कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण
11-06-2018, 10:33 AM,
#1
कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण
कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण

शाम के 6.30 बजे थे, मैने नामिता भाभी की डोर बेल बजाई, 2 मिनिट
के बाद दरवाजा खुला, दरवाजे मे भाभी खड़ी थी, मई तो उनको देखते
ही रहे गया, हल्के आसमानी कलर की सिफ्फ़ों की सारी पहेनी थी, उसपे
मॅचिंग लो कट ब्लाउस था, पल्लू तोड़ा साइड मे था. उनकी क्लीवेज लाइन
सफ़फ़ सफ़फ़ दिख रही थी. और दो बड़े बड़े पहाड़ सीधे खड़े थे, दोनो
पहाड़ो मे बिचवाली खाई बहुत ज़्यादा गहेरी थी, क्यो की उनके पहाड़
अम्म औरतो के मुक़ाबले कुछ ज़्यादा ही सामने उभरे हुए थे. (यह
उनका स्टाइल है, हुमेशा घर मे सारी का पल्लू शोल्डर पे क्लीवेज लाइन
से हटा के ही रखती है) मई तो पहेली ही नज़र मे घायल हो गया.

"अरे संजय तुम, आओ आओ, सुनीता ने (मेरी भाभी, गाओं वाली जो मेरी
नेबर है) बताया था की तुम आने वेल हो, मई तुम्हारा ही इंतजार कर
रही थी." भाभी ने मुझे अंदर बुलाया और मुझे अपने दोनो हतह से
पकड़ा और मेरे माथे को चूम लिया. भाभी की ये अदा मुझे बहुत आची
लगी. उंगी जिस्म की गर्माहत की खुसभू से तो मेरे टन बदन मे
ज़ुर्ज़हुरी सी दौड़ गयी.

भाभी ने मुझे पानी ला के दिया. और बोली, "मई भी अभी अभी बॅंक से
आई हून. अक्चा हुवा तुम जल्दी नही आए वरना इंतेजर करना पड़ता
मेरा. तुम थोड़ी देर बैठो तब तक मई चेंज करके आती हून, अगर
तुम्हे भी फ्रेश होना हो तो हो जाओ." भाभी ने मुझे बातरूम दिखाया.
उनके बेडरूम के बगल मे ही बातरूम था, एक डोर उनके बेडरूम मे
खुलता ता और एक हॉल मे. मई फ्रेश होके आया. बहभही चेंज करके आई
थी और हॉल मे ज़्ादू लगा रही थी. मई तो देखते ही रहे गया. बिल्कुल
फ्रीज़ हो गया. भाभी ने बहुत ही पतली पिंक कलर की निघट्य पहनी थी और
अंडर से ब्रा नही पहनी थी. वो ज़ुक के ज़्ादू लगा रही थी और उनके


मदमस्त चूंचियों का निघट्य के खुले गले से पूरा दर्शन मुझे हो
रहा था. मेरे लंड ने तो सलामी देना भी शुरू कर दिया. मेरा उनके घर
मे पहेला ही दिन था. और पहेली ही दिन मुझे इतनी खूबसूरती का दर्शन हो
गया. मई आज तक जिन औरतों को छोड़ा उन्हे याद करने लगा. नामिता
भाभी उन सभी मे बीस थी. भाभी ने मेरे तरफ देखा लेकिन मई तो होश
मे था ही नही, मेरी नज़र तो उनके चूंचियों पे ही टिकी थी. उन्होने मेरी
नज़र का पीछा किया तो पता चला की मई उनका सेकरीट पार्ट देख रहा हून.
तब उनके ध्यान मे आया की उन्होने तो हमेशा की तरहा ब्रा पहनी ही नही
है, अकटुली वो घर मे अकेली रहा करती थी तो गर्मी के दिन होने के कारण
घर मे ब्रा नही पहनती थी, और रोज की तरह अभी भी उन्होने ब्रा नही
पहनी, जब उनके ध्यान मे आया तो ज़्ादू छ्चोड़ के सीधी खड़ी हो गयी,
और मेरी और उनकी नज़र एक हो गयी. मई शर्मा गया और उन्होने एक
मुस्कुरहत दी और जल्दी से बेडरूम मे चली गयी. थोड़ी देर बाद वो
वापस आई तो मैने देखा की उन्होने ब्रा पहेनी हुवी थी. मैने फिर से
उनके बूब्स के तरफ देखा और मुस्कुरा दिया मेरी नज़र और मुस्कुरहत
का मतल्ब वो समझ गयी और वो भी मुस्कुरा दिया.

भाभी ने खाना बनाया, मई हॉल मे टीवी देख रहा था. भाभी मेरे
पास आई फिर हुँने थोड़ी देर तक बाते की, फिर ओन्ोने कहा "संजय तुम टीवी
देखो तब तक मैं नहा के आती हू. मुझे शँको खाने से पहले
नहाने की आदत है". भाभी ने कपबोर्ड से अपने कपड़े निकले और
सेंटर टेबल पे रख दिए फिर उन्होने सोप निकाला और नहाने चली गयी.
बातरूम से गुनगुनाने की आवज़ आ रही थी. भाभी की आवाज़ इतनी अच्छी तो
नही थी लेकिन उनकी आवाज़ मे प्यसस सफ़फ़ ज़ालकती थी. थोड़ी देर बाद शवर
बंद हो गया, 2 मिनिट बाद भाभी सीने से जाँघो के तोड़ा उपर टके क
बड़ा सा टवल लपेटे हुवे हॉल मे आई शायद वो फिर भूल गयी थी की मई
वाहा मौजूद हून, और हॉल मे लगे हुवे बड़े आईने के सामने खड़ी
हो के गाना गाते हुवे अपने अप को निहारने लगी. मेरा तो फ्यूज़ ही उडद गया.
उनके बड़ी बड़ी बाजुओ से पानी की बूंदे नीचे जा रही थी. गार्डेन से और
च्चती के उपरी हिस्से से आती हुवी बूंदे उनके दोनो सीधे खड़े पहाड़ो
के बीच वाली खाई मे समा रही थी. गोरी गोरी मांसल दूधिया जाँघो से
टपकती हुई पानी की बूंदे मानो मुझे इन्वाइट ही कर रही थी. एब्ब भाभी
गुनगुनाते हुवे पलटी, और पलटते हुवे उन्होने टवल का एक कोना हाथ
मे ले लिया और उसको वो नीच छ्चोड़ने ही वाली थी की उनकी नज़र मुझ पे पड़ी.
वो एकदम से रुक गयी. हतह मे टवल के दो कोने थे. ढीला हो जाने
के कारण एक साइड से टवल तोड़ा नीचे आ गया था, और उनकी यूयेसेस साइड की
चूंची 80% दिख रही थी, यहा तक की निपल के अप्पर वाला ब्राउन हिस्सा भी
नज़र आ रहा था. मेरी तो किस्मत ही खुल गयी थी. भाभी ने मेरी तरफ
देखा और जल्दी जल्दी सेंटर टेबल से कपड़े उठा लिया, मैने देखा की जल्दी
जल्दी मे वो ब्रा और पनटी तो वही छ्चोड़ के गयी है. वो बेडरूम मे
चली गयी. मई उठा और सेंटर टेबल से ब्रा और पनटी उठा ली. ब्रा को सोफे
की चेर के पीछे दल दिया, जिधेर से भाभी बेडरूम मे गयी थी, और
पनटी को बेडरूम के डोर के पास एक कोने मे दल दिया.
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11-06-2018, 10:34 AM,
#2
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कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण 2

भाभी को ब्रा और पनटी तो मिली नही, लेकिन वो ये बात मुझे कहने मे
हिचक रही थी, और तोड़ा शर्मा भी रही थी, क्यो की मई उनको काँसे कम
70% नंगी देख चुका था. एब्ब और नंगी हो के वो मेरे सामने अपने अप
को लूस कॅरक्टर साबित नही करना चाहती थी. वो सिर्फ़ निघट्य पहन के
ही हॉल मे आ गयी, जब उनकी और मेरी नज़र एक हुवी तो उन्होने एक बहुत ही
सेक्सी स्माइल दी, लेकिन यूयेसेस स्माइल मे तोड़ा शर्मिलपन भी था. और चुपचाप
बिना कुछ कहे वो सोफे के पास और टेबल के पास कुछ ढूनदने लगी.
मैने पूछा, "क्या ढूंड रही हो भाभी?"

"कुछ नही संजय, मेरे कुछ कपड़े थे,"

"लेकिन कपड़े तो अप ले गयी ना"

"हा लेकिन मुझे दूसरे कपड़े चाहिए थे"

उन्हे कुछ- मिला नही तो वो किचन की तरफ जाने लगी, तभी सोफे के चेर के
पास उनके पैर मे कुछ चुबा. उन्होने एक करहा ली
"आआहाआआआआआअ"

"क्या हुवा भाभी"

"कुछ नही, शहेड कुछ चुबा", फिर उन्होने नीचे से ब्रा उठाई, उनके
हाट मे ब्रा लटक रही थी और मई देख के हसने लगा, फिर उन्होने भी
मुस्कुरा दिया और ब्रा को पीछे छुपा लिया, मैने कहा, भाभी मिल गया ना
कपड़ा, फिर मैने उनके जाँघो के बिच देख के कहा "लगता है एक कपड़ा
बाकी है मिलने का?" उसपे वो उनकी हस्सी रोक नही पे और वो किचन मे
जाने लगी, मई बेडरूम की तरफ बड़ा, और हतह मे उनकी पनटी ले ली, मैने
अपने आँखो के कोने से देखा की भाभी किचन की डोर पे ही खड़ी हो के
मुझे देख रही है. मैने ऐसे शो किया की मुझे पता नही है की वो
देख रही है, फिर मैने उनकी पनटी को अपने नाक से लगा लिया और खुश्बू
का मज़ा लेने लगा, उनका मुँह तो खुला का खुला रहे गया, यह सूब देख
के, शायद मई इतनी जल्दी ये सब करूँगा ये उन्होने एक्सपेक्ट नही किया था.
उनकी पनटी मे हल्की सी उनके छूट के और पेशाब की मिलीजुली एक मादक
खुसबू के साथ साथ वॉशिंग पाउडर की खूबू आ रही थी, क्यो की पनटी
धूलि हुवी थी इश्स लिए उनकी छूट की खुसभू का पूरा मज़ा तो नही आया.
लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा. भाभी ने किचन से आवाज़ लगाई...

"संजयययययययी... क्या कर रहे हो..."

"कुछ नही भाभी.... बस अप का एक और कपड़ा मिल गया.... "



और मई अपने हतहो मे उनकी पनटी ले के किचन मे चला गया. उन्होने
देख के मुस्कुरा दिया और कहा, “बड़े नॉटी हो गये हो देवेर्जी.. लगता
है बहुत खेले हुए हो.”. उहोने देवेर्जी पे जो सेक्सी अंदाज़ मे ज़ोरे दिया तो
मेरे तो होश ही उडद गये.मैने कहा “भाभी अप मुझे संजय की बजाए
इसी स्टाइल मे देवेर्जी कहा करो जैसा की अभी कहा.” वो मेरे इश्स बात पे
हँसने लगी. बोली "ठीक है अगर तुम्हे पसंद है तो यही कहूँगी लेकिन
मुझे संजय बड़ा पसंद है."|
मैने कहा क्या पसंद है भाभी आपको???"

वो मेरे बात का मतलब समाज़ गयी, और कहा की "मुझे संजय कहेना
पसंद है, संज्ज़े बुद्धू."

पनटी अभी भी मेरे हाथ मे थी और एब्ब मैने उनको ध्यान से देखा
अप्पर से नीचे तक, उस निघट्य मे उनके बदन की सब गोलाई सॉफ दिख रही
थी.. उनकी चूंचियो को ब्रा की ज़रूरत ही नही थी.. निघट्य से उनके छ्होटे
निपल बाहर मुँह निकले हुए थे.. पीछे से छूतदो के उभर और
मांसल जाँघो का शेप सॉफ नज़र आ रहा था. और मई सोचने लगा इन
मांसल जाँघो के बीच मे उनकी छूट के बारे मे. ज़रूर पवरोती की तरह
फूली हुई होगी. मुझे तो वो तो मानो सेक्स की देवी लग रही थी, गोल चेहरा,
खुले बॉल, मोटी गार्डेन, उभरा सीना, गोल गोल चिकने और गोरी भुजाए,
पहाड़ो जैसे साइड से ताने हुई चूंचिया, उनके बिच ब्रा ना होने पर भी
एक गहेरी कहयी. उनकी निघट्य बहुत पतली थी जिसके कारण उनके बदन का
गोरा हिस्सा उसमे से पूरा दिखाई दे रहा था.. उनके सीने से होते हुई
मेरी नज़र और नीचे गयी और मैने देखा … बहुत ही मुलाएँ सपाट
पेट (उनका पेट बाहर नही निकाला होने के कारण वो मोटी की बजाए गड्राए
बदन वाली एक सेक्सी औरत लगती थी) उसके नीचे बड़े कोट के बोटों जैसे
उनखी सेक्सी गहरी नाभि, नाभि से होते हुवे उनके सेक्सी छूट की तरफ एक
पतले बालो की लाइन गयी हुवी थी, उनके छूट शायद पूरी सॉफ थी,, उनकी
कमर बहुत पतली थी काँसे शायद 27-28 की थी. और चूतड़ तो बस पूछो
मत, उभरे हुए गोलाई लिए और आकर्षक थे, उनकी टाँगे भी बहुत चिकनी
थी, बिल्कुल केले के खंबे जैसी चिकनी. मई तो सीधे उनकी छूट के ख्यालो
मे खो गया सोचा उनकी छूट का कलौर पिंक होगा, और छूट के गुलाबी
अम्म औरतो से छोटे और चिपके होंगे (उनका डाइवोर्स करीब 8साल पहले
हो चक्का था और मेरे गाओं वाली भाभी ने बताया की वो तभी से अकेली
रहती है), छूट काफ़ी टाइट होगी, छूट का च्छेद बहुत छोटा होगा, बीच
मे जो दाना था वो एकद्ूम लाल, शायद भाभी रोज उसको अपने नाखूनओ से
कुरेड़ती होगी. मई उन्ही ख्यालो मे खोया था और मेरा लंड पंत के अंदर
से बाहर आन एके लिए अंगड़ाई लेने लगा था. उन्होने देखा की मई उनके
सारे बदन को घूर रहा हून, फिर उन्होने अपने अप को देखा और तब उनको
ख़याल आया की आरे अब्बी भी उन्होने सिर्फ़ निघट्य ही पहेनी है. उन्होने ज़हात
से मेरे हाथो से पनटी चीन ली और किचन टेबल पे पड़ी हुई ब्रा उठाई
और बेडरूम की तरफ चल पड़ी, तभी मैने कहा, "भाभी एब्ब क्या फायेदा",



वो बोली "कैसा फायेदा देवेर्जी, ज़रा खुल के कहो ना.."

"भाभी अप के हाथो मे जो यह 2 कपड़े है वो पहनने जा रही हो ना
बेडरूम मे."

"हा प्यारे देवेर्जी... क्यो.. नही पहनु क्या.........?"

"अरे भाभी जो च्छुपाने की लिए यह पहनने जा रही हो, वो तो हुँने सूब
कुछ देख लिया, और अभी नही, जब आया तभी देख लिया, फिर एब्ब हुंसे इन्हे
चीफ़ा के करेगी भी क्या.."

"प्यारे देवेर्जी.. ह्यूम पता है की अप देख चुके है, और अभी भी अप इन्हे
ही घूर रहे है.. और अभी आपका मान नही भरा है.. लेकिन मई इन्हे अपपसे
छुपाने के लिया नही पहन रही हू..."

"तो फिर भाभी...."
" आप ने तो सूब कुछ देख लिया.. एब्ब क्या आप यह च्चहते हो की दूसरे भी
यह सूब देखे..., इन सूब को दूसरो की नज़ारो से च्छुपाने की लिए पहन रही
हू संजे..."

"तभी भाभी ने कहा "संजय किसी को बताना मत हा...."

"क्या नही बताना है भाभी"

"यही जो कुछ तुमने देखा"

"क्या भाभी, मई संजा नही, मैने तो ऐसा कुछ देखा नही ..ज़रा खुल के
बताओ ना"

"अरे बाबा यही की तुमने मुझे नहाने के बाद जिसस हालत मे देखा और
मैने अंडर से कुछ नही पहेना उसके बारे मे कहे रही हून…
समझे. और तुम आज ही आए हो इसलिए मई इसे भूल जाती हून कीट उम घर पर
हो.. अकटुली मैं घर मे अकेली रहेती हून, तो मुझे ऐसे ही रहेने की
अददात पद चुकी है, और वैसे भी शाम को कोई आता नही है, इश्स लिए
नहाने के बाद मई हुमेशा टवल मे ही आती हू और हॉल मे ही चांग
करती हून, आईने मे देख के आप ना सारा बदन टवल निकल के साफ करती
हू, अभी तुम आज ही आई हो ना तो मुझे अभी तुम्हारी आदत नही पड़ी है,
मुझे लगा की मई अकेली ही हून इसी लिए यह सूब अंजाने मे हो गया."

"नही भाभी, बिल्कुल नही किसी को नही बतौँगा लेकिन जो कुछ हुवा अच्छा
हुवा. और हा आप आप नी स्टाइल चेंज मत करो, अभी भी आप रोज हमेशा की


तरह ही चेंज किया करो और नाहया करो, मुझे कोई प्राब्लम नही है
इससमे."

भाभी ने गुस्से मे कहा "क्या मतलब? क्या कहे रहे हो संजय?"

"श भाभी मेरे मतलब था की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है
ना."

भाभी अभी बेडरूम के डोर पे ही खड़ी थी, और उनके हाथो मे पनटी और
ब्रा लटक रही थी, मई उनके बहुत करीब खड़ा था. तभी किसी की आवाज़ आई
"ओहूऊऊ सॉरी सॉरी... नामिता मुझे नही पता था की तुम बूससी हो..." एक
निहायट ही खूबसूरत, गोरी गोरी, पतली सी औरत लगभग 32 की होंगी, आप ने
आँखो पे एक हाथ रखते हुवे, और भाभी के हाथो मे लटकी हुवी ब्रा
और पनटी के ट्राफ् इशारा करते हुवे, बड़े ही नटखत और सेक्सी अंदाज़ मे
भाभी को चिढ़ते हुवे कहा "लगता है मुझे बाद मे आना च्चािए,
है ना नामिता, आप लोग चलने दीजिए आप ना प्रोग्राम, मई जा रही हू.."

"अरे प्रभा, आओ आओ ना, कहा चली.. तुम भी ना बस... तुम्हे तो हेर जघा
सूब कुछ वही प्रोग्राम ही दिखता है... आओ अंडर .. तुम जो कुछ समझहह
रही हो वैसा कुछ भी नही हो रहा है यहा. आओ तुम्हे मई मिलवती हू..
यह है संजय, सुनीता का मुँह बोला देवेर.. यहा नौकरी करने आया है,
रहने का प्राब्लम है इसलिए अभी ये यही रहेगा," यह बात सुनते ही प्रभा
की आँखो मे चमक आ गयी, और भाभी और प्रभा की आँखो आँखो मे
ही बात हुवी और दोनो मुस्कुराने लगी, मेरी कुछ समझहह मे नही आया.
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11-06-2018, 10:34 AM,
#3
RE: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी ब�...
कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण3

फिर प्रभा ने कहा.. "अक्चा तो तभी सुनीता यहा आती नही है.. भाई जिसका
इतना हॅंडसम देवेर हो वो कहा किसी के पास जाएगी. पति के साथ ऐसा
हॅंडसम देवेर फ्री, बाइ वन गेट वन फ्री, बड़े मज़े है प्रभा के तो.."

भाभी ने मुझे कहा, "संजय यह प्रभा है, मेरी पड़ोसन और हम
दोनो एक ही बॅंक मे कम करते है. और यह भी ‘अकेली’ रहेती है." भाभी
ने ‘अकेली’ पे कुछ ज़्यादा ही जोरे दिया था.

तभी प्रभा भाभी ने कहा "मेरे पति देल्ही मे सर्विस करते है, वो
महीने मे 1 या 2 बार आते है." पता चला की उनका भी कोई बच्चा नही
है.

प्रभा भाभी ने कहा, "संजय, ज़रा हमारा भी ख़याल रखना, सिर्फ़ आप नी
भाभी मे ही मशगूल मत रहेना, रिश्टेमए एब्ब तो हम भी आपकी भाभी
है."

मुझे कुछ समझ मे नही आया. मेरे चेहरे की कन्फ्यूषन को भाँपते
हुवे नामिता भाभी ने कहा "संजय तुम इसकी बतो पे ध्यान मत दो, बस


इसकी तो यह आदत ही है, कुछ भी बोलती रहेती है." फिर भाभी ने मुझे कहा,
की तुम जा के अर्रम करो हमे कुछ कम है, हम यही हॉल मे कंप्यूटर पे
कम कर रहे है. तुम मेरे बेडरूम मे सो जाओ, क्यो की एब्ब तक प्रिया के
कमरे की सफाई नही की है, और वो जब से मुंबई मम्मी पापा के पास
गयी है, तब से वो कमरा बंद ही पड़ा है. (प्रिया भाभी की सबसे
छोटी सिस्टर है, मुझसे 2 साल छ्होटी है, लेकिन मई उसको 1 साल से नही मिला
हून, लास्ट टाइम 1 साल पहेले जब वो दीवाली पे हुमारे गाओं भाभी के पास
आई थी तब मिले थे). भाभी के बेडरूम के खिड़की से कंप्यूटर की
स्क्रीन देखी जा सकती थी, और कंप्यूटर पे कम करने वेल को बेड पे लेते
हुवे को देख पाना मुस्किल था, और कंप्यूटर पे बैठने वेल की पीट खिड़की
की तरफ आती थी. मई शॉर्ट और त शर्ट पहन के सोया.तभी नामिता भाभी और प्रभा भाभी की आवाज़ सुनी. नामिता भाभी
प्रभा से कह रही थी जब भी भानु तौर पर जाता है तेरे तो मज़े हो जाते
है.. कल तो बêते को तुमने 11 बेक मेरे घर भेज दिया और रात के 8.30 पर
बुलाया.. और हन कल तो कोई दूसरा था .. रवि या शंकर जैसा नही दिखा..
कौन था? कोई नया है क्या? लेकिन तेरी हालत खराब कर दी थी.. तू जब बêते
को लेने आई तो बहुत ताकि लग रही थी.. चलने मे भी तकलीफ़ थी ना?”
प्रभा ने चाहक कर कहा.. “अरे मत पूंछ ये राकेश था.. भानु का
दोस्त.. होली के दिन से लगा था.. लेकिन बहुत स्लो था.. मैने भी उसे कभी
पल्लू गिरा कर कभी गांद मटका कर बहुत इशारे किए तब कल उसने हिम्मत
की.. मैने तो उम्मीद छ्चोड़ दी थी… लेकिन कल उसे मालूम नही था की भानु
तौर पर है.. और दो दिन पहले ही उसने भानु से कहा था की आज 12 बजे
वो आएगा. कल भानु अचानक तौर पर गया और इसे बताना भूल गये..
मई जानती थी की राकेश आएगा.. सोचा देखती हून अकेले मे क्या करता है..
लेकिन क्या बतौ.. ये तो भूखा शेर निकला.. क्या छोड़ता है.. छाई देने गयी
तो जो हाथ पकड़ा इसने.. उसके बाद मेरे कपड़े उतरे और रात के 8 बजे
बातरूम मे ले जा कर छोड़ने तक मुझे नंगी ही रखा.. क्या लंड है
उसका.. 10 मीं मे तय्यार और बहुत जबरदस्त छोड़ता है. इसके जैसे लंबा
और मोटा तो रवि या शंकर का भी नही है. राकेश का लंड मेरे मुँह
मे बहुत मुश्किल से ले रही थी.. और वो भी दबा कर अंदर धकेल रहा
था. चूसने के बाद तो और मोटा और सख़्त हो गया था.. मई तो दर रही थी
की कैसे छूट मे लूँगी.. लेकिन उसने मुझसे कहा फ्रिड्ज से मखखां ले
आओ.. फिर पूरा 100ग्राम का पॅक आप ने लंड पर और मेरी छूट मे लगाया
और मेरी कुंचियों और निपल पर भी.. श उसकी याद आते हिमेरी छूट फिर
से गीली हो रही है.. सोच रही थी आज उसे बुला लून.. अब तो मेरे बêते की भी
छूत्टिया शुरू हो गयी है.. इसलिए आज भी मेरा भाई उसे आप ने साथ ले गया
है. अब वही रहेगा 10 दिन तक.. मुझे राकेश के लंड की याद आते ही उसकी
चुदाई याद आ जाती है…वैसे रवि का ठीक है लेकिन शंकर छोड़ने मे
रवि से ज़्यादा अच्छा है और बहुत देर तक छोड़ता है. लेकिन ये तो उन सबसे
आयेज निकला जैसा लंड वैसी ही धमाकेदार चुदाई.. मई तो ना जाने कितनी
बार झड़ी. पहली बार जब उसने मेरी छूट मे डाला तो मुझे लगा छूट
जैसे फट रही हो.. और दर्द भी .. लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था. उसने 5बार छोड़ा मुझे.. अलग अलग तरीके से.. मई तो रवि और शंकर की
चुदाई भूल गयी.. वैसे पिछले शनिवार को ही शंकर आया था.. उसने
भी मेरे चूंचियों पर निशान बना कर मसला.. और कल राकेश ने
छोड़ा..”

मई प्रभा की बाते सुन रहा था. मैने मान ही मान सोचा साली चुड़क्कड़
मेरे लंड से पाला पड़ेगा तो सारे लंड भूल जाएगी.. अंदर घुसा कर
झड़ना भूल जौंगा.

तभी नामिता भाभी ने कहा “रवि से फिर दोस्ती हो गयी क्या?” प्रभा ने
कहा “हन रे उसने सॉरी बोला.. मैने भी सोचा मई भी तो उसके अलावा
शंकर से छुड़वा रही हून फिर उसने और किसी को छोड़ लिया तो क्या बुरा
किया.. और उसने उसी दिन मुझे 3 बार छोड़ा.. शायद शंकर की ने से 2
दिन पहले.” नामिता भाभी मुस्कुराइ और कहा तू तो किस्मेट वाली है.. अब तो
3-3 लंड तेरे नसीब मे है और भानु का लंड तो है ही.” और दोनो ज़ोर से
हँसने लगी. प्रभा ने कहा तू क्यो नही किसी से चुड़वति?” नामिता भाभी
बोली अरे वैसा छोड़ने वाला मिलेगा तो ज़रूर छुड़वा लूँगी.”
प्रभा भाभी नेकहा, "तेरे तो मज़े हो गये नामिता, है क्या चिकना और
हंसोमे लड़का पकड़ा तूने. एब्ब तो तेरी हेर रत सुहगगगगगग......" तभी
भाभी ने प्रभा भाभी के मुँह पे हाथ रख दिया. और बोली "टुजे कोई
शरम आती है या नही, जो मुँह मे आता है बक देती है. वो प्रभा से 2
साल छोटा है, मेरे लिए तो और भी बहुत छोटा है, और ज़रा धीरे, कही ओ
जाग रहा होगा तो. उसने यह सारी बाते सुन ली तो वो क्या सोचेगा, की मई
आसीवासे औरत हून." तभी प्रभा भाभी चुप हो गयी और वो भाभी
का इशारा समझ गयी, की भाभी आप ने आपप को मेरे सामने आक्ची औरत
बने रहेना चाहती है.

थोड़ी देर बाद प्रभा भाभी ने कहा, "तो करे शुरू आप ना प्रोग्राम", मई
यह सुन के चौंक गया. मई सोचने लगा की प्रभा भाभी किस प्रोग्राम
की बात कर रही है." तभी भाभी ने कहा की पहेले देख लो कही संजय जाग
तो नही रहा है. प्रभा भाभी बोली, अभी देख के आती हून. मैने यह
सुनते ही आप नी आँखे बंद कर ली. और पीठ के बाल लेता रहा, दोनो भाभियो की
बाते सुनके, और नामिता भाभी के बड़े बड़े बूब्स और नंगा जिस्म देख
के पहेले ही मेरे लंड टाइट खड़ा हो गया था. इश्स वजाहा से मेरे शॉर्ट
मे टेंट लग गया था. प्रभा जैसे ही कमरे मे आई, उसने मेरे तरफ
देखा, मैने हल्की सी आँख खुली रखी थी, जो की देखने वेल को लगेगा की
सोया हुवा हू लेकिन मई उसको देख सकता था. वो मेरे आप ्पर ज़ुकी उसकी
गरम शंसे मेरे गेर्दन को च्छू रही थी. वो तोड़ा और नीचे ज़ुकी तो
मेरा खड़ा लंड उसके पेत को टच हो गया, मेरे सारे बदन मे
ज़ुर्ज़हुरी दौड़ गयी, और मेरा लंड जो पहेले से ही टाइट था और ज़्यादा
हार्ड हो गया, और तोड़ा ज़ाटके भी मरने लगा, न प्रभा ने मेरे लंड की
हलचल आप ने पेत पे महसूस की तो उशे बहुत अक्चा लगा, जैसे उसकी मान
की मारद पूरी हो गयी हो, एब्ब वो मेरे लंड की तरफ मूडी, उसे पूरा एेकिनहो गया था की मई सो रहा हून, उसने शॉर्ट के आप ्पर से ही मेरे लंड को
सहलाया, मुझे मानो बिजली का ज़्ातका लग गया हो, लेकिन मेरी हालत ऐसी थी
की मई कुछ कर भी नही सकता था, क्यो की मई उनको यह साबित करना चाह
रहा था की मई सोया हू, जिस से की मई उनका प्रोग्राम देख साकु. एब्ब वो
मेरी जाँघो को सहेलने लगी मेरी हालत और ज़्यादा खराब हो रही थी, वो
तोड़ा आयेज बादने ही लगी थी की, नामिता भाभी अंदर आ गयी और उसने
प्रभा को एक चिकोटी निकली, और कहा "मुझे पता था की तुम ज़रूर कोई ना
कोई हरकत करोगी, इसी लिए तुम्हारे पीछे पीछे छल्ली आई. एब्ब चलो भी
या प्रोग्राम नही करना है." प्रभा तो सूब कुछ अभी ही कर लेना चाहती
थी, लेकिन प्रोग्राम का नामे सुनते ही ओ फ़ौरन उठ के खड़ी हो गयी. और
वो दोनो हॉल की तरफ चल पड़ी, प्रभा ने कहा "नामिता संजय का लंड तो
बहुत बड़ा है और बहुत मोटा भी, और जब टाइट होता है तो बहुत सकत्ता
लगता है. मुझे तो लगता है इसका लंड राकेश से ज़्यादा बड़ा है और कैसा
पंत से उपर खड़ा था. ऐसे लंड से तो छूट का कचूमर निकल जाएगा..
वैसे चुदाई कैसी करता ये देखना पड़ेगा." ये कहकर प्रभा ने एक
लंबी सांस ली.नामिता भाभी बोली, "अक्चा तो तुम उसका लंड भी देख के आई
! तुम तो बड़ी बेशरम हो, पहेले ही दिन सूब कुछ कर लॉगी क्या? वैसे
मुझे सुनीता ने बतलाया है की उसका लंड बहुत लंबा और मोटा है.. वो
भी उसे लेना चाहती है लेकिन मौका नही मिला.. अब मेरे घर आ कर लेगी.
और संजय बहुत शर्मिला है ना.. मुझे ही उसकी शरम तोड़नी है.. लेकिन
धीरे धीरे. वैसे तुझे जल्दबाज़ी नही करनी चाहिए"

प्रभा : "अरे नही नामिता, वो तो मैने आप ्पर से ही देख लिया, और शॉर्ट के
आप ्पर से ही च्छू लिया. जी तो कर रहा था निकल के देख लून और खूब
चुस्सू, लेकिन तुम आ गयी ना".

एब्ब मई खिड़की से देखने लगा, प्रभा ने कहा “नामिता हो जा शुरू, और
भाभी ने नेट कनेक्ट किया, और वो दोनो सरफिंग करने लगी, मैने देखा की
उनके स्क्रीन पे अडल्ट साइट खुल रही है, उसमे मेट्यूर्ड विमन के साथ टीन
बाय्स के सेक्स करते हुवे फोटो’स थे, प्रभा और नामिता भाभी एक एक पिक
के आप ्पर कॉमेंट करती जा रही थी. " एक पिक मे 35 साल की एक औरत 18 साल के
लड़के का लंड मुँह मे ले के चूस रही थी, यूयेसेस औरत की चूंचिया बहुत
बड़े बड़े थे और उसकी कमर पतली थी, नामिता भाभी ने कहा, "है
प्रभा, देखो इस पिक मे तुम क्या मज़े से लंड च्छुस रही हो, और देखो
वो तुम्हारी चूंचिया भी दबा रहा है" प्रभा ने कहा, "हा नामिता,
बोहोट मज़ा आया मुझे तुम्हारे देवेर संजय का लंड चुसते हुवे, (पिक
वेल लड़के को वो संजय कहे रही थी, याने की मई) और तुम उसको छोटा
कहे रही थी ना, ज़रा देख कैसे छूट मे उंगली भी दल रहा है और साथ
मे मेरे चूंचियो को डब्बा भी रहा है, और देख लंड चुस्वा के कैसे
खुश हो रहा है"

मैने स्क्रीन पे पिक गौर से देखा, उसमे कोई गोरी अमेरिकन औरत किसी गोरे
लड़के के साथ यह सूब करते हुवे दिख रही थी. मई समझ गया की दोनो


भाभीया पिक को आप ने आप का पिक मॅन के बाते कर रही है. फिर उन्होने
दूसरे पिक को फुल स्क्रीन किया, उसमे एक औरत एक 18 साल के लड़के का लंड
आप ने छूट मे घुसाए हुवी थी.उूव क्या पोज़ थी, मैने बहुत ब्लू फिल्म
देखी है लेकिन यह पोज़ पहेली बार देख रहा था. उसमे वो औरत
घुटनो के बाल पैर पीछे मोड़ के सीधी बैठी थी और उसके दोनो हाथ बेड
पे पीछे की तरफ करके रखे थे, उसके पैर उसके चूतड़ को टच हो रहे
थे और वो पूरी तरह से हंतो पे ज़ोर दे के अद्ध लेती पोज़ मे थी और उसका
दोनो जंगे फैली हुवी थी. वो बिल्कुल किसी मेंढक की तरहा बैठी थी. (मैने
ही इस पोज़ को मेन्डक आसान का नामे दिया है.) और यूयेसेस लड़के ने आप ना एक
हाथ उसके कमर मे डाला हुवा था और एक हाथ मे उसका बॉल पकड़े हुवे
थे, लड़के के मुँह मे औरत के निपल्स थे, और नीचे छूट मे लंड
घुसा हुवा था, औरत ने चेहरा ऐसा बनाया हुवा था की उसके छूट मे
मोटा लंड घुसने की वजह से बहुत दर्द हो रहा हो.
हो गया था की मई सो रहा हून, उसने शॉर्ट के आप ्पर से ही मेरे लंड को
सहलाया, मुझे मानो बिजली का ज़्ातका लग गया हो, लेकिन मेरी हालत ऐसी थी
की मई कुछ कर भी नही सकता था, क्यो की मई उनको यह साबित करना चाह
रहा था की मई सोया हू, जिस से की मई उनका प्रोग्राम देख साकु. एब्ब वो
मेरी जाँघो को सहेलने लगी मेरी हालत और ज़्यादा खराब हो रही थी, वो
तोड़ा आयेज बादने ही लगी थी की, नामिता भाभी अंदर आ गयी और उसने
प्रभा को एक चिकोटी निकली, और कहा "मुझे पता था की तुम ज़रूर कोई ना
कोई हरकत करोगी, इसी लिए तुम्हारे पीछे पीछे छल्ली आई. एब्ब चलो भी
या प्रोग्राम नही करना है." प्रभा तो सूब कुछ अभी ही कर लेना चाहती
थी, लेकिन प्रोग्राम का नामे सुनते ही ओ फ़ौरन उठ के खड़ी हो गयी. और
वो दोनो हॉल की तरफ चल पड़ी, प्रभा ने कहा "नामिता संजय का लंड तो
बहुत बड़ा है और बहुत मोटा भी, और जब टाइट होता है तो बहुत सकत्ता
लगता है. मुझे तो लगता है इसका लंड राकेश से ज़्यादा बड़ा है और कैसा
पंत से उपर खड़ा था. ऐसे लंड से तो छूट का कचूमर निकल जाएगा..
वैसे चुदाई कैसी करता ये देखना पड़ेगा." ये कहकर प्रभा ने एक
लंबी सांस ली.नामिता भाभी बोली, "अक्चा तो तुम उसका लंड भी देख के आई
! तुम तो बड़ी बेशरम हो, पहेले ही दिन सूब कुछ कर लॉगी क्या? वैसे
मुझे सुनीता ने बतलाया है की उसका लंड बहुत लंबा और मोटा है.. वो
भी उसे लेना चाहती है लेकिन मौका नही मिला.. अब मेरे घर आ कर लेगी.
और संजय बहुत शर्मिला है ना.. मुझे ही उसकी शरम तोड़नी है.. लेकिन
धीरे धीरे. वैसे तुझे जल्दबाज़ी नही करनी चाहिए"
Reply
11-06-2018, 10:34 AM,
#4
RE: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी ब�...
कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण part4

प्रभा : "अरे नही नामिता, वो तो मैने आप ्पर से ही देख लिया, और शॉर्ट के
आप ्पर से ही च्छू लिया. जी तो कर रहा था निकल के देख लून और खूब
चुस्सू, लेकिन तुम आ गयी ना".

एब्ब मई खिड़की से देखने लगा, प्रभा ने कहा “नामिता हो जा शुरू, और
भाभी ने नेट कनेक्ट किया, और वो दोनो सरफिंग करने लगी, मैने देखा की
उनके स्क्रीन पे अडल्ट साइट खुल रही है, उसमे मेट्यूर्ड विमन के साथ टीन
बाय्स के सेक्स करते हुवे फोटो’स थे, प्रभा और नामिता भाभी एक एक पिक
के आप ्पर कॉमेंट करती जा रही थी. " एक पिक मे 35 साल की एक औरत 18 साल के
लड़के का लंड मुँह मे ले के चूस रही थी, यूयेसेस औरत की चूंचिया बहुत
बड़े बड़े थे और उसकी कमर पतली थी, नामिता भाभी ने कहा, "है
प्रभा, देखो इस पिक मे तुम क्या मज़े से लंड च्छुस रही हो, और देखो
वो तुम्हारी चूंचिया भी दबा रहा है" प्रभा ने कहा, "हा नामिता,
बोहोट मज़ा आया मुझे तुम्हारे देवेर संजय का लंड चुसते हुवे, (पिक
वेल लड़के को वो संजय कहे रही थी, याने की मई) और तुम उसको छोटा
कहे रही थी ना, ज़रा देख कैसे छूट मे उंगली भी दल रहा है और साथ
मे मेरे चूंचियो को डब्बा भी रहा है, और देख लंड चुस्वा के कैसे
खुश हो रहा है"

मैने स्क्रीन पे पिक गौर से देखा, उसमे कोई गोरी अमेरिकन औरत किसी गोरे
लड़के के साथ यह सूब करते हुवे दिख रही थी. मई समझ गया की दोनो


भाभीया पिक को आप ने आप का पिक मॅन के बाते कर रही है. फिर उन्होने
दूसरे पिक को फुल स्क्रीन किया, उसमे एक औरत एक 18 साल के लड़के का लंड
आप ने छूट मे घुसाए हुवी थी.उूव क्या पोज़ थी, मैने बहुत ब्लू फिल्म
देखी है लेकिन यह पोज़ पहेली बार देख रहा था. उसमे वो औरत
घुटनो के बाल पैर पीछे मोड़ के सीधी बैठी थी और उसके दोनो हाथ बेड
पे पीछे की तरफ करके रखे थे, उसके पैर उसके चूतड़ को टच हो रहे
थे और वो पूरी तरह से हंतो पे ज़ोर दे के अद्ध लेती पोज़ मे थी और उसका
दोनो जंगे फैली हुवी थी. वो बिल्कुल किसी मेंढक की तरहा बैठी थी. (मैने
ही इस पोज़ को मेन्डक आसान का नामे दिया है.) और यूयेसेस लड़के ने आप ना एक
हाथ उसके कमर मे डाला हुवा था और एक हाथ मे उसका बॉल पकड़े हुवे
थे, लड़के के मुँह मे औरत के निपल्स थे, और नीचे छूट मे लंड
घुसा हुवा था, औरत ने चेहरा ऐसा बनाया हुवा था की उसके छूट मे
मोटा लंड घुसने की वजह से बहुत दर्द हो रहा हो.
प्रभा भाभी कहा चुप्प बैठने वाली थी. "है नामिता तुमने तो हद ही
कर दी, यह क्योंसि पोज़ ले की बैठ गयी, है मैने तो कभी नही देखी थी
ऐसी पोज़, और ना एब्ब तक ऐसी पोज़ का मज़ा लिया है, और संजय को तो देखो
क्या चुदाई कर रहा है तुम्हारी, आप नी भाभी को रुला दिया है उसने, ज़रा
मुँह देखो इस पिक मे तुम्हारा, बिल्कुल ऐसे लग रहा है की तुम्हारी छूट
फटने वाली है, और नामिता संजय का असली लंड प इससे ज्यदा ही लंबा और
मोटा है," भाभी ने कहा "पता है मुझे, प्रभा ने मुझे बताया है
उसके बारे मे.उसने तो इसके लंड को आप नी गांद मे लगवाया और उसकी पंत
उतार कर सामने से देखा है., लेकिन प्रभा प्लीज़ इस पिक मे मेरे साथ
संजय का नाम मत जोड़. मेरी छूट की हालत खराब हो रही है"

प्रभा: "क्यो नामिता, बड़े लंड से दर लगता है क्या?"

नामिता: "नही प्रभा, वो मेरे घर रहने आया है. और फिर प्रभा ने उसे
मेरे पास भरोसे के साथ भेजा है, वो खुद इसके लंड के लिए पागल है..
बस थोड़ी शरम हट जाए और ये खुद प्रभा की छूट छोड़ने का मान
बना ले तो मेरा काम खकतम, आप ्पर से वो प्रभा का देवेर भी है,
अगर तुम ऐसी ही बाते करोगी और मेरे दिल मे ऐसे ख्याला पैदा हो गये तो.
सुनीता से पहले मई ही इसके लंड से चुड जौंगी"

“नामिता ज़रा इस पिक मे देख, है क्या चेहरा बनाया है, जैसे की बरसो की
प्यसस मिट रही है. नामिता बहुत मज़ा आता होगा ना इश्स अससन मे."

नामिता: "हा प्रभा, बहुत मज़ा आता है लेकिन इसमे दर्द भी बड़ा होता है,
ज़रा चेहरा तो देख उसका पिक वाली का, लेकिन एक बात है मज़ा तो दर्द मे ही
ज़्यादा आता है. और हा इसमे लड़को को ज़्यादा मज़ा आता है, इस लिए वो जी खोल के
छोड़ते है."प्रभा भाभी ने कहा "नामिता एब्ब मेरे से रहा नही जाता, कुछ कर ना,
कोई च्चाक्कर चला ना जिस से की मेरा कम बन जाए. और जब से संजय के
मोटे लंड को चुवा है और ये पिक देखे है तब से जी कर रहा है की खूब
चुसू उसका लंड.और तेरी तहरा ही कमर उचका उचका के इश्स अससन मे उसे
से चड़वौ आप नी छूट को."

नामिता भाभी ने कहा "ठीक है अगर तुझ से रहा नही जाता तो एक कम कर,
हम वोही प्लान फिर से आक्टिव करेंगे जो पिछली बार तुम्हार भनजे के आने
पे किया था. संजी की नही"

नामिता भाभी की बात सुन के प्रभा तो झूम उठी, और उसने कहा उूव
नामिता तुमने तो बहुत ही कमाल की ईडिया दी. एब्ब मुझे पूरा एेकिन है की
मुझे एब्ब ज़्यादा इंतजार नही करना पड़ेगा, एब्ब बहुत ही जल्द संजय से
मई छुड़वा लूँगी. हा लेकिन इश्स बार तुम्हारा रोल मई आड़ा करूँगी याने की
संजय को पिघलने का कम मई करूँगी और बाकी सारा कुछ अरेंज
करना पड़ेगा तुम्हे, समझी ना.

मेरी तो कुछ भी समझ मे नही आया की मेरी सेक्सी भाभीया कोंसि प्लान की
बात कर रही है, और मेरे साथ आयेज क्या होने वाला है, लेकिन इतना तो टाई था
की जो भी होने वाला है बहुत ही अच्छा होने वाला था. और बहुत ही जल्दी
प्रभा मुजसे छुड़वाने वाली थी. एब्ब मेरे से कंट्रोल नही हो रहा था, तो
मैने खांसने की आवाज़ निकली, ताकि मेरे सेक्सी भाभीया जान जाए की मई
जागने वाला हू. मेरी आवाज़ सुनते ही भाभी ने जल्दी से साइट क्लोज़ कर दी और
बाद मे नेट भी डिसकनेक्ट कर दिया.
एब्ब प्रभा भाभी ने जनभुज के उँची आवाज़ मे कहा "नामिता लगता है
तुम्हारे देवेर को भूक लग गयी है., ज़रा उसकी भुंक मिटा दो, अगर
तुम्हारे पास नही हो कुछ देने के लिए तो मेरे पास भेज दो."

नामिता भाभी ने कहा, "मैने खाना आते ही रेडी कर लिया था, इश्स लिए
उसी तुम्हारे पास भेजने की ज़रूरत नही है." एब्ब मई बेडरूम के डोर
पे आ गया. देखा की दोनो भाभियो के चेहरे लाल और सेक्स के बुखार मे
तमतमाए हुवे दिख रहे थे. प्रभा भाभी ने मेरे टेंट की तरफ
देखा और आप नी आइब्रो उड़ते हुवे कहा, "क्या बात है देवेर्जी, किसका
सपना देख रहे थे, अश् या रानी?"

मैने भी प्रभा भाभी को पलट के जवाब दे दिया, "भाभी ना तो अश् ना
तो रानी, हुँने तो मधुरी डिक्सिट को देखा" (प्रभा भाभी मधुरी डिक्सिट से
मिलतिजुलती है, बस एक ही फिर्क है, प्रभा भाभी के बूब्स मधुरी डिक्सिट जैसे
है, और नामिता भाभी जब मूड मे आती है तो उनको मधुरी डिक्सिट ही
काहेती है)
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11-06-2018, 10:34 AM,
#5
RE: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी ब�...
कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण part5
प्रभा भाभी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी, और कहा "वा देवेर्जी आप पको तो
आपने से बड़ी वाली औरतो मे ज़्यादा इंटरेस्ट दिखता है"

एब्ब प्रभा भाभी ने नामिता भाभी को इशारा किया तो नामिता भाभी
बोल पड़ी " प्रभा एक प्राब्लम है, क्या तुम मेरी मदात करोगी?"

प्रभा: "नामिता तुम यह पूछ के मुझे शर्मिंदा कर रही हो, भला
कभी मैने किसी बात को ना कहा है. बोलो क्या मदात चाहिए."

नामिता: "अरे तुम तो जानती हो ना की प्रिया का कमरा अभी सफ़फ़ नही हुवा
है, और हॉल मे कोई बेड भी नही है, तो संजय को रत को सोने के लिए जगह
नही है, अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ ना हो तो क्या मई इससे तुम्हारे घर भेज डू
सोने के लिए. बस 2 और दिन की बात है, सनडे को मई कमरा सफ़फ़ कर
लूँगी."

प्रभा : " अरे तो इसमे पूछने की क्या बात है, तुम ऐसे भी भेज क्टी तो मई
क्या माना कर देती. लेकिन तुम्हारे देवेर को पूछ लो की वो मेरे साथ
सोएंगे की नही.."

मई : "क्या भाभी??"

प्रभा : "मेरा मतल्ब है की मेरे घर सोयोंगे की नही"

मई: "क्यो नही भाभी, ज़रूर सोयुंगा., लेकिन मुझे देर रत तक टीवी देखने की
अडॅप्ट है, और टीवी देखते देखते ही मुझे नींद आती है"

प्रभा: अक्चा सच, है प्यारे देवेर्जी आपकी और मेरी तो आदते भी मिलती
है.

मई : कैसे भाभी? मई संजा नही.

प्रभा : मुझे भी तो नींद नही आती, मई भी टीवी देखते देखते ही सोती
हू, इसी लिए मैने आप ना टीवी भी बेडरूम मे ही लगाया हुवा है." फिर उन्होने
नामिता भाभी की और देखा के कहा, "अक्चा नामिता एब्ब मई भी चलती
हू, संजय को भेज देना सोने के लिए."

मई टाय्लेट मे चला गया, नामिता भाभी ने प्रभा से कहा, "हा भेज
दूँगी, लेकिन देखो याद रखना आज पहेला दिन है संजी ना, आज कहा तक
आयेज बदाना है पता है ना. पहेले ही दिन सूब कुछ कर मत देना."

खाना खा के मई प्रभा के घर गया, उसने हल्के अस्स्मणी कलर की
शॉर्ट निगती पहन रखी थी, ऐसी निघट्य रियल मे मैने पहले कभी नही
देखी थी. सिर्फ़ फटिओं टीवी पे ही मॉडेल को पहने हुवे देखी थी. निघट्य स्लीव्ले थी, दोनो शोल्डर पे डोरे से बंद के रखी थी, चूंचियो का
आधे से ज़्यादा हिस्सा और क्लीवेज लाइन पूरी दिखा रही थी, निघट्य सिर्फ़ प्रभा
की चिकनी और मोटी मोटी मांसल जगॉ तक ही थी. उसकी आधी से ज़्यादा जंघे
तो खुली ही दिख रही थी. पीछे से चूतड़ पूरे दिख रहे थे, उसने निघट्य
के नीचे ब्रा नही पहनी थी, उसके निपल्स के नॉकदार पॉइंट सफ़फ़ सफ़फ़ दिखा
रहे थे. मेरा लंड तो शॉर्ट मे ही उछलकूद करने लगा. प्रभा ने कहा
“क्या बात है हॅंडसम, फ्यूज़ उडद गया क्या.” मैने कभी सोचा भी नही
था, की कुछ देर पहेले जिस औरत को मैने देखा था वो कुछ ही पल मे इतनी
मॉडर्न बन जाएगी. मैने कहा “भाभी जुब बिजली की तारे खुली हो तो फ्यूज़ तो
उद्देगा ही ना"

प्रभा: "अक्चा तो आपको बोलना भी आता है, मुझे लगा गंज हो,…
संजय तुम्हे बुरा तो नही लगता ना मेरी बतो का, अकटुली मुझे मज़ाक
करने की बहुत अददात है, और तुम तो मुझे भाभी काहेते हो, इश्स रिस्ते से तो
मुझे हुक़े ही मिल गया है ना तुम्हारी मज़ाक करने का." मई: "बिल्कुल बुरा
नही लगता भाभी, बल्कि बहुत अक्चा लगता है, क्यो की मुझे भी मज़ाक
करना और चत्पति और ख़त्टिंति बाते करना पसंद है."

प्रभा : "अक्चा तो देवेर्जी को मेरी बाते चटपत्ति लगती है, और मई कैसी
लगती हू देवेर्जी, चत्पति या ख़त्ति या फिर मीठी."

मई : "पता नही भाभी, अभी तक आपको चखा ही कहा है, बिना चखे
स्वाद कैसे पता चलेगा, की आप ख़त्ति हो की मीठी या फिर चत्पति हो."

प्रभा : "है रे मेरे भोले बलम, तुम तो बड़े ही चालू निकले, तुम तो
मुझे चखना चाहते हो, तुम्हारी भाभी तो काहेती है की तुम छोटे
हो, लेकिन तुम तो मुज जैसी औरत को चखने तक पहुँच गये, तुम्हारी
भाभी को बताना पड़ेगा."

मई प्रभा भाभी के पीछे पीछे चल दिया, वो आप ने बेडरूम मे घुसी
तो मई डोर पे ही रुक गया, उन्होने कहा, अरे रुक क्यो गये, कोई बात नई आ
जाओ अंडर, मुझे पता है तुम्हे नींद नही आती है, और टीवी तो यही बेडरूम
मे रखा है. जब सोना हो तो चले जाना, वो बाजू वेल कमरे मे
तुम्हारा बेड लगाया हुवा है. नींद तो आएगी ना अकेले, नही आएगी तो आजना
मेरे पास, मुझे कोई प्राब्लम नही है, तुम्हे मेरे पास सुलने से. और
उनके होंटो पे एक सेक्सी मुस्कान फैल गयी. हू बेड पे आधी लेट गयी,
मतलब उनके पैर बेड पे फैला दिए ते और पीठ तकिये से सतकर अद्धलेटी
अवस्था मे वो टीवी देख रही थी, मई बेड पे बिल्कुल उनके पास ही बैठा था,
उन्होने हल्की सी करवट ली, और उनकी मांसल बड़ी बड़ी, गोरी गोरी और चिकनी
जंगे मेरे चूतड़ तो टच करने लगी, मेरा टाइट लंड और ज़्यादा सकक्त्त हो
गया. भाभी ने कहा, की व्क्र पे कोई फिल्म देखते हिया (तब द्वड का जमाना
नही आया था) मैं एक काससेट उठाई और अंडर दल दी, वो कोई सौथिन्डियन
हॉरर फिल्म थी, "प्याससी आट्त्ममा". मैने कहा, अरे यह कैसी फिल्म है तो


प्रभा भाभी ने कहा, "मुझे हॉरर फ़िल्मे देखना पसंद है, इश्स लिए
मई ले आई हू, लाइब्ररी से."

फिल्म शुरू हुवी, उसमे तो एक से बदकार एक सेक्सी सीन थे, फिल्म के शुरू
मे ही एक सेक्सी लड़की शवर के नीचे नहाते हुवे दिख रही थी, उसने
वाइट कलर की सीर्ट जो की उसके आधे जंगो तक थी पहेने हुवी थी, शर्ट बहुत
ही तीन थी. और गीली हो जाने के कारण उसके बदन से चिपक गयी थी, उसने
ब्लॅक ब्रा और बलकक पनटी पहन रखी थी,उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े
थे और निपल छोड़ के बाकी पूरे के पूरे सफ़फ़ सफ़फ़ दिख रहे थे, मई
बड़े ध्यान से देख रहा था, तबी प्रभा भाभी ने आप नी जाँघो का एक
हल्का प्यारा सा ज़्ातका मेरे चूतड़ को लगाया और बोली, "बड़े ध्यान से
देख रहे हो, पसंद आ गयी क्या, अगर कहो तो बुला दे, टीवी से बाहर
निकलवा देंगे उसको आप पके लिए."

मई शर्मा गया.

प्रभा भाभी ने कहा, "एब्ब शर्मा रहे हो, और जब मई नामिता के घर
आई थी तब तो बड़े गौर से उसको देख रहे थे, इसने तो अंडर से कुछ पहना है, नामिता ने तो कुछ भी नही पहना था. तब नही शरम आई
क्या देवेर्जी." मई तो कुछ बोल ही नही पाया. तबी यूयेसेस आक्ट्रेस ने आप नी शर्ट
उतार दी और फिर उसने टवल लपेट लिया और ब्रा आंड पनटी भी उतार के फेंक दी.
एब्ब वो टवल मे ही हॉल मे आ गयी और आईने मे देख के इतरने लगी,
तभी पीछे से फिल्म का हीरो आता है और वो उसको बहो मे भर लेता है.
लड़की शिसकियाँ लेने लगती है.

हीरो के हाथ उसके चूंचियो पे टवल के आप ्पर से ही घूमते हुवे
दिखाया है. तबी लड़की बोली, "छोड़ड़ो ना अभी नही, मई टायर होके बेड पे
आती हून. तुम इंतजार करो ना." हीरो काहेता है "एब्ब इंतजार नही होता,
करने दो ना बड़ा मज़ा आ रहा है" तभी हीरो लड़की का टवल खींचने
लगता है तो लड़की भी आप ना टवल छ्चोड़ देती है, कॅमरा उसके टॅंगो से ले
के जंगो तक और फिर चेहरे से ले की उसके क्लीवेज लाइन तक घूमता है,
और लड़की उसके बाद पलट जाती है, और कॅमरा उसकी पूरी नंगी पीट पे घूमता
है, याने की लड़की पूरी नंगी हो जाती है, जैसे ही हीरो उसको पकड़ने जाता
है, लड़की भाग के रूम मे चली जाती है.तभी फिल्म का हीरो भी रूम के
अंडर चला जाता है और लड़की को गले लगा लेता है, हीरो उसको लिप्स को
चूमता है और उसके बदन पे हाथ घूमता है, फिर वो उसके चूंचियो को
चूमता है, और उसके चूतड़ को दबाता है, लड़की बेड पे गिर जाती है,
हीरो उसके आप ्पर चाड जाता है लड़की पीठ के बाल लेट जाती है हीरो उसकी नंगी
पीठ को चूमता है, फिर वो लड़की सीधी हो जाती है, दोनो एक दूसरे से चिपक
जाते है, फिर लड़के का और लड़की का चेहरे पे कॅमरा होता है, लड़का आयेज
पिछी होते हुवे दिखाया है और लड़की आप ने निचले लिप्स को आप ने दंटो मे
कटती है, और ऐसा मुँह बनती है की उसको बहुत तकलीफ़ हो रही है, वो भी
आयेज पीछे हिलते दिखाई है, फिर कॅमरा उसके हंतो पे जाता है, वो हंतो


मे बेडशीट को कस के पकड़ती है, हीरो आप ने हाथ उसके हाथो पे
रखता है, फिर लड़की ज़ोर से सिसकिया लेती, कॅमरा लड़की की टॅंगो पे जाता है,
उसकी टाँगे फैली हुवी होती है और वो उनको एकदम टाइट करती है, फिर उसकी
टाँगे ढीली पद जाती है, और लड़का भी उसके आप ्पर गिर जाता है. फिर लड़की
मुस्कुराती है और हीरो भी मुस्कुराता है. लड़की का चेहरा पसीने से
लथपथ हुवा होता है. मई यह सारे सीन देखते हुवे टीवी के कफफी
पास पहुँच चुका था, तो प्रभा भाभी ने कहा, "क्या बात है संजय
टीवी मे घुस जाओगे क्या, आस्सा मत करना बहुत पितोगे, हीरो
अभी भी लड़की के आप ्पर लेता हुवा है. और वैसे भी अगर तुम चले भी
गये तो वो तुम्हे हाथ भी नही लगाने देगी. और एक बात बताओ, कैसा लगा
सीन," मैने कहा " प्रभा भाभी, कुछ समझ मे नही आया, किस लेने
तक तो समझ मे आया, लेकिन फिर वो दोनो हिल क्यो रहे थे, और लड़की
बेडशीट पकड़ के होंठ क्यो काट रही थी, ऐसा लग रहा था की कोई ड्र. उसको
इंजेक्षन लगा रहा हो."| प्रभा भाभी बोली "बिल्कुल सही फरमाया देवेर्जी, वो हीरो उसको इंजेक्षन ही
लगा रहा था." मैने कहा "लेकिन भाभी उसके पास तो इंजेक्षन नही था."
एब्ब भाभी कुछ नही बोली, सिर्फ़ इतना कहा की कल आपको बता दूँगी की कैसे
इंजेक्षन दे रहा था.” एब्ब मुजसे कंट्रोल नही हो रहा था. मई आप ने रूम
मे सोने चला गया, देखा तो पता चला की वाहा ना लाइट जल रही है ना
फन चल रहा है, मई भाभी को बताने उनके रूम मे आया, तो अंडर का
नज़ारा देख के डोर पे ही रुक गया. प्रभा भाभी ने आप नी पनटी घुटनो
तक निकल के रखी थी, निघट्य की आप ्पर से दोनो डोर, शोल्डर से उतरी थी और
बूब्स बाहर निकले हुवे थे, भाभी एक हाथ से आप ने ही बूब्स को दबा
रही थी और दूसरे हाथ की उंगली उनकी छूट मे अंडर बाहर कर रही थी, साथ
मे मुँह से ज़ोर ज़ोर की सिसकियाँ निकल रही थी. फिर उन्होने कहा, ऊऊओहूऊ
कामन संजय... दब्ाओ ना ...अहहााअ....... प्लीज़ दब्ाओ ना. बहुत
मज़ा आ रहा है. अहंणन्न्.....सस्स्स्स्स्स्स्शह.... और जोरे से,
उसस्स्स्शह अहाआआआअ. उम्म्म्मममममम, उईमाआ... और साथ ही
साथ भाभी की उंगली का स्पीड भी बदते जा रहा था. मई समझ गया की
भाभी सपना देख रही हाउ और वो भी मेरा. एब्ब भाभी का स्पीड कुछ
ज़्यादा ही बाद गया और उन्होने आप नी दोनो जाँघो के बीच आप नी छूट को
भींच लिया और उंगली अभी भी अंडर बाहर हो रही थी, उनका निचला होन्ट
उनके दंटो मे दबा था और उन्होने जोरे से आप ने बूब्स दबाने शुरू कर
दिए, उनके बड़े बड़े चूतड़ अंडर की और सिकुड गये, मई समझ गया की
एब्ब भाभी ज़्दाने वाली है. फिर भाभी की छूट से लावा जैसे फुट के
बहाने लगा हो. भाभी एकदम से ढीली हो गयी. उनका एक हाथ एब्ब भी
उनकी जाँघो मे दबाए रखा था, और उनके चूतड़ अभी भी सिकुदे हुवे
थे. उनको पता था की मई डोर पे खड़ा हू, बल्कि उन्होने जान बुझ के
मुझे आप नी तरफ खींचने के लिए ही यह सूब किया था. मई डोर से हाथ
गया, और कुछ देर के बाद फिर से डोर पे चला गया, भाभी ने मेरी आहत
सुन ली, जैसे ही मई डोर पे पहुँचा, मेरा पहुँचना और प्रभा
भाभी का पनटी को आप ्पर चाड़ना, दोनो चीज़ो का टाइम एकदम मॅच हो


गया, मई मुस्कुरा दिया तो उन्होने भी मुस्कुरा दिया, लेकिन मेरा ध्यान
कही और अटक गया, जब उन्होने मेरी नज़र का पीछा किया तो उनको पता चला
की उनके रिघ्त साइड की चूंची अभी भी निघट्य से बाहर है और मई उसी को तक
रहा हू. निघट्य की डोर हाथ की कोहनी से नीचे को आ चुकी थी, उन्होने जल्दी
जल्दी चूंची को निघट्य मे अड्जस्ट किया, और मुस्कुराने लगी. मई लौटने लगा
तो बोली, अरे आओ संजय कोई बात नही, कुछ चाहिए था क्या.

मई : भाभी वो मेरे रूम मे लाइट नही है, फन भी नही चल रहा है

प्रभा भाभी ने कहा की चलो देखते है, और हम दोनो मेरे रूम
मे गये, फ़िर्वव किचन मे गयी तो वाहा भी लाइट नही थी, उन्होने कहा,
संजय लगता है एक फ्यूज़ नही चल रहा है, एब्ब चेक भी नही कर सकते
क्यों की मैं बोर्ड के पास भी इसी फ्यूज़ की लाइट है, मॉर्निंग मे चेक
करेंगे, तुम ऐसा करो मेरे साथ सो जाओ. मई : भाभी, आप पके साथ??

प्रभा : हाँ क्यो?? दर लगता है क्या मुजसे?

मई : नई भाभी ऐसी कोई बात नही है, लेकिन आपको कोई प्राब्लम तो
नही है ना.

प्रभा : बिल्कुल नही, तुम बेड के एक कोने मे सो जाना एक कोने मे मई सो
जौंगी, वैसे भी मेरा तो डबल बेड ही है.

फिर मई प्रभा भाभी के साथ सो गया, भाभी की पीट मेरे तरफ थी, मैने
जान बुजके प्रभा भाभी की तरफ मु करा हुवा था. छोटी निघट्य होने के
कारण फन की हवा से भाभी की निघट्य चूतड़ से आप ्पर कमर तक चाड
गयी थी. उनके चूतड़ पूरे खुले थे, बड़े बड़े गोरे गोरे चूतड़,
उनके बीच गहेरी कहयी, और यूयेसेस खाई मे फासी पनटी, गोरी गोरी मांसल
और चिकनी जंगे, यह सूब नज़ारा देख के मेरे तो सारे बदन मे करेंट
दौड़ रहा था, एब्ब मेरा लंड पूरे उफ्फान पे आ गया था, मैने भाभी के
चूतड़ पर मेरा टाइट लंड शॉर्ट के अंडर से ही सता दिया, फिर मैने थोड़ी
देर बाद और तोड़ा आयेज हुवा तो मेरा लंड प्रभा भाभी के दोनो
चूतड़ के बीच की खाई मे तोड़ा सा अंडर की तरफ गया. इश्स बार भाभी
ने थोड़ी हरक़त की, उन्होने आप ने चूतड़ और ज़्यादा मेरे लंड की तरफ सरका
दिए, उनके इस पॉज़िटिव रिप्ले ने मेरे हौसला बाद गया, और मैने आप नी एक
तंग भाभी के कमर और चूतड़ के आप ्पर चड़ा दी, तो भाभी ने आप नी
गांद और मेरे तरफ कर दी, एब्ब भाभी की गांद पूरी तराहा मेरे गोद मे
आ चुकी थी, मैने एब्ब आप ना लंड शॉर्ट से बाहर निकल लिया, और भाभी की
गांद की खाई मे धकेलना शुरू किया, पहेली बार मेरे बड़े लंड का
खुला स्पर्श पा के प्रभा भाभी खुश हो गयी और उन्होने और ज़ोर से
आप नी गांद का जोरे मेरे लंड पे बड़ा दिया, एब्ब मेरा लंड उनके आस होल


को टच होने लगा था, लेकिन मुझे तो उनकी छूट चाहिए थी, मैने उनकी
पनटी नीचे सरका दी, एब्ब मई उनकी पिंक छूट सफ़फ़ महसूस कर रहा था,
पीछे से, बीच मे कटे हुवे छोटे पपीते की तरहा नरम थी उनकी छूट,
एब्ब मैने आप ना हाथ भी भाभी के कंधे के आप ्पर से उनके चूंचियो
पे रख दिया, और धीरे धीरे उनकी निघट्य के अंडर उंगलिया घुसा दी और
उनके निपल्स को मसालने लगा. और मैने साथ ही मेरी एक उंगली भी उनकी
छूट मे हल्के से डालनी शुरू की, वो तड़प उठी, एब्ब मैने आप ना लंड उनके
छूट से सता दिया, उनके बदन मे मानो बिजली दौड़ गयी हो उन्होने आप ने
दोनो चूतड़ अंडर की और सुकूड लिए, मेरा लंड उसके दोनो चूतड़ के
अंडर डब गया, उनके चूतड़ की पकड़ मुझे बहुत आक्ची लगी, अचानक
मैने हल्का धक्का दिया तो मेरा लंड तोड़ा सा छूट के अंडर जाने लगा,
तभी प्रभा भाभी थोड़ी आयेज सरक गयी और आप ने पीठ के बाल सीधी लेट
गयी, उनकी आँखे बंद थी, लेकिन मई जनता था की वो जाग रही है, उनके
बूब्स निघट्य से बाहर आ गये थे, एब्ब मेरा लंड पूरे जोश पे था, और
मानो उसके हाथ से छूट दूर चली जाने से ज़्यादा ही खौल रहा था, मेरी
समझ मे नही आ रहा था क्या करू, तभी भाभी ने आप ना हाथ मेरे
लंड पे दल दिया, और मेरे लंड को पकड़ लिया, वो ऐसा दिखा रही थी की वो
सूब कुछ नींद मे ही कर रही है, फिर उन्होने मेरे लंड को आयेज पीछे करना
शुरू किया, एब्ब मई आउट ऑफ कंट्रोल हो गया और उठाकर उनकी एक चूंची को
मुँह मे ले लिया वो बोहुत गरम हो गयी और उन्होने ज़ोर से मेरे लंड को
दबा दिया, मैने भी उनके निपल को काट लिया, मैने तो सुबह से नामिता
भाभी के नज़ारे देख कर गरम था, उन दोनो की मस्ती ऑरा ब रात मे
प्रभा की सारी हरकत… मेरा लंड लावा उगलने की तय्यरी मे ही था.. और
जैसे ही प्रभा ने मेरे लंड को दो टीन बार ज़ोर से झटका दिया मेरे लंड
से गरमागरम मलाई भाभी की हाथ पे गिर गया, और मेरे काटने से भी
वो चिहुक उठी, और अभी अभी जगाने का नाटक किया, उन्होने देखा की उनके
चूंचिया खुली हैया और मेरे मुँह मे है, उनकी पनटी नीचे को सर्की
हुवी है, और मेरा लंड उनके हंट मे है तो उसने चुंकने का नाटक किया
और बोली, संजय तुम्हे शरम नही आती, मेरे साथ यह सूब कर रहे हो.
मैने तुम्हे छोटा समझ के आप ने पास सोने दिया और तुमने उसका यह
सिला दिया. मई तुमसे उमर मे बड़ी हू और तुम मेरे साथ यह सूब..... मी
गोद मई कभी सपने मे भी नही सोच सकती हू की तुम ऐसे हो. प्रभा भाभी का हाथ अभी भी मेरे लंड को पकड़े हुवे था. मैने
कहा, "भाभी आप ने भी तो मेरा लंड पकड़ के रखा है, और कब से इसके
साथ खेल रही हो. इसका क्या मतल्ब है?, याने की तुम्हे भी यह सूब चाईए,
क्यो सच है ना?

प्रभा : ओ...ओ... तो मई नींद मे थी, मुझे लगा की मेरे पति मेरे साथ
सोए हुवे है.. लेकिन तुम तो जाग रहे थे ना.. फिर तुमने ऐसा क्यो किया.

मई: आप पने जो कपड़े पहने है, वो ना के बराबर है, जब एक जवान
लड़के के सामने आपको इन्न कपड़ो मे रहेने मे शरम नही तो मुझे कहे


की शरम आनी चाहिए भाभी जी"

प्रभा : अच्छा तो एब्ब तुम जवान हो गये हो.. लेकिन मई तो हुमेशा ऐसे
ही रहेती हू घर मे, एब्ब नामिता को बताना पड़ेगा की उसका देवेर जवान
हो गया है, और उसने मेरे साथ क्या क्या किया है.

मई : प्लीज़ प्रभा भाभी, नामिता भाभी से मत कहेना, वरना वो क्या
सोचेगी, और वो तो प्रभा भाभी को भी बता देगी, मई तो कही का नही
रहुगा, मेरी तो बदनामी हो जाएगी.

प्रभा : अक्चा.. जब यह सब कर रहे थे तब नही सोचा यह सूब...
तुम्हारा क्या भरोसा, जो आज मेरे साथ कर रहे थे कल वो नामिता के
साथ भी करोगे, उसको सावधान तो करना पड़ेगा ना संजयजज़्ज्ज्ज्ज्ज्ज.
मई : प्रभा भाभी प्लीज़ मत कहेना यह सब, आप जो कहेगी मई वो
सब करूँगा.

प्रभा : मई कैसे एेकिन करू... की तुम मेरी सारी बाते मनोगे.

मई : आप कहे के तो देखो...

प्रभा: अक्चा.. कुछ भी करोगे.. तो ठीक है.. ज़रा पास आना, मई प्रभा
भाभी के पास गया तो उन्होने आप नी पनटी और नीचे कर दी, और बोली " आप नी
जीभ (जीबे) मेरे छूट मे दल के इसको चतो."

मैने एब्ब चुदाई ज़रूर कीट ही और छूट मे उंगली भी डाली थी लेकिन छूट पर
जीभ नही लगाया कभी. शायद उसे गंदा समझने के कारण..मैने अब
तक ये नही किया है इसलिए मैने कहा “चहिईीईईईई, मई नही करता, मुझे
अच्छा नही लागत है यह सूब भाभी,, आप कुछ और कहो ना मई कर
दूँगा.”. तो उन्होने कहा “ठीक है, ज़मीन पे तुनको और छत के दिखाओ,”
मैने कहा “भाभी आप यह क्या गांडी गांडी बाते कर रही हो.”
तो भाभी ने कहा, "अक्चा तो यह गांडी बाते है, और जो तुम मेरे साथ
कर रहे थे वो अच्छी बात थी. चलो दोनो मे से कुछ भी एक केरके
दिखाओ वर्नगा तुम्हारी नामिता भाभी को मई सूब बता दूँगी.”

इसके बाद क्या हुआ? क्या उसने नामिता भाभी को सब बताया? क्या मुझे
घर से निकाल दिया? क्या प्रभा मुझसे चूड़ी? क्या नामिता भाभी मेरे
लंड को ले पाई
Reply
11-06-2018, 10:34 AM,
#6
RE: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी ब�...
इससे पहले आप पढ़ चुके है की कैसे प्रभा ने मुझे सताया और
मेरे लंड का मज़ाक उड़ते हुए परेशन करती रही.. अब उससे आयेज.. मई
मेरे रीडर्स के और खास कर सेक्सी फीमेल्स के मैल का बेचैनी से इंतेज़ार
कर रहा हून.. इस कहानी का अगला पार्ट किसी सेक्सी फीमेल से दोस्ती के बाद ही
लिखूंगा और सबसे पहले उसे ही भेजूँगा.. इसलिए देखिए कौन सबसे
पहले मेरी दोस्त बनती है और मज़ा लेती है.. अब आयेज..
एब्ब, मैने सोचा इसकी छूट को छत कर वो हालत करूँगा की ये भी याद
रखेगी की किसी छोड़ू से पाला पड़ा था और मैने हामी भर दी.उनकी छूट
को लीक करना ज़्यादा अक्चा संजा थूक के चठने से, तो वो मेरे पास आ
गयी, और मई नीचे बैठ गया और आप ्पर मुँह किया तो उसने आप नी छूट
मेरे मुँह पे रख दी, पहले मैने उसकी छूट होंटो (लिप्स) से चूसना
शुरू किया तो उन्होने मेरा सिर पकड़ लिया और आप नी छूट से सता लिया और
बड़े ज़ोर ज़ोर से आप नी छूट मेरे मुँह पे रगड़ने लगी, एब्ब मैने धीरे
से आप नी जीभ उसकी छूट के अंडर दल दी, उसके मुँह से सिसकियाँ निकालने
लगी.. मेरा लंड बहुत ज़्यादा टाइट हो गया था, मैने दोनो हंतो से उसके
चूतड़ दबाने शुरू कर दिए और जीभ और ज़्यादा अंडर बाहर करने
लगा, वो भी पूरा मज़ा लेने लगी, मैने उसकी छूट के दाने को होंटो मे
लिइया और चूसने लगा.. उसे मज़ा आने लगा था..फिर थोड़ी देर मे वो चिल्लाने
लगी और मेरे मुँह पर छूट को दबाने लगी..”आहह..संजूऊ.. तुम तो
एक्सपर्ट हू..आहह श इतना अच्छा तो किसी ने नही छूसा मुझे…आ
..नामिता को मालूम ही नहियिइ…अरी..अरे..संजूऊुउउ मई गाइिईईईईईईई”.. उसका
बदन सख़्त हो गया और वो झाड़ गयी उसने आप ना सारा पनाई मेरे मुँह
मे छोड़ दिया, उसने मेरे सिर को कस के पकड़ा हुवा था और आप नी छूट से
लगा के रखा था, इश्स लिए मुझे उसका पानी मुँह मे लेने के अलावा कोई और
चारा नही था, उूव क्या टेस्ट था, पहली बार किसी औरत्का इतना स्वादिष्ट
नमकीन पानी पिया था, अगले 2 मिनिट तक प्रभा भाभी वैसे ही मेरे
मुँह पे बैठी रही, फिर मैने उन्हो ज़्ातका दे के दूर फेक दिया. वो नीचे
गिर गयी, उसकी छूट अभी भी गीली थी, और वो आप नी छूट को हल्के हाथो से
सवार रही थी और मेरे तरफ देख के मुस्कुरा रही थी, और बोली, चलो मई
मान गयी की तुम जो मई कहूँगी वो करोगे.

उसकी पिंक छूट जो चूसने के बाद लाल हो चुकी थी, उसे देख के मेरा हाल
बुरा हो गया, और मई वही ज़मीन पे उसके आप ्पर चाड गया, और मेरा लंड
निकाला. उसने पहली बार सामने से मेरा लंड देखा और उसके मुँह से
निकल गया..”बाप रे.. इतना लंबाआ… जान लोगे क्या मेरी.. देखो तो कितना
मोटा है…ये घुसगा कैसे अंदर.?” मैने कुछ कहा नही और उसके पैर
फैलाए और लंड के सूपदे को उसकी छूट से सता दिया, तो उसने मुझे दूर
धकेल दिया और पनटी आप ्पर कर ली और ज़ोर ज़ोर से मुझे चिड़ते हुवे हासणे


लगी, और बोली, “नही प्यारे देवेर्जी यह आप पके लिए नही है, ये लंड लेने की
मेरी ताक़त नही है.. मुझे नही फदवाना मेरी छूट.”, मुझे बहुत घुस्सा
आ रहा था लेकिन कुछ कर भी नही सकता था, और थोड़ी ज़बरदस्ती करने
लगा तो बोली, “संजय क्या मेरा बलात्कार करोगे क्या.?”. बलात्कार वर्ड सुन
के मुझे अक्चा नही लगा और मई वही उसके सामने बेड पे जा के तकिये को
आप नी दोनो जंगो मे दबा के लंड से रगड़ना शुरू किया थोड़ी देर मे मई
ज़्ाद गया. फिर वो मेरे पास आई, तब तक सुबह के 5 बाज चुके थे, ना
उसकी नींद हुवी थी ना मेरी. फिर हम दोनो बेड पे लेट गये, बड़ी मिन्नत
करने पे उसने चिपक के सोने की पर्मिशन दी.
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