मदमसत बुआ
11-24-2018, 11:31 AM,
#1
मदमसत बुआ
हेलो दोस्तों मैं एक बार फिर से आपके सामने एक नई कहानी लेकर हाजिर हूं . आशा करता हूं की यह कहानी भी आप लोगों को पसंद आएगी। मेरी बुआ का नाम सुजाता है और वह शादीशुदा है अपने पति के साथ वहं  गांव में ही रहती हैं। उनका एक 12 साल का बेटा भी है।  एक बार की बात है मैं गांव जा रहा था। स्टेशन पर उतरने पर काफी रात हो चुकी थी तकरीबन 8:00 का समय हो रहा था लेकिन गांव के माहौल के हिसाब से 8:00 बजे का समय भी रात के 2:00 बजे के जैसा होता है। स्टेशन पर उतरते ही इस बात का एहसास हो गया कि अपने घर जाने के लिए यहां से कोई सवारी मिलने वाली नहीं थी मुझे लगने लगा कि अब मुझे स्टेशन पर ही रुक कर रात गुजारनी पड़ेगी लेकिन स्टेशन की भी हालत काफी खराब  थी। स्टेशन पर ना तो रुकने का कोई व्यवस्था ही थी और ना ही लाइट थी। चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था, और ऐसे में चोर-उचक्कों का डर काफी बना हुआ था। वैसे भी स्टेशन पर उतरने वाले यात्री ही चोरों का सबसे बेहतरीन निशाना होते हैं ।क्योंकि उन्हें पता होता है कि बाहर से आने वाले लोगों के पास काफी माल होता है। मैं भी शहर से कमाकर आ रहा था इसलिए मेरे पास भी काफी सामान और पैसे भी थे इसलिए मुझे थोड़ा डर महसूस हो रहा था स्टेशन से बाहर आकर इधर उधर देखने पर भी कोई सवारी नजर नहीं आ रही थी। तभी मुझे ख्याल आया कि स्टेशन से कुछ ही दूरी पर मेरी बुआ रहती है इसलिए मैंने तुरंत फोन निकालकर बुआ को फोन किया। बुआ मेरी स्थिति को समझ कर तुरंत मुझे अपने घर बुला ली। 
15 मिनट की दूरी पर ही बुआ का घर था जो कि मैं पैदल चलते चलते ही उनके घर पहुंच गया। उनके घर पहुंचते ही मेरी जान में जान आई क्योंकि रास्ते भर पूरी सड़क एकदम सुनसान थी। बुआ मुझे देखते ही बहुत खुश हुई। मैं बुआ के पैर छूकर ऊन्है  नमस्ते किया। बुआ मुझे तुरंत अपने गले लगा ली जैसे ही उन्होंने मुझे अपने गले लगाया मेरे बदन में घंटियां बजने लगी क्योंकि गले लगाने की वजह से बुअा की बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सीने में धंसने लगी, खास करके बुअा की चुचियों की निप्पल मेरे तन-बदन में झनझनाहट फैल गई।
बुआा अपने सीने से मुझे अलग करते हुए बोली,,,।
तू कितना बड़ा हो गया है आज काफी समय बाद तुझे देख रही हुं। अच्छा हुआ कि तू इसी बहाने मेरे घर आ गया वरना ना जाने तुझसे कब मुलाकात होती।

सच कहूं तो बुआ मैं भी बहुत खुश हूं तुमसे मिलकर लेकिन फूफा जी कहीं नजर नहीं आ रहे वो कहां गए।

अरे उन्हें कहां फुर्सत मिलती है वह तो सारा दिन बस काम काम काम आज 10 दिन से बाहर गए हुए हैं। और कब आएंगे कुछ बताकर नहीं गए। अच्छा तुम एक काम करो हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो जाओ मैं तब तक खाना निकाल देती हूं।

ठीक है बुआ बैग में मेरा टावल पड़ा है उसे लेते आना,,,
( इतना कहकर मैं घर के आंगन में ही जहां पर हेडपंप था वहीं पर हाथ मुंह धोने लगा,, तभी कुछ ही देर में बुआ टावल लेकर के मेरे पास आई। और मुझे टावल थमाते हुए बोली।

राज अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं तुमसे एक बात कहूं।

कहो बुआ इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है।

राज हमें तुमसे कैसे कहूं कहना तो नहीं चाहिए था लेकिन फिर भी मजबूर हूं क्योंकि तुम तो जानते ही हो कि तुम्हारे फूफा बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते।( बुआ नजरें झुका कर शरमाते हुए बोल रही थी जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था कि आखिरकार बुआ कहना क्या चाहती हैं,,, इसलिए मैं बोला।)

बुआ आप जो भी कहना चाहती हो,, बेझिझक कह सकती हो।

पहले बोलो कि तुम बुरा तो नहीं मानोगे ना। 

बुआ जी मैं बिल्कुल भी बुरा नहीं मानूंगा आप चाहे जो भी बोलो।

राज मैं तुम्हारे बैग में से जब टावर निकाल रही थी तो मैंने बैग में रखी हुई पांच  छ: पेंटिं देखी हु जो कि मैं जानती हूं कि तुम अपनी बीवी के लिए ले जा रहे हो। मैं चाहती हूं कि तुम उसमें से दो पैंटी मुझे दे दो । ( बुआ एकदम शरमाते हुए नजरें नीचे झुका कर बोल रही थी उनको और उनका मासूम चेहरा देख कर मेरी हंसी छूट गई, और मुझे युं हंसता हुआ देखकर बुआ का चेहरा शर्म से एकदम लाल होने लगा जो कि लालटेन की रोशनी में साफ नजर आ रहा था।)

तुम हंस क्यों रहे हो (बुआ उसी तरह से नजरें नीचे झुका कर बोली)

अरे हंसी नहीं तो और क्या करूं इतनी सीधी सीधी बात को तुम इतना घुमा फिरा कर कह रही हो।

मैं जानती हूं राज की यह  सब बात एकदम सीधी सीधी है लेकिन एक लड़के के सामने औरत के लिए ब्रा और चड्डी पेंटी यह सब बातें एकदम शर्म वाली होती है अगर मैं मजबूर ना होती तो तुम्हारे सामने कभी भी इस तरह की बातें नहीं करती।

कोई बात नहीं बुआ आपको इसमें शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है। आखिर आप किसी गैर के सामने तो यह बात कह नहीं रही मुझे अपना समझती है तभी तो आप इस तरह की बातें मुझे बता रही हैं। ( मैं बुआ के हांथो से टावल लेकर अपने बदन को पोछने लगा,, मेरा बदन काफी कसरती था चौकी देखने में बहुत ही आकर्षक लगता था मेरी बात सुनकर बुअा खुश नजर आ रही थी, और कनखियों से मेरी तरफ ही देख रही थी ।खास करके मेरे चौड़े सीने की तरफ उनकी नजर ऊपर से नीचे की तरफ दौड़ रही थी। बुआ की आंखों में इस समय शरारत साफ नजर आ रही थी और उनका इस तरह से मेरे बदन को घूरना मुझे थोड़ा बहुत शर्म का अनुभव करा जा रहा था। मैं टावल से अपने बदन को पोछ चुका था,, बुआ खाना निकालने जा चुकी थी, महबूबा को घर के अंदर जाते हुए देख रहा था । साढ़े पांच फीट की हाइट में बुआ पूरी तरह से सेक्स बोम लग रही थी। गोरा रंग भरा हुआ बदन गोल गोल चेहरा और उस पर सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली उनके दोनों बड़ी़े बड़ी़े चूचियां,,, जो कि पके हुए आम की तरह नहीं बल्कि पके हुए पपीते की तरह बाहर की तरफ निकला हुआ था। ब्लाउज के अंदर से  चूचियों की दोनों तनी हुई निप्पल ब्लाउज से साफ नजर आती थी। ऐसा लग रहा था कि कोई भाला कपड़े के आर पार हो जाएगा। और बुआ के पूरे मादक बदन का सबसे बेहतरीन और उत्तेजक आकर्षण उनकी गोल गोल नितंब थे।
चाची के बदन के हिसाब से उनकी बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही बाहर को निकली हुई थी जिससे उनकी खूबसूरती में चार चांद लग जा रहा था। उनको कमरे में जाते हुए देख कर मेरी सबसे पहले नजर उनकी मटकती हुई गांड पर ही पड़ी थी जो कि बेहद आकर्षक लग रही थी। 
मैं जल्द ही फ्रेश होकर कमरे में चला गया। कुछ ही देर में बुआ भोजन की थाली लेकर मेरे पास आई मैं नीचे जमीन पर बैठा हुआ था। पास ही टेबल पर लालटेन रखी हुई थी जिस की रोशनी में सब साफ साफ नजर आ रहा था। बुआ के हाथों से मैंने भोजन की थाली लेकर खाना शुरु कर दिया। गर्मी का समय था इसलिए काफी गर्मी पड़ रही थी तभी तो आ बिस्तर पर रखा हाथ से हवा देने वाले पंखे को लेकर हिलाने लगी जिसकी हवा में थोड़ा बहुत राहत मिल रहा था खाना खाते हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे। बुआ की नजर बार-बार मेरे गठीले बदन पर ही टिकी हुई थी। मैं भी बुआ के बदन को कनखियों से देखकर उनकेमादक बदन के मधुररस को आंखों से पी रहा था। बुआ के गठीले सुडोल बदन में एक अजीब सी मादकता का एहसास हो रहा था।
कभी बुआ ने बात ही बात में गर्मी का बहाना करते हुए अपने कंधे पर से साड़ी के पल्लू के नीचे करदी, जिसकी वजह से बुआ की बड़ी बड़ी चूचियां मेरी आंखो के सामने साफ नजर आने लगी। ब्लाउज में कैद दोनों कबूतर बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे थे। बुआ की सांसो के साथ उठ बैठ रहे दोनों खरबूजे मेरे तन-बदन में कामाग्नि की ज्वाला को भड़का रहे थे। आनन फानन में मैंने भोजन खत्म किया और सोने की तैयारी करने लगा क्योंकि वैसे भी मैं, ट्रेन में सफर के दौरान काफी थक चुका था इसलिए बिस्तर पर लेट गया। दुआ कुछ देर तक वहीं खड़े रहकर मेरी तरफ अजीब सी निगाहों से देखने लगी उनका इस तरह से मुझे घूरना बड़ा ही कामुक लग रहा था क्योंकि आंखों में खुमारी नजर आ रही थी। मुझे शर्म सी महसूस होने लगी तो मैं बोला।

ऐसे क्या देख रही हो बुआ तुम्हें सोना नहीं है क्या?

अरे जिंदगी भर तो सोना है,,, आज जग ही लेंगे तो क्या हो जाएगा। वैसे सच कहूं तो तुमने अपने बदन को काफी खूबसूरत बना रखा है लगता है कि काफी कसरत करते हो।

बुआ फिट रहने के लिए तो इतना करना ही पड़ता है।

तब तो तुम्हारी बीवी तुमसे बहुत खुश रहती होगी।
( बुआ मुस्कुराते हुए बोली और झूठे बर्तन को लेकर 15 से बाहर चली गई लेकिन जाते जाते उसने दरवाजा बंद नहीं की मुझे उसकी बात का मतलब समझ में नहीं आ रहा था। मैं ऐसे ही लेट कर सुबह बुआ के घर से जाने के बारे में सोच रहा था कि तभी थोड़ी देर बाद, दरवाजे पर दस्तक देते हुए बुआा बोली।

सो गए क्या?

नहीं नींद नहीं आ रही थी तुम्हें कुछ काम था क्या ? (और इतना कहकर मैं बिस्तर के नीचे पांव लटका कर बैठ गया)

तुम्हें कुछ दिखाना था।

मुझे,,,, मुझे क्या दिखाना था।( मैं आश्चर्य के साथ बोला)

लो देख लो (और इतना कहने के साथ ही बुआ भी दरवाजे के दोनों पल्लू को बंद करके उस पर कुंडी लगा दी और मुस्कुराते हुए मेरे करीब आने लगे मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। जैसे ही वह मेरे करीब आई, ठीक मेरे सामने खड़ी होकर, अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर तो मेरी सांसे अटक गई मेरे पजामे में अजीब सी हलचल होने लगी,, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि बुआ क्या करने जा रही थी मेरे सोचने से पहले ही बुआ अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी थी। कुछ ही सेकंड में लालटेन की रोशनी में बुआ  की नंगी सुडौल  जांघ चमकने लगी यह देख कर तो मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया । तभी मेरी नजर बुआ की पैंटी पर गई तो मैं समझ गया कि जो पेंटिं मे अपनी बीवी के लिए ले जा रहा था यह उसी में से एक पेंटिं थी। मरून रंग की पेंटिं बुअा के गोरे रंग पर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। उत्तेजना के मारे तो गला सुखे जा रहा था। मैं कुछ बोल पाता इससे पहले ही बुआ बोली।
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11-24-2018, 11:36 AM,
#2
RE: मदमसत बुआ
देख तो यह पेंटिंग मुझ पर कैसी लग रही है एकदम फिट है ना। ( इतना कहते हुए वह मेरी आंखो के सामने गोल गोल घूम कर चारों तरफ से मुझे पैंटी दिखाने लगी। लेकिन मुझे इतना तो पता चल ही रहा था कि वह पेंटी   नहीं बल्कि अपने बदन को मेरी आंखो के सामने दिखा कर अपनी जवानी का जलवा मुझ पर बिखेर रही थी। और वाकई में मेरी लाई हुई उस पैंटी में बुआ  का खूबसूरत बदन उनकी बड़ी बड़ी बड़ी बेहद खूबसूरत लग रही थी। मेरी इच्छा तो बुआ को स्पर्श करने की हो रही थी पेंटिं में छुपे हुए खजाने  को अपने हाथों से मसलने को हो रही थी। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि ऐसा करना रिश्तो की डोर को तोड़ना था और मैं नहीं चाहता था कि मेरी किसी हरकत की वजह से मेरी बदनामी हो लेकिन शायद मेरी इस हालत को बुआ  भांप गई थी,, और वह बोली।

देखते ही रहोगे या कुछ बोलोगे भी कैसी लग रही है पेंटी?

बहुत अच्छी बुआ,,,।

ऐसे नहीं छू कर बताओ फिट है या नहीं।
( बुआ  की बात सुनकर मेरे तन बदन में उत्तेजना की लहर  दौड़ने  लगी जिस चीज को करने के लिए में अपने आपको मना कर रहा था वही हरकत को करने के लिए बुआ खुद मुझे कह रही थी। मैं भी उनकी बात मानते हूंए अपने कांपते हाथों को आगे बढ़ाया और बुअा की पैंटी पर रख दिया,,, बुआ के बदन पर हाथ रखते हैं मेरे तन-बदन में झनझनाहट फैल गई ।
मैं हल्के हल्के अपनी हथेली को पेंटी के ऊपर फीराने लगा मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था। बुआ के भी तन बदन में मस्ती की लहर दौड़ रही थी उनकी आंखों में चुदासपन  का असर साफ नजर आ रहा था। उत्तेजना के बारे में अपना हाथ हटाने ही वाला था की तभी बुआ बोली।

टांगों के बीच हाथ लगा कर देखो वहां का कपड़ा कुछ ज्यादा ही मुलायम लग रहा है।
( बुआ की बात सुनकर मैं समझ गया था कि वह पूरी तरह से चुदवाने के मूड में आ चुकी है। लेकिन मैं फिर भी बहाना बनाते हुए बोला।)

यह क्या कह रही हो बुआ ऐसा मत करो तुम्हारी बात सुनकर ना जाने मेरे तन-बदन में कैसी हलचल मच रही है। मेरी सांस मेरे काबू में नहीं है। तुम ऐसा कहोगी तो मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाऊंगा और फिर ना जाने क्या हो जाएगा।

क्या हो जाएगा?( बुआ मुस्कुराते हुए बोली)

पता नहीं बुअा मुझे क्या हो रहा है।( इतना कहने के साथ ही मैं दूसरी तरफ घूमने लगा अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेर  लिया,,)

शर्माओ मत राज इधर देखो मेरी तरफ,,,,( इतना कहने के साथ ही बुआ आगे एक हाथ बढ़ाकर मेरे सिर पर रख कर मुझे अपनी तरफ देखने को मजबूर कर दि जब मैं फिर से उनकी तरफ देखने लगा तब मेरी आंखों ने जो देखा उस पर मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन जो नजारा आंखों के सामने था उसने मेरे तन-बदन में पूरी तरह से हलचल मचा दिया, क्योंकि इस तरह की हरकत आज तक मेरी बीवी ने भी मुझे ऊकसाने के लिए नहीं की थी।

बुअा मेरी तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगी। मैं बस बुआ को देखते जा रहा था मेरे पास कोई शब्द नहीं बचे थे, बुआ को रोकने के लिए और देखते ही देखते बुआ अपनी पैंटी को जांघों तक सरका दी। मेरा तन बदन सुलगने लगा था। मेरी नजरें बुआ की टांगों के बीच उनकी बुर पर ही टिकी हुई थी जिस पर हल्के हल्के बाल उगे हुए थे।

ऐसे देख क्या रहे हो छू कर देखो (और इतना कहने के साथ ही बुआ खुद मेरे हाथ को पकड़कर अपनी बुर पर रख दी,, बुर की गर्माहट मेरे तन बदन को पिघलाने के लिए काफी थी मेरी सांसे उखड़ने लगी, बुआ मेरी हथेली को पकड़कर हल्के हल्के बुर पर रगड़  रही थी जिससे उनकी भी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। कुछ ही सेकंड में मेरी हथेली चिपचिपी होने लगी मैं समझ गया कि बुआ की बुर से कामरस टपकने  लगा है।
अब मेरे लिए भी पीछे हटना है मुश्किल था मैं भी खुद अपनी हथेली को बुर पर रगड़ना शुरू कर दिया। बुआ मेरे हाथ की हरकत को महसूस करके मेरी हथेली पर से अपना हाथ हटा ली और मैं उनकी आंखों में देखता हुआ उनकी बुर की गुलाबी पत्तियों को हल्के हल्के मसलने लगा। बुआ की सिसकारी छूटने लगी।
ससससहहहहह,,,,, थोड़ा और जोर से मसलो,,

बुआ की बात सुनकर अभी-अभी जोर-जोर से मसलते हुए बोला।

बुआ कोई आ गया तो!

इधर कौन आएगा तेरे फूफा जी तो गांव से बाहर गए हुए हैं जो कि आने वाले नहीं है और मुन्ना को मैं अपने कमरे में सुला कर आ रही हुं बस तूम मजे करो।
( दुआ पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी थी और वहां अपनी तरफ से मुझे पूरी छूट दे रखी थी।)

दुआ कहीं ऐसा ना हो कि जोश ठंडा होने पर मेरे और तुम्हारे रिश्ते के बीच दरार पड़ जाए

ऐसा कुछ भी नहीं होगा बल्कि रिश्ता और ज्यादा मजबूत हो जाएगा। 
( बुअा की बात सुनते ही मैंने झट से अपनी भी छोरी होली को बुआ की बुर में उतार दिया जिससे उनके मुख से चीख निकल गई, और बुआ अगले ही पल होते जनावर मेरे सिर को पकड़कर अपनी बुर पर रख दी,,, मैं भी मौका देख कर अपनी जीभ को बुआ की बुर में उतार दिया और उनके नमकीन रस को चाटना शुरू कर दिया,,, बुआ की गरम सिसकारी से पूरा कमरा गुंजने लगा।
हम दोनों की हालत खराब होने लगी थी कुछ देर तक मैं यूं ही बुआ की गुरुकुल चाटता रहा बुआ को भी बहुत मजा आ रहा था। अगले ही पल बुआ मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दी और मेरे ऊपर चढ़ते हुए बोली।

अब मेरी बारी है।
( इतना कहने के साथ ही हुआ कमर पर बंधे मेरे टावल को खींचकर एक तरफ फेंक दी और एक झटके में अंडरबीयर को मेरी टांगों से निकाल कर बाहर फेंक दी। मेरे खड़े मोटे लंबे लंड पर बुआ की नजर पड़ते ही उनकी आंखें फटी की फटी रह गई।

बाप रे इतना बड़ा और मोटा यह तो ऐसा लग रहा है कि गधे का लंड है । आज तो मजा ही आ जाएगा (और इतना कहने के साथ ही वह मेरे लंड पर टूट पड़ी उसे मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चुसना शुरु कर दी। बुआ जीस तरह से मेरे लंड को चाट रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था,,, कुछ देर तक हुआ ऐसे ही लंड चूसने का मजा लेती रही और मुझे भी देती रही,। अब बुआ की बुर मेरे लंड को लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी मैं भी बुआ की कमर में हाथ डाल कर एक झटके से उन्हें बिस्तर पर पटक दिया,,, बुआ पीठ के बल चित्त होकर लेट चुकी थी मैं टांगो बीच जगह बना कर लंड को बुर  के मुहाने पर रख कर धीरे-धीरे बुर के अंदर सरकाना शुरू कर दिया। मोटे तगड़े लंड की रगड़ बुआ से बर्दाश्त नहीं आ रही थी और उनके साथ ऊपर नीचे हो रही थी अगले ही पल धीरे-धीरे करके मेरा पुरा लंड दुआ की बुर में समा गया। बुआ कसके मुझे अपनी बाहों में भर ली, और मैं बुआ की बुर में लंड को अंदर बाहर करते हुए धक्के लगाना शुरु कर दिया। बुआ को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और बुआ को चुदवाने मे।  फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। बुआ की गर्म सिसकारियां मेरे जोश को बढ़ा रही थी। तकरीबन आधे घंटे की चुदाई के बाद बुआ के गर्म लावा के साथ साथ मेरे लंड ने भी पिचकारी छोड़ दिया। रात को बुआ ने तीन बार मुझ से चुदाई का मजा लि और इन तीन बार की चुदाई मे बुआ एक दम मस्त हो गई।
सुबह मैं अपने गांव जाने के लिए तैयार हो चुका था बुआ कमरे में चाय नाश्ता लेकर आई थी। बुआ बहुत खुश नजर आ रही थी क्योंकि ऐसा लग रहा था कि पहली बार उन्होंने चुदाई का असली मजा ली थी। नाश्ता करने के बाद में जाने को हुआ तो हुआ मेरे आगे आ गई कमरे के बाहर निकलने के लिए जा ही रही थी कि उनकी मटकती हुई बड़ी-बड़ी गांड को देख कर एक बार फिर से मेरा मन बहक गया। ओर मे झट से बुआ को अपनी तरफ खींच कर अपनी बाहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया। मेरी इस हरकत से बुआ भी एक दम जोश में आ गई और वह भी मेरा साथ देते हुए मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दी। मैं जल्दी से जाकर फिर से दरवाजे को बंद करके कुंडी लगा दिया और इस बार बुआ को टेबल पर झुका कर उनकी साड़ी को खुद ही कमर तक उठा दिया, दुआ भी समझदार औरत की तरह खुद ही अपनी पैंटी को नीचे जानकर सरकार कर अपनी टांगों को चौड़ा करके खड़ी हो गई जगह मिलते ही मैंने तुरंत अपने पैंट की बटन खोल कर पेंट को जांघ नीचे कर दिया और अगले ही पल मेरा पुरा लंड  बुआ की बुर मे एक बार फिर से समा चुका था। एक बार फिर से हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से समा चुके थे।
मैं बैग उठाकर जाने को हुआ तो दुआ मुझे अपने सीने से लगा कर चूमने लगी और बोली।
अच्छा हुआ तुम इधर आ गए वरना में चुदाई के असली मजे से वंचित रह जाती।
मेभी हंसते हुए अपने गांव की तरफ जाने वाली गाड़ी पकड़ कर बैठ गया मुझे भी आज की रात जिंदगी भर याद रहेगी।
अगर आप लोगों को यह कहानी पसंद आई हो तो जरूर कमेंट करें।
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