता था...
Reply
08-18-2019, 01:27 PM,
#33
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मालूम नही उस तक पहुचने मे कितना वक़्त लगा, लेकिन ऐसा लगा जैसे सादिया बीत गयी हो, जैसे जैसे मैं उसकी तरफ बढ़ता एक अजीब से धुन मेरे कानो मे पड़ रही थी, उसकी आवाज़ मेरे कानो मे पड़ रही थी...मैं जहाँ तक पहुचा था,वही खड़ा हो गया और अपनी आँखे बंद करके अपने दोनो हाथ फैला लिए....आसमान का चाँद अब अपनी पूरी रंगत मे आ चुका था, जैसे वो भी ये नज़ारा देखने के लिए कब से राह तक रहा था...मैने जैसी ही अपनी आँख खोली ,वहाँ आस-पास कोई नही था...मैं चौक गया ये देखकर कि सब लोग कहाँ चले गये, वहाँ सच मे इस वक़्त कोई नही था, या फिर वो सभी मुझे दिख नही रहे थे...मैं पीछे मुड़ा तो देखा कि अरुण वहाँ अकेला बैठा हुआ मुझे जल्दी से एश की तरफ जाने के लिए कह रहा था, मैने फिर सामने देखा...वहाँ भी कोई नही था, सिर्फ़ एक लड़की सफेद कपड़ो मे किसी एंजल की तरह सज कर बैठी हुई थी...फिर अचानक उसने अपनी नज़रें पीछे मेरी तरफ की और मुझे देखकर मुस्कुरा दी...उसे मुस्कुराता हुआ देख कर मैने एक बार फिर अपनी आँखे बंद की और अपने दोनो हाथ फैला दिए...कुछ देर बाद ही किसी ने मुझे आहिस्ते से अपने बाँहो मे समेट लिया....मैं जानता था कि वो कौन है,...
"एश...ईईईईईई..."
"ओये ,कहाँ खो गया बे..."किसी ने बुरी तरह मेरे बाँये हाथ को झड़कते हुए बोला....
"आनन्नह...."
"ये क्या आनंह कर रहा है, नींद लग गयी थी क्या..."अरुण ने पुचछा...
कुछ वक़्त तो मैं शांत रहकर ये समझने की कोशिश करने लगा कि ,आख़िर हो क्या रहा है, सभी वहाँ आस-पास बैठे हुए वेलकम पार्टी का मज़ा ले रहे थे....
"झपकी लग गयी थी यार..."मैने कहा...
"ये कैसी झपकी है बे, दोनो हाथ फैला कर..."
"चल छोड़ ना..."अरुण को टोकते हुए मैने कहा"वो डॅन्स प्रोग्राम कब होगा...."
"नेक्स्ट वही है...उसका तो नेम अनाउन्स हो गया..."
"क्या , एश के साथ कौन है..."
"गौतम..."
" एश के साथ मैं क्यूँ नही हूँ ,इतनी सुंदर अप्सरा ,मुझ जैसे हॅंडसम के साथ ही सूट करेगी, उस गौतम के साथ नही..."

"देख मेरा दिमाग़ मत खिसका..."अरुण आगे भी बहुत कुछ बकता, शायद गालियाँ भी देता ,लेकिन नवीन ने अरुण को रुकने के लिए कहा और मुझे समझाते हुए कहा...

"जो आंकरिंग कर रहा है, उसी ने ग्रूप डॅन्स के लिए कपल बनाए है और आंकरिंग करने वाला सिटी का है...तो तू खुद सोच सकता है कि बेनेफिट तो उसके दोस्तो को ही मिलेगा ना...उसके जिन जिन दोस्तो का दिल जिस लड़की पर आया होगा ,उसने उनका नाम ले लिया...."

"इसका मतलब हॉस्टिल वाले वेलकम पार्टी मे पार्टिसिपेट नही करते..."

"हॉस्टिल वाला तू है या मैं...??? ये तो तुझे मुझसे बेहतर मालूम होगा..."

मैं चुप हो गया,क्यूंकी इसके आलवा मैं कर भी क्या सकता था...मेरे पास कोई सूपर पॉवेर तो थी नही कि मैं वही खड़ा होकर अपनी दिलेरी दिखाता.....धीरे-धीरे सभी लड़के अपनी-अपनी डॅन्स पार्ट्नर का हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले गये...मुझे सब से कोई लेना देना नही था, मैं तो एश को देख रहा था...अब मैं एक बार फिर उसे निहार रहा था, मैने देखा की गौतम , एश का हाथ पकड़ कर सामने ले गया, और थोड़ी देर बाद म्यूज़िक शुरू हो गया....

"क्या घंटा नाच रहे है, ये लोग...साले सब लड़के देहाती लग रहे है..."खुन्नस मे मैं बोला"यदि डॅन्स करना नही आता तो मुझसे सीख लेते..."

"अभी आगे -आगे देखो अरमान मिया, कैसे मज़ा आता है..."ये बोलकर नवीन चुप हो गया...अरुण इस वक़्त सीटी मारने मे तुला हुआ था...उस साले को ज़रा भी परवाह नही थी कि मुझपर उस वक़्त क्या बीत रही थी....

"कैसे मज़ा आएगा, ये देहाती आगे भी ऐसे ही डॅन्स करेंगे"

5 कपल्स इस वक़्त सामने थे...एश ,गौतम के साथ थी और वरुण फर्स्ट एअर की किसी लड़की के साथ मज़े लूट रहा था...जहाँ जहाँ वो पाँचो कपल खड़े थे , उनके ठीक उपर एक लाइट लगी हुई थी, जो म्यूज़िक के साथ ओं होती और हर एक कपल के चारो तरफ लाइट का एक घेरा बना देती...हर 5 मिनट. बाद उस लाइट का दायरा कम होता जाता, यानी कि हर 5 मिनट. बाद एश और गौतम करीब आते जाते...उधर लाइट जली और इधर मेरा दिल जला, अरुण अब भी लगातार, नोन-स्टॉप सीटी मारे पड़ा था.....

"अबे अरमान, सामने देख...भारी मज़ा आ रहा है...वो देख वरुण ने फर्स्ट एअर वाली आइटम को गोद मे उठा लिया...."

"चल वापस हॉस्टिल...."

"क्यूँ "

मैं जवाब मे कुछ नही बोला, देर ही सही लेकिन अरुण को आख़िर कार समझ मे आ ही गया कि मैं उदास क्यूँ हूँ...वो बोला"चल आजा एम.डी. मारके आते है..."

"ये क्या है..."

"डी+ए+आर+यू...."

"डी+ए+आर+यू....मतलब दारू...?"मैने पुछा...

"यस..."

मैने फ़ौरन अरुण को इनकार किया और सामने देखने लगा, जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था दिल की जलन बढ़ती जा रही थी, फिर अचानक ही ख़याल आया कि यदि दिल जलाना ही है तो क्यूँ ना दारू पीकर जलाया जाए...

"कड़वा तो नही लगेगा..."

" नही बे, एकदम मज़ा आएगा..."

"उल्टी हो गयी तो..."

"अपुन है ना..."

"यदि ज़्यादा चढ़ गयी तो ...."

"अपुन तेरे को हॉस्टिल तक छोड़ेगा..."

मैं कुछ देर के लिए फिर चुप हो गया और सोचने लगा कि अरुण के साथ जाउ या ना जाउ.....तभी मेरे कानो मे वो आवाज़ गूँजी...

"दारू, सिगरेट इन सबको छुआ भी तो सोच लेना...."

वैसे अभी तक मैने सिगरेट पीकर मेरे बड़े भाई की इस नसीहत को सिर्फ़ आधा ही तोड़ा था,
और अब मैं ये सोच रहा था कि इसे पूरा तोड़ दूं या फिर आधा बचे रहने दूं.....
"एक बार पी लेते है, अगली बार से नो..."मैने सोचा, और अरुण को हां कर दी....

"तो चल, आते है..."कहते हुए हमने नवीन से उसके बाइक की चाभी ली और भू के साथ वहाँ से निकल गये....जब तक शराब की दुकान नही आ गयी मैं बाइक मे पीछे बैठा हुआ यही सोचता रहा कि दारू पीने के बाद मेरा क्या हाल होगा, मैं होश मे रहूँगा या फिर बेहोश हो जाउन्गा,....अरुण ने बाइक शराब दुकान के सामने रोकी और भू बाइक से उतारकर दुकान की तरफ बढ़ा....

"अबे अरुण, थोड़ा डर लग रहा है..."भू जब दुकान की तरफ गया तो मैने अरुण से कहा...

"डर मत बे, "

"कहीं मैने एश के साथ कुछ उल्टा सीधा किया तो..."

"कोशिश भी मत करना...वरना सिटी वाले भककम पेलेंगे, बाद मे भले हॉस्टिल के पास वो मार खा जाए..."

भू हाथ मे एक बड़ी सी बोतल लेकर आया और बोला"लवडा बोतल छुते ही नशा चढ़ गया, आयईी साला चल घुमा गाड़ी उस बनिये के दुकान की तरफ...."

एक दुकान से हमने एक-एक लीटर की दो पानी की बोतल ली और उसके बाद हॉस्टिल वाली रोड की तरफ बढ़ चले...बाय्स हॉस्टिल के आगे और गर्ल्स हॉस्टिल के थोड़ा पीछे एक रास्ता था, जो जंगल की तरफ जाता था....अरुण ने बाइक वही घुमाई और सड़क पर जहाँ रोड लाइट जल रही थी वहाँ रोक दिया....रात को उस रास्ते से कोई गुज़रे ये कभी कभार ही होता था और रात के 11 बजे तो ये और भी नामुमकिन था.....मैं ये जानता था कि इस वक़्त उधर से कोई नही आएगा-जाएगा...लेकिन फिर भी मैने भू और अरुण से कहा....
"किसी ने देख लिया तो...."

"रात को तो इधर लौन्डे लोग तो माल चोदने तक नही आते...."

"वो क्यूँ...."

"भूत का लफडा है इधर...."

"तब तो उसे भी दारू पिलाना पड़ेगा..."हँसते हुए मैने कहा....

अरुण ने पहले हाथ से बोतल की ढक्कन खोलने की कोशिश की,लेकिन जब कयि बार ट्राइ मारने के बाद भी बोतल नही खुली तो वो बोतल की ढक्कन को दाँत से खोलने की कोशिश करने लगा....और इधर भू चिप्स की पॅकेट खोलकर खाए पड़ा था.....

"सच मे इधर भूत का लफडा है अरमान...."बोतल की ढक्कन खोलने के बाद वो बोला"कहते है कि हमारे कॉलेज की एक लड़की ने इधर ही सुसाइड किया था...."

"और वो आज हमारे साथ दारू पिएगी तो उसे मुक्ति मिल जाएगी, राइट "

अरुण ने भू को पानी की बोतल लाने के लिए कहा और जब भू बाइक से पानी की बोतल ले आया तो एक बोतल मुझे पकड़ा कर अरुण बोला, "आधा पानी पी जा.."मैने वैसा ही किया...शुरू मे सोचा कि शायद ऐसा करने से कम नशा चढ़ता हो,...लेकिन बाद मे जब अरुण ने शराब ,उस आधी खाली बोतल मे मिलाई तब समझ आया कि वो तो पानी की बोतल मे शराब डालने का जुगाड़ जमा रहा था.....पानी की दोनो बोतल मे आधा आधा शराब भरकर हिलाते हुए मुझे एक नीम के पेड़ की तरफ इशारा किया, जो अब सूखने की कगार पर था...
"वो पेड़, दिख रहा है..."

"यो..."

"वही उस लड़की ने फाँसी लगाई थी...."

"किस लड़के ने, और ये टॉपिक बंद कर..."

"ऐज युवर विश...."अरुण तो शांत हो गया लेकिन फिर भू ने चिप्स का एक टुकड़ा अपने मूह मे डालकर चबाते हुए बोला....
"यहाँ काम करने वाले स्टाफ कहते है कि , कभी कभी रात मे वो लड़की जिसने अपनी जान दी थी...बुक के साथ उसी पेड़ के नीचे पढ़ते हुए दिखाई देती है...."

"अच्छा..."मैने चिप्स का पॅकेट भू के हाथ से छीन कर कहा"बॅक आई होगी, उस लड़की की "

अरुण ने अब दोनो पानी की बोतलो मे शराब मिक्स कर दिया था और एक बोतल मुझे देते हुए बोला"शुरू मे हल्का सा कड़वा लगेगा...बाद मे सब ठीक हो जाएगा..."

अरुण ने बोतल मूह से लगाई और ऐसे पीने लगा,जैसे की वो शराब नही 100 % प्योर् वॉटर पी रहा हो, उसकी देखा सीखी मैने भी बोतल को अपने मूह मे ऊडेला और दो तीन घूट मारकर बोला"ज़्यादा कड़वा नही है..."और मैने फिर दो चार घूट मारकर बोतल भू को दी....और ये देखने की कोशिश करने लगा कि मुझे चढ़ि है या नही....लेकिन मैं ठीक था, पहले जैसा ही नॉर्मल बिहेव कर रहा था.....

"ला और दे बे..."अरुण के हाथ से बोतल छीनी और दो चार घूट और अपने पेट मे डाला, अंदर जलन हुई लेकिन मैं बर्दाश्त कर गया और थोड़ी देर बाद हम तीनो ने पानी की दोनो शराब मिक्स बोतल खाली कर दी...मैं अब भी पहले जैसा ही महसूस कर रहा था....

वहाँ से बाइक पर बैठकर हम तीनो कंट्री क्लब के लिए सिगरेट पीते हुए निकल गये... खुद को नॉर्मल तो मैं कंट्री क्लब मे पहुचने के बाद भी महसूस कर रहा था...लेकिन अब थोड़ा माइंड फ्री था...एश का ख़याल दूर-दूर तक नही था, उस वक़्त मन कर रहा था तो सिर्फ़ नाचने का....बक्चोदि करने का.....हम तीनो वापस नवीन के बगल मे बैठे , सभी सीनियर्स पीछे खड़े रोल जमा रहे थे और हम फर्स्ट एअर के 10-15 लड़के बाय्स वाली कॉलम मे सबसे पीछे बैठे हुए थे ,सामने स्टेज पर कौन चूतिया नाच रहा था,मालूम नही...लेकिन मेरा उस वक़्त खेल-कूद करने का बहुत मन कर रहा था...सारी टेन्षन उस वक़्त जैसे छु मंतर हो गयी थी और उसी वक़्त मैने अरुण से कहा"लंगर डॅन्स कब चालू होगा..."

"बोल तो अभी यहिच चालू कर देते है..."

"आइडिया बुरा नही है...."

और फिर क्या था, हम 10-15 फर्स्ट एअर के जो लड़के वहाँ पीछे बैठे थे ,वही खड़े हो गये और गला फाड़ फाड़ के उधम मचाने लगे....मैं तो छुट्टी की गालियाँ बक रहा था, ये जानते हुए भी कि वहाँ टीचर्स, सीनियर्स के साथ साथ एश भी मौजूद है....अब वहाँ का महॉल ये था कि 90 % स्टूडेंट्स अब हमारा लंगर डॅन्स देख रहे थे...हमारी इस बहूदी हरकत का अंज़ाम ये हुआ कि स्टेज पर उस वक़्त जो परर्फमेन्स कर रहे थे, वो वही रुक कर बीच मे ही स्टेज छोड़कर वहाँ से चले गये


.
जब स्टेज पर परर्फमेन्स करने वाले चले गये तो म्यूज़िक भी बंद हो गया और हम सब वही पीछे अपनी-अपनी कुर्सिया पकड़ कर शांत बैठ गये और ऐसे बिहेव करने लगे जैसे कि हमने कुछ किया ही ना हो....ये हरकत हमारे लिए बहुत छोटी थी,लेकिन सामने बैठे टीचर्स, पीछे खड़े सीनियर्स और दाई तरफ बैठी हुई लड़कियो को बहुत बुरी लगी थी, टीचर्स के इशारे पर कुछ सीनियर्स हमारे पास आए और धीमी आवाज़ मे बोले...
"क्या बक्चोदि लगा रक्खी है बे, इतने सारे टीचर्स , इतने सारे लोग यहाँ बैठे है....उनके सामने माँ बहन की गालियाँ बक रहे हो...."

हम सब चुप रहे, क्यूंकी इस वक़्त सबकी नज़र हमारी तरफ ही थी, हमे चुप बैठा देखकर सीनियर्स सर पर चढ़ गये और एक ने कहा...
"यदि अब किया तो यही पर झापड़ मार दूँगा...फिर बोलना मत कि सबके सामने क्यूँ मारा, रहना है तो रहो,वरना चुप चाप खिसक लो..."

हम फिर चुप रहे , और प्रोग्राम फिर शुरू हुआ,अबकी बार हम मे से कोई कुछ नही बोला, सब एक दूसरे का मूह ताक रहे थे कि क्या करे,तभी वहाँ दीपिका मॅम ने एंट्री मारी, उसे देखकर औरो का तो पता नही पर मेरा सब कुछ वाइब्रट होने लगा...मालूम नही उसने क्या पहना था, चेहरे पर क्या थोपा था...लेकिन एकदम झक्कास लग रही थी....

"वो...माल..."मैं सिर्फ़ इतना ही बोल पाया, मैं और भी बहुत कुछ बोलना चाहता था...लेकिन जैसे शब्द बाहर ही नही आ रहे थे, जीभ हिलती, मूह खुलता...लेकिन फिर भी मैं कुछ नही बोल पा रहा था....दीपिका मॅम अपने पर्फ्यूम की खुश्बू बिखेरती हुई,सामने टीचर्स के पास जा बैठी और दीपिका मॅम का पीछा करते हुए मेरी नज़र स्टेज पर पड़ी....

"ये बीसी कान क्यूँ फाड़ रहे है ,बंद करवा ये सब..."किसी राजा की तरह फरमान जारी करते हुए मैने अरुण से कहा...

"तुझे चढ़ गयी है..."खीस निपोर कर अरुण बोला"बैठ जा,वरना पेलाइ खा जाएगा..."

"कौन है साला, जो अपुन को टच करिन्गा...."अपनी चेयर से उठकर मैं अरुण के सामने खड़ा हुआ, तब मुझे पता चला कि मैं ढंग से खड़ा भी नही हो सकता...मेरा पूरा शरीर किसी पेंडुलम की तरह आगे पीछे हो रहा था....

"अबे ये क्या चोदने की प्रॅक्टीस कर रहा है..,बैठ जा चुप चाप"

उस वक़्त वहाँ चल रहे म्यूज़िक सिस्टम का साउंड बहुत ज़्यादा था,इसलिए हम कितना भी चिल्ला लें, आवाज़ हमारे बीच ही घूम रही थी, मुझमे जब खड़े रहने की और शक्ति नही बची तो अरुण जिस कुर्सी पर बैठा था,उसे पकड़ कर मैं बोला..."........"कुछ नही बोल पाया मूह खुला और बंद हो गया....

"क्या..."

"क..कुछ..."मैं चुप चाप अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया, साला ये तो परेशानी हो गयी, दारू पीने के बाद तो मैं जैसे गूंगा ही हो गया था....बड़ी मुश्किल से मैने अरुण को समझाया कि मैं कुछ बोल नही पा रहा हूँ....

"होता है...होता...फर्स्ट टाइम यसिच होता है..."

"कुछ करना..."इशारे से मैने कहा...

"इसका एक ही इलाज़ है......लंगर"

फिर क्या था, हमने कुछ लड़को को राज़ी किया और फिर नाचने लगे पीछे, अरुण तो कुर्सी उठाकर नाचने लगा.....

"सब चोदु है यहाँ...."जब मेरी आवाज़ वापस आई तो मैं गला फाड़ के चिल्लाया,...

"बैठो बे..."किसी एक को झापड़ मारकर गौतम ने बैठाया...सब तनटना के बैठ गये, सिर्फ़ मेरे और अरुण के सिवा...अरुण ने जो चेयर अपने उपर उठा रखी थी,उसे वही फेक कर मेरे पास आया....

"ज़यादा चर्बी चढ़ि है क्या,..."मुझे धक्का देकर गौतम ने कहा और मैं दूर फेका गया, शरीर पर मेरा कंट्रोल नही था,,,,

"बीसी उठाओ बे..."
जैसे तैसे मैं अपने पैरो पर खड़ा हुआ, और गौतम की तरफ बढ़ा....
"तेरा घर कितनी दूर है यहाँ से..."मैने पुछा...
"15 कि.मी. "
"और वेट..."
"65 ,क्यूँ कुश्ती लड़ेगा क्या..."हँसते हुए उसने कहा...

"आई ले, 65 केजी का मुक्का..."बोलते हुए मैने अपनी पूरी ताक़त से गौतम पर एक पंच जड़ दिया......"बीसी अगली बार हाथ लगाने से पहले ये देख लेना कि सामने कौन खड़ा है..."

"मार साले को..."अरुण दूर से चिल्लाता हुआ बोला...

"गेम ख़त्म...आइ वॉन"

मुझे किसी ने कुछ नही बोला, सारे सीनियर्स अपना हाथ मसल्ते रह गये, शायद उन्हे मालूम था कि उनके घर का रास्ता हमारे हॉस्टिल से होकर गुज़रता है.....

उसके बाद ना तो सीनियर्स हमे रोकने आए और ना ही हमने कोई उधम मचाया, उसके बाद का प्रोग्राम बहुत शांति से बीता,...

"चल आजा पेट भर के आते है, मैने तो दोपहर को खाना भी नही खाया ,इस चक्कर मे कि रात को चकाचक मस्त खाना मिलेगा..."अरुण ने मुझे पकड़ कर घसीटा, मैं अब भी लड़खड़ा रहा था,...शुरू मे मैने अरुण को मना कर दिया कि मैं खाना नही खाउन्गा, मुझे भूख नही है...लेकिन जब खाने बैठा तो बस ख़ाता ही चला गया,खाना खाने के बाद सब अपने घर की तरफ रवाना होने लगे, मैं ,भू और अरुण भी उस तरफ बढ़े,जहाँ हमने बाइक खड़ी की थी.....
"चुद गये बेटा,..."

"क्या हुआ.."

"नवीन भाग गया पहले ही, अब तो पैदल ही जाना पड़ेगा..."

"हिम्मत नही मेरे पास, मुझे उठाकर ले चलो..."मैं वहाँ बैठ गया....

"एक काम करते है, हम तुझे सुबह आके ले जाएँगे..."

"बीसी ,सुबह मैं खुद आ जाउन्गा..."

"इसे क्या हुआ है..."जब मैं सर नीचे करके वहाँ लास्ट बैठा था,तब एक लड़की की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी...मैने उपर देखा...कोई जानी पहचानी सी शकल थी....

"मस्त माल है तू..."उस लड़की को देखकर मैने कहा.."चल आजा झाड़ी के पीछे..."

"तुम दोनो इसे उठाओ, मैं इसे स्कूटी मे हॉस्टिल छोड़ के आती हूँ..."कहते हुए उस लड़की ने अरुण और भू को मुझे उठाने के लिए कहा...

जब मैं खड़ा हुआ और गौर से उस लड़की को देखा तो मालूम चला कि वो तो दीपिका मॅम थी,..."सॉरी मॅम..."
"हुह..."
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08-18-2019, 01:27 PM,
#34
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
उसके बाद का मुझे कुछ याद नही था, स्कूटी मे बैठकर जो आँख लगी,वो सीधे सुबह आँखो मे पड़ती धूप के कारण खुली......मैने उपर नज़र घुमाई तो आसमान था,अगल बगल जंगल ,सामने राख जमा थी,जिसमे से हल्का हल्का धुआ निकल रहा था....और आँखे तब फटी की फटी रह गयी जब जब मैने देखा कि मेरे शरीर मे पैंट ही नही है, मैं कमर के नीचे बिल्कुल नंगा था....
"अरुण....कुत्ते,"
"इधर हूँ..."एक मरी हुई सी आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी...मैने अपने कमर के नीचे वाले प्राइवेट पार्ट को हाथो से छुपाया और अरुण की तरफ बढ़ा, उसके बगल मे भू लेटा था, ,जिसने सर पर मेरे पैंट को मुकुट की तरह पहन रक्खा था...
"तेरा किसी ने रेप कर दिया..."आँखे मलते हुए उसने कहा....

"तू पहले मेरा पैंट दे, जिसको सर पर मुकुट की तरह लगा रक्खा है..."मैने भू से कहा...मेरा हाथ अब भी मेरे शरीर के प्राइवेट पार्ट को ढके हुए था...भू ने अपने सर से मेरी पैंट निकाली और मेरी तरफ फेका...
"अंडरवेर कहाँ है..."पैंट उठाकर गुस्से से मैने पुछा...
"तुम दोनो को याद नही,लेकिन कल बहुत कुछ हुआ...."अपनी एक आँख बंद करके अरुण खड़ा होता हुआ बोला"कल, तूने अपनी चड्डी उतार कर प्रिन्सिपल के घर की बाउंड्री मे फेंका और भू ने अपना चश्मा तोड़ दिया...."
"क्या "भू बीच मे रो पड़ा...
"और मैने सब कुछ जो कल रात हमने किया वो एक कॉपी मे लिखा है...."
पैंट पहन कर मैने सबसे पहले अपना मोबाइल चेक किया,वो मेरी ही पैंट के जेब मे था...भू के चश्मे के दोनो काँच टूट चुके थे, और अरुण वहाँ एक पेड़ पर चढ़ कर कुछ ढूँढ रहा था....

"कल रात तूने अपने अंडे निकालकर पेड़ पर रख दिए थे क्या,जो आज सुबह उठते ही वहाँ चढ़ गया...."

"मैने अपना मोबाइल और वो कॉपी यहीं कहीं रक्खा था...ताकि तुम दोनो से बचा रहे...वो रहा,मिल गया..."

एक कॉपी और अपना मोबाइल लेकर अरुण नीचे आया, हम तीनो की हालत एकदम बाद से बदतर थी,कपड़े बेहद ही गंदे थे,कुछ जगह से कपड़े फॅट भी गये थे....आँखे बंद किए हुए हम तीनो धीमी-धीमी चल मे वहाँ से हॉस्टिल के लिए निकले तभी अरुण कॉपी खोलकर हमारे कल के कारनामे सुनाने लगा.....

"दीपिका मॅम ने कल रात को जब हॉस्टिल के पास स्कूटी रोकी तो मैं और अरमान उस से उतरे...नीचे उतरने के बाद अरमान वापस स्कूटी पर बैठ गया, और पीछे से दीपिका मॅम को पकड़कर उनकी चुचिया दबाने लगा ,और बोला कि आइस क्रीम खिलाओ...दीपिका मँ ने गुस्से मे अरमान को एक झापड़ मारा और मुझे कहा कि मैं अरमान को वहाँ से ले जाउ...तब हमारे अरमान बाबू ने जोश मे आकर एक बार कसकर दीपिका मॅम के सीने को दबाया और वहाँ से निकल गये....दीपिका मॅम के जाने के बाद हम दोनो को गालियाँ बकता हुआ भू वहाँ आया...."

"एक मिनट. रुक..."अरुण को बीच मे रोक कर मैने कहा"क्या सच मे मैने ऐसा किया,या फिर तू मुझे एडा बना रहा है"

"आगे पढ़ता हूँ....."अरुण आगे पढ़ता हुआ बोला"भू हमसे नाराज़ था क्यूंकी हम दोनो उसे अकेले कंट्री क्लब मे छोड़कर चले आए थे, उसके बाद हम हॉस्टिल की तरफ बढ़े,लेकिन गेट से ही वापस रोड की तरफ लौट आए,क्यूंकी अरमान को और दारू पीनी थी..उसके बाद हम तीनो दारू भट्टी गये और वहाँ से तीन बमफर उठाया और फिर उस शराब दुकान वाले की कॉपी और पेन लेकर वहाँ से भाग दिए......"

"क्या सच मे हमने तीन बोतल खरीदी थी...."

"आगे पढ़ता हूँ और बीच बीच मे रोका मत करो बे,फ्लो बिगड़ जाता है..."भू पर चिल्लाते हुए अरुण ने वापस कॉपी पर निगाह डाली"उसके बाद हम तीनो उस नीम के पेड़ के नीचे पहुचे,जहाँ कयि साल पहले हॉस्टिल की एक लड़की ने अपनी जान दे दी थी...वहाँ बैठकर अभी तक जो कुछ हुआ था,वो मैने शराब दुकान वाले की कॉपी मे लिखा और इंतेज़ार करने लगे उस लड़की का जो अक्सर रात को बुक लेकर पढ़ते हुए दिखाई देती है....यहाँ ये भी लिखा है कि ये प्लान अरमान का था,उसी ने कहा था कि चलो उस लौंडिया के भूत को चोद के आते है,....उसके बाद हमने एक बोतल वही खाली की और जब वो लड़की नही आई तो अरमान ने खाली बोतल की जगह भरी बोतल को फोड़ा और उसके काँच को पकड़ कर हिन्दी और इंग्लीश दोनो मे लिख दिया""भूतनि यदि तेरी गान्ड मे दम हो तो मेरे सामने आना, मैं कल फिर आउन्गा...""उसके बाद वहाँ जो कुछ हुआ उसे मैने कॉपी मे लिखा..."बोलते बोलते अरुण चुप हो गया....

"आगे बोलना मज़ा आ रहा है सुनने मे..."

"अबे साँस तो लें दे..."लंबी-लंबी साँस भरकर अरुण ने प्रवचन फिर शुरू किया"देन, हम सब कन्फ्यूज़ थे कि अब कहाँ जाए, तभी भू ने अरमान के सामने शर्त लगाई कि यदि वो अपनी चड्डी उतार कर प्रिन्सिपल के घर मे फेकेगा तो वो अपना चश्मा वही फोड़ देगा...और उसके बाद वैसा ही हुआ..अरमान प्रिन्सिपल के घर के सामने नंगा हुआ और अपनी चड्डी गोल गोल घुमाते हुए प्रिन्सिपल के घर के अंदर गोल कर दी, फिर क्या था भू ने भी जोश मे अपना चश्मा उतारा और वहिच सड़क पर दे मारा....उसके बाद हम वापस नीम के पेड़ के नीचे आए और मैने वहाँ बैठकर अभी जो कुछ भी हुआ उसे फिर से लिखा.....उसके बाद कहाँ जाएँ हमे नही सूझा तो अरमान ने शराब की बोतल घुमाई और जिस तरफ भी उस बोतल का मुहाना रुका,हम उधर ही बढ़ गयी...यहाँ आकर अरमान ने अपनी पैंट भू के सर मे बेल्ट से बाँध दी और भू को मुकुट पहना कर इस जंगल का राजा बना दिया...उसके बाद हम तीनो ने वहाँ आग जलाई और उस आग के चारो तरफ जंगली डॅन्स किया...और फिर मैने वो सब कुछ लिखा जो यहाँ हुआ और पेड़ मे चढ़ कर मोबाइल और कॉपी छुपा दिया....."

हम तीनो अपनी आँख मलते हुए जंगल से निकल कर हॉस्टिल की तरफ जाने वाली सड़क पर पहुच गये थे...तभी मेरा मोबाइल बजना शुरू हो गया....
"हेलो,..."जमहाई लेते हुए मैने कहा...

"अरमाआअन्णन्न्"किसी की दूसरी तरफ से जोरदार चीखने की आवाज़ आई, मैने स्पीकर ऑन करके रक्खा था,इस लिए इस आवाज़ ने मेरे कानो को भी चीर डाला....
"कौन है बे...."

"आज कॉलेज आओ, बताती हूँ तुमको..."

"क..क..कौन, दीपिका मॅम..."अंदाज़ा लगाते हुए मैं बोला...

"आज आओ तुम कॉलेज..."बोलकर उसने कॉल डिसकनेक्ट कर दी....

"अब इसको क्या हुआ..."जेब मे मोबाइल ठूंस कर मैं खुद पर झल्लाया और हॉस्टिल की तरफ बढ़ा...

ये तो सिर्फ़ शुरुआत थी,उस दिन हमे ज़रा भी अंदाज़ा नही था कि हमारे साथ क्या क्या होने वाला है....शराब की दुकान वाले को मालूम नही कहाँ से खबर लग गयी थी कि उसकी दुकान से उसके हिसाब किताब वाला कॉपी लेकर भागने वाले इस कॉलेज के थे, उसने जब कॉलेज स्टाफ को ये बताया कि कल रात को तीन लड़को ने ये हरकत की है तो कुछ का ध्यान सीधे हम तीनो पर गया, और उन्होने फेस टेस्ट करने के लिए उस शराब दुकान वाले को कॉलेज बुलाया....और हम तीनो, इस वक़्त वही प्रिन्सिपल के ऑफीस मे किसी मुज़रिम की तरह अपना फेस टेस्ट करा रहे थे....

"यही तीनो है सर जी..जिन्होने हमारा लेखा जोखा वाला कॉपी मार के ले गये रहीं कल रात के..."

"इसका समान इसे वापस करो..."कड़कती हुई आवाज़ मे प्रिन्सिपल बोला....

"यस सर , हॉस्टिल मे रक्खी है..."अरुण ने जवाब दिया,..

"तुम इनके साथ हॉस्टिल जाओ और अपना समान लेकर चलते बनो इधर से..."शराब दुकान वाले को भी हड़काते हुए प्रीसिपल बोला...

हम तीनो वहाँ से निकल ही रहे थे कि उस महा बक्चोद दारू दुकान वाले ने अपना सड़ा सा मूह फाड़ कर प्रिन्सिपल से बोला"तीन बोतल र्स का धन नही मिला है, सर जी "
"गेट लूऊऊवस्त...."
"क्यूँ बे चूतिए, बोस डीके ,तेरे गान्ड मे इतनी अकल नही है...जो तू वहाँ दारू के पैसे माँगने लगा..बीसी"अकड़ दिखाते हुए मैने कहा...

"सुन बे, दोबारा उस एरिया मे तू दिख भी मत जाना,वरना वही पर कत्ल कर देब..."वो भी अकड़ कर बोला...

"जा बेटा, अब ना तो तुझे तेरी वो कॉपी मिलेगी और ना ही तेरी तीन बोतल का धन..."

"वापस जाउ सर के पास..."

"मैं तो मज़ाक कर रहा था..."तुरंत अपने तेवर बदल कर मैने कहा"तू तो बुरा मान गया यार....भाई है तू अपना "

उसके बाद हमने उस दारू वाले को पैसे और उसकी कॉपी दी और बॅग उठाकर कॉलेज पहुचे, क्लास मे घुसे तो लड़को ने बोला की प्रिन्सिपल सर ने हम तीनो को बुलाया है, ये सुनकर रोम रोम कांप गया ,और ये डर सताने लगा कि प्रिन्सिपल ये खबर घर मे ना दे दे, वरना अच्छि ख़ासी पिटाई होती.....

"हे भगवान,अबकी बार बचा ले...कसम से आज के बाद दारू शब्द भी मूह से नही निकालूँगा...शनिवार और मंगलवार को शुद्ध शाकाहारी खाना खाउन्गा...बस इस बार बचा ले..."मैं उस वक़्त प्रिन्सिपल के सामने खड़ा होकर यहीं सोच रहा था और यदि मैं सही हूँ तो यही हालत अरुण और भू की भी थी.....

"तुम तीनो मे से अरमान कौन है..."कुछ लिखते हुए प्रिन्सिपल ने पुछा...
"सर मैं..."
"घर का नंबर बताओ..."
"जी..."
"अगले 10 सेकेंड के अंदर 10 डिजिट का अपने घर का मोबाइल नंबर बताओ..."
"क्षकशकशकशकशकशकशकशकशकश....लेकिन क्यूँ सर..."

"अब ये भी बताऊ...."अपना सर उपर करके प्रिन्सिपल सर मुझपर चिल्लाए और बोले"कल रात को भी तुम तीनो ने बहुत हंगामा किया...और साला तुम लोगो ने इस कॉलेज को बना के क्या रक्खा है...जहाँ एक दारू वाला अपने पैसे माँगने आता है...."
"सॉरी सर...."
"रोल नंबर. क्या है..."एक ग्लास पानी अपने गले से नीचे उतारने के बाद उन्होने पुछा और जब मैने उन्हे अपना रोल नंबर. बताया तो बोले"पढ़ने मे अच्छे हो..."

"थॅंक यू सर और कसम से सर आगे से ऐसा कुछ भी नही करूँगा...आप बोलॉगे तो मैं उस रास्ते भी नही जाउन्गा, मैं खुद पूजा पाठ वाला आदमी हूँ,मालूम नही कल मदिरा को हाथ कैसे लगा लिया,वरना मैं तो कोल्ड ड्रिंक तक नही पीता सर....आज के बाद बिल्कुल ऐसा नही करूँगा...घर मे कॉल मत करो...."और उसके बाद हम तीनो ने एक बड़ा सा "प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज" बोला

"एक-एक अप्लिकेशन तैयार करो और उसमे ये लिखो कि आज के बाद यदि मैने ऐसी ग़लती की तो मुझे आप कॉलेज से सीधे निकाल सकते है..."

"थॅंक यू सर..."

जैसे तैसे जान छूटी तो हम तीनो क्लास की तरफ भागे...लेकिन मुझे ये नही पता था कि वहाँ दीपिका मॅम अपने सीने का दर्द लिए मेरी राह तक रही थी....

"मे आइ कम...."दीपिका मॅम को क्लास के अंदर देखकर मेरी ज़ुबान लड़खड़ा गयी...
"इन..."
आज दीपिका मॅम कुछ उखड़ी-उखड़ी सी थी,जहाँ पहले वो अक्सर चलती क्लास के बीच मे मुस्कुरा के देखती थी आज वही वो मुझे देख तक नही रही थी, उसने सबसे ,क्लास मे बैठे 60 मे से 59 स्टूडेंट्स से वेलकम पार्टी के बारे मे पुछा ,सिवाय मुझे छोड़कर.....जब इतनी हॉट आइटम जो पहले आप पर फिदा हो और फिर इस तरह से पलटी मार जाए तो दर्द तो होता ही है...लेकिन ये दर्द लेफ्ट साइड वाला ना होकर राइट साइड वाला या फिर कमर के नीचे वाला दर्द था.....

"हॅव आ नाइस डे..."बोलते हुए दीपिका मॅम क्लास से निकल गयी ,और इसी के साथ रिसेस का टाइम भी हो गया....

दीपिका मॅम के वहाँ से जाने के बाद मैं बहुत देर तक सोचता रहा कि क्या करूँ, उसे मनाऊ या फिर उसी हालत मे छोड़ दूं ,जैसी हालत मे वो है....लेकिन फिर प्रॅक्टिकल के 40 नंबर का ख़याल आया और मैं वहाँ से उठकर सीधे कंप्यूटर लॅब की तरफ बढ़ा....

"गुड आफ्टरनून मॅम..."लॅब के अंदर घुसते ही मैं बोला...
"व्हाट ईज़ कन्सर्वेशन ऑफ एनर्जी..."
" एनर्जी कॅन नेवेर बी क्रियेटेड ऑर डेस्ट्राय्ड..इट ट्रॅन्सफॉर्म ओन्ली वन फॉर्म टू अनदर फॉर्म...."
"बट आइ कॅन क्रियेट आ प्रोग्राम आंड डेलीट आ प्रोग्राम...सिट डाउन..."
"थॅंक यू मॅम, मैने सोचा कि कल रात वाली वजह से आप नाराज़ होंगी..."

"स्टॅंड अप..."

"क्यूँ..."

"जाके दरवाज़ा बंद करो,"

"लेकिन इस बीच यदि कोई आ गया तो..."उस वक़्त मैं दीपिका मॅम की आँखो मे ये झाँकने की कोशिश कर रहा था कि वो करना क्या चाहती है...

"सब टीचर्स मीटिंग के लिए न्यू बिल्डिंग मे गये है सिवाय दो तीन को छोड़कर...और यदि इस बीच कोई आ गया तो नुकसान तुम्हारा होगा..."उसने अपना पर्स खोला और लिपस्टिक निकलते हुए बोली"मैं सबको यही बोलूँगी कि ,तुम जबर्जस्ति यहाँ घुस आए थे..."

"क्या मॅम, एक तो वैसे भी कल वाला कांड यमराज के माफिक मेरे इधर उधर घूम रहा है,उपर से आप और डरा रही हो..."
"खुद को बचाने के लिए तो झूठ तो बोलना पड़ेगा ना...मुआहह.."मुझे एक फ्लाइयिंग किस देते हुए वो बोली"दरवाज़ा बंद कर दो, "

"यस मॅम ,"दरवाज़े की तरफ बढ़ते हुए मैने सोचा"रुक साली ऐसा चोदुन्गा कि तेरा सारा अंजर पंजन ढीला पड़ जाएगा "
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08-18-2019, 01:27 PM,
#35
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मैने कभी सोचा तक नही था कि कॉलेज जाय्न करने के कुछ महीने के अंदर मेरी किस्मत इस तरह पलटी मारेगी , आज मुझसे मेरे कॉलेज की सबसे हॉट लड़की सेट थी,जिसे मैं किस तक कर चुका था...वही दूसरी तरफ मेरा दिल एक भूरी आँखो वालो लड़की पर आया था,जिसे मैं हर हाल अपने साथ देखना चाहता था...उसके लिए भले ही मुझे उसके बचपन के प्यार को ही क्यूँ ना तोड़ना पड़े, उस समय मैं ये सोचने लगा था कि एश के लिए मैं गौतम से बेटर हूँ, लेकिन दीपिका मॅम की तरफ बढ़ता हुआ मेरा हर एक कदम मुझे एश से दूर ले जा रहा था, और अंजाने मे मैं दीपिका की तरफ तेज़ी से बढ़ भी रहा था....कुछ दिन पहले तक, जब मैं खुद को एक सारीफ़ पढ़ने वाला लड़का समझता था तब मैने अपने लिए एक उसूल बनाया था कि मैं दूसरे आवारा लड़को की तरह लड़कियो के पीछे नही भागुंगा, और बिफोर मॅरेज सेक्स,हरगिज़ नही..लेकिन अब ऐसा नही था, मैं जब भी दीपिका मॅम के स्लिम बॉडी को देखता तो ऐसा लगता जैसे की वो ब्लॅक कलर की ब्रा और पैंटी मे मेरे सामने बैठी हुई मुझे बुला रही है...

"कौन सी मूवी पसंद है...."मैं जब कंप्यूटर लॅब का दरवाज़ा बंद करके वापस आया तो दीपिका मॅम ने मुझे अपने साइड वाली चेयर मे बैठाते हुए बोली....

"हॉलीवुड...मार-धड़ वाली मूवी..."

"यूँ इस तरह दरवाज़ा बंद करवा कर मैं तुमसे इस मूवी के बारे मे पुछुन्गि, नालयक...अकल के अंधे, आइ'म आस्किंग अबाउट पॉर्न मूवीस.."

अब साला मैने आज तक गिन के 4-5 बीएफ देखी थी,उनमे अब मैं उनकी टाइप क्या बताऊ, लेकिन जवाब तो देना था...वरना वो मुझे दूध पीता बच्चा कहती....
"टाइप्स बताओ, कौन कौन सी अवेलबल है आपके पास..."

"उम्म..."कंप्यूटर पर नज़र मारते हुए उसने काई तरह के नाम बताए, और मेरी जाँघ पर हाथ फिराते हुए बोली"कौन सी लगाऊ..."

"हम मूवी देखते नही, बनाते है..."

"रियली..."उसकी हालत ऐसी थी जैसे की अभी ही उसके मूह से लार टपक पड़ेगा....मेरे मन मे आया कि उसे वही दबोच कर नंगा करूँ और चोदु ,लेकिन मैं इस इंतेज़ार मे था कि शुरुआत वो करे......

उसके हाथ मेरी जाँघ से धीरे धीरे होते हुए मेरे लंड तक पहुच गये, पैंट तो पहले से तना हुआ था, वो मेरे लंड को पैंट के बाहर से पकड़ कर मुझे देखकर मुस्कुराइ, और चेयर से उठकर मेरे सामने बैठ गयी....

"ये क्या करने वाली है अब..."मैने सोचा"जो भी करेगी, अच्छा ही करेगी..."

वो बहुत देर तक मेरे लंड को पैंट के उपर से सहलाती रही ,इस बीच मैने अपने हाथ से उसके सर को पकड़ा और उसके बालो को खोल दिया.....

"रेडी फॉर ब्लोवजोब..."

"ये क्या है "

"अभी बताती हूँ,"बोलते हुए उसने मेरे पैंट की ज़िप खोली और अपना हाथ अंदर घुसा दिया,...

"कभी किसी को चूसाया है...."

"ना..."
"देन फील इट टुडे..."बोलते हुए शुरू मे उसने अपने दोनो हाथो से सामने आए अपने बालो को पीछे किया फिर उठकर मेरे होंठो को चूमा और वापस पहले की तरह बैठ गयी...अब वो मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाल कर अपने हाथो से आगे पीछे कर रही थी,जबकि मैं चाहता था कि वो जल्दी से जल्दी अपने होंठो पर लगे लिपस्टिक की छाप मेरे लंड पर उतार दे....
"मॅम,जल्दी..."

"पहले इसे तैयार तो करने दो..."बोलते हुए दीपिका मॅम स्पीड से मेरे लंड को अपने हाथो मे भरकर आगे पीछे करने लगी,...हर एक पल मे उसके हाथो की स्पीड बढ़ती जा रही थी, और मैं आँखे बंद किए हुए चेयर पर लेटा हुआ था....

"मूह मे लो,वरना यहीं निकल जाएगा...."मैं लगभग चिल्लाते हुए बोला,

"डॉन'ट वरी, दोबारा खड़ा कर देंगे...."ज़ोर से आगे पीछे करते हुए वो बोली, और थोड़ी देर बाद मेरा काम तमाम हो गया, कुछ बूँद उसके चेहरे पर गिरी ,तो कुछ मेरे पैंट पर भी,

"टू हॉट डियर अरमान..."मेरे लंड के मुहाने को अपनी जीभ से स्पर्श करते हुए उसने कहा.....

"अब क्या फ़ायदा,..."गुस्से से मैं बोला"मेरा तो निकल गया...."

"मेरी सकिंग पवर इतनी स्ट्रॉंग है कि मैने कइयों के लगातार तीन -तीन भर खड़ा करके गिराया है....यदि तुम असली मर्द होगे तो तुम्हारा भी खड़ा होगा...."बोलते हुए उसने मेरा लवडा मूह मे भर लिया...

अब तो अजीब सिचुयेशन पैदा हो गयी थी, एक तरफ दीपिका मॅम मेरे लंड को मूह मे भरकर जीभ से सहलाती और अजीब अजीब आवाज़े निकालती, और दूसरी तरफ मेरे लंड मे एक दर्द पैदा हो गया था, जो शायद दोबारा एग्ज़ाइटेड होने की कोशिश कर रहा था....किसी पॉर्न मूवी की स्लट की तरह दीपिका मॅम मेरे लंड को अपने मूह मे लिए हुए चूस रही थी और मैं दर्द को सहते हुए बैठा उसके फेस के उस हिस्से को देख रहा था जहाँ ईजॅक्युलेशन की निशानी थी, उसने उन्हे अपने चेहरे से सॉफ नही किया था....उस वक़्त ये बताना मुश्किल था कि दीपिका मॅम ज़्यादा गोरी है या फिर मेरे लंड से निकला दो बूँद जो उसके होंठो के ठीक बगल मे चिपका हुआ था.....दीपिका मॅम लार टपकाते हुए मेरे लंड पे अपना सर अप डाउन करते हुए चूस रही थी....वो मेरा फर्स्ट टाइम था जब किसी लड़की ने अपने जीभ का स्पर्श वहाँ किया था.....अब दर्द दूर हो चुका था, मैं फिर से जोश मे आ गया और दीपिका मॅम की पीठ पर हाथ फिराते हुए उस दिन की तरह उसके सूट को कमर तक उठाया, उसकी नंगी गोरी पीठ मेरे आँखो के सामने थी...

"आइ वान्ट टू किस..."दोनो हाथो से उसकी नंगी पीठ को सहलाते हुए मैं बोल ही रहा था कि दीपिका मॅम उपर सर करके बोली"क्या किस करना चाहते हो,चूत..."

उसकी हालत एक बार देखकर तो मेरे होश ही उड़ गये, उसका मूह से लार टपक रहा था, और वो तेज़ी से हाँफ रही थी....

"अंडरवेर तक गीली कर दी..."नीचे देखते हुए मैने कहा,

"अभी तो टाइम नही है बच्चू,वरना ऐसा हाल करती कि दोबारा सेक्स करने के लायक नही रहते....जब झड़ने वाले हो तो बता देना"बोलते हुए उसने मेरे लंड पर लार टपकाया और फिर चूसने लगी....

"यहह...बस निकलने ही वाला हाईईइ..."मैं बोला...
मेरे ऐसा बोलते ही दीपिका मॅम ने मेरे लंड को चूसना बंद कर दिया और थोड़ा पीछे खड़े होकर मेरे लंड को पकड़ते हुए बोली"अब तुम मेरे मूह के अंदर बाहर करो...."

"हाऐईिईन्न्न...."

"समझो कि मेरा मूह, मूह नही एक गदराई चूत है,जिसमे से लार की जगह चूत का पानी रिस रहा है...."

मैं झड़ने वाला था ,इसलिए उस वक़्त मुझमे अपना लवडा चूसने की खुमारी बहुत ज़्यादा थी,मैने अपने दोनो हाथो से उसके सर को मज़बूती से पकड़ा और उसके मूह के अंदर अपना लंड दे मारा और थोड़ी देर के बाद ही मैं उसके अंदर ही झड गया....दीपिका मॅम तब तक मेरे लंड को अपने मूह के अंदर रक्खी रही,जब तक मेरा एक एक बूँद उसने नही गटक लिया,मैने अपना लंड उसके मूह से निकल कर पैंट के अंदर किया...अंडरवेर के साथ साथ पैंट भी काई जगहो पर गीला था....

"नाइस शॉट..."खड़े होकर उसने अपने पर्स से एक रुमाल निकाला और अपने फेस को सॉफ करने के बाद मुझे वो रुमाल पकड़ाते हुए बोली"वो ,डस्टबिन मे डाल आओ..."

"मैं..."
"नही तो क्या मैं..."घूरते हुए वो बोली"और अब जाओ यहाँ से...."

मैने दीपिका मॅम के हाथ से रुमाल लेकर उसे डस्टबिन मे डाला और वहाँ से निकलकर हॉस्टिल के लिए रवाना हुआ, क्यूंकी कुछ देर पहले की करामात से मेरी हालत कुछ ठीक नही थी और वैसे भी मेरा मन बिस्तर पर पसरने का कर रहा था, और ये मेरे लिए सही भी था क्यूंकी उसके बाद होड़ सर ने फर्स्ट एअर के उन लड़को को अपने रूम मे बुलाया था ,जिन्होने कल रात पार्टी मे हंगामा किया था,अंजाने मे ही सही लेकिन दीपिका मॅम की बदौलत मैं होड़ की तेज तर्रार डाँट से बच गया था...इसकी खबर मुझे तब लगी जब अरुण ने मेरा बॅग,जो मैं कॉलेज मे छोड़ आया था,मेरे उपर मारते हुए बोला"ले पकड़ अपना बॅग, साले आज लंच के बाद होड़ ने बुलाया था,कहाँ था तू..."

"होड़ ने...."मैं एकदम से उठकर बैठ गया , क्यूंकी मुझे अंदेशा हो गया था कि हो ना हो ,कल रात वाला ही लफडा है.....

"तुझे पुच्छ रहे थे..."

"तो तूने क्या बोला..."

"मैने बोला कि तेरी तबीयत बहुत ज़्यादा खराब है और तू अगले एक हफ्ते तक क्लास नही आ सकता...."अपना जूता उतारकर उसने मेरी तरफ फेका ,लेकिन मैं ऐन वक़्त पर हट गया जिससे अरुण का जूता दूसरी तरफ गिर गया,वो बोला"अब एक हफ्ते तक उसकी क्लास मे मत दिख जाइयो, वरना वो मेरी गान्ड मारेगा....."

"थॅंक्स यार..."

"और सुन सेकेंड टेस्ट की डेट आ गयी है ,साथ मे मैं एग्ज़ॅम की भी..."

"इतनी जल्दी...कब से है एग्ज़ॅम्स..."

"2 हफ्ते बाद टेस्ट और उसके एक हफ्ते बाद से एग्ज़ॅम शुरू...."

"ओके, देन आज से पढ़ाई शुरू....."मैं वहाँ से उठकर रूम से बाहर आया और किसी लेटेस्ट न्यूज़ की तालश मे (स्पेशली एश) भू के रूम मे घुसा...


.
भूपेश के रूम मे जाने के बाद पता चला कि वो तो कॉलेज से आने के बाद से ही फरार है, उसके रूम पार्ट्नर ने ये भी बताया कि शायद भू गर्ल्स हॉस्टिल गया है....

"आज साला पेलाएगा ये..."भू को गाली बकते हुए मैं वहाँ लगभग 5 मिनट और रुका और फिर अपने रूम मे आया, दो बार एनर्जी निकल चुकी थी...इसलिए थोड़ा मन गिरा हुआ था, लेकिन जब भी उस पल को सोचता तो लंड एक बार फिर से खड़ा होने लगता रूम मे आकर देखा तो अरुण भी गायब था,...
"हेलो...."
"क्या है बे..."दूसरी तरफ से अरुण ने चिल्लाकर पुछा, वो मुझपर ऐसे चिल्लाया जैसे कि वो बहुत ज़रूरी काम कर रहा हो और मैने उसे कॉल करके डिस्टर्ब कर दिया हो....

"आना सेक्स करते है..."मैने कहा..

"अभी मैं भू के साथ गर्ल्स हॉस्टिल जा रहा हूँ,एक लड़की को आइ लव बोलने का है...अब कॉल मत करना..."

"ये साला मुझे कुछ बताता क्यूँ नही, अकेले अकेले गर्ल्स हॉस्टिल जाता है...."बेड पर पसर्कर मैने अपना मोबाइल उठाया और ना जाने क्या ख़याल आया कि मैने फ़ेसबुक खोलकर अपनी आइडी लोग इन की और विभा को एक मेस्सेज टपका दिया, ताकि वो जब ऑनलाइन आए तो रिप्लाइ करे...क्यूंकी अब समय आ गया था कि जल्द से जल्द उसका इस्तेमाल किया जाए....मैने अपनी फ्रेंड लिस्ट मे एक नज़र दौड़ाई ,गिन के 4 फ्रेंड्स थे, दीपिका मॅम, विभा ,अरुण और भू...

"एश...."टाइप करके मैने सर्च मारा, और हज़ार लड़कियो की आइडी सामने आ गयी, अब मेरे लिए मेरी वाली एश की पहचान करना मुश्किल था, क्यूंकी यदि मैं हर एक की आइडी मे घुसकर उनके डीटेल्स चेक करता तो शायद चार साल इसी काम मे बीत जाते....तभी ख़याल आया कि भू ने एश से फ़ेसबुक पर चॅट के दौरान बात की थी,जिसका नतीज़ा भू को एक थप्पड़ खाकर चुकाना पड़ा था, मैने भू को कॉल किया, ये जानते हुए भी कि वो इस वक़्त गर्ल्स हॉस्टिल मे होगा.....

"क्या है...."जैसा कि मेरा अंदाज़ा था ,वो दबी हुई आवाज़ मे भड़क कर बोला....

"एश की फ़ेसबुक आइडी दे..."मैं भी धीमी आवाज़ मे उससे बोला...

"लवडा मेरे को सबकी आइडी याद रहेगी क्या, मेरे फ्रेंड लिस्ट मे देख, एंजल एश के नाम से आइडी है उसकी...और अब यदि दोबारा कॉल किया तो गान्ड मार लूँगा आके..."

"अभी कहाँ है..."

"गर्ल्स हॉस्टिल के पीछे, अंदर जाने का रास्ता ढूँढ रहा हूँ..."

"चल भाई, ऑल दा बेस्ट...10-20 लड़कियो को चोद के ही आना..."

कॉल डिसकनेक्ट करने के बाद मैने फिर से फ़ेसबुक ओपन किया, और सीधा भूपेश की फ्रेंड लिस्ट मे अटॅक किया, साले की आइडी मे मुश्किल से 4-5 लड़के एड थे,बाकी सब की सब लड़किया थी...."ये रही एंजल एश.."एश की आइडी मे क्लिक करते हुए मैने कहा, और उसकी आइडी खोलकर उसकी प्रोफाइल पिक मे ही कुछ देर तक खो गया...

"वाकई मे एश माल है यार..."मेरे मूह से अपने आप ये निकल गया और मैं हड़बड़ा कर अपने आस पास इस तरह देखने लगा जैसे कि मैने अभी अभी कोई बहुत बड़ा पाप किया हो और आजू बाजू ये देख रहा था कि किसी ने सुना तो नही.....लेकिन तभी किसी का मेस्सेज आया, मैं एग्ज़ाइटेड हो गया क्यूंकी इस वक़्त केवल दो लोग ही फ़ेसबुक यूज़ कर सकते है ,एक तो दीपिका मॅम और दूसरी विभा डार्लिंग...क्यूंकी भू और अरुण तो इस समय गर्ल'स हॉस्टिल की दीवार से लटक रहे होंगे और मैं 101 % सही निकला, मेस्सेज विभा का था.....

"हाई..."उसके ही के जवाब मे मैने रिप्लाइ ठोका...
"हाउ आर यू..."
"फाइन"उसके बाद मैने तुरंत एक और मेस्सेज भेजा"वरुण से ब्रेक अप हो गया क्या ?"
"यस , तुम क्यूँ पुच्छ रहे हो"
"नही बस सोच रहा था कि अब शायद मेरा चान्स हो,..."
"व्हाट "
"ट्राइ करने मे क्या जाता है, .."
उसके बाद विभा ने कोई रिप्लाइ नही किया, अगले 5 मिनट. तक जब उसने रिप्लाइ नही किया तो मैने एक और तीर चलाया...
"थॅंक्स तो बोल देती..."
"थॅंक्स ? फॉर व्हाट ?...."इस बार उसका तुरंत रिप्लाइ आया ,वो भी एक नही दो दो"आंड प्लीज़ अरमान, डॉन'ट यूज़ चीप लॅंग्वेज..."
"जंगल मे मंगल...याद आया..."
"ओह हां...थॅंक्स..."
"उस दिन जब मैने तुम्हे ऐसे ही जाने दिया था तो बड़े प्यार से देख रही थी....कहीं मुझपर दिल तो नही आ गया,वैसे भी कॉलेज की सारी लड़कियो ने जीना मुश्किल कर दिया है..."
" हा हा हा..."
"एनीवे, आइ लव टू स्ट्रॉबेरी फ्लेवर "
"????"
कुछ देर मैं शांत रहा और सोचता रहा कि सीधे बोल दूं या घुमा फिरा कर, क्यूंकी विभा से मेरी ज़्यादा जान पहचान नही थी ,और डर ये भी था कि वो मुझे ब्लॉक ना मार दे, लेकिन फिर ख़याल आया कि मुझे पढ़ाई भी करनी है,क्यूंकी 3 हफ्ते बाद एग्ज़ॅम है इसलिए मैने सीधे रिप्लाइ किया...
"कॉंडम..."
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08-18-2019, 01:32 PM,
#36
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
और जैसा कि डर था वो तुरंत ऑफलाइन हो गयी, बीसी शरीफ बनने का नाटक रही है,...उसके बाद मैने फिर से एश की आइडी खोली और उसकी फोटोस देखने लगा, उसकी आइडी मे स्कूल के साथ साथ उसके आलीशान घर के भी कुछ इमेजस थे,उन सभी इमेजस को डाउनलोड करने के बाद मैने एश को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी और मोबाइल से नज़र हटाकर वापस आँखे बंद करके लेट गया.....
.
"रुक...रुक"वरुण ने मुझे बीच मे रोका, और बाथरूम के अंदर घुस गया और फिर बहुत देर बाद आया, बाहर अभी भी बारिश हो रही थी....
"फिर से बताना तो दीपिका ने तेरा लवडा कैसे चूसा..."

" बड़ा जोश आ रहा है तुझे..."सिगरेट जलाते हुए मैने कहा, और उसी वक़्त दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी....

"कौन हो सकता है "वरुण ने मुझसे पुछा...

"मुझे क्या मालूम, आर पार देखने की मेरे पास पॉवेर है क्या,जा दरवाज़ा खोल...."

वरुण ने दरवाज़ा खोला ,सामने निशा बारिश मे भीगी हुई खड़ी थी...वो पूरी तरह ,सर से लेकर पैर तक भीगी हुई थी ,लेकिन उसकी आँखो को देखकर कोई भी बता सकता था कि वो कुछ देर पहले बहुत रोई है, निशा का यूँ इस तरह तेज बारिश मे भीगते हुए हमारे फ्लॅट मे आना अजीब तो था ही ,उपर से एक अजीब बात और थी, वो ये कि निशा ने लाल साड़ी पहन रक्खी थी, और यदि मेरा अंदाज़ा सही था तो ये वही साड़ी होगी ,जो उसके माँ बाप ने उसके शादी के लिए खरीदी होगी....
"मिस्टर. अरमान, मुझे तुमसे कुछ बात करनी........" बोलते हुए उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया, और सिसक पड़ी....

उस वक़्त सिचुयेशन बड़ी ही क्रिटिकल थी, वरुण और अरुण आँखे फाड़ फाड़ कर मुझे देख रहे थे और मैं खुद भी अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर उन दोनो को देख रहा था....

"हुह..."वरुण ने गुर्रा कर मुझे अहसास दिलाया कि मुझे बाहर जाकर निशा से बात करनी है,तभी मेरा खास दोस्त अरुण मेरे पास आया और मेरे कान मे बोला"क्या बेटा, बच्चा तो नही है उसके पेट मे...."

एक तो मैं वैसे ही डरा हुआ था,उपर से अरुण ने और डरा दिया...जब मैं कुछ देर और बाहर नही गया तो निशा ने एक बार नफ़रत भरी निगाह से मुझे देखा और वहाँ से चली गयी...

"निशा..."मैं भी तुरंत उसके पीछे भागा, बाहर बारिश और तेज हो गयी थी..निशा तो पहले से ही भीगी हुई थी ,उसके पीच्चे आने के कारण मैं भी लगभग भीग ही गया था....

"निशा..."मैने एक बार और निशा को आवाज़ दी और वो जहाँ थी वही रुक गयी....

"निशा..."मैने एक बार और निशा को आवाज़ दी और वो जहाँ थी वही रुक गयी....
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निशा से मोहब्बत तो नही थी लेकिन एक लगाव तो था ही और इस रिश्ते के धागे को हम दोनो ने बिस्तर पर बखूबी बुना भी था...हम दोनो के बीच कभी कोई दिखावा जैसा कुछ भी नही रहा, जो था,सामने था....हम दोनो की एक साथ ज़िंदगी रात को निशा के बिस्तर पर से शुरू होकर उसके जिस्म से होते हुए सुबह वापस उसके बिस्तर पर दफ़न हो जाती थी...लेकिन इस वक़्त ना तो रात थी ना तो मैं उसके बिस्तर पर था...इस वक़्त अच्छा ख़ासा दिन था, और इस अच्छे ख़ासे दिन मे मैं पूरा भीग चुका था, निशा कुछ देर वहाँ खड़े होकर इंतजार करने लगी कि मैं कुछ कहूँ, लेकिन मैने जब कुछ नही कहा तो फिर अपने घर की तरफ चल दी....

"एनी प्राब्लम..."पीछे से निशा का हाथ पकड़ कर मैं बोला और उसे अपनी तरफ घुमाया....

"कुछ नही..."वापस जाने के लिए वो जैसे ही मूडी तो मैने उसका हाथ मज़बूती से पकड़ लिया, क्यूंकी निशा को लाल जोड़े मे देखकर मेरे लेफ्ट साइड मे कुछ-कुछ होने लगा था...मैं वहाँ कॉलोनी के बीच तेज़ होती बारिश मे निशा का हाथ पकड़ कर खड़ा था, वहाँ उस कॉलोनी मे हम दोनो के सिवा और कोई भी रहता है ,ये हम दोनो शायद भूल गये थे....उसने अपना हाथ छुड़ाने की एक बार और कोशिश की लेकिन जब कामयाब नही हुई तो मेरी तरफ देखते हुए बोली.
"छोड़ो मुझे..."और इसी के साथ वो अपने दूसरे हाथ से अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश करने लगी...

"वर्क डन बढ़ गया, लेकिन अफ़सोस कि डिसप्लेसमेंट ज़ीरो ,इस हिसाब से यदि फिज़िक्स की भाषा मे कहे तो वर्क डन ज़ीरो और आप फिज़िक्स के खिलाफ नही जा सकते "मुस्कुराते हुए मैने कहा और निशा को अपने तरफ खींच लिया...वो सीधे आकर उस तेज़ बारिश मे मुझसे लिपट गयी और उसी वक़्त मैने ,उसी पल मैने वो किया जो मुझे........करना चाहिए था, मैने उसके होंठो को एक झटके मे अपने होंठो मे समेट लिया....शुरू -शुरू मे मैने उसे कसकर पकड़ा हुआ था, लेकिन बाद मे उसके भी हाथ मेरे कमर पर मुझे महसूस हुए, और वैसे भी ये अरमान का जादू था, इस जादू से तो एश नही बच पाई तो फिर ये निशा कैसे बच जाती

"अब बताएगी मेरी माँ, हुआ क्या..."

मैने उसके लबों को अलग करके उससे पुछा, जवाब मे उसकी आँखो से आँसू के कुछ बूँद निकल कर उधर तेज़ बारिश मे घुल गयी और इधर हम दोनो के होंठ मिल गये.....

"मेरे साथ चलो..."अपना सर मेरे सीने मे टिका कर वो बोली...

आज उसकी आवाज़ जाने क्यूँ इतनी अच्छि लग रही थी, मुझे नही पता...लेकिन आज उसकी आवाज़ मे वो जादू था जो किसी और के आवाज़ मे मैं महसूस किया करता था, आज वो मुझे उतनी ही प्यारी लग रही थी,जितनी की कभी कोई और लगा करती थी....मैने अपने एक हाथ की मदद से उसे खुद से सटाया ही था कि मेरे कदम खुद ब खुद उसके घर की तरफ बढ़ चले, जैसे एक आख़िरी मंज़िल का पता हो उसका वो बड़ा से बारिश मे भीगता हुआ आलीशान महल......निशा का सर इस वक़्त मे कंधे पर टिका हुआ था, वो इस वक़्त चुप होकर मेरे साथ चले जा रही थी, इस वक़्त उसकी हालत ऐसी थी कि यदि मैं उसे वहाँ छोड़कर चला जाउ तो उसे खुद के घर का पता किसी दूसरे से पुछना पड़े......
.
"मेमसाहिब आप ठीक तो है ना...."निशा के घर के बाहर दिन रात पहरा देने वाला गार्ड इस वक़्त होती हुई तेज़ बारिश मे भी वहाँ अपने छोटे से रूम मे बैठा हुआ था, निशा को मेरे साथ देखकर वो छाता तानकर बाहर आया...

"निशा मेमसाहिब..."अब उसने अपना छाता निशा के उपर कर दिया था,"क्या हुआ इनको..."अपनी आवाज़ कड़क करके वो बोला, और यदि निशा ने तुरंत कोई जवाब नही दिया होता तो वो मुझे पक्का धक्के मारकर वहाँ से निकाल देता...
"मैं ठीक हूँ ,और ये मेरे साथ ही है..."

"चलिए मैं आपको अंदर तक छोड़ देता हूँ,..."उस पहलवान ने मुझे निशा से जैसे ही दूर किया ,निशा चिल्ला उठी"तुम्हे समझ नही आ रहा है, मैने बोला ना कि ये मेरे साथ है..."

निशा के तेज़ आवाज़ से वो गार्ड सकपका गया, मैं खुद हक्का बक्का रह गया था निशा के इस अंदाज़ से,

"माफ़ करना साहिब..."

"कोई बात नही, तुम जाओ..."

"ये लीजिए..."छाता मेरे हाथ मे देते हुए उसने कहा और गेट के पास बने अपने छोटे से रूम मे चला गया...

"अरमान..."

"बोलो मेमसाहिब..."उस गार्ड के लहज़े मे मैं बोला"क्या हुकुम है मेमसाहिब..."

उसने अपनी गर्दन हिलाकर मुझे मना किया कि मैं उससे ऐसे बात ना करूँ, लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, मैने छाता वापस गार्ड के रूम की तरफ फेका और निशा की तरफ देखकर उसे एक बार और मेमसाहिब बोला...

"बोला ना, तुम मत बोलो..."मेरे सीने मे एक हल्का सा प्यार भरा मुक्का मारते हुए वो बोली....

"अंदर चले मेमसाहिब..."बोलते हुए मैं हंस पड़ा....

हम दोनो अंदर आए , मैने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और निशा का सर जो इतनी देर से मेरे कंधे मे रक्खा हुआ था,उसे दूर किया...उस एक पल मे जाने क्या हुआ, निशा पर मेरी इस हरकत का ऐसा बुरा असर हुआ कि वो चीख पड़ी और वापस मुझसे लिपट गयी....

"मत जाओ, प्लीज़..."

"मैं कहीं नही जा रहा..."उसकी पीठ सहलाते हुए मैं बोला"और आज तुम्हे हो क्या गया है..........मेमसाहिब..."

उसकी सूरत रोने जैसी हो गयी, उसकी आँखो मे आँसू उतर आए , और मेरे सर पर जैसे किसी ने ट्रक उठाकर दे मारा हो, मेरी ऐसी हालत थी....ऐसा तो मैं तब भी नही चकराया था जब अरुण ने मुझे कहा था कि"अब मैं गे नही रहा, मुझे एक लड़की से प्यार हो गया है ,और वो है.....आअ"

"खुद से दूर मत करो मुझे,,.."निशा बीच मे ही बोल पड़ी,

"शर्ट उतारने दोगि ,या चाहती हो कि मुझे ठंड लग जाए और बीमार होकर यही पड़ा रहूं..."

"मेरे रूम पे चलो..."

"ऐसे ही, घर गीला नही हो जाएगा..."

"कोई फरक नही पड़ता..."

"चलो फिर..."

निशा का रूम कहाँ है ये मुझे मालूम था, या फिर यूँ कहे कि इस पूरे घर मे मुझे सिर्फ़ निशा का ही रूम मालूम था, सीढ़िया चढ़ते वक़्त भी वो मुझसे लिपटी रही और सीढ़िया चढ़कर जब हम दोनो उसके रूम के अंदर दाखिल हुए तो तब भी उसने मुझे नही छोड़ा.....



निशा के आज के बर्ताव से मैं खुद हैरान था, आज तक सुना था कि रात-ओ-रात ज़िंदगी बदल जाती है, लेकिन आज मैने एक इंसान को रात-ओ-रात बदलते हुए देखा था, दो दिन पहले ही हम दोनो ने एक साथ बिस्तर गरम किया था, तब की निशा मे और आज मुझसे लिपटी हुई निशा मे ज़ीरो टू इन्फिनिट का डिफरेन्स है , ज़ीरो से इन्फिनिट तक के इस डिस्टेन्स का मैं राज़ जानना चाहता था, आख़िर ऐसा क्या हो गया निशा को जो वो एक पल भी बगैर मेरे साए की नही रह सकती, मुझे अब भी वो वक़्त याद है जब निशा ने कहा था कि...ये हमारी आख़िरी रात है,इसके बाद हम कभी नही मिलेंगे....एक वो वक़्त था और एक अभी का वक़्त है...
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इस वक़्त मैं निशा के साथ शवर के नीचे भीग रहा था, हम दोनो ने एक दूसरे के गरम होते जिस्म को कसकर पकड़ रक्खा था और आँखो के इशारो से बात कर रहे थे...उस वक़्त ,उस पल हमारे बीच एक अजीब सी कश मकश थी, एक अजीब सा जंग हम दोनो लड़ रहे थे...इस जंग को आगे बढ़ाते हुए मैने निशा के सीने के उभारों को अपने सीने से दबाते हुए उसकी गर्दन पर एक किस किया, उसने अपनी आँखे बंद कर ली, वो आज ऐसे शरमा रही थी , जैसे वो पहली बार किसी के साथ ये सब करने जा रही हो, इतना तो वो तब भी नही शरमाई थी जब पहली बार मैं उसके साथ सोया था....

"अरमान...नो..."अपनी आँखे बंद कर के वो बोली,

एक तरफ वो मुझे मना कर रही थी कि मैं उसके साथ वैसा कुछ भी नही करूँ लेकिन दूसरी तरफ वो खुद को मुझे सौंप भी रही थी, सच मे एक अजीब सी कश मकश थी हमारे बीच.........
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और इसी कश मकश मे मैने उसकी साड़ी नीचे गिरा दी, शवर का पानी अब भी हमारे उपर बराबर गिर रहा था, साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही मेरी आँखो के सामने लाल ब्लाउस मे क़ैद उसकी आधी बाहर निकली हुई चुचियाँ दिखी और मैने बिना एक भी पल गँवाए अपने हाथो को उनकी तरफ बढ़ा दिया....

"आज नही..."अपने सीने पर निशा को जैसे ही मेरे हाथ महसूस हुए उसने उन्हे दूर कर दिया...मैने सोचा कि वो ऐसे ही मना कर रही है...इसलिए मैने मुस्कुराते हुए वापस अपने हाथ उसकी छाती से सटा दिए,लेकिन उसके बाद निशा की नज़रें नीचे झुक गयी...और उस पल मुझे बहुत बुरा लगा, खुद पर गुस्सा भी आया....

"चल चलती क्या..."उसको पकड़ कर मैने फिर खुद से चिपका लिया और उसके होंठो को अपने होंठो मे क़ैद कर लिया....मेरा मन तो बहुत था कि निशा इस लाल जोड़े से निकल कर पहले की तरह फिर से मेरे साथ वक़्त गुज़ारे ,लेकिन आज वो इसके लिए तैयार नही थी...यदि मैं जबर्जस्ति करता तो बेशक वो मुझे मना नही करती लेकिन ,लेकिन मुझे खुद अच्छा नही लगता....
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"आज तुम्हे हो क्या गया है, पहले तो इस तरह कभी बर्ताव नही किया ..."उसके बालो को सहलाते हुए मैने कहा...

इस वक़्त निशा मेरे उपर बिना कपड़े के लेटी हुई थी , मैं खुद भी बिना कपड़ो के था...लेकिन आज हमने वैसा कुछ भी नही किया, जो अक्सर करते थे...

"तुम पागल कहोगे..."

"और यदि नही बोला तो..."

"सच..."
"मुच..."

"एक सपना देखा था कल रात..."उसने मेरे सीने पर से अपना सर उठाया और मेरी आँखो मे देखते हुए बोली "बहुत बुरा था..."

"ज़रूर मेरे बारे मे कुछ देखा होगा,वो भी बहुत बुरा..."

"मैने देखा कि..."वो याद करते हुए बोली"मैने सपने मे देखा कि मेरी शादी हो रही है, लेकिन हर पल बस तुम्हारा ही ख़याल आ रहा है, और जब मैं शादी का लाल जोड़ा पहन कर शीशे मे खुद को निहार रही थी तो मुझे तुम्हारा अक्श दिखाई दिया...मैं उस वक़्त बेचैन हो उठी कि आख़िर ये मुझे हो क्या रहा है...फिर शादी के मंडप पर अचानक तुम पहुच गये और मेरा हाथ पकड़ कर ....."बोलते-बोलते निशा चुप हो गयी...

"आगे बोलो, मस्त कहानी है..."

"उसके बाद तुम पर किसी ने गोली चलाई और फिर..."बोलते हुए वो फिर से चुप हो गयी ,और मेरे सीने को देखकर जैसे खुद को यकीन दिला रही हो कि ,वो सब एक सपना था....

"गोली मेरे सीने मे लगी थी ना..."

"हां, लेकिन तुम्हे कैसे पता..क्या कल रात तुम्हे भी वो सपना आया था.."

"अभी तुम जो आँखे बड़ी बड़ी करके ,मेरे सीने को नाख़ून से दबा के चेक कर रही हो, उसी से मैने अंदाज़ा लगाया..."

"ओह ! सॉरी..."उसने नाख़ून गाढ़ना बंद कर दिया, और हंस पड़ी...

"एक सपने से इतना डर गयी..."

"ना..उसके बाद ,जब मैने आज ऐसे ही वो लाल साड़ी पहनी तो सपने के जैसे ही तुम मेरे पीछे खड़े थे और फिर मेरे कानो मे वो गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी..."

"तू सच मे पागल है, तुझे तो आगरा मे शिकेन्दर सरकार के साथ होना चाहिए "

उसके बाद वो मुझे जगाकर सो गयी, जब उसकी पलके नींद के कारण बंद हो रही थी,तो उसने मुझसे सॉफ कहा था कि मैं उसे छोड़कर ना जाउ, और अपने सुकून के लिए उसने मेरा हाथ एक रस्सी से अपने हाथ मे बाँध लिया था....नींद मेरी आँखो से कोसो दूर थी,इसलिए फिलहाल मैने टाइम पास करने के लिए निशा के बारे मे सोचना शुरू कर दिया था
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08-18-2019, 01:32 PM,
#37
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
निशा...आज के मॉडर्न जमाने की एक मॉडर्न लड़की, जिसे वो सभी शौक थे,जो एक रहीस खानदान मे रहने वाली लड़कियो मे एक जानलेवा बीमारी की तरह फैल रही है.....लेकिन इन सबमे मे वो पूरी तरह दोषी नही थी,उसे इस तरह का बनाने मे उसके माँ-बाप ने भी उसका बहुत साथ दिया था यदि जो मैने सुना है वो सच है तो उसके अनुसार निशा के माँ-बाप खुद बहुत बड़े अय्याश थे...वो दोनो खुद रात रात भर घर से गायब रहते और उनकी इसी अय्याशी की बदौलत निशा और मैं अक्सर एक साथ वक़्त गुज़ारते थे...उन्हे इस बात की जानकारी भी होगी कि उनकी एकलौती बेटी का चक्कर कयि लड़को से चल रहा है, लेकिन उन्होने कभी इस बारे मे जानने की कोशिश नही की....वरना उन्ही के घर से कुछ कदमो की दूरी पर रहने वाला अरमान ,आज उनके आलीशान घर मे उनकी एकलौती बेटी के बिस्तर पर अपना हाथ बँधवा कर नही पड़ा होता.......
.
निशा ने करवट बदली ,लेकिन मेरे हाथ मे उसके हाथ बँधे होने के कारण वो उसका हाथ खिंच सा गया और वो जाग गयी...

"क्या हुआ...तुम जा रहे हो..."

"फिलहाल तो कपड़े गीले है...."

"तो फिर...."मेरी तरफ देखते हुए वो बोली "आज रात यही रुक जाओ..."

"व्हाई ? यहाँ ऐसा क्या है..जो मैं यहाँ रुकु..."

"मैं हूँ..."

"तो..."

"तो..."वो मेरे बगल से उठकर सीधे मेरे उपर आकर बोली"क्या"

"मेरा क्या फ़ायदा होगा यहाँ रुक कर..."

"कभी कभी फ़ायदा और नुकसान को किनारे रख कर सोचना पड़ता है..."

"रियली..."बोलते हुए मैने उसे पकड़ा 180 डिग्री के आंगल पर रोटेट कर दिया, अब मैं उसके उपर था और वो मेरे नीचे...

"इसके सिवा और भी कुछ आता है..."

"शायद नही...."मैने उसके हाथो को अपने हाथो से पकड़ लिया और एक जोरदार किस उसके होंठो पर किया...

"लीव..."

"सोच लो, ये धागा टूट जाएगा..."

"फिर रहने दो..."

"अब आई ना लाइन पर..."

जिस्म मे सुलग रही आग को मिटाने के बाद एक दूसरे के उपर गिर पड़े...अब नींद मुझे भी आ रही थी, और मेरी आँखो के सामने वो दृश्य आ गया जो मैं कभी नही देखना चाहता था...निशा की इस हालत से मुझे वो दिन आ गया था,जब मैं खुद कुछ कुछ निशा की तरह बिहेव करने लगा था......
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तब मैं 12थ मे था, जब मैने एक रात को सपने मे देखा कि मेरे एक दोस्त की मौत हो गयी है...सुबह उठकर मैने उसे एक बुरा सपना समझा और हॉस्टिल से निकलकर खाने के लिए मेस की तरफ बढ़ा...जिस वक़्त मैं खाना लेकर टेबल पर पहुचा तो वहाँ बहुत सारे लोग थे...लेकिन मेरे खाना खाते तक वहाँ से हर कोई गायब हो चुका था...ना तो वहाँ काम करने वाले लोग थे और ना ही वहाँ खाना खाने वाले लोग....लेकिन तब भी मैं वहाँ बैठा खाना ख़ाता रहा ,खाना खाते हुए एक बड़ी ही अजीब सी चीज़ हुई...मेरी थाली अचानक से पूरी पानी से भर गयी थी, मैने गुस्से मे मेस वाले को गाली दी और वहाँ थाली पटक कर वापस जाने के लिए मुड़ा ही था कि मेरा दोस्त जो सपने मे मर गया था,वो मुझे दिखा...मेरा वो दोस्त वहाँ ज़मीन मे बिखरे हुए चावल के दानो को बटोर का इकट्ठा कर रहा था....

"और लवडे क्या हाल है...." कहते हुए मैं वहाँ से आगे बढ़ा,लेकिन मेरे कदम जैसे जम गये थे...मेरा सर बहुत ज़ोर से दर्द किया और मैं वही अपने दोस्त के बगल मे सर पकड़ कर बैठ गया....

"सब खाना गीला गीला है, दाल चावल सब गीला था...इसलिए मैं ज़मीन से उठाकर खा रहा हूँ....ले तू भी खा..."उसने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा, उसके बाल इस वक़्त लड़कियो की तरह एकदम लंबे हो चुके थे , और आँखे एकदम लाल...वो आगे बोला
"मैं तो मर चुका हूँ, तूने सपने मे भी देखा था...याद है मैने फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी...."

मेरी हालत उस वक़्त ऐसे थी जैसे कि मुझे किसी दहक्ते हुए ज्वालामुखी मे फेक दिया गया हो....मैं वहाँ से भागने के लिए मुड़ा ही था कि ,मैं फिसलकर वही गिर गया.....

और मेरी आँख खुल गयी, मैं सपने मे ज़ोर से एक लात दीवार पर दे मारी थी, जिसका दर्द अब भी था...कुछ देर तक मैं सोचने लगा कि आख़िर हुआ क्या है और जब मैं नॉर्मल हुआ तो मुझे पता चला कि मैं सपने के अंदर सपना देख रहा था...लेकिन उसी वक़्त हॉस्टिल मे कोई ज़ोर से चीखा...नीचे जाकर देखा तो मेरा वो दोस्त हॉस्टिल की बाथरूम मे उपर लगे हुक से लटका हुआ था.......
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उस दिन मेरी दिल की धड़कने कयि घंटो तक तेज़ रही ,मैं उस दिन खाना खाने मेस भी नही गया क्यूंकी मुझे डर था कि वो सब कुछ मेरे साथ ना हो,जो मैने सपने मे देखा था....जब मेरे दिल की धड़कने नॉर्मल हुई तो उन्हे फिर से बढते हुए मेरे एक दोस्त ने,जो अभी अभी मेस से आया था, वो बोला"आज का खाना एकदम गीला था, एकदम गीला...सब कुछ पानी पानी टाइप था, और आज एक लड़का,जिसके लंबे लंबे बाल थे...वो ज़मीन से दाने उठाकर खा रहा था, साले ये मेस वाले भिखारियो को अंदर क्यूँ आने देते है........."

मूह खुला का खुला रह गया, दिल की धड़कने बहुत तेज़ चल रही थी...लेकिन ऐसा लगा कि मैं ज़िंदा ही नही हूँ....तो क्या यदि मैं मेस जाता तो वो सब कुछ मेरे साथ होता ,जो मैने सपने मे देखा था...?
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कुछ सवाल ऐसे होते है,जिनके जवाब कभी नही मिलते...मेरे उस दोस्त ने अपनी जान क्यूँ दी...ये कभी किसी को पता नही चल पाया...उसके माँ-बाप को मैने अपने आँखो के सामने रोते हुए देखा.......

"क्या हुआ..."

"हाां, कुछ नही..."

"ए.सी. ऑन है,लेकिन फिर भी तुम पसीने से भरे हो..."

"कुछ नही,एक बुरा ख्वाब याद आ गया था नींद मे...."

उस वक़्त सब कुछ उल्टा हो गया था,जहाँ कुछ देर पहले तक निशा को मेरी ज़रूरत था ,अब वही मुझे उसकी ज़रूरत थी....

उस वक़्त सब कुछ उल्टा हो गया था,जहा कुछ देर पहले तक निशा को मेरी ज़रूरत थी ,अब वही मुझे उसकी ज़रूरत थी....

कभी-कभी एक बुरा ख्वाब एक बुरी हक़ीक़त बनकर सामने आता है, वो इतना बुरा और भयानक होता है कि हमारे ज़िंदगी को सहारा देने वाले तमाम पहलुओ को एक पल मे तोड़कर बिखेर देता है.....उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था, मेरे उस बुरे ख्वाब ने सुबह होते ही सच की सफेद चादर पहनकर मेरी ज़िंदगी मे कुछ पल के लिए अंधेरा कर दिया था....वो डेड ड्रीम मेरे लिए खास भी था और साथ मे डरावना भी....

वो खास इसलिए था क्यूंकी वही मेरा एक ऐसा ख्वाब था ,जो सच हुआ था और डरावना इसलिए क्यूंकी मैं उसमे शामिल था ! आज ये पहली बार नही था,जब मुझे वो दिन याद आया था, अक्सर जाने-अंजाने मे वो याद मुझे आ ही जाती थी और बीते कुछ सालो मे मैने इससे निपटने का तरीका भी ढूँढ लिया था, और उसी तरीके को मैं अभी निशा की बगल मे लेटकर अपनाने जा रहा था...मैने वो कहानी वही से सोचना शुरू कर दिया, जहाँ तक मैने वरुण को सुनाई थी....कितना अजीब इत्तेफ़ाक है कि मैने अब भी आँखे बंद कर रक्खी है और उस दिन जब अरुण गर्ल'स हॉस्टिल से आया तब भी मैं अपनी आँखे बंद करके बिस्तर पर लेटा हुआ था.....

"कौन है बे लवडा...बीसी , भाग जा वरना बॅमबू घुसा दूँगा पिच्छवाड़े मे..."जब किसी ने दरवाज़ा बेहद ही ज़ोर से खटखटाया तब मैने गाली बाकी....साला अच्छा ख़ासा दीपिका मॅम के साथ लॅब वाले सीन को याद कर रहा था.....

"अरमान, मैं हूँ अरुण..."

"तो..."मैने बेड पर लेटे हुए ही कहा"तू कहीं का तोपचंद है क्या,चल भाग यहाँ से,शाम को आना..."

"बीसी, भू को उस मोटी भैंस ने पकड़ लिया है...."

"रुक ,खोलता हूँ दरवाज़ा..."

उठकर मैने रूम का दरवाज़ा खोला और अरुण की तरफ नज़र घुमाई , साले की पूरी फटी पड़ी थी,...

"क्या हुआ बे, लड़कियो ने नकली लंड लगाकर चोद दिया क्या..."

"हट सामने से..."मुझे ज़ोर से धक्का देते हुए अरुण रूम के अंदर आया और बिस्तर पर अपना सर पकड़ कर बैठ गया

"चुद गये यार,अरमान...भू तो गया काम से, कल प्रिन्सिपल उसे लात मार के निकाल देगा...."

माँ कसम मुझे उस वक़्त ज़रा सा भी दुख नही हुआ ,जब अरुण ने कहा कि भू को प्रिन्सिपल कॉलेज से लात मारकर निकाल देगा, जबकि वो मेरे खास दोस्त का खास दोस्त था...मैं उसके बगल मे बैठा और झूठा दुख दिखाते हुए बोला"क्या हुआ..."

"तू साले गे वाली हरकते मत कर अभी खिसक ले इधर से,मेरा मुंडा गरम है..."

"गान्ड मरा,..."वहाँ से उठकर मैं अपने बेड पर वापस पसर गया और आँखे बंद करके वापस दीपिका मॅम के बारे मे सोचने लगा....

वैसे तो 3 हफ्ते बाद हमारा एग्ज़ॅम था ,इसलिए मुझे पढ़ाई के बारे मे सोचना चाहिए था,लेकिन उस वक़्त मैं दीपिका के बारे मे सोच रहा था, और जब दीपिका से बोर हो गया तो,विभा और एश का नंबर आया.......
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उसके करीब एक घंटे बाद भू गान्ड जैसी शकल बनाकर हमारे रूम मे घुसा और घुसते ही ,उसने अपना नया चश्मा, ,अरुण के पैर मे फेकते हुए बोला"तुझे बोला था ,मैने कि चल,वापस चल...वो मोटी सांड़ आ रही है,लेकिन तू...वही रुका रहा और मैं फँस गया..."

"सॉरी,यार...मुझे मालूम नही था..."

"क्या सॉरी,उसने कल प्रिन्सिपल के सामने बुलाया है...वो तो मुझे लड़कियो से पिटवाने भी वाली थी...लेकिन ऐन मौके पर सीडार और अपना चूतिया वॉर्डन पहुच गये...वरना लड़कियो से मार खाने के बाद मैं खुद ही कॉलेज छोड़ देता...."

"ये भोपु..."मैने उसके मज़े लेते हुए कहा"तुझे मालूम है कि तूने अभी -अभी अपने 500 के चश्मे को ज़मीन मे पटक कर छल्लि-छल्लि कर दिया है...."

"य्ाआआआ......"भू अपने दोनो हाथ फैलाकर ऐसे चिल्लाया जैसे जंग के मैदान मे कोई योद्धा दहाड़ मार रहा हो....वो आगे बोला"बीसी,500 का नुकसान.... "

"कुछ सोच बे अरमान..."

"बदले मे क्या मिलेगा..."मैने पुछा...

"ले मेरी गान्ड मार लेना,..."भू गुस्से से बोला..

"डिनाइड...कुछ और "

"क्या"

"तेरे आइटम की गान्ड..."बोलते हुए मैं हंस पड़ा,लेकिन अरुण और भू को गुस्से से उबलता देख मैं शांत हुआ और बोला"सॉरी,मज़ाक कर रहा था..."

"प्लान क्या है..."

मैने एक सिगरेट जलाई और धुआ भू के फेस पर डालकर बोला"याद है ,एक दिन हम तीनो ऐसे ही बात कर रहे थे,तो तूने कहा था कि तूने फॉर्म मे ग़लत नंबर. डाला है..."

"हां तो,इससे भू का क्या लेना देना..."अरुण ने पुछा...

"तो फिर भू ने ताव मे आकर क्या कहा था,याद है "

"यही कि, भू ने फॉर्म मे स्विच ऑफ वाला मोबाइल नंबर. डाला है..."

"तो यदि जैसा मैने सोचा है उसके अनुसार, हमारा गुरु घंताल प्रिन्सिपल,भू के घर मे कॉल करेगा...और पहले वो फॉर्म मे से नंबर निकाल कर कॉल करेगा ,और जब वो नंबर स्विच ऑफ बताएगा तो वो फिर भू से उसके बाप का नंबर माँगेगा..."

"एक मिनट. तुझे कैसे मालूम कि वो प्रिन्सिपल इसके बाप का नंबर माँगेगा..."

"अबे उल्लू, प्रिन्सिपल इसके बाप का कोई रिश्तेदार तो है नही ,जो नंबर मोबाइल मे सेव करके रखेगा..वो इसी से इसके बाप का नंबर पुछेगा और इस वक़्त ये प्रिन्सिपल को मेरा मोबाइल नंबर देगा और खेल ख़त्म..."

"और यदि ऐसा नही हुआ तो..."भू बोला...

"90 % ऐसा होने की प्रॉबबिलिटी है...और यदि ऐसा नही हुआ तो फिर भू गया काम से..."
.
अगली सुबह भू, गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन के साथ प्रिन्सिपल के ऑफीस मे किसी मुज़रिम की तरह खड़ा था, भू जब से गया था, तब से मैं पूरे हॉस्टिल मे घंटे हुए अपनी आवाज़ को भारी करने की प्रॅक्टीस कर रहा था...तभी जेब मे रक्खा मोबाइल बजने लगा ,और जो सोचा था वही हुआ, कॉल हमारे प्रिन्सिपल आर.एस. तिवारी की थी....

"हेलो, कौन..."आवाज़ बदल कर मैने कॉल रिसीव की...

"आर.एस. तिवारी स्पीकिंग...आप भूपेश के फादर बोल रहे है..."

"यस, आप कौन..."

"आर.एस. तिवारी....शायद आपने मेरे नेम पर गौर नही किया..."

"आर.एस. तिवारी...ह्म्म्म्"कुछ देर मैं कुछ नही बोला...

"हेलो..."मेरे गुरु घंताल प्रिन्सिपल ने दूसरी तरफ से बोला"हेलो...हेलो...आपका सुपुत्र कल शाम के वक़्त गर्ल्स हॉस्टिल मे पकड़ा गया, ये वहाँ क्या कर रहा था,ये आप इसी से पुछ लीजिए"कहते हुए प्रिन्सिपल ने मोबाइल भू को थमा दिया...

"हेलो, पापा..."

"हां बोलो बेटा...बीसी, तू कॉलेज लौंदियो के हॉस्टिल मे जाने के लिए गया है, तू रुक अभी आकर तेरी गान्ड तोड़ता है...."भू को गाली बकते हुए मैने कहा"अबे चूतिए, शकल ऐसी बना जैसे कि तुझे फोन मे सच मुच की गाली मिल रही है...."

उसके बाद मैने कुछ देर तक और भू को डांटा और फिर बोला"अब मोबाइल दूसरे चूतिए के हाथ मे दे..."

"कौन दूसरा.."

"आर.एस. तिवारी को मोबाइल पकड़ा..."

भू ने वैसा ही किया, उसके बाद जैसे ही प्रिन्सिपल सर ने एक बार हेलो किया, तो मैं नोन-स्टॉप सॉरी...सॉरी बोलने लगा...
"सॉरी, सर मैने आपको पहचाना नही, उसके लिए सॉरी सर...उससे ग़लती हो गयी...नेक्स्ट टाइम से वो ऐसा नही करेगा...."

"आप दो तीन दिन के अंदर यहाँ आ सकते है क्या, "

"क्या "जब प्रिन्सिपल ने ये कहा तो मेरी फॅट के हाथ मे आ गयी ,मैने तो ऐसा सोचा तक नही था कि वो भू के बाप को कॉलेज मे बुला भी सकता है....

"अभी तो मैं काम के बहुत फँसा हुआ हूँ,...प्लीज़ सर, आप उसे माफ़ कर दीजिए..."

"यदि आप यही लाइन ,यहाँ मेरे सामने आकर बोलॉगे तो बात बन सकती है..."

"गये बेटा काम से..."

"आपने कुछ कहा..."

"नही...नही,..."

मैं कान मे मोबाइल लगाकर सोचने लगा कि अब क्या करूँ , जिस दीवार के पास खड़ा था ,उसपर अपना सर भी दे मारा,लेकिन फिर भी कोई आइडिया भेजे मे नही घुसा, उल्टा सर और दर्द करने लगा ,और मैं दर्द से कराह उठा...
"आर यू ओके..."
"यस, आइ'म ओके..."
"आंड हाउ ईज़ एवेरिबडी अट होम? "
"एवेरिबडी ईज़ फाइन आंड ईटिंग समोसा..."

मैं मोबाइल रखने ही वाला था कि ,अचानक मुझे आर.एस. तिवारी की वो लाइन याद आ गयी, जो उसने अभी से कुछ देर पहले कहा था"हाउ ईज़ एवेरिबडी अट होम? "
मैं तुरंत चिल्लाया "एक मिनट. सर..."
"यस, कहिए..."

"भू की दादी की तबीयत अचानक खराब हो गया है, उसे हॉस्पियाल ले जाना पड़ेगा....आप प्लीज़ ,आप प्लीज़ उसे कुछ मत बताना, वरना वो टेन्षन मे आकर पढ़ाई नही करेगा,बहुत सेंटी लड़का है....और प्लीज़ इस बार उसकी ग़लती को इग्नोर कर दीजिए.."

इसके बाद मैने कॉल डिसकनेक्ट कर दी, जो मुझे करना था,वो मैने कर दिया था...अब सब किस्मत के हाथ मे था कि आगे क्या होता है, शायद वो एमोशनल होकर भू को इस बार अवाय्ड कर दे....और ये भी हो सकता था कि उस मोटी भैंस के कहने पर प्रिन्सिपल सर भू को लंबी छुट्टी पर भेज दे....जो कुछ भी होना था, वो अब आकर भू ही बताता ,इसलिए मैं बिंदास होकर अपने रूम मे घुसा....
"बात हुई..."
"यस "
"क्या बोला, प्रिन्सिपल ने..."
"खुद जाके पुछ ले..."
"मेरा नाम तो नही लिया भू ने..."
"वही आके बताएगा..."
अभी कुछ ही देर हुए थे कि भू ने एक लात ज़ोर से दरवाज़े पर मारा ,जिसका असर उसके पैर पर भी हुआ, वो अपने पैर सहलाता हुआ खुशी से अंदर आया और मुझे उठाने की कोशिश की......लेकिन उठा नही पाया

"अबे तूने तिवारी से ऐसा क्या कह मारा कि, एकदम प्यार से उसने मुझे भेजा, और साथ मे ये हिदायत भी दी कि मैं नेक्स्ट टाइम से ऐसी वैसी फालतू की हरकत ना करूँ..."

"मैने उससे बोला कि,यदि वो इस टॉपिक पर और बोलेगा तो मैं उसका रेप कर दूँगा...."शान से वहाँ बैठ कर मैं आगे बोला...

"चल जो कुछ भी बोला हो,उससे मुझे क्या....मैं बच गया, वही बहुत है, और इसी खुशी मे एश डार्लिंग की एक न्यूज़ सुन....वो अपने फॅमिली के साथ कुछ दिन के लिए आउट ऑफ सिटी जा रही है...."

"घंटा...चोदु मत बना..."

"परसो मैने लड़की की एक फेक आइडी से उससे चॅट की थी...तभी मुझे मालूम चला"

"साले ,कुत्ते...यही खबर मिली थी सुनने को...भाग यहाँ से वरना ,नीचे मैं पॉइंट पर ऐसा लात मारूँगा कि अंडे का आमलेट बन जाएगा...चल फुट"

"एक और न्यूज़ है..."वो अरुण को सुनाते हुए बोला"कल से फर्स्ट एअर की कॉलेज बंद...आज प्रिन्सिपल फोन मे किसी से कह रहा था,तभी मैने सुना...."

"ये साला....यानी कि अब तीन हफ़्तो तक दीपिका मॅम भी नही दिखेगी "

"भाड़ मे जाए दीपिका, साली रंडी है एक नंबर की...उसे चोदने से अच्छा मूठ मार ले...."

"तू बीसी भाग जा,यहाँ से...वरना लवडा फेक कर मारूँगा तो सारा......."बोलते हुए मैं रुक गया

"नही जाउन्गा, बोल क्या उखाड़ लेगा..."अपना अंदर धंसा हुआ सीना चौड़ा करते हुए भू बोला....

"अबे झनडुलाल, जितना तेरा बाइसेप्स है ना...उससे ज़्यादा मोटा मेरा लंड है...भाग जा यहाँ से वरना मूह मे घुसा दूँगा...."

"चुप होज़ा,वरना यही पटक कर कपड़े की तरह धोउंगा..."

"तू साले ऐसे नही मानेगा..."बोलते हुए मैने उठाया और उसे उसके रूम मे पटक कर बाहर से रूम लॉक कर दिया....
"अब यही सडता रह,जब तक तेरा चूतिया रूम पार्ट्नर नही आ जाता, हुहम साले कल के लौन्डे मुझसे पंगा लेते है...."
Reply
08-18-2019, 01:32 PM,
#38
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
जैसे-जैसे एग्ज़ॅम के दिन पास आ रहे थे,वैसे-वैसे ठंड भी बढ़ने लगी थी...कयि साल पहले सर्दी के मौसम की एक बड़ी असरदार कहावत सुनी थी मैने और वो ये थी कि....सर्दी के मौसम मे नींद बहुत झक्काश आती है, एक बार जो सोए तो उठने का मन ही नही करता...लेकिन ये झक्कास नींद उसे ही आती है,जिसके पास रहने के लिए घर हो और ठंड से बचने के लिए रज़ाई या कंबल....जिसके पास ये होता है,वो मस्त आराम की नींद लेता है और जिसके पास ये दोनो चीज़ नही होती वो ऐसा सो जाता है कि फिर कभी उठता नही....मेरे पास रहने के लिए घर और ओढ़ने के लिए कंबल ,दोनो थे...इसलिए मुझे तो नींद झक्कास वाली ही आनी थी.....
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उस दिन के बाद मैने एक दिन भी कॉलेज के दर्शन नही किए, दिन भर या तो रूम मे पड़ा रहता या फिर सीडार के साथ बैठकर गप्पे मारता, इस वक़्त ना तो मेरे पास एश थी, ना ही दीपिका मॅम और ना ही विभा....इन तीनो का एग्ज़ॅम से कुछ दिन पहले मेरे आस-पास ना होना मेरे लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकता था, क्यूंकी इस सिचुयेशन मे मैं सिर्फ़ सोता,ख़ाता ,पीता और मूठ मारता...इन सब कामो के बावज़ूद इतना समय था कि मैं जबरदस्त तरीके से हर एक सब्जेक्ट की तैयारी कर लेता, लेकिन मैने बिल्कुल भी ऐसा नही किया....मैं हर दिन सुबह से शाम हॉस्टिल के बाहर की हरियाली मे टहलता रहता और पढ़ने की बजाय , मैं क्यूँ नही पढ़ता इसकी वजह ढूंढता रहा.....
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और जब सेकेंड क्लास टेस्ट शुरू हुए तो मैने बहुत ज़ोर से कुल्हाड़ी अपने पैर पर मारी, मैने एक भी टेस्ट नही दिया....मैं जानता था कि ये सब ग़लत है,मुझे ऐसा नही करना चाहिए...ऐसा करके मैं खुद को खाई की तरफ धकेल रहा हूँ....मैं सब कुछ जानता था और हर तरीके से जानता था ,लेकिन मैने फिर भी वही किया जो मुझे नही करना चाहिए था.....मैने पूरा का पूरा सेकेंड इंट्नल्स अटेंड नही किया, अरुण हर दिन एग्ज़ॅम देकर आता और मुझे गालियाँ बकता , लेकिन मैने उसे झूठ कह दिया था कि मेरी तबीयत बहुत खराब है,बैठने तक की हिम्मत नही है....अरुण कोई दूध पीता बच्चा नही था, वो जानता था कि मैं सिर्फ़ बहाना मार रहा हूँ,लेकिन वो मुझे बोलता भी तो कितना,...उसने मुझे धमकी भी दी कि यदि मैं अगले पेपर से कॉलेज नही गया तो मेरे घर कॉल करके सब बता देगा....
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जब कुल्हाड़ी मार ही ली थी तो फरसा मारने मे क्या जाता है, अबकी बार मैने फरसा मारते हुए उससे कहा कि ,यदि उसने मेरे घर कॉल किया तो मैं उसके घर कॉल करके बता दूँगा कि वो रोजाना गर्ल्स हॉस्टिल मे छुप छुप कर जाता है.....बस फिर क्या था,बात बन गयी, हमारे बीच ये डील फिक्स हुई कि ना तो मैं उसके घर कॉल करूँगा और ना ही वो मेरे घर कॉल करेगा...मेरा एग्ज़ॅम फॉर्म भी उसी ने भरा, और एग्ज़ॅम के दो दिन पहले वो अड्मिट कार्ड मुझे देते हुए बोला...
"एग्ज़ॅम कब से है, मालूम है ना..."
"दो दिन बाद..."
"फर्स्ट पेपर सिविल का है..."
"चल बाइ, थॅंक्स...आता हूँ सिगरेट फूक के..."
उसके हाथ से अड्मिट कार्ड लेकर मैने ऐसे ही टेबल पर फेक दिया और रूम से निकल कर सीनियर हॉस्टिल की तरफ बढ़ा....कुछ दिन से मैं अपने सीनियर्स के साथ रात रात भर रहता और बकर्चोदि करता...सोने और जागने का कोई टाइम नही था...जब नींद लगे तो वो हमारे लिए रात हो जाती थी ,और जब आँख खुले तो वो हमारी सुबह....उस वक़्त मैने दुनिया के हिसाब से ना चलकर ,एक खुद की पर्सनल दुनिया बना ली थी,जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ़ मैं था, मेरे मन मे जो भी आता, वो मैं करता....मेरे ऐसा करने पर दूसरो पर क्या एफेक्ट करता है, उससे मुझे कोई लेना -देना नही था,....
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ऐसा करते -करते एक दिन और बीत गये और एग्ज़ॅम शुरू होने मे सिर्फ़ एक दिन बचा था, रात को सोचा कि अपुन तो ब्रिलियेंट है,एक दिन मे ख़त्म कर दूँगा....उस रात मैं पूरे 12 घंटे तक सोया, और सुबह जब नींद खुली तो एक घबराहट ने मुझे घेर रक्खा था...मैने उठते ही अरुण से, जो कि इस वक़्त बुक खोलकर बैठा हुआ था, उससे मैने टाइम पुछा..
"अभी सुबह के 4 बजे है, और सोजा...जब 12 बाज जाएँगे तब मैं उठा दूँगा...."
"अबे टाइम बता ना..."
"10 बजे है..."
"एमसी, कल पेपर है, और अभी तक कुछ पढ़ा नही....तू एक काम कर, मैं जब तक बाथरूम से आता हूँ,तू मेरी बुक पकड़ और इंपॉर्टेंट क्वेस्चन्स मार्क कर दे..."
"हेलो...."मैं बिस्तर से नीचे उतर ही रहा था की अरुण बोला"मेरे पास इतना टाइम नही है...अभी पूरा का पूरा 3 यूनिट बाकी है..."
"एक यूनिट मे मार्क कर दे, 1 मिनट. लगेगा..."बोलते हुए मैं रूम से बाहर आया...
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उस दिन एक नयी चीज़ मुझे पता चली...और वो ये कि मैं रत्ती भर भी होशियार नही हूँ, एक क्वेस्चन एक घंटे मे याद हो रहा था और उसके बाद यदि आगे के दो चार पढ़ लो, तो साला पीछे क्या पढ़ा है,ये नही मालूम था....बीच बीच मे मैं बुक के राइटर की,क्लास की टीचर की माँ-बहन करता और जब मन फिर भी नही भरता तो अरुण को गाली देता....इसका नतीज़ा ये हुआ कि अरुण ने कान मे हेडफोन लगाया और फिर पढ़ने लगा....मेरी हालत बहुत ही बेकार थी,शाम के 7 बज गये थे,लेकिन अभी सिर्फ़ एक ही चॅप्टर याद हुआ था, और उसमे भी कोई गारंटी नही थी कि उस चॅप्टर के क्वेस्चन यदि एग्ज़ॅम मे आए तो बन ही जाएँगे......वाकई मे उस वक़्त मुझे वो दिन याद आने लगे ,जिसे मैने यूँ ही बर्बाद कर दिया था,अब मुझे अहसास होने लगा था कि कल के पेपर मे मैं ज़िंदगी मे पहली बार फैल होने वाला हूँ.....
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"फैल..."ये ऐसा एक शब्द था, जिससे मुझे नफ़रत तो नही थी,लेकिन फिर भी ये मुझसे आज तक दूर ही रहा,...मैने कयि लड़कों की मारक्शीट मे लाल स्याही से ये वर्ड छपा हुआ देखा,लेकिन अपने करीब कभी नही पाया,...उस वक़्त मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ एग्ज़ॅम नज़र आ रहा था, दीपिका मॅम, विभा और एश का यदि ख़याल भूल के भी आ जाता तो मैं चिल्ला -चिल्ला कर इन तीनो को गाली देता और कहता कि सालियो ने मेरा पूरा समय बर्बाद कर दिया...ना ये तीनो मुझे दिखती और ना ही मैं ऐसे लफडे मे फँसता....बीसी तीनो का मर्डर कर देना चाहिए....
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उस एक वक़्त मैं सच मे थोड़ा पागल हो गया था, जहाँ मुझे मेडितेशन की ज़रूरत थी मैने वहाँ गालियों और सिगरेट से काम लिया,..कयि बार तो ये ख़याल आया कि कहीं भाग जाता हूँ और सीधे एग्ज़ॅम के बाद आउन्गा, लेकिन इसका कोई फ़ायदा नही था...क्यूंकी नेक्स्ट सेमेस्टर मे मुझे 12 पेपर्स देने पड़ते,उस वक़्त मैने पढ़ने के सिवा सब कुछ किया, पढ़ाई मे ध्यान लगे इसलिए आँखे बंद करके तीन-तीन बार गायत्री मन्त्र, सरस्वती मंत्र भी पढ़ा...लेकिन सब बेकार....जैसे जैसे रात हो रही थी, मैं उस रात की गहराई मे पागलो की तरह चिल्ला रहा था, उस वक़्त मैं ऐसा बन चुका था कि यदि कोई मुझे मेरा नाम लेकर भी पुकारे तो मैं उस साले की वही ऑन दा स्पॉट ,हत्या कर दूं.....लेकिन उसके पहले मेरी हत्या करने के लिए एक कॉल आया....
"कल से एग्ज़ॅम शुरू है..."
"हां..."
"सब कुछ पढ़ लिया..."
"नही लास्ट का कुछ पोर्षन बचा है...."
ये मेरी मोम की कॉल थी, जिन्होने एग्ज़ॅम के ठीक 43 हज़ार 200 सेकेंड्स पहले मुझे कॉल किया था, यानी की रात के 10 बजे...उस वक़्त ले देके कैसे भी करके मैने 2 चॅप्टर कंप्लीट किया था...लेकिन हालत आयाराम और गयाराम वाली थी...यानी कि उस वक़्त एक क्वेस्चन कोई पुच्छ दे तो उसका जवाब देने के लिए मुझे बुक देखना पड़े....

"माँ कसम क्या हालत बन गयी है मेरी...."मैं उस वक़्त भूल गया था कि लाइन पर दूसरी तरफ भी कोई है...

"क्या हुआ अरमान..?"
"कुछ..कुछ नही..."घबराते हुए मैं बोला"सब ठीक है, "

"ठीक है फिर,अच्छे से पेपर देना और हां ,वो पांडे जी की बेटी से ज़्यादा नंबर लाना.."
"ओके.....और कुछ.."
"और सुन, "इसके बाद उनकी उस लाइन ने मेरा कलेज़ा फाड़ के रख दिया ,"बदनाम मत करना, कल ही तेरे पापा अपने दोस्त के सामने तेरी बधाई कर रहे थे कि तू अभी तक अपने स्कूल मे टॉप मारते आया है..."
"हाा....."
"चल ठीक है...खाना खाया..."
"ना...हां..ना...धत्त तेरी, हां खा लिया...अब रखता हूँ, "

उसके बाद जैसे जिस्म मे बहता खून सूख गया हो, मेरी हालत और खराब हो गयी और मैं अपने बाल नॉचकर ज़ोर से चिल्लाया....मैने रूम के सारे सिगरेट के पॅकेट को एक जगह रक्खा और उसपर माचिस मार दी , उस वक़्त मैं उन सबको फॅक्टर्स को दोषी करार दे रहा था,जिन्होने मुझे अभी तक पढ़ने नही दिया था....सिवाय खुद के, जबकि इस मशीन को खराब करने वाला मैं फॅक्टर मैं खुद था.


उस एक कॉल ने मुझे इतना डरा दिया ,जितना मैं खुद नही डरा था....ना जाने घरवाले मुझे लेकर क्या क्या अरमान लिए बैठे थे और यहाँ मैं उनके अरमानो पर एक झूठी बुनियाद की परत चढ़ा था...हॉस्टिल के जिस रूम मे मैं रहता था,इस वक़्त उस रूम के बीच-ओ-बीच अभी मैने आग सुलगा कर रक्खी थी...मेरे जहाँ मे सिर्फ़ एक ख़याल था कि जब रिज़ल्ट आएगा तो मैं क्या कहूँगा घरवालो से...उन्हे क्या एक्सक्यूस दूँगा,

"बीमार हो गया था"ऐसा बोल दूँगा, मैने सोचा...लेकिन ये कुछ फिट नही हुआ....इसके बाद कयि और आइडियास आए,लेकिन एक भी ढंग का नही था...और मैने दो घंटे और ऐसे ही बर्बाद कर दिया, टाइम देखा तो रात के 12 बज रहे थे....अरुण अब भी कान मे हेडफोन घुसा कर पढ़ने मे बिज़ी था,ना तो वो मेरी हरकते देख रहा था और ना ही कुछ बोल रहा था...साला कमीना,कुत्ता

मैं अभी तक रूम मे बहुत कुछ कर चुका था...लेकिन वो तब से चुप चाप पड़ा था और जब 1 बज गया तो अरुण ने पढ़ना बंद किया और मेरे पास आकर बोला...
"और ले मज़े, जब पढ़ने को बोल रहा था तो होशियारी पेल रहा था..."
"यही बोलने तू अपने बेड से उठकर मेरे बेड पर आया है..."
जवाब मे अरुण ने मेरी बुक उठाई और हर यूनिट मे 3-3 क्वेस्चन मार्क करके बोला"हर साल इनमे से एक आ ही जाता है, सुबह उठकर पढ़ लेना और 2-2 नंबर वाले देख लेना...पेपर आराम से निकल जाएगा...."
"सच मे पेपर निकल जाएगा..."
"खून से लिखकर दूं क्या अब"
"थॅंक्स यार..."
सोया तो मैं एक बजे था, लेकिन फिर भी मेरी नींद सुबह के चार बजे अपने आप खुल गयी, आज ना ही सर दर्द दे रहा था और ना ही सुबह उठते ही करने की इच्छा हो रही थी ,कुल मिलाकर कहे तो एग्ज़ॅम के कारण पूरी फटी पड़ी थी...मैने उठते ही बुक खोली और अरुण के बताए क्वेस्चन को रट्ता मारने लगा, रट्ता इसलिए क्यूंकी समझने का टाइम नही था, मैने न्यूयीमेयरिकल तक को याद कर लिया और जैसे-जैसे क्वेस्चन याद होते जाते, मेरा कॉन्फिडेन्स बढ़ने लगा और एक बार मैं फिर से चिल्लाकर बोला"यदि दो दिन पहले से पढ़ता तो साला मैं तो टॉप मार देता..."
.
सुबह हुई और एग्ज़ॅम का टाइम भी आया, लेकिन एग्ज़ॅमिनेशन टाइम के ठीक आधा घंटे पहले मुझे होश आया कि ना तो मेरे पास पेन है और ना ही पेन्सिल...

"दो पेन है..."तैयार होते हुए मैने अरुण से पुछा...
"ब्लॅक है, चलेगा..."
"दौदेगा...."उसके हाथ से पेन लेकर मैने शर्ट की जेब मे रक्खा और बोला"पेन्सिल है..."
"एक ही है...."
"गुड, बीच से तोड़ के दे..."
जब पेन्सिल को बीच से तोड़ने के लिए मैने कहा तो अरुण मुझे घूर्ने लगा...
"अब तू एक पेन्सिल के लिए मत रो बे, पैसे ले लेना..."
इसके बाद मैने आधी टूटी हुई पेन्सिल भी शर्ट की जेब मे डाली...
"भाई, एरेसर भी बीच से काटकर देना,वो भी नही है"
अरुण ने अपने दाँत पिसे और फिर बीच से एरेसर काट कर दिया....अब मेरे पास सिर्फ़ एक चीज़ नही थी,वो थी "कटर" मैने एक बार फिर अरुण की तरफ देखा...
"अब और कुछ मत माँग लेना..."
"चल कोई बात नही, आगे-पीछे वालो से माँग लूँगा..."
उसके बाद मुझे ख़याल आया कि अड्मिट कार्ड तो लिया ही नही, और सब काम छोड़कर मैं अड्मिट कार्ड ढूँढने लगा, लेकिन अड्मिट कार्ड कही मिल नही रहा था...एक तो वैसे भी देर हो रही थी उपर से एक और प्राब्लम.....
"बीसी, ये अड्मिट कार्ड कहाँ गया, अरुण तूने देखा क्या..."
"अबे चुप, रिविषन मार रहा हूँ, डिस्टर्ब मत कर...."
मैने बहुत ढूँढा, टेबल पर रक्खी हुई हर एक चीज़ को उलटा-पुल्टा कर देखा, टेबल के उपर नीचे,आगे पीछे हर जगह देखा...खुद के और अरुण के बिस्तर को तहस नहस भी कर दिया लेकिन अड्मिट कार्ड कही नही मिला, एग्ज़ॅम की टेन्षन पहले से ही थी और अब अड्मिट कार्ड का नया झमेला....
"अरुण, तू भी ढूँढ ना ,शायद कहीं मिल जाए..."
"आ स्माल रेक्टॅंग्युलर ब्लॉक टिपिकली मेड ऑफ फाइयर्ड ऑर सन-ड्राइड क्ले, यूज़्ड इन बिल्डिंग...."वो मेरी तरफ देखकर याद करते हुए बोला...
"अबे, अड्मिट ढूँढ मेरा,मालूम नही कल कहाँ रक्खा था..."
"आ स्माल रेक्टॅंग्युलर ब्लॉक टिपिकली मेड ऑफ फाइयर्ड ओर सुन-ड्राइड क्ले, यूज़्ड इन बिल्डिंग"
"बोसे ड्के..."
"बोसे ड्के ,ये ब्रिक की डेफिनेशन है,पढ़ ले...एग्ज़ॅम का फर्स्ट क्वेस्चन यहिच होगा..."
"अच्छा, ले एक बार फिर बोल तो..."
ब्रिक की डेफिनेशन याद करने के बाद मैं फिर अड्मिट कार्ड इधर-उधर देखने लगा, और जब रूम मे कही नही मिला तो मैं रूम से निकलकर आस-पास वाले रूम मे जाकर पुछने लगा कि मेरा अड्मिट कार्ड यहाँ तो नही छूटा है, और जब कभी नही मिला तो मैं मूह लटका कर रूम मे आया....
"मिला..."
"लवडा मिला..."
"ये ले, "बोलते हुए अरुण ने मेरा अड्मिट कार्ड मुझे थमाया और बोला"तेरे ही टेबल पर था...."
"सचöनें डंक..."
"ये कौन सी गाली दी तूने..."
"थॅंक्स बोला, सचöनें डॅंक को जर्मन मे थॅंक यू कहते है..."
"कक्के, पेपर इंग्लीश मे ही देना "
Reply
08-18-2019, 01:32 PM,
#39
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
उसके बाद हम दोनो वहाँ से कॉलेज के लिए निकले, जहा हमारी सीटिंग अरेंज्मेंट थी, उस क्लास के बाहर सभी अपने हाथ मे बुक्स,नोट्स पकड़ कर खड़े हुए थे, उन्हे देखकर तो मेरी एक बार और फॅट गयी,कैसे भी करके मैने खुद को संभाला, और एग्ज़ॅम हॉल के अंदर देखा, वहाँ एक यमराज का रूप लिए हुए एक टीचर चेयर पर बैठा हुआ था, जिसके आजू-बाजू बहुत कुछ रक्खा हुआ था...इस वक़्त एग्ज़ॅम हॉल मुझे कुरुक्शेत्र लग रहा था,जिसमे 5 मिनट. के बाद मुझे युद्ध करने जाना था....परेशानी ये थी कि आज इस अर्जुन के साथ श्रीकृष्ण नही थे......
.
मैं एकदम राइट टाइम पर क्लास के अंदर घुसा और फिर वो वक़्त भी आया जब क्वेस्चन पेपर बाँटा गया, मुझे जब क्वेस्चन पेपर मिला तो मैं कुछ देर तक क्वेस्चन पेपर के फ्रंट पेज को ही देख कर ना जाने क्या सोचने लगा, उस वक़्त बीसी ना जाने कैसे-कैसे ख़याल आने लगे...कभी नेक्स्ट वीक रिलीस होने वाली मूवी का नेम याद आता तो कभी कोई सॅड सॉंग, फिर अचानक ही वेलकम पार्टी की यादें ताज़ा हो गयी, उसके बाद मैने आज तक जितनी बीएफ देखी थी ,वो मेरे आँखो के सामने चलने लगी और इस पर बॉलीवुड के कुछ गानो ने चार चाँद लगा दिए.....वो गाने कुछ ऐसे थे
"अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर,
हर ज़ुल्म मिटाने को एक मसीहा निकलता है
जिसे लोग शाहेंशाह कहते हैं..."


"दिल ने तुमको चुन लिया है, तुम भी इसको चुनो ना..."
"मुझे पीने का शौक नही,पीता हूँ गम भूलाने को..."

इन गानो ने पीछा छोड़ा तो धर्मेन्द्र पाजी का डाइलॉग"बसंती इन कुत्तो के सामने मत नाचना..."
उसके बाद हनी सिंग भी आ गये और मैं अंदर ही अंदर गला फाड़ कर चिल्लाया "चूस मेरा लवडा ,चूस चूस लवडा ,जैसे आलू का पकोड़ा..."
"हाई माइ नेम इस फादू सिंग...."
.
.
"बीसी,मैं यहाँ पेपर देने आया हूँ, या गाना गाने...."मैं बहुत ही बुरी तरह से खुद पर झल्लाया और गुस्से से एक लात खुद की बेंच पर दे मारी....

"क्या प्राब्लम है..."उस यमराज टीचर ने मुझसे पुछा...

"कुछ नही सर"(बीसी आँखे नीचे कर,वरना यही चोद दूँगा...)

उसके बाद आन्सर शीट मे मैं अपना नाव,गाँव भरा,लेकिन तभी श्रीमान फाडू सिंग मेरे ख़यालात मे डुबकी मार लिए.....
"काश कोई मिल जाए,थक चुका हूँ मैं, दूर दूर से देख देख के पक चुका हूँ मैं...."
.
"बीसी अब नही..."मैने अपना सर पकड़ लिया लेकिन तभी कल रात की कॉल याद गयी,जिसमे मेरी माँ ने कहा था कि"बदनाम मत करना और पांडे जी की बेटी से अधिक नंबर लाना..."

."गान्ड चुदाये पांडे और उसकी बेटी"
मेरा इस वक़्त मन कर रहा था कि मैं बेंच उठाऊ और उसे अपने सर पर दे मारू , या फिर मेरे हाथ मे जो पेन है उसको आगे वाली की गान्ड मे घुसा दूं या फिर अपने सर मे पेल दूं....और इसी खुशी मे मैने शर्ट की जेब से पेन्सिल का आधा टुकड़ा निकाला और गुस्से मे उसके दो टुकड़े कर दिए....बीसी सब ऐसे शांत बैठे थे,जैसे अर्थी पर लेटे हो,मेरे पेन्सिल तोड़ने की आवाज़ तुरंत पूरे क्लास रूम मे गूँज उठी...और यमराज ने एक बार फिर मुझे घूरा....
"सॉरी सर "यमराज को देख कर मैने कहा और क्वेस्चन पेपर की तरफ देखा....उसी वक़्त एक नज़र घड़ी पर पड़ी तो देखा कि आधा घंटा तो इसी मे निकल गया है...
"माइंडफक..."
.
.
"जा रहे हो..."जब मैं निशा के रूम से जाने के लिए हुआ तो वो बोली....
मेरी तरह वो खुद भी जानती थी कि मुझे जाना तो है ही, इसलिए उसने मुझे रुकने के लिए ना कहकर सिर्फ़ इतना ही पुछा....
"जाना तो पड़ेगा ,निशा...पर वादा करता हूँ,वापस ज़रूर आउन्गा..."


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मेरे इस जवाब पर वो सिर्फ़ मुझे देखती रही, इस वक़्त वो क्या सोच रही थी शायद मैं जानता था...लेकिन वो वक़्त ही ऐसा था कि मैं चाहकर भी वहाँ नही रुक पाया,वो अपनी आँखो मे उदासी का गहरा सबब लिए उलझन मे फँसी मेरे सामने खड़ी थी.....उसे उस हालत मे देखकर जी किया कि उसे खुद से लिपटा लूं और कभी ना छोड़ू...वो शायद अंदर ही अंदर ये बोल भी रही थी कि मैं ना जाउ....

उसकी इस हालत को मैं बखूबी समझ रहा था,क्यूंकी एक दिन मैं भी ऐसे ही किसी के सामने खड़ा था और यही दुआ माँग रहा था कि वो ना जाए ! उस वक़्त मेरे मूह से एक शब्द तक नही निकला, मैं उसका नाम लेकर ना तो उसे पुकार पाया और ना ही उसे रोक पाया और वो हमेशा के लिए मुझसे दूर चली गयी, साला कभी -कभी एक नाम इतना ज़ख़्म दे जाता है कि उसके बाद उस ज़ख़्म पर दुनिया भर की सारी दुआ ,दुनिया भर की सारी दवा बेअसर हो जाती है,इस वक़्त भी कुछ कुछ ऐसा ही हो रहा था...मैं अब भी निशा के सामने खड़ा था और वो अब भी मुझे देख रही थी......
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इश्क़ की राहों मे टूटकर बिखरे कुछ अरमान इस तरह की मौत ने मरने से पहले सारी दास्तान पुछि और जब सारी दास्तान, सारे दर्द मौत को सुनाया तो वो सर से कफ़न हटाकर ये बोलकर चला गया कि "अब यदि तेरे करीब और रहा तो,मौत को भी मौत आ जाएगी....."
.
"चलता हूँ, मेरे पास इतना बड़ा घर नही है...जहाँ आराम से बैठकर खाना खाया जाए, अभी जाकर लोहा पिघलाना है...."
वो फिर चुप रही, वो मुझे ऐसे देख रही थी,जैसे की आख़िरी बार देख रही हो और इसके बाद वो मुझे कभी देख ही नही पाएगी.....मैं उसके करीब गया और उसकी कमर मे हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर बोला...
"तेरे घर मे नौकर भूत है क्या,जो कभी दिखते नही..या फिर घर का सारा काम तुझे करना पड़ता है...."जाते-जाते उसके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते हुए मैने कहा...."चल आजा, कल रात वाला गेम खेलते है..."
मेरा ऐसा कहना था की उसने तुरंत इनकार करते हुए अपनी गर्दन राइट तो लेफ्ट कर दी....
"मज़ाक कर रहा हूँ, बाद मे मिलता हूँ...बाइ"
बोलते हुए मैं निशा के घर से बाहर आया और जब गेट के पास पहुचा तो वहाँ हमेशा अपने छोटे से रूम मे रहने वाले चौकीदार ने मुझे घूरा, जवाब मे मैने भी उसे आँखे दिखाई.....
"चल भाग यहाँ से..."
"बेटा अच्छे से पहरा दे,वरना इस महीने की पगर काट लूँगा...."बोलकर मैं वहाँ से हँसते हुए दौड़ा और अपने फ्लॅट पर पहुचा.....
.
"क्या बेटा, बहुत रापचिक माल सेट करके रक्खी है...मेरा भी जुगाड़ है क्या..."
"मर्डर कर देगी तेरा वो, "सोफे पर बैठकर मैने अरुण से कहा"वैसे टाइम क्या हुआ है..."
"11 बज चुके है...."
"आज भी लेट "
"जल्दी से इनफॉर्म कर दे,वरना वो तुझे लात मार के निकाल देंगे...."
"एक काम करता हूँ...."वरुण की तरफ देखकर मैने कहा"जैसे वरुण ने छुट्टी ले रक्खी है,मैं भी कुछ दिनो के लिए छुट्टी ले लेता हूँ....क्या बोलता है..."
"सुपर्ब आइडिया....इसी खुशी मे पापा बोल..."
" "
लगातार दो दिन से दारू पी-पी कर हम तीनो बोर हो गये थे ,और आज दारू पीने का मन वैसे भी नही था....जहाँ एक तरफ निशा से झूठ बोलकर मैं यहाँ गप्पे लड़ा रहा था, वही वो शायद शाम होने का इंतेज़ार कर रही थी....
"तेरे फर्स्ट सेमेस्टर के एग्ज़ॅम तक का सारा कांड अरुण ने कल रात मे बता दिया..."सिगरेट जलाने के लिए उसने मुझसे माचिस माँगी , लेकिन जब माचिस नही मिली तो मैने उसके मूह से सिगरेट निकाल कर अपने मूह मे डाली और बोला "अब देख मैं सिगरेट जलाता हूँ...."
उसके बाद मैने गॅस का लाइटर उठाया और गॅस जलाकर सिगरेट सुलगाई......
"तू दीपिका को पेल पाया कि नही...और विभा का क्या हुआ था..."
"डाइरेक्ट रिज़ल्ट बताऊ या फिर क्लास चलकर लेक्चर सुनाऊ...."
"मज़ा तो डाइरेक्ट रिज़ल्ट मे है ,लेकिन फिर भी लेक्चर ही सुना...."
"अरुण, तू ब्रेक फास्ट तैयार कर...."
.
एग्ज़ॅम बीसी इतने बुरे गये थे कि मैं किसी एक पेपर तक मे स्योर नही था की क्लियर हो जाएगा...कभी-कभी रात को सपने मे मैं देखता की मेरी 6 मे 6 बॅक लग चुकी है.... फाइनली एग्ज़ॅम ख़त्म हुआ और लास्ट पेपर जिस दिन था उस दिन मैं सुबह से ही खुश था...क्यूंकी आज के बाद मेरे गर्दन पर इतने दिनो से लटका हुआ एग्ज़ॅम का घंटा उतरने वाला था और मैं रिज़ल्ट आने तक तो ऐश कर ही सकता था.....आख़िरी पेपर देने के बाद मैं ऐसे खुश था जैसे कि मैं पूरा यूनिवर्स अपने कब्ज़े मे कर लिया हो...ना ही दोपहर मे नींद लगी और ना ही भूख...सोचा कि मूठ ही मार लिया जाए लेकिन वो करने का भी मन नही किया, बहुत देर तक पकड़ कर हिलाते रहने के बावज़ूद भी जब नही गिरा तो मेरा हाथ दर्द देने लगा और मैने मूठ मारना छोड़ दिया


उस दिन मुझे अहसास हुआ कि वाकाई मे मेरी एफीशियेन्सी सॉलिड है,...उस दिन की दोपहर बड़ी मुश्किल से गुज़री ,शाम होते तक हमने कही घूमने घामने का प्लान बनाया...और ये फिक्स हुआ कि शहर के सबसे बड़े माल मे जाएँगे...लेकिन तभी अरुण बोला...
"बार चलते है,..."
बार का नाम सुनकर मैं और भू एक दूसरे का मूह ताकने लगे, क्यूंकी हमने अभी तक सोचा भी नही था कि हमे बार भी जाना चाहिए,बार आज तक मैने सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देखे थे या फिर किसी दूसरे के मूह से सुना रख था और मुझे इतना मालूम चल चुका था कि अंदर दारू बहुत महँगी मिलती है....मैने पर्स मे नज़र डाली , पैसा भरपूर था ,और वैसे भी जब तक जेब मे दस हज़ार का मोबाइल हो तो घबराने की क्या ज़रूरत, मैने अपनी गर्दन हां मे हिलाई...फिर क्या था, कही से बाइक जुगाड़ की और रात को 9 बजते ही बार के लिए निकल गये......
"यार अरुण, ये बार वाले बीसी पैसा बहुत लेते है दारू-वारू के...."
"अब क्या करेगा देना तो पड़ेगा ही..."
"गाड़ी साइड मे रोक एक धाँसू आइडिया आएला है भेजे मे...."
मेरे कहने पर जब अरुण ने बाइक सड़क के किनारे रोक दी तब मैं बोला"अपन तीनो बाहर से ही दारू पीकर चलते है, मस्त नशे मे टन होकर जाएँगे...."
"सोच ले, कही वेलकम पार्टी की तरह कुछ उल्टा सीधा हुआ तो..."
"कुछ नही होगा,यदि कुछ हुआ तो मैं सब संभाल लूँगा..."भू बीच मे सीना चौड़ा करते हुए बोला और जोश जोश मे तुरंत अपने जेब से 200 निकाल कर मुझे पकड़ाया और एक बोतल एम.डी. लाने के लिए कहा.......
"अबे किसी ढाबे मे चलकर पीते है,उस दिन की तरह नही...साला हॅंगओवर मार देता है...शुक्र मनाओ कि वो नीम के पेड़ के नीचे वाली लड़की दिखी नही ,वरना पकड़ के भरती वो...."
"अब चले...."
"चलो, दौड़ो,भागो...."
फिर एक ढाबे पर रुक कर हमने खाना खाया और शराब की तीन बोतल खाली की और वहाँ पैसे देकर बाइक की तरफ बढ़े....
"अरुण...बाइक मैं चलाउन्गा..."मैं बोला. इस वक़्त मैं उन दोनो से थोड़ा पीछे था...
"बेटा आँख खुल नही रही, गाड़ी क्या चलाएगा..."
"तेरी तो..."मैने अरुण के हाथ से बाइक की चाभी ली और बाइक पर सामने बैठकर उन दोनो को पीछे बैठने के लिए कहा,
"यार अरमान, बाइक गर्ल्स हॉस्टिल की तरफ ले ,उस ताडकासुर की गान्ड मारनी है...उस दिन गर्ल्स हॉस्टिल मे उसी ने मुझे एक झापड़ मारा था...."

"अबे चुप भू, अभी बार जाना है..."अरुण भू के सर पर एक हाथ पेलते हुए बोला....और इस वक़्त मैं मस्त आराम से रात के 10 बजे बाइक चला रहा था, और जब सिटी से कट कर अपने कॉलेज वाले जुंगली रास्ते पर आए तो ,उधर सामने से जो भी आता ,या सामने जो भी दिखता उसे भरपूर गाली देते और बोलते कि"दम है तो उखाड़ के दिखा..."

एक ने पुछा भी क्या उखाडू तो मैने कहा"अपना लवडा उखाड़ के दिखा"
जैसे जैसे कॉलेज की तरफ मैं बाइक दौड़ा रहा था, स्पीड बढ़ती जा रही थी और मेरी आँख बंद हो रही थी...मुझे ऐसे लगने लगा जैसे कि मैं एक सूपर हीरो हूँ और दुनिया को बचाने के लिए जल्दी से जल्दी कॉलेज पहुचना है...मैने अपनी एक आँख बंद करके आक्सेलरेटर और पेल दिया...और बाइक सीधे गर्ल्स हॉस्टिल के बाहर रोकी.....

"अबे ताडकासुर ,निकल बाहर....."बोलकर मैं सिगरेट जलाने लगा...
लेकिन भू को कुछ ज़्यादा ही गुस्सा आ गया और उसने दो चार पत्थर उठाकर हॉस्टिल की तरफ फेंके...और हर बार काँच टूटने की आवाज़ हुई , और उसके तुरंत बाद कुत्तो के भोकने की आवाज़ आई और वहाँ का चौकीदार हमारी तरफ बढ़ा ,जिसे हमने दूर से देख लिया....

"भाग बीसी, वरना तुझे भी मारूँगा..."बोलते हुए भू ने चौकीदार पर भी पत्थर बरसाना शुरू कर दिया ,लेकिन जब वो अपने डंडे को बॅट बनाकर क्रिकेट खेलने लगा तो हमे वहाँ से भागना पड़ा...गाड़ी अब भी मैं ही चला रहा था...मैं वहाँ से भागने के पहले ज़ोर ज़ोर से चिल्लाया...
"ओये मोटी भैंस ,मेरा नाम गौतम है, मेकॅनिकल सेकेंड एअर...गान्ड मे दम हो तो उखाड़ लेना...."
.
"अबे अब तो वो गौतम गया, बीसी..."
"चल बोल पापा.....और ये बीसी बाइक क्यूँ रो रही है...."
"पेट्रोल ख़त्म हो गया होगा..."


"क्या...ऐसे मे तो ठुकाई हो जाएगी..."मैं बाइक को हिलाते हुए पेट्रोल चेक करने लगा....लेकिन बाइक नही हिली, अरुण और भू जो सवार थे
"अबे उतर..."
जब वो दोनो बाइक से उतर गये तो मैने बाइक पूरी ताक़त से हिलाई ,इतनी ताक़त से हिलाई कि मैं खुद हिल गया और बाइक के साथ नीचे ज़मीन पर आ गिरा......
"ये बीसी, बाइक की माँ की...कौन लाया ये ख़तरी बाइक..."
"ज़्यादा लगी तो नही..."
"मर्द हूँ, ऐसी छोटे मोटे ज़ख़्मो का असर नही होता...."झूठ बोलते हुए मैने कहा,...इतनी देर मे एक शाकस गर्ल्स हॉस्टिल के तरफ वाली रोड से हमपर तौरछ मरने लगा...

"ये बीसी, तौरछ कौन मार रहा है, हम तीनो पर..."
हम तीनो उस टॉर्च दिखाने वाले को गालियाँ देने लगे और तभी भू ने अपने 1200 का टॉर्च चालू करके हम पर रोशनी मारने वाले के उपर फोकस किया.....
"अबे भाग ये तो चौकीदार है गर्ल्स हॉस्टिल का...."भू वहाँ से भागते हुए बोला....
"निकाल बंदूक और मार गोली इसकी गान्ड मे..."अरुण बोला....

"बंदूक नही मिज़ाइल छोड़ते है, साले के उपर...यही चिथड़े-चिथड़े हो जाएँगे इसके शरीर के...."मैने भी गर्रा कर कहा....
गर्ल्स हॉस्टिल का चौकीदार जो कुछ देर पहले हमारी तरफ आ रहा था,वो जहाँ था वही रुक गया ,और एक बार फिर हम पर लाइट मारी....
"गौतम...."मैने जानबूझकर अरुण को गौतम कहकर पुकारा"गौतम, बॉम्ब फोड़ दे साले के उपर...."
"अभी फोड़ता है..."
वो चौकीदार अब भी वहाँ खड़ा हमे देख रहा था, उसके आगे आने की हिम्मत नही हो रही थी, तभी मैने नीचे झुककर एक पत्थर उठाया और उसकी तरफ फेंका....
"आआआआ....."चिल्लाते हुआ चौकीदार वहाँ से भाग गया....
.
"भू लंड....कहाँ घुसा है भू लंड..."
"स्शह...इधर हूँ "
"बीसी, अपने 1200 का लाइट जला...."
उसके बाद अब हम तीनो के सामने परेशानी ये थी कि पेट्रोल लेने कौन जाए....पेट्रोल पंप वहाँ से 2 से 3 कि.मी. दूर था और इस वक़्त हम तीनो एक सुनसान सड़क पर खड़े थे...जहा हमे किसी का डर नही था
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08-18-2019, 01:33 PM,
#40
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
पहले तो पेट्रोल लाने का काम हम तीनो ने एकदुसरे पर थोपा...लेकिन सिंगल जाने के लिए जब हम तीनो मे से कोई भी राज़ी नही हुआ तो प्लान ये बना कि हम तीनो बाइक को लुढ़काते हुए पेट्रोल पंप तक ले जाएँगे, वहाँ पेट्रोल भरवा कर ,बार जाएँगे और बार मे डिस्को दीवानी पर डॅन्स करेंगे.......
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कॉलेज के हॉस्टिल हाइवे से थोडा अंदर था ,अभी हम तीनो उसी रोड पर थे,इसलिए पहला काम ये था कि कैसे भी करके हाइवे पर आना...जहाँ हम खड़े थे ,वहाँ से हाइवे को जोड़ने वाले सिर्फ़ दो रास्ते थे, एक रास्ता गर्ल्स हॉस्टिल के जस्ट सामने से होकर निकलता था तो दूसरा जंगल के अंदर की भूल भुलैया से होकर जाता था....गर्ल्स हॉस्टिल के सामने इस वक़्त बहुत लोग जमा हो गये होंगे और उनमे से कही कोई हमे पहचान ना ले, इसका डर था....वैसे भी एलेक्षन और वेलकम पार्टी के बाद मैं काफ़ी फेमस हो गया था, इसलिए उस रास्ते से हाइवे तक जाना खुद को गोली मारने के बराबर था.....इसलिए हम तीनो वहाँ से तुरंत जंगल के अंदर कट लिए, ताकि गर्ल्स हॉस्टिल से कोई झाँके तो हमे देख ना पाए....अरुण इस वक़्त बाइक लुढ़का रहा था और मैं सिगरेट के कश मारते हुए अरुण से आगे का रास्ता पुछ रहा था.....
"चल लवडा ,गर्ल्स हॉस्टिल की लड़कियो को चोद के आते है..."भू एकदम अचानक से भड़क कर बोला,...
"क्या हुआ बे..."
"चोदने का मन कर रहा है,किसी को.."
"एक काम कर पैंट की ज़ीब खोल ,लवडा निकाल...और हिलाना शुरू कर दे...अंधेरा है,कोई नही देख पाएगा...."
"अबे अरुण, ये तू उस भूत्नि वाले रास्ते से क्यूँ ले जा रहा है..."मेरी बात को इग्नोर करते हुए भू चिल्लाया...
"यही एक रास्ता है..."
"बीसी, वो आत्मा हम तीनो को दिख गयी तो....गला काट कर पेड़ पर लटका देगी..."
"ऐसा क्या..."मैं बोला"मैने ये भी सुना है,कि जिसकी हाइट कम होती है...उसका कलेजा काटकर वो खा जाती है"
"कम हाइट मतलब......मैं...अबे हट"
बाइक लुढ़का-लुढ़का कर हम तीनो उस नीम के पेड़ के पास पहुचे ,जहाँ पर एक लड़की लोगो को किताब लिए हुए दिखाई देती थी...."
"अरुण,रुक...मूत के आता हूँ..."बोलकर मैं उसी नीम के पेड़ के ठीक नीचे गया और मूत्कर आया, मुझे ऐसा करते देख अरुण और भू भी वहाँ पहुचे और मूत कर हम तीनो जंगल वाली रोड के अंदर घुसे.....
"यार अरमान...अब वो लौंडिया,नीम के पेड़ के नीचे पढ़ नही पाएगी..."
"वो क्यूँ..."
"हम तीनो ने जो कर दिया है वहाँ...उसकी बदबू से वो कुछ स्टडी नही कर पाएगी ,सो सॅड "
"सब साला चूतियापा है, कोई भूत चूत नही है उधर...वरना दो बार हम वहाँ गये,वो हमे दिखी क्यूँ नही..."
"किसी ने एक बार भी नीम के पेड़ के उपर नज़र मारी थी क्या..."इतनी देर मे भू बोला...जिसे सुनकर हम तीनो के कदम वही के वही रुक गये,...
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भू सही कह रहा था, हम तीनो ने पेड़ के उपर एक बार भी नही देखा था,..और इस वक़्त अंजाने मे ही मुझे ऐसा लगने लगा कि वो लौंडिया,उस नीम के पेड़ के उपर बैठी थी....
"एक बार देख के आएँ क्या,..."भू ने एक बार फिर अपना मूह फाडा...
साला अभी तक मैं और अरुण कितना डेरिंग बन रहे थे,लेकिन अब हम दोनो की हालत ख़स्ता हो गयी थी, अरुण का तो पता नही,लेकिन मेरी सिचुयेशन ऐसी थी कि मुड़कर पीछे देखने तक की हिम्मत नही थी,और रही सही कसर वहाँ बहने वाली हवाओं ने पूरी कर दी....जैसे ही हमारे पीछे कुछ हलचल हुई ,हम तीनो वहाँ से तेज़ी से खिसक लिए...अरुण बाइक का हॅंडल संभाले बाइक दौड़ा रहा था और मैं,भू बाइक को पीछे से धक्का दे रहे थे......
.
हाइवे की डाइरेक्षन हमे मालूम थी,इसलिए हम तीनो उसी तरफ बढ़े, और थोड़ी ही देर मे टीचर्स के सरकारी घर नज़र आने लगे तो हम तीनो ने चैन की साँस ली....
"वाकई मे फट गयी थी बे..."हाइवे पर आकर मैं हान्फते हुए बोला..."भू पहले, तू अपना मूह बंद करके रक्खा कर...खा म्खा गान्ड फाड़ दी..."
.
वहाँ से पेट्रोल पंप तक पहुचने मे हमे मुश्किल से 15 मिंट. लगे, बाइक की टांक पेट्रोल से फुल करवाई और बाइक पर बैठे....शुरू-शुरू मे तो हमने सोचा था कि शांति से सारीफो की तरह पेट्रोल भरवा कर पैसे देंगे और वहाँ से चलते बनेंगे...लेकिन अचानक ही अरुण को ना जाने क्या सूझा वो मेरे कान मे फुसफुसाया...
"अबे चल भाग चलते है...बिना पैसे दिए..."
"सच मे..."
"हां..."
"एक मिनट. भैया, बाइक आगे बढ़ाकर पैसे देता हूँ..."बोलकर मैने बाइक कम स्पीड मे थोड़ा आगे बढ़ाई और फिर ज़ोर से आक्सेलरेटर देकर वहाँ से रफू चक्कर हो गये....अपनी इस हरकत पर हम तीनो ही पेट पकड़ कर हंस पड़े


हँसते-खेलते, सड़क पर चल रहे लोगो को गरियाते हुए हम तीनो बार पहुचे...बार का नेम था" इंपीरीयल ब्लू...."
"आए, साला ये तो दारू के नाम पर बार का नाम है..."अरुण बाइक से उतरकर बोला,
भू अब भी बाइक पर सवार था और जैसे ही वो बाइक पर से उतरा,धडाम से ज़मीन पर गिर गया....
"अबे साले, भोपु...ऐसी गान्डुल हरकते करेगा तो बार वाले अंदर नही घुसने देंगे..."
"*** चोद दूँगा सबकी... "अपना एक हाथ बार की तरफ करके भू बोला"मज़ाल किसकी जो मुझको अंदर आने से रोके..."
"ओये अरुण, ये खुद को जंगल का राजा तो समझ रहा है"
"मेरे को भी यही लगिंग...चल आजा अंदर चलते है...."

भू के बाए साइड मैं और दाए साइड अरुण खड़ा हुआ, हम दोनो ने उसे पकड़ रक्खा था,ताकि वो बार के पहलवानो के सामने आंदु पांडु हरकते ना करे.....हमारा प्लान कामयाब रहा, हम तीनो बिना किसी रोक टोक के अंदर घुसे....मैं पहली बार किसी डिस्को बार के अंदर आया था,इसलिए मैं हद से ज़्यादा एग्ज़ाइटेड था...मैं बार के अंदर पौवा पीकर झूमने वाली लड़कियो को देखना चाहता था और फिर एकदम फिल्मी स्टाइल मे जो भी हॉट आइटम नशे मे दिखे,उसके साथ डॅन्स करना चाहता था....मैं अभी ये सब सोच ही रहा था कि हमारे जंगल के राजा भू महाशय ने जोरदार सीटी बजाई और जहाँ खड़े थे वही अपना लंगर डॅन्स शुरू कर दिया कुछ लोग जो डॅन्स करने मे बिज़ी थे, उन्होने तो कोई गौर नही किया...लेकिन वहाँ बहुत से लोग मतलब कि कपल्स ऐसे थे जो टेबल पर बैठकर आराम से बाते कर रहे थे...वो भू की इस हरकत पर हंस पड़े.....एक और चीज़ जो मैने नोटीस कि वो ये कि वहाँ सबसे खराब कपड़े हमी तीनो के थे...बार मे काम करने वाले वेटर्स तक ने भी चमचमाता सूट पहन रक्खा था......दारू पीकर तो फुल टल्ली थे,इसलिए जहाँ छोटे-छोटे ग्लास मे दारू मिल रहा था ,हमने उस तरफ देखा तक नही और सीधे आकर एक टेबल पर बैठ गये.....
.
"एक्सक्यूस मी सर , वुड यू लाइक सम्तिंग टू ईट ऑर ड्रिंक...." सफेद सूट पहने हुए एक शक्स हमारे पास आया,
"मेरा नाम है अरुण..."अरुण ने उसको देखकर कहा"ये है अरमान, और ये है भू...इसका वैसे पूरा नाम भूपेश है, लेकिन शॉर्ट मे हमलोग इसे भू कहते है...
"ओके..."
"ये है अरमान ,इसे प्यार से लोग अरमान ही कहते है..."
"ओके "
"आंड मैं हूँ अरुण ,मुझे भी लोग प्यार से अरुण ही कहते है..."
"ओके , वुड यू लाइक सम्तिंग टू ईट ऑर ड्रिंक"
"हां चाहिए ना..."
"क्या..."
"तीनो के लिए भरपेट पानी ला..."इसी के साथ हम तीनो ज़ोर से हंस पड़े,...
"नाइस जोक..."
"ये बुरमरी के, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई,हमारे सामने ज़ुबान खोलने की, भाग जाओ यहाँ से वरना हम तुम्हे मौत की सज़ा देंगे..."भू एकदम राजा वाली स्टाइल मे बोला....

"गार्ड्स...."उसने बाहर खड़े पहलवानो को आवाज़ दी और उसके तुरंत बाद हम तीनो बाहर निकाल दिए गये....
.


हम तीनो को अपनी ये बेज़्जती बर्दाश्त नही हो रही थी कि ,किसी ने हमे धक्के मारकर....एक ने तो लात भी मारी थी बाहर निकाल दिया,..मूड तीनो का खराब था,लेकिन क्या करे,हम मे इतनी ताक़त भी तो नही थी कि बाहर खड़े उन पहलवानो को पेल सके...लेकिन उन्हे मारे बिना दिल भी बेचैन हुआ जा रहा था,...

"अबे मैं बाइक चलाता हूँ,तुम दोनो एक-एक पत्थर उठा लो..."एक दम धीरे से अरुण बोला"और जब बाइक पर बैठ जाए, तो पूरी ताक़त से उन गार्ड्स पर पत्थर फेक देना, बीसी उनका सर फॅट जाना चाहिए,,,."

अरुण ने बाइक की हॅंडल संभाली और मैं, भू पत्थर ढूँढने लगे...लेकिन साली किस्मत ही खराब थी,आस-पास कोई भी ढंग का पत्थर नही मिला.....
"एक काम करते है,थोड़ी दूर चलकर पत्थर उठाते है और फिर इन सालो को ठोकते है...."
"मस्त प्लान है"
उसके बाद हमने बिल्कुल वैसा ही किया, हम तीनो थोड़ा आगे गये और एक-एक पत्थर उठाकर कर वापस बार के सामने खड़े हुए....बार के बाहर खड़े पहलवानो ने हमे आँख दिखाई और तभी हमने अपना काम कर दिया, भू ने सीधे पेट मे दागा और मैने एक आँख बंद की ,मुझे इस वक़्त सिर्फ़ और सिर्फ़ उस पहलवान का टकला दिखाई दे रहा था...इसलिए मेरा निशाना ठीक उसके सर पर जा लगा....बाइक तो चालू ही थी, इसलिए इस कारनामे के बाद हम तीनो वहाँ से तुरंत फुर्र हो गये....और एक बार फिर हम तीनो पेट पकड़ कर हंस रहे थे......
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