Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
11-09-2019, 11:53 AM,
#11
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
एक रात उसके पति का फोन आया कि वह घर नहीं आ रहा है, आफिस में पार्टी है इसलिए वह कल शाम तक
आ पाएगा। वो कभी अकेली नहीं रही थी। इसलिए हमारे पास आई और मेरे दोस्त से बोली- “आज तुम मेरे कमरे में सो जाओ..”
मेरे दोस्त ने मना कर दिया। बोला- “मैं तो आज रात फिल्म देखेंगा..” उसने मेरे से उसके कमरे में सोने को बोला तो मैंने भी मना कर दिया।
भाभी ने बहुत जोर दिया तो मैं दिखावा करता हुआ राजी हो गया। भाभी ने अपने कमरे में मेरे लिए चारपाई पर बिस्तर लगाया और अपने और बेटे के लिए नीचे जमीन पर बिस्तर लगाया। मैं खाना खाने के बाद उनके कमरे
में सोने चला गया।
वो मेरे दोस्त के साथ फिल्म देखने लगी। थोड़ी देर में उनका बेटा सो गया। वो उसे लेकर अपने कमरे में आ गई, उसने मुझे आवाज दी- “राज सो गए क्या?”
मैं- नहीं भाभी, फिल्म देख रहा था। तुम भी देखोगी?
भाभी- कौन सी देख रहे हो अकेले-अकेले?
मैं- भाभी ब्लू-फिल्म देख रहा हूँ। दोस्त के साथ तो देख नहीं सकता। आज मौका मिला है। आप भी देखोगी? मेरे मोबाइल में है।


भाभी बोली- नहीं यार, मैं नहीं देखेंगी। तुम भी सो जाओ, अब रात बहूत हो गई है।
मैं बोला- भाभी, देख लो बहुत अच्छे सीन हैं। फिर आपको मौका नहीं मिलेगा।
भाभी बोली- “नहीं, सो जाओ मुझे नहीं देखनी है...” यह कहकर वो नीचे सो गई।
मैं ब्लू-फिल्म देखकर उत्तेजित हो गया था। मैं हिम्मत करके भाभी के बिस्तर में चला गया और उनके बगल में लेट गया। मैंने उनकी मम्मों पर हाथ रख दिया।
भाभी घबरा गई और बोली- राज, तुम नीचे क्यों आ गए? और यह क्या कर रहे हो?
मैं- भाभी फिल्म देखकर मेरा दिमाग खराब हो गया है। प्लीज मना मत करना। मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ। भाभी बोली- राज, ये ठीक नहीं है। तुम ऊपर चले जाओ।
मैं बोला- भाभी तुम शादी से पहले भी तो चुदवाती थीं, अब क्या परेशानी है? कौन सा तुम्हारे पति को पता चलेगा। प्लीज... बस एक बार और चुदवा लो भाभी। आगे आपसे चुदवाने को कभी नहीं बोलूंगा।।
भाभी बोली- नहीं राज, अब ये सब मैं नहीं करना चाहती।
तब तक मैंने उनकी चूचियां दबानी शुरू कर दी थीं। मैं बोला- “ठीक है भाभी, मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। पर
आप इसे शान्त तो कर सकती हो ना। देखो मेरा क्या बुरा हाल हो गया है...” यह कहकर मैंने पजामा नीचे उतार दिया। मेरा लण्ड अण्डरवियर फाड़ने को तैयार खड़ा था।
भाभी लौड़ा देखकर बोली- ठीक है, मैं तुम्हारा हिला देती हूँ। पर बाकी आगे कुछ और नहीं करना। झड़ने के बाद तुम सीधा चारपाई में जाओगे।
मैं बोला- ठीक है भाभी, मेरे लिए यही काफी है।
भाभी ने मेरा अण्डरवियर उतारा और लण्ड को अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू किया। मुझे औरत के हाथ से मजा तो बहुत आ रहा था। पर भाभी को बोला- “भाभी, बिल्कुल भी मजा नहीं आ रहा है। प्लीज इसे मुँह में लेकर चूसो ना...”
भाभी भी चुदासी सी हो चली थी। सो उसने लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। मैं भाभी की चूचियां दबा रहा था। इसलिए वो भी गरम हो गई।
मैं बोला- “भाभी, चलो चुदवाओ मत। पर हम एक-दूसरे को मजा तो दे ही सकते हैं ना। मुझे अकेले करते ठीक नहीं लग रहा है। मैं आपको भी मजा देना चाहता हूँ..”


भाभी बोली- “ठीक है, पर कैसे?” अब उनकी गरमाई बोल रही थी।
मैं बोला- अभी आप अपने कपड़े उतार दो और आप मेरा लण्ड चूसो। मैं आपकी चूत चूसता हूँ। ऐसे ही मजे लेते
भाभी बोली- हाँ ये सही रहेगा। पर किसी को पता लग गया तो? यार मुझे डर लगता है।
मैं बोला- “मैं किसी को बताऊँगा ही नहीं। आप भी किसी को मत बताना कि आज रात मैं यहाँ था। कोई नहीं जान पाएगा...” यह कहकर मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगा हो गया। अब वो मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं उसकी चूत चचोर रहा था।
थोड़ी देर में ही वो खूब गरम हो गई, मैंने एक उंगली भी चूत में घुसेड़ दी, वो मचल गई। अब उसे खूब मजा
आ रहा था। तब मैंने अपना लण्ड उनके मुँह से निकाल लिया और चूसना और उंगली करना छोड़ दिया। इससे वो पागल सी हो गई। मैं मुँह फेर कर लेट गया, भाभी को मैंने गरम रेत पर छोड़ दिया था, उनकी चूत पानी टपका रही थी।
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11-09-2019, 11:53 AM,
#12
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
भाभी बोली- “राज, बहुत अच्छा लग रहा था और चूसो ना। लण्ड क्यों निकाल दिया तुमने? और उंगली करो। ना..." वह मुझसे लिपट गई और मेरा हाथ अपनी चूचियों पर रखवा लिया। फिर बोली- “राज इन्हें दबाओ न...” वो मेरे और पास खिसक आई। मैं समझ गया कि अब ये चुदवाने को तैयार है, मैं भी उससे चिपक गया। जिससे मेरा लण्ड उसकी चूत के मुहाने से टकराने लगा।
जैसे ही उसे लण्ड का एहसास हुआ उसने खुद हाथ से उसे चूत के मुहाने पर सेट कर लिया।
वो बोली- “प्लीज राज, अब मत तड़फाओ। मैं पागल हो जाऊँगी। तुमने मेरा बुरा हाल कर दिया है। तुम्हें जो करना है, कर लो पर प्यासा मत छोड़ो..."
मैं बोला- भाभी, मुझे तुम्हारी चूत चाहिए, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।
वो बोली- अब कहाँ मना कर रही हूँ, देखो। मैंने तुम्हें खुद रास्ता दिखा दिया है। बस मेरी आग शान्त करो। जल्दी से चोद डालो मुझे।
मैं बोला- “तो ठीक है भाभी, अब चुदाई के मजे लो, और मेरे लण्ड के झूले में प्यार का झूला झूलो..” मैंने उनकी चूत पर लण्ड का दबाव देना शुरू किया। गीली चूत में ‘फच्च' की आवाज से पूरा लण्ड अन्दर चला गया।
भाभी के मुँह से 'आह' निकल गई।
मैंने होंठों से होंठों को लगाया और चोदने की रफ्तार बढ़ा दी। मैं और भाभी दोनों ही चुदासे और प्यासे थे। इसलिए 15 मिनट में ही दोनों खलास हो गए। कुछ देर बाद फिर मैंने उन्हें फिर गरम करना शुरू किया और


फिर उनकी जमकर चुदाई की और सारा माल चूत में भर दिया। उस रात मैंने उन्हें 5 बार चोदा, उनके चेहरे पर
भी सन्तुष्टि के भाव थे।
भाभी बोली- राज, आज रात जो कुछ भी हमारे बीच हुआ। प्लीज़... वो तुम किसी को मत बताना। मैं भी नहीं बताऊँगी कि तुम रात में मेरे साथ सोए थे। प्लीज... नहीं तो मैं बदनाम हो जाऊँगी।
मैं बोला- “ठीक है भाभी। तुम चिन्ता मत करो और खुश रहो...” उसके बाद हम नंगे ही साथ-साथ सो गए।
सुबह उन्होंने मुझे जल्दी उठा दिया, मैंने उनकी एक चुम्मी ली और अपने कमरे में आकर सो गया। उस रात के बाद कभी दुबारा मैंने उनसे चूत देने की जिद नहीं की। कुछ दिनों बाद उन्होंने भी कमरा छोड़ दिया। मैं फिर अकेला रह गया।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#13
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
आपको मालूम है कि जब मैं जमरूदपुर में किराए के मकान में रहता था। दूसरे फ्लोर पर जीने के साथ ही मेरा पहला कमरा था। यह कहानी भी वहीं से शुरू होती है। दोस्तों, अब मैं चूत चोदने में उस्ताद हो गया था। पर फिलहाल अनुपमा के बाद चूत का इन्तजाम नहीं हो पा रहा था। मैं अब नई चूत की तलाश में था। नसीब से वो तलाश भी जल्दी ही पूरी हो गई।
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उसका नाम मीरा था। उम्र 25 साल, और रहने वाली नेपाल की थी, यहाँ दिल्ली में कोठी में बच्चों को सम्भालने का काम करती थी। वह अपनी बड़ी बहन के साथ ठीक मेरे सामने के कमरे में रहती थी। वह और उसकी बहन सिर्फ हफ्ते की छुट्टी या सरकारी छुट्टियों में ही यहाँ मौज मस्ती या पार्टी के लिए आती थी, बाकी पूरा महीना वह कोठी में ही रहती थीं।
मीरा ने नेपाल के ही एक ड्राईवर को यहाँ दिल्ली में पटाया था। जब वो यहाँ कमरे में आती। तभी वो भी एक घण्टे के लिए आता और उसकी प्यास बुझाकर चला जाता।
मीरा देखने में बहुत सुन्दर थी। उसका फिगर किसी हीरोइन से कम नहीं था। वो हमेशा सज-धज कर ही रहती और जीन्स-शर्ट या टाप-स्कर्ट ही पहनती थी, जिससे वह 20 साल की ही लगती थी। उसकी चूचियां कुछ बड़ी थीं। जो हमेशा कपड़ों से बाहर को झलकती रहती थीं।
मैं और मेरा मित्र जो मेरे साथ ही रहता था। तो वह जब भी यहाँ आती। हम दोनों से बातें करती थी इसलिए उससे हम दोनों की ही अच्छी पहचान हो गई थी। मैं उसे पटा कर चोदना चाहता था। पर मौका ही नहीं मिल रहा था। एक बार मेरी किश्मत भी खुल ही गई। वह अपनी छुट्टी के दिन दोपहर में अपने कमरे में आई। पर अपनी चाभी लाना भूल गई। दूसरी चाभी उसकी दीदी के पास थी। जो रात को आती थी।
उसने चाभी भूलने के बारे में अपनी दीदी को बताया। पर उसकी दीदी ने कहा कि वो तो रात तक ही आ सकती है। अब वह परेशान सी बाहर घूम रही थी।

मेरा दोस्त दिन की ड्यूटी गया था और मैं इयूटी करके आ गया था। मैंने बात शुरू की- “मीरा जी, क्या बात हो। गई? क्यों परेशान घूम रही हो। सब ठीक है ना?"
मीरा- देखो ना राज, आज मेरी छुट्टी है और मैं चाभी भूल आई हूँ। दीदी रात तक ही पहुँचेगी। अब मैं क्या करूँ और कहाँ जाऊँ?
मैं बोला- कोई बात नहीं, आप परेशान ना हों। मेरे कमरे में बैठ जाओ। वैसे भी मेरा दोस्त रात को आएगा। आपको यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी। जब आपकी दीदी आएं तब चले जाना।
उसने राहत की सांस ली और वह मेरे कमरे में आ गई। उसने टाप और छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी। इन। कपड़ों में वो कयामत लग रही थी। मन कर रहा था कि अभी पटक कर चोद दें। पर ऐसे कामों में जल्दीबाजी कभी ठीक नहीं होती।
मैंने उसे पानी पिलाया और चाय के लिए पूछा। उसने मना कर दिया। उसका मूड खराब हो गया था। उसने । अपने दोस्त को भी आने को मना कर दिया। वह बड़ी परेशान नजर आ रही थी क्योंकी आज कमरा ना होने के
कारण 3

न्दा इसीलिए आती थी ताकि दीदी के भाने में
पहले वह दोस्त से अपनी प्यास बुझा सके।
मीरा- राज, तुम्हें मेरी वजह से परेशानी हो रही है।
मैंने कहा- अरे नहीं, यह आपका अपना कमरा है। आप आराम कर लो।
मीरा- हाँ... मुझे नींद सी आ रही है क्योंकी बस में मैं खड़े-खड़े आई हूँ और बहुत थक भी गई हैं। क्या मैं थोड़ी देर आराम कर लूं। अगर आपको बुरा ना लगे तो।
मैं- हाँ... हाँ.. क्यों नहीं? आप आराम करो मैं यहीं बाहर जीने में बैठा हूँ।
वह मेरे बिस्तर में सो गई। जल्दी ही उसे थकान के कारण नींद आ गई। मैं भी 20 मिनट बाहर बैठकर उसके बारे में सोचता रहा। मैं पानी की बोतल लेने अन्दर गया तो वह नींद में और भी सुन्दर लग रही थी। उसकी चूचियां सांस लेते वक्त धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थीं। और स्कर्ट नींद में थोड़ा ऊपर हो गई थी।
मेरा ईमान डोल गया। मैंने बाहर आकर देखा तो कोई आस-पास नहीं था। मैंने झट से दरवाजा बंद कर दिया।
और उसके और करीब आ गया। मैंने उसकी स्कर्ट थोड़ा और ऊपर उठाई तो उसकी गुलाबी पैन्टी साफ दिखाई दे रही थी। मेरा हथियार खड़ा होने लगा। मैंने हिम्मत कर एक हाथ से उसकी जाँघों को सहलाया।
वो गहरी नींद में थी उसे पता ही नहीं चला।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#14
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने धीरे से एक हाथ उसकी चूचियों पर रखा और धीरे से दबा दिया। उसकी चूचियां बड़ी नरम थीं। जैसे मैंने रूई पर हाथ रख दिया हो। मेरा मन इतने से नहीं माना। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियां दबाने लगा।
वो थोड़ा सा मचली और सीधी लेट गई।
अब मैं रुकने के मूड में नहीं था। मैंने सोचा ये चुदने तो आई ही थी। आज मुझसे चुदवा लेगी तो क्या हो जाएगा। मैंने उसके गालों पर किस किया। वो अब भी नींद में थी। मैंने आराम से उसके कपड़े खोलने शुरू किए
और टाँगों के बीच सहलाना शुरू किया।
वो शायद इसे सपना समझ रही थी। इसलिए उसने अभी तक कोई हरकत नहीं की थी। मैंने उसकी चूचियों पर दबाव बढ़ाना शुरू किया और चूत सहलाने लगा। अब वो भी गरम हो रही थी। मैंने पैन्टी के किनारे से हाथ डालकर नंगी चूत पर हाथ फिराया। तो वह एकदम गरम थी और गीली भी।
मुझसे अब सहन नहीं हो रहा था। मैंने एक हाथ उसकी ब्रा के अन्दर डाला और चूचियां मसलने लगा और एक उंगली उसकी चूत में घुसेड़ दी। जैसे ही उंगली अन्दर गई। वो झट से उठ गई। जिसे वो सपना समझकर मजे ले रही थी। वो उसके साथ हकीकत में हो रहा था।
मीरा घबरा कर खड़ी हो गई। कहा- “राज तुम यह क्या कर रहे थे, मेरे साथ?”
मैं- “मीरा, रोको मत। जब से तुम्हें देखा है, मैं पागल सा हो गया हूँ। तुम मुझे अच्छी लगती हो। मैं तुम्हें कम से कम एक बार प्यार करना चाहता हूँ। मतलब चोदना चाहता हूँ। देखो तुम्हें देखकर क्या हाल हो गया है मेरा...” मैंने अपना लण्ड उसके सामने खोल दिया।
एक बार उसने उसे गौर से देखा। चूत गीली तो हो ही गई थी। चुदने तो आई ही थी। पर फिर भी उसने मना कर दिया- “नहीं, यह गलत है। मैं उस ड्राइवर से प्यार करती हूँ और शादी भी उसी से करना चाहती हूँ। ये सब भी उसी के साथ करूंगी और किसी के साथ नहीं..."
मैं- “मैंने कब मना किया। शौक से करो पर आज तो वह नहीं आएगा। मुझे ही आज अपना दोस्त मान लो और आज तुम मुझसे चुदवा लो, मेरा लण्ड लेकर तुम उसे भूल जाओगी... यह कहकर मैंने उसकी कमर में हाथ डाल दिया।
मीरा- नहीं यह गलत है। मैं ऐसा नहीं कर सकती, मैं उसे धोखा नहीं देना चाहती, वो भी मुझे चाहता है।
मुझे लगने लगा कि ये भी खड़े लण्ड पर धोखा दे सकती है। मन तो चुदाने का है, पर नखरे कर रही है। इसलिए मैंने ही आगे बढ़ने की सोची। वो मेरे कमरे में थी इसलिए शोर नहीं मचा सकती थी। वो ही बदनाम होती। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। चूचियां मसलने लगा और चूत सहलाने
लगा।


थोड़ी ही देर में उसकी 'ना' जो थी वो 'हाँ' में बदल गई और वह भी मेरा साथ देने लगी।
मैंने भी देरी करना सही नहीं समझा और उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैंने उसे चारपाई पर लिटा दिया उसकी चूत तो पहले से ही गीली थी। मैंने उसकी टाँगें कंधे पर रखीं और हाथ उसकी चूचियों पर लगाए। फिर लण्ड का दबाव चूत पर देने लगा। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। शायद उसने आज ही साफ किए थे। उसकी चूत बहुत छोटी सी थी।
धीरे-धीरे उसने पूरा लण्ड चूत के अन्दर ले लिया। उसे चुदने की आदत थी इसलिए उसे ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था। कुछ ही पलों बाद वो चुदाई के पूरे मजे उछल-उछलकर ले रही थी और मैं भी उसे पेले जा रहा था। धकापेल। जमकर चुदाई करने के बाद मैंने सारा रस उसकी चूत में भरा और शान्त होकर उसके बगल में लेट
गया।
मैंने पूछा- बोलो मीरा कैसा लगा? मैंने तुम्हारे दोस्त की कमी पूरी की कि नहीं?
मीरा- राज, चुदवाने में मजा दोस्त के साथ करने से भी ज्यादा आया। पर राज हमारे बीच जो कुछ भी हुआ। अन्जाने में हुआ। प्लीज अब कभी मेरे साथ ऐसा मत करना। मैं उससे शादी करना चाहती हूँ। कहीं किसी
को पता चल गया तो मैं कहीं की नहीं रहूँगी।
मैं- “मीरा, तुम चिन्ता मत करो। मैं किसी को नहीं बताऊँगा और कभी तुमसे दुबारा जिद भी नहीं करूंगा। जो मजा रजामंदी से मिलता है, वो कहीं नहीं मिलता। मैं माफी चाहता हूँ कि मैंने तुमसे जिद की। क्योंकी तुम्हें चोदे बिना मुझे चैन नहीं मिलने वाला था। मुझसे चुदवाने के लिए शुक्रिया। तुम इसके लिए निश्चिन्त रहो..”
उसके बाद उसने अपने कपड़े पहनने शुरू किए। मैं उसे अब भी देखे ही जा रहा था... क्या जिश्म था उसका। पर इस बात की तसल्ली थी कि वो मेरे लण्ड के नीचे आ ही गई थी।
मैंने भी अपने कपड़े पहने और हम दोनों बाहर आकर जीने में बैठ गए।
चुदाई में तो समय का खयाल ही नहीं रहा। थोड़ी देर में उसकी दीदी आ गई और वह अपने कमरे में चली गई। फिर कुछ दिन बाद उसने अपने दोस्त से शादी कर ली और उसके बाद हम कभी नहीं मिले। पर उसका नंगा जिश्म और उसकी वह यादगार चुदाई हमेशा याद रहेगी।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#15
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
* * * * * * * * * * 07

एक ही घर की सब औरतों की चुदाई

अब मैं अपनी नई कहानियां लेकर हाजिर हूँ। ये सभी कहानियां एक ही परिवार से हैं। इसलिए परिवार के बारे में जानना जरूरी है।
मैंने अपना पहला कमरा छोड़ने के बाद दूसरी जगह कमरा ले लिया। मेरे मकान मालिक की बीवी की सरकारी बैंक में नौकरी होने के कारण वे लोग दिल्ली से बाहर रहते थे। इस घर में उनके बड़े भाई अपनी फेमिली के साथ रहते थे।


उसी में एक कमरा, किचन और बाथरूम मुझे किराए पर मिला था।
उन्हीं के छोटे भाई अपनी फैमिली के साथ पास में ही अलग मकान में रहते थे।
मेरे मकान-मालिक की उम्र 45 साल और उनकी बीबी की उम्र 40 साल थी। उनके दो बच्चे थे। एक लड़की और एक लड़का।
उनके बड़े भाई की तीन लड़कियां और एक लड़का था। दो लड़कियों की शादी हो गई थी। बड़ी लड़की 26 साल
की थी, जिसकी एक लड़की भी थी। और छोटी 23 साल की थी। जिसकी शादी को तीन साल हो गए थे, पर अब तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। उसके बाद 19 साल का भाई था। और सबसे छोटी लड़की की उम्र 18 साल थी।
कहानी तीसरे भाई की बीवी से शुरू होती है। उसका नाम गीता था। उसकी उम्र 30 साल, रंग गोरा था और वो कुछ छोटे कद की थी। उसकी अपने पति से कम ही बनती थी। क्योंकी उसका पति उम्र में उससे 10 साल बड़ा था। उनका एक बीमार बेटा भी था।
गीता ने अपने जिश्म को बहुत संवार कर रखा था, वो देखने में 25 साल की ही लगती थी, उसके बदन में। जबरदस्त कसाव था। जब पहली बार मैंने उसे देखा। तभी सोच लिया था कि इसे जरूर चोदूंगा। वैसे भी पति से ना बनने के कारण उसे भी एक तगड़े लण्ड की सख्त जरूरत थी।
मैंने किसी ना किसी बहाने उसके घर जाना शुरू कर दिया। जल्दी ही हमारी अच्छी बनने लगी। उसे देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। एक बार तो उसने मेरे लण्ड को पैन्ट में तंबू बनाए हुए देख भी लिया था। जिसे मैंने जल्दी ही छुपा लिया था। वो हल्के से मुश्कुरा दी थी और अपने होंठ काटने लगी थी।
उसकी इस अदा से मैं समझ गया कि ये माल पकने में अधिक समय नहीं लेगा। धीरे-धीरे मैंने उससे मजाक करना शुरू किया, जिसका वह बुरा नहीं मानती थी। मैं कभी मजाक में उसके नाजुक अंगों को छू लेता, तो वो मुश्कुरा देती।
मैं उससे उसकी पर्सनल बातें पूछता तो वो उदास होकर उसे टाल जाती। मैं उसे चोदना चाहता हूँ। यह बात शायद वो समझ चुकी थी। पर खुल नहीं रही थी। एक बार मुझे उसके बिस्तर के तकिए के नीचे उसकी काले रंग की ब्रा-पैन्टी रखी मिली। जिसे मैंने उससे नजर बचाकर अपने जेब में रख ली और घर जाकर रात को उसे
याद करके पैन्टी से ही मुठ मारी और सारा माल उसी में गिराया।
अगले दिन जब मैं उनके घर गया तो वो कुछ परेशान दिखी।
मैंने कहा- क्या हुआ भाभी? कुछ परेशान दिख रही हो, कुछ गुम हो गया है क्या?
भाभी- हाँ मेरे तकिए के नीचे से कुछ सामान गायब है। जो मुझे अभी बहुत जरूरी चाहिए था।
मैंने कहा- सामान का नाम बताओ। मैं अभी ढूँढ़कर दे सकता हूँ।


भाभी ने मेरी तरफ मुश्कुराते हुए कहा- मेरी ब्रा-पैन्टी नहीं मिल रही है। मेरे पास दो ही जोड़े थे। अब मुझे नहाने जाना है। क्या करूँ? समझ में ही नहीं आ रहा है।
मैंने शरारत से कहा- तो क्या हुआ? बिना पहने ही बाकी के कपड़े पहन लेना। वैसे आपकी वो चीज मेरे पास है।
भाभी गुस्सा होकर बोलीं- तुम्हारे पास? तुम क्या करोगे उनका? तुम्हारे काम की चीज नहीं है वो।
मैंने कहा- भाभी, आप बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ... जब से आपको देखा है मैं अपने पर कन्ट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ। उसपर कल रात मैंने आपके नाम की मुठ मारी थी। आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
भाभी ने हँसते हुए कहा- अरे ऐसा क्यों करते हो? तुम्हारी गर्ल-फ्रेन्ड नहीं है क्या? उससे अपना काम चलाओ। मेरी पैन्टी क्यों खराब करते हो?
मैंने कहा- नहीं है भाभी, मैं आपको ही अपनी गर्ल-फ्रेन्ड बनाना चाहता हूँ। बनोगी क्या?
भाभी- ठीक है, पहले मेरी ब्रा और पैन्टी वापस करो।
मैंने उन्हें दो जोड़ी नई ब्रा और पैन्टी खरीद कर दे दी। जिसे देखकर वो बहुत खुश हुई। मैं हमेशा उसी समय जाता था। जब उसका पति घर पर नहीं होता था। एक दिन मैं आफिस से घर आया तो देखा कि उनका बेटा हमारे मकान में आया था, इसका मतलब आज भाभी घर पर अकेली थीं, मेरा काम बन सकता था, मैं चुपचाप उनके घर चला गया।
भाभी- अरे तुम इस वक्त यहाँ कैसे?
मैंने कहा- भाभी तुम्हारी याद आ रही थी। इसलिए आफिस से तुम्हें मिलने आ गया।
भाभी- ठीक है तुम बैठो। मैं नहाकर आती हूँ।
वो नहाने चली गई। मैंने फटाफट घर के सारे खिड़कियां और दरवाजे बंद किए और बाथरूम के दरवाजे की दरार से उन्हें नहाते हुए देखने लगा। वो पूरी नंगी होकर नहा रही थी और साबुन को बार-बार अपनी चूत पर और चूचियों पर रगड़ रही थी। इसके साथ ही कभी वो अपनी उंगली चूत में डाल रही थी। वह नहाते वक्त लगभग गरम हो चुकी थी।
मैंने बाहर से ही कहा- भाभी आपकी पीठ पर साबुन लगा दें क्या? आप कहो तो पूरा नहला ही देता हूँ।
भाभी- “ठीक है, एक मिनट रूको..." उन्होंने फटाफट ब्रा और पैन्टी पहनी और दरवाजा खोलकर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गईं।


मैं फटाफट अपने सारे कपड़े खोलकर बाथरूम में घुस गया। जिसका उन्हें पता नहीं था कि मैं उनके पीछे नंगा खड़ा हूँ। मैं साबुन लेकर उनकी गर्दन और पीठ पर लगाने के बहाने सहलाने लगा, उन्हें मजा आ रहा था। मैंने जैसे ही हाथ नीचे लगाना चाहा तो वो मना करने लगी।
मैंने झटके से उन्हें अपनी तरफ घुमाया और उन्हें किस करने लगा। पहले तो वो मुझे नंगा देखकर घबरा गई। फिर मेरा खड़ा लण्ड देखा तो देखती ही रह गई।
बस मेरा काम हो गया था।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#16
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
अब मैं कहाँ मानने वाला था, चुम्बन के साथ-साथ उनके दोनों मम्मों को लगातार दबाने लगा, वो गर्म होने लगी। पर बार-बार कह रही थी- “ना ना मत करो..."
मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत के ऊपर फिराना शुरू कर दिया। तो वह और गरम हो गई और अजीब सी
आवाजें निकालने लगी। फिर वह मेरा साथ देने लगी और मुझे भी चूमने लगी, मैं पैन्टी के अन्दर हाथ डालकर उनकी चूत सहलाने लगा। उनकी चूत पानी छोड़ने लगी थी, मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी, उन्हें मजा
आने लगा।
वो जोर-जोर से आवाजें निकालने लगी। वो बोली- “प्लीज राज, अब मत करो। मैं पागल हो जाऊँगी.”
मैंने उन्हें भी नंगा किया और उनके पूरे शरीर को साबुन के झाग से भर दिया। उन्होंने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया और लण्ड चूसने लगी। मेरा बुरा हाल हो गया था। इसलिए मैंने उन्हें वहीं फर्श पर लिटाया और उनके ऊपर आ गया। मैंने लण्ड को चूत के दरवाजे पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा।
वो चिल्ला उठी- “राज... आराम से... आज बड़े दिनों बाद चुद रही हूँ..”
मैंने उनकी एक ना सुनी और लगातार धक्के लगाने लगा। उनके पूरे शरीर पर साबुन लगे होने के कारण पूरा कमरा ‘फच्च-फच्च' की आवाज से गूंजने लगा।
वो लगातार चिल्लाए जा रही थी और पूरा मजा भी ले रही थी। थोड़ी ही देर में उसका दर्द कम होने लगा और वो नीचे से चूत उछालने लगी, उसे चुदने में बड़ा मजा आ रहा था, वो चुदते समय बहुत आवाज निकाल रही थी। इसलिए मजा दुगुना आ रहा था। कुछ देर के तूफान के बाद दोनों एक साथ ही अपने चरम पर पहुँच गए और मैंने अपने माल से उसकी चूत भर दी।
मैंने कहा- कैसा लगा भाभी? आपको मजा आया या नहीं?
भाभी- “बहुत मजा आया। मुझे पता था कि तुम मुझे चोदना चाहते हो। इसीलिए बार-बार मेरे घर के चक्कर लगा रहे हो। मुझे भी एक घर का ही लण्ड चाहिए था। बाहर चुदने में मेरी बदनामी हो सकती थी। अब तुम मुझे रोज चोदना। मैं कब से प्यासी थी। मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ। मुझे अपने जैसा बच्चा दे दो। मेरे पति की कल से रात की डयूटी है। कल से तुम रात में यहीं सोना...”


मैंने फटाफट उसकी एक बार और चुदाई की और कमरे में वापस आ गया। अगले दिन मैंने मकान-मालिक के बड़े भाई, जो मेरे वाले मकान में ही रहता था, को बता दिया कि मेरे एक दोस्त की तबियत खराब है। इसलिए मुझे कुछ दिन रात को उसी के घर में ही रहना पड़ेगा।
अब तो रात होते ही मैं उनके घर चले जाता और पूरी रात उन्हें जमकर चोदता। एक महीने के अन्दर ही वो प्रेग्नेंन्ट हो गई। इस बीच उन्होंने एक-दो बार अपने पति से भी चुदवाया। ताकि उसे शक ना हो। आज उनके घर में मेरे वीर्य से उत्पन्न एक सुन्दर बेटी है। जो पूर्णतः स्वस्थ है। बेटी आने के बाद उनकी अपने पति से भी अच्छी बनने लगी है इसलिए मैंने उनके पास जाना बंद कर दिया।
मेरी वजह से किसी का घर बस गया। मुझे तो बस इस बात की खुशी है।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#17
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
दोस्तों, मेरा नाम राज शर्मा है। यह कहानी मेरे मकान मालिक के बड़े भाई जो मेरे वाले ही मकान में रहते हैं। उनकी शादीशुदा बड़ी बेटी की चुदाई की है। उसका नाम रश्मि था। उसकी उम्र 26 साल थी। और उसकी एक लड़की भी थी। रश्मि दिखने में बिल्कुल हिरोइन जैसी ही लगती थी।
वह जब भी अपने माँ-बाप के घर आती थी तो मुझे बड़े गौर से देखती थी, वह देखने में बहुत ही शरीफ लगती थी, उसका बातचीत का तरीका भी बहुत अच्छा था, यहाँ आने पर मेरे से भी अच्छी-अच्छी बातें करती थी।
मेरा भी उसके प्रति कोई गलत विचार नहीं था। पर एक दिन मेरा विचार बदल गया।
हमारे छत पर भी एक टायलेट है। एक बार वह कुछ दिनों के लिए यहाँ आई थी। नीचे के टायलेट में शायद कोई गया हुआ था। तो मैं ऊपर छत पर चला गया। वहाँ कम ही कोई जाता था। क्योंकी उसके दरवाजे की कुंडी नहीं लगती थी।
जैसे ही मैंने टायलेट का दरवाजा खोला... तो देखा कि वो टायलेट में पजामा नीचे करके मूतने बैठी थी, उसका मुँह मेरी ही ओर था। दरवाजा खुलते ही मेरी नजर सीधी उसकी चूत पर ही पड़ी जो सीटी की आवाज के साथ पेशाब बाहर निकाल रही थी।
मुझको देखते ही वह एकदम से खड़ी हो गई और अपना पजामा ऊपर खींचने लगी। पर घबराहट में उसका पजामा नीचे गिर गया। अब तो वह पूरी नीचे से नंगी मेरे सामने थी। उसकी नजर शरम से नीचे झुक गई, उसने अब पजामा उठाने की भी कोशिश ना की।
मैंने उसकी पैन्टी और पजामा ऊपर उठाया और उसे कमर में बांध दिया। इसी बीच मैंने हाथ से थोड़ी सी उसकी चूत भी सहला दी। वो नजरें नीचे किए हुए थी। यह सब देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। मैंने अपना खड़ा लण्ड उसी के सामने बाहर निकाला और मूतने लगा।


पेशाब गिरने की आवाज सुनकर उसने अपनी नजरें ऊपर की और मेरे खड़े लण्ड को देखा और फिर नजरें झुका
लीं।
उसको अपना खड़ा लण्ड दिखाने से मेरा काम हो गया था। इसलिए मैं बिना देरी किए टायलेट से बाहर आ गया।
और छत पर उसका इन्तजार करने लगा। वो पास आई तो मैंने उससे बोला- “घबराओ मत... मैं किसी को नहीं बताऊँगा कि मैंने तुम्हें नंगी देखा...”
वो बोली- "प्लीज किसी को मत बताना कि तुमने क्या देखा?”
मैंने कहा- वैसे तुमने भी तो मेरा देखा था। इसलिए हिसाब बराबर हो गया। सच कहूँ तुम्हारी ‘वो' बहुत सुन्दर है। एक बार और देखना चाहता हूँ, फिर कब दिखाओगी?
वो होंठ चबाते हुए बोली- “तुम्हारा भी तो सुन्दर है...” फिर वह शर्मा कर भाग गई।
अब तो पक्का हो गया था कि वह बहुत जल्दी ही चुदने वाली है। पर उसी रात चुदेगी। यह पता नहीं था। मैं । बाथरूम की तरफ खुलने वाले दरवाजे पर कुंडी नहीं लगाता था। ताकि रात में उसके खुलने की आवाज से किसी
को परेशानी ना हो। यह बात उसे भी पता थी।
रात में खा पीकर मैं अपने कमरे में सो गया। आधी रात में मुझे अपनी टाँगों पर कुछ रेंगता सा महसूस हुआ। वह किसी का हाथ था, जो धीरे-धीरे मेरे लण्ड की ओर बढ़ रहा था। मैंने सोने का नाटक करना ही ठीक समझा। उसने धीरे से मेरा पजामा खोल दिया और मेरे लण्ड को सहलाना शुरू किया। तभी अचानक उसने मेरे लण्ड को मुँह में लेकर लालीपाप की तरह चूसना चालू कर दिया।
अब मेरी हालत बुरी हो चली थी, लण्ड फुफकार मार रहा था, जब मुझसे रहा नहीं गया। तो एक झटके में उठ गया। मैं अनजान बनते हुए बोला- “तुम मेरे कमरे में क्यों आई हो? और ये सब क्या कर रही हो?”
वो धीरे से कान में बोली- राज लेटे रहो। तुम्हें मजा आ रहा है ना?
मैंने कहा- बात मजे की नहीं है.. किसी को पता चल गया तो?
वो बोली- अरे, मैं यहाँ किसी को बताने के लिए थोड़ी आई हूँ। बस तुम लेटे रहो और मुझे लण्ड चूसने दो।
मैंने मजे लेने के लिए कहा- पर मैं ये सब तुम्हारे साथ नहीं कर सकता।
वो बोली- “साले राज... अब नाटक मत करो और मुझे रोको मत। सुबह से जब से तुमने मुझे नंगी और मैंने । तुम्हारा लण्ड देखा है। तब से मैं पागल सी हो गई हूँ। अब तो मुझे तुमसे चुदना है बस। मैं अपने पति से बहुत दिनों से नहीं चुदी हूँ। तुमने मेरी प्यास बढ़ा दी है। अब चोद दो मुझे, देर ना करो...” वो लगातार मेरा लण्ड सहलाए जा रही थी।


जब वो खुद चुदना चाह रही थी। तो मैंने भी देरी करना ठीक नहीं समझा, मैंने उसे चित्त लिटाया और उसका कुर्ता ऊपर को उठा दिया। जिससे उसकी चूचियां नंगी हो गईं, पजामी और पैन्टी को पैरों से अलग कर दिया, अपने भी कपड़े उतारे और थोड़ी देर उसकी चूत सहलाई।
जब वह बहुत गरम हो गई तो खुद ही बोल पड़ी- “आह्ह... राज अब देर मत करो। इसस्स... चोद डालो मुझे...”
मैंने उसकी चूत और अपने लण्ड पर खूब थूक लगाया और उसके ऊपर आकर लण्ड को चूत पर दबाने लगा। जल्दी ही वह पूरा लण्ड चूत में निगल गई। धीरे-धीरे उसकी चुदाई शुरू हो गई। वो भी मस्ती में हल्की-हल्की कामुक आवाजें निकाल रही थी।
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11-09-2019, 11:54 AM,
#18
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
मैं भी शोर कम हो इसलिए उसकी चूत की आराम से रगड़ाई कर रहा था। टाइम ज्यादा लेने के कारण दोनों को ही खूब मजा आ रहा था। कभी मैं उसके ऊपर, तो कभी वो मेरे ऊपर आकर चुद रही थी। अब मैंने उसे अपने बगल में लिटाया और पीछे से अपना लण्ड उसकी चूत में डाला। मेरे हाथ में उसकी चूचियां थीं मैं उन्हें बेदर्दी से मसलकर तेज-तेज उसकी चूत में धक्के लगाने लगा।
इससे आवाज कम आ रही थी और स्पीड भी बढ़ गई थी। वो भी चुदने ही आई थी इसलिए खुद अपनी चूत का दबाव हर धक्के में मेरे लण्ड पर दे रही थी। जैसे ही मुझे लगा कि वो झड़ने वाली है तो मैंने भी तेजी से लण्ड पेलना शुरू किया। थोड़ी ही देर की तेज रगड़ाई में ही उसके साथ ही मैंने भी अपना सारा माल उसकी चूत में भर दिया।
वो मेरे बगल में ही लेटी रही। फिर वो बोली- राज मेरी एक बच्ची होने पर भी मैंने आज तक इतनी देर तक चुदाई नहीं की। तुमने बहुत मजा दिया। सुबह जब तुमने मेरी चूत सहलाकर मुझे अपना लण्ड दिखाया था। तब से ही मेरी चूत चू रही थी। इस निगोड़ी को तुम्हारी जोरदार चुदाई के बाद अब शांति मिली है। जल्दी से एक बार और चोद दो मुझे। कहीं बच्ची ना जाग जाए।
मैंने एक बार और उसकी चूत मारी और फिर वह अपने कमरे में चली गई। वह जितने दिन भी यहाँ रही... उतने दिन मैंने उसे जमकर चोदा। उसी की मदद से कैसे मैंने उसकी छोटी बहन को माँ बनाया। यह कहानी भी जल्दी ही आपकी नजर करूँगा।
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11-09-2019, 11:55 AM,
#19
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
यह कहानी मेरे मकान मालिक के बड़े भाई के परिवार की है। जो मेरे वाले ही मकान में रहते हैं। इस घटना में उनकी शादीशुदा छोटी बेटी रेखा की चुदाई की दास्तान है। जिसकी उम्र 23 साल की थी। और उसकी शादी को तीन साल हो गए थे। पर अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ था।
अगली बार जब बड़ी बहन रश्मि, जो मुझसे चुद चुकी थी, दिल्ली आई तो उसके साथ वो भी आई थी। रेखा कुछ ज्यादा ही शर्मीली थी, किसी से कुछ नहीं बोलती थी। यहाँ भी दिन भर घर के कामों में ही लगी रहती थी, अपने आप में ही गुमसुम रहती थी।


रात को जब उसकी बड़ी बहन अपनी चूत चुदाने के लिए मेरे कमरे में आई तो उसे चोदते हुए मैंने पूछातुम्हारी छोटी बहन गुमसुम सी रहती है। कुछ परेशानी है क्या उसे?"
वो बोली- “हाँ, वह बहुत परेशान है, सारा काम करना जानती है, सभी की सेवा भी करती है। पर तीन साल होने पर भी अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है। तो उसकी सास उसे ताने मारती है और अपने बेटे की दूसरी शादी कराने की बात करती है...”
मैंने बोला- "तो इसमें क्या बड़ी बात है, बच्चा पैदा कर ले। तो सास खुश हो जाएगी ना..."
वो नीचे से चूतड़ को उछालकर लण्ड खाने की कोशिश करते हुए बोली- “वो ही तो नहीं हो रहा है ना। ये लोग बहुत कोशिश कर रहे हैं, पर कामयाबी नहीं मिल रही है...”
मैंने मजाक में कहा- “एक बार मैं कोशिश कर लँ... शायद बच्चा हो जाए। उसने अपने पति के साथ तीन साल कोशिश कर ली। अब एक बार मेरे साथ कोशिश कर ले। शायद उसका काम बन जाए.”
वो बोली- यह क्या कह रहे हो राज तुम? वो वैसी लड़की नहीं है।
मैं बोला- “तो क्या मैं वैसा लड़का हूँ? मैं तो उसका घर बसाने के लिए कह रहा था। तुम ही सोचकर देखो उसका बच्चा हो जाएगा तो उसका घर बच जाएगा। फिर उसकी सास अपने बेटे की दूसरी शादी कराएगी क्या?”
वो बोली- वो कभी नहीं मानेगी और किसी को पता चल गया तो?
मैंने कहा- मनाने का काम तो तुम्हारा है। वैसे तुम इतने महीने से मुझसे चुदवा रही हो और अभी भी चुद रही हो, इसका किसी को पता नहीं चला... तो उसका क्या चलेगा। यह बात हम तीनों के बीच ही रहेगी।
वो उचकते हुए बोली- अच्छा चलो, मैं उससे बात करती हूँ। अब मुझे लण्ड तो खाने दो। जोर से चोदो। कब से तड़प रही थी तुम्हारा लण्ड लेने को। तुमसे महीने में एक दो बार चुदे बिना तो मुझे चैन ही नहीं आता। अब डाल भी दो न। फाड़ डालो मेरी चूत को।
मैंने लौड़ा पेलकर उसको चोद दिया। पर उस रात मैंने उसकी बहन को दिमाग में रखकर उसकी चुदाई की। अगले दिन एकान्त में उसने अपनी बहन से बात की, पहले तो वो मानी नहीं पर जब उसे बहुत मनाया तो वो मान गई।
उसने यह खुशखबरी मुझे बताई।
अब बहुत जल्दी ही उसकी छोटी बहन भी मुझसे चुदने वाली थी।
वो सलवार सूट पहनती थी और 23 साल की ही होने के कारण बिल्कुल कुंवारी लड़की जैसी ही लगती थी। उसे चोदने का तो अलग ही मजा आने वाला था, मैंने उसे माँ जो बनाना था। मैंने उसे बताया कि वो माहवारी आने


के बाद 15 दिन के लिए यहाँ रहने के लिए आए और अपनी सास को बताए कि इलाज के लिए जा रही है। आने से पहले एक बार अपने पति से चुदवाकर आए और यहाँ से जाने के बाद भी अपने पति से चुदवाए। ताकि उसे शक ना हो।
फिर इस बार तो मैंने उससे घुलने-मिलने के लिए उसकी बाहर से ही चूचियां और चूत सहलाई, और उसे अपने लण्ड के दर्शन कराए। ताकि अगली बार जब वह आए तो मुझसे शर्माए नहीं। इस बार तो मैंने उसकी दीदी की चूत से ही अपने लण्ड का काम चलाया।
अगले दिन वो वापस चली गई और ठीक 10 दिन बाद फिर आ गई। वह अपनी सास को दवा लेने का बताकर 15 दिन के लिए आई थी। अब बस मुझे अपना काम करना था। मैं उसे पहली बार जरा दबाकर चोदना चाहता
था। जो मेरे कमरे में नहीं हो सकता था इसलिए मैंने अपने दोस्त के घर की चाभी ले ली।
मेरा दोस्त वहां मार्केटिंग का काम करता था। इसलिए ज्यादातर घर के बाहर ही रहता था। अगर घर आ भी जाए तो सुबह जल्दी निकल जाता था, वह अकेला ही रहता था और उसका घर जरा कोने में था। इसलिए वहाँ कौन आ-जा रहा है। इसका किसी को पता नहीं चलता था। वह खुद उस कमरे में कितनी ही लड़कियों को बुलाकर चोद चुका था। उसके घर से अच्छी इस चुदाई के लिए जगह हो नहीं हो सकती थी इसलिए मैंने उससे बात कर ली और उसने मुझे चाभी दे दी।
मैंने घर आकर रेखा को बता दिया कि तुम घर पर बता देना कि रोज कल से तुम मंदिर में जाकर ध्यान करोगी और तुम एक घण्टा रोज मंदिर में जाना भी ताकि कोई मंदिर में आकर पूछे भी तो, वो भी ‘हाँ बोले। मैं जब । भी तुम्हें फोन करूँ तब तुम मंदिर के बाहर आ जाना। इस तरह तुम पर किसी को शक भी नहीं होगा। घर पर कुछ करूंगा। तो हम फैंस भी सकते हैं।
उसने वैसा ही किया।
मैंने भी 15 दिन की नाइट इयूटी लगा ली और यहाँ रेखा के बाप यानि मकान मालिक के भाई को भी बता दिया कि मैं सुबह दोस्त के घर पर ही नाश्ता करके आऊँगा। मैं रात को डयूटी चला गया और अगले दिन दोस्त
के घर जाकर उसका इन्तजार करने लगा।
एक घंटे बाद मैंने रेखा को फोन किया और 5 मिनट में मंदिर के बाहर मिलने को बोला।
वो बाहर ही मिल गई। उसे मैं दोस्त के कमरे में ले गया और बता दिया कि कल से उसे रोज इसी टाइम पर यहाँ आ जाना है। उसके बाद मैंने उसे बैठाया और उसकी टाँगें सहलाने लगा, फिर धीरे-धीरे चूचियां मसलने । लगा। जब वह गरम होने लगी तो उसकी चूत सहलाने लगा।
मैंने उसे गले लगा लिया और बोला- “देखो मुझसे बिल्कुल भी मत शर्माना। इन 15 दिनों के लिए समझना कि मैं ही तुम्हारा पति हूँ। तुम यहाँ चुदने आई हो इसलिए 15 दिन चुदाई ही और बस चुदाई ही तुम्हारे दिमाग में रहनी चाहिए। जब तुम खुलकर चुदोगी, तभी तुम्हें चुदाई का असली मजा भी मिलेगा और साथ में एक प्यारा सा बच्चा भी मिल जाएगा।


वो बोली- मेरा बच्चा तो हो जाएगा ना? मैं यह सब बच्चे के लिए ही कर रही हैं।
मैंने कहा- जरूर होगा, तुम्हारे से पहले भी एक को माँ बना चुका हूँ। जैसा मैं कहता हूँ, बस 15 दिन तुम वैसा ही करती जाना। वैसे एक बात बताओ- कभी तुम्हारे पति ने 15 दिन लगातार चोदा है तुम्हें?
वो बोली- नहीं, वो तो हफ्ते में एक ही बार करते हैं। वो भी कभी-कभी।
मैं बोला- तो अब देखो। इन 15 दिनों में मैं तुम्हारी चूत में इतना माल भरूँगा कि तुम्हारी चूत को मजबूरन बच्चा देना ही पड़ेगा। बस तुम मेरा साथ दो।
वो बोली- इसीलिए तो राज यहाँ आई हूँ, मुझे निराश मत करना। मेरी इज्जत तुम्हारे ही हाथ में है।
मैं बोला- चलो फिर काम शुरू करते हैं।
अब हम दोनों ने फटाफट अपने कपड़े उतारे और जल्द ही हम दोनों नंगे हो गए।
वो अभी भी शर्मा रही थी।
* * *
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11-09-2019, 11:55 AM,
#20
RE: Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन
मैंने उसे गरम करना शुरू किया। अपनी बाँहों में भरकर उसे किस करने लगा और एक हाथ से उसकी चूत सहलाने लगा। जब वो गर्म हो गई, तो मेरा साथ देने लगी। वो नीचे के बाल बनाकर आई थी, चूत बिल्कुल साफ-सुथरी और चिकनी थी, वो पूरी तैयारी के साथ चुदने आई थी।
मेरा लण्ड उसकी चूत की दीवारों से बार-बार टकरा रहा था। थोड़ी देर में ही उसकी चूत गीली हो गई। जैसे ही मैंने उंगली उसकी चूत के अन्दर डाली, उसकी सिसकारी निकल गई। मैंने उसकी चूचियां मसलते हुए कहातुम्हें मजा तो आ रहा है ना?”
वो बोली- हाँ, बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही करते रहो।
मैंने थोड़ी देर सहलाने के बाद उसके आगे अपना लण्ड कर दिया फिर मैं बोला- इसे अपने मुँह में लेकर चूसो।
वो बोली- नहीं, मुझे यह अच्छा नहीं लगता।
मैंने कहा- अरे यही तो असली चीज है। यह जितना खिला रहेगा। तुम्हें उतना ही मजा देगा। इसी का तो सारा खेल है। तुम उसे चूसकर खुश करो और ये तुम्हें चोद-चोदकर खुश करेगा। चलो, अब जल्दी करो।
वो बोली- नहीं, इसका स्वाद अच्छा नहीं होता है।


मैंने कहा- “बस इतनी सी बात... ये लो अभी इसका स्वाद बदल देता हूँ..” मैंने दोस्त की रसोई से शहद लाकर लण्ड पर अच्छे से चुपड़ दिया और लण्ड उसके मुँह में ढूंस दिया।
पहले उसने लण्ड पर जीभ लगाई फिर पूरा लण्ड मुँह में ले लिया। शहद का स्वाद काम कर गया। वह मजे से मेरे खड़े लौड़े को चूसने लगी।
अब मुझे भी कन्ट्रोल नहीं हो रहा था तो मैंने उसे लिटा दिया और उसकी टाँगें फैलाकर चूत पर लण्ड लगाया
और एक धक्का लगाया। उसकी चूत टाइट थी इसलिए आधे में ही लण्ड फँस गया।
उसकी चीख निकल गई, वो बोली- आहह... आराम से... मार डालोगे क्या? बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है, तुम्हारा पति तुम्हें नहीं चोदता क्या?
वो बोली- उनका वो जरा छोटा है। फिर वो जरा सा फुदक कर ही जल्दी खलास हो जाते हैं।
मैंने सोचा आज तो मजा आ जाएगा। साली की शादी के इतने साल बाद भी इतनी टाइट चूत है। मैंने उससे कहा- “कोई बात नहीं। आज मैं तेरी पूरी चूत खोल दूंगा...” फिर मैंने एक बार लण्ड बाहर निकालकर उसकी चूत और अपने लण्ड पर ढेर सारा थूक लगाया और फिर पूरी ताकत से धक्का लगाया। साथ में उसके मुँह में हाथ भी रख दिया।
वो चिल्लाने लगी। उसकी आखों से आंसू निकल आए, वो चिल्लाई- “आहह... मरर गई... बाहर निकालो इसे... मुझे नहीं चुदवाना... तुमने मेरी चूत ही फाड़ दी...”
मैं बोला- “कुछ नहीं होगा। तुम्हारे पति वाला काम भी मुझे ही करना पड़ रहा है। अब दर्द नहीं होगा। थोड़ा सहन कर लो बस..” मैंने उसकी रसीली चूचियां मसलनी शुरू कर दीं और उसे किस करता रहा। जब दर्द थोड़ा कम । हुआ तो मैं हल्के-हल्के धक्के लगाने लगा।
सच में रेखा की चूत बहुत टाइट थी इसलिए उसे अब भी दर्द हो रहा था। मैंने स्पीड बढ़ाई तो वो फिर कराहने। लगी- “आह..आह... नहीं राज, नहीं ओह... ओह... सीईई... आइइइ.."
वो कराहती रही और मैं पलता रहा।
धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी- “आहह... आह... तेज... राज और तेज... चोद दो मुझे... ओह और तेज..”
मैंने रफ्तार पकड़ ली और कमरे में उसकी कराहें गूंजने लगीं। मैं बार-बार आसन बदल-बदल कर उसे चोदे जा रहा था। इसी बीच वो दो बार झड़ गई। उसकी हालत बुरी थी। पर मुझे तो बहुत दिनों बाद इतनी टाइट चूत मिली थी। इसलिए मेरा मन नहीं भरा था, बस उसे धकापेल चोदना ही चाहता था। लेकिन आखिर कब तक...


अंत में मैंने उसकी चूत में पिचकारी छोड़ ही दी जिससे उसकी चूत लबालब भर गई। जैसे ही मैंने लण्ड बाहर निकाला उसकी चूत से वीर्य बाहर को बहने लगा।
मैंने उसका दूध मसकते हुए कहा- “कहो मेरे साथ तुम्हारी चुदाई कैसी रही?”
वो हांफते हुए बोली- “तुमने तो मेरी नस-नस ही दुखा दी। आज तक मैं कभी इतनी बुरे तरीके से नहीं चुदी। मेरी चूत की असली चुदाई तो आज ही हुई है...”
मैं बोला- “जानेमन, अब तो तुम्हारी ऐसी चुदाई रोज ही होगी। बस रोज टाइम पर आ जाना...”
मैंने उसे एक बार और चोदा और घर भेज दिया। एक घंटे बाद मैं भी कमरे में आ गया। अब तो यह रोज का नियम हो गया। मैंने उसे सभी तरीके से खूब जमकर चोदा। रोज वीर्य उसी की चूत में भरता था। उसकी गाण्ड
भी मारी।
फिर 15 दिन बाद वो अपने घर वापस चली गई। एक महीने बाद उसने खबर दी कि वो गर्भवती है। उसकी सास
और उसके पति बहुत खुश थे। यहाँ उसके माँ-बाप भी बहुत खुश थे कि बेटी की सुबह की पूजा का फल मिल गया।
वो तो उसे मिलना ही था, उसने 15 दिन मेरे लण्ड की खूब सेवा और पूजा जो की थी। जिसका फल उसकी कोख में था।
ठीक 9 महीने बाद वह एक बेटे की माँ बन गई। उसके बाद मैंने उसे नहीं चोदा। क्योंकी अब मेरी नजर उसकी सबसे छोटी बहन पर थी जो अभी-अभी जवान हुई थी। मैंने उस कली को फूल कैसे बनाया। यह कहानी भी जल्दी ही आपकी नजर करूँगा।
* * * * *
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